देहरादून। मसूरी–देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा प्राधिकरण क्षेत्रान्तर्गत किए जा रहे अवैध निर्माणों के विरुद्ध सख़्त रुख अपनाते हुए सीलिंग एवं ध्वस्तीकरण की कार्यवाही लगातार जारी है। प्राधिकरण की ओर से स्पष्ट किया गया है कि बिना स्वीकृति एवं नियमों के विरुद्ध किए जा रहे किसी भी प्रकार के निर्माण को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी क्रम में देहरादून के प्रगति विहार क्षेत्र में अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की गई। प्रगति विहार लेन संख्या-06, देहरादून में उपेन्द्र कुमार अग्रवाल द्वारा किए जा रहे अवैध निर्माण पर नियमानुसार कार्रवाई करते हुए सीलिंग की कार्यवाही की गई।
वहीं, इसी क्षेत्र में श्रेयष अग्रवाल द्वारा निर्मित अवैध टिन शैड को चिन्हित करते हुए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई अमल में लाई गई। दोनों ही मामलों में निर्माण प्राधिकरण से बिना स्वीकृति के किए जा रहे थे। उक्त कार्रवाई संयुक्त सचिव गौरव चटवाल के निर्देशों पर की गई, जिसमें सहायक अभियंता निशांत कुकरेती, अवर अभियंता जयदीप राणा एवं प्राधिकरण के सुपरवाइजर मौके पर उपस्थित रहे।
एमडीडीए ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य से पूर्व प्राधिकरण से विधिवत स्वीकृति अवश्य प्राप्त करें। नियमों की अनदेखी करने वालों के विरुद्ध भविष्य में भी इसी प्रकार सख़्त कार्रवाई जारी रहेगी। यह अभियान शहर को सुनियोजित, सुरक्षित एवं अवैध निर्माण मुक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उपाध्यक्ष एमडीडीए, बंशीधर तिवारी का बयान
प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध निर्माण किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं। मसूरी–देहरादून विकास प्राधिकरण शहर के सुनियोजित विकास के लिए प्रतिबद्ध है। नियमों को ताक पर रखकर किए जा रहे निर्माण न केवल शहर की व्यवस्था को प्रभावित करते हैं, बल्कि भविष्य में गंभीर समस्याएं भी पैदा करते हैं। एमडीडीए द्वारा लगातार निरीक्षण कर अवैध निर्माणों को चिन्हित किया जा रहा है और उनके विरुद्ध सख़्त कार्रवाई की जा रही है। आमजन से अपील है कि निर्माण से पूर्व प्राधिकरण की स्वीकृति अवश्य लें, अन्यथा नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
सचिव एमडीडीए, मोहन सिंह बर्निया का बयान
एमडीडीए द्वारा अवैध निर्माणों के विरुद्ध अभियान लगातार जारी रहेगा। प्राधिकरण क्षेत्र में बिना अनुमति किए गए निर्माणों को चिन्हित कर सीलिंग एवं ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा रही है। यह कदम शहर के सुनियोजित विकास और नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है। नागरिक सहयोग से ही अवैध निर्माणों पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।
देहरादून/नई दिल्ली। सदन मे शून्य काल के माध्यम से राज्यसभा सांसद एवं भाजपा राष्ट्रीय सह कोषाध्यक्ष डा. नरेश बंसल ने देवभूमि उत्तराखण्ड में ग्रामीण पर्यटन के विकास व विश्व प्रसिद्ध चारधाम के अलावा राज्य में अन्य स्थानों पर स्थित धार्मिक महत्व के पुरातन मन्दिर श्रृंखला जैसे पर्यटन को बढ़ावा देने की मांग सदन के माध्यम से केंद्र सरकार से की।
डा. नरेश बंसल ने सदन मे कहा कि ग्रामीण पर्यटन प्रकृति आधारित पर्यटन है जो प्रकृति प्रेमियों के लिए एक लोकप्रिय गंतव्य स्थान होता है। उन्होने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड एक पौराणिक, धार्मिक महत्व प्राकृतिक सौंदर्य के पूर्ण एक अत्यंत सुंदर क्षेत्र है, जो प्राकृतिक सुंदरता के साथ जीवन की हलचल से दूर शांतिपूर्ण विश्राम की तलाश करने वाले पर्यटकों को खूब आकर्षित करता है व खास तौर पर ग्रामीण पर्यटन और गंगा, यमुना, सरस्वती, सरयू नदी विभिन्न नदियों को संजोये विदेशी पर्यटकों और अपने देश के पर्यटकों को बहुत आकर्षित करता है।
डा. नरेश बंसल ने सदन मे कहा कि यह गंगा स्नान और शांत माहौल के लिए जाना जाता है। विश्राम और पानी के खेल के लिए भी आदर्श है। यह शहर और क्षेत्र पर्यटकों को ट्रेकिंग, कैम्पिंग और समृद्ध वनस्पतियों की खोज का अवसर प्रदान करता है। लाखामण्डल, पाताल भुवनेश्वरी आदि प्राचीन गुफायें, शहीद स्मारक व ऐतिहासिक स्थलों का भी घर है। जो उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी दर्शाता है। इसके अलावा कई वाटरफाॅल, जगंल और रमणीक स्थल हैं। इसके अलावा काफी पुरातन मन्दिर भी हैं जैसे लाखामण्डल, हनोल, धारी देवी लगभग हर तरफ गांव व शहर में प्राचीन धार्मिक महत्व के चिह्न विराजमान हैं।
डा. नरेश बंसल ने कहा कि इसके अलावा माता गंगा पर सभी स्थानों पर धार्मिक महत्व का कार्य जहां संतोषजनक है, वहीं यमुना नदी पर घाटों का निर्माण, स्नान व्यवस्था व नित्य आरती का ठोस इंतजाम होना बाकी है। यहां पर कई पौराणिक महोत्सव, मेले होते हैं जो कि, काफी सालों से पर्यटकों का आकर्षक स्थल बन चुके हैं।
डा. नरेश बंसल ने सदन मे कहा कि उत्तराखण्ड में ऐसे कई आईडेन्टिफाइड स्थान हैं और अनडेवलप्ड विलेज हैं जिनकों हम डेवलप्ड कर सकते हैं। हम सभी जानते हैं कि पर्यटन के इस रूप के विकास के कारण स्थानीय अर्थव्यवस्था पर जबरदस्त प्रभाव पड़ता है। आने वाले समय में ग्रामीण पर्यटन इस देवभूमि उत्तराखण्ड क्षेत्र के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में उभरेगा।
डा. नरेश बंसल ने सदन के माध्म से सरकार व पर्यटन मंत्री से आग्रह किया कि, उत्तराखण्ड जो प्रधानमंत्री के दिल में बसा है के सम्पूर्ण पर्यटन विकास खासतौर पर ग्रामीण पर्यटन और यमुना घाटों का निर्माण, पौराणिक मंदिर सर्किट पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उचित कार्यक्रम बनाने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित दें। हमें विश्वास है कि आपके महत्वपूर्ण मार्गदर्शन और उचित वित्तीय सहायता से उत्तराखण्ड की पर्यटन क्षमता को बढ़ाया जा सकता है।
युवाओं के कौशल विकास पर विशेष ध्यान देने के निर्देश
स्वरोजगार के लिए अधिकतम अवसर उपलब्ध कराने हेतु विभागों को तेजी से कार्य करने के निर्देश
पात्र लोगों को योजनाओं का समय पर एवं पूर्ण लाभ मिले- मुख्यमंत्री
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को सचिवालय में कृषि, पशुपालन, पर्यटन एवं उद्योग क्षेत्रों से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं के माध्यम से लोगों को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में विशेष ध्यान दिया जाए। ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान के माध्यम से लोगों को इन योजनाओं की संपूर्ण जानकारी प्रदान की जाए, ताकि वे इनका लाभ उठा सकें।
मुख्यमंत्री ने युवाओं के कौशल विकास पर विशेष ध्यान देने तथा उन्हें स्वरोजगार के लिए अधिकतम अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पात्र लोगों को योजनाओं का समय पर एवं पूरा लाभ मिले, इस पर सभी विभाग विशेष ध्यान दें। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि आवंटित बजट का पूर्ण आउटकम प्राप्त हो।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि उच्च स्तरीय बैठकों के कार्यवृत्त उन्नति पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड किए जाएं। उन्होंने सेब की अतिसघन बागवानी योजना की समीक्षा करते हुए कहा कि इस महत्वाकांक्षी योजना को प्रभावी ढंग से संचालित कर निर्धारित लक्ष्यों को समय से प्राप्त किया जाए तथा किसानों को अधिकाधिक प्रोत्साहन प्रदान किया जाए। यह भी सुनिश्चित किया जाए कि किसानों से संबंधित देयकों का भुगतान समय पर हो। किसानों को उनके उत्पादन का बेहतर मूल्य मिले, इसके लिए राज्य में कीवी उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में तेजी से कार्य किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शहद उत्पादन के क्षेत्र में उत्तराखंड में व्यापक संभावनाएं हैं। इसे देखते हुए ‘हनी मिशन’ के अंतर्गत शहद उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए और अधिक प्रभावी प्रयास किए जाएं। राज्य में शहद का ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि बागवानी एवं मौन पालन के क्षेत्र में जिन राज्यों में अच्छा कार्य हुआ है, उनके अध्ययन हेतु अधिकारियों एवं विशेषज्ञों की टीमें उन राज्यों में भेजी जाएं।
बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश के 29 उत्पादों को जी.आई. टैग प्राप्त हुआ है, जिनमें से 18 कृषि एवं कृषि कल्याण से संबंधित हैं। इस वर्ष 25 अन्य उत्पादों को जी.आई. टैग के लिए चिन्हित किया जाएगा। राज्य में 134 करोड़ रुपये की लागत से लागू स्टेट मिलेट पॉलिसी के अंतर्गत मंडुवा, झंगोरा, रामदाना, कौणी एवं चीना को शामिल किया गया है। इसके अंतर्गत प्रथम चरण में 30 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल के 24 विकासखंडों तथा द्वितीय चरण में 40 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल के 44 विकासखंडों का चयन किया गया है। प्रथम चरण में 5 हजार से अधिक गांवों को आच्छादित कर लगभग डेढ़ लाख कृषकों को लाभान्वित किया गया है। मिलेट फसलों की क्रय-विक्रय हेतु 216 क्रय केंद्र खोले गए हैं तथा सहकारिता विभाग के अंतर्गत 20 करोड़ रुपये का रिवाल्विंग फंड बनाया गया है। इस वित्तीय वर्ष में 5 हजार मीट्रिक टन के लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 5,386 मीट्रिक टन मिलेट फसलों का क्रय किया जा चुका है।
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना एवं मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना 2.0 के अंतर्गत चार वर्षों में 32 हजार के लक्ष्य के सापेक्ष 33,620 लाभार्थियों को 202.72 करोड़ रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई गई है। आगामी वर्ष में 9 हजार लोगों को लाभान्वित किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पर्यटन विभाग के अंतर्गत दीन दयाल उपाध्याय होम स्टे योजना के तहत चार वर्षों में 780 होम स्टे स्थापित किए गए हैं, जिसके लिए 188.58 करोड़ रुपये का वित्त पोषण किया गया है। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना के अंतर्गत चार वर्षों में एक हजार से अधिक लोगों को लाभान्वित किया गया है, जिसमें कुल 105 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि का वित्त पोषण किया गया है। राज्य में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत मत्स्य पालन क्षेत्र में 17,450 लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्राप्त हुआ है।
बैठक में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, गणेश जोशी, प्रमुख सचिव डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव नितेश झा, दिलीप जावलकर, विनय शंकर पाण्डेय, एस.एन. पाण्डेय, वी. षणमुगम, धीराज गर्ब्याल सहित संबंधित विभागों के उच्च अधिकारी उपस्थित रहे।
सोलर ऊर्जा से रोशन हुआ गांव, सुरक्षित और सतत विकास की ओर सशक्त कदम
पौड़ी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के हरित ऊर्जा, आत्मनिर्भरता और ग्रामीण सशक्तिकरण के दूरदर्शी विजन को धरातल पर साकार करते हुए विकासखंड बीरोंखाल की ग्राम पंचायत नौगांव ने सोलर ऊर्जा के माध्यम से सतत विकास की एक प्रेरणादायी पहल की है। सीमित संसाधनों के बावजूद दूरदर्शी योजना और सामूहिक प्रयासों से नौगांव आज जिले ही नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में उभर रहा है।
पूर्व में जहां गांव के अधिकांश मार्ग रात्रि में अंधेरे में डूबे रहते थे, वहीं अब सोलर ऊर्जा की बदौलत पूरा गांव उजाले से जगमगा रहा है। ग्राम पंचायत भवन की छत पर स्थापित तीन किलोवाट क्षमता के सोलर प्लांट से प्रतिदिन लगभग 16 यूनिट स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन किया जा रहा है। इस ऊर्जा को गांव में स्थापित 40 सोलर स्ट्रीट लाइटों से जोड़ा गया है, जिससे सभी प्रमुख मार्गों, सार्वजनिक स्थलों एवं आवासीय क्षेत्रों में समुचित प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित हुई है।
ग्राम प्रधान ओमपाल सिंह ने बताया कि यह सोलर प्लांट राज्य वित्त से लगभग दो लाख रुपये की लागत से एक वर्ष पूर्व स्थापित किया गया। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य केवल प्रकाश व्यवस्था सुदृढ़ करना नहीं, बल्कि गांव को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना भी है। उन्होंने बताया कि गांव में लगभग 70 परिवार निवास करते हैं और सोलर स्ट्रीट लाइटों से न केवल विद्युत व्यय में कमी आयी है, बल्कि रात्रिकालीन सुरक्षा एवं सुगमता भी सुनिश्चित हुई है।
जिला पंचायतीराज अधिकारी जितेंद्र कुमार ने नौगांव की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्र में सोलर ऊर्जा का प्रभावी उपयोग ग्राम पंचायत की सक्रियता और विकासोन्मुख सोच को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि यह नवाचार अन्य ग्राम पंचायतों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगा। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि ग्राम पंचायत नौगांव स्वच्छता के क्षेत्र में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर चुकी है। वर्ष 2023–24 में स्वच्छता कार्यों के लिए नौगांव को जनपद स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त हुआ था, जिसके लिए पंचायत को पांच लाख रुपये की पुरस्कार राशि से सम्मानित किया गया।
जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने कहा कि नौगांव ग्राम पंचायत द्वारा सौर ऊर्जा के माध्यम से की गयी यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में संसाधनों के कुशल उपयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है। इससे न केवल ऊर्जा की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है, बल्कि रात्रिकालीन सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक सुविधाओं की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का प्रयास है कि इस प्रकार के सफल मॉडल को अन्य ग्राम पंचायतों में भी चरणबद्ध रूप से अपनाया जाय, ताकि हर गांव सुरक्षित, स्वच्छ और आत्मनिर्भर बन सके।
गांव की रीना देवी, मीनाक्षी देवी, रविन्द्र रावत एवं जगदीप सिंह ने बताया कि सोलर प्लांट स्थापित होने के बाद गांव की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। प्रत्येक मार्ग पर प्रकाश व्यवस्था होने से सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है और ग्रामीणों को सुविधाजनक वातावरण मिला है। ग्रामीणों ने इस पहल को मुख्यमंत्री के विकास विजन से जुड़ा हुआ बताते हुए ग्राम पंचायत के प्रयासों की सराहना की।
नौगांव की यह पहल इस बात का सशक्त प्रमाण है कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में उत्तराखंड का हर गांव हरित, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में निरंतर अग्रसर है।
छात्रों को मिलेगा एआई और कोडिंग का प्रशिक्षण
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय से छात्र कौशल संवर्धन हेतु लैब ऑन व्हील्स (इंफोसिस स्प्रिंगबोर्ड) का फ्लैग ऑफ किया।
यह लैब ऑन व्हील्स छात्रों को ए.आई, कोडिंग, आई.ओ.टी एवं अन्य इमर्जिंग टेक क्षेत्रों में कौशल संवर्धन के लिए हैण्ड्स ऑन सुविधा उपलब्ध कराएगा। इसके साथ ही विज्ञान विषय के विभिन्न प्रयोगों को वर्चुअल मोड से सीखने में सहायता प्रदान करेगा।
लैब ऑन व्हील्स छात्रों को लर्निंग बाई डूइंग के लिए बेहतर प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराएगा। इंफोसिस स्प्रिंगबोर्ड लैब ऑन व्हील्स आगामी 05 वर्ष तक पूरे राज्य संस्थाओं में जाकर छात्रों को जागरूक करते हुए उनको हैण्स ऑन प्रशिक्षण प्रदान करेगा और उनको वैश्विक संभावनाओं से जोड़ेगा।
लैब ऑन व्हील्स राज्य में छात्रों के लिए हैण्स ऑन प्रशिक्षण की अनुपलब्धता को न्यून करेगा। लैब ऑन व्हील्स में उपलब्ध हैण्ड्स ऑन एवं प्रैक्टिकल्स उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं विद्यालयी शिक्षा ग्रहण कर रहे छात्रों हेतु उपयोगी है।
इस अवसर पर विधायक सविता कपूर, प्रमोद नैनवाल,उच्च शिक्षा उन्नयन समिति के उपाध्यक्ष डॉ. देवेन्द्र भसीन, डॉ. जयपाल सिंह चौहान, सचिव उच्च शिक्षा डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, उच्च शिक्षा, तकनीकि शिक्षा के अधिकारी एवं इंफोसिस प्रतिनिधि उपस्थित थे।
फिल्म “गोदान” का टीजर, गाना और पोस्टर लॉन्च
देहरादून। सनातन की आत्मा गौमाता में बसती है। आज के समय में जब हम अपनी जड़ों से दूर हो रहे हैं, यह फिल्म गुम हो रही गौमाता को बचाने और उनकी अहमियत को समझाने की एक बड़ी कोशिश है।
उक्त बात प्रदेश के पर्यटन धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने गुरुवार को सुभाष रोड़ स्थित अपने कैम्प कार्यालय में कामधेनु इंटरनेशनल प्रोडक्शन के बैनर तले गौ माता के महत्व पर बनी फिल्म “गोदान” के टीजर, गाने और पोस्टर लॉन्चिंग के अवसर पर कही। उन्होंने फिल्म निर्माण के लिए पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री इन दिनों बदलाव के एक बड़े दौर से गुजर रही है। अब यहाँ की फिल्में केवल पारंपरिक, पारिवारिक कहानियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि फिल्म निर्माता और निर्देशक अब सामाजिक मुद्दों से लेकर सस्पेंस-थ्रिलर जैसे अलग-अलग और लीग से हटकर विषयों पर फिल्में बना रहे हैं।
धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री महाराज ने कहा कि भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म में गौमाता की अहमियत को समझाने के लिए विनोद चौधरी के निर्देशन में बनी फीचर फिल्म ‘गोदान’ 6 फरवरी 2026 से पूरे देश के सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने वाली है। “गोदान” फिल्म को वैज्ञानिक नजरिये के साथ प्रस्तुत कर फिल्म के निर्माता निर्देशक, कलाकारों और गेस्ट ने समाज को एक बड़ा मैसेज देने का काम किया है। यह फिल्म केवल किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं, बल्कि देश के युवाओं को अपनी संस्कृति और सनातन मूल्यों से जोड़ने का एक मजबूत जरिया है।
महाराज ने कहा कि उनका विश्वास है कि अगर गौ हत्या जैसे अपराधों में शामिल लोग एक बार इस फिल्म को देख लें, तो उनका हृदय परिवर्तन अवश्य होगा। उन्होंने बताया कि 40 करोड़ रुपये की लागत से बनी फिल्म ‘गोदान’ की भव्यता को दर्शाने के लिए इसकी शूटिंग उत्तराखंड की वादियों, नोएडा, मथुरा और मुंबई के विभिन्न स्थानों पर की गई है। फिल्म की कहानी को जीवंत बनाने के लिए इसमें कई सच्ची घटनाओं को भी शामिल किया गया है। ‘गोदान’ फिल्म मनोरंजन के साथ-साथ एक गंभीर सामाजिक और आध्यात्मिक संदेश भी लेकर आ रही है।
फिल्म “गोदान” के टीजर, गाने और पोस्ट लॉन्चिंग के अवसर पर श्री बद्रीनाथ श्री केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी, विश्व संवाद केंद्र के प्रबंधक सुरेंद्र मित्तल, कामधेनु गौशाला समिति की सदस्य सुश्री मनिका शर्मा सहित टीम के कई सदस्य उपस्थित थे।
कई क्षेत्रों में सड़कों पर बर्फ जमने से आवाजाही ठप
चमोली। चमोली जिले में बारिश और बर्फबारी ने जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। जिले के 77 से अधिक गांव प्रभावित हुए हैं, जबकि राष्ट्रीय राजमार्गों सहित कई प्रमुख सड़कें बंद हो गई हैं। कई क्षेत्रों में बर्फ जमने से आवाजाही ठप हो गई है और ग्रामीण अपने घरों में कैद होने को मजबूर हैं।
बर्फबारी के चलते लोगों को मवेशियों के चारे और पीने के पानी की भारी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सड़कों पर जमी बर्फ और फिसलन के कारण छोटे वाहन भी नहीं चल पा रहे हैं।
बंड विकास संगठन के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह नेगी ने बताया कि ऊपरी इलाकों में भारी बर्फबारी से सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। सड़कें बंद होने से ग्रामीणों का संपर्क मुख्य बाजारों और स्वास्थ्य सेवाओं से कट गया है। वहीं, रामणी गांव के पूर्व प्रधान सूरज पंवार ने कहा कि सड़क पर अत्यधिक फिसलन के कारण किसी भी प्रकार के वाहन का संचालन संभव नहीं हो पा रहा है।
मंगलवार दोपहर बाद जिले में बारिश और बर्फबारी का सिलसिला शुरू हुआ, जो पूरी रात जारी रहा। बुधवार पूर्वाह्न करीब 11 बजे मौसम साफ हुआ और धूप खिली, हालांकि देर शाम फिर से बादल छाने लगे, जिससे ठंड और बढ़ गई।
सीमांत क्षेत्र ज्योतिर्मठ के आसपास के लगभग 36 गांव बर्फबारी से प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा चमोली, पोखरी, गैरसैंण, थराली, कर्णप्रयाग और नंदानगर विकासखंडों के कई गांवों में भी बर्फ जमने से जनजीवन प्रभावित हुआ है। हालांकि ज्योतिर्मठ क्षेत्र के कुछ सीमांत गांवों से लोग पहले ही शीतकालीन प्रवास पर निचले क्षेत्रों में जा चुके हैं, लेकिन शेष गांवों में हालात कठिन बने हुए हैं।
बर्फ से प्रभावित गांवों में ज्योतिर्मठ क्षेत्र के पांडुकेश्वर, औली, तपोवन, द्रोणागिरी, नीती, माणा, मलारी, गमशाली, बाम्पा सहित अनेक गांव शामिल हैं। वहीं चमोली क्षेत्र के बमियाला, अनसूया, पाणा, गैरसैंण के दीवालीखाल और भराड़ीसैंण, थराली क्षेत्र के ग्वालदम, लोहाजंग, वाण तथा घाट क्षेत्र के सुतोल, कनोल, रामणी, सितेल सहित कई गांवों में बर्फबारी का असर देखा गया है।
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राजकीय दून मेडिकल कॉलेज, पटेलनगर में 1035 सहायक अध्यापकों (प्राथमिक शिक्षा) को नियुक्ति पत्र प्रदान किए, जिनमें 17 विशेष शिक्षक भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने सभी अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए आशा व्यक्त की कि सभी युवा शिक्षक राज्य में शिक्षा का स्तर बेहतर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि आज से आपके कंधों पर उत्तराखंड के भविष्य को संवारने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी आ गई है। जब किसी बच्चे को गुणवत्तापूर्ण और संस्कारयुक्त शिक्षा मिलती है, तो वह केवल अपना जीवन ही नहीं संवारता, बल्कि समाज और राष्ट्र के निर्माण में भी अमूल्य योगदान देता है। शिक्षक देश के उज्ज्वल भविष्य के शिल्पकार हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों को उत्कृष्ट शिक्षा देने के साथ-साथ उनमें समाज, संस्कृति और राष्ट्र के प्रति कर्तव्य की भावना भी विकसित करें, जिससे वे शिक्षा के साथ संस्कारवान और जिम्मेदार नागरिक भी बनें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। विद्यालयों के आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ करने से लेकर डिजिटल शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण और कौशल विकास तक हर स्तर पर व्यापक सुधार किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में पिछले साढ़े चार वर्षों में 28 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी मिली है। यह केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि हमारे युवाओं के आत्मसम्मान की जीत है। इन साढ़े चार वर्षों में जितनी नौकरियां युवाओं को मिली हैं, वह राज्य गठन के बाद और पूर्ववर्ती सरकारों के समय से दो गुना से भी अधिक है। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं के भविष्य से किसी को खिलवाड़ नहीं करने देगी।
शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि पिछले साढ़े चार साल में शिक्षा विभाग में 11 हजार 500 से अधिक नियुक्तियां प्रदान की गई हैं। 3 हजार 500 से अधिक विभिन्न पदों पर भर्ती प्रक्रिया गतिमान है, जिसमें प्रवक्ता एवं चतुर्थ श्रेणी कार्मिकों सहित समग्र शिक्षा के अंतर्गत विभिन्न पद शामिल है। उन्होंने कहा कि राज्य में शिक्षा में नवाचार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जिसके तहत विद्यालयों में हाइब्रिड मोड़ में स्मार्ट क्लास का संचालन, कम्प्यूटर लैब, विभिन्न विषयों की आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित प्रयोगशालाएं शामिल है। इसके अलावा विद्यालयों में मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही है। डॉ रावत ने कहा कि प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को निरंतर मजबूत किया जा रहा है ताकि प्रदेश के नौनिहालों को बेहतर व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। डॉ रावत ने नवनियुक्त शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सभी शिक्षक अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी ईमानदारी से करेंगे व शिक्षा के क्षेत्र में अनुपम उदाहरण पेश करेंगे।
इस अवसर पर शिक्षा महानिदेशक दीप्ति सिंह, निदेशक माध्यमिक शिक्षा डॉ. मुकुल कुमार सती, निदेशक प्राथमिक शिक्षा अजय नौडियाल, निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण वंदना गर्ब्याल, अपर निदेशक कंचन देवराड़ी उपस्थित थे।
हरिद्वार में अनाज भंडारण को भूमि चयन कर शीघ्र डीपीआर बनाने के निर्देश
कहा, सहकारी समितियों को सशक्त व पारदर्शी बनाने को नियमावली में होगा संशोधन
देहरादून। सूबे के सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने आज शासकीय आवास पर सहकारिता विभाग की समीक्षा बैठक ली। जिसमें उन्होंने प्रदेश में 643 नई बहुउद्देश्यीय पैक्स (PACS) समितियों का गठन, सहकारी क्षेत्र में अनाज भंडारण योजना, तीन नई राष्ट्रीय सहकारी समितियों, एनसीईआरटी की गतिविधियों में राज्य की भागीदारी, तथा फरवरी माह में गुजरात में प्रस्तावित सहकारिता सम्मेलन की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की।
कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि गुजरात में प्रस्तावित सहकारिता सम्मेलन के सभी कार्य बिंदुओं पर समयबद्ध ढंग से तैयारियाँ पूर्ण की जाएँ। उन्होंने कहा कि सहकारिता क्षेत्र को पारदर्शी, सुदृढ़ एवं आत्मनिर्भर बनाने के लिए सभी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में सचिव सहकारिता डॉ. इकबाल अहमद ने जानकारी देते हुए बताया कि राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों के दृष्टिगत 643 नई पैक्स के गठन का प्रस्ताव है, जिसके सापेक्ष 621 पैक्स का गठन पूर्ण किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि निबंधक कार्यालय के निर्माण के संबंध में शीघ्र ही चिन्हित भूमि पर निर्माण कार्य प्रारंभ किया जाएगा। इसके अतिरिक्त जिला सहकारी बैंकों में वर्ग-एक, वर्ग-दो एवं वर्ग-तीन के कुल 177 रिक्त पदों पर आईबीपीएस के माध्यम से भर्ती प्रक्रिया संपादित की जाएगी।
सचिव सहकारिता ने यह भी बताया कि शीघ्र ही कैडर नियमावली में संशोधन करते हुए 350 प्रोफेशनल सचिवों की नियुक्ति की जाएगी। वहीं सहकारी समिति अधिनियम-2003 एवं नियमावली-2004 में आवश्यक संशोधन कर सहकारी समितियों को और अधिक पारदर्शी एवं सशक्त बनाया जाएगा।
निबंधक सहकारिता डॉ मेहरबान सिंह बिष्ट ने विभागीय प्रगति की जानकारी देते हुए बताया कि सहकारी संस्थाओं के डिजिटलीकरण, मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण एवं शासन स्तर पर सुधारात्मक कदमों से सहकारिता आंदोलन को नई दिशा मिल रही है और भंडारण योजना के अंतर्गत जनपद हरिद्वार की चार पैक्स में 1000 मेट्रिक टन के गोदाम हेतु भूमिका चयन व इसकी डीपीआर तैयार कर ली गई है राज्य की भौगोलिक स्थिति की दृष्टिगत राज्य में समस्त जनपदों में 95 विकास करो में रिक्त पड़ी भूमि पर न्यूनतम 50 से लेकर 500 मेट्रिक टन के कुल 95 गोदाम बनाए जाने की कार्यवाही गतिमान है तीन बहु राज्य सहकारी समितियां के गठन के तहत एन सी ओ एल नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट समिति भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड के साथ समझौता किया जाना है। राज्यों में सहकारिता कानून में वर्तमान समय अनुसार अपेक्षित बदलाव की आवश्यकता अनुसार विशेषज्ञ कमेटी का गठन किया गया है कमेटी द्वारा प्रेषित सुझाव संस्कृतियों का संकलन कर शासन को अनुमोदन हेतु पत्र प्रेषित किया गया है
कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि वे दो सप्ताह बाद पुनः सहकारिता विभाग की समीक्षा बैठक करेंगे, जिसमें गुजरात सम्मेलन से संबंधित सभी तैयारियाँ एवं आवश्यक पत्रावलियाँ पूर्ण कर ली जाएँ।
बैठक में सचिव सहकारिता डॉ इकबाल अहमद निबंधक सहकारिता डॉ मेहरबान सिंह बिष्ट अनु सचिव सुरेंद्र दत्त बेलवाल अपर निबंधक श्रीमती ईरा उप्रेती आनंद शुक्ल, संयुक्त निबंधक एमपी त्रिपाठी, उप निबंधक रमिंद्री मंदरवाल,सहायक निबंधक राजेश चौहान उपस्थित रहे।
108 समेत सभी एंबुलेंस निःशुल्क होंगी, स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए 33.60 लाख की मंजूरी
पौड़ी। जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में जनपद की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की समीक्षा बैठक ली। बैठक में जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य संसाधनों के युक्तिसंगत उपयोग पर विशेष बल देते हुए निर्देश दिए कि आमजन को उनके घर के निकटस्थ केंद्रों में अधिकतम स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करायी जाएं।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि 108 एंबुलेंस सेवाओं के साथ साथ विभागीय एंबुलेंस निःशुल्क भेजी जाएं। उन्होंने स्वास्थ्य परिवहन व्यवस्था को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए निर्देश दिए कि एंबुलेंस की उपलब्धता हर स्थिति में सुनिश्चित हो। उन्होंने एम्बुलेंसों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया बनाने तथा लॉग बुक मेंटेन करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र में इस प्रकार की छोटी-छोटी आवश्यकताओं को पूर्ण करने के लिए 33.60 लाख रुपए की स्वीकृति दी।
बैठक में जिलाधिकारी ने टीबी जांच हेतु उपलब्ध मोबाइल एक्स-रे वाहन की स्थिति की जानकारी ली तथा पैथोलॉजी जांच व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में निर्धारित सभी आवश्यक स्वास्थ्य परीक्षण नियमित रूप से किए जाएं तथा उनकी सूची स्पष्ट रूप से केंद्रों पर चस्पा की जाय। जिलाधिकारी ने अल्ट्रासाउंड व्यवस्थाओं को सुचारु करने के लिए तकनीशियनों को युक्तिसंगत रूप से नियुक्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने ख़राब अल्ट्रासाउंड मशीनों की मरम्मत के लिए धनराशि भी स्वीकृत की। साथ ही उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं को घर के निकटस्थ स्वास्थ्य केंद्रों में अल्ट्रासाउंड सुविधा मिले तथा उन्हें लंबी दूरी तय न करना पड़े, इसके लिए साप्ताहिक रोस्टर बनाया गया है। उन्होंने बताया कि सतपुली तथा बीरोंखाल में यह सुविधा शुरू हो गयी है तथा पाबौ में शीघ्र प्रारंभ होने वाली है।
जिलाधिकारी ने संस्थागत प्रसवों की प्रगति की जानकारी लेते हुए सभी प्रसवों को प्रभावी रूप से ट्रैक करने के निर्देश दिए। उन्होंने विशेष रूप से उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की स्थिति पर सतत एवं गहन निगरानी सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में संस्थागत प्रसवों की संख्या न्यूनतम है, वहां संबंधित स्वास्थ्य कर्मियों की जवाबदेही तय करते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाय। चर्चा में पाया गया कि कुछ स्थानों पर खुशियों की सवारी सेवा कार्य उपलब्ध नहीं है। जिलाधिकारी ने असेवित स्वास्थ्य केंद्रों में ‘खुशियों की सवारी’ सेवा के आंतरिक वितरण के सुचारु रूप से संचालन पर जोर दिया, जिससे संस्थागत प्रसव सुनिश्चित हो सके।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि यदि रेफरल अति आवश्यक हो तो गंतव्य अस्पताल को सूचित गया जाय तथा यह सुनिश्चित किया जाय कि रेफर किया गया मरीज सुरक्षित रूप से निर्धारित उच्च स्तरीय चिकित्सालय तक पहुंचे।
इसके अतिरिक्त जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य उपकरणों एवं अवसंरचना की स्थिति, जनपद में ओपीडी की प्रगति की समीक्षा की तथा टेलीमेडिसिन सेवाओं के अधिकतम उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने मुख्य चिकित्साधिकारी को निर्देश दिए कि टेलीमेडिसिन के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु आवश्यक प्रावधान शीघ्र सुनिश्चित किए जाएं।
इस अवसर पर एसीएमओ डॉ. पारुल गोयल, डॉ. विनय त्यागी, ग्रामोत्थान परियोजना प्रबंधक कुलदीप बिष्ट सहित अन्य उपस्थित रहे।
