3 घंटे में हटाना होगा आपत्तिजनक कंटेंट
नई दिल्ली। देश में तेजी से बढ़ते आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल के बीच केंद्र सरकार ने डिजिटल कंटेंट को लेकर नए और कड़े नियम लागू कर दिए हैं। 10 फरवरी 2026 को जारी अधिसूचना के बाद ये नियम अब 20 फरवरी से प्रभावी हो गए हैं। भारत सरकार के इस फैसले के तहत अब एआई से तैयार किसी भी फोटो, वीडियो या ऑडियो पर स्पष्ट लेबल लगाना अनिवार्य होगा, ताकि लोगों को असली और नकली कंटेंट में फर्क समझने में आसानी हो।
इन नए नियमों के मुताबिक, एआई जनरेटेड कंटेंट पर “AI Generated” जैसे स्पष्ट निशान दिखाना जरूरी होगा। इसके अलावा हर फाइल के मेटाडेटा में उसकी पूरी जानकारी दर्ज रहेगी—जैसे कंटेंट कब बना, किस टूल से तैयार हुआ और पहली बार कहां अपलोड किया गया। इसे एक तरह का “डिजिटल डीएनए” माना जा रहा है, जिससे जांच एजेंसियों को जरूरत पड़ने पर कंटेंट के स्रोत तक पहुंचने में मदद मिलेगी।
सरकार ने यह भी साफ किया है कि एआई कंटेंट से जुड़े लेबल या तकनीकी जानकारी के साथ छेड़छाड़ करना अब गैर-कानूनी होगा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ऐसी तकनीक अपनानी होगी जिससे किसी भी तरह की छेड़छाड़ को रोका जा सके या संदिग्ध कंटेंट स्वतः हटाया जा सके। इसके साथ ही यूजर्स को कंटेंट अपलोड करते समय यह बताना भी जरूरी होगा कि वह एआई से तैयार किया गया है या नहीं।
नए नियमों में सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी भी बढ़ा दी गई है। अब किसी भी आपत्तिजनक या गैर-कानूनी कंटेंट की शिकायत मिलने पर प्लेटफॉर्म्स को सिर्फ 3 घंटे के भीतर उसे हटाना होगा, जबकि पहले इसके लिए 36 घंटे का समय दिया जाता था। इस बदलाव से डिजिटल स्पेस में जवाबदेही और सख्ती दोनों बढ़ेंगी।
एक दिन पहले आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी डिजिटल कंटेंट पर ‘ऑथेंटिसिटी लेबल’ की जरूरत पर जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि जैसे खाद्य उत्पादों पर जानकारी दी जाती है, वैसे ही डिजिटल सामग्री पर भी उसकी प्रकृति स्पष्ट होनी चाहिए, ताकि लोग भ्रमित न हों।
सरकार ने खास तौर पर डीपफेक और आपत्तिजनक सामग्री पर सख्त रुख अपनाया है। अगर एआई का इस्तेमाल किसी व्यक्ति की पहचान की नकल करने, फर्जी वीडियो बनाने, बच्चों से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री फैलाने या धोखाधड़ी के लिए किया जाता है, तो इसे गंभीर अपराध माना जाएगा और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय का कहना है कि इन नियमों का मकसद एक सुरक्षित, भरोसेमंद और जवाबदेह इंटरनेट व्यवस्था तैयार करना है, जिससे एआई के दुरुपयोग पर लगाम लगाई जा सके और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर पारदर्शिता बढ़े।
‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ में वैश्विक समुदाय को संदेश देते हुए कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दौर मानवता के लिए एक बड़ा अवसर बन सकता है, बशर्ते इसे सही सोच और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ाया जाए।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में एआई के तेजी से बदलते परिदृश्य को मानव विकास के नए अध्याय से जोड़ते हुए कहा कि तकनीक का वास्तविक प्रभाव तभी दिखेगा जब इसे सही दिशा और उद्देश्य के साथ अपनाया जाए। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए गौतम बुद्ध की शिक्षाओं को याद किया और कहा कि सही निर्णय हमेशा सही समझ से निकलते हैं, यही सिद्धांत एआई के विकास में भी लागू होना चाहिए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि एआई के लिए एक संतुलित और नैतिक रोडमैप तैयार करना जरूरी है, जिसमें मानव केंद्र में रहे। प्रधानमंत्री ने एक ऐसे एआई इकोसिस्टम की आवश्यकता बताई, जो संवेदनशील, समावेशी और जिम्मेदार हो, ताकि तकनीक का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे।
कोविड-19 महामारी का जिक्र करते हुए उन्होंने वैश्विक सहयोग की ताकत को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि महामारी के दौरान वैक्सीन विकास से लेकर आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखने तक, दुनिया ने मिलकर असंभव को संभव बनाया। इसी तरह एआई के क्षेत्र में भी अंतरराष्ट्रीय साझेदारी बेहद अहम होगी।
इस वैश्विक मंच पर इमैनुएल मैक्रों और एंटोनियो गुटेरेस सहित कई प्रमुख वैश्विक नेता और उद्योग जगत की हस्तियां मौजूद रहीं। यह पहली बार है जब ‘ग्लोबल साउथ’ के किसी देश में इतने बड़े स्तर पर एआई समिट आयोजित किया गया।
प्रधानमंत्री ने अंत में कहा कि भारत का मूल मंत्र ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ है, और एआई का उपयोग भी इसी भावना के अनुरूप होना चाहिए, ताकि इसका लाभ पूरी मानवता को मिल सके।
सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने अवैध घुसपैठ को बताया बड़ी चुनौती
गुवाहाटी। सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने असम की जनसांख्यिकीय स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि राज्य की मौजूदा परिस्थितियां संतोषजनक नहीं हैं और इसकी एक बड़ी वजह लंबे समय से जारी अवैध घुसपैठ है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस घुसपैठ का सीधा असर राज्य के सामाजिक संतुलन और सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ा है।
अवैध घुसपैठ को बताया बड़ी चुनौती
सीएम सरमा ने आरोप लगाया कि असम में मुस्लिम आबादी का एक बड़ा हिस्सा बांग्लादेश से अवैध रूप से आया है। उन्होंने दावा किया कि यह प्रक्रिया उस दौर में तेज हुई, जब राज्य और केंद्र में कांग्रेस की सरकारें थीं। मुख्यमंत्री का कहना है कि उस समय सीमा प्रबंधन में लापरवाही बरती गई, जिससे समस्या और गंभीर हो गई।
सुरक्षा को लेकर जताई आशंका
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि भविष्य में किसी संभावित संघर्ष की स्थिति में राज्य के कुछ तत्व बाहरी हितों का समर्थन कर सकते हैं, जो आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है। उन्होंने अवैध प्रवास को न केवल असम बल्कि पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती बताया।
सरकार के कदम
सीएम सरमा ने कहा कि उनकी सरकार राज्य की पहचान, जमीन और संसाधनों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। इसके तहत अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई, सीमा पर निगरानी मजबूत करने और नागरिकता से जुड़े रिकॉर्ड को दुरुस्त करने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने दोहराया कि सरकार ऐतिहासिक भूलों को सुधारने के लिए प्रतिबद्ध है।
विपक्ष का पलटवार
मुख्यमंत्री के बयान पर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस नेताओं ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि इस तरह के बयान समाज में विभाजन पैदा करते हैं और मूल समस्याओं से ध्यान भटकाने का प्रयास हैं। उनका कहना है कि अवैध प्रवास का मुद्दा संवेदनशील है और इसे राजनीतिक बयानबाजी की बजाय संवैधानिक और मानवीय दृष्टिकोण से सुलझाया जाना चाहिए।
दशकों पुराना संवेदनशील मुद्दा
गौरतलब है कि असम में अवैध प्रवास का सवाल दशकों से राजनीतिक और सामाजिक विमर्श का हिस्सा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर हुए आंदोलनों और समझौतों ने राज्य की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाई है।
दक्षिणी गोलार्ध में दिखाई देगा सूर्य ग्रहण का अद्भुत नजारा
नई दिल्ली। साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण आज, मंगलवार को लगने जा रहा है। यह ग्रहण चक्राकार सूर्य ग्रहण होगा, जिसे खगोलीय भाषा में ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है।आज का सूर्य ग्रहण दोपहर में 3 बजकर 26 मिनट पर लगेगा और शाम को 7 बजकर 57 मिनट पर इसका समापन होगा। हालांकि यह दृश्य बेहद आकर्षक होगा, लेकिन भारत में इसके दर्शन नहीं हो पाएंगे।
चक्राकार सूर्य ग्रहण उस स्थिति में होता है जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीध में आ जाते हैं और चंद्रमा सूर्य के सामने से गुजरता है। इस दौरान चंद्रमा पृथ्वी से अपेक्षाकृत अधिक दूरी पर होता है, जिसके कारण वह सूर्य को पूरी तरह ढक नहीं पाता। NASA के मुताबिक, इसी वजह से सूर्य के चारों ओर चमकदार प्रकाश का छल्ला दिखाई देता है, जिसे ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है। इस ग्रहण में चंद्रमा सूर्य के लगभग 96 प्रतिशत हिस्से को ढक लेगा, लेकिन किनारों से सूर्य की तेज रोशनी नजर आती रहेगी।
भारत में क्यों नहीं दिखेगा ग्रहण
यह सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से दक्षिणी गोलार्ध में घटित होगा। उस समय भारत में सूर्य क्षितिज के नीचे रहेगा, इसलिए देश के किसी भी हिस्से से इस खगोलीय घटना को प्रत्यक्ष रूप से देख पाना संभव नहीं होगा।
ऑनलाइन देख सकेंगे खगोल प्रेमी
हालांकि भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देगा, लेकिन खगोल विज्ञान में रुचि रखने वाले लोग अंतरराष्ट्रीय वेधशालाओं और स्पेस एजेंसियों की लाइव स्ट्रीमिंग और वीडियो प्रसारण के जरिए इसका नजारा देख सकेंगे। वैज्ञानिकों और खगोल प्रेमियों के लिए यह ग्रहण अध्ययन और अवलोकन का अहम अवसर माना जा रहा है।
इन क्षेत्रों में दिखेगा ग्रहण
इस सूर्य ग्रहण का सबसे स्पष्ट दृश्य अंटार्कटिका में देखने को मिलेगा, खासकर कॉनकॉर्डिया और मिर्नी अनुसंधान केंद्रों के आसपास। इसके अलावा दक्षिण अफ्रीका, तंजानिया, जाम्बिया और जिम्बाब्वे सहित दक्षिणी अफ्रीकी देशों में यह आंशिक रूप से नजर आएगा। दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों, विशेष रूप से अर्जेंटीना और चिली में भी लोग इस खगोलीय घटना के साक्षी बन सकेंगे।
कर्नाटक में सियासी घमासान, मंत्री प्रियांक खरगे का आरएसएस पर तीखा हमला
बेंगलुरु। कर्नाटक की राजनीति में सियासी तापमान एक बार फिर चढ़ गया है। मंत्री प्रियांक खरगे ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर तीखा हमला बोलते हुए उसे भारतीय जनता पार्टी की “वैचारिक धुरी” बताया। उन्होंने संघ की फंडिंग, कानूनी हैसियत और संवैधानिक जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए।
“भाजपा छाया है, असली ताकत आरएसएस”
खरगे ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी का अस्तित्व संघ के समर्थन के बिना कमजोर पड़ जाता है। उनके मुताबिक, यदि आरएसएस का वैचारिक और सांगठनिक सहयोग न हो, तो भाजपा की स्थिति और भी कमजोर हो सकती है। उन्होंने कहा कि देश की राजनीति में केवल “छाया” से नहीं, बल्कि असली शक्ति केंद्र से सवाल पूछने की जरूरत है।
फंडिंग और जवाबदेही पर सवाल
मंत्री ने संघ की आय के स्रोतों पर सवाल उठाते हुए कहा कि “गुरु दक्षिणा” के नाम पर होने वाले चंदे की पारदर्शिता स्पष्ट होनी चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि जब आम नागरिकों, सामाजिक संगठनों और संस्थाओं को अपने वित्तीय लेन-देन का हिसाब देना पड़ता है, तो संघ इससे अलग कैसे हो सकता है। खरगे ने कहा कि बिना पंजीकरण और स्पष्ट कानूनी ढांचे के कोई भी संस्था जवाबदेही से बच नहीं सकती।
पंजीकरण और कानून का मुद्दा
खरगे ने आरएसएस की कानूनी स्थिति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि संगठन कानून और संविधान के दायरे में आता है या नहीं। उन्होंने संघ प्रमुख मोहन भागवत के एक पुराने बयान का हवाला देते हुए कहा कि यदि आरएसएस खुद को केवल व्यक्तियों का समूह मानता है, तो फिर क्लबों और एसोसिएशनों की तरह उसका पंजीकरण और कर दायित्व क्यों नहीं है।
धार्मिक विमर्श पर टिप्पणी
धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर बोलते हुए खरगे ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण की मूल भावना और आज की व्याख्याओं में अंतर दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि धर्म के नाम पर हिंसा या विभाजन को बढ़ावा देना किसी भी रूप में उचित नहीं है।
तेज रफ्तार और बस चालक की लापरवाही बनी दुर्घटना की वजह
मथुरा। मथुरा में यमुना एक्सप्रेस-वे पर शनिवार तड़के एक भीषण सड़क हादसा हो गया। तेज रफ्तार कंटेनर ने सड़क किनारे खड़े यात्रियों को कुचल दिया। हादसे में छह लोगों की मौत हो गई, जबकि एक यात्री गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद एक्सप्रेस-वे पर अफरा-तफरी मच गई और कुछ समय के लिए यातायात भी बाधित रहा।
यह दर्दनाक हादसा सुरीर थाना क्षेत्र के अंतर्गत माइल स्टोन 88 के पास तड़के करीब 2:45 बजे हुआ। दिल्ली से कानपुर जा रही एक निजी बस के कुछ यात्री लघुशंका के लिए बस से नीचे उतरे थे। आरोप है कि चालक ने एक्सप्रेस-वे के निर्धारित ग्रीन जोन में बस रोकने के बजाय सड़क किनारे ही वाहन खड़ा कर दिया। इसी दौरान पीछे से आ रहा एक तेज रफ्तार कंटेनर बस से टकराया और अनियंत्रित होकर नीचे खड़े यात्रियों को रौंदता चला गया।
मौके पर ही छह की मौत, एक घायल
हादसे में छह यात्रियों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई, जबकि एक यात्री गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे तत्काल नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मृतकों में औरैया, बस्ती, कन्नौज, दिल्ली और फिरोजाबाद जिलों के निवासी शामिल हैं। हादसे की सूचना मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया।
पुलिस और प्रशासन मौके पर
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस, एक्सप्रेस-वे सुरक्षा टीम और एंबुलेंस मौके पर पहुंची। शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया और क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाकर यातायात बहाल कराया गया। पुलिस ने कंटेनर चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है।
लापरवाही ने छीनी छह जिंदगियां
प्रारंभिक जांच में हादसे की बड़ी वजह बस चालक की लापरवाही मानी जा रही है। एक्सप्रेस-वे पर यात्रियों को केवल निर्धारित ग्रीन जोन में ही उतारने के नियम हैं, लेकिन इनका पालन न किए जाने से यह हादसा हुआ। तेज रफ्तार और नियमों की अनदेखी ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने लिया संज्ञान
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मथुरा में हुए इस भीषण सड़क हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताते हुए अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने और घटना की विस्तृत जांच कराने के आदेश दिए गए हैं।
निजी स्कूलों को चेतावनी- नियम न मानने पर रद्द हो सकती है मान्यता
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को देशभर के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अहम निर्देश जारी करते हुए कहा कि सरकारी और निजी स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राओं को मुफ्त बायोडिग्रेडेबल सैनेटरी पैड उपलब्ध कराए जाएं। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि मासिक धर्म से जुड़ा स्वास्थ्य और स्वच्छता, संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के मौलिक अधिकार का अभिन्न हिस्सा है।
छात्राओं की बुनियादी सुविधाओं पर सख्त रुख
अदालत ने कहा कि स्कूलों में शौचालय और मासिक धर्म स्वच्छता की सुविधाएं सुनिश्चित करना सरकारों की जिम्मेदारी है। यदि राज्य सरकारें और संबंधित प्राधिकरण इस दिशा में विफल रहते हैं, तो उन्हें इसके लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने यह निर्देश कक्षा 6 से 12 तक की छात्राओं के लिए जारी किया है, जिसमें केंद्र सरकार की मासिक धर्म स्वच्छता नीति को पूरे देश में लागू करने पर जोर दिया गया है।
निजी स्कूलों को सख्त चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट ने निजी स्कूलों को चेताते हुए कहा कि यदि वे छात्राओं और छात्रों के लिए अलग-अलग शौचालयों की व्यवस्था नहीं करते और छात्राओं को मुफ्त सैनेटरी पैड उपलब्ध कराने में असफल रहते हैं, तो उनकी मान्यता रद्द की जा सकती है। अदालत ने दो टूक कहा कि मासिक धर्म स्वास्थ्य केवल सुविधा नहीं, बल्कि एक मौलिक अधिकार है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
शौचालय व्यवस्था पर भी निर्देश
शीर्ष अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि स्कूलों में लड़कियों और लड़कों के लिए अलग-अलग शौचालय हों। इसके साथ ही दिव्यांग छात्रों के अनुकूल शौचालयों की उपलब्धता को भी अनिवार्य बताया गया है।
जनहित याचिका पर आया फैसला
गौरतलब है कि यह फैसला जया ठाकुर द्वारा दायर जनहित याचिका पर आया है, जिसमें कक्षा 6 से 12 तक की किशोर छात्राओं के लिए सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में केंद्र सरकार की ‘स्कूल जाने वाली लड़कियों के लिए मासिक धर्म स्वच्छता नीति’ को पूरे देश में लागू करने की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में 10 दिसंबर 2024 को फैसला सुरक्षित रखा था।
गणतंत्र दिवस परेड 2026 में महाराष्ट्र की झांकी बनी नंबर-1
तीनों सेनाओं में सर्वश्रेष्ठ मार्चिंग दस्ता का पुरस्कार भारतीय नौसेना को मिला
नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस परेड 2026 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मार्चिंग दस्तों और झांकियों के विजेताओं की आधिकारिक घोषणा कर दी गई है। तीनों सेनाओं, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ), राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों तथा केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों की भागीदारी वाली इस परेड के प्रदर्शन का मूल्यांकन जजों के तीन अलग-अलग पैनलों द्वारा किया गया।
जजों के आकलन के आधार पर तीनों सेनाओं में सर्वश्रेष्ठ मार्चिंग दस्ता का पुरस्कार भारतीय नौसेना को दिया गया, जबकि सीएपीएफ/अन्य सहायक बलों में सर्वश्रेष्ठ मार्चिंग दस्ता का सम्मान दिल्ली पुलिस को मिला।
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की झांकियों में शीर्ष तीन स्थान इस प्रकार रहे—
पहला स्थान महाराष्ट्र को ‘गणेशोत्सव: आत्मनिर्भरता का प्रतीक’ थीम पर आधारित झांकी के लिए मिला।
दूसरे स्थान पर जम्मू और कश्मीर की झांकी रही, जिसमें राज्य के हस्तशिल्प और लोक नृत्यों की झलक दिखाई गई।
तीसरे स्थान पर केरल की झांकी रही, जिसने ‘वॉटर मेट्रो और शत-प्रतिशत डिजिटल साक्षरता’ के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत के लिए आत्मनिर्भर केरल का संदेश दिया।

केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों की श्रेणी में संस्कृति मंत्रालय की झांकी ‘वंदे मातरम — एक राष्ट्र की आत्मा की पुकार’ को सर्वश्रेष्ठ घोषित किया गया।
इसके अलावा, विशेष पुरस्कार भी प्रदान किए गए। इनमें केंद्रीय लोक निर्माण विभाग को ‘वंदे मातरम — 150 वर्षों का उत्सव’ के लिए सम्मानित किया गया, वहीं ‘वंदे मातरम: भारत की शाश्वत गूँज’ नृत्य समूह को भी विशेष पुरस्कार से नवाजा गया।
उधर, माईगॉव पोर्टल पर नागरिकों द्वारा किए गए ऑनलाइन मतदान के आधार पर पॉपुलर चॉइस श्रेणी के नतीजे भी घोषित किए गए। इस श्रेणी में तीनों सेनाओं में सर्वश्रेष्ठ मार्चिंग दस्ता का खिताब असम रेजिमेंट को मिला, जबकि सीएपीएफ/अन्य सहायक बलों में सीआरपीएफ को सबसे अधिक समर्थन प्राप्त हुआ।
पॉपुलर चॉइस के तहत राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की शीर्ष तीन झांकियां—
गुजरात (स्वदेशी का मंत्र – आत्मनिर्भरता – स्वतंत्रता: वंदे मातरम),
उत्तर प्रदेश (बुंदेलखंड की संस्कृति) और
राजस्थान (रेगिस्तान का सुनहरा स्पर्श: बीकानेर की स्वर्ण कला – उस्ता कला) रहीं।
वहीं, केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों में पॉपुलर चॉइस के तहत स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग की झांकी को ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: भारतीय स्कूली शिक्षा को विकसित भारत की राह पर अग्रसर करना’ विषय पर सर्वश्रेष्ठ चुना गया।
पीएम मोदी ने जताया दुख
मुंबई। महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार का एक निजी विमान बारामती (पुणे, महाराष्ट्र) में लैंडिंग के दौरान हादसे का शिकार हो गया । दुर्घटना में अजित पवार की मौत हो गयी।
आज सुबह मुंबई से बारामती जा रहा उनका चार्टर्ड प्लेन लैंडिंग के दौरान रनवे से फिसल गया और आग लग गयी। विमान में डिप्टी सीएम अजित पवार सहित कुल 5-6 लोग थे। कोई भी बच नहीं पाया।
पीएम मोदी ने जताया दुख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने ट्वीट किया, ‘अजित पवार जी लोगों के नेता थे, जिनका जमीनी स्तर पर मजबूत जुड़ाव था। उनका असमय निधन बहुत चौंकाने वाला और दुखद है। उनके परिवार और अनगिनत प्रशंसकों के प्रति संवेदनाएं। ओम शांति।’
13 फरवरी तक चलेगा बजट सत्र का पहला चरण
नई दिल्ली- संसद के आगामी बजट सत्र से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में मंगलवार को संसद भवन में सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें सरकार और विपक्ष के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य बजट सत्र के दौरान संसद की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलाने पर सहमति बनाना रहा। इस अहम बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की, जबकि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू भी इसमें मौजूद रहे। विपक्ष की ओर से कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने बैठक में हिस्सा लिया।
बजट सत्र का पहला चरण बुधवार से आरंभ होगा। सत्र की औपचारिक शुरुआत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण से होगी, जिसमें वे संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करेंगी। इसके बाद सरकार एक फरवरी को आम बजट पेश करेगी।
सत्र का यह प्रारंभिक चरण 13 फरवरी तक चलेगा। इस दौरान राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा होगी और उसे पारित किया जाएगा। साथ ही बजट को लेकर भी व्यापक विमर्श किया जाएगा। इसके बाद कुछ दिनों का अवकाश रहेगा।
दूसरे चरण की कार्यवाही 9 मार्च से दोबारा शुरू होगी, जो दो अप्रैल तक चलेगी। इस अवधि में बजट से जुड़े विधेयकों और अन्य महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा और निर्णय किए जाएंगे।
