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बीजेपी में शामिल हुए गौरव वल्लभ, कहा, मैं सनातन विरोधी नारे नहीं लगा सकता..

बीजेपी में शामिल हुए गौरव वल्लभ, कहा, मैं सनातन विरोधी नारे नहीं लगा सकता..

 

 

 

देश-विदेश: गौरव वल्लभ ने कांग्रेस से आज सुबह ही इस्तीफा दिया था। इस्तीफा देते समय उन्होनें कहा था कि मैं सनातन विरोधी नारे नहीं लगा सकता। वहीं अब गौरव वल्लभ ने बीजेपी का दामन थाम लिया है। बीजेपी मुख्यालय पहुंचक उन्होनें पार्टी की सदस्यता ली। पार्टी के महासचिव विनोद तावड़े ने उन्हें पार्टी में शामिल कराया। बीजेपी में शामिल होने से पहले अपने एक्स हैंडल से पोस्ट कर वल्लभ ने कहा कि कांग्रेस पार्टी आज जिस प्रकार से दिशाहीन होकर आगे बढ़ रही है, उसमें खुद को सहज महसूस नहीं कर पा रहा हूं। मैं ना तो सनातन विरोधी नारे लगा सकता हूं और ना ही सुबह- शाम देश के वेल्थ क्रिएटर्स को गाली दे सकता। इसलिए मैं कांग्रेस पार्टी के सभी पदों व प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहा हूं।

सनातन विरोधी बयानों से नाराज..
वहीं गौरव वल्लभ ने गठबंधन सहयोगियों के सनातन विरोधी बयानों पर पार्टी की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए लिखा कि अयोध्या में भगवान राम की प्रतिष्ठा पर कांग्रेस पार्टी के रूख से मैं परेशान हूं। जन्म से हिंदू और पेशे से शिक्षक होने के नाते, पार्टी का यह रूख पार्टी और उसके गठबंधन से जुड़े कई लोग सनातन धर्म के खिलाफ बोलते हैं और इस मामले पर पार्टी की चुप्पी अप्रत्यक्ष स्वीकृति देने जैसी है।

कौन है गौरव वल्लभ?
गौरव वल्लभ 42 साल के है और जोधपुर जिले के पीपाड़ गांव के रहन वाले हैं। पीपाड़ में प्रारंभिक शिक्षा के बाद गौरव ने पाली के बांगड़ कॉलेज से उच्च शिक्षा ग्रहण की। इसके बाद महर्षि दयानन्द सरस्वती यूनिवर्सिटी अजमेर से ग्रेजुएशन की डिग्री ली और राजस्थान यूनिवर्सिटी जयपुर से पीएचडी की। एजुकेशन के दौरान गौरव वल्लभ मेधावी छात्र रहे। कॉलेज के दिनों मे हर तरह के कॉम्पिटिशन मे वे हिस्सा लेते और अव्वल आते थे। बाद में गौरव जमशेदपुर के एक्सएलआरआई कॉलेज में प्रोफेसर बन गए। गौरव वल्लभ अर्थव्यवस्था के अच्छे जानकार हैं। वे कांग्रेस से जुड़कर राजनीति में आए। प्रखर वक्ता होने और तर्कशक्ति की नॉलेज के चलते उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया गया। 2019 के विधानसभा चुनाव में उन्होनें जमशेदपुर पूर्व सीट से तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास के खिलाफ कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था। हालांकि वे चुनाव जीत नहीं पाए।

 

 

 

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