पूर्वांचल के बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी पर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार का शिकंजा कसता जा रहा है। गुरूवार की सुबह लखनऊ के डालीबाग में मुख्तार अंसारी के अवैध भवनों पर लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) का बुलडोजर गरजा और उन्हें ध्वस्त कर दिया गया। लखनऊ प्रशासन ने इस बारे में बयान जारी करते हुए कहा है, ‘डालीबाग कॉलोनी के पास गैंगस्टर मुख्तार अंसारी की अवैध रूप से स्वामित्व वाली संपत्ति को ध्वस्त कर दिया है। उससे तोड़फोड़ के खर्चों की वसूली की जाएगी। एफआईआर दर्ज की जाएगी। जिन अधिकारियों के अधीन यह अवैध निर्माण हुआ, उनकी जिम्मेदारी तय की जाएगी और उन पर भी कार्रवाई की जाएगी।’
गुरूवार को धवस्त किये गए अवैध निर्माण करीब दस हज़ार वर्ग क्षेत्रफल में बने थे। ये मुख्तार अंसारी के बेटों अब्बास अंसारी व उमर अंसारी के नाम दर्ज हैं। एलडीए ने इन्हें धवस्त करने का आदेश 11 अगस्त को दिया था। अवैध कब्जे को खाली कराने के लिए एलडीए, पुलिस और प्रशासन की टीम तड़के सुबह भारी फोर्स और जेसीबी मशीनों के साथ पहुंची। टीम ने गेट का ताला तोड़कर और वहां बने निर्माण से सामान निकाल कर कार्रवाई शुरू कर दी। उस दौरान मुख्तार अंसारी के बेटों ने विरोध करने का प्रयास किया। मगर पुलिस बल ने उन्हें खदेड़ दिया।
उल्लेखनीय है कि मऊ से बसपा विधायक मुख्तार अंसारी वर्तमान में पंजाब की जेल में बंद है। पूर्वांचल क्षेत्र में अपराध की दुनिया में लम्बे समय से उसकी बादशाहत कायम है। योगी आदित्य नाथ की सरकार लगातार उस पर शिंकजा कसने में लगी हुयी है। अंसारी की उत्तर प्रदेश में विभिन स्थानों पर कब्जाई गयी जमीनों को खाली कराने के अलावा योगी सरकार ने उसकी गैंग के कई अपराधियों को जिला बदर किया है। अंसारी के करीबी कई लोगों के शस्त्र लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई की गयी है।
यूपी भाजपा ने ट्वीट कर कहा योगी मतलब कानून का राज
उधर, उत्तर प्रदेश भाजपा ने #योगी_मतलब_कानून_का_राज हैशटैग पर सिलसिलेवार कई ट्वीट कर योगी सरकार द्वारा मुख़्तार अंसारी गैंग के खिलाफ की गयी कार्रवाइयों का ब्यौरा दिया है। एक ट्ववीट में कहा कि ”पुरानी सरकारों ने जिस अतीक अहमद और मुख़्तार अंसारी को पाला आज योगी सरकार उन्हें जड़ से ख़त्म करने में जुटी है। लखनऊ में मुख़्तार की बिल्डिंग ढहा कर योगी सरकार ने यह साबित कर दिया”। एक अन्य ट्वीट में कहा गया है कि ” वाराणसी जोन के जनपदों में माफिया मुख़्तार अंसारी गैंग आईएस- 191 पिछले लगभग 03 दशक से सक्रिय होकर आंतक का पर्याय बना हुवा था। जिसके आगे पिछली सरकारों ने घुटने टेक रखे थे, लेकिन योगी सरकार इसका सफाया कर रही है। एक ट्वीट में कहा गया है कि एक संत ने अपराधियों को अपने आगे झुका कर दिखा दिया और पूरा विपक्ष देखता रह गया।
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने बच्चों, व्यक्तियों और संस्थाओं से प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार-2021 के लिए नामांकन आमंत्रित किये हैं। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार की स्थापना देश के मेधावी बच्चों, व्यक्तियों और संस्थाओं को सम्मानित करने के लिए की गई थी। ये पुरस्कार दो श्रेणियों के अंतर्गत दिए जाते हैं- बाल शक्ति पुरस्कार और बाल कल्याण पुरस्कार।
इन पुरस्कारों को भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रत्येक वर्ष गणतंत्र दिवस से पहले के सप्ताह में राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में प्रदान किया जाता है। प्रधानमंत्री द्वारा भी पुरस्कार विजेताओं को सम्मानित किया जाता है। बाल शक्ति पुरस्कार के विजेता, नई दिल्ली के राजपथ पर 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस परेड में भी हिस्सा लेते हें।
बाल शक्ति पुरस्कार का उद्देश्य नवाचार, शैक्षणिक, खेल, कला और संस्कृति, समाज सेवा और बहादुरी सहित विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण कार्य करने वाले बच्चों को मान्यता प्रदान करना है, वहीं बाल कल्याण पुरस्कार उन व्यक्तियों और संस्थाओं को मान्यता प्रदान करने के लिए दी जाती है, जिन्होंने बच्चों की सेवा करने के लिए बाल विकास, बाल संरक्षण और बाल कल्याण के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान दिया है।
इसके विस्तृत दिशा-निर्देशों को www.nca-wcd.nic.in पर पुरस्कारों के लिए विशेष वेबसाइट पर देखे जा सकते हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार केवल ऑनलाइन आवेदन पत्रों पर ही विचार किया जाएगा। किसी अन्य माध्यम से प्रस्तुत किए गए आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा। पोर्टल तक पहुंचने में किसी प्रकार की दिक्कत आने पर इसे मंत्रालय के संज्ञान में लाया जाना चाहिए। इस वर्ष आवेदन प्राप्त करने की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 15 सितम्बर कर दिया गया है।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी निजी संस्थान द्वारा भारतीय बाल कल्याण परिषद (ICCW) राष्ट्रीय वीरता पुरस्कारों के नाम पर प्रदान किए गए कुछ पुरस्कारों को मंत्रालय की ओर से मान्यता प्राप्त नहीं की गई है और यह किसी भी प्रकार से उनसे जुड़ा हुआ नहीं है।
कांग्रेस में राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर जारी घमासान के बीच मंगलवार को वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल के एक ट्वीट ने यह साफ़ कर दिया है कि पार्टी गंभीर संकट से जूझ रही है। सिब्बल का यह ट्वीट बगावती तेवर प्रदर्शित करता दिखाई दे रहा है।
सोमवार को कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में सोनिया गाँधी को अंतरिम अध्यक्ष चुने जाने के बाद फिलहाल यह मामला कुछ हद तक शांत होता दिखाई दे रहा था। मगर आज सिब्बल ने एक ट्वीट किया है। ट्वीट में उन्होंने कहा है कि – यह किसी पद की बात नहीं है। यह मेरे देश की बात है जो सबसे ज्यादा मायने रखता है‘। सिब्बल के ट्वीट के बाद कांग्रेस की अंदरूनी राजनीती के स्वाभाविक तौर पर गरमाने के आसार हैं। उनके ट्वीट के अंदाज को बगावती माना जा रहा है।
गौरतलब है कि सिब्बल ने कल भी नाराजगी से भरा एक ट्वीट किया था। मगर राहुल गाँधी से बातचीत के बाद उन्होंने यह ट्वीट डिलीट कर दिया था। तब यह समझा जा रहा था की मामला सुलटा लिया गया है। सोमवार को ट्वीट करने के बाद सिब्बल ने ट्विटर हैंडल पर अपने परिचय में से कांग्रेस शब्द भी हटा दिया था। यहाँ यह भी बता दें की कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक से पहले पार्टी के तमाम बड़े नेताओं ने सोनिया गाँधी को एक पत्र लिखा था, जिसमें पार्टी संगठन में बदलाव की जरुरत बताई गयी थी। इस पत्र के बाद से कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में उछाड़-पछाड़ के हालात बने हुए हैं।
इधर, सिब्बल के ट्वीट पर यूजर्स ने कई तरह की टिप्पणियां की हैं। किसी ने पूछा है सिब्बल जी किस देश की बात कर रहे हैं ? इटली। किसी ने उनके ट्वीट को उनका मजाकिया अंदाज बताया तो किसी उन्हें भाजपा का एजेंट कहा। किसी ने कांग्रेस को लेकर सिब्बल की निष्ठा पर सवाल खड़े किये हैं तो, कुछ लोगों ने उनको गाँधी परिवार की गुलामी छोड़ कर कांग्रेस से नाता तोड़ने की सलाह दी है।
उभयलिंगी व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 की धारा 16 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए केंद्र सरकार ने पहली बार ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए राष्ट्रीय परिषद का गठन किया है। सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय द्वारा इस सम्बन्ध में अधिसूचना जारी कर दी गई है। किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को परिषद में बतौर सदस्य शामिल किया गया है।
अधिसूचना के अनुसार केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री इसके पदेन अध्यक्ष व केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री पदेन उपाध्यक्ष होंगे। महामंडलेश्वर त्रिपाठी समेत परिषद में ट्रांसजेंडर समाज के पांच सदस्य नियुक्त किये गए हैं। महामंडलेश्वर त्रिपाठी उत्तर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करेंगी। जबकि गोपी शंकर मदुरै दक्षिण क्षेत्र, मीरा परीदा पूर्व क्षेत्र, जैनब जाविद पटेल पश्चिम क्षेत्र व काक चिंगताबम श्याम चंद्र शर्मा पूर्वोत्तर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करेंगे।
इसके साथ ही ट्रांसजेंडरों के लिए काम करने करने वाले विभिन्न गैर सरकारी संगठनों के चार प्रतिनिधियों को भी परिषद में जगह दी गई है। इनमें आर्यन पाशा, विहान पीताम्बर, रेशमा प्रसाद व पटेल चन्दूमाई गणेशदास शामिल हैं। केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि नामित सदस्यों का कार्यकाल तीन वर्ष के लिए होगा। परिषद के अन्य सदस्यों में केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों व विभागों के प्रतिनिधि, राष्ट्रीय मानवाधिकारआयोग, राष्ट्रीय महिला आयोग, राज्य व केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि शामिल हैं।
परिषद के कार्य
उल्लेखनीय है कि ट्रांसजेंडरों की विभिन समस्याओं और उनके कल्याण के लिए मोदी सरकार ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 लागू किया है। इस क्रम में परिषद का गठन किया गया है। मंत्रालय द्वारा जारी विज्ञप्ति में जानकारी दी गई है कि राष्ट्रीय परिषद ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के संबंध में नीतियों, कार्यक्रमों, कानून और परियोजनाओं के निर्माण पर केंद्र सरकार को सलाह देगा। ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की समानता और पूर्ण भागीदारी हासिल करने के लिए बनाई गई नीतियों और कार्यक्रमों के प्रभाव की निगरानी और मूल्यांकन करेगा। परिषद ट्रांसजेंडर व्यक्तियों से संबंधित मामलों से जुड़े सभी सरकारी विभागों और अन्य सरकारी तथा गैर-सरकारी संगठनों की गतिविधियों की समीक्षा और समन्वय स्थापित करने के साथ ही ट्रांसजेंडरों की शिकायतों का निवारण भी करेगा।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रकृति व पर्यावरण को लेकर अपनी संवेदनशीलता अक्सर प्रकट करते रहते हैं। इस क्रम में उन्होंने आज ट्वीटर व इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है। वीडियो में वे अलग-अलग लोकेशन पर मोरों को अपने हाथों से दाना खिलाते हुए नजर आ रहे हैं। वीडियो देखने से स्पष्ट लग रहा है की यह प्रधानमंत्री आवास, 7-लोक कल्याण मार्ग का है। वीडियो में मोर नाचते हुए भी दिख रहा है। वीडियो को चार घंटे के भीतर ट्वीटर पर करीब 5 हजार से अधिक लोगों ने रीट्वीट व 84 हजार लोगों ने लाइक किया है, जबकि इंस्टाग्राम पर 25 लाख से अधिक व्यूज मिले हैं।
वीडियो के साथ प्रधानमंत्री मोदी ने एक कविता भी पोस्ट की है। इसमें मोर, भोर, शांति, संवाद व मौन की अहमियत बताई है। जीव मात्र को शिवात्मा मानने की बात कही गयी है।
भोर भयो, बिन शोर,
मन मोर, भयो विभोर,
रग-रग है रंगा, नीला भूरा श्याम सुहाना,
मनमोहक, मोर निराला।
रंग है, पर राग नहीं,
विराग का विश्वास यही,
न चाह, न वाह, न आह,
गूँजे घर-घर आज भी गान,
जिये तो मुरली के साथ
जाये तो मुरलीधर के ताज।
जीवात्मा ही शिवात्मा,
अंतर्मन की अनंत धारा
मन मंदिर में उजियारा सारा,
बिन वाद-विवाद, संवाद
बिन सुर-स्वर, संदेश
मोर चहकता मौन महकता।
प्रकृति की एक सुन्दरतम कृति है मोर
प्रधानमंत्री ने जिस मोर के साथ वीडियो जारी किया है, वह हमेशा से ही मानव के आकर्षण का केन्द्र रहा है। हिन्दू मान्यताओं व परम्पराओं में मोर को विशेष स्थान मिला है। कई प्राचीन मंदिरों में चित्रित कला में इसे दर्शाया गया है। भगवान श्री कृष्ण के मुकुट पर मोर पंख लगा रहता था। बौद्ध दर्शन में मोर ज्ञान का प्रतिनिधित्व करता है। पौराणिक काल में ऋषि – मुनियों ने मोर पंख की कलम बनाकर बड़े-बड़े ग्रंथ लिखे हैं। मोर के विषय में माना जाता है कि यह पक्षी किसी भी स्थान को बुरी शक्तियों और अनिष्टकारी प्रभाव से बचाकर रखता है। यही वजह है कि अधिकांश लोग अपने घरों में मोर के पंखों को लगा कर रखते हैं। यह अनादि काल से चित्रकारों, कवियों व अन्य कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहा है। महाकवि कालिदास से लेकर आधुनिक युग के कवियों तक के लिए मोर के उल्लेख के बिना वर्षा ऋतु का वर्णन करना असंभव सा ही रहा है। प्रकृति ने दिल खोल कर इस पर अपने रंगों का उपयोग किया है। यानी मोर प्रकृति की एक सुन्दरतम कृति है।
भाजपा के राष्ट्रीय सह महासचिव (संगठन) शिवप्रकाश ने पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल में चक्रवाती तूफान अम्फान से हुए नुकसान के बाद वहां की सरकार को एक हजार करोड़ रुपए की सहायता दी। मगर पीड़ितों की मदद के बजाय तृणमूल कार्यकर्ताओं ने इसे लूटने का काम किया।
शिवप्रकाश शनिवार को उत्तराखंड भाजपा द्वारा राजधानी देहरादून में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में उत्तराखंड भाजपा द्वारा कोरोना काल में कार्यकर्ताओं के माध्यम से किए गए सेवा कार्यों पर आधारित सेवा ही संगठन है ई- बुक का लोकार्पण किया गया। यहां यह बता दें कि राष्ट्रीय सह महासचिव (संगठन) शिवप्रकाश को पिछले कुछ वर्षों से भाजपा ने पश्चिम बंगाल की विशेष जिम्मेदारी दी है। उनके प्रयासों के चलते विगत लोकसभा चुनाव में बंगाल में भाजपा को अप्रत्याशित सफलता मिली थी और वहां भाजपा संगठन पहले से मजबूत हुआ है।
आज देहरादून में जब शिवप्रकाश भाजपा के सेवा कार्यों पर बोल रहे थे, तो तब उन्होंने पार्टी की गतिविधियों की विस्तृत चर्चा की और कहा कि भाजपा इसी कारण पार्टी विद डिफरेंस है। उन्होंने कहा कि देश में लगभग साढ़े चौदह-पंद्रह सौ पंजीकृत राजनीतिक दल हैं। मगर ये सभी मात्र चुनावों के समय ही दिखाई देते हैं। भाजपा ही एकमात्र ऐसा राजनीतिक दल है, जो राजनीतिक गतिविधियों के अलावा सामाजिक कार्यों का भी पूरी तत्परता के साथ निर्वहन करता है। कोरोना काल में भाजपा के अलावा कोई अन्य राजनीतिक दल प्रभावितों की सहायता के लिए आगे नहीं आया।
इस क्रम में उन्होंने उदाहरण के रूप में बंगाल में आए साइक्लोन अम्फान की चर्चा की। इस तूफान में बंगाल व उड़ीसा में व्यापक स्तर पर नुकसान हुआ था। तूफान के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बंगाल का हवाई सर्वेक्षण कर 1000 करोड़ रुपए के पैकेज की घोषणा की थी। शिवप्रकाश ने कहा कि ममता सरकार ने राजनीतिक हिंसा को बढ़ावा दिया है। बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या की जा रही है। केंद्र सरकार ने तूफान पीड़ितो के लिए मदद भेजी तो टीएमसी कार्यकर्ताओं ने उसे लूट लिया।
उन्होंने कहा कि कोरोना काल में लॉकडाउन के दौरान भाजपा के असंख्य कार्यकर्ता गरीब, जरूरतमंद, असहाय लोगों की सहायता के लिए पूरी जी-जान से जुटे रहे। देशभर में मोदी किचेन व मोदी रसोई के माध्यम से लोगों को भोजन उपलब्ध कराया गया। जरूरतमंदों को सूखा राशन पहुंचाने से लेकर मास्क व सैनिटाइजर तक वितरित किए गए। बुजुर्गों व बीमार लोगों को दवाई उपलब्ध कराई गई। प्रवासी मजदूर जब घर वापसी कर रहे थे, तब भी पार्टी कार्यकर्ता उनकी सहायता के लिए तत्पर रहे।
उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी से निबटने को लेकर मोदी सरकार ने बेहद संजीदगी व गंभीरता के साथ कार्य किया है। मोदी सरकार के प्रयासों की वैश्विक स्तर पर सराहना हुई है।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने सम्पूर्ण वृक्षारोपण परियोजना के अंतर्गत राजमार्गों पर लगाए जा रहे प्रत्येक पौधे के स्थान, उसकी वृद्धि, प्रजातियों के विवरण, रखरखाव गतिविधियां आदि की निगरानी के लिए हरित पथ नाम का एक मोबाइल ऐप विकसित किया है। आज केन्द्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने ऐप को लांच किया।
पर्यावरण अनुकूल राष्ट्रीय राजमार्ग विकसित करने के लिए NHAI समय-समय पर वृक्षारोपण अभियान चलाता रहता है। NHAI की राज्य सरकारों, निजी पौधारोपण एजेंसियों आदि के साथ मिलकर राष्ट्रीय राजमार्गों पर 72 लाख पौधे लगाने की योजना है। NHAI हरित पथ एप के जरिये इन पौधों पर नज़र रखेगा। मोबाइल ऐप का उद्घाटन करते हुए गडकरी ने वृक्षारोपण की सतत निगरानी और पेड़ों के एक स्थान से दूसरे स्थान पर प्रतिरोपण पर जोर दिया। गडकरी ने राजमार्गों के किनारे वृक्षारोपण के लिए विशेष व्यक्तियों व एजेंसियों को हायर करने का सुझाव दिया। उन्होंने इस कार्य में गैर-सरकारी संगठनों, स्वयं सहायता समूहों और बागवानी तथा वन विभाग को शामिल करने का भी सुझाव दिया।
मोबाइल ऐप पौधों की वृद्धि व उनकी सेहत पर नज़र रखेगा और पौधों के डेटा के साथ तस्वीरें NHAI संचालित बिग डेटा एनालिटिक्स प्लेटफ़ॉर्म – डेटा लेक पर हर 3 महीने में अपलोड की जाएंगी। NHAI राष्ट्रीय राजमार्ग पर पहले किए जा चुके सम्पूर्ण पौधारोपण और इन स्थानों पर लगाए जाने वाले पौधों का डेटा बेस बना रहा है। सड़क निर्माण करने वाले ठेकेदार लगाए गए पौधों के रखरखाव और लापता अथवा मुरझाए हुए पौधों को बदलने के लिए जवाबदेह होंगे। पौधों के की वृद्धि और विकास को इस काम के लिए ठेकेदारों के भुगतान से जोड़ा जाएगा।
25 दिन में 25 लाख पौधे लगाए
इधर, NHAI द्वारा जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, उसने अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर हाल ही में हरित भारत संकल्प शुरू किया है, जो एक राष्ट्रव्यापी वृक्षारोपण अभियान है। इस अभियान के तहत NHAI ने 21 जुलाई से 15 अगस्त के बीच राष्ट्रीय राजमार्गों पर 25 दिन में 25 लाख पौधे लगाए। अभियान के दौरान चालू वर्ष में 35.22 पौधारोपण का लक्ष्य रखा गया है।
NHAI के क्षेत्रीय कार्यालयों द्वारा राष्ट्रव्यापी वृक्षारोपण अभियान को सक्रिय रूप से हाथ में लिया गया है। उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों पर 5 लाख, राजस्थान में 3 लाख और मध्य प्रदेश में 2.67 लाख से अधिक पौधे लगाए गए हैं। पौधों के 100% जीवित रखने के लिए, राष्ट्रीय राजमार्ग के साथ 1.5 मीटर की न्यूनतम ऊंचाई वाले वृक्षों या बड़ी झाडि़यों की कतार लगाने पर जोर दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पीएम केयर्स फंड के मामले में अपना फैसला सुना दिया। कोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें पीएम केयर्स फंड की राशि को कोरोना महामारी के मद्देनजर राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (NDRF) में हस्तांतरित करने की मांग की गई थी। कोर्ट के इस फैसले का स्वागत करते हुए भाजपा नेताओं ने कांग्रेस और और गांधी परिवार पर जमकर हमला बोला।
एक NGO सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (CPIL) की याचिका पर जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली न्यायमूर्ति आरएस रेड्डी व न्यायमूर्ति एमआर शाह की पीठ ने कहा कि पीएम केयर्स फंड का पैसा एनडीआरएफ में ट्रांसफर करने का आदेश नहीं दे सकते। ये दोनों अलग-अलग फंड हैं। कोई व्यक्ति एनडीआरएफ में दान देना देना चाहे तो उस पर पाबंदी नहीं है। नई आपदा राहत योजना की भी जरूरत नहीं है। शीर्ष अदालत ने कहा कि सरकार इसकी राशि को उचित जगह हस्तांतरित करने के लिए स्वतंत्र है। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने 28 मार्च को आपात स्थितियों में प्रधानमंत्री नागरिक सहायता एवं राहत (PM केयर्स) कोष की स्थापना की थी। इसका उद्देश्य कोविड-19 की वजह से उत्पन्न मौजूदा परिस्थिति से निपटना और प्रभावितों को राहत पहुंचाना था। इस कोष के प्रधानमंत्री पदेन अध्यक्ष बनाए गए हैं और रक्षामंत्री, गृहमंत्री व वित्तमंत्री पदेन न्यासी हैं।
नड्डा ने ट्वीट कर कांग्रेस पर साधा निशाना
कोर्ट का फैसला आते ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा है। नड्डा ने सिलसिलेवार ट्वीट कर कहा, ‘पीएम केयर्स पर सर्वोच्च अदालत द्वारा दिए गए फैसले ने राहुल गांधी के नापाक मंसूबों पर पानी फेर दिया है। यह दिखाता है कि कांग्रेस पार्टी और उसके सहयोगियों के बुरे इरादे और दुर्भावनापूर्ण प्रयासों के बावजूद सच्चाई की जीत होती है।’ भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि राहुल गांधी के हल्ला मचाकर दोषारोपण करने की आदत को जनता ने लगातार नकारा है और उसी जनता ने पीएम केयर्स कोष में दिल खेलकर दान किया है। गांधी परिवार ने पीएमएनआरएफ को दशकों तक व्यक्तिगत जागीर के रूप में माना और अपने परिवार के ट्रस्टों में पीएमएनआरएफ में नागरिकों की मेहनत से अर्जित धन हस्तांतरित किया।’
रविशंकर प्रसाद ने दिया हिसाब
इधर, केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कहा कि पीएम केयर्स फंड से अब तक कोरोना की लड़ाई में 3100 करोड़ रुपये की मदद की गई है। जिसमें 2,000 करोड़ रुपये सिर्फ वेंटिलेटर के लिए दिए गए हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 1000 करोड़ रुपये राज्यों को प्रवासी मजदूरों की व्यवस्था के लिए दिए गए। 100 करोड़ रुपये कोरोना की वैक्सीन के अनुसंधान के लिए दिए गए है। पीएम केयर्स फंड पंजीकृत सार्वजनिक ट्रस्ट है, जिसके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अध्यक्ष हैं। यह ट्रस्ट कोविड-19 जैसी आपातकाल स्थितियों के लिए बनाया गया है। इस फंड में लोगों ने स्वेच्छा से दान दिया। पिछले 6 साल के दौरान मोदी सरकार पर कोई भी भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा। सभी चीजें पारदर्शिता के साथ हो रही है।
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए प्रसाद ने कहा, राजीव गांधी फाउंडेशन एक फैमिली फाउंडेशन था। उसे चीन से भी मदद मिली थी। उस फाउंडेशन की रिपोर्ट में भारत के बाजार को चीनी उत्पाद के लिए खोलने की बात भी कही गई थी। उन्होंने कहा कि राहुल ने कोरोना की लड़ाई को कमजोर करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। पीएम मोदी ने डॉक्टर, नर्स और कोविड की लड़ाई लड़ने वाले कोरोना वारियर्स के लिए ताली और थाली बजाने की बात कही तो राहुल गांधी ने कहा कि क्यों बजा रहे हो ? पूरे देश ने पीएम के कहने पर कोरोना के खिलाफ आशा का दीया जलाया तो राहुल ने कहा कि क्यों जला रहे हो?
केंद्रीय सतर्कता आयोग ( Central Vigilance Commission, CVC) ने केंद्र सरकार के सभी विभागों से कहा है कि भ्रष्टाचार की शिकायतों की जांच रिपोर्ट वे समय पर दें। साथ ही चेतावनी दी कि तय समय-सीमा का पालन नहीं करने को गंभीरता से लिया जाएगा।
CVC ने मुख्य सतर्कता अधिकारियों (Chief Vigilance Officers, CVOs) से ये रिपोर्ट मांगी। CVOs केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों, संगठनों के खिलाफ मिलने वाली भ्रष्टाचार की शिकायतों की जांच करते हैं। ऐसे मामलों की शिकायत मिलने पर CVOs को तीन महीने के भीतर जांच रिपोर्ट जमा करनी होती है।

CVC ने कहा, ‘आयोग को पता चला है कि विभाग व संगठन तय समयसीमा का पालन नहीं कर रहे हैं, जिसकी वजह से मामलों में बेवजह देरी हो रही है और शिकायत पर समयबद्ध कार्रवाई नहीं हो पा रही है। ‘
आयोग ने वर्तमान निर्देशों की समीक्षा के बाद कहा कि विभागों व संगठनों के CVOs तीन महीने की समय सीमा का ध्यान रखें। इस संबंध में आयोग के निदेशक जे.विनोद कुमार द्वारा केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों, विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, बैंकों के आदि के CVO को निर्देश जारी किए गए।
महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को गोवा के राज्यपाल का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है।
राष्ट्रपति सचिवालय द्वारा आज जारी एक विज्ञप्ति में जानकारी दी गयी है कि राष्ट्रपति ने गोवा के राज्यपाल सत्यपाल मलिक का स्थानांतरण मेघालय के राज्यपाल के पद पर किया है। मलिक के स्थानांतरण के फलस्वरूप महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को गोवा के राज्यपाल का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है। उपरोक्त नियुक्तियां संबंधित व्यक्तियों के कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से प्रभावी होंगी।
