डाबर च्यवनप्राश की छवि खराब करने के आरोप पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक
नई दिल्ली — दिल्ली हाईकोर्ट ने पतंजलि आयुर्वेद को डाबर च्यवनप्राश के खिलाफ कथित अपमानजनक विज्ञापन चलाने से तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा की एकल पीठ ने डाबर की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए अंतरिम आदेश जारी किया।
डाबर की याचिका में आरोप लगाया गया था कि पतंजलि का “स्पेशल च्यवनप्राश” विज्ञापन न सिर्फ उनके उत्पाद बल्कि सभी अन्य ब्रांड्स के च्यवनप्राश को “साधारण” और “गैर-प्रामाणिक” दिखाने का प्रयास कर रहा है। याचिकाकर्ता का कहना है कि विज्ञापन में यह दावा किया गया है कि “किसी अन्य निर्माता को च्यवनप्राश बनाने का ज्ञान नहीं है”, जो सीधे तौर पर डाबर सहित अन्य कंपनियों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाता है।
डाबर की ओर से पेश अधिवक्ता जवाहर लाला और मेघना कुमार ने दलील दी कि पतंजलि के विज्ञापन में किए गए दावे न केवल भ्रामक हैं, बल्कि आयुर्वेदिक औषधियों को लेकर उपभोक्ताओं में गलतफहमी पैदा कर सकते हैं। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई को तय की है।
पुराने विवादों का सिलसिला
यह पहला मौका नहीं है जब पतंजलि भ्रामक विज्ञापन को लेकर अदालत के घेरे में आई हो। अगस्त 2022 में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि पतंजलि कोविड समेत अन्य बीमारियों के इलाज के झूठे दावे कर रही है।
नवंबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि को भ्रामक प्रचार पर रोक लगाने का आदेश दिया था, लेकिन इसके बावजूद कंपनी ने विज्ञापन प्रसारण जारी रखा। फरवरी 2024 में कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण को व्यक्तिगत रूप से तलब किया। मार्च-अप्रैल में अवमानना की चेतावनी के बाद अंततः 2025 में दोनों ने माफीनामा दाखिल किया, जिसके बाद मामला समाप्त हुआ।
शरबत विवाद में भी अदालत की फटकार
इससे पहले भी दिल्ली हाईकोर्ट ने बाबा रामदेव की ‘शरबत जिहाद’ संबंधी टिप्पणी पर कड़ी नाराजगी जताई थी। हमदर्द कंपनी के शरबत को लेकर की गई विवादित टिप्पणी के चलते कोर्ट ने उन्हें भविष्य में ऐसे किसी भी बयान या वीडियो से बचने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि “रामदेव किसी के नियंत्रण में नहीं हैं और अपनी ही दुनिया में रहते हैं।”
अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम के प्रस्ताव पर भारत की ओर से कूटनीतिक संवाद जारी
नई दिल्ली/वॉशिंगटन। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर इन दिनों अमेरिका दौरे पर हैं, जहां उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अमेरिका के सीनेटर लिंडसे ग्राहम द्वारा प्रस्तावित रूस प्रतिबंध विधेयक पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत इस विधेयक के संभावित प्रभावों को लेकर सजग है और भारतीय दूतावास इस संबंध में अमेरिकी सांसदों से लगातार संपर्क में है।
जयशंकर ने कहा कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा एक प्राथमिक चिंता है और इस विषय पर सीनेटर ग्राहम को भारत का पक्ष स्पष्ट रूप से बताया गया है। उन्होंने कहा, “हम इस मुद्दे पर उनकी समझ बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल यह देखना होगा कि विधेयक वास्तव में पास होता है या नहीं।”
भारत को क्यों है चिंता
सीनेटर लिंडसे ग्राहम द्वारा लाए जा रहे विधेयक में रूस से तेल, गैस, यूरेनियम और अन्य ऊर्जा उत्पाद खरीदने वाले देशों से आने वाले सामान पर अमेरिका में 500 प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रस्ताव है। यदि यह विधेयक पारित होता है, तो भारत जैसे देशों के लिए भारी आर्थिक दबाव उत्पन्न हो सकता है, जो रूस से तेल की खरीद पर काफी हद तक निर्भर हैं।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से भारत ने खाड़ी देशों की तुलना में रूस से अधिक मात्रा में कच्चा तेल आयात करना शुरू किया है। ऐसे में इस प्रस्तावित विधेयक को भारत अपनी ऊर्जा नीति के लिए एक गंभीर चुनौती के रूप में देख रहा है।
राजनयिक संपर्क और संवाद जारी
डॉ. जयशंकर ने बताया कि भारतीय राजदूत और वॉशिंगटन स्थित दूतावास लगातार सीनेटर ग्राहम और अन्य अमेरिकी सांसदों के साथ संवाद बनाए हुए हैं। भारत ने अपनी चिंताओं को अमेरिका के समक्ष स्पष्ट रूप से रखा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भारत परिस्थिति के अनुसार अपनी रणनीति तय करेगा, लेकिन फिलहाल संवाद और राजनयिक प्रयासों पर जोर दिया जा रहा है।
18 से 28 वर्ष के युवाओं को हर महीने ₹6000 तक की इंटर्नशिप राशि देगी सरकार
बिहार। चुनाव पूर्व तैयारियों के तहत बिहार सरकार ने युवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने “मुख्यमंत्री प्रतिज्ञा योजना” की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य 18 से 28 वर्ष तक के युवाओं को इंटर्नशिप और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।
योजना के तहत पात्र युवाओं को शैक्षणिक योग्यता के आधार पर ₹4,000 से ₹6,000 प्रतिमाह की इंटर्नशिप सहायता राशि दी जाएगी। इसके अतिरिक्त उन्हें आजीविका सहयोग राशि भी प्रदान की जाएगी, जिससे वे कार्य अनुभव के साथ आर्थिक रूप से भी सशक्त हो सकें।
विस्तृत लाभ:
12वीं पास युवाओं को ₹4,000 प्रतिमाह
आईटीआई या डिप्लोमा धारकों को ₹5,000 प्रतिमाह
स्नातक डिग्रीधारकों को ₹6,000 प्रतिमाह
सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2025-26 में 5,000 युवाओं को इस योजना से जोड़ा जाए, और अगले पांच वर्षों में यह संख्या बढ़ाकर एक लाख तक पहुंचाई जाए।
भगवती नगर से रवाना हुए 4000 से 5000 श्रद्धालु, जयकारों से गूंजा माहौल
जम्मू – अमरनाथ यात्रा 2025 की औपचारिक शुरुआत आज तड़के जम्मू से हुई, जब उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भगवती नगर यात्री निवास से पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस जत्थे में 4000 से 5000 श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। यात्रा का शुभारंभ ‘बम-बम भोले’ के जयकारों के बीच बेहद उत्साहपूर्ण माहौल में हुआ।
इस अवसर पर उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा, “श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बेहतरीन व्यवस्थाएं की हैं। जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने यात्रा मार्गों पर व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं। देशभर से श्रद्धालु भारी संख्या में पहुंचे हैं और उनका उत्साह अत्यंत सराहनीय है।”
यात्रा मार्ग पर सुरक्षा के लिहाज से खास तैयारियां की गई हैं। जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग और लंगर स्थल चंद्रकोट समेत पूरे रूट पर सुरक्षा बलों की तैनाती को और मजबूत किया गया है। आतंकवाद के खतरे को दरकिनार करते हुए इस बार भी भोलेनाथ के भक्त बड़ी संख्या में यात्रा में भाग ले रहे हैं।
अमरनाथ यात्रा इस वर्ष 3 जुलाई से शुरू होकर 9 अगस्त तक चलेगी। यात्रियों के लिए बालटाल और पहलगाम दो मुख्य आधार शिविर बनाए गए हैं, जहां से आगे की चढ़ाई की जाती है।
उप-राज्यपाल ने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे यात्रा के दौरान सभी दिशा-निर्देशों का पालन करें और यात्रा को शांतिपूर्ण और सुरक्षित बनाने में सहयोग दें।
आगरा स्थित विश्वविख्यात ताजमहल की त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था उस वक्त सवालों के घेरे में आ गई जब एक युवक ने कार से आकर बैरियर से महज 100 मीटर की दूरी पर तीन राउंड फायरिंग कर दी और आराम से फरार हो गया। यह घटना तब हुई जब सुरक्षा कर्मी तैनात थे और मॉक ड्रिल जैसी व्यवस्थाएं नियमित रूप से की जाती हैं।
घटना के बाद स्पष्ट हुआ कि युवक मानसिक रूप से असंतुलित था और खुद को कोई बड़ा अधिकारी बताकर ताजमहल के आसपास पुलिसकर्मियों पर रौब गांठ रहा था। फायरिंग के बाद वह ट्रांस यमुना कॉलोनी तक पहुंचा और बिना किसी रुकावट के वहां से लखनऊ निकल गया। पुलिस ने उसे लखनऊ में पकड़ लिया।
ताजमहल जैसे अति-संवेदनशील स्मारक की सुरक्षा के बीच हुई इस घटना ने न केवल सुरक्षा तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि आमजन और पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है।
एसीपी ताज सुरक्षा सैयद अरीब अहमद ने बताया कि युवक सुरक्षा घेरे में दाखिल नहीं हुआ था और उसे पहले ही लौटा दिया गया था। हालांकि, पूरी घटना की जांच की जा रही है और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा भी की जा रही है।
हूल दिवस: आदिवासी संघर्ष की अनकही कहानी
नई दिल्ली – हूल दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को संथाल विद्रोह के महानायकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने कहा कि सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो जैसे क्रांतिकारियों की बहादुरी और बलिदान औपनिवेशिक सत्ता के खिलाफ संघर्ष की अमर गाथा है, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, “हूल दिवस हमें हमारे आदिवासी समाज के साहस और बलिदान की याद दिलाता है। मैं सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो समेत उन सभी वीर शहीदों को नमन करता हूं, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा में अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उनकी गाथाएं देश को सदैव प्रेरित करती रहेंगी।”
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी इस ऐतिहासिक दिवस पर श्रद्धांजलि दी और कहा, “सिदो और कान्हू के नेतृत्व में लड़ा गया यह आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अन्याय के खिलाफ एकजुटता की मिसाल बना। हजारों आदिवासी भाइयों-बहनों ने अपने प्राणों की आहुति दी, जिनका बलिदान सदा स्मरणीय रहेगा।”
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लिखा, “हूल दिवस के अवसर पर संथाल विद्रोह के अमर शहीदों को कोटि-कोटि नमन करता हूं। ‘अंग्रेजों हमारी माटी छोड़ो’ का नारा बुलंद कर विद्रोह का बिगुल फूंकने वालों की गौरवगाथा पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।”
हूल दिवस का इतिहास:
हर साल 30 जून को मनाया जाने वाला हूल दिवस 1855 में संथाल विद्रोह की स्मृति में मनाया जाता है। झारखंड के संथाल परगना क्षेत्र में सिदो और कान्हू मुर्मू के नेतृत्व में शुरू हुए इस आदिवासी आंदोलन ने ब्रिटिश सत्ता, जमींदारों और महाजनों के शोषण के खिलाफ आवाज बुलंद की थी। यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम का एक अहम और साहसिक अध्याय माना जाता है।
सांसद ने 2011 के अमेरिकी दस्तावेज के आधार पर पार्टी पर लगाए विदेशी फंडिंग के आरोप
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए द्वारा 2011 में सार्वजनिक किए गए एक दस्तावेज का हवाला देते हुए दावा किया कि दिवंगत कांग्रेस नेता एच.के.एल. भगत के नेतृत्व में 150 से अधिक कांग्रेस सांसदों को सोवियत रूस से फंडिंग मिली थी और उन्होंने रूस के एजेंट के तौर पर काम किया था।
दुबे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “कांग्रेस, भ्रष्टाचार और गुलामी का प्रतीक बन चुकी है।” उन्होंने दावा किया कि उस दौर में रूस की खुफिया एजेंसियों ने भारतीय पत्रकारों और नीति-निर्माताओं पर भी प्रभाव डाला था। उन्होंने यह भी कहा कि रूस की सहायता से भारत में करीब 16,000 समाचार प्रकाशित कराए गए थे और लगभग 1100 रूसी एजेंट देश में सक्रिय थे, जो विभिन्न क्षेत्रों में प्रभाव बना रहे थे।
इसके अलावा दुबे ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस की नेता सुभद्रा जोशी ने चुनाव के दौरान जर्मन सरकार से फंडिंग ली थी और हार के बाद इंडो-जर्मन फोरम की अध्यक्ष बनीं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह सब देशहित में था या किसी विदेशी एजेंडे का हिस्सा? साथ ही उन्होंने कांग्रेस से जवाब मांगते हुए इस पूरे मामले की जांच की मांग की है।
एनएच-44 पर सुरक्षा एजेंसियों ने तैनात किए अतिरिक्त बल और निगरानी दल
2 जुलाई को भगवती नगर से रवाना होगा पहला जत्था
जम्मू। अमरनाथ यात्रा की शुरुआत से पहले सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी गई है। 3 जुलाई से शुरू हो रही इस वार्षिक तीर्थयात्रा को लेकर सीआरपीएफ ने जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-44) पर निगरानी कड़ी कर दी है। तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के लिए के-9 डॉग स्क्वॉड और अतिरिक्त बलों की तैनाती की गई है, खासकर उधमपुर सेक्टर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में।
पहला जत्था 2 जुलाई को भगवती नगर आधार शिविर से रवाना होगा। इसको लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक में पुलिस, धार्मिक संगठनों, होटल व व्यापार संघों सहित अन्य हितधारकों के सुझावों को शामिल किया गया। कमिश्नर रमेश कुमार ने बताया कि यात्रियों के ठहराव, खानपान, बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
आधार शिविरों में एसी हॉल, लंगर सेवा, मोबाइल शौचालय जैसी व्यवस्थाएं की गई हैं। लखनपुर से बनिहाल तक यात्रा मार्ग में सभी विश्राम केंद्रों पर यात्रियों को समान सुविधाएं मिलेंगी। साथ ही 1 जुलाई से यात्रियों के लिए ऑफलाइन पंजीकरण की सुविधा शुरू होगी, जबकि ऑनलाइन पंजीकरण पहले से ही चालू है।
सुरक्षा और सुविधा के दृष्टिगत जम्मू, कठुआ, सांबा, उधमपुर और रामबन जिलों में 52 लंगर और 60 आरएफआईडी केंद्र बनाए गए हैं। रेलवे के बजाय यात्रा सड़क मार्ग से ही कराई जाएगी। यात्रियों को मार्गदर्शन और सहायता के लिए कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है।
प्रधानमंत्री ने विशाखापत्तनम से लेकर हिमालय तक योग की व्यापकता का किया उल्लेख
पीएम मोदी ने गिनाई सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की उपलब्धियां
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 123वें संस्करण में देशवासियों से संवाद करते हुए योग दिवस की वैश्विक सफलता, आपातकाल की भयावह यादें, सामाजिक सुरक्षा के बढ़ते दायरे, देशभर में चल रहे सांस्कृतिक और खेल आयोजनों की चर्चा की। इसके अलावा उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए आम नागरिकों की प्रेरणादायक पहल और पूर्वोत्तर भारत की खासियतों को भी उजागर किया।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की भव्य झलकियां
प्रधानमंत्री ने बताया कि इस बार योग दिवस की भव्यता देश के हर कोने और दुनिया के कई देशों में देखने को मिली। विशाखापत्तनम में तीन लाख लोगों ने एकसाथ योग किया, वहीं 2000 से अधिक आदिवासी छात्रों ने 108 मिनट तक सूर्य नमस्कार किए। हिमालय की ऊंचाइयों से लेकर नौसेना के जहाजों तक योग के प्रति समर्पण दिखा।
आपातकाल की काली छाया और लोकतंत्र की जीत
पीएम मोदी ने आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ पर उस दौर को याद किया जब संविधान और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचला गया। उन्होंने कहा कि लाखों लोगों ने संघर्ष कर लोकतंत्र को पुनर्जीवित किया, और वह दौर देश के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा।
सामाजिक सुरक्षा में जबरदस्त विस्तार
प्रधानमंत्री ने बताया कि आज भारत के 95 करोड़ नागरिक किसी न किसी सामाजिक सुरक्षा योजना से लाभान्वित हो रहे हैं, जबकि 2015 में यह संख्या सिर्फ 25 करोड़ थी। उन्होंने इसे ‘समावेशी विकास’ की दिशा में बड़ा कदम बताया।
बोडोलैंड में खेल के माध्यम से बदलाव
असम के बोडोलैंड में आयोजित CEM Cup फुटबॉल टूर्नामेंट में 70 हजार खिलाड़ियों की भागीदारी को पीएम ने सामाजिक परिवर्तन का प्रतीक बताया। उन्होंने खिलाड़ियों को नई पीढ़ी की प्रेरणा बताया, जो अब देश के मंच पर अपनी पहचान बना रहे हैं।
पूर्वोत्तर और पर्यावरण पर विशेष फोकस
मेघालय के ‘एरी सिल्क’ को जीआई टैग मिलने को सांस्कृतिक धरोहर की मान्यता बताया गया। वहीं, ‘सिंदूर वन’ और पुणे के रमेश खरमाले जैसे लोगों के प्रयासों को पर्यावरण के लिए प्रेरणास्रोत बताया गया, जो समाज को स्वेच्छा से हरियाली की ओर मोड़ रहे हैं।
तीर्थ यात्राओं की आध्यात्मिक और सामाजिक भूमिका
प्रधानमंत्री ने धार्मिक यात्राओं को सेवा, अनुशासन और एकता का प्रतीक बताया। उन्होंने रथयात्रा जैसे आयोजनों में लगे सेवा कार्यकर्ताओं की सराहना की और उन्हें शुभकामनाएं दीं।
वैश्विक स्तर पर भारत की सांस्कृतिक पहल
भगवान बुद्ध के अवशेषों को वियतनाम भेजने की घटना को उन्होंने भारत और वियतनाम के सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि भारत की यह पहल दुनियाभर में सम्मान और विश्वास बढ़ा रही है।
डॉक्टरों और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को सलाम
पीएम मोदी ने 1 जुलाई को मनाए जाने वाले डॉक्टर दिवस और सीए दिवस पर इन पेशों से जुड़े लोगों का आभार जताया और उन्हें समाज के मजबूत स्तंभ बताया।
संविधान पर संघ के बयान के बीच थरूर बोले– अब बदल चुका है RSS
थरूर के बयान से पार्टी के भीतर उठे सवाल
नई दिल्ली। देश में संविधान को लेकर छिड़ी राजनीतिक बहस के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर के ताज़ा बयान ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा को जन्म दे दिया है। थरूर ने कहा है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) अब पहले जैसे नहीं रहे और संभवतः वे अपनी पुरानी विचारधारा से आगे बढ़ चुके हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब कांग्रेस और विपक्षी दल लगातार आरएसएस-बीजेपी पर संविधान की मूल आत्मा से छेड़छाड़ के आरोप लगा रहे हैं।
सेक्युलर और सोशलिस्ट शब्दों को हटाने पर बवाल
हाल ही में आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने संविधान की प्रस्तावना से ‘सेक्युलर’ और ‘सोशलिस्ट’ जैसे शब्दों को हटाने की पैरवी की थी। इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज हो गई। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर निशाना साधते हुए कहा कि आरएसएस और बीजेपी ‘संविधान नहीं, मनुस्मृति चाहते हैं’ और वे बहुजन व वंचित वर्गों से उनके अधिकार छीनना चाहते हैं।
थरूर की टिप्पणी: संतुलन या विचलन?
राहुल गांधी के तीखे बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए शशि थरूर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि राहुल गांधी एक ऐतिहासिक तथ्य की ओर इशारा कर रहे थे। थरूर ने कहा, “संविधान निर्माण के समय गोलवलकर जैसे नेताओं ने मनुस्मृति की झलक न होने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया था, लेकिन मेरा मानना है कि आरएसएस अब उस सोच से आगे निकल चुका है। हालांकि उनकी मौजूदा सोच क्या है, यह वही स्पष्ट कर सकते हैं।”
पार्टी के भीतर मतभेद की आहट
थरूर की टिप्पणी कांग्रेस के भीतर ही असहमति का कारण बन गई है। पार्टी सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि जब आरएसएस खुद संविधान के मूल शब्दों को हटाने की बात कर रहा है, तब थरूर का रुख भ्रम पैदा करने वाला है। उन्होंने तंज भरे लहजे में कहा, “थरूर जी का सम्मान है, लेकिन यह बयान सियासी बहानेबाज़ी की तरह लगता है, जो मुद्दे को भटका सकता है।”
राजनीतिक रणनीति पर उठे सवाल
विश्लेषकों के अनुसार, थरूर ने जहां एक ओर ऐतिहासिक सच्चाई को स्वीकार किया, वहीं सीधे तौर पर आरएसएस-बीजेपी पर हमला करने से बचने की कोशिश की। कांग्रेस की आक्रामक रणनीति के बीच थरूर का यह ‘मध्यमार्गी रुख’ पार्टी के समन्वय और संदेश रणनीति पर सवाल खड़े करता है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि कांग्रेस नेतृत्व इस आंतरिक विरोधाभास को कैसे सुलझाता है और बीजेपी इस बयान को राजनीतिक हथियार के तौर पर कैसे भुनाती है।
