सख्त निगरानी में होंगी 10वीं-12वीं की परीक्षाएं, नकलविहीन व्यवस्था पर जोर
देहरादून। उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद की हाईस्कूल (10वीं) व इंटरमीडिएट (12वीं) की परीक्षाएं आगामी 21 फरवरी से शुरू होगी। इस बार प्रदेश भर में 2 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं बोर्ड परीक्षा में शामिल हो रहे हैं। बोर्ड परीक्षा को नकलविहीन, निष्पक्ष और पारदर्शी कराने के लिये विभागीय अधिकारियों को जरूरी निर्देश दे दिये गये हैं, साथ ही संवेदनशील व अति संवेदनशील परीक्षा केन्द्रों पर अतिरिक्त सतर्कता बरतने को भी कहा गया है।
विद्यालयी शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने मीडिया को जारी बयान में बताया कि 21 फरवरी से शुरू होने वाली उत्तराखंड बोर्ड परीक्षाओं को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर दी गई है। उन्होंने बताया कि 10वीं व 12वीं कक्षाओं की परिषदीय परीक्षाएं निर्धारित परीक्षा केन्द्रों पर शांतिपूर्ण, निष्पक्ष एवं नकलविहीन वातावरण में संपन्न कराने के लिए गाइडलाइन जारी कर दी गई है, जिसमें विभागीय अधिकारियों, जिला प्रशासन व पुलिस विभाग को आपसी समन्वय स्थापित करने के निर्देश भी दिये गये हैं। डॉ. रावत ने बताया कि बोर्ड परीक्षाओं के लिहाज से संवेदनशील एवं अति संवेदनशील परीक्षा केन्द्रों पर अतिरिक्त व्यवस्था करने, विशेष उड़नदस्तों की तैनाती तथा लगातार निगरानी करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिये गये हैं।
परीक्षा केन्द्रों के आसपास धारा-144 के नियमों का पालन, अनाधिकृत व्यक्तियों के प्रवेश पर रोक तथा प्रश्नपत्रों की सुरक्षित आपूर्ति, संग्रहण व गोपनियता सुनिश्चित करने को केन्द्र व्यवस्थापकों, निरीक्षकों और संबंधित अधिकारियों को इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।
डाॅ. रावत ने बताया कि बोर्ड परीक्षा में इस बार लगभग 2 लाख 15 हजार से अधिक परीक्षार्थी शामिल होंगे, इसके लिये प्रदेशभर में 1261 परीक्षा केन्द्र बनाये गये हैं, जिसमें 156 संवेदनशील जबकि 6 अति संवेदनशील केन्द्र हैं।
डॉ. रावत ने सभी छात्र-छात्राओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे बिना किसी तनाव के आत्मविश्वास व सकारात्मक सोच के साथ परीक्षा दें। उन्होंने अभिभावकों और शिक्षकों से भी आग्रह किया कि वे बच्चों को प्रोत्साहित करें ताकि बच्चे परीक्षा हाॅल में अच्छे से परीक्षाएं दे सके।
जनगणना-2027 को त्रुटिरहित एवं सफल बनाने हेतु अधिकारियों को व्यापक प्रशिक्षण
डिजिटल माध्यम से होगी पहली पूर्णतः ऑनलाइन जनगणना, सीएमएमएस पोर्टल रहेगा मुख्य आधार
पौड़ी। आगामी जनगणना-2027 की तैयारियों के क्रम में जिला कार्यालय सभागार में तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला के शुभारम्भ अवसर पर जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने उपस्थित चार्ज अधिकारियों, चार्ज सहायकों एवं संबंधित कर्मचारियों को निर्देशित किया कि वे प्रशिक्षण को पूर्ण गंभीरता एवं उत्तरदायित्व के साथ ग्रहण करें।
उन्होंने कहा कि जनगणना एक अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यक्रम है, जिसकी सूचनाएँ देश की विकास नीतियों, योजनाओं एवं संसाधनों के न्यायसंगत वितरण का आधार बनती हैं। उन्होंने कहा कि इसे शत-प्रतिशत शुद्धता एवं पारदर्शिता के साथ संपन्न करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
जिलाधिकारी ने जनगणना निदेशालय से आए अधिकारियों से अपेक्षा की कि प्रशिक्षण सत्र व्यवहारिक, संवादात्मक एवं रोचक हो, ताकि चार्ज अधिकारी जमीनी स्तर पर कार्य करते समय किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करें। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित अधिकारी ही इस महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम की सफलता की कुंजी हैं और उनके माध्यम से ही विश्वसनीय एवं प्रमाणिक आंकड़े संकलित किए जा सकेंगे।
जिलाधिकारी ने कहा कि जनगणना के दौरान आमजन का सहयोग अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे जनजागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास करें, ताकि प्रत्येक नागरिक सही एवं पूर्ण जानकारी उपलब्ध कराए और यह राष्ट्रीय दायित्व सफलतापूर्वक संपन्न हो सके।
गौरतलब हो कि भारत में पूर्व जनगणना वर्ष 2011 में संपन्न हुई थी। अब आगामी जनगणना-2027 का प्रथम चरण (मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना) वर्ष 2026 में तथा द्वितीय चरण (जनसंख्या गणना) वर्ष 2027 में किया जाना प्रस्तावित है। राज्य में प्रथम चरण का कार्य 25 अप्रैल 2026 से 24 मई 2026 तक संचालित होगा। इसके अतिरिक्त 10 अप्रैल 2026 से 24 अप्रैल 2026 तक स्व-गणना की सुविधा उपलब्ध रहेगी, जिसके अंतर्गत परिवार पहली बार वेब पोर्टल के माध्यम से स्वयं अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इसके उपरांत प्रगणक द्वारा उक्त विवरण का सत्यापन किया जाएगा।
द्वितीय चरण के अंतर्गत जनसंख्या गणना का कार्य 09 फरवरी 2027 से 28 फरवरी 2027 तक संचालित होगा। उत्तराखंड राज्य के हिमाच्छादित क्षेत्रों हेतु विशेष प्रावधान के अंतर्गत यह कार्य 11 सितम्बर 2026 से 30 सितम्बर 2026 तक प्रस्तावित है।
इस बार की जनगणना कई दृष्टियों से ऐतिहासिक एवं विशेष होगी, क्योंकि यह प्रथम अवसर होगा जब संपूर्ण प्रक्रिया शत-प्रतिशत डिजिटल माध्यम से संपादित की जाएगी। प्रगणक एवं पर्यवेक्षक अपने स्वयं के मोबाइल फोन के माध्यम से मोबाइल एप्लिकेशन आधारित प्रणाली से आंकड़ों का संकलन करेंगे। आरंभ से अंत तक संपूर्ण संचालन, पर्यवेक्षण एवं प्रबंधन हेतु जनगणना प्रबंधन एवं निगरानी प्रणाली (सीएमएमएस पोर्टल) का उपयोग किया जाएगा, डिजिटल प्रणाली लागू होने से आंकड़ों की गुणवत्ता, सटीकता एवं त्वरित संकलन में उल्लेखनीय सुधार अपेक्षित है।
अपर जिलाधिकारी अनिल गर्ब्याल ने कहा कि जनगणना कार्य केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि संवैधानिक दायित्व है। उन्होंने चार्ज अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्र में सूक्ष्म स्तर पर तैयारी सुनिश्चित करें, सीमाओं का सही निर्धारण करें तथा किसी भी प्रकार की पुनरावृत्ति या छूट न हो। उन्होंने कहा कि चार्ज अधिकारी अपने अधीनस्थ प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों के साथ नियमित समन्वय बनाए रखें तथा फील्ड मॉनिटरिंग को प्राथमिकता दें।
उपनिदेशक जनगणना निदेशालय प्रवीण कुमार ने बताया कि प्रशासनिक संरचना के अंतर्गत जनपद के प्रत्येक तहसील एवं नगर को एक विशिष्ट जनगणना चार्ज के रूप में चिन्हित किया गया है। प्रत्येक चार्ज में एक चार्ज अधिकारी नामित किया गया है , जो जियो-टैगिंग, हाउस लिस्टिंग ब्लॉकों का निर्माण, सीमाओं का निर्धारण एवं सत्यापन, फील्ड कार्य की निगरानी तथा वेब पोर्टल एवं सीएमएमएस के माध्यम से समग्र प्रबंधन का दायित्व निभाएगा। चार्ज अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि कार्य समयबद्ध, पूर्ण कवरेज के साथ एवं त्रुटिरहित ढंग से संपन्न हो प्रशिक्षण व्यवस्था भी पूर्णतः डिजिटल प्रणाली के अनुरूप होगी। सर्वप्रथम क्षेत्रीय प्रशिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है, इसके उपरांत वे प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षण प्रदान करेंगे। सभी प्रशिक्षण संबंधी गतिविधियाँ सीएमएमएस पोर्टल के माध्यम से संचालित की जाएंगी।
प्रशिक्षण सत्र में जनगणना की प्रक्रिया, प्रपत्रों की भराई, क्षेत्र निर्धारण, वेब मैपिंग ऐप एवं क्रिएटर ऐप के माध्यम से जियो-टैगिंग, निगरानी व्यवस्था एवं रिपोर्टिंग प्रणाली पर विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।
कार्यशाला में तहसीलदार दीवान सिंह राणा, जिला सूचना विज्ञान अधिकारी हेमंत काला, मास्टर ट्रेनर शिवकुमार एवं कमल सहित सभी नामित चार्ज अधिकारी उपस्थित रहे।
“जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम से आम जन को मिली राहत- मुख्यमंत्री
उत्तरकाशी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को विकास खंड परिसर चिन्यालीसौड़ में आयोजित जन-जन की सरकार,जन -जन के द्वार कार्यक्रम में विभागीय स्टालों का निरीक्षण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों की समस्या एवं शिकायतें सुनते हुए मौके पर ही अधिकारियों की उपस्थिति में अधिकांश समस्याओं का निस्तारण किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा संचालित “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम से आम जन को राहत मिली है तथा प्रशासनिक व्यवस्था और अधिक सुगम और पारदर्शी हुई है। इस अभियान के तहत अब तक 600 से अधिक शिविर आयोजित किए जा चुके हैं। इन शिविरों में पाँच लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया, जबकि 40 हजार से ज्यादा लोगों को विभिन्न योजनाओं का सीधा लाभ प्रदान किया गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा है कि दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान के लिए जिला मुख्यालय तक न जाना पड़े। इसी उद्देश्य से अभियान चलाकर गांव-गांव में शिविर लगाए जा रहे हैं, जहां मौके पर ही समस्याओं का निराकरण किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पहल से आमजन को राहत मिली है और प्रशासनिक व्यवस्था अधिक सुलभ एवं पारदर्शी बनी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में हैली सेवा के विस्तार के लिए सरकार ने अहम निर्णय लिए है। उन्होंने कहा कि चिन्यालीसौड़ एवं गौचर हवाई पट्टी से हैली सेवा शुरू होगी। दोनों हवाई पट्टी सेना के माध्यम से संचालित करने की योजना है। उन्होंने कहा कि अप्रैल से चारधाम यात्रा शुरू हो जाएगी। सरकार ने यात्रा की तैयारी पहले से ही शुरू कर दी है। ताकि यात्री, श्रद्धालु यहां से अच्छा अनुभव लेकर जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार यात्रा शुरू कराने में समन्वयक के रूप में है जबकि असली यात्रा शुरू कराने में स्थानीय हितधारक, तीर्थ पुरोहित, होटल,टैक्सी, मैक्सी स्थानीय लोग है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पूरी दुनिया में सनातन का उद्घोष हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया का सिरमौर बनेगा प्रधानमंत्री ने जो विकसित भारत का संकल्प लिया है उसमें उत्तराखंड भी अपना महत्वपूर्ण रूप से योगदान देगा। मुख्यमंत्री ने महिला सशक्तिकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने तय किया है कि हमारी बहनों द्वारा उत्पादित उत्पादों की देश ही नही बल्कि दुनिया में पहचान मिल सके जिसके लिए निरंतर काम किया जा रहा है। कहा कि महिलाओं द्वारा जो भी उत्पाद बनाये जा रहे है उसकी देश और दुनिया में मांग बढ़ी है। इस दिशा में राज्य सरकार ने अब तक दो लाख से अधिक लखपति दीदियों को सशक्त किया है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने स्थानीय लोगों की मांग पर सीएचसी चिन्यालीसौड़ एवं महाविद्यालय का उच्चीकरण को सीएम घोषणा में सम्मिलित करने का आश्वसन दिया।
मुख्य सचिव आनन्द वर्द्धन ने इस अवसर पर अपने सम्बोधन में कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में जन-जन की सरकार,जन जन के द्वार अभियान सफलतापूर्वक चलाया गया है। जिसमें अब तक 5 लाख से अधिक नागरिकों ने प्रतिभाग किया तथा 40 हजार से अधिक नागरिकों के विभिन्न प्रकार के प्रमाण पत्र जारी किए गए। ग्रामीणों की छोटी-छोटी समस्याओं के निस्तारण के लिए संयुक्त टीमें गठित कर समस्याओं का मौके पर समाधान किया जा रहा है। जिनका निस्तारण नही किया जा सका उन्हें ऑनलाइन कर नियमित रूप से फॉलोअप करते हुए उनका निस्तारण किया जाएगा।
इस अवसर पर मुख्य सचिव आनन्द वर्द्धन, यमुनोत्री विधायक संजय डोभाल, दर्जाधारी राज्य मंत्री रामसुंदर नौटियाल, प्रताप पंवार, गीताराम गौड़, गढ़वाल समन्वयक किशोर भट्ट, प्रदेश मीडिया प्रभारी भाजपा मनवीर चौहान, प्रदेश उपाध्यक्ष भाजपा डॉ. स्वराज विद्वान, ब्लाक प्रमुख रणबीर सिंह महंत, नगर पालिका अध्यक्ष मनोज कोहली, अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं जिलाधिकारी प्रशान्त आर्य, पुलिस अधीक्षक कमलेश उपाध्याय, सहित अन्य जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।
उनके सुख-दुख और समस्याएं जानी, विभाग को दिए निस्तारित करने के आदेश
देहरादून। रोजमर्रा की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यस्तताओं से अलग उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने वृद्धाश्रमों में रह रही माताओं के बीच समय बिताया। उन्होंने डालनवाला स्थित प्रेम धाम और अम्बीवाला स्थित मां गौरी ओल्ड एज होम पहुंचकर वहां रह रही महिलाओं से मुलाकात की और उनकी समस्याओं व जरूरतों को करीब से जाना।
मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि एक बेटी के रूप में इन माताओं के बीच भावनात्मक एवं अनुरागयुक्त समय व्यतीत करना मेरे लिए अत्यंत अनूठा अनुभव रहा। कई माताएं पारिवारिक उपेक्षा या अन्य कारणों से यहां रहने को विवश हैं। हमारा दायित्व है कि उनके जीवन को सम्मान, सुरक्षा और संबल प्रदान करें।
मुलाकात के दौरान महिलाओं ने बताया कि वृद्धावस्था के कारण उन्हें बार-बार चिकित्सा सुविधा की आवश्यकता पड़ती है, लेकिन अस्पताल आने-जाने में सहयोग की कमी रहती है। इस पर मंत्री ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
कुछ महिलाओं ने ग्राम पंचायत स्तर पर ओल्ड एज केयर होम स्थापित करने का सुझाव भी दिया, ताकि गांवों में रहने वाले बुजुर्ग एक स्थान पर एकत्र होकर आपसी संवाद के माध्यम से भावनात्मक संबल प्राप्त कर सकें। इस पर मंत्री ने अधिकारियों से प्रस्ताव का परीक्षण कर व्यवहारिक कार्ययोजना तैयार करने को कहा।
महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि हम जल्द ही 60 वर्ष से अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए एक समग्र योजना लाएंगे। साथ ही वृद्धाश्रमों में रह रही माताओं को रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ा जाएगा, ताकि वे अप्रिय स्मृतियों से दूर रहकर सकारात्मक वातावरण में जीवन व्यतीत कर सकें।
उन्होंने महिलाओं को आगामी महिला दिवस पर आयोजित सांस्कृतिक एवं मनोरंजक कार्यक्रमों में शामिल होने का आमंत्रण भी दिया। उन्होंने महिलाओं से कहा कि उन्हें कार्यक्रम ले जाने के लिए वह एक बस भेजेंगी और वही बस उन्हें छोड़ने भी आएगी।
इस अवसर पर राज्य परियोजना अधिकारी मोहित चौधरी, आरती बलोदी, मीना बिष्ट, आशा कंडारी, सिस्टर अपर्णा, प्रतिभा बहुगुणा जोशी, अनीता बिष्ट, रेखा देवी, उषा देवी, रमेश लाल सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
मंत्री के गले लगा कर फूट कर रो पड़ी महिला
मां गौरी ओल्ड एज होम में जब कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या महिलाओं से उनके परिवार के बारे में बातचीत कर रही थी तो उषा देवी नाम की एक महिला मंत्री के गले लगा कर फूट फूट कर रो पड़ी। उसका कहना था कि उसके बेटे के निधन के बाद वह दुनिया में बिल्कुल अकेली रह गई है और परिवार के दूसरे लोग भी उनका साथ नहीं दे रहे हैं। इस पर कैबिनेट मंत्री ने उन्हें भरोसा दिलाया कि यहां उनके हर सुख दुख का ध्यान रखा जाएगा। वही प्रेम धाम में रह रही पूर्व अध्यापिका बीना एडवर्ड्स से जब कैबिनेट मंत्री ने पूछा कि वह उनसे और क्या उम्मीद करती है, तो बीना का कहना था कि बाकी सारी सुविधाएं तो मिल रही है लेकिन अपनेपन की बात करने वाला कोई नहीं मिलता, इसलिए आप यहां आते रहा करो।
काश बच्चे बड़े ना होते, छोटे ही रहते
प्रेम धाम आश्रम में एक महिला से जब मंत्री ने पूछा कि उन्हें अपने अतीत से क्या शिकायत है। तो महिला ने बड़े दार्शनिक अंदाज में जवाब दिया कि काश उनके बच्चे कभी बड़े ना होते और वह हमेशा छोटे ही रहते। महिला का कहना था कि बड़े होने के बाद बच्चे अपने-अपने परिवारों में व्यस्त हो गए और मां का ख्याल करना उन्होंने छोड़ दिया। इस पर मंत्री ने महिला से कहा कि यहां जितनी भी महिलाएं हैं उन्हें ही अपना परिवार समझिए और कोई समस्या हो तो महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग से कभी भी संपर्क किया जा सकता है।
ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने ‘चम्पावत सरस कॉर्बेट महोत्सव–2026’ में किया प्रतिभाग
चम्पावत। प्रदेश के ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने आज जनपद चम्पावत के टनकपुर में आयोजित ‘चम्पावत सरस कॉर्बेट महोत्सव–2026’ में मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता की। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने विभिन्न विभागों, स्वयं सहायता समूहों एवं स्थानीय उद्यमियों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण किया और उत्पादों की गुणवत्ता की सराहना करते हुए प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया। इस दौरान मंत्री गणेश जोशी ने पशु सखियों की मोबाइल फोन और विभिन्न स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को चैक तथा कृषकों को फार्म मिशनरी बैंक भी वितरित किया। कार्यक्रम के दौरान मंत्री गणेश जोशी ने बाल विकास विभाग द्वारा 25 बच्चों का सामूहिक जन्म दिवस भी कैक काटकर मनाया।
अपने संबोधन में ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि इस बार महोत्सव को “शीतकालीन कॉर्बेट महोत्सव” की थीम के साथ आयोजित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य प्रदेश में विंटर टूरिज्म को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन न केवल पर्यटन को प्रोत्साहित करते हैं, बल्कि स्थानीय कला, संस्कृति और उत्पादों को भी व्यापक पहचान दिलाते हैं।
ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि महोत्सव में मधुबनी चित्रकला एवं समकालीन कला कार्यशालाएं, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता, विज्ञान प्रदर्शनी, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां तथा विभिन्न जनजागरूकता कार्यक्रम शामिल हैं, जो इसे एक समग्र और आकर्षक आयोजन बनाते हैं। इसके अतिरिक्त, फूड फेस्टिवल के माध्यम से पारंपरिक व्यंजनों को विशेष मंच प्रदान किया गया है।उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक खाद्य सामग्री को प्रोत्साहन देने से स्वयं सहायता समूहों एवं छोटे उद्यमियों को आर्थिक सशक्तिकरण मिलेगा। मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि यह आयोजन युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को मजबूती देगा और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।
इस अवसर पर जिलाध्यक्ष गोविंद सामंत, गौरव सैनानी समिति अध्यक्ष कैप्टन भानी चन्द, जिलाधिकारी मनीष कुमार, मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) डॉ. जी.एस. खाती सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
छत्रपति शिवाजी महाराज ने पराधीनता के दौर में स्वाभिमान और स्वराज का शंखनाद कर राष्ट्र चेतना को नई दिशा दी- मुख्यमंत्री
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हिंदवी स्वराज्य के संस्थापक और महान योद्धा छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती के अवसर पर उन्हें कोटिशः नमन किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने उनके अद्वितीय शौर्य, साहस और सुशासन को याद करते हुए उन्हें राष्ट्र के लिए प्रेरणास्रोत बताया।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने पराधीनता के दौर में स्वाभिमान और स्वराज का शंखनाद कर राष्ट्र चेतना को नई दिशा दी।। उनकी दूरदर्शी रणनीति, प्रजा के प्रति संवेदनशीलता और धर्म-संस्कृति की रक्षा के प्रति समर्पण आज भी समाज को दिशा देने का काम करता है।
उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज के आदर्श और विचार हमें राष्ट्र निर्माण के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं और उनके बताए रास्ते पर चलकर ही एक सशक्त और समृद्ध भारत का निर्माण संभव है।
मुख्यमंत्री ने मरीजों से बातचीत कर स्वास्थ्य सुविधाओं पर लिया फीडबैक
देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राजकीय दून मेडिकल कॉलेज पहुंचकर वरिष्ठ पत्रकार कैलाश जोशी का हालचाल जाना और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
मुख्यमंत्री ने इस दौरान अस्पताल की व्यवस्थाओं का भी निरीक्षण किया। उन्होंने आपातकालीन कक्ष, विभिन्न वार्डों, दवा वितरण केंद्र और स्वच्छता व्यवस्था का जायजा लेते हुए अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए। साथ ही मरीजों को दी जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने को कहा।

निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके तीमारदारों से सीधे संवाद कर इलाज, दवाओं की उपलब्धता और जांच सुविधाओं को लेकर फीडबैक भी लिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक मजबूत बनाने के लिए लगातार संसाधनों का विस्तार कर रही है, ताकि आम लोगों को बेहतर और सुगम उपचार मिल सके।
देहरादून। मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने राज्य में नशे के विरुद्ध कार्रवाई को तेज करने और धनाभाव के कारण लंबित परियोजनाओं को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए हैं। सचिवालय में आयोजित अलग-अलग समीक्षा बैठकों में उन्होंने एनडीपीएस मामलों के त्वरित निस्तारण, नशा मुक्ति केंद्रों की स्थापना, जागरूकता अभियान चलाने तथा “मिसिंग लिंक फंडिंग” के माध्यम से अधूरी परियोजनाओं को पूरा करने पर विशेष जोर दिया।
एनसीओआरडी की 10वीं राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव ने एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज मामलों की समीक्षा करते हुए 546 लंबित प्रकरणों में दो माह के भीतर चार्जशीट दाखिल करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विवेचना और प्रभावी पैरवी सुनिश्चित कर नशा तस्करों को कड़ी सजा दिलाई जाए। साथ ही पौड़ी के कोटद्वार में नशा मुक्ति केंद्र स्थापित करने, सभी जिलों के अस्पतालों में 5 से 10 बेड डी-एडिक्शन के लिए आरक्षित करने और स्कूल-कॉलेजों में व्यापक जागरूकता अभियान चलाने को कहा। ड्रग डिटेक्शन किट के उपयोग, हॉटस्पॉट क्षेत्रों में निगरानी और एंटी ड्रग क्लबों को सक्रिय करने पर भी जोर दिया गया।
वहीं, “मिसिंग लिंक फंडिंग” की समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव ने विभिन्न विभागों की अधूरी और आंशिक रूप से वित्तपोषित परियोजनाओं के प्रस्ताव शीघ्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अतिरिक्त धनराशि मिलने से लंबित परियोजनाओं को पूरा कर जनहित के कार्यों को तेजी दी जा सकेगी। वित्त विभाग को प्रस्तावों का परीक्षण कर आवश्यक स्वीकृति देने तथा जिलाधिकारियों को पूर्ण परियोजनाओं का संचालन सुनिश्चित करने और उपयोगिता प्रमाण पत्र समय पर उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए।
मुख्य सचिव ने सभी विभागों को बेहतर समन्वय, पारदर्शिता और परिणामोन्मुख कार्यप्रणाली अपनाते हुए राज्यहित से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने को कहा।
देहरादून। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध निर्माण और अवैध प्लाटिंग के विरुद्ध लगातार सख्त अभियान चलाया जा रहा है। प्राधिकरण की टीम द्वारा नियमित निरीक्षण और शिकायतों के आधार पर चिन्हित स्थलों पर प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में ऋषिकेश क्षेत्र में नियमों के विपरीत किए जा रहे बहुमंजिला निर्माणों पर कड़ी कार्रवाई करते हुए सीलिंग की कार्यवाही की गई। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि बिना स्वीकृत मानचित्र के किसी भी प्रकार का निर्माण या भू-उपयोग परिवर्तन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
प्राधिकरण क्षेत्रान्तर्गत ऋषिकेश में निकट रेलवे स्टेशन, आदर्श नगर क्षेत्र में सिद्धार्थ सिंघल द्वारा किए जा रहे अवैध बहुमंजिला निर्माण को चिन्हित कर सील कर दिया गया। यह कार्रवाई सहायक अभियन्ता अभिषेक भारद्वाज, अवर अभियन्ता पूनम सकलानी, सुपरवाइजर एवं पुलिस बल की उपस्थिति में की गई। एमडीडीए ने आमजन से अपील की है कि किसी भी निर्माण कार्य से पूर्व विधिवत मानचित्र स्वीकृति अवश्य प्राप्त करें।
उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी का बयान
एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध निर्माण किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि शहरों का सुनियोजित विकास और सुरक्षित आधारभूत ढांचा सुनिश्चित करना प्राधिकरण की प्राथमिकता है। अवैध निर्माण न केवल शहरी सौंदर्य और मास्टर प्लान का उल्लंघन है, बल्कि भविष्य में जनसुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन व्यक्तियों द्वारा बिना मानचित्र स्वीकृति के निर्माण कार्य किए जा रहे हैं, उनके विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्राधिकरण की टीमें नियमित रूप से निरीक्षण कर रही हैं और शिकायतों पर त्वरित संज्ञान लिया जा रहा है। उन्होंने नागरिकों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि विकास कार्य नियमों के अनुरूप ही किए जाएं, ताकि क्षेत्र का संतुलित और सुरक्षित विकास सुनिश्चित हो सके।
सचिव मोहन सिंह बर्निया का बयान
एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि अवैध निर्माणों के विरुद्ध अभियान आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि संबंधित निर्माणकर्ता को पूर्व में नोटिस जारी किया गया था, किंतु संतोषजनक जवाब न मिलने पर सीलिंग की कार्रवाई की गई। सचिव ने चेतावनी दी कि बिना स्वीकृत मानचित्र के किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य पाए जाने पर तत्काल विधिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
मुख्यमंत्री धामी ने मुख्यमंत्री चैम्पियनशिप ट्रॉफी 2025-26 के समापन समारोह में किया प्रतिभाग
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को ननूरखेड़ा, देहरादून में मुख्यमंत्री चैम्पियनशिप ट्रॉफी 2025-26 के समापन समारोह में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने देहरादून जनपद को विजेता ट्रॉफी एवं 05 लाख रुपये का चेक प्रदान किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह भव्य समापन केवल एक प्रतियोगिता का अंत नहीं है, बल्कि उत्तराखंड के उज्ज्वल खेल भविष्य की नई शुरुआत है। खेल आयोजन आज हमारे गाँव-गाँव, न्याय पंचायतों और दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं को पहचान देने का एक सशक्त माध्यम बन चुका है। उत्तराखंड में खेल प्रतियोगिताएं अब जनचेतना का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड अब देवभूमि के साथ-साथ खेलभूमि भी बन चुका है। इस आयोजन में 11 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे खिलाड़ियों के खातों में भेजी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में आज भारत खेल जगत में नई ऊँचाइयों को छू रहा है। ‘खेलो इंडिया’ और ‘फिट इंडिया मूवमेंट’ जैसे अभियानों के माध्यम से देश में खेलों की संस्कृति को नई ऊर्जा मिली है। देश में फिटनेस एक जन आंदोलन बन चुकी है। हमारी युवा पीढ़ी खेलों के प्रति नए उत्साह और समर्पण के साथ आगे बढ़ रही है। आज भारत ओलंपिक, पैरालंपिक, एशियाई खेलों और कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ऐतिहासिक प्रदर्शन कर रहा है। हमारे खिलाड़ियों ने रिकॉर्ड संख्या में पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया है और कई खेलों में भारत ने विश्व पटल पर अपनी मजबूत पहचान स्थापित की है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में खेलों को नई प्राथमिकता मिली है। खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, संसाधन और सम्मान मिला है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में खेलों को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दे रही है। उत्तराखंड को देवभूमि के साथ खेलभूमि के रूप में स्थापित करने की दिशा में राज्य सरकार निरंतर आगे बढ़ी है। 38वें राष्ट्रीय खेलों का सफल और भव्य आयोजन इसका सशक्त प्रमाण बना है, जिसने उत्तराखंड का मान पूरे देश में बढ़ाया है। इन खेलों में हमारे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों ने 103 पदक जीतकर पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर 7वाँ स्थान हासिल किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड आधुनिक और विश्वस्तरीय खेल इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान बना रहा है। हमारे स्टेडियम, प्रशिक्षण केंद्र और सुविधाएँ अब राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की मेजबानी के लिए भी सक्षम हो चुकी हैं। सरकार द्वारा राज्य में स्पोर्ट्स लेगेसी प्लान पर कार्य किया जा रहा है, जिसके तहत प्रदेश के आठ प्रमुख शहरों में 23 खेल अकादमियाँ स्थापित की जाएँगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की नई खेल नीति में खिलाड़ियों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए अनेक प्रावधान किए गए हैं। हल्द्वानी में प्रदेश की पहली स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी बनाई जा रही है। इसमें खिलाड़ी आधुनिक कोचिंग, खेल विज्ञान और उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगे। मुख्यमंत्री खिलाड़ी प्रोत्साहन योजना और मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन योजना के माध्यम से युवा खिलाड़ियों को मासिक छात्रवृत्ति के साथ-साथ खेल उपकरण खरीदने के लिए आर्थिक सहायता भी प्रदान की जा रही है। सरकार खिलाड़ियों के साथ-साथ उन्हें तैयार करने वाले प्रशिक्षकों का भी पूरा ध्यान रख रही है। उनके मानदेय और प्रोत्साहन राशि में बढ़ोतरी की गई है, ताकि वे और बेहतर ढंग से नई प्रतिभाओं को आगे बढ़ा सकें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को सम्मान देने के लिए “उत्तराखंड खेल रत्न”, “द्रोणाचार्य पुरस्कार” और “हिमालय खेल रत्न” जैसे सम्मान भी दिए जा रहे हैं, जिससे खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों की मेहनत को सही पहचान मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष से खेल महाकुंभ तथा अन्य राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को सरकारी सेवाओं में आवेदन करने पर 4 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया जाएगा।
खेल मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि 23 नवम्बर 2025 से न्याय पंचायत स्तर से शुरू हुई खेल प्रतियोगिताओं का समापन 18 फरवरी 2026 को मुख्यमंत्री चैम्पियनशिप ट्रॉफी के साथ किया जा रहा है। इसमें हर खिलाड़ी और जनप्रतिनिधि को जोड़ा गया। इसमें 01 लाख 62 हजार से अधिक खिलाड़ियों ने प्रतिभाग किया। उन्होंने कहा कि इस आयोजन में 26 खेल स्पर्धाएँ शामिल की गईं। आगामी राष्ट्रीय खेलों, राष्ट्रमंडल खेलों और 2036 के ओलंपिक खेलों के लिए इस तरह के आयोजन खेल प्रतिभाओं को आगे लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।
इस अवसर पर विधायक उमेश शर्मा काऊ, विशेष प्रमुख सचिव खेल अमित सिन्हा, खेल निदेशक डॉ. आशीष चौहान, जिलाधिकारी देहरादून सविन बंसल, मुख्य विकास अधिकारी देहरादून अभिनव शाह एवं खेल विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।
