आपदा चेतावनी के लिए लगाए गए सायरन 16 किमी तक पहुंचाएंगे आवाज, शहरवासियों को मिलेगा समय पर अलर्ट
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शनिवार को शाम 6 बजे डालनवाला थाने से देहरादून सिटी में लगाए गए 13 आधुनिक लांग रेंज इमरजेंसी सायरन का शुभारंभ करेंगे। इसके बाद शाम 6:30 बजे घंटाघर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री स्मार्ट सिटी के अंतर्गत घंटाघर सौंदर्यीकरण, क्लेक्ट्रेट, कोरोनेशन अस्पताल, गुच्चुपानी व आईएसबीटी में स्थापित 4 हिलांस कैंटीन और बाल भिक्षावृत्ति निवारण कार्यक्रम का लोकार्पण करेंगे।
मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह तैयारियों में जुटा है। शुक्रवार को जिलाधिकारी सविन बंसल और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह ने कार्यक्रम स्थलों का निरीक्षण कर अधिकारियों को व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए।
डीएम ने बताया कि आपातकालीन परिस्थितियों के लिए लगाए गए ये सायरन 8 से 16 किलोमीटर तक की दूरी तक आवाज पहुंचाने में सक्षम हैं। इनका मुख्य उद्देश्य आपदा की स्थिति में लोगों को सचेत करना है। मुख्यमंत्री रिमोट कंट्रोल से सभी 13 सायरनों का एक साथ उद्घाटन करेंगे।
प्रशासन ने लोगों को पहले ही जानकारी दे दी है ताकि सायरन की आवाज सुनकर घबराहट न हो। पहले चरण में 4 स्थानों पर 16 किमी रेंज और 9 स्थानों पर 8 किमी रेंज के सायरन लगाए गए हैं। दूसरे चरण में विकासनगर, डोईवाला, ऋषिकेश और चकराता समेत अन्य क्षेत्रों में भी सायरन लगाए जाएंगे।
घंटाघर कार्यक्रम में मुख्यमंत्री स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत घंटाघर सौंदर्यीकरण का लोकार्पण करेंगे, जिसमें पारंपरिक शैली को बनाए रखते हुए बगीचे, रंगीन फव्वारे और हाई बीम लाइटिंग लगाई गई है।
इसके अलावा, क्लेक्ट्रेट, कोरोनेशन अस्पताल, गुच्चुपानी और आईएसबीटी में आधुनिक हिलांस कैंटीन की शुरुआत होगी, जिन्हें स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से संचालित किया जा रहा है। इन कैंटीनों में हैंडीक्राफ्ट, पहाड़ी उत्पाद और मिलेट व्यंजन उपलब्ध होंगे, जिससे कई लोगों को स्वरोजगार मिला है।
बाल भिक्षावृत्ति निवारण कार्यक्रम के तहत अब तक 56 बच्चों को भीख से मुक्त कर शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा गया है। शनिवार को इन सभी योजनाओं को मुख्यमंत्री जनता को समर्पित करेंगे।
इस मौके पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह, मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, अपर जिलाधिकारी केके मिश्रा, सिटी मजिस्ट्रेट प्रत्यूष सिंह सहित कई अधिकारी तैयारियों की निगरानी में जुटे रहे।
अल्मोड़ा जिला पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों ने ली शपथ
अल्मोड़ा। शुक्रवार को अल्मोड़ा जिला पंचायत कार्यालय में नवनिर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्ष हेमा गैडा और जिला पंचायत उपाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह नेगी ने शपथ ग्रहण की। इनके अलावा जनपद में सभी निर्वाचित जिला पंचायत सदस्यों ने भी शपथ ली।
जिला पंचायत कार्यालय में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में जिलाधिकारी आलोक पांडे ने जिला पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसके बाद नवनियुक्त जिला पंचायत अध्यक्ष हेमा गैड़ा ने सभी सदस्यों को शपथ ग्रहण कराई।
इस अवसर पर कार्यक्रम की मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में जिला पंचायत की महत्वपूर्ण भूमिका होने वाली है इसलिए नवनिर्वाचित प्रतिनिधि अपने नए दायित्व को पूरी जिम्मेदारी और गंभीरता से निभाएं।
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों को विकास कार्यों के लिए जहां आवश्यक हो वहां उनके पूरे सहयोग और समर्थन का भरोसा दिलाया।
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य ने कहा कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में प्रदेश की जनता ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी का जोर-जोर से समर्थन किया और इसी के चलते प्रदेश के ज्यादातर जनपदों में भाजपा को बड़ी जीत मिली।
इस अवसर पर जागेश्वर विधायक मोहन सिंह महरा, जिला अध्यक्ष महेश नयाल, प्रदेश उपाध्यक्ष कैलाश शर्मा, पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथ चौहान, अल्मोड़ा मेयर अजय वर्मा, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष पार्वती मेहरा, रानीखेत जिला अध्यक्ष घनश्याम भट्ट, जिला पंचायत सदस्य भुवन जोशी, त्रिलोक रावत, नीमा आर्या, हिमानी कुंडू आदि उपस्थित रहे।
10 सेना राइडर्स और 14 नागरिक राइडर्स के साथ यह अभियान शिमला और सुमडो होते हुए लेह तक जाएगा
देहरादून। भारतीय सेना ने आज साहस और रोमांच के प्रतीक स्वरूप ‘सुर्या क्वेस्ट मोटरसाइकिल अभियान’ का शुभारंभ किया। यह अभियान रॉयल एनफील्ड के सहयोग से आयोजित किया गया और इसे लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता, जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, सुर्या कमांड द्वारा ध्वज दिखाकर रवाना किया गया।
इस अभियान में 10 भारतीय सेना के राइडर्स और 14 नागरिक राइडर्स शामिल हैं। ये राइडर्स साहस, एकता और पारस्परिक विश्वास का संदेश लेकर देशभर की यात्रा करेंगे। दल का मार्ग शिमला और सुमडो की सुरम्य घाटियों से होकर लेह तक जाएगा।

भारतीय सेना ने इस पहल के माध्यम से राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने, साहसिक खेलों को बढ़ावा देने और युवाओं में धैर्य, टीमवर्क व सेवा की भावना विकसित करने की प्रतिबद्धता जताई है।
इस अवसर पर मेजर जनरल नवीन महाजन, सेना मेडल, जनरल ऑफिसर कमांडिंग, 14 इन्फैंट्री डिवीजन, ब्रिगेडियर पी.जे. प्रभाकरण, स्टेशन कमांडर क्लेमेंट टाउन, ब्रिगेडियर आर.के. सिंह, ब्रिगेड कमांडर, 14 आर्टी ब्रिगेड, ब्रिगेडियर संदीप मदान सहित कई वरिष्ठ अधिकारी, जेसीओ और सैनिक उपस्थित रहे।
सुर्या क्वेस्ट मोटरसाइकिल अभियान न केवल सेना और राइडर्स की अदम्य भावना का उत्सव है, बल्कि यह भारतीय सेना और राष्ट्र के बीच अटूट बंधन को भी उजागर करता है।
उत्तराखंड के शिक्षा और संस्कृति क्षेत्र में डिजिटल नवाचार को मिलेगा बढ़ावा
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय से हैलो हल्द्वानी 91.2 एफ.एम. सामुदायिक रेडियो मोबाइल एप का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि यह उत्तराखंड के शिक्षा और संस्कृति क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल है। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय ने शिक्षा को दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुँचाने और आधुनिक तकनीक से नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अब सामुदायिक रेडियो हैलो हल्द्वानी एप देश और प्रदेश के प्रत्येक कोने तक पहुँचकर समाज एवं संस्कृति की आवाज़ को और अधिक सशक्त करेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का साधन नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने और आत्मनिर्भरता का आधार है। इसी सोच के तहत प्रदेश के सभी 13 जनपदों में उच्च शिक्षा एवं कौशल विकास केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे युवा न केवल शिक्षा प्राप्त करेंगे, बल्कि रोजगारपरक कौशल भी सीख सकेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब विश्वविद्यालय और कौशल विकास केंद्र मिलकर कार्य करेंगे तो उत्तराखंड के युवा नौकरी खोजने वाले नहीं बल्कि नौकरी देने वाले बनेंगे, और यह प्रयास प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने में राज्य की अहम भूमिका सुनिश्चित करेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने देहरादून में उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय का एक प्रमुख केंद्र स्थिपित करने का निर्णय लिया है। यह केंद्र न केवल शिक्षा एवं प्रशिक्षण का हब होगा, बल्कि शोध, नवाचार और डिजिटल शिक्षा का भी प्रमुख केंद्र बनेगा।
उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी ने विश्वविद्यालय की विभिन्न गतिविधियों से अवगत कराया और आपदा राहत के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष हेतु विश्वविद्यसलय की ओर से 01 लाख 49 हजार का चेक मुख्यमंत्री को प्रदान किया।
इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, महानिदेशक यूकॉस्ट प्रो. दुर्गेश पंत, कुलसचिव उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय श्री खेमराज भट्ट और विश्वविद्यालय के अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।
कृषि मंत्री गणेश जोशी ने अधिकारियों को प्रतिदिन नुकसान की रिपोर्ट देने और कागजी कार्यवाही तुरंत पूरा करने के निर्देश दिए
देहरादून। प्रदेश के कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने आज अपने कैंप कार्यालय में कृषि एवं उद्यान विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर अतिवृष्टि से किसानों की फसलों को हुए नुकसान की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने फसलों को हुए नुकसान की विस्तार से जानकारी ली।
कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि फसलों के नुकसान का नियमित रूप से सर्वेक्षण कर प्रतिदिन रिपोर्ट मंत्रालय को उपलब्ध कराई जाए। कृषि मंत्री ने अधिकारियों से स्पष्ट कहा कि भारत सरकार के मानकों के अनुसार शीघ्र कागजी कार्यवाही पूरी कर किसानों को मुआवजा उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि आपदा से प्रभावित कृषकों को तुरंत राहत मिलना सरकार की पहली प्राथमिकता है।
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में अतिवृष्टि से औद्यानिक फसलों को 12,272.74 हेक्टेयर क्षेत्रफल में नुकसान हुआ है। इनमें से 33 प्रतिशत से अधिक क्षति श्रेणी में कुल क्षेत्रफल 4,797.49 हेक्टेयर दर्ज किया गया है, जिसमें सिंचित क्षेत्र 1,394.90 हेक्टेयर और असिंचित क्षेत्र 3,402.66 हेक्टेयर शामिल हैं। उत्तरकाशी जिले के भटवाड़ी विकासखंड के धराली ग्रामसभा में औद्यानिक फसलों की क्षति का क्षेत्रफल 6.10 हेक्टेयर दर्ज किया गया।
इसी प्रकार कृषि फसलों को प्रदेश में 339.47 हेक्टेयर क्षेत्रफल में नुकसान हुआ है, जिनमें 33 प्रतिशत से अधिक क्षति की श्रेणी का क्षेत्रफल कुल 45 हेक्टेयर दर्ज किया गया। अधिकारियों ने बताया कि यह नुकसान भारत सरकार के आपदा मानकों के अनुसार 33 प्रतिशत से अधिक है और मुआवजा वितरण की श्रेणी में आता है। विभागीय अधिकारियों द्वारा यह भी बताया गया कि तराई क्षेत्र में जनपद हरिद्वार और उधमसिंह नगर के खटीमा में खेतों में जल भराव के कारण आंकलन नहीं हो पाया है जो शीघ्र ही किया जाएगा।
कृषि मंत्री जोशी ने अधिकारियों को कहा कि प्रभावित किसानों को राहत पहुंचाने में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार संकट की इस घड़ी में किसानों के साथ खड़ी है और शीघ्र ही मुआवजा वितरण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
बैठक में कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक दिनेश कुमार और निदेशक बागवानी मिशन महेंद्र पाल उपस्थित रहे।
अपर जिलाधिकारी ने निरीक्षण कर अधिकारियों को आवश्यक सुविधाएँ बहाल करने के निर्देश दिए
उत्तरकाशी। यमुनोत्री हाईवे लगातार बारिश के कारण 13वें दिन भी बंद है, जिससे तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्यानाचट्टी से आगे चार स्थानों पर मार्ग बंद होने के कारण हाईवे खोलने का काम धीमा चल रहा है, जबकि जंगलचट्टी में पहाड़ी से गिरते बोल्डरों ने सड़क खोलने की प्रक्रिया को और जटिल बना दिया है।
सड़क मार्ग बंद होने से यमुनोत्री धाम और गीठ पट्टी के कई गांवों में राशन और अन्य आवश्यक सामग्रियों की आपूर्ति बाधित हो गई है। वहीं पिछले छह दिनों से बिजली और मोबाइल नेटवर्क सुविधा भी ठप पड़ी है, जिससे स्थानीय लोग अंधेरे में रातें गुजार रहे हैं और संचार में कठिनाई का सामना कर रहे हैं।
स्थानीय नेताओं और ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द हाईवे खोलने और बिजली आपूर्ति बहाल करने की मांग की है। इसके साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में रसोई गैस सिलेंडर और अन्य आवश्यक सामग्री पहुँचाने का भी अनुरोध किया गया है।
अपर जिलाधिकारी मुक्ता मिश्र ने स्यानाचट्टी क्षेत्र का निरीक्षण कर अधिकारियों को समन्वय बनाकर आवश्यक सुविधाएँ जल्द बहाल करने के निर्देश दिए हैं।
खोखले हुए मकान और धंसते रास्तों के कारण ग्रामीणों में दहशत
चमोली। भारी बारिश के कारण तहसील जिलासू के पिंडर घाटी में जनजीवन प्रभावित हो गया है। कई गांवों में पैदल रास्ते धंस गए, मकानों में दरारें पड़ीं और पौराणिक जल स्रोत भी भूस्खलन की चपेट में आ गए।
सगवाड़ा गांव में हुई भारी बारिश से एक मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, जबकि 15 अन्य परिवार खतरे में आ गए। इन परिवारों को पंचायत घर और अन्य सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया। बीती 22 अगस्त को भी इसी गांव में भूस्खलन के कारण एक मकान गिर गया था, जिसमें एक युवती की मौत हो गई थी।
राड़ी गांव में घांघली गदेरे के उफान से कई ग्रामीण भयभीत हैं। जगदीश पंत, दिनेश पंत, मदन मोहन और मंजू गोसाई ने बताया कि उनके मकान नीचे से खोखले हो गए हैं और कभी भी गदेरे में बह सकते हैं।
एसडीएम पंकज भट्ट ने बताया कि सगवाड़ा गांव में मलबे में दबे मकान में फिलहाल कोई नहीं था। खतरे को देखते हुए प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया गया है।
बारिश के चलते तहसील के गांवों में तबाही का सिलसिला अभी थमने का नाम नहीं ले रहा है।
सबसे ज्यादा क्षति सड़कों और पुलों को, लोक निर्माण विभाग को अकेले 1164 करोड़ का नुकसान
देहरादून। प्रदेश में इस साल प्राकृतिक आपदाओं ने भारी तबाही मचाई है। आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक अब तक 5700 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान आंका गया है। राज्य सरकार ने विस्तृत रिपोर्ट गृह मंत्रालय को भेजते हुए केंद्र से विशेष आर्थिक पैकेज की मांग की है। आपदा से सबसे ज्यादा असर सड़क और पुलों पर पड़ा है, जिससे लोक निर्माण विभाग को ही 1164 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान उठाना पड़ा।
आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि 5702.15 करोड़ रुपये की विशेष सहायता केंद्र से मांगी गई है। इसमें जहां क्षतिग्रस्त परिसंपत्तियों के पुनर्निर्माण के लिए 1944.15 करोड़ रुपये की आवश्यकता है, वहीं भविष्य में आपदा से होने वाले संभावित नुकसान को रोकने और अवस्थापना संरचनाओं को स्थिर करने के लिए 3758 करोड़ रुपये का अनुरोध किया गया है।
विभागवार नुकसान
प्राकृतिक आपदा से विभिन्न विभागों को सीधा नुकसान पहुंचा है। इनमें लोक निर्माण विभाग को 1163.84 करोड़, सिंचाई विभाग को 266.65 करोड़, ऊर्जा विभाग को 123.17 करोड़, स्वास्थ्य विभाग को 4.57 करोड़, विद्यालयी शिक्षा विभाग को 68.28 करोड़, उच्च शिक्षा विभाग को 9.04 करोड़, मत्स्य विभाग को 2.55 करोड़, ग्राम्य विकास विभाग को 65.50 करोड़, शहरी विकास विभाग को 4 करोड़, पशुपालन विभाग को 23.06 करोड़ और अन्य विभागों को लगभग 213.46 करोड़ का नुकसान हुआ है।
5 महीने में 79 मौतें, 90 लापता
रिपोर्ट के अनुसार, 1 अप्रैल से 31 अगस्त 2025 तक आपदा से 79 लोगों की मौत, 115 लोग घायल और 90 लोग लापता हुए हैं।
हजारों मकान क्षतिग्रस्त
आपदा में 238 पक्के और 2 कच्चे मकान पूरी तरह ध्वस्त हो गए, जबकि 3237 मकानों को आंशिक क्षति पहुंची। इनमें 2835 पक्के और 402 कच्चे मकान शामिल हैं। इसके अलावा 3953 छोटे-बड़े पशुओं की मौत भी दर्ज की गई है।
व्यवसायिक प्रतिष्ठान भी प्रभावित
आपदा का असर आम लोगों के जीवन के साथ-साथ व्यापारिक गतिविधियों पर भी पड़ा। बड़ी संख्या में दुकानें, होटल, होमस्टे, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक भवन बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
प्रदेश के सभी जिलों में बनेगा वृद्धाश्रम, 6 लाख बुजुर्गों को डीबीटी से पेंशन
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सेवक संवाद के तहत वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के साथ संवाद किया। इस अवसर पर उन्होंने दिव्यांग शादी अनुदान एवं राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना का सॉफ्टवेयर लॉच किया एवं समाज कल्याण विभाग द्वारा विभिन्न योजनाओं के तहत दी जा रही पेंशन की इस वित्तीय वर्ष की 5वीं किश्त का ऑनलाइन भुगतान किया।
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान घोषणा की कि दिव्यांग युवक-युवती से विवाह करने पर प्रोत्साहन अनुदान धनराशि 25 हजार रूपये से बढ़ाकर 50 हजार रूपये किया जायेगा। दिव्यांग छात्रवृत्ति योजनान्तर्गत कक्षा 1 से कक्षा 8 तक के दिव्यांग छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति हेतु आय सीमा को समाप्त किया जायेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी जनपदों में एक-एक वृद्धाश्रम की व्यवस्था की जायेगी।
मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित कार्यक्रम मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वरिष्ठ नागरिक एवं दिव्यांगजनों का स्वागत करते हुए कहा कि आप सबके आशीर्वाद से ही उन्हें राज्य के मुख्य सेवक के रूप में कार्य करने की ऊर्जा मिलती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संवाद के पीछे भी उनका यही मंतव्य था कि वो सबकी समस्याओं, आवश्यकताओं को सीधे तौर पर जान सकें, जिससे उनके समाधान के लिए और अधिक ठोस कदम उठाए जा सकें। कहा कि कई बार सरकार के स्तर पर नीतियाँ और योजनाएँ तो बन जाती हैं, परन्तु उन योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी मिल पाता है जब वे जमीनी स्तर तक पूरी पारदर्शिता और ईमानदारी से पहुँचें। साथ ही लाभार्थी भी ये महसूस करें कि सरकार ने उनकी ज़िंदगी को आसान और बेहतर बनाने का कार्य किया है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में दिव्यांगजनों एवं वरिष्ठ नागरिकों के सशक्तिकरण के निरंतर प्रयास किए जा रहें हैं। प्रधानमंत्री ने ही सर्वप्रथम “विकलांग” की जगह “दिव्यांग” शब्द को अपनाकर दिव्यांगजनों में आत्मसम्मान का संचार करने का महत्वपूर्ण कार्य किया।
आज प्रधानमंत्री के नेतृत्व में दिव्यांग सशक्तिकरण अधिनियम 2016, सुगम्य भारत अभियान, ए.डी.आई.पी. योजना, दीनदयाल दिव्यांगजन पुनर्वास योजना, दिव्यांगजन स्वालम्बन योजना तथा दिव्यांगजन छात्रवृत्ति एवं पेंशन योजना जैसी अनेकों योजनाओं के माध्यम से दिव्यांगजनों के कल्याण हेतु ठोस प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की प्रेरणा से प्रदेश सरकार द्वारा राज्य में 96 हज़ार से अधिक दिव्यांगजनों को पेंशन प्रदान की जा रही है। जहां एक ओर 18 वर्ष से अधिक आयु के 86 हज़ार से अधिक दिव्यांगजनों को 1500 रुपए की मासिक पेंशन प्रदान की जा रही है, वहीं 18 वर्ष से कम आयु के 8 हज़ार से अधिक दिव्यांग बच्चों के भरण-पोषण एवं देखभाल हेतु प्रतिमाह 700 रुपए की आर्थिक सहायता भी प्रदान की जा रही है।
इसके साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि कार्य के दौरान दिव्यांग हुए लोगों को तीलू रौतेली पेंशन योजना के अंतर्गत प्रतिमाह 12 सौ रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान करने के साथ ही, 4 फुट से कम ऊँचाई वाले व्यक्तियों को बौना पेंशन के माध्यम से प्रतिमाह 12 सौ रुपए भी प्रदान किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में “दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन योजना” के अंतर्गत दिव्यांग व्यक्ति से विवाह करने पर 25 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जा रही है। आज इस योजना से जुड़े सॉफ्टवेयर के लोकार्पण से योजना का लाभ पारदर्शिता के साथ पात्र लाभार्थियों को मिल सकेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक दिन पहले ही देहरादून में प्रधानमंत्री दिव्याशा केंद्र का शुभारंभ किया गया है। जहां दिव्यांगजनों विशेष रूप से दिव्यांग बच्चों को Early Intervention की सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार आने वाले समय में ऐसे दिव्याशा केंद्र राज्य के समस्त जनपदों में खोलने का प्रयास कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज इस योजना के अंतर्गत राज्य के लगभग 6 लाख वृद्धजनों को डीबीटी के माध्यम से पेंशन की राशि सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की जा रही है। इसके साथ ही सरकार राज्य के सभी जनपदों में वृद्धाश्रमों की व्यवस्था भी सुदृढ़ कर रही है। वर्तमान में बागेश्वर, चमोली और उत्तरकाशी में राजकीय वृद्धाश्रम संचालित हो रहे हैं, जबकि देहरादून, अल्मोड़ा और चम्पावत में नए भवन निर्माणाधीन हैं। इसके अतिरिक्त, हरिद्वार, उधमसिंह नगर और नैनीताल सहित विभिन्न क्षेत्रों में गैर-सरकारी संगठनों द्वारा संचालित वृद्धाश्रम भी कार्यरत हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने बदलते समय के साथ रिश्तों में आई चुनौतियों को देखते हुए वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए राज्य में माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिनियम लागू किया है। इसके माध्यम से हमारे बुजुर्गों को यह कानूनी अधिकार प्राप्त हो जाता है कि वे अपने बच्चों या कानूनी उत्तराधिकारियों से भरण-पोषण की मांग कर सकें। उन्होंने वरिष्ठजनों को विश्वास दिलाते हुए कहा कि आपका ये बेटा कभी आपके सम्मान, सुरक्षा और सुविधाओं में किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं आने देगा।
कार्यक्रम के दौरान कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक खजानदास, सविता कपूर, मेयर सौरभ थपलियाल, उपाध्यक्ष वरिष्ठ नागरिक कल्याण परिषद नवीन वर्मा,शांति मेहरा, सचिव समाज कल्याण श्रीधर बाबू अदह्यांकी, अपर सचिव प्रकाश चन्द्र, निदेशक समाज कल्याण चन्द्र सिंह धर्मशक्तू, निदेशक जनजाति कल्याण संजय टोलिया उपस्थित रहे।
सीएम धामी बोले— नारी शक्ति के बिना अधूरी है उत्तराखंड की प्रगति
देहरादून। सर्वे चौक स्थित आईआरडीटी सभागार में आयोजित राज्य स्त्री शक्ति, तीलू रौतेली एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाली 13 महिलाओं को तीलू रौतेली पुरस्कार और 33 आंगनवाड़ी कार्यकर्तात्रियों को उनके उत्कृष्ट सेवा कार्य के लिए सम्मानित किया।
इस मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वीरांगना तीलू रौतेली को नमन करते हुए कहा कि, तीलू रौतेली ने महज 15 वर्ष की उम्र में अपने रण कौशल से विरोधियों को परास्त किया। जिस उम्र में बच्चे खेलना, कूदना और पढ़ना सीखतें हैं, उसी उम्र में तीलू रौतेली ने अदम्य साहस और वीरता का परिचय दिया। इसलिए वीरांगना तीलू रौतेली को उत्तराखंड की झांसी की रानी कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी “नारी तू नारायणी” के मंत्र के साथ मातृशक्ति के कल्याण एवं सशक्तिकरण के लिए कार्य कर रहे है।
संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने की बात हो या बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान, उज्ज्वला योजना, लखपति दीदी योजना, केंद्र सरकार हर तरह से महिलाओं को सशक्त बना रही है, इसी तरह ट्रिपल तलाक जैसी कुप्रथा को समाप्त करके भी प्रधानमंत्री श्री मोदी ने देश की महिलाओं को सामाजिक तौर पर मजबूत किया है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में राज्य सरकार भी मातृशक्ति के कल्याण के लिए समर्पित होकर कार्य कर रही है। इसी क्रम में राज्य सरकार ने जहां महिलाओं के लिए सरकारी सेवाओं में 30 प्रतिशत आरक्षण लागू किया है। वहीं महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए देश में सर्वप्रथम “समान नागरिक संहिता” को लागू करने का ऐतिहासिक कार्य किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार “मुख्यमंत्री लघु उद्योग प्रोत्साहन योजना” और “उद्यमिता विकास कार्यक्रम” जैसी योजनाओं के माध्यम से भी मातृशक्ति को सशक्त बनाने का प्रयास कर रही है। महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए महिला स्वयं सहायता समूहों को 5 लाख रुपये तक का ब्याज-मुक्त ऋण प्रदान किया जा रहा है। राज्य सरकार ने वर्ष 2023 से तीलू रौतेली पुरस्कार राशि 31 हजार रुपए से बढ़ाकर 51 हजार और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पुरस्कार धनराशि 21 हजार रुपए से बढ़ाकर 51 हजार कर दी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों के शुरुआती चरण के विकास में आंगनवाड़ी केंद्रों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ग्रामीण इलाकों में माता-पिता के बाद बच्चों को संस्कार और प्रारंभिक शिक्षा देने की शुरुआत आंगनवाड़ी केंद्रों से ही होती है। उनके दोनों बच्चों ने भी अपनी प्रारंभिक शिक्षा और संस्कार आंगनवाड़ी से ही प्राप्त किए हैं। इसलिए राज्य सरकार ने आंगनवाड़ी, मिनी आंगनवाड़ी बहनों और सहायिकाओं को सशक्त बनाने के लिए उनके मानदेय में वृद्धि की है। पहले जहां आंगनवाड़ी बहनों को 7500 रुपए का मानदेय मिलता था, उन्हें अब 9300 रुपए कर दिया गया है। इसी तरह अब मिनी आंगनवाड़ी को 4500 के बजाय 6250 और सहायिकाओं को 3550 के बजाय 5250 रुपए का मानदेय मिलता है। इसके साथ ही आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को सुपरवाइज़र के पद पर पदोन्नति दिए जाने का भी प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आगे भी महिलाओं के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए पूरी शक्ति, निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य करते रहेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा राज्य की महिलाओं के पास क्षमता और योग्यता की कमी नहीं है। महिला स्वयं सहायता समूहों के बनाए हाउस ऑफ हिमालयाज के उत्पाद, बहुराष्ट्रीय कंपनियों को भी मात दे रहे हैं। इसलिए वो हमेशा महिला समूहों को प्रोत्साहन देने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाबा केदार की धरती से कहा था कि, 21वीं शताब्दी का तीसरा दशक, उत्तराखंड के नाम होने जा रहे हैं, इस क्रांति में महिला समूहों की अहम भूमिका होने जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वैसे यह कार्यक्रम पहले आठ अगस्त को आयोजित होना था, लेकिन आपदा के कारण तब आयोजन संभव नहीं हो पाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश इस समय आपदाओं से घिरा हुआ है, सरकार आपदा प्रभावितों तक हर संभव तरीके से पहुंचने का प्रयास कर रही है, इस काम में केंद्र सरकार का भी सहयोग मिल रहा है।
इस मौके पर विभागीय मंत्री रेखा आर्य ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने महिलाओं के कल्याण के लिए कई कदम उठाए हैं। आगंनवाड़ी कार्यकत्रियों का मानदेय बढ़ाने का एतिहासिक कार्य भी धामी सरकार ने किया। आयोजन में विधायक खजान दास, सचिव चंद्रेश कुमार, निदेशक बंशीलाल राणा सहित बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं।
इन्हें मिला तीलू रौतेली पुरस्कार
अल्मोडा से मीता उपाध्याय, बागेश्वर से अलिशा मनराल, चमोली से सुरभि, चम्पावत से अनामिका बिष्ट, देहरादून से शिवानी गुप्ता, हरिद्वार से रूमा देवी, नैनीताल से नैना, पौड़ी गढ़वाल से रोशमा देवी, पिथौरागढ से रेखा भट्ट, रूद्रप्रयाग से हेमा नेगी करासी, टिहरी गढवाल से साक्षी चौहान, ऊधमसिंह नगर से रेखा और उत्तरकाशी से विजयलक्ष्मी जोशी।
