राष्ट्रीय

सरकारी विज्ञापनों के रेगुलेशन के लिए गठित समिति की बैठक में निर्देशों का पालन न करने पर कार्रवाई की चेतावनी

सरकारी विज्ञापनों की विषयवस्तु के विनियमन के लिए उच्चतम न्यायालय द्वारा अधिकार प्राप्त समिति (Committee on Content Regulation in Government Advertising, CCRGA) की बैठक में समिति के निर्देशों का पालन न किये जाने को गंभीर मानते हुए कठोर कार्रवाई करने पर विचार किया गया। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओम प्रकाश रावत की अध्यक्षता वाली समिति की बैठक में दो अन्य सदस्य एशियन फेडरेशन ऑफ एडवरटाइजिंग एसोसिएशन के रमेश नारायण और प्रसार भारती बोर्ड के अंशकालिक सदस्य अशोक कुमार टंडन उपस्थित थे।

बैठक में कहा गया कि उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुसार, केंद्र की भांति राज्यों के लिए भी सरकारी विज्ञापनों की विषयवस्तु की निगरानी के लिए तीन सदस्यीय समितियों का गठन अनिवार्य किया गया है। मगर कई राज्यों ने अपने यहाँ इस समिति का गठन नहीं किया है। विभिन राज्यों द्वारा समिति का गठन न किये जाने के तथ्य को CCRGA ने गंभीरता से लिया है।

बैठक में CCRGA का ध्यान इस ओर भी आकर्षित किया गया कि जिन राज्यों में समितियां कार्य कर रही हैं, वहां उनके पास शिकायतें आ रही हैं। मगर कई मामलों में सम्बंधित पक्षों द्वारा समितियों की ओर से भेजे गए नोटिसों का जवाब नहीं दिया जा रहा है। ऐसे मामलों में CCRGA ने कोविड महामारी की मौजूदा स्थिति को देखते हुए संबंधित पक्षों को अपना जवाब भेजने के लिए कुछ और समय देने का फैसला लिया है।

बैठक में कहा गया कि नोटिस के जवाब में अनुचित देरी की स्थिति में यदि आवश्यक हो तो समिति विज्ञापन जारी करने वाली सरकारी एजेंसी के संबंधित अधिकारी को पेश होने के लिए भी कह सकती है। चेतावनी दी गई कि CCRGA के आदेशों का पालन न करने की स्थिति में, समिति अपनी शक्तियों का इस्तेमाल कर संबंधित राज्य सरकारों की नोडल एजेंसियों पर भविष्य में विज्ञापन जारी करने पर रोक लगाने के लिए बाध्य होगी।

क्या है CCRGA ?

उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के क्रम में भारत सरकार ने 6 अप्रैल, 2016 को सरकारी विज्ञापन एजेंसियों की ओर से सभी मीडिया प्लेटफार्मों पर जारी विज्ञापनों की विषय वस्तु पर निगरानी रखने के लिए “पूरी तरह से तटस्थत और निष्पक्ष” सोच रखने वाले तथा अपने क्षेत्र में उत्कृटता हासिल कर चुके ​व्यक्तियों की तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था। इसी अनुरूप राज्य स्तर पर वहां की सरकारों द्वारा समिति गठित की जानी है।

उच्चतम न्यायालय के निर्देश थे कि सरकारी विज्ञापनों की सामग्री सरकार के संवैधानिक और कानूनी दायित्वों के साथ-साथ नागरिक अधिकारों के नजरिए से भी प्रासंगिक होनी चाहिए। विज्ञापनों की सामग्री को एक उद्देश्यपूर्ण, निष्पक्ष और सुलभ तरीके से प्रस्तुत किया जाना चाहिए और इस तरह से डिजाइन किया जाना चाहिए ताकि वह अभियान के उद्देश्यों को पूरा करती हो। विज्ञापन सामग्री उद्देश्यपूर्ण होनी चाहिए और किसी भी प्रकार से सत्ता पक्ष के राजनीतिक हितों को बढ़ावा देने वाली नहीं होनी चाहिए। विज्ञापन अभियानों को न्यायसंगत, कुशल और प्रभावी तरीके से चलाया जाना चाहिए तथा सभी सरकारी विज्ञापन कानूनी नियमों के अनुरूप होने चाहिए और इनके लिए वित्तीय नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करना चाहिए।

CCRGA को उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन के संबंध में मिली जन शिकायतों को निबटाने तथा इस बारे में आवश्यकतानुसार सुझाव देने का अधिकार दिया गया है।

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