गुप्तकाशी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुप्तकाशी (जनपद रुद्रप्रयाग) में वरिष्ठ भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ता स्व. अटल वाजपेयी के आवास पहुँचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने शोकाकुल परिजनों से भेंट कर अपनी गहरी शोक संवेदनाएँ व्यक्त कीं।
मुख्यमंत्री ने स्व. अटल वाजपेयी के संगठनात्मक योगदान एवं जनसेवा के प्रति उनके समर्पण को स्मरण करते हुए कहा कि उनका जीवन समाज और पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोक संतप्त परिवार को इस कठिन समय में धैर्य और संबल प्रदान करें।
घर-घर कूड़ा शुल्क संग्रहण से 63 लाख की उपलब्धि, महिलाओं की 25 प्रतिशत हिस्सेदारी
देहरादून निगम के 100 में से 57 वार्डो में महिला समूह को सौंपी गई कमान
समयबद्व शुल्क संग्रहण से बढ़ा राजस्व, व्यवस्था में आया सुधार- आयुक्त नमामि बंसल
देहरादून। राजधानी देहरादून में स्वच्छता प्रबंधन के क्षेत्र में एक अभिनव पहल ने सफलता की नई मिसाल प्रस्तुत की है। नगर निगम देहरादून द्वारा राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के अंतर्गत पंजीकृत महिला स्वयं सहायता समूहों के सहयोग से संचालित घर-घर कूड़ा संग्रहण शुल्क अभियान ने न केवल सफाई व्यवस्था को सुदृढ़ किया है, बल्कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।
नगर निगम ने शहर के 100 वार्डों में से 57 वार्डों में कूड़ा शुल्क संग्रहण की जिम्मेदारी महिला स्वयं सहायता समूहों को सौंपी है। इन समूहों द्वारा त्रैमासिक (प्रत्येक तीन माह) आधार पर घर-घर जाकर निर्धारित शुल्क का संग्रहण किया जा रहा है। अभियान के प्रारंभिक चरण में ही जुलाई, अगस्त और सितंबर माह के दौरान 63 लाख रुपये से अधिक की राजस्व प्राप्ति दर्ज की गई है।
इस पहल की विशेषता यह है कि कुल प्राप्त मुनाफे का 25 प्रतिशत भाग सीधे संबंधित महिला समूहों को प्रदान किया जा रहा है। इससे महिलाओं को स्थायी आय का स्रोत मिला है तथा वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। यह व्यवस्था न केवल पारदर्शी और व्यवस्थित है, बल्कि इससे नगर निगम की कार्यप्रणाली में भी सुधार आया है।
महिला समूहों द्वारा शुल्क संग्रहण के साथ-साथ नागरिकों से फीडबैक भी लिया जा रहा है, जिससे सफाई व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं उत्तरदायी बनाया जा रहा है। इस समन्वित प्रयास से शहर की स्वच्छता व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है।
वार्ड संख्या 64, नेहरूग्राम की समूह सदस्य सीमा बिष्ट ने इस पहल के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एवं नगर निगम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस योजना से उनके जैसी अनेक महिलाओं को रोजगार का सशक्त अवसर प्राप्त हुआ है।
नगर निगम आयुक्त नमामि बंसल ने बताया कि माननीय मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन से संबद्ध महिला समूहों को कूड़ा उठान शुल्क संग्रहण का दायित्व सौंपा गया है। समूहों द्वारा निर्धारित समय में प्रभावी शुल्क संग्रहण कर निगम को उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे राजस्व में वृद्धि के साथ कार्य प्रणाली में भी सुधार हुआ है।
सहायक नगर आयुक्त राजवीर सिंह चौहान ने जानकारी दी कि त्रैमासिक प्रणाली के तहत तीन माह का शुल्क एकमुश्त संग्रहित किया जा रहा है। अब तक 63 लाख रुपये की प्राप्ति हो चुकी है, जिसमें से 25 प्रतिशत राशि महिला समूहों को प्रदान की जाएगी।
यह अभिनव मॉडल स्वच्छता, पारदर्शिता और महिला सशक्तिकरण का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा है। इस पहल ने न केवल देहरादून को अधिक स्वच्छ एवं सुव्यवस्थित बनाने में योगदान दिया है, बल्कि महिलाओं को आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में सशक्त आधार भी प्रदान किया है।
अब होम स्टेट से ही शुरू करनी होगी यात्रा, 60 दिन से ज्यादा बाहर रहना मना
देहरादून। केंद्र सरकार ने निजी परमिट वाहनों को लेकर नियमों में बड़ा बदलाव किया है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी नई अधिसूचना के तहत पर्यटक वाहनों के संचालन से जुड़े कई प्रावधानों में संशोधन किया गया है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे। इन नए नियमों का असर उत्तराखंड समेत पूरे देश में देखने को मिलेगा।
संशोधित नियमों के अनुसार अब सभी पर्यटक वाहनों के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे अपनी यात्रा उसी राज्य से शुरू करें, जहां से उन्हें परमिट जारी किया गया है। साथ ही कोई भी वाहन अपने गृह राज्य के बाहर लगातार 60 दिनों से अधिक नहीं रह सकेगा। सरकार का मानना है कि इससे परमिट के दुरुपयोग पर रोक लगेगी और राज्यों के बीच संचालन में पारदर्शिता बढ़ेगी।
नए प्रावधानों के तहत परमिट के लिए आवेदन करते समय यह सुनिश्चित किया जाएगा कि संबंधित वाहन पर किसी भी राष्ट्रीय राजमार्ग का टोल बकाया न हो। बकाया होने की स्थिति में परमिट जारी नहीं किया जाएगा। इसके अलावा सरकार ने परमिट की वैधता अवधि भी बढ़ा दी है। पहले जहां यह अवधि 12 वर्ष थी, अब इसे बढ़ाकर 15 वर्ष कर दिया गया है, जिससे वाहन मालिकों को राहत मिलेगी।
आवेदन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए व्यक्तिगत आवेदकों के लिए आधार संख्या अनिवार्य कर दी गई है, जबकि कंपनियों को कॉर्पोरेट पहचान संख्या (CIN) या जीएसटी नंबर देना होगा। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वाहन उसी राज्य में पंजीकृत हो, जहां से उसका संचालन किया जा रहा है।
सरकार का कहना है कि इन बदलावों से पर्यटन परिवहन व्यवस्था को अधिक सुव्यवस्थित और जवाबदेह बनाया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा- परीक्षा जीवन की अंतिम कसौटी नहीं होती, बल्कि यह उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद की बोर्ड परीक्षाओं के शुभारंभ पर प्रदेश के सभी छात्र-छात्राओं को शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि यह समय छात्रों के पूरे वर्ष के परिश्रम को प्रदर्शित करने का है।
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में विद्यार्थियों को आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच के साथ परीक्षा देने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि परीक्षा जीवन की अंतिम कसौटी नहीं होती, बल्कि यह उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्यमंत्री ने छात्रों से शांत मन, एकाग्रता और दृढ़ विश्वास के साथ परीक्षा देने की अपील की। उन्होंने भरोसा जताया कि प्रदेश के विद्यार्थी अपने माता-पिता, गुरुजनों और उत्तराखंड का नाम रोशन करेंगे।
मुख्यमंत्री ने अंत में सभी परीक्षार्थियों की सफलता और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना भी की।
डॉ. बी.वी.आर.सी पुरुषोत्तम ने देहरादून, उधमसिंह नगर और नैनीताल में धीमी प्रगति पर जताई नाराजगी
एसआईआर में लापरवाह अफसरों पर होगी सख्त कार्रवाई
देहरादून। मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी पुरुषोत्तम ने सचिवालय में आगामी विशेष गहन पुनरीक्षण की तैयारियों के संबंध में सभी जनपदों के ज़िलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉफ्रेंस में माध्यम समीक्षा बैठक की। बैठक में मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने आगामी एसआईआर के दृष्टिगत सभी जनपदों की प्रशासनिक तैयारियों की जनपदवार समीक्षा कर कद विस्तृत जानकारी ली। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि आगामी अप्रैल माह में उत्तराखण्ड में एसआईआर प्रस्तावित है इस लिहाज से जनपद देहरादून, उधमसिंह नगर और नैनीताल में मतदाताओं की मैपिंग की प्रगति लक्ष्य के अनुरुप कम है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने तीनों जनपदों के जिलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि जिन बूथों पर मैंपिग प्रतिशत कम है सम्बंधित ईआरओ और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि जो भी अधिकारी एसआईआर के कार्य में लापरवाही करत हुए पाए गए तो उनपर ठोस कार्रवाई की जाएगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सभी जनपदों को तय समयसीमा में एसआईआर की तैयारियों के बूथ अवेयरनेस ग्रुप (BAG) के गठन के निर्देश दिए।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी पुरुषोत्तम ने जिलाधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा वर्तमान में 77 प्रतिशत बूथों पर कि बूथ लेवल एजेंट्स की तैनाती हो चुकी है, बीएलए की शत प्रतिशत तैनाती हेतु राजनैतिक दलों से पुनः बैठक कर दी जाए। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि एसआईआर हेल्पडेस्क के जिलों में अविलम्ब अतरिक्त कार्मिकों की तैनाती की जाए।
बैठक में संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी प्रकाश चंद्र, उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी किशन सिंह नेगी, सभी जनपदों के जिलाधिकारी, अपर जिलाधिकारी, ईआरओ वर्चुअल रुप से शामिल रहे।
गोल्फकार्ट योजना से पर्यटकों और स्थानीय लोगों को मिलेगी सुरक्षित व सुविधाजनक यात्रा
देहरादून। पर्यटन नगरी मसूरी में यातायात व्यवस्था को सुगम और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने एक बड़ी पहल की है। जल्द ही शहर को 40 नए गोल्फकार्ट की सुविधा मिलने जा रही है, जिससे कुल संख्या बढ़कर 54 हो जाएगी। यह पहल जिला प्रशासन और आरईसी लिमिटेड (भारत सरकार) के सहयोग से लागू की जा रही है। इसके लिए दोनों पक्षों के बीच जल्द ही औपचारिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और रिक्शा यूनियन के पदाधिकारियों की उपस्थिति रहेगी।
जिलाधिकारी सविन बंसल के अनुसार, इस योजना का मुख्य उद्देश्य मसूरी में बढ़ते यातायात दबाव को कम करना, प्रदूषण रहित परिवहन को बढ़ावा देना और पर्यटकों व स्थानीय नागरिकों को सुरक्षित व आरामदायक यात्रा सुविधा उपलब्ध कराना है। खासतौर पर माल रोड और कैमलबैक रोड पर जाम की समस्या को कम करने में यह कदम अहम साबित होगा। इस पहल से स्थानीय रिक्शा चालकों को भी लाभ मिलेगा, क्योंकि उन्हें गोल्फकार्ट संचालन का प्रशिक्षण देकर बेहतर रोजगार के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों और पर्यटकों को भी इससे बड़ी राहत मिलेगी।
जिला प्रशासन ने गोल्फकार्ट संचालन के लिए मार्ग निर्धारण, पार्किंग, चार्जिंग स्टेशन और सुरक्षा मानकों की व्यवस्था समयबद्ध तरीके से पूरी करने के निर्देश दिए हैं। बताया गया कि इस परियोजना के लिए सीएसआर फंड के तहत करीब 3.36 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। इससे पहले दिसंबर 2024 में मसूरी में गोल्फकार्ट सेवा की शुरुआत की गई थी, जो अब विस्तार के साथ एक बड़े स्तर पर लागू की जा रही है।
प्रशासन का मानना है कि यह पहल मसूरी को स्वच्छ, सुव्यवस्थित और आधुनिक पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।
जनपद मुख्यालय में बजट पूर्व संवाद- संवाद, सहयोग, सुझाव और सहभागिता उत्तराखंड की ताकत
मुख्यमंत्री के आगमन से पौड़ी में दिखा उत्साह, विकास और बजट पर हुआ सीधा संवाद
जनसहभागिता से तैयार होगा जनता का बजट, रांसी में मुख्यमंत्री की मौजूदगी में व्यापक मंथन
पर्वतीय विकास, रोजगार और आधारभूत संरचना पर केंद्रित रहा बजट पूर्व संवाद
पौड़ी में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल, जनसहभागिता से आकार लेगा भविष्य का बजट
समावेशी, पारदर्शी और दूरदर्शी बजट की दिशा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल
मुख्यमंत्री के पौड़ी दौरे से विकास को मिली नई दिशा, जनअपेक्षाओं पर हुआ सीधा संवाद
पौड़ी। जनपद पौड़ी के रांसी स्थित बहुउद्देश्यीय भवन में प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में बजट पूर्व संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मंडल मुख्यालय पहुंचने पर मुख्यमंत्री का जोर शोर से स्वागत किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए जनप्रतिनिधियों, कृषकों, उद्यमियों, व्यापारियों, महिला समूहों, पर्यटन व्यवसायियों, मत्स्य पालकों, कृषि वैज्ञानिकों, स्थानीय निकाय प्रतिनिधियों एवं विभिन्न क्षेत्रों के हितधारकों ने सहभागिता करते हुए आगामी बजट के लिए अपने सुझाव प्रस्तुत किए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य ऐसा जनहितकारी बजट तैयार करना है, जो प्रदेश की जमीनी आवश्यकताओं, क्षेत्रीय विशेषताओं और जनअपेक्षाओं के अनुरूप हो। उन्होंने कहा कि बजट केवल आय-व्यय का दस्तावेज नहीं, बल्कि विकसित उत्तराखण्ड के निर्माण का रोडमैप है, जिसमें प्रत्येक वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
उन्होंने इस संवाद में शामिल होकर अपने महत्वपूर्ण सुझाव देने के लिए सभी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास है कि समाज के प्रत्येक वर्ग जैसे पर्यटन व्यवसायियों, व्यापारियों, महिला स्वयं सहायता समूहों, किसानों और उद्यमियों की अपेक्षाएं और आवश्यकताएं बजट में समुचित रूप से परिलक्षित हों। उन्होंने कहा कि इस संवाद के दौरान अनेक व्यावहारिक और दूरदर्शी सुझाव प्राप्त हुए हैं, जो राज्य के विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट केवल आय-व्यय का दस्तावेज नहीं, बल्कि राज्य के भविष्य के निर्माण का रोडमैप होता है। उन्होंने कहा कि बजट निर्माण की प्रक्रिया को पारदर्शी, सहभागी और जनोन्मुखी बनाने का संकल्प लिया है। सीमांत क्षेत्रों सहित प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर संवाद कर सुझाव प्राप्त किए जा रहे हैं, ताकि विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और प्रत्येक वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर है और व्यापार, उद्योग, पर्यटन, कृषि एवं महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। राज्य में होमस्टे, स्वरोजगार और निवेश के नए अवसर सृजित हुए हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार को बढ़ावा मिला है। सरकार का लक्ष्य किसानों को उद्यमी के रूप में विकसित करना, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना तथा राज्य की अर्थव्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट पूर्व संवाद के दौरान प्राप्त सभी सुझावों का गंभीरता से परीक्षण कर उन्हें आगामी बजट और नीतिगत निर्णयों में यथासंभव शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य ऐसा बजट प्रस्तुत करना है, जो आकार में व्यापक, प्रभाव में ठोस और पूरी तरह जनहित पर केंद्रित हो, ताकि विकास का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंच सके।
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2047 तक उत्तराखंड को आत्मनिर्भर एवं अग्रणी राज्य बनाने के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि प्रदेश ने वित्तीय अनुशासन और विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जनसहभागिता से तैयार होने वाला यह बजट राज्य की विकास यात्रा को और अधिक गति प्रदान करते हुए समृद्ध और सशक्त उत्तराखंड के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
संवाद के दौरान ग्रामीण विकास को गति देने के लिए अनुदान में वृद्धि, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था सुदृढ़ करने, सीवर लाइन एवं शौचालय निर्माण, पंचायतों को सशक्त बनाने, बंजर भूमि के उत्पादक उपयोग तथा ग्राम स्तर पर सोलर प्लांट संचालन जैसे सुझाव प्राप्त हुए। शहरी क्षेत्रों के लिए नगर निकायों के संसाधन बढ़ाने, सोलर सिटी की अवधारणा को बढ़ावा देने, पार्किंग व सफाई व्यवस्था सुदृढ़ करने तथा शहरी आधारभूत संरचना के सुदृढ़ीकरण पर बल दिया गया।
कृषि एवं उद्यान क्षेत्र में पर्वतीय कृषि को प्रोत्साहन, बागवानी एवं उच्च मूल्य वाली फसलों के उत्पादन, जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा हेतु प्रभावी उपाय, पोस्ट-हार्वेस्ट प्रबंधन, कोल्ड स्टोरेज एवं क्लस्टर आधारित खेती को बढ़ावा देने के सुझाव सामने आए। कृषकों के तकनीकी प्रशिक्षण, जिला स्तर पर प्रसंस्करण केंद्रों की स्थापना तथा ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ विकसित करने पर भी जोर दिया गया।
उद्योग एवं एमएसएमई क्षेत्र में पर्वतीय क्षेत्रों में उद्योग स्थापना हेतु पूंजीगत सब्सिडी, ब्याज अनुदान, मशीनरी पर विशेष छूट, सेवा क्षेत्र आधारित उद्योगों को बढ़ावा तथा स्थानीय उत्पादों पर आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन की मांग रखी गई। आईटीआई एवं पॉलिटेक्निक संस्थानों को उद्योगों से सीधे जोड़ने, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलें और पलायन रुके, इस पर भी सुझाव दिए गए।
महिला सशक्तिकरण के अंतर्गत प्रत्येक जनपद में प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने, ब्याज-मुक्त ऋण उपलब्ध कराने तथा स्थानीय सेवाओं में महिलाओं को प्राथमिकता देने की बात कही गई। गौशालाओं के लिए भूमि उपलब्ध कराने, जैविक खाद उत्पादन को प्रोत्साहन देने तथा मत्स्य पालन के लिए आधुनिक तकनीकों एवं बायोफ्लॉक टैंकों को बढ़ावा देने के सुझाव भी प्रस्तुत किए गए।
पर्यटन क्षेत्र में होमस्टे के लिए रियायती ऋण सुविधा, हैली सेवा का विस्तार, वैकल्पिक मार्गों का निर्माण, छोटे पर्यटन स्थलों का विकास, संस्कृत ग्रामों एवं सांस्कृतिक स्थलों को पर्यटक ग्राम के रूप में विकसित करने, नेचर एवं एग्री-टूरिज्म को बढ़ावा देने तथा स्थानीय उत्पादों के विपणन के लिए ठोस नीति बनाने की आवश्यकता बताई गई।
ऊर्जा क्षेत्र में ऊर्जा नेटवर्क को सुदृढ़ बनाने, कृषि एवं उद्योग आधारित गतिविधियों को प्रोत्साहन देने हेतु कर एवं शुल्क में राहत तथा ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण के सुझाव भी प्राप्त हुए।
बजट पूर्व संवाद कार्यक्रम में स्थानीय विधायक राजकुमार पोरी ने कहा कि जनसहभागिता के आधार पर तैयार होने वाला बजट ही प्रदेश के समग्र विकास की नींव बनेगा। उन्होंने पर्वतीय क्षेत्रों की विशेष आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए पर्यटन, कृषि, लघु उद्योग एवं आधारभूत सुविधाओं को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में आगामी बजट जनअपेक्षाओं के अनुरूप होगा और पौड़ी सहित पूरे प्रदेश के संतुलित विकास को नई दिशा देगा।
वित्त सचिव दिलीप जावलकर ने सभी होमस्टे संचालकों, एमएसएमई उद्यमियों, लखपति दीदियों, जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों का स्वागत करते हुए कहा कि इस संवाद का उद्देश्य आगामी बजट को जनभावनाओं, स्थानीय आवश्यकताओं और विकास की प्राथमिकताओं के अनुरूप दिशा देना है, ताकि वित्तीय संसाधनों का प्रभावी प्रबंधन करते हुए अधिकतम जनकल्याण सुनिश्चित किया जा सके। राज्य में आधारभूत संरचना, पर्यटन, कनेक्टिविटी, स्वरोजगार और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में निरंतर सकारात्मक प्रगति हो रही है, जिससे विकास की नई संभावनाएं साकार हो रही हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड ने विकास की दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं और सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि प्रत्येक रुपया पारदर्शिता के साथ सही व्यक्ति तक पहुंचे और उसका अधिकतम जनहित में उपयोग हो। बजट पूर्व संवाद इसी सहभागी सोच का महत्वपूर्ण माध्यम है। आप सभी से अपेक्षा है कि अपने संक्षिप्त, व्यवहारिक एवं दूरदर्शी सुझाव प्रस्तुत कर आगामी बजट को और अधिक जनोन्मुखी, प्रभावी एवं विकासोन्मुख बनाने में सक्रिय योगदान दें।
जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने सभी जनप्रतिनिधियों, हितधारकों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के संवाद से जनता की सहभागिता और विश्वास और अधिक सुदृढ़ होता है। उन्होंने कहा कि प्राप्त सुझाव प्रदेश के संतुलित, समावेशी एवं सतत विकास के लिए महत्वपूर्ण आधार सिद्ध होंगे।
बजट पूर्व संवाद कार्यक्रम का संचालन अपर सचिव मनमोहन मैनाली द्वारा किया गया। कार्यक्रम में कृषि, उद्योग, व्यापार, पंचायत, शहरी विकास आदि से जुड़े 200 से अधिक प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया। जिला पंचायत पौड़ी की अध्यक्षा रचना बुटोला, मेयर नगर निगम श्रीनगर आरती भंडारी, ऋषिकेश शंभू पासवान, कोटद्वार शैलेन्द्र रावत, रुड़की अनीता देवी अग्रवाल, नगर पालिकाध्यक्ष पौड़ी हिमानी नेगी, आयुक्त गढ़वाल/सचिव उद्योग विनय शंकर पांडे, पुलिस महानिरीक्षक राजीव स्वरूप, संयुक्त सचिव सुरेन्द्र सिंह रावत, आयुक्त ग्राम विकास अनुराधा पाल, अपर सचिव डॉ. आनंद श्रीवास्तव, डॉ. सौरभ गहरवार, अभिषेक रोहिला, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सर्वेश पंवार, मुख्य विकास अधिकारी गिरीश गुणवंत, अपर ज़िलाधिकारी अनिल गर्ब्याल, संयुक्त मजिस्ट्रेट दीक्षिता जोशी, जिलाध्यक्ष भाजपा कमल किशोर रावत सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, कृषक, उद्यमी, जनप्रतिनिधि तथा हितधारक मौजूद रहे।
लोक भवन में 27 फरवरी से 1 मार्च तक चलेगा ‘वसंतोत्सव’
देहरादून। देहरादून में बसंत ऋतु के स्वागत के लिए इस बार भी रंग-बिरंगा ‘वसंतोत्सव’ आयोजित होने जा रहा है। लोक भवन में 27 फरवरी से 1 मार्च तक चलने वाले इस उत्सव की थीम “फ्लोरल हीलिंग” रखी गई है, जिसका उद्देश्य फूलों के जरिए प्रकृति, स्वास्थ्य और मानसिक सुकून के महत्व को उजागर करना है। यह आयोजन न केवल पर्यटन को बढ़ावा देता है, बल्कि स्थानीय उत्पादों और किसानों को भी एक मजबूत मंच प्रदान करता है।
इस संबंध में गुरमीत सिंह ने बताया कि वसंतोत्सव अब देहरादून की सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान बन चुका है। उन्होंने कहा कि यह उत्सव पुष्प पर्यटन के साथ-साथ स्थानीय पर्यटन को भी नई दिशा देता है। 27 फरवरी को सुबह 11 बजे उद्घाटन के बाद पहले दिन दोपहर 1 बजे से शाम 6 बजे तक और बाकी दिनों में सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक आम लोगों के लिए प्रवेश निशुल्क रहेगा।
उत्सव में इस बार कुल 15 प्रमुख प्रतियोगिताएं और 55 उपश्रेणियां शामिल होंगी, जिनमें कट फ्लावर, पॉटेड प्लांट और हैंगिंग गार्डन जैसी आकर्षक श्रेणियां होंगी। विजेताओं को कुल 165 पुरस्कार दिए जाएंगे। खास बात यह है कि दिव्यांग बच्चों के लिए पेंटिंग प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी, वहीं पहली बार हाइड्रोपोनिक तकनीक पर आधारित प्रतियोगिता को भी शामिल किया गया है।
तकनीक का इस्तेमाल भी इस बार वसंतोत्सव की खास पहचान होगा। उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय और आईटीडीए मिलकर एक विशेष ऐप के जरिए आगंतुकों की संख्या और उनकी भावनात्मक प्रतिक्रिया (इमोशनल मैपिंग) का अध्ययन करेंगे। इसके अलावा एनआईईपीवीडी के छात्र रिदमिक योगा का लाइव प्रदर्शन भी करेंगे।
कार्यक्रम में फूड कोर्ट में मिलेट्स आधारित व्यंजन, आर्ट गैलरी, डाक टिकट प्रदर्शनी और कई सांस्कृतिक गतिविधियां भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी। साथ ही उत्कृष्ट कार्य करने वाले तीन किसानों और तीन महिला किसानों को ‘गवर्नर अवॉर्ड’ से सम्मानित किया जाएगा।
कुल मिलाकर, वसंतोत्सव न केवल फूलों की खूबसूरती का उत्सव है, बल्कि यह प्रकृति, नवाचार, कृषि और संस्कृति के संगम का भी एक खास अवसर बनकर उभर रहा है।
ईसीएचएस पॉलीक्लिनिक देहरादून द्वारा उत्तराखंड में वरिष्ठ पूर्व सैनिकों एवं व्हाइट कार्ड धारकों के लिए पहली बार दवाओं की होम डिलीवरी सेवा शुरू
देहरादून। भूतपूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना (ईसीएचएस) के अंतर्गत संचालित ईसीएचएस पॉलीक्लिनिक (टाइप ‘A’) देहरादून की स्थापना वर्ष 2004 में रीजेनल सेंटर ईसीएचएस, लखनऊ के अधीन ओल्ड मिलिट्री हॉस्पिटल (एमएच) देहरादून परिसर में की गई थी। 19 नवंबर 2007 को पॉलीक्लिनिक को ईसीएचएस मुख्य भवन में स्थानांतरित किया गया तथा बाद में इसे रीजेनल सेंटर ईसीएचएस देहरादून के अधिकार क्षेत्र में शामिल किया गया।
ईसीएचएस पॉलीक्लिनिक देहरादून ने उत्तराखंड में एक नई पहल करते हुए 70 वर्ष से अधिक आयु के लाभार्थियों एवं व्हाइट कार्ड धारकों के लिए नॉन-अवेलेबिलिटी (NA) एवं एएलसी दवाओं की पहली बार अपने स्तर पर होम डिलीवरी सेवा प्रारंभ की है। यह राज्य में अपनी तरह की पहली सुविधा है।
इस पहल के अंतर्गत 11 फरवरी 2026 को गढ़ी कैंट स्थित मानद सूबेदार मेजर प्रेम चंद ठाकुर (91 वर्ष) तथा 13 फरवरी 2026 को रायपुर के ग्राम रंज्हावाला निवासी मानद कैप्टन सुरेंद्र सिंह छेत्री (76 वर्ष) को उनके निवास स्थान पर दवाओं की सफलतापूर्वक आपूर्ति की गई।
ईसीएचएस पॉलीक्लिनिक देहरादून, देहरादून, उत्तरकाशी, टिहरी, चमोली और पौड़ी जनपदों के ईसीएचएस लाभार्थियों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए उत्तरदायी है। इसके अतिरिक्त विकासनगर, रायवाला और क्लेमेंट टाउन स्थित पॉलीक्लिनिक से संदर्भित मामलों को मिलिट्री हॉस्पिटल (एमएच) देहरादून तथा सूचीबद्ध अस्पतालों में भेजने की व्यवस्था भी यहीं से की जाती है। व्यापक चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता के कारण हिमाचल प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों से भी लाभार्थी उपचार हेतु यहां आते हैं।
वर्तमान में ईसीएचएस पॉलीक्लिनिक देहरादून पर कुल 1,49,052 लाभार्थी निर्भर हैं, जिनमें 51,912 प्राथमिक लाभार्थी एवं 97,140 आश्रित शामिल हैं। पॉलीक्लिनिक में प्रतिमाह औसतन 850 से 950 मरीज उपचार हेतु आते हैं।
यह पहल वरिष्ठ नागरिकों एवं प्राथमिकता श्रेणी के लाभार्थियों सहित पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को सुलभ एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने की दिशा में ईसीएचएस पॉलीक्लिनिक देहरादून की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
ग्रामीणों को मिलेगा 125 दिन का रोजगार, योजना के लिए 1.51 लाख करोड़ का प्रावधान
खटीमा। कृषि एवं सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने खटीमा में आयोजित “विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) – VB-G RAM-G” पर आधारित कार्यशाला में प्रतिभाग किया। इस दौरान उन्होंने उपस्थित किसानों और ग्रामीणों को योजना के उद्देश्यों, प्रावधानों और इससे मिलने वाले लाभों की विस्तृत जानकारी दी।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए मंत्री ने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में इस योजना के लिए राज्यों के अंशदान सहित लगभग 1.51 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके तहत ग्रामीण परिवारों को वर्ष में 125 दिनों का सुनिश्चित रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य के लिए केंद्र और राज्य के बीच 90:10 के वित्तीय सहयोग मॉडल से संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित होगी, जिससे ग्रामीण विकास को नई गति मिलेगी।

मंत्री ने कहा कि यह मिशन नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में तैयार किया गया है, जो ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
इस अवसर पर गणेश जोशी ने पूर्व सैनिकों से मुलाकात की और स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार किए गए उत्पादों का भी अवलोकन किया। उन्होंने समूहों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
