वन संसाधनों से राजस्व बढ़ाने के प्रयास किए जाने चाहिए- सीएम धामी..
उत्तराखंड: सीएम पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में वन विभाग और ऊर्जा निगम की गेम चेंजर योजनाओं की समीक्षा की। बैठक में उन्होंने वन विभाग को वनों के संरक्षण के साथ-साथ वन संपदाओं से राजस्व बढ़ाने के लिए और अधिक प्रभावी प्रयास करने के निर्देश दिए। साथ ही ऊर्जा निगम को ऊर्जा क्षेत्र में नई संभावनाओं पर कार्य करने की सलाह दी। सरकार नवीकरणीय ऊर्जा, जलविद्युत और अन्य ऊर्जा स्रोतों के बेहतर उपयोग पर फोकस कर रही है, जिससे प्रदेश की ऊर्जा क्षमता को बढ़ावा दिया जा सके।
सीएम धामी ने वन विभाग को निर्देश दिए कि गेस्ट हाउस के आधुनिकीकरण पर विशेष ध्यान दिया जाए ताकि पर्यटन को बढ़ावा मिल सके।
इसके साथ ही उन्होंने मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए कारगर उपाय अपनाने की जरूरत पर जोर दिया। सीएम ने कहा कि वन संपदाओं के बेहतर उपयोग से प्रदेश में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार को बढ़ावा दिया जाए, जिससे स्थानीय लोगों को आर्थिक लाभ हो सके।
बैठक में अधिकारियों ने कहा कि इको टूरिज्म के अंतर्गत इको कैंपिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास, पुराने फॉरेस्ट रेस्ट हाउस के रिस्टोर, स्थानीय युवाओं को विभिन्न गतिविधियों जैसे नेचर गाइड का प्रशिक्षण और क्षमता विकास कार्यक्रमों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इको टूरिज्म के लिए समर्पित एक वेबसाइट बनाई जाएगी। अभी तक विभिन्न क्षेत्रों में संचालित इको टूरिज्म क्षेत्र से स्थानीय युवाओं को लगभग पांच करोड़ रुपये, जिप्सी संचालन से 17 करोड़ और स्वयं सहायता समूह को 30 लाख की आय हुई है।
कागजों में नहीं धरातल पर दिखाई दें प्रयास..
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने वनाग्नि (जंगल की आग) की रोकथाम के लिए प्रभावी कार्ययोजना और रणनीति तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये प्रयास केवल कागजों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि धरातल पर प्रभावी रूप से लागू होने चाहिए। सीएम धामी ने यह भी कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को रोकने के लिए अन्य राज्यों की बेस्ट प्रैक्टिस का अध्ययन किया जाए और राज्य में इसके आधार पर एक ठोस कार्ययोजना बनाई जाए। सरकार का उद्देश्य वन संरक्षण को मजबूत करने, जंगलों में आग की घटनाओं को कम करने और स्थानीय समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर केंद्रित है।
ऊर्जा के क्षेत्र में अनेक संभावनाओं पर कार्य करने की जरूरत..
सीएम धामी ने ऊर्जा निगम की समीक्षा बैठक में कहा कि राज्य में ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने की दिशा में तेजी से कार्य किया जाए। लघु जल विद्युत परियोजनाओं पर विशेष ध्यान दें। कहा कि राज्य की मुख्य अवधारणा में ऊर्जा और पर्यटन प्रदेश था। पर्यटन के क्षेत्र में राज्य में तेजी से कार्य हो रहे हैं, लेकिन ऊर्जा के क्षेत्र में अनेक संभावनाओं पर कार्य करने की जरूरत है। शहरी क्षेत्रों में बिजली लाइन को भूमिगत करने का कार्य मानसून शुरू होने से पहले पूरा किया जाए। सरकारी भवनों में सोलर रूफ टॉप लगाने का कार्य जल्द पूरा करें। यूजेवीएनएल, यूपीसीएल की जो परिसंपत्तियां उपयोग में नहीं है, उनको उपयोग में लाने के लिए प्रभावी कार्य योजना बनाएं।
बैठक में अधिकारियों ने कहा कि वर्ष- 2023 में संशोधित जल विद्युत नीति के अनुसार वन टाइम एमनेस्टी के तहत कुल 160.80 मेगावाट के आठ प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई हैं। ये प्रोजेक्ट 2030 तक 1790 करोड़ की लागत से पूरे होंगे। साथ ही 121 मेगावाट के छह प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिली है। इससे क्षेत्र का सामाजिक आर्थिक विकास होगा। यूजीवीएनएल 2028 से तीन पंप स्टोरेज का कार्य शुरू कर 2031 में पूरा करेगा। लगभग 5660 करोड़ की लागत इन तीनों पंप स्टोरेज में इच्छारी , लखवार-व्यासी और व्यासी-कटापत्थर प्रोजेक्ट शामिल हैं।