मुख्य न्यायाधीश बोले— स्वच्छ हवा का अधिकार पूरे देश को, केवल राजधानी को नहीं
नई दिल्ली। दिवाली नज़दीक आते ही एक बार फिर पटाखों पर बहस तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए सवाल उठाया कि आखिरकार पटाखों पर रोक सिर्फ दिल्ली-एनसीआर तक ही क्यों सीमित है? मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने स्पष्ट कहा कि स्वच्छ हवा का अधिकार पूरे देश के नागरिकों को है, केवल दिल्ली वालों को नहीं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि पटाखों को लेकर कोई भी नीति राष्ट्रीय स्तर पर समान होनी चाहिए।
सीजेआई गवई ने उदाहरण देते हुए कहा कि बीते साल वे अमृतसर में थे, जहां की हवा दिल्ली से भी ज्यादा प्रदूषित थी। ऐसे में यह मानना गलत होगा कि सिर्फ दिल्ली में विशेष नियम लागू हों। कोर्ट का कहना है कि अगर बैन जरूरी है, तो वह पूरे देश में लागू होना चाहिए।
वायु गुणवत्ता आयोग को नोटिस
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील अपराजिता सिंह ने भी कोर्ट की इस राय का समर्थन किया और कहा कि प्रदूषण बढ़ने पर अमीर लोग तो आसानी से दिल्ली छोड़कर दूसरी जगह चले जाते हैं, लेकिन बाकी जनता को जहरीली हवा में जीना पड़ता है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में पटाखों पर प्रतिबंध की मांग वाली याचिका पर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) को नोटिस जारी किया।
पहले भी लागू हो चुके हैं सख्त नियम
गौरतलब है कि बीते वर्षों में दिल्ली और एनसीआर में पटाखों पर लगातार कड़े प्रतिबंध लगाए जाते रहे हैं। दिल्ली सरकार ने 19 दिसंबर 2024 को सालभर के लिए पटाखों की बिक्री और भंडारण पर पूरी तरह रोक लगाई थी। इसके बाद जनवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने इस बैन को उत्तर प्रदेश और हरियाणा के एनसीआर जिलों तक बढ़ा दिया। अप्रैल 2025 में कोर्ट ने साफ कर दिया कि यह रोक सालभर लागू रहेगी और इसमें ग्रीन पटाखे भी शामिल होंगे। मई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए और चेतावनी दी कि उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई होगी।
विजय पर तंज, कहा राजनीति 24×7 की जिम्मेदारी, शनिवार-रविवार से जनता का भरोसा नहीं मिलता
चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में इन दिनों बयानबाज़ी तेज हो गई है। भाजपा नेता के. अन्नामलाई ने अभिनेता और टीवीके (तमिलगा वेत्री कषगम) के संस्थापक विजय कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि राजनीति केवल सप्ताहांत की गतिविधि नहीं हो सकती। अन्नामलाई का तर्क है कि विजय अगर अपनी पार्टी को डीएमके का विकल्प बताना चाहते हैं, तो उन्हें सातों दिन सक्रिय रहना होगा, क्योंकि राजनीति चौबीसों घंटे समर्पण मांगती है।
अन्नामलाई ने दावा किया कि भाजपा ही वास्तविक तौर पर डीएमके का विकल्प है, क्योंकि इसके कार्यकर्ता पूरे साल जमीनी स्तर पर सक्रिय रहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि एआईएडीएमके नेता एडप्पादी के. पलानीस्वामी लगातार जिलों में जाकर जनसभाएं कर रहे हैं, जबकि विजय केवल शनिवार और रविवार को जनता से जुड़ते हैं।
भाजपा नेता ने तंज कसते हुए कहा कि अगर टीवीके वास्तव में राज्य की वैकल्पिक ताकत बनना चाहती है, तो उसके नेता को भी गंभीरता और नियमितता के साथ राजनीति करनी होगी।
इस बीच, अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके 13 सितंबर को मरक्कदाई में बैठक करने जा रही है। माना जा रहा है कि यहीं से विजय आगामी विधानसभा चुनाव के लिए अपने प्रचार अभियान की शुरुआत करेंगे। तमिलनाडु पुलिस ने बैठक को मंजूरी तो दी है, लेकिन कई शर्तों के साथ। कार्यक्रम की अवधि सिर्फ 25 मिनट होगी और किसी भी तरह के रोड शो या जुलूस की अनुमति नहीं दी जाएगी। प्रचार सीमित दायरे में केवल तिरुचिरापल्ली तक रहेगा।
पुलिस ने साफ किया है कि रैली में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने नहीं दी जाएगी। तय कार्यक्रम के अनुसार, विजय का प्रचार 10:35 से 11 बजे तक ही चलेगा और वाहनों की संख्या उनके काफिले तक ही सीमित रहेगी। इसके अलावा पार्टी पदाधिकारियों के लिए पैदल मार्च या बड़े जुलूस पर पूरी तरह रोक होगी।
जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद बने नए उपराष्ट्रपति
नई दिल्ली। सीपी राधाकृष्णन ने आज देश के 15वें उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित गरिमामय समारोह में उन्हें पद की शपथ दिलाई। 67 वर्षीय राधाकृष्णन ने उपचुनाव में इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार पूर्व जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी को 152 मतों से पराजित किया। यह चुनाव 9 सितंबर को हुआ था, जो पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे के बाद आयोजित कराया गया।
महाराष्ट्र के राज्यपाल पद से इस्तीफा
उपराष्ट्रपति निर्वाचित होने के बाद राधाकृष्णन ने महाराष्ट्र के राज्यपाल पद से त्यागपत्र दे दिया था। राष्ट्रपति भवन से जारी बयान के अनुसार, उनके इस्तीफे के बाद गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत को महाराष्ट्र का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। अब देवव्रत दोनों राज्यों के राज्यपाल के तौर पर जिम्मेदारी निभाएंगे।
धनखड़ के इस्तीफे के बाद बने नए उपराष्ट्रपति
संसद के मानसून सत्र के दौरान जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर पद से इस्तीफा दे दिया था, जबकि उनका कार्यकाल अभी दो साल बाकी था। इसी वजह से मध्यावधि चुनाव की नौबत आई।
छात्र आंदोलन से उपराष्ट्रपति तक का सफर
राधाकृष्णन की राजनीतिक यात्रा बेहद असाधारण रही है। छात्र आंदोलन से शुरुआत करने वाले राधाकृष्णन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े और वहीं से भाजपा की राजनीति में आए। संगठन में लंबे समय तक काम करते हुए उन्होंने तमिलनाडु भाजपा की कमान संभाली और कई अभियानों का नेतृत्व किया। 2007 में उनकी 93 दिन की रथ यात्रा विशेष रूप से चर्चा में रही, जिसमें उन्होंने नदियों को जोड़ने, आतंकवाद उन्मूलन, समान नागरिक संहिता और नशे के खिलाफ जनजागरूकता जैसे मुद्दे उठाए।
राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव से परिपूर्ण
राधाकृष्णन को संगठन और प्रशासन, दोनों क्षेत्रों में मजबूत नेता माना जाता है। उनके समर्थक उन्हें ‘तमिलनाडु का मोदी’ भी कहते हैं। वह महाराष्ट्र और झारखंड के राज्यपाल रहे, साथ ही तेलंगाना और पुडुचेरी का अतिरिक्त कार्यभार भी संभाला। 1998 और 1999 में वह कोयंबटूर से लोकसभा सांसद चुने गए। संसद में उन्होंने स्थायी समितियों और विशेष जांच समितियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान
राधाकृष्णन ने 2004 में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया और ताइवान जाने वाले पहले भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा बने। बाद में उन्हें कॉयर बोर्ड का अध्यक्ष भी बनाया गया, जहां उनके नेतृत्व में नारियल रेशे के निर्यात में रिकॉर्ड वृद्धि हुई।
प्रधानमंत्री ने कहा – ‘भागवत वसुधैव कुटुम्बकम की जीवंत मिसाल’, शाह और राजनाथ ने सराहा योगदान
नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत गुरुवार को 75 वर्ष के हो गए। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत कई दिग्गज नेताओं ने उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। नेताओं ने उनके नेतृत्व में संघ द्वारा किए गए कार्यों और समाज पर पड़े सकारात्मक प्रभाव की सराहना की।
प्रधानमंत्री मोदी की शुभकामनाएं
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि मोहन भागवत “वसुधैव कुटुम्बकम” की भावना के जीवंत प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि 2009 से अब तक का उनका कार्यकाल संघ के इतिहास में परिवर्तनकारी रहा है। साथ ही प्रधानमंत्री ने उनके दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की कामना की।
नेताओं ने सराहा योगदान
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भागवत ने समाज सेवा और युवा पीढ़ी के चरित्र निर्माण में अमूल्य योगदान दिया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उन्हें भारत की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण का प्रेरणास्रोत बताया। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि उनके नेतृत्व में संघ ने सेवा, समर्पण और एकता का संदेश जन-जन तक पहुंचाया है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी उन्हें शुभकामनाएं दीं।
संघ प्रचारक से सरसंघचालक तक
संघ प्रचारक के बेटे मोहन भागवत 2009 से आरएसएस के सरसंघचालक हैं। उन्होंने विभिन्न पदों पर रहते हुए देशभर में कार्य किया और हाल ही में अल्पसंख्यकों से संवाद के लिए तीन दिवसीय कार्यक्रम भी आयोजित किया। भागवत के कई विचार जैसे—“हर मस्जिद के नीचे शिवलिंग खोजने की जरूरत नहीं है” और “भारत में सभी का डीएनए एक है”—अक्सर चर्चा में रहे हैं। वे लगातार एक समावेशी दृष्टिकोण और सामाजिक सद्भाव के पक्षधर माने जाते हैं।
संजय राउत का हमला—“खून और क्रिकेट साथ-साथ नहीं चल सकते”
नई दिल्ली। एशिया कप 2025 में भारत-पाकिस्तान मुकाबले को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने इस मैच का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलना देशद्रोह और बेशर्मी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आतंकवाद के मुद्दे पर दोहरा रवैया अपना रही है।
राउत ने कहा, “आपने कहा था कि पानी और खून साथ-साथ नहीं बह सकते, तो फिर खून और क्रिकेट कैसे साथ-साथ चल सकते हैं? यह देश की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है। पहलगाम हमले में हमारी 26 महिलाएं विधवा हुईं, उनका दर्द आज भी जिंदा है। फिर भी आप पाकिस्तान के साथ खेल रहे हैं। यह देशद्रोह है।”
उन्होंने साफ किया कि यह सवाल उनकी सरकार से नहीं बल्कि भाजपा, आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल से है कि इस फैसले में उनकी भूमिका क्या है।
प्रसारण रोकने की मांग
इससे पहले उद्धव गुट की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी एशिया कप में संभावित भारत-पाकिस्तान मैच के प्रसारण पर रोक लगाने की मांग की थी। उन्होंने केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव को लिखे पत्र में कहा था कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत सरकार का यह कदम राष्ट्रीय हित और जनभावना के खिलाफ है।
प्रियंका ने लिखा, “ऑपरेशन सिंदूर का मकसद पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेनकाब करना था। ऐसे में अब उसके साथ क्रिकेट खेलना उस संदेश को कमजोर करता है। यह निर्णय मेरी अंतरात्मा को स्वीकार्य नहीं है।”
एनडीए उम्मीदवार ने विपक्षी बी. सुदर्शन रेड्डी को 152 वोटों से दी मात
नई दिल्ली। भारत को नया उपराष्ट्रपति मिल गया है। एनडीए के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन ने चुनाव में जीत दर्ज कर ली। उन्होंने विपक्षी गठबंधन इंडिया के प्रत्याशी बी. सुदर्शन रेड्डी को बड़े अंतर से हराया। राधाकृष्णन को 452 वोट मिले, जबकि रेड्डी 300 वोटों पर सिमट गए। अब राधाकृष्णन देश के 15वें उपराष्ट्रपति के तौर पर शपथ ग्रहण करेंगे। यह पद जुलाई से खाली पड़ा था, जब पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने इस्तीफा दिया था।
उपराष्ट्रपति का पद भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में बेहद अहम माना जाता है। यह देश का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद है। उपराष्ट्रपति का कार्यकाल पाँच वर्षों का होता है, लेकिन नए उत्तराधिकारी के पद ग्रहण करने तक वे पद पर बने रहते हैं।
संविधान में यह स्पष्ट उल्लेख नहीं है कि यदि किसी कारण (जैसे इस्तीफा, मृत्यु) से कार्यकाल समाप्त होने से पहले पद रिक्त हो जाए या उपराष्ट्रपति अस्थायी रूप से राष्ट्रपति का कार्यभार संभालें, तो उनकी जिम्मेदारियों का निर्वहन कौन करेगा।
नई जिम्मेदारियों के साथ सीपी राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति पद से जुड़ी कई सुविधाएँ और वेतन-भत्ते भी मिलेंगे। उपराष्ट्रपति राज्यसभा के सभापति भी होते हैं, इसलिए उनकी भूमिका केवल औपचारिक नहीं बल्कि संसदीय कार्यप्रणाली को दिशा देने वाली होती है।
30 सितंबर तक ऑनलाइन आवेदन करने का मौका
नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 10वीं और 12वीं के प्राइवेट छात्रों के लिए परीक्षा पंजीकरण प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह प्रक्रिया आज से शुरू होकर 30 सितंबर तक चलेगी। छात्र बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट www.cbse.nic.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि पंजीकरण और फीस का भुगतान केवल ऑनलाइन माध्यम से ही किया जाएगा। पांच विषयों के लिए आवेदन शुल्क 1600 रुपये तय किया गया है, जबकि एक विषय के लिए 320 रुपये शुल्क लगेगा। अतिरिक्त विषय या प्रैक्टिकल परीक्षा के लिए भी अलग से शुल्क देना होगा। 30 सितंबर तक आवेदन नहीं करने वाले छात्र 3 अक्टूबर से 11 अक्टूबर तक लेट फीस (2000 रुपये) के साथ पंजीकरण करा पाएंगे।
इस पंजीकरण प्रक्रिया में वे छात्र भी शामिल हो सकेंगे, जो 2020 से 2025 तक की बोर्ड परीक्षा में फेल हुए हैं, कंपार्टमेंट में आए हैं या ‘एसेंशियल रिपीट’ श्रेणी में रखे गए हैं। सीबीएसई ने छात्रों को आवेदन करते समय विषय कोड और व्यक्तिगत विवरण भरने में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है, क्योंकि किसी भी गलती का सीधा असर परीक्षा परिणाम पर पड़ सकता है।
बेटे की हालत गंभीर, अस्पताल में भर्ती
फरीदाबाद। फरीदाबाद की ग्रीनफील्ड कॉलोनी में एक बड़ा हादसा हो गया। मकान के बाहर लगे एसी की आउटडोर यूनिट में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई, जो धीरे-धीरे पूरे फ्लैट में फैल गई। आग और धुएं के कारण घर में फंसे परिवार के तीन सदस्यों की मौत हो गई, जबकि बेटा गंभीर रूप से झुलस गया।
जानकारी के मुताबिक, मृतकों में सचिन कपूर, उनकी पत्नी रिंकू और बेटी सुजान शामिल हैं। वहीं बेटा आर्यन को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज जारी है। हादसे में परिवार का पालतू कुत्ता भी मारा गया।
बताया जा रहा है कि आग लगने के बाद परिवार बचने के लिए नीचे उतरा, लेकिन सीढ़ियों में घना धुआं भर जाने के कारण वे दूसरी मंजिल पर ही फंस गए। दम घुटने से पति-पत्नी, बेटी और कुत्ते की मौत हो गई। इस घर की तीसरी मंजिल भी इन्हीं की थी, लेकिन वह खाली थी।
अमृतसर: पंजाब इस समय इतिहास की सबसे भीषण बाढ़ त्रासदी का सामना कर रहा है। अमृतसर जिले के सीमांत गांव दंगई सहित अजनाला क्षेत्र के 45 से अधिक गांवों में चार फीट तक पानी भरा हुआ है। गांव की गलियों से लेकर घरों तक हर तरफ पानी फैला है। सैकड़ों एकड़ फसलें बर्बाद हो चुकी हैं, कई मकान जर्जर होकर मलबे में तब्दील हो गए हैं और ग्रामीण राहत टेंटों में रहने को मजबूर हैं।
गांव दंगई के निवासी दिलबाग सिंह, हरजोत सिंह, सुखदेव सिंह और सुखजीत ने बताया कि उनकी पूरी फसल डूब चुकी है। कारोबार भी चौपट हो गया है। पशुओं में बीमारियां फैल रही हैं और अस्थायी झोपड़े बारिश की मार नहीं सह पा रहे। गांव वालों का कहना है कि चोरी की घटनाओं के डर से वे दिन-रात बेचैनी में हैं।
पूरे पंजाब में तबाही
आपदा की इस घड़ी में अब तक 46 लोगों की जान जा चुकी है। 1.74 लाख हेक्टेयर फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। सभी 23 जिलों के लगभग 1500 गांव और करीब 3.87 लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं। हजारों परिवार बेघर हो गए हैं और लाखों पशुधन बह चुके हैं।
नदियों का उफान और डैमों का दबाव
रावी, व्यास और सतलुज जैसी नदियों के उफान ने पंजाब में कहर बरपाया है। सामान्य से अधिक बारिश के चलते भाखड़ा, रणजीत सागर, शाहपुरकंडी और पौंग डैम के गेट कई बार खोलने पड़े। इसका सीधा असर पंजाब के निचले इलाकों पर पड़ा। नदियों का जलस्तर बढ़ने से तटबंध कमजोर होकर टूट रहे हैं और पानी गांवों में घुस रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस साल 30 अगस्त तक ही 14.11 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हो चुका था, जबकि 1988 में आई भीषण बाढ़ के दौरान यह स्तर 11.20 लाख क्यूसेक था।
राहत कार्यों में जुटा प्रशासन
अमृतसर, तरनतारन, कपूरथला, पठानकोट, गुरदासपुर, मोगा, फिरोजपुर, फाजिल्का और होशियारपुर जैसे जिलों में हालात गंभीर बने हुए हैं। डीसी साक्षी साहनी के नेतृत्व में सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, बीएसएफ और स्थानीय प्रशासन की टीमें राहत और बचाव कार्यों में जुटी हैं। प्रभावितों तक दवाइयां, राशन, टेंट और अन्य जरूरी सामग्री पहुंचाई जा रही है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि मदद अभी भी पर्याप्त नहीं है और पानी घटने के बाद गांवों से मलबा हटाने में महीनों लगेंगे।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बयान पर बोले पीएम मोदी – हमारी साझेदारी वैश्विक स्तर पर रणनीतिक
ट्रंप ने मोदी को बताया ‘महान मित्र’, पर जताई कुछ नीतियों पर नाराजगी
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत और अमेरिका के बीच संबंध मजबूत और दूरदर्शी हैं। पीएम मोदी ने लिखा, “राष्ट्रपति ट्रंप की भावनाओं और हमारे रिश्तों के सकारात्मक मूल्यांकन की हम सराहना करते हैं। भारत-अमेरिका साझेदारी वैश्विक स्तर पर व्यापक और रणनीतिक है।”
ट्रंप ने क्या कहा था?
ओवल ऑफिस में मीडिया से बातचीत के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ की। उन्होंने कहा, “मोदी हमेशा मेरे दोस्त रहेंगे, वह एक महान प्रधानमंत्री हैं। हालांकि इस समय उनकी कुछ नीतियों से मैं सहमत नहीं हूँ, लेकिन भारत और अमेरिका का रिश्ता खास है। ऐसे उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, इसमें चिंता की कोई बात नहीं।”
सवाल पर मिला यह जवाब
ट्रंप से पूछा गया था कि क्या वे भारत के साथ रिश्तों को दोबारा पटरी पर लाने के लिए तैयार हैं? इसी सवाल पर उन्होंने यह टिप्पणी की।
पुरानी पोस्ट पर विवाद
ट्रंप ने हाल ही में अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पुरानी तस्वीर साझा की थी, जिसमें पीएम मोदी, व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग साथ दिख रहे थे। इसके साथ उन्होंने लिखा था, “लगता है हमने भारत और रूस को चीन के हाथों खो दिया है। ईश्वर करे उनका भविष्य समृद्ध हो।” बाद में एक अन्य पोस्ट में उन्होंने भारत द्वारा रूस से तेल आयात करने पर नाराजगी जताई और कहा कि इस वजह से उन्हें निराशा हुई है।
टैरिफ विवाद ने बढ़ाई खटास
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की ओर से भारत पर 50% तक टैरिफ लगाने और रूस से तेल आयात को लेकर बढ़ते मतभेदों ने रिश्तों में तनाव पैदा किया है। इस बीच, प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में चीन के तियानजिन में एससीओ शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया, जहाँ उनकी पुतिन और शी जिनपिंग से गर्मजोशी भरी मुलाकात भी चर्चा में रही। इसके बाद अमेरिकी राजनीति में ट्रंप प्रशासन पर भारत से रिश्ते बिगाड़ने के आरोप लगने लगे।
