उत्तराखंड पुलिस के कोर्स में शामिल हुई हिंदी में लिखी कानून की किताबें, पिछलों दिनों हुए कई बदलाव..
उत्तराखंड: 150 साल पुराने उर्दू शब्द अब पुलिस ट्रेनिंग से हटा दिए गए हैं। कानून की किताबों में इन उर्दू शब्दों का स्थान वर्तमान में चलने वाली आसान हिंदी के शब्दों ने लिया है।। हाल ही में आईजी ट्रेनिंग के निर्देश पर अब नई किताबों को छपवा दिया गया है।
इसके बाद अब इन्हें पुलिस के प्रशिक्षण संस्थानों में लागू भी कर दिया गया है। नए प्रशिक्षु अब हिंदी में ही इन किताबों का अध्ययन करने के बाद पुलिस फोर्स का हिस्सा बनेंगे। भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता, साक्ष्य अधिनियम आदि की किताबें लगभग 150 साल पहले लिखी गई थीं। अंग्रेजी शासन के वक्त लिखी गई इन कानून की किताबों में उस वक्त प्रचलन में रही उर्दू का इस्तेमाल होता था।
वर्तमान में भी पुलिस अपनी ज्यादातर कार्रवाई में इन्हीं उर्दू शब्दों का प्रयोग करती आ रही थी। लेकिन, कालांतर में ये शब्द स्कूल, कॉलेज की पढ़ाई से भी दूर हो गए। ऐसे में जो नए अधिकारी और कर्मचारी भर्ती होते थे उन्हें इन शब्दों के प्रयोग में कठिनाई होती थी।
यही नहीं निचली अदालतों में भी हिंदी में न्याय सबको भाये अभियान के तहत कार्यवाही होती है। ऐसे में पुलिस की यह भाषा नए अधिवक्ताओं और न्यायिक अधिकारियों के लिए भी कठिन थी। पुलिस अपनी जीडी में भी इसी तरह की उर्दू का इस्तेमाल करती है। साथ ही बयान भी इसी के आधार पर दर्ज किए जाते हैं। लेकिन, अब नए पुलिस अधिकारियों और कर्मचारी इस समस्या का सामना नहीं करेंगे। वे आसान सामान्य बोलचाल की हिंदी में ही पढ़ेंगे और फिर अपनी कार्रवाई भी इसी भाषा में करेंगे। पुलिस प्रशिक्षण संस्थानों के लिए इन किताबों की छपाई काम भी पूरा कर इन्हें लागू कर दिया गया है।
मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने ली पीएम मोदी पिथौरागढ़ भ्रमण कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा..
उत्तराखंड: अपर मुख्य सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी ने सचिवालय में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आगामी पिथौरागढ़ भ्रमण कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा की। एसीएस श्रीमती राधा रतूड़ी ने सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देश दिए कि मा0 प्रधानमंत्री जी का अक्टूबर माह में होने वाला पिथौरागढ़ भ्रमण कार्यक्रम राज्य के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण कार्यक्रम है। इस कार्यक्रम के सफल संचालन हेतु जिला प्रशासन तथा सेना, आईटीबीपी, बीआरओ, पुलिस , परिवहन विभाग, केन्द्रीय संचार एजेंसियों व अन्य सम्बन्धित विभागों को प्रभावी समन्वय के साथ कार्य करना होगा।
एसीएस ने बीआरओ (बार्डर रोड ऑगनाइजेशन ) तथा लोक निर्माण विभाग को प्रस्तावित भ्रमण कार्यक्रम के मार्गाे की व्यवस्था को समयबद्धता से दुरूस्त करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने माननीय प्रधानमंत्री जी के प्रस्तावित भ्रमण कार्यक्रम में जोलिंग कोंग व आगे के उच्च दुर्गम स्थलों में सुचारू सोलर विद्युत आपूर्ति हेतु उरेडा को पुख्ता इंतजाम के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही जिले में वीआईपी मूवमेंट के दृष्टिगत वाहनों की अतिरिक्त आवश्यकता को देखते हुए परिवहन विभाग को वाहन पूल की व्यवस्था के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही एसीएस ने पर्याप्त आवासीय व्यवस्था हेतु आईटीबीपी तथा केएमवीएन को निर्देश दिए हैं।
एसीएस श्रीमती रतूड़ी ने जानकारी दी कि जल्द ही मुख्य सचिव मा0 प्रधानमंत्री जी के पिथौरागढ़ भ्रमण कार्यक्रम की तैयारियों के निरीक्षण हेतु कार्यक्रम स्थलों का भ्रमण करेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी भी कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा हेतु कार्यक्रम स्थलों का निरीक्षण करेंगे।
इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक श्री अशोक कुमार, विशेष प्रमुख सचिव श्री अभिनव कुमार, सचिव श्री अरविन्द सिंह हयांकी, श्री सचिन कुर्वे, श्री पकंज कुमार पाण्डेय, श्री विनोद कुमार सुमन, वर्चुअल माध्यम से कुमाऊ आयुक्त श्री दीपक रावत, जिलाधिकारी पिथौरागढ़ श्रीमती रीना जोशी व अन्य सम्बन्धित अधिकारी उपस्थित थे।
सस्ती बिजली उत्पादन के लिए प्रदेश में बनी पंप स्टोरेज पॉलिसी, जानिए क्या फायदे मिलेंगे
उत्तराखंड: प्रदेश में सस्ती बिजली मुहैया कराने के लिए सरकार पंप स्टोरेज पॉलिसी लाई है। इससे राज्य की नदियों पर परियोजनाएं लगाने वालों को जहां राज्य सरकार को 12.5 प्रतिशत रॉयल्टी नहीं देनी होगी, वहीं स्थानीय क्षेत्र विकास शुल्क, पारेषण शुल्क से भी छूट मिलेगी। इस नीति पर कैबिनेट बैठक में मुहर लग गई। सचिव ऊर्जा आर मीनाक्षी सुंदरम का कहना हैं कि पंप स्टोरेज पॉलिसी आने के बाद पीक समय में सस्ती बिजली मिलेगी। दिन में सौर या अन्य माध्यम से आने वाली सस्ती बिजली से पानी नीचे से ऊपर भेजा जाएगा। इसके बाद रात को जब बिजली की भारी मांग (बाजार में महंगी बिजली) होगी, तब परियोजना से बिजली उत्पादन किया जाएगा।
उनका कहना हैं कि प्रस्तावित नीति में परियोजनाओं के त्वरित विकास के लिए अन्तः राज्यीय पारेषण शुल्क, स्थानीय क्षेत्र विकास निधि, निशुल्क रॉयल्टी विद्युत (12.5 प्रतिशत), भूमि पर हस्तांतरण, निकासी की त्वरित अनुमति, जल कर और सरकारी भूमि को 45 वर्षों की अवधि के लिए सर्किल दर से जुड़ी वार्षिक पट्टा दर पर आवंटित करने पर छूट दी जाएगी। साथ ही नदियों पर पहले से चल रही परियोजनाओं की कंपनियों को प्राथमिकता दी जाएगी। यह परियोजनाएं 45 साल के लिए होंगी, जिसके बाद राज्य सरकार के हवाले हो जाएंगी। नदियों पर चिन्हित क्षेत्रों में परियोजना बनाने में निजी निवेशकों का चयन टेंडर के माध्यम से होगा। वह अपने स्तर से स्थान चिन्ह्ति करके सरकार के सामने प्रस्ताव भी ला सकते हैं। ऑन स्ट्रीम के साथ ही ऑफ स्ट्रीम परियोजनाएं भी लगाई जा सकेंगी। सभी तरह की स्वीकृतियां मिलने के तीन साल के भीतर परियोजना का निर्माण करना होगा।
गैस प्लांट से मिलेगी सस्ती बिजली, वैट शून्य
विदेशों से आने वाली लिक्विफाइड गैस की तर्ज पर अब काशीपुर स्थित दो गैस आधारित बिजली प्लांट के लिए आने वाली सीएनजी पर भी वैट शून्य होगा। इससे गैस आधारित प्लांट संचालित हो सकेंगे और प्रदेश में बिजली आपूर्ति की कमी को दूर किया जा सकेगा। इनसे बनने वाली बिजली भी सस्ती होगी।
उत्तराखंड में बढ़ेंगे 20 लाख रोजगार के अवसर..
नई सर्विस सेक्टर पॉलिसी को मिली मंजूरी..
उत्तराखंड: सरकार ने उत्तराखंड की सर्विस सेक्टर की नई पॉलिसी को मंजूरी दे दी है। इस पॉलिसी के जरिए प्रदेश में 20 लाख रोजगार के अवसर बढेंगे। इसके साथ ही 10 लाख श्रमिकों के कौशल विकास का लक्ष्य रखा गया है। उत्तराखंड में सरकार ने सर्विस सेक्टर की नई पॉलिसी को मंजूरी दे दी है। नई सर्विस सेक्टर की पॉलिसी के जरिए उत्तराखंड में 20 लाख रोजगार के मौके बढेंगे। इसके साथ ही प्रदेश के 10 लाख श्रमिकों के कौशल विकास का लक्ष्य रखा गया है।
राज्य में पहली बार सर्विस सेक्टर की पॉलिसी को मिली मंजूरी..
मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में छह प्रस्तावों को मंजूरी मिल गई है। मुख्य सचिव डा. एसएस संधु की मौजूदगी में आयोजित प्रेस ब्रीफिंग में सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि उत्तराखंड में पहली बार सर्विस सेक्टर की पॉलिसी को मंजूरी मिली है। बता दें कि इसमें हॉस्पिटेलिटी, वेलनेस, आईटी, डेटा सेंटर, स्वास्थ्य, शिक्षा, खेल और फिल्म उद्योग आदि को शामिल किया गया है। इसके साथ ही इसमें कुछ रियायतें दी गई हैं। नई पॉलिसी के मुताबिक इसमें 25% कैपिटल सब्सिडी दी जाएगी।
अब इन महिला कर्मचारियों को भी मिलेगा छह माह का मातृत्व अवकाश..
उत्तराखंड: प्रदेश सरकार विभागीय और आउट सोर्स के माध्यम से दैनिक वेतन पर तैनात महिला कर्मचारियों को भी प्रसूति (मातृत्व ) अवकाश देगी। प्रसूति अवधि में उन्हें 180 दिन यानी छह माह तक अवकाश प्राप्त हो सकेगा और नियोक्ता उन्हें इस अवधि का वेतन भुगतान करेगा। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने इस संबंध में वित्त विभाग को निर्देश दिए थे।
इस संबंध में सचिव वित्त दिलीप जावलकर ने सोमवार को आदेश जारी किए। सरकार के इस निर्णय से दैनिक वेतन पर नियुक्त हजारों की संख्या में महिला कर्मचारियों को लाभ मिलेगा। अभी तक सरकारी विभागों में विभागीय और आउटसोर्स के माध्यम से दैनिक वेतन पर तैनात महिला कर्मचारियों के लिए प्रसूति अवकाश नहीं मिल रहा था। महिला कर्मचारियों की ओर से इसकी मांग की जा रही थी। उनकी मांग पर विचार कर सरकार ने उन्हें भी प्रसूति अवकाश देने का फैसला किया। जारी आदेश के अनुसार विभागीय दैनिक वेतन महिला कर्मचारियों को नियोक्ता यानी विभाग और आउट सोर्स महिला कर्मचारियों को सेवा प्रदाता संस्था प्रसूति अवकाश देंगे।
धामी कैबिनेट बैठक में आज इन प्रस्तावों पर लग सकती है मुहर..
उत्तराखंड: आज सीएम धामी की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक का आयोजन किया जाएगा। इस बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लग सकती है। माना जा रहा है। कैबिनेट बैठक में यूसीसी के मसौदे समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। आज धामी कैबिनेट में प्रदेश की पहली सेवा क्षेत्र नीति पर मुहर लग सकती है। इसके साथ ही वित्त विभाग भूमि की ऑनलाइन रजिस्ट्री की सुविधा से जुड़ा प्रस्ताव भी लाया जा सकता है। इस व्यवस्था के लागू होने से वीडियो कॉल के माध्यम से भी जमीन की रजिस्ट्री कराई जा सकेगी।
वहीं बैठक में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) से संबंधित विधेयक के मसौदे पर भी चर्चा हो सकती है। अगर ऐसा होता है तो उत्तराखंड यूसीसी को लागू करने वाला पहला राज्य बन जाएगा। साथ ही उत्तराखंड रोडवेज की बसों में छात्रों को राहत-किराये में 50% छूट, माध्यमिक शिक्षा विभाग स्कूलों में प्रधानाचार्य को खाली पदों पर नियमित शिक्षकों की तैनाती होने तक प्रति पीरियड के आधार पर शिक्षकों को रखने का अधिकार पर भी मुहर लग सकती है।
उत्तराखंड में अगले चार दिनों तक बिगड़ा रहेगा मौसम का मिजाज..
उत्तराखंड: प्रदेश में एक बार फिर मौसम का मिजाज बदल गया है। पहाड़ी जनपदों में अगले चार दिनों तक भारी बारिश के साथ-साथ तेज हवाओं की संभावना है। मौसम विभाग ने पर्वतीय जिलों के लिए भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। इसके साथ ही संवेदनशील इलाकों में न जाने की अपील की है। मौसम विभाग के निदेशक विक्रम सिंह के अनुसार कुमाऊं मंडल के ऊधमसिंह नगर के कुछ इलाकों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। जबकि मैदानी इलाकों में तेज गर्जना और बिजली चमकने के साथ ही हल्की बारिश की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों ने आगामी 11 से 14 सितंबर तक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।
इन जिलों में किया अवकाश घोषित..
मौसम वैज्ञानिकों के जारी किए पूर्वानुमान के बाद सोमवार को उधम सिंह नगर और चंपावत जनपद के जिलाधिकारियों ने जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों समेत सरकारी और गैर सरकारी स्कूलों में एक दिवसीय अवकाश घोषित किया है। वही बद्रीनाथ-केदारनाथ धाम में रविवार को सीजन की पहली बर्फबारी हुई। दिनभर हल्की बारिश और बर्फबारी के बीच भी केदारनाथ धाम में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी हुई थी। रविवार को सुबह से ही केदारनाथ में मौसम का मिजाज बिगड़ा रहा। इस दौरान चोराबाड़ी, वासुकीताल और दुग्ध गंगा की ऊपरी पहाड़ियों पर हिमपात भी हुआ। जानकारी के अनुसार बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के सीईओ योगेंद्र सिंह ने कहा कि ऊपरी क्षेत्रों में हिमपात से केदारपुरी में ठंड बढ़ गई है।
कराटे की खिलाड़ी बनी भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट..
उत्तराखंड: आज देवभूमि उत्तराखंड की बेटियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और ऊंचे-ऊंचे मुकाम हासिल कर अनेकों बार प्रदेश को गौरवान्वित भी कर रही हैं। लोहाघाट की रहने वाली होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने अपनी मेहनत और लगन से शानदार उपलब्धि हासिल की है ज्योति बिष्ट सीडीएस क्वालीफाई कर भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनी है। उनकी इस अभूतपूर्व सफलता से जहां उनके परिवार में हर्षोल्लास का माहौल है वहीं समूचे क्षेत्र में भी खुशी की लहर है।
ज्योति की प्रारंभिक शिक्षा मल्लिकार्जुन स्कूल लोहाघाट तथा केंद्रीय विद्यालय लोहाघाट से हुई होनहार ज्योति ने इंटरमीडिएट परीक्षा में चंपावत जिले को टॉप किया था ज्योति बिष्ट 97.40 प्रतिशत अंक मिले थे। जिसके बाद ज्योति ने डीयू से ग्रेजुएशन कर सीड्स क्वालीफाई किया। कराटे के मैदान में अपने प्रतिद्वंद्वियों को चित कर देने वाली ज्योति अब देश के दुश्मनों को भी चित करेंगी बता दें कि ज्योति कराटे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पदक प्राप्त कर चुकी है।
ज्योति के पिता राम सिंह बिष्ट जहां लोहाघाट के नैनीताल बैंक में कार्यरत हैं वहीं उनकी मां माधवी देवी एक कुशल गृहिणी हैं। ज्योति ने अपनी इस शानदार सफलता का श्रेय अपने माता-पिता व गुरुजनों को दिया वहीं ज्योति की इस शानदार सफलता पर लोहाघाट के लोगों ने खुशी जताते हुए शुभकामनाएं दी है ज्योति ने अपनी इस शानदार सफलता से पूरे लोहाघाट क्षेत्र का नाम गर्व से ऊंचा किया है।
उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड के विरोध के बाद प्रदेश सरकार ने विगत विधानसभा चुनाव से पहले इसे भंग कर श्री बद्रीनाथ – केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) को पुनर्जीवित कर दिया था। प्रदेश सरकार ने बीकेटीसी की कमान निर्विवादित व स्वच्छ छवि वाले वरिष्ठ भाजपा नेता अजेंद्र अजय को सौंपी। पूर्व में केदारनाथ आपदा घोटाला और प्रदेश में लैंड जिहाद जैसे मुद्दों को उठा कर चर्चाओं में रहे अजेंद्र अजय बीकेटीसी के अध्यक्ष नियुक्त होने के बाद से फिर से न केवल खुद चर्चाओं में बने हुए हैं, बल्कि बीकेटीसी भी लगातार चर्चाओं में बनी हुई है। दरअसल, मंदिर समिति में दीमक की तरह लगे हुए कुछ लोगों ने वर्षों से ऐसी परंपरा कायम की हुयी है कि वो नए अध्यक्ष के आने पर उसे अपनी करबट में लेने की कोशिश करते हैं। यदि अध्यक्ष उनके अनुसार नहीं चलता है तो उसे घेरने और दबाब बनाने की कोशिश करते हैं। अपना स्वार्थ सिद्ध करने के लिए बिना वजह के मुद्दों पर विवाद भी खड़ा करा देते हैं। अजेंद्र ने धामों में निजी स्वार्थों के लिए कार्य कर रहे कुछ लोगों के संगठित गिरोह पर भी चोट की और व्यवस्थाओं में परिवर्तन लाने का प्रयास किया है। इस कारण अजेंद्र लगातार स्वार्थी तत्वों के निशाने पर भी हैं और उन्हें घेरने की लगातार कोशिश की जा रही है। मगर अजेंद्र इन सब की परवाह किये बगैर लगातार मंदिर समिति में सुधारों को जारी रखे हुए हैं।
अध्यक्ष का कार्यभार संभालते ही अजेंद्र ने सबसे पहले बीकेटीसी की कार्यप्रणाली में बदलाव के प्रयास किए। वर्ष 1939 में अंग्रेजों के समय गठित हुई बीकेटीसी में कर्मचारियों व अधिकारियों के ट्रांसफर अपवादस्वरूप ही होते रहे हैं। अजेंद्र ने कर्मचारियों व अधिकारियों के स्थानांतरण कर बीकेटीसी में हड़कंप मचा दिया था।। कुछ कार्मिकों ने अध्यक्ष द्वारा किये गए ट्रांसफरों को धता बताने की कोशिश भी की, किन्तु अध्यक्ष के सख्त रूख के चलते ऐसा संभव नहीं हो सका। अध्यक्ष ने कार्मिकों की कार्यक्षमता में वृद्धि के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किया। वर्षों से पदोन्नत्ति की मांग कर रहे कार्मिकों मुराद पूरी की और वेतन विसंगति का सामना कर रहे 130 से अधिक कार्मिकों के वेतन में वृद्धि भी की।
अजेंद्र ने लगभग 11 वर्षों से बीकेटीसी में मुख्य कार्याधिकारी की कुर्सी पर कुंडली जमाये बैठे विवादित अफसर बीडी सिंह को भी चलता किया। भाजपा हो अथवा कांग्रेस हर सरकार में बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी की कुर्सी पर जमे रहने वाले बीडी सिंह ने मंदिर समिति से हटते ही स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति ही ले ली थी। अजेंद्र ने बीकेटीसी में पारदर्शिता व भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए भी कई कदम उठाये। मंदिर समिति में वित्तीय पारदर्शिता कायम करने के लिए वित्त अधिकारी का पद सृजित कर शासन से वित्त अधिकारी की नियुक्ति कराई गयी। केदारनाथ धाम में दान चढ़ावे की गिनती के लिए पारदर्शी ग्लास हॉउस निर्मित कराया गया। अन्य भी कई नयी पहल शुरू की गयीं, जिनसे बीकेटीसी की आय में भी वृद्धि हुई है।

आजादी से पूर्व गठन होने के बावजूद बीकेटीसी में अभी तक कार्मिकों की सेवा नियमावली नहीं है। इस कारण कई विसंगतियां पैदा होती रही हैं। बीकेटीसी बोर्ड ने विगत माह बैठक में कार्मिकों की सेवा नियमावली का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा है, जिस पर शासन स्तर पर तेजी से कार्रवाई चल रही है। अजेंद्र ने सचिवालय की तर्ज पर बीकेटीसी में अलग से सुरक्षा संवर्ग तैयार करने की पहल भी की है। यह प्रस्ताव भी शासन में विचाराधीन है। बीकेटीसी का सुरक्षा संवर्ग गठित होने पर केदारनाथ व बदरीनाथ धाम में मंदिरों की आंतरिक सुरक्षा पूरी तरह से बीकेटीसी के हाथों में रहेगी। अजेंद्र के कार्यकाल में बीकेटीसी में अवैध नियुक्तियों पर भी रोक लगी। अब तक अधिकांश अध्यक्षों के कार्यकाल में बीकेटीसी में बड़ी संख्या में कार्मिकों की अवैध रूप से नियुक्तियां की गयीं। इस कारण बीकेटीसी को सात सौ से भी अधिक कर्मचारियों का बोझ उठाना पड़ रहा है। आधे कार्मिकों के पास कोई काम तक नहीं है। पहली बार अजेंद्र के कार्यकाल में एक भी कर्मचारी की अवैध नियुक्ति नहीं हुयी।
अजेंद्र ने मंदिरों के जीर्णोद्वार, विस्तारीकरण व सौंदर्यीकरण की दिशा में भी ठोस पहल की। उनके कार्यकाल में सबसे चर्चित कार्य केदारनाथ मंदिर के गर्भ गृह को स्वर्ण मंडित किया जाना रहा है। उन्होंने प्रदेश सरकार की अनुमति के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की देख रेख में यह प्रक्रिया पूर्ण कराई। हालांकि, राजनीतिक कारणों से कुछ लोगों ने इस पर विवाद खड़ा करने की कोशिश की। अजेंद्र ने बाबा केदारनाथ व भगवान मद्महेश्वर की शीतकालीन गद्दी स्थल उखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर के विकास व विस्तारीकरण की महत्वाकांक्षी परियोजना पर भी काम शुरू किया। इस कार्य के लिए स्थानीय जनता द्वारा करीब तीन दशकों से मांग उठायी जाती रही है और पूर्व में कई मुख्यमंत्रियों द्वारा इसका शिलान्यास भी किया गया था।
आपदा में ध्वस्त हो चुके केदारनाथ मंदिर के समीप स्थित ईशानेश्वर मंदिर का निर्माण भी अजेंद्र के कार्यकाल की उपलब्धि है। आपदा के इतने वर्षों पश्चात गत वर्ष इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ था। एक वर्ष के भीतर मंदिर का निर्माण कार्य करा कर इसकी प्राण प्रतिष्ठा भी कर दी गयी। केदारनाथ धाम में बीकेटीसी कार्मिकों के आवास व कार्यालय भवन इत्यादि के कार्य भी विगत वर्ष ही शुरू हुए हैं। वर्तमान में बीकेटीसी द्वारा गुप्तकाशी स्थित विश्वनाथ परिसर में स्थित भैरव मंदिर निर्माण के साथ-साथ तुंगनाथ मंदिर व त्रियुगीनारायण मंदिर के विकास व सौंदर्यीकरण की योजना पर भी काम किया जा रहा है। बहरहाल, अजेंद्र ने मंदिर समिति में बदलावों और सुधारों के लिए मुहिम जारी रखी हुयी है। मगर उनके प्रयासों की हवा निकालने के लिए मंदिर समिति के बाहर व भीतर के कुछ लोग लगातार अभियान छेड़े हुए हैं। मंदिर समिति में सुधारों की कवायद कितना परवान चढ़ पाती है, यह भविष्य के गर्भ में है।
विधानसभा मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित..
अनुपूरक बजट में 11 विधेयक पारित..
उत्तराखंड: विधानसभा सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया है। तीन दिवसीय मानसून सत्र के अंतिम दिन विपक्ष के हंगामे के बीच 11321 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पारित किया गया। अनुपूरक बजट में विधेयक समेत 11 विधेयक ध्वनिमत से पारित कराए। बता दें विधानसभा की कार्यवाही शुक्रवार देर रात तक चली।
उत्तराखंड विधानसभा का मानसून सत्र पांच सितंबर को शुरू हुआ था। सत्र में विधानसभा सचिवालय को 626 प्रश्न प्राप्त हुए थे। इस दौरान 10 अल्पसूचित प्रश्नों में से तीन, 182 तारांकित प्रश्नों से 28 और 392 आतारांकित प्रश्नों में से 66 का उत्तर दिया गया। सत्र के दौरान नियम 300 की 42 सूचनाएं प्राप्त हुई। इनमें से सात स्वीकृत की गई और 23 ध्यानाकर्षण के लिए रखी गई।
ये विधेयक हुए पारित..
उत्तराखंड सड़क संरचना सुरक्षा संशोधन विधेयक
वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड प्रौद्योगिकी
विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक
उत्तराखंड संयुक्त प्रांतीय रक्षक दल अधिनियम संशोधन विधेयक
उत्तराखंड उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम संशोधन विधेयक
उत्तराखंड माल एवं सेवा कर संशोधन विधेयक
उत्तराखंड निवेश और आधारित संरचना विकास एवं विनियमन विधेयक
उत्तराखंड निरसन विधेयक
उत्तराखंड शहीद आश्रित अनुग्रह अनुदान संशोधन विधेयक
राज्य विश्वविद्यालय विधेयक
उत्तराखंड उत्तर प्रदेश अधिवक्ता कल्याण निधि अधिनियम संशोधन विधेयक
उत्तराखंड निजी विश्वविद्यालय विधेयक
