Tuesday, May 11, 2021
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भारत विश्व में सबसे कम मृत्यु दर वाले देशों में से एक

देश में कोविड-19 से मृत्यु दर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। यह आज घटकर 2.46% रह गई है। भारत दुनिया में सबसे कम मृत्यु दर वाले देशों में से एक है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार देखभाल प्रोटोकॉल के मानक को अच्छी तरह लागू करते हुए कोविड संक्रमण के मध्यम और गंभीर मरीजों के प्रभावी नैदानिक उपचार से कोविड मरीजों को बड़ी संख्या में स्वस्थ होना सुनिश्चित किया जा सका है। केंद्र सरकार सामूहिक रूप से कोविड-19 का मुकाबला करने में राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों की सरकारों की मदद कर रही है। ऐसी ही एक पहल एम्स, नई दिल्ली का ई-आईसीयू कार्यक्रम है। एम्स ने मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से 11 राज्यों के 43 बड़े अस्पतालों को आईसीयू रोगियों के नैदानिक ​​प्रबंधन में विशेषज्ञों के अनुभवों को साझा करने और तकनीकी सलाह के माध्यम से मदद की है। इससे गंभीर मरीजों की देखभाल और उपचार में उनकी क्षमता में काफी वृद्धि हुई है।

स्रोत : स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत सरकार

अब तक 7 लाख से अधिक मरीजों को कोविड-19 के संक्रमण से ठीक कर दिया गया है और उन्हें अस्पताल से छुट्टी देकर घर भेज दिया गया है। इसके साथ ही कोविड-19 के सक्रिय रोगियोंकी संख्या और इस बीमारी से ठीक होने वाले लोगों की संख्या (7,00,086)के बीच का अंतर बढ़कर 3,09,627 हो गया है। पिछले 24 घंटों में कोविड-19 के संक्रमण से 22,664 मरीज स्वस्थ हुए हैं। इसके साथ ही इस बीमारी से ठीक होने की दर बढ़कर अब 62.62% है। अस्पतालों और घरों में आईसोलेशन में रहकर इलाज करा रहे सभी 3,90,459 मरीजों पर चिकित्सकीय ध्यान दिया जा रहा है।

केंद्र सरकार द्वारा कोविड-19 से संबंधित तकनीकी मुद्दों, दिशा-निर्देशों एवं परामर्शों पर सभी प्रामाणिक और अद्यतन जानकारी के लिए कृपया नियमित रूप से
मंत्रालय की वेबसाइट पर दी जा रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोविड-19 से संबंधित तकनीकी सवाल के लिए technicalquery.covid19@gov.in और अन्य सवालों के लिए ncov2019@gov.in मेल आईडी जारी की है। इसके अलावा कोविड-19 को लेकर यदि कोई सवाल हो तो स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के हेल्पलाइन नंबर: + 91-11-23978046 या 1075 (टोल-फ्री) पर कॉल कर प्राप्त की जा सकती है।

उत्तराखंड के सीएम को फ़ोन कर पीएम मोदी ने कोरोना संक्रमित सैनिकों का हाल जाना

फाइल फोटो

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विभिन्न मुद्दों पर संवेदनशीलता व सक्रियता समय-समय पर प्रदर्शित होती रहती है। खास कर सेना से जुड़े मामलों में उनकी तत्परता विपक्षियों को भी हैरान कर डालती है। सेना के मान-सम्मान की बात हो या सैनिकों का मनोबल बढ़ाने का मसला, मोदी हर मौके पर मोर्चे पर नजर आते हैं।

शनिवार को देहरादून में करीब डेढ़ दर्जन सैनिकों के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने की खबर मिली, तो रविवार को प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से फोन पर सैनिकों के बारे में जानकारी ली और उनका हाल जाना। प्रधानमंत्री ने कोरोना संक्रमित हुए सैनिकों के स्वास्थ्य लाभ की कामना की और कहा कि राज्य सरकार व सेना के अधिकारी आपसी समन्वय बनाए रखते हुए सैनिकों के समुचित इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करें।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को जानकारी दी कि प्रदेश सरकार सेना से लगातार सम्पर्क में है। सेना को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने राज्य में कोविड-19 की अद्यतन स्थिति की जानकारी देते हुए कहा कि पिछले दिनों कोरोना पाजिटिव मामलों में वृद्धि हुई है। मगर स्थिति नियंत्रण में है। राज्य में सर्विलांस व सेम्पलिंग में काफी बढ़ोतरी की गई है। आईसीयू, वेंटिलेटर व आक्सीजन सपोर्ट की सुविधाएं भी लगातार बढ़ाई जा रही हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने बरसात को देखते हुए राज्य में आपदा प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार से आवश्यकतानुसार हर सहयोग दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड-19 और आपदा प्रबंधन की निरंतर समीक्षा की जा रही है।

उत्तराखंड के सीएम त्रिवेन्द्र की अपील – कोरोना के चलते सोमवती अमावस्या पर हरिद्वार के बजाय घर में ही करें मां गंगा का स्मरण

सचिवालय में वीडियो कान्फ्रेसिंग के जरिये कोविड-19 की समीक्षा करते मुख्यमंत्री

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कोरोना महामारी के मद्देनज़र आगामी 20 जुलाई को पड़ने वाली सोमवती अमावस्या पर श्रद्धालुओं से मां गंगा में स्नान करने के लिए हरिद्वार जाने के बजाय घर पर ही मां गंगा का श्रद्धापूर्वक स्मरण करने की अपील की है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि सोमवती अमावस्या के दिन तमाम हिन्दुओं की इच्छा होती है कि हरिद्वार पहुंच कर मां गंगा में स्नान करें। मगर कोरोना महामारी के कारण उत्पन्न परिस्थितियां इसके लिए अनुमति नहीं दे रही हैं। परिस्थितियां सामान्य होंगी तो फिर हम पूरी सादगी, श्रद्धा व विश्वास के साथ हरिद्वार में मां गंगा में स्नान कर सकेंगे।


उन्होंने कहा कि हम सब जानते हैं कि देश में पिछले चार-पांच महीनों से कोरोना महामारी का प्रकोप चल रहा है। ऐसे में आप सबके सहयोग से इस महामारी को रोकने का प्रयास किया जा रहा है और उसके परिणाम भी सामने देखने को मिल रहे हैं। भारत एक त्योहारों का देश है। हमारी धार्मिक मान्यताएं हैं और तमाम ऐसे सामाजिक कार्य इस दौरान होते रहे हैं। मगर उसका स्वरूप परिस्थितियों के अनुसार हमने परिवर्तित किया है। उन्होंने कहा कि मेरी आप सभी से विनम्र प्रार्थना है कि आप सरकार के साथ मिल कर के इस महामारी से लड़ने के लिए संकल्प लें। कोरोना को भगाना है और देश को जिताना है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे सोमवती अमावस्या के मौके पर अपने घरों पर मां गंगा का पूरे श्रद्धापुर्वक स्मरण करें और पवित्र भावों से स्नान करें।

मुख्यमंत्री ने वीडियो कान्फ्रेसिंग से प्रदेश में कोविड-19 की समीक्षा की

उधर, आज सचिवालय में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कोविड-19 के संक्रमण की रोकथाम तथा बचाव हेतु स्वास्थ्य विभाग और जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिये कि कोविड-19 के फ्रंटलाईन कार्मिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। गम्भीर कोरोना संक्रमित मामलों पर जिलाधिकारी खुद नजर रखें। समय पर रेस्पोंस सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। कोरोना संक्रमित व्यक्ति को तत्काल इलाज उपलब्घ करवाना, जल्द से जल्द उसके सम्पर्क में आए लोगों की पहचान कर उनकी टेस्टिंग कराना सुनिश्चित किया जाए। इसमें किसी प्रकार की देरी नहीं की जा सकती है। मुख्यमंत्री ने शनिवार को

जनप्रतिनिधियों, सामाजिक और व्यापारिक संगठनों से संवाद रखें

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में कोविड के पाॅजिटिव मामलों में हुई वृद्धि को देखते हुए चार जिलों में शनिवार व रविवार को लाॅकडाउन लागू किया गया है। जरुरी हुवा तो आगे भी इस पर विचार किया जाएगा। पूर्व में देहरादून में दो दिन के लाॅकडाउन के अच्छे परिणाम मिले थे। इसे देखकर अन्य राज्यों ने भी अपने यहां लागू किया था। कोविड-19 में आम जन का सहयोग बहुत जरूरी है। इसके लिए जिलाधिकारी जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और व्यापारिक संगठनों से लगातार सम्पर्क बनाए रखें। लोगों से संवाद बना रहना चाहिए।

आक्सीजन सपोर्ट पर विशेष ध्यान दिया जाए

मुख्यमंत्री ने कहा कि हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर पहले से काफी मजबूत हुआ है। आई.सी.यू., वेंटिलेटर, आक्सीजन सपोर्ट, टेस्टिंग मशीन व लेब आदि सुविधाओं में बढ़ोतरी हुई है। जिलाधिकारी इनकी क्षमताओं की जांच भी करा ले। ये सुनिश्चित कर लिया जाए कि इनके संचालन के लिए पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध हैं। आक्सीजन सपोर्ट पर विशेष ध्यान दिया जाए। कोरोना संक्रमण के मामले आएंगे। मगर सही समय पर इलाज मिल जाना चाहिए। गम्भीर मामलों को चिकित्सक व्यक्तिगत तौर पर देखें और जिलाधिकारी भी इसकी माॅनिटरिंग करें। मृत्यु दर को बढ़ने नहीं देना है।

बीमारी के प्रति संवदेनशील लोगों की सतत जानकारी रखी जाए

मुख्यमंत्री ने कहा कि सेम्पलिंग और टेस्टिंग में लगातार वृद्धि हुई है। इसे और बढ़ाए जाने की आवश्यकता है। सर्विलांस में जिलों ने अच्छा काम किया है। सर्विलांस में 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों और गम्भीर बीमारियों से ग्रस्त रहने वालों के बारे में पूरी जानकारी जुटाई जाए। हमारे फ्रंटलाईन वर्करों को लगातार प्रोत्साहित करें। उनको हर जरूरी सुविधा उपलब्ध कराई जाए। ये सुनिश्चित कर लिया जाए कि आशा और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के लिए स्वीकृत की गई प्रोत्साहन राशि उनके खातें में चली गई है।

डेंगू को लेकर हो विशेष अभियान

मुख्यमंत्री ने कहा कि डेंगू पर भी सतर्क और सावधान रहना है। हर रविवार को विशेष अभियान चलया जाए। लोगों को प्रेरित किया जाए कि हर रविवार को केवल 15 मिनिट का समय निकालें और अपने घर में या घर के आसपास इकट्ठा पानी को हटा दें। डेंगू को न पनपने दें।

धार्मिक उत्सवों के अवसर पर भीड़ न जुटे, धर्मगुरूओं का लें सहयोग

मुख्यमंत्री ने कहा कि समय-समय पर धार्मिक त्यौहार, उत्सव और स्थानीय मेले होते हैं। इनमें लोगों की भीड़ न हो। इसके लिए समाज के गणमान्य लोगों और धार्मिक गुरूओं का सहयोग लिया जाए। मेलों और उत्सवों के आयेाजकों को भी बातचीत से विश्वास में लें और कोविड-19 के लिए निर्धारित प्रोटोकाल का पालन किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह भी देखने में आया है कि राज्य में आए कुछ पर्यटक, कोविड-फ्री का फर्जी प्रमाणपत्र लेकर आए। पर्यटकों द्वारा निगेटिव कोरोना जांच संबंधी प्रमाण पत्रों की पुख्ता चेकिंग की जाए। परंतु यह भी सुनिश्चित किया जाए कि पर्यटकों को इससे परेशानी न हो। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को राज्य में लौटे प्रवासियों का ग्राम पंचायत वार विवरण संकलन करने के निर्देश दिए। इससे इन लोगों के लिए योजनाएं बनाने में और आसानी होगी।

वीडियो कान्फ्रेसिंग में सचिव स्वास्थ्य अमित नेगी, डीजी लाॅ एंड आर्डर अशोक कुमार, सचिव शैलेश बगोली, आयुक्त गढ़वाल रविनाथ रमन, आयुक्त कुमायूं अरविंद सिंह ह्यांकि, डा. पंकज कुमार पाण्डेय, आई जी गढ़वाल अभिनव कुमार, आई जी संजय गुन्ज्याल सहित शासन के वरिष्ठ अधिकारी और जिलाधिकारी उपस्थित थे।

पीएम मोदी की महत्वाकांक्षी योजना है चारधाम परियोजना – गडकरी

देहरादून। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, सड़क परिवहन राज्य मंत्री जनरल वी.के. सिंह व उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने आज वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के जरिये चारधाम परियोजना के सम्बन्ध में बैठक की। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी ने कहा कि चारधाम परियोजना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है, जो सामरिक दृष्टि से भी अति महत्वपूर्ण है। इसे निर्धारित समय के अन्तर्गत पूरा किए जाने के लिए तेजी से कार्य किए जाएं। राज्य एवं केन्द्र स्तर पर भूमि अधिग्रहण, वन एवं पर्यावरण आदि की क्लीयरेंस के लम्बित प्रकरणों को समयबद्धता के साथ निपटाया जाए। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं को समय से पूरा करने के लिए केन्द्र एवं राज्य के अधिकारी आपसी समन्वय से काम करें। केन्द्र एवं राज्य स्तर के सम्बन्धित अधिकारी लगातार बैठकें आयोजित कर आपत्तियों का निस्तारण करें।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री गडकरी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि चारधाम यात्रा मार्ग का कार्य तेजी से किया जा रहा है। चारधाम यात्रा मार्ग सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के कारण इसका तेजी पूर्ण होना और भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि गैरसैण को उत्तराखण्ड की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया गया है।

मुख्यमंत्री ने गडकरी से गैरसैण को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-87 एवं राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 309-ए को विकसित कर टू-लेन करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि भराड़ीसैण ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित होने के फलस्वरूप यातायात बढ़ने की सम्भावना है, जिसके दृष्टिगत नेशनल हाईवे-87 का चैड़ीकरण अपरिहार्य है। केन्द्रीय मंत्री ने इस पर सैद्धान्तिक सहमति देते हुए इसकी डीपीआर मंत्रालय को शीघ्र उपलब्ध करवाने को कहा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 309-ए के टू-लेन होने से पिथौरागढ़, मुनस्यारी, डीडीहाट, गंगोलीहाट, चैकोड़ी बेरीनाग आदि पर्यटक स्थल जुड़ जाएंगे, जो पर्यटन की दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि इस मार्ग के 208 किमी लम्बाई के इस भाग को 02 लेन चैड़ीकरण हेतु डीपीआर एवं भूमि अधिग्रहण की स्वीकृति प्रदान की गयी है। उन्होंने कहा कि चैकोड़ी से अल्मोड़ा तक प्रथम चरण में कुल 126 किमी लम्बाई की डीपीआर गठन की कार्यवाही गतिमान है।

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि मंत्रालय द्वारा चारधाम परियोजना से सम्बन्धित सभी प्रकार की क्लीयरेंस का निस्तारण तेजी के साथ किया जा रहा है।

सड़क परिवहन राज्य मंत्री जनरल वी.के. सिंह ने कहा कि उत्तराखण्ड का पूरा क्षेत्र सामरिक दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है। चारधाम परियोजना सभी प्रकार के मार्गों के काम को तेजी से पूर्ण करने के लिए केन्द्र एवं राज्य सरकार के अधिकारियों को अपनी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। सभी प्रकार की क्लीयरेंस के लिए अधिकारियों को जिम्मेदारी निभाते हुए क्लीयरेंस एवं आपत्तियों का निस्तारण करना होगा।

बैठक में बताया गया कि कुल 12072 करोड़ लागत एवं कुल 826 किमी लम्बाई की इस चारधाम परियोजना का शुभारम्भ 27 दिसम्बर, 2016 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किया गया था। इस महत्वकांक्षी परियोजना के अन्तर्गत 350 किमी लम्बाई का कार्य पूर्ण हो चुका है। बैठक में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, वन एव पर्यावरण मंत्रालय, बीआरओ और उत्तराखण्ड सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मोदी सरकार की बहुआयामी योजना है जल जीवन मिशन

मोदी सरकार का मानना है कि जल जीवन मिशन से महिलाओं व बालिकाओं पर मेहनत का बोझ कम होगा। क्योंकि उन पर ही मुख्य रूप से पानी की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी होती है।

मोदी सरकार ने सबको स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के लिए विगत वर्ष अगस्त माह में जल जीवन मिशन का शुभारम्भ किया था। मिशन के तहत विगत 7 महीनों में लगभग 84.83 लाख ग्रामीण घरों को नल कनेक्शन उपलब्ध कराए जा चुके हैं। कोविड-19 महामारी के बीच अनलॉक-1 के बाद लगभग 45 लाख नल कनेक्शन उपलब्ध करा दिए गए हैं। इस प्रकार, रोजाना लगभग 1 लाख घरों को नल कनेक्शन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

 काम की गति के अंदाज से मोदी सरकार का मिशन को लेकर गंभीरता का पता चलता है। जल शक्ति मंत्रालय द्वारा जारी वक्तव्य में बताया गया है कि योजना में  पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए, हर संपदा की जिओ-टैगिंग की जा रही है और कनेक्शनों को ‘परिवार के मुखिया’ के ‘आधार’ से जोड़ा जा रहा है। जिला स्तर पर मिशन की प्रगति का संकेत देने वाला एक डैशबोर्ड तैयार किया गया है और यह मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध है।

मिशन की शुरुआत के बाद राज्यों से बेसलाइन डाटा को पुनः सत्यापित करने का अनुरोध किया गया था, जिसके तहत पता चला कि देश के 19.04 करोड़ ग्रामीण घरों में 3.23 करोड़ घरों को पहले ही नल कनेक्शन दिए जा चुके हैं। शेष 15.81 करोड़ घरों को नल कनेक्शन उपलब्ध कराए जाने हैं। इस प्रकार समयबद्ध तरीके से 16 करोड़ घरों को इस योजना में कवर किया जाना है, वहीं पहले से उपलब्ध कनेक्शनों की कार्यशीलता भी सुनिश्चित करनी है। इसका मतलब है कि हर साल 3.2 करोड़ घरों को कवर किया जाना है, जिसके लिए दैनिक आधार पर 88,000 नल कनेक्शन उपलब्ध कराने होंगे। इस लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए, राज्य/संघ शासित राज्‍य हर ग्रामीण घर में नल कनेक्शन उपलब्ध कराने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। 

जल जीवन मिशन ( जेजेएम ) में बिहार, तेलंगाना, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों का प्रदर्शन शानदार रहा है।2020-21 में जेजेएम के कार्यान्वयन के लिए कुल 23,500 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। वर्तमान में मिशन के कार्यान्वयन के लिए राज्यों/ संघ शासित राज्‍योंको 8,000 करोड़ रुपये का केन्द्रीय कोष उपलब्ध है। इसके अलावा, 2020-21 में ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए 15वें वित्त आयोग के अनुदान का 50 प्रतिशत जल आपूर्ति और स्वच्छता के लिए निर्धारित किया गया है, जो 30,375 करोड़ रुपये के बराबर है। इस धनराशि का 50 प्रतिशत हिस्सा इस माह की 15 जुलाई  को जारी कर दिया गया है। इससे उन्हें गांवों में पेयजल आपूर्ति प्रणालियों के लिए बेहतर योजना बनाने, कार्यान्वयन, प्रबंधन, परिचालन और रखरखाव में सहायता मिलेगी।

मोदी सरकार मिशन के तहत यूएन एजेंसियों सहित प्रतिष्ठित राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों, एनजीओ, सीबीओ, सीएसआर संगठनों, ट्रस्टों, फाउंडेशंस आदि के साथ भागीदारी की संभावनाएं तलाश रही है। सरकार को उम्मीद है कि पानी अगला जनांदोलन बनकर सामने आएगा और यह हर किसी की जिम्मेदारी बन जाएगा, जिसे अभी तक सिर्फ सरकारी क्षेत्र के दायित्व के रूप में देखा जाता रहा है। इसीलिए मिशन के तहत सभी के लिए पेयजल सुरक्षा हासिल करने के लिए विभिन्न संस्थानों/व्यक्तियों के साथ भागीदारी तथा मिलकर काम करने पर जोर देता है।

जल शक्ति मंत्रालय 2024 तक देश में हर ग्रामीण घर को नियमित और दीर्घकालिक आधार पर पर्याप्त मात्रा में सुझाई गई गुणवत्ता वाला पानी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्यों के साथ भागीदारी में जल जीवन मिशन (जेजेएम) का कार्यान्वयन कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विगत वर्ष 15 अगस्त को इस मिशन की घोषणा की थी। इसके लिए 25 दिसंबर, 2019 को परिचालन दिशा – निर्देश जारी कर दिए गए थे। जल शक्ति मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय मिशन इसके कार्यान्वयन के लिए राज्यों/संघ शासित राज्‍यों के साथ मिलकर प्रयास कर रहा है। इस वर्ष मार्च-मई के दौरान सघन ग्राम वार विश्लेषण कार्य किया गया था। इस आधार पर राज्यों की कार्य योजनाएं तैयार की गईं। 

केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत मिशन के कार्यान्वयन में तेजी लाने के लिए राज्यों और संघ शासित राज्‍योंके मुख्यमंत्रियों/उप राज्यपालों के साथ नियमित रूप से बैठक कर रहे हैं। राज्यों ने गांवों, विकास खंडों और जिलों में 100 प्रतिशत कार्यशील घरेलू नल कनेक्शन (एफएचटीसी) कवरेज और अंततः राज्यों को ‘हर घर जल राज्य’ बनाने की योजना तैयार की है।

विभिन्न राज्यों/ संघ शासित राज्यों ने 2024 से पहले ही मिशन के लक्ष्य को हासिल करने की प्रतिबद्धता जाहिर की है। बिहार, गोवा, पुडुचेरी और तेलंगाना ने वर्ष 2021 में,  गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, मेघालय, पंजाब, सिक्किम व उत्तर प्रदेश ने 2022 में इस कार्य को पूरा करने की योजना बनाई है। वहीं अरुणाचल प्रदेश, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, मणिपुर, मिजोरम, नगालैंड, त्रिपुरा, छत्तीसगढ़ ने 2023 में, असम, आंध्र प्रदेश, झारखंड, केरल, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल ने 2024 तक 100 प्रतिशत कवरेज हासिल करने की योजना बनाई है।

इस मिशन का उद्देश्य सार्वभौमिक कवरेज हासिल करना है और इसमें समानता और समावेशन के सिद्धांत पर जोर दिया गया है। ताकि गांव में हर परिवार को उनके घर पर ही नल कनेक्शन मिले और कोई भी इससे वंचित न रहे। इस क्रम में राज्य एससी/एसटी बहुल गांवों, आकांक्षी जिलों, सूखा प्रभावित और रेगिस्तानी क्षेत्रों तथा पानी की खराब गुणवत्ता वाली बस्तियों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

जापानी इंसेफ्लाइटिस/एक्यूट इंसेफ्लाइटिस (जेई/एईएस) से प्रभावित जिलों पर विशेष जोर दिया गया है, जो प्रभावित जिलों में शिशु मृत्यु की वजहों में से एक है। अभी तक 5 राज्यों असम, बिहार, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के 61 जेई/एईएस प्रभावित जिलों में 3.01 करोड़ घर हैं। इनमें से 27.32 लाख (9 प्रतिशत) घरों में ही एफएचटीसी हैं और बाकी 2.74 करोड़ घरों (91 प्रतिशत) को जेजेएम के अंतर्गत एफएचटीसी उपलब्ध कराए जाने हैं।

जेजेएम के अंतर्गत खराब गुणवत्ता वाले पानी से प्रभावित बस्तियों में पीने योग्य पानी की आपूर्ति सबसे पहली प्राथमिकता है। इसके पीछे फ्लूरोसिस और आर्सेनिकोसिस के दुष्प्रभावों में कमी लाना है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण के अंतरिम आदेश के प्रकाश में राज्यों को इस वर्ष दिसंबर तक आर्सेनिक और फ्लूरॉइड प्रभावित बस्तियों के सभी घरों में पाइप से पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करनी है।

एक विकेंद्रीयकृत कार्यक्रम होने के कारण ग्राम स्तर पर न्यूनतम 50 प्रतिशत महिला सदस्यों के साथ ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियां (वीडब्ल्यूएससी)/ग्राम पंचायत की उप समिति के रूप में पानी समिति का गठन किया जा रहा है, जो जल संसाधन विकास, आपूर्ति, ग्रे वाटर (उत्सर्जित जल) प्रबंधन और परिचालन व रखरखाव पर विचार करते हुए ग्राम कार्य योजनाएं (वीएपी) तैयार करने के लिए जिम्मेदार हैं। जेजेएम का उद्देश्य ग्राम पंचायत या उसकी उप समिति के सदस्यों की क्षमता बढ़ाना भी है, जिससे गांव में एक ‘उत्तरदायी’ और ‘जिम्मेदार’ नेतृत्व तैयार किया जा सके। ताकि यह सदस्य गांव में जल आपूर्ति के आधारभूत ढांचे का प्रबंधन, योजना, परिचालन एवं रखरखाव जैसे काम कर सके। वहीं कई राज्यों ने पानी समिति के सदस्यों को ऑनलाइन प्रशिक्षण देने का काम पहले ही शुरू कर दिया है।

जेजेएम के अंतर्गत, स्रोतों की मजबूती, जल संरक्षण, भूमिगत जल को बढ़ाना, जल शोधन और ग्रे वाटर प्रबंधन आदि के लिए निचले यानी ग्राम/ ग्राम पंचायत के स्तर पर केन्द्रीय योजना पर जोर दिया गया है। इसके लिए मनरेगा के संसाधनों, 15वें वित्त आयोग के पीआरआई के लिए अनुदानों, एसबीएम (जी), जिसका खनिज विकास कोष, सीएसआर कोष, स्थानीय क्षेत्र विकास कोष आदि का उपयोग किया जाना चाहिए।जेजेएम के अंतर्गत ग्रामीणों राजगीरी, प्लम्बिंग, इलेक्ट्रिकल पहलुओं, मोटर मरम्मत आदि ‘कौशल’ को भी बढ़ावा दिया गया है। कुशल, अर्ध कुशल और अकुशल कामगारों को जोड़ने की संभावनाओं को देखते हुए जेजेएम को गरीब कल्याण रोजगार योजना (जीकेआरए) से भी जोड़ा गया है, जिसके तहत सार्वजनिक ढांचा तैयार करने के काम में प्रवासी कामगारों को रोजगार उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। इस योजना को 6 राज्यों के 25,000 गांवों में लागू किया जा रहा है।

पेयजल परीक्षण प्रयोगशालाओं के माध्यम से जल आपूर्ति की निगरानी एक महत्वपूर्ण पहलू है। इन प्रयोगशालाओं को मजबूत बनाने और उन्हें एनएबीएल द्वारा मान्यता दिलाने पर जोर दिया गया है। राज्यों को आम जनता के लिए जल गुणवत्ता प्रयोगशालाएं खोलनी हैं, जिसके लिए ग्रामीण महिलाएं आगे आ सकती हैं और अपने घरों में आने वाले पानी की गुणवत्ता की जांच करा सकती हैं।

जल शक्ति मंत्रालय के अनुसार समुदाय पानी की गुणवत्ता की निगरानी के लिए सक्षम हो रहे हैं। इसके लिए गांवों में पांच ग्रामीणों को प्रशिक्षण दिया गया है और इसमें महिलाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके साथ ही ग्रामीण गांवों में ही पानी की जांच कर सकते हैं। इसका उद्देश्य पीने के पानी के लिए एक विश्वसनीय व्यवस्था तैयार करना है। जल गुणवत्ता की निगरानी के तहत प्रत्येक स्रोत की साल में एक बार रासायनिक मानदंडों पर और दो बार जीवाणु संबंधी संदूषण (मानसून से पहले और बाद में) के लिए परीक्षण किए जाने की आवश्यकता है।

प्रधानमंत्री मोदी के वित्तीय समावेशन, घरों, सड़क, स्वच्छ ईंधन, बिजली, शौचालय, जल जीवन मिशन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराकर ग्रामीण क्षेत्रों में ‘जीवन सुगमता’ सुनिश्चित के आह्वान के क्रम में हर ग्रामीण को पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। मोदी सरकार का मानना है कि जल जीवन मिशन से महिलाओं व बालिकाओं पर मेहनत का बोझ कम होगा। क्योंकि उन पर ही मुख्य रूप से पानी की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी होती है।

हरेला पर देहरादून में 1 घंटे में करीब साढ़े तीन लाख पौधों का रोपण

हरेला पर देहरादून में 1 घंटे में करीब साढ़े तीन लाख पौधों का रोपण

देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने गुरुवार को हरेला पर्व के अवसर पर राजधानी देहरादून के रायपुर में उत्तराखण्ड के प्रसिद्ध लोकगायक स्वर्गीय जीत सिंह नेगी जी की पुण्य स्मृति में पौधा लगा कर स्मृति वन का उद्घाटन किया। प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की बधाई व शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री ने सभी से अनुरोध किया कि वे अपने दिवंगत परिजनों और मित्रों की स्मृति एवं किसी भी शुभअवसर पर एक पौधा अवश्य लगाएं। उन्होंने कहा कि हमें न केवल पौधे लगाने हैं बल्कि इनकी उचित देखभाल भी सुनिश्चित करनी है।

मुख्यमंत्री ने धाद संस्था को उत्तराखण्ड से सम्बन्धित ऐसे लोगों की याद में स्मृति वन लगाने पर बधाई दी, जिन्होंने उत्तराखण्ड की आंचलिक संस्कृति, बोली भाषाओं के संरक्षण एवं इतिहास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि इन वृक्षों को सुरक्षित रखना हम सब की जिम्मेदारी है। उन्होंने गाँव के प्रधान एवं क्षेत्रवासियों से इन पौधों के संरक्षण के लिए एक-एक, दो-दो पौधे गोद लेने का भी आह्वान किया।


मुख्यमंत्री ने कहा कि भले ही पौधे कम लगाए जाएं परन्तु जितने भी लगाए जाएं उनको जीवित रखने का हर सम्भव प्रयास किया जाना चाहिए। इसके लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को इससे जुड़ना होगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा जल संरक्षण का संकल्प लिया गया था। उसके बाद हरेला के पर्व के अवसर अल्मोड़ा जिले की कोसी नदी की घाटी में 1 घंटे में 1 लाख 67 हजार पौधे लगाए गए थे। अगले वर्ष उसी नदी के किनारे 2 लाख 67 हजार पौधे लगाए गए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष हरेला के लिए हमने बहुत बड़ा लक्ष्य रखा था परन्तु कोरोना महामारी के कारण, सामाजिक दूरी बनाए रखने के कारण यह सम्भव नहीं हो पाया। फिर भी इस वर्ष देहरादून जिले में 2 लाख 75 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया था, इसमें आज लगभग 3 लाख 50 हजार पौधे लगाए गए हैं। इसमें 60 हजार से अधिक फलदार पौधे हैं। इसके लिए उन्होंने जिला प्रशासन व वन विभाग के अधिकारी कर्मचारियों को भी बधाई दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि अपने प्रदेश को हराभरा बनाने के लिए अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक घर में नींबू, अमरूद और पपीता के पौधे अवश्य लगाने जाने चाहिए। यह स्वास्थ्य के लिए काफी लाभप्रद होते हैं।

स्थानीय विधायक उमेश शर्मा काऊ ने प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की बधाई देते हुए कहा कि इन पौधों की देखभाल करने का अनुरोध किया। इससे पहले मुख्यमंत्री रावत, कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत, प्रमुख वन संरक्षक जयराज ने मुख्यमंत्री आवास में रूद्राक्ष सहित अन्य प्रजातियों के पौधे लगाए।

कोविड -19 के वैक्सीन जाइकोव-डी का क्लिनिकल ट्रायल शुरू

प्रतीकात्मक चित्र

कोविड -19 के वैक्सीन जाइकोव–डी का क्लिनिकल ट्रायल शुरू

जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (बीआईआरएसी) द्वारा लागू किये गए राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन के तहत भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा समर्थित वैक्सीन खोज कार्यक्रम के नैदानिक परीक्षण चरण की शुरुआत हो गयी है।

बीआईआरएसी ने घोषणा की है कि जाइडस द्वारा डिजाइन और विकसित प्लास्मिड डीएनए वैक्सीन जाइकोव – डी के नैदानिक परीक्षणों की शुरुआत हो गयी है। यह कार्यक्रम भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा आंशिक रूप से वित्त पोषित है। यह कोविड – 19 के लिए पहला स्वदेशी रूप से विकसित वैक्सीन है, जिसके स्वस्थ मनुष्यों पर परीक्षण चरण की शुरुआत हो गयी है।

अनुकूलन चरण I / II के तहत खुराक वृद्धि के साथ बहु-केंद्रित अध्ययन वैक्सीन की सुरक्षा, सहनीयता और प्रतिरक्षा क्षमता का आकलन करेगा। फरवरी 2020 में कोविड – 19 के लिए त्वरित वैक्सीन विकास कार्यक्रम के शुभारंभ के बाद से वैक्सीन का मानव पर परीक्षण चरण की शुरुआत एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

डीबीटी की सचिव और बीआईआरएसी की चेयरपर्सन डॉ. रेणु स्वरूप ने कहा, “भारत के जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने नेशनल बायोपार्मा मिशन के तहत कोविड – 19 के लिए एक स्वदेशी वैक्सीन के तेजी से विकास के लिए जाइडस के साथ साझेदारी की है। जाइडस के साथ यह साझेदारी महामारी से लड़ने के लिए देश की वैक्सीन की जरूरत को पूरा करने के लिए है। महामारी ने एक अरब लोगों को जोखिम में डाल दिया है। इस तरह के शोध प्रयास, भविष्य में होने वाली बीमारी के प्रकोपों ​​के खिलाफ निवारक रणनीतियों को विकसित करने में देश की मदद करेंगे और हमारे समाज के प्रासंगिक मुद्दों के समाधान के लिए नए उत्पाद नवाचार को पोषण और प्रोत्साहित करने के लिए सरकार के फोकस को बढ़ावा देंगे। “

उन्होंने यह भी उल्लेख किया, “यह आत्मनिर्भर भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है क्योंकि जाइडस ने स्वदेशी रूप से विकसित वैक्सीन के मानव नैदानिक ​​परीक्षण चरण की शुरुआत कर दी है। हम आशा करते हैं, कि यह वैक्सीन सकारात्मक परिणाम दिखायेगी क्योंकि अभी तक पूर्व-नैदानिक चरण में इसके सकारात्मक परिणाम आये हैं जहाँ इसे सुरक्षित, सहनीय और प्रतिरक्षा क्षमता बढ़ाने वाला पाया गया है। यह भारतीय वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। ”

जाइडस कैडिला के चेयरमैन पंकज आर पटेल ने कहा, “इस महामारी के खिलाफ हमारी लड़ाई में यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण कदम है और इससे देश को इस स्वास्थ्य संबंधी चुनौती का सामना करने में मदद मिलेगी। हम बीआईआरएसी और जैव-प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार के शुक्रगुज़ार हैं कि उन्होंने कोविड – 19 को रोकने के लिए एक सुरक्षित और प्रभावी वैक्सीन की खोज में हमें समर्थन प्रदान किया। “

जाइकोव –डी के बारे में

प्री-क्लिनिक चरण में, यह पाया गया कि वैक्सीन से चूहों, सूअरों और खरगोशों जैसे कई जानवरों की प्रजातियों में मजबूत प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया हुई है। वैक्सीन द्वारा उत्पादित एंटीबॉडी वायरस को बेअसर करने में सक्षम थे, जो वैक्सीन की सुरक्षात्मक क्षमता को दर्शाता है। दोबारा खुराक देने के बाद भी वैक्सीन के लिए कोई सुरक्षा चिंता नहीं देखी गयी। खरगोशों में, मानव के लिए अपेक्षित खुराक से तीन गुना तक सुरक्षित, सहनीय और प्रतिरक्षा को बेहतर बनाने वाला पाया गया।

जाइकोव –डी के साथ, कंपनी ने देश में डीएनए वैक्सीन प्लेटफ़ॉर्म को सफलतापूर्वक स्थापित किया है। इसके लिए गैर-प्रतिकृति और गैर-एकीकृत प्लास्मिड का उपयोग किया गया है जिसे बहुत सुरक्षित माना जाता है। इसके अलावा, वेक्टर प्रतिक्रिया और संक्रामक एजेंट की अनुपस्थिति में, यह प्लेटफॉर्म न्यूनतम जैव सुरक्षा आवश्यकताओं (बीएसएल -1) के साथ वैक्सीन के निर्माण को आसान बनाता है। इस प्लेटफ़ॉर्म में वैक्सीन स्थिरता बेहतर होती है और इसकी कोल्ड चेन आवश्यकता भी कम होती है जिससे देश के दूरस्थ क्षेत्रों में इसका परिवहन आसान हो जाता है। इसके अलावा, इस प्लेटफॉर्म में कुछ हफ़्ते के अन्दर वैक्सीन को संशोधित किया जा सकता है, यदि वायरस रूपांतरित होता है। वैक्सीन ऐसी स्थिति में भी सुरक्षा प्रदान कर सकता है।

डीबीटी के राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन के बारे में :

भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) के उद्योग- शिक्षा जगत सहयोग मिशन के तहत जैव औषधि (बायोफार्मास्यूटिकल) के त्वरित अनुसंधान पर विशेष जोर दिया जाता है। मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित इस मिशन की कुल लागत 250 मिलियन डॉलर है और इसे विश्व बैंक द्वारा 50% वित्त पोषित किया जा रहा है। इस मिशन को जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान सहायता परिषद (बीआईआरएसी) द्वारा लागू किया गया है। यह कार्यक्रम भारत में स्वास्थ्य मानकों में सुधार करने के उद्देश्य से राष्ट्र के लिए किफायती उत्पाद विकसित करने के लिए समर्पित है। वैक्सीन, चिकित्सा उपकरण, नैदानिक और जैव रोग चिकित्सा इसके सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं।

बीआईआरएसी के बारे में :

जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (बीआईआरएसी), भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) द्वारा धारा 8, अनुसूची बी के अंतर्गत स्थापित एक सार्वजनिक क्षेत्र का उद्यम ( लाभ के लिए नहीं ) है। यह जैव प्रौद्योगिकी उद्यमों के लिए एक सुविधा व समन्वय प्रदान करनेवाली एजेंसी के रूप में कार्य करता है ताकि उभरते हुए जैव प्रौद्योगिकी उद्यमों में रणनीतिक अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा दिया जा सके तथा राष्ट्रीय स्तर पर प्रासंगिक उत्पाद विकास आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।

जाइडस के बारे में

जाइडस कैडिला एक नवोन्मेषी, वैश्विक दवा कंपनी है।

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