फ्रेंडली फाइट वाली सीटों पर राजद और कांग्रेस आमने-सामने
पटना। बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की रणनीति अब लगभग तय मानी जा रही है। मुख्यमंत्री पद का चेहरा तेजस्वी यादव को बनाया गया है, जबकि उपमुख्यमंत्री पद पर वीआईपी पार्टी के मुकेश सहनी की जिद भी पूरी हो गई है। तेजस्वी यादव अब ताबड़तोड़ जनसभाएं कर रहे हैं और चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंक चुके हैं।
हालांकि, गठबंधन के भीतर अब भी कुछ सीटों पर असमंजस बना हुआ है—खासतौर पर उन जगहों पर जहां राजद और कांग्रेस आमने-सामने हैं। सवाल उठ रहा है कि ऐसी सीटों पर राहुल गांधी और तेजस्वी यादव आखिर किसके समर्थन में प्रचार करेंगे?
किन सीटों पर ‘फ्रेंडली फाइट’
दूसरे चरण में चार विधानसभा सीटें ऐसी हैं जहां राजद और कांग्रेस दोनों ने अपने-अपने उम्मीदवार उतारे हैं—
सुल्तानगंज: राजद के चंदन सिन्हा बनाम कांग्रेस के ललन यादव
कहलगांव: राजद के रजनीश भारती बनाम कांग्रेस के प्रवीण कुशवाहा
सिकंदरा: राजद के उदयनारायण चौधरी बनाम कांग्रेस के विनोद चौधरी
नरकटियागंज: राजद के दीपक यादव बनाम कांग्रेस के शाश्वत केदार पांडेय
इसके अलावा दो और सीटों पर भी आपसी मुकाबला है—
चैनपुर: राजद के ब्रिज किशोर बिंद बनाम वीआईपी के गोविंद बिंद
करगहर: कांग्रेस के संतोष मिश्रा बनाम सीपीआई के महेंद्र गुप्ता
प्रचार से बच रहे हैं राहुल और तेजस्वी
सूत्रों के अनुसार, अब तक तेजस्वी यादव ने उन सीटों पर रैलियां नहीं की हैं जहां ‘फ्रेंडली फाइट’ की स्थिति है। कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य वरिष्ठ नेता छठ पर्व के बाद प्रचार अभियान में उतरेंगे। माना जा रहा है कि वे भी इन विवादित सीटों पर प्रचार से परहेज़ करेंगे ताकि गठबंधन की एकता पर सवाल न उठें।
अशोक गहलोत का बयान — “सब मिलकर चुनाव जीतेंगे”
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने कहा कि बिहार में महागठबंधन पूरी मजबूती से चुनाव लड़ रहा है। उन्होंने कहा, “243 सीटों में से 5-6 सीटों पर आपसी सहमति से ‘फ्रेंडली फाइट’ हो रही है, इसमें कोई विवाद नहीं है। हम सब मिलकर प्रचार करेंगे और चुनाव जीतेंगे।” गहलोत ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि एनडीए ने अब तक अपना मुख्यमंत्री चेहरा तय नहीं किया है क्योंकि “भाजपा नीतीश कुमार को आगे नहीं रखना चाहती।”
जहरीले रसायनों की मिलावट रोकने के लिए राज्यों को दी गई निगरानी की जिम्मेदारी
नई दिल्ली। हाल के महीनों में खांसी की दवाओं में जहरीले रसायनों की मिलावट के मामलों के बाद केंद्र सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। सरकार ने 10 रसायनों को ‘हाई-रिस्क सॉल्वेंट्स’ की श्रेणी में रखते हुए सभी राज्यों को इन पर तत्काल निगरानी शुरू करने के निर्देश दिए हैं। यह कदम दवाओं की गुणवत्ता और जनसुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
राज्यों को मिली निगरानी की जिम्मेदारी
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने राज्यों को आदेश जारी करते हुए कहा है कि अब इन रसायनों की पूरी सप्लाई चेन – उत्पादन से लेकर दवाओं की बिक्री तक – सरकारी निगरानी के दायरे में रहेगी। इसके लिए केंद्र ने नया ओएनडीएलएस (Online National Drug Licensing System) पोर्टल शुरू किया है, जिस पर सभी गतिविधियां डिजिटल रूप से ट्रैक की जाएंगी।
इन रसायनों पर होगी कड़ी नजर
सरकार ने जिन 10 रसायनों को हाई-रिस्क श्रेणी में रखा है, उनमें शामिल हैं —
ग्लिसरीन, प्रोपाइलीन ग्लाइकोल, माल्टिटोल और माल्टिटोल सॉल्यूशन, सोर्बिटोल और सोर्बिटोल सॉल्यूशन, हाइड्रोजेनेटेड स्टार्च हाइड्रोलाइसेट, डाइएथिलीन ग्लाइकोल स्टिऐरेट्स, पॉलीएथिलीन ग्लाइकोल, पॉलीएथिलीन ग्लाइकोल मोनोमेथिल ईथर, पॉलीसॉर्बेट और पॉलीऑक्सिल कंपाउंड्स, तथा एथिल अल्कोहल।
ये वही रसायन हैं जिनके अनुचित उपयोग के कारण पहले भी कफ सिरप में संदूषण के मामले सामने आए थे।
फार्मा कंपनियों के लिए नया नियम अनिवार्य
सरकार ने साफ किया है कि दवाओं में इन रसायनों का उपयोग करने वाली सभी फार्मा कंपनियों को ओएनडीएलएस पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा। जिन कंपनियों के पास पहले से निर्माण लाइसेंस है, उन्हें भी पोर्टल पर अपनी जानकारी अपडेट करनी होगी। हाल में डाइएथिलीन ग्लाइकोल (DEG) और प्रोपाइलीन ग्लाइकोल (PG) से संबंधित प्रदूषण के मामलों ने वैश्विक स्तर पर भारत की दवा निर्माण छवि पर सवाल उठाए थे, जिसके बाद यह सख्त कदम उठाया गया।
देशभर में निगरानी प्रणाली लागू
ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी ने बताया कि ओएनडीएलएस पोर्टल अब लाइव है, और इस प्रणाली के जरिए सॉल्वेंट की सप्लाई चेन, उत्पादन स्रोत, और गुणवत्ता पर वास्तविक समय में निगरानी रखी जाएगी। यह डिजिटल सिस्टम सी-डैक नोएडा की मदद से विकसित किया गया है और इसे तत्काल प्रभाव से पूरे देश में लागू कर दिया गया है।
अब घरेलू बाजार में भी सिरप की लैब जांच अनिवार्य
केंद्र सरकार ने निर्णय लिया है कि कफ सिरप की सरकारी प्रयोगशालाओं में जांच अब भारत के घरेलू बाजार के लिए भी जरूरी होगी। जिस तरह निर्यात से पहले दवाओं को सरकारी लैब से सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया से गुजरना होता है, अब वैसा ही प्रावधान घरेलू बिक्री पर भी लागू होगा। फार्मा कंपनियों को किसी भी सिरप को बाजार में लाने से पहले “सर्टिफिकेट ऑफ एनालिसिस” (COA) प्राप्त करना अनिवार्य होगा, जो केवल मान्यता प्राप्त सरकारी या अनुमोदित लैब से जांच के बाद ही जारी किया जाएगा।
जनसुरक्षा और पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम
सरकार का यह निर्णय दवा उद्योग में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। इससे न केवल दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित होगी, बल्कि देश में फार्मा सेक्टर पर जनता का भरोसा भी मजबूत होगा।
संजय राउत बोले- भाजपा को हराना और मुंबई की अस्मिता को बचाना अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी
मुंबई। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट के सांसद संजय राउत ने गुरुवार को महाराष्ट्र में होने वाले निकाय चुनावों से पहले विपक्षी एकता की अपील की। उन्होंने कहा कि भाजपा को हराना और मुंबई की अस्मिता को बचाना अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
राउत ने कहा, “हमें लोकतंत्र, संविधान और मुंबई की पहचान को बचाने के लिए मिलकर लड़ना होगा। अगर विपक्ष एकजुट रहेगा, तो मराठी मानूस भी साथ देगा।”
कांग्रेस से तल्खी पर दी सफाई
कांग्रेस के एमएलसी भाई जगताप के इस बयान पर कि बीएमसी चुनाव में कांग्रेस न तो शिवसेना (यूबीटी) और न ही मनसे से गठबंधन करेगी, राउत ने कहा – “कांग्रेस हमारी सहयोगी पार्टी है, चाहे इंडिया गठबंधन हो या महा विकास आघाड़ी। ये केवल एक दल नहीं, कई दलों का समूह है।”
‘मुंबई को अदाणी के जबड़ों से बचाना होगा’
संजय राउत ने कहा, “हमारा मकसद स्पष्ट है — भाजपा को रोकना और मुंबई को अदाणी के जबड़ों से बचाना। अगर कोई पार्टी अलग रुख अपनाती है, तो वह उनका निर्णय है, पर हम अपने सहयोगियों को मुश्किल में डालने वाले बयान नहीं देंगे।”
‘कांग्रेस नेतृत्व से ही होगी बात’
उन्होंने कहा कि गठबंधन को लेकर बातचीत कांग्रेस के शीर्ष नेताओं राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, केसी वेणुगोपाल या रमेश चेन्निथला से ही होगी। हाल ही में उन्होंने वेणुगोपाल से मुलाकात की थी, जिसमें मनसे को महा विकास आघाड़ी में शामिल करने पर चर्चा हुई थी।
बिहार का उदाहरण देकर साधा निशाना
बिहार में सीट बंटवारे पर चल रहे विवाद को लेकर राउत ने कहा, “वहां कांग्रेस और राजद कई सीटों पर आमने-सामने हैं। क्या बिहार में कोई उद्धव ठाकरे या राज ठाकरे हैं?”
तेजस्वी यादव ने कहा— अब नहीं होगा शोषण, ब्याज मुक्त ऋण और पांच लाख का बीमा भी देंगे
पटना। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने दावा किया कि बिहार के लोगों ने अब परिवर्तन का मन बना लिया है। उन्होंने कहा कि जनता गरीबी, महंगाई और बेरोजगारी से त्रस्त हो चुकी है और अब बदलाव चाहती है।
तेजस्वी यादव ने कहा कि नीतीश सरकार ने हमारी घोषणाओं की नकल की, लेकिन जनता समझ चुकी है कि असली काम कौन करेगा। उन्होंने नीतीश सरकार की महिलाओं को दी गई 10 हजार रुपये की सहायता योजना पर भी सवाल उठाया और कहा — “यह राशि मदद नहीं, उधार है। चुनाव के बाद सरकार इसे वसूलने की तैयारी में है।”
तेजस्वी ने दोहराया कि उनकी सरकार बनने पर जिन परिवारों में कोई भी सरकारी नौकरी में नहीं है, उनके एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी, और यह वादा सरकार बनने के 20 दिन के अंदर पूरा किया जाएगा।
जीविका दीदियों को सरकारी दर्जा, 30 हजार शुरुआती वेतन का वादा
तेजस्वी यादव ने इस दौरान जीविका दीदियों के लिए भी बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि अब तक उनके साथ शोषण और अन्याय हुआ है, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।
उन्होंने घोषणा की कि उनकी सरकार बनते ही जीविका दीदियों को सरकारी कर्मी का दर्जा दिया जाएगा। उनका शुरुआती वेतन 30 हजार रुपये होगा, साथ ही 2 हजार रुपये प्रतिमाह भत्ता भी दिया जाएगा।
इसके अलावा उन्होंने कहा —
जीविका दीदियों के लिए लिए गए ऋण ब्याज मुक्त किए जाएंगे।
दो साल तक ब्याज मुक्त ऋण की सुविधा दी जाएगी।
5 लाख रुपये तक का बीमा कवरेज उपलब्ध कराया जाएगा।
एमएए योजना का एलान – महिला, अन्न और आवास पर फोकस
तेजस्वी यादव ने कहा कि सरकार बनने पर उनकी टीम ‘एमएए योजना’ (M – महिला, A – अन्न, A – आवास) लागू करेगी। इसके तहत माताओं और बहनों को अन्न और आवास की गारंटी दी जाएगी।
संविदा कर्मियों के लिए भी बड़ी राहत
तेजस्वी ने कहा कि संविदा कर्मियों का शोषण अब बंद होगा।
उन्होंने वादा किया कि उर्मिला और बेल्ट्रॉन जैसी एजेंसियों के माध्यम से काम कर रहे दो लाख से अधिक संविदाकर्मियों को स्थायी किया जाएगा।
उनका कहना था — “हम संविदा कर्मियों को मानसिक, शारीरिक और आर्थिक तनाव से मुक्ति दिलाएंगे।”
चुनावी समीकरण भी साधे राजद ने
इस बार राजद ने 143 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं।
तेजस्वी यादव खुद वैशाली की राघोपुर सीट से मैदान में हैं, जो उनका पारंपरिक गढ़ माना जाता है।
पार्टी ने 24 महिलाओं, 50 यादव और 18 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट देकर अपने वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश की है।
वहीं, 76 विधायकों में से 31 को इस बार टिकट नहीं दिया गया है ताकि नए चेहरों को मौका मिल सके।
वायु गुणवत्ता ‘गंभीर’ श्रेणी में, बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी की सलाह
नई दिल्ली। दिवाली के त्योहार के बाद दिल्ली-एनसीआर की हवा खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। राजधानी में धुंध और धुआं लगातार बढ़ रहा है, जिससे शहर ‘गैस चेंबर’ जैसा नजर आ रहा है। आंखों में जलन, खांसी और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं आम हो गई हैं।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, सोमवार को राजधानी के 38 निगरानी स्टेशनों में से 34 ‘रेड जोन’ में दर्ज किए गए। पूरे दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 531 रिकॉर्ड किया गया है, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है।
जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम: AQI 317 (‘बहुत खराब’)
आईटीओ: AQI 259 (‘खराब’)
आरके पुरम: AQI 368 (‘बेहद खराब’)
नरेला: AQI 551 (सबसे अधिक)
अशोक विहार: AQI 493
आनंद विहार: AQI 394
नोएडा: AQI 369
गाजियाबाद: AQI 402
इंडिया गेट के आसपास AQI 342, अक्षरधाम 358, INA और AIIMS के पास भी हवा खराब दर्ज की गई।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी
डॉ. धीरेंद्र गुप्ता (सर गंगाराम अस्पताल): बच्चों के अंग नाजुक होते हैं और प्रदूषण उनके लिए बेहद हानिकारक है। अत्यधिक प्रदूषित हवा में सामान्य व्यक्ति के फेफड़ों में बदलाव हो सकते हैं।
डॉ. निखिल मोदी (अपोलो अस्पताल): सर्दी के आगमन के साथ AQI बढ़ता है। एलर्जी या श्वसन रोग वाले लोग खांसी, सांस लेने में दिक्कत और आंखों में जलन महसूस कर सकते हैं। बच्चों और बुजुर्गों को बाहर जाने से बचना चाहिए और मास्क पहनना चाहिए।
ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP-2) लागू
CPCB ने GRAP-2 लागू कर कड़े कदम उठाए हैं। इसके तहत निर्माण, विध्वंस और धूल पैदा करने वाली परियोजनाओं पर रोक है। डीजल जनरेटरों का उपयोग केवल जरूरी सेवाओं तक सीमित रहेगा।
दिल्ली की सड़कों पर धुआं और धुंध
दीवाली की रात राजधानी में जमकर आतिशबाजी हुई। बम-पटाखों के अवशेष और फैला धुआं शहर को घनी धुंध में ढक गया। शादीपुर, मोती नगर और कर्मपुरा के इलाके त्योहार की चमक के साथ प्रदूषण की गंभीर तस्वीर भी दिखा रहे हैं।
AQI रीडिंग का मानक
अच्छा: 0–50
संतोषजनक: 51–100
मध्यम प्रदूषित: 101–200
खराब: 201–300
बहुत खराब: 301–400
गंभीर: 401–500
रूस से तेल आयात पर भारत-अमेरिका के रिश्तों में बढ़ी तनातनी
नई दिल्ली। कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि भारत के रूस से तेल आयात का मुद्दा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार उठा रहे हैं, जिससे मोदी सरकार की विदेश नीति पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पार्टी ने दावा किया कि ट्रंप ने पिछले पांच दिनों में तीन बार इस विषय को सार्वजनिक रूप से उठाया है, जबकि भारत का विदेश मंत्रालय इस तरह की किसी बातचीत से इनकार कर चुका है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा, “पिछले पांच दिनों में राष्ट्रपति ट्रंप तीन बार भारत के रूस से तेल आयात के मुद्दे पर बोल चुके हैं। और यह तो तय है कि बुडापेस्ट में पुतिन से मुलाकात से पहले वे इसे बार-बार दोहराएंगे।”
ट्रंप बोले—मोदी ने रूस से तेल न खरीदने का दिया आश्वासन, भारत ने किया खंडन
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में दावा किया कि उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत हुई है, जिसमें भारत ने रूस से तेल आयात बंद करने का आश्वासन दिया है। हालांकि, भारत के विदेश मंत्रालय ने ऐसी किसी बातचीत की पुष्टि करने से इनकार कर दिया। इसके जवाब में ट्रंप ने मंत्रालय के खंडन को “गलत” बताते हुए अपनी बात पर अड़े रहे।
ट्रंप की फिर चेतावनी—भारत नहीं मानेगा तो देना होगा भारी शुल्क
सोमवार को एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि भारत रूस से तेल खरीदना बंद नहीं करता, तो उसे भारी आयात शुल्क का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि भारत को समझना होगा कि वह किस पक्ष में खड़ा है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी उनके “अच्छे दोस्त” हैं और उन्होंने भरोसा दिलाया है कि भारत रूसी तेल नहीं खरीदेगा—हालांकि भारतीय पक्ष ने इस दावे को सिरे से नकार दिया।
रूस को आर्थिक मदद देने का आरोप
अमेरिका का आरोप है कि भारत रूस से कच्चा तेल खरीदकर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को यूक्रेन युद्ध जारी रखने में अप्रत्यक्ष वित्तीय सहायता दे रहा है। इस बीच, ट्रंप प्रशासन ने भारत से आने वाले उत्पादों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ गया है।
अब कुल मिलाकर अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर लगभग 50 प्रतिशत तक शुल्क बढ़ा दिया है।
कांग्रेस ने पूछा—विदेश नीति पर कौन सच बोल रहा है?
कांग्रेस ने केंद्र सरकार से सवाल किया कि आखिर प्रधानमंत्री मोदी और विदेश मंत्रालय की बातों में से किसे सच माना जाए। पार्टी ने कहा कि यदि ट्रंप के बयान सही हैं, तो भारत की विदेश नीति और संवाद की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठते हैं।
सबसे ज्यादा आनंद विहार में AQI 387 तक पहुंचा
नई दिल्ली। दिवाली का त्यौहार आते-आते दिल्ली में वायु प्रदूषण लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। शनिवार सुबह राजधानी के कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 300 के पार पहुंच गया, जिससे स्वास्थ्य संबंधी चेतावनी जारी की गई।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, सुबह 11 बजे तक आनंद विहार में सबसे खराब AQI 387 दर्ज किया गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं, बवाना में AQI 312, आईटीओ में 274, चांदनी चौक में 261 और आईजीआई हवाई अड्डा (T3) पर 206 रिकॉर्ड किया गया।
विशेषज्ञों की चेतावनी
गाजियाबाद के पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. शरद जोशी ने चेताया कि बढ़ती प्रदूषण स्तर से विशेष रूप से COPD, अस्थमा या तपेदिक जैसी श्वसन संबंधी समस्याओं वाले लोग प्रभावित हो सकते हैं। इसके परिणामस्वरूप खांसी, बुखार, सांस फूलना और सीने में दर्द जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। उन्होंने सभी को सलाह दी कि बाहर जाते समय एन-95 या डबल सर्जिकल मास्क का उपयोग करें।
AQI रीडिंग के मानक
CPCB के अनुसार, AQI को छह श्रेणियों में बांटा गया है:
अच्छा: 0-50
संतोषजनक: 51-100
मध्यम प्रदूषित: 101-200
खराब: 201-300
बहुत खराब: 301-400
गंभीर: 401-500
विशेषज्ञों ने कहा कि यदि वायु प्रदूषण इसी तरह बढ़ता रहा, तो स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है और लोगों को अनावश्यक बाहरी गतिविधियों से बचने की सलाह दी गई है।
पटना। बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने बुधवार को अपनी दूसरी सूची जारी कर दी है। इस सूची में 12 प्रत्याशियों के नाम शामिल हैं। सूची में सबसे पहला नाम गायिका मैथिली ठाकुर का है, जिन्हें अलीनगर विधानसभा सीट से टिकट दिया गया है, जबकि आखिरी नाम पूर्व आईपीएस अधिकारी आनंद मिश्रा का है, जिन्हें बक्सर सीट से उम्मीदवार बनाया गया है।
बीजेपी ने इस बार चर्चित चेहरों पर दांव लगाया है। आनंद मिश्रा कुछ माह पहले ही जनसुराज पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। वहीं मैथिली ठाकुर को भी हाल ही में 14 अक्टूबर को भाजपा की सदस्यता दिलाई गई थी। इसके बाद से ही उनके प्रत्याशी बनने की अटकलें तेज थीं।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, भाजपा नेतृत्व ने इस सूची को अंतिम रूप भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल, संगठन प्रभारी विनोद तावडे और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय की मौजूदगी में दिया।
इससे पहले भाजपा ने 14 अक्टूबर को पहली सूची जारी की थी, जिसमें 71 प्रत्याशियों के नाम शामिल थे। उस सूची में 9 महिला उम्मीदवारों को टिकट मिला था।
सुप्रीम कोर्ट ने पटाखे फोड़ने का समय सुबह 6-7 और रात को 8-10 बजे तक सीमित किया
नई दिल्ली। दिवाली से पहले सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में ग्रीन पटाखों को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने साफ कर दिया है कि अब सिर्फ नेशनल एन्वायरनमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (NEERI) से प्रमाणित ग्रीन पटाखों की बिक्री और उपयोग की अनुमति दी जाएगी। कोर्ट ने इस अनुमति की समयसीमा 18 से 21 अक्टूबर तक तय की है, यानी सिर्फ चार दिनों तक ग्रीन पटाखे जलाए जा सकेंगे।
मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि “हमें ऐसा संतुलित रास्ता अपनाना होगा जिससे न पर्यावरण को नुकसान पहुंचे और न ही त्योहार की भावना आहत हो।” अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि 21 अक्टूबर के बाद किसी भी प्रकार के पटाखों की बिक्री या उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। नियमों के उल्लंघन पर निर्माताओं और विक्रेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं।
तय हुआ समय और शर्तें
ग्रीन पटाखे सिर्फ दो समय स्लॉट में फोड़े जा सकेंगे — सुबह 6 से 7 बजे तक और रात 8 से 10 बजे तक। कोर्ट ने कहा कि बाहरी राज्यों से पटाखे लाने या फोड़ने की अनुमति नहीं होगी। अगर कोई नकली या गैर-प्रमाणित पटाखे बेचता या जलाता पाया गया, तो उसका लाइसेंस तुरंत निलंबित किया जाएगा।
निगरानी और गश्त के निर्देश
अदालत ने पुलिस को गश्ती दल गठित करने के आदेश दिए हैं जो नियमित तौर पर ग्रीन पटाखों की दुकानों की जांच करेंगे। केवल उन्हीं उत्पादों की बिक्री की जाएगी जिन पर क्यूआर कोड लगा होगा और जिनकी जानकारी वेबसाइट पर अपलोड की जाएगी, ताकि खरीदार उनकी प्रमाणिकता की जांच कर सकें। बिक्री केवल अधिकृत कंपनियों द्वारा तय स्थानों से ही की जा सकेगी।
14-16 अक्तूबर तक नई दिल्ली में यूएनटीसीसी सम्मेलन, 32 देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी करेंगे भागीदारी
नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र सैन्य योगदान देने वाले देशों (यूएनटीसीसी) के प्रमुखों के सम्मेलन का मंगलवार को उद्घाटन करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत के लिए शांति स्थापना कभी विकल्प नहीं, बल्कि आस्था का विषय रही है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि भारत हमेशा से अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए संयुक्त राष्ट्र के मिशनों में सक्रिय रहा है।
शांति स्थापना सिर्फ सैन्य मिशन नहीं
रक्षा मंत्री ने कहा, “शांति स्थापना केवल सैन्य मिशन नहीं है, बल्कि यह मानवता के प्रति साझा जिम्मेदारी है। युद्ध और अभाव से त्रस्त लोग ब्लू हेल्मेट्स को देख कर यह महसूस करते हैं कि दुनिया ने उन्हें नहीं छोड़ा।”
अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन चिंता का विषय
इस अवसर पर उन्होंने कुछ देशों द्वारा अंतरराष्ट्रीय नियमों के उल्लंघन और उन्हें कमजोर करने के प्रयासों पर चिंता जताई। राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत पुरानी अंतरराष्ट्रीय संरचनाओं में सुधार और नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
भारतीय योगदान की मिसाल
रक्षा मंत्री ने बताया कि पिछले दशकों में लगभग 2,90,000 भारतीय कर्मियों ने 50 से अधिक संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में सेवा दी है। उन्होंने कहा, “कांगो, कोरिया, दक्षिण सूडान और लेबनान में हमारे सैनिक, पुलिस और चिकित्सा पेशेवर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कमजोर लोगों की रक्षा और समाज के पुनर्निर्माण में लगे हैं।”
उन्होंने शहीद भारतीय शांति सैनिकों को भी याद किया, जिनमें से 180 से अधिक कर्मियों ने अपने प्राणों की आहुति दी।
सम्मेलन 14-16 अक्तूबर तक
यह सम्मेलन 14 से 16 अक्तूबर तक चलेगा, जिसमें 32 देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी हिस्सा लेंगे। इससे पहले थल सेना प्रमुख ने भी सम्मेलन को संबोधित किया और भारत को शांति स्थापना में सबसे बड़े योगदानकर्ताओं में से एक बताया।
