अब घर का नक्शा पास कराना हुआ आसान, सिर्फ 24 घंटे में हो जाएगा काम..
उत्तराखंड: प्रदेश में अब घर बनाना आसान हो रहा है। जी हां पहले घर बनाने के लिए नक्शा पास कराने के लिए प्राधिकरण के चक्कर काटने पड़ते थे। नक्शा पास कराने में ज्यादा समय लगता था लेकिन अब ये प्रक्रिया आसान हो गई है। अब आप महज 24 घंटे के भीतर आपके घर का नक्शा पास करा सकते है।
मिली जानकारी के अनुसार प्रदेश में आवास विभाग की सरलीकरण प्रक्रिया के तहत सभी प्राधिकरणों में एप्रूव्ड लेआउट पर घर का नक्शा पास कराने की स्वप्रमाणन सुविधा शुरू कर दी गई है। छोटे साइज के प्लॉट पर मकान बनाना अब आसान हो गया है। आवास विभाग ने 90 गज तक के प्लॉट के लिए ऐसे 192 नक्शे तैयार कर लिए हैं, जिनमें से कोई भी नक्शा चुनकर आप घर बना सकते हैं। इसके लिए प्राधिकरण के चक्कर काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
एप के माध्यम से ऐसे करें आवेदन..
आपको बता दे कि आप अपने प्लॉट के साइज के हिसाब से इनमें से नक्शों का चुनाव कर इसे खुद पास करा सकते हैं। इसकी फीस भी ऑनलाइन जमा हो जाएगी, जिसके बाद सीधे घर बनाने का काम शुरू करना है। बताया जा रहा है कि स्वप्रमाणन प्रणाली के तहत eASE-App के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन होगा। यहां आर्किटेक्ट को नक्शे के साथ ही एक शपथ पत्र भी अपलोड करना होगा।
इसी एप के माध्यम से नक्शा मिलेगा। यह नक्शा केवल उन्हीं जगहों पर पास करा सकते हैं, जहां उस जमीन का लेआउट प्राधिकरण से एप्रूव होगा। हालांकि बताया जा रहा है कि स्वप्रमाणन प्रणाली से नक्शा पास कराने की प्रक्रिया में तो प्राधिकरण का सीधे हस्तक्षेप खत्म हो गया है, लेकिन पास नक्शे के हिसाब से निर्माण हो रहा है या नहीं, प्राधिकरण उसका निरीक्षण करेगा। लिहाजा, जो भी नक्शा पास होगा, उसके निर्माण में नक्शे का ध्यान रखना अनिवार्य होगा।
उत्तराखंड सरकार भांग की खेती के लिए कर रही नई पॉलिसी तैयार..
उत्तराखंड: प्रदेश में आने वाले दिनों में औद्योगिक व औषधीय भांग की खेती और इससे संबंधित औद्योगिक इकाइयां रोजगार, स्वरोजगार की नई संभावनाओं के द्वार खुलने वाले है। बताया जा रहा है कि इसके लिए धामी सरकार नई पॉलिसी तैयार कर रही है। जल्द ही इस पॉलिसी को अंतिम रूप देकर इसे स्वीकृति के लिए कैबिनेट में रखा जाएगा।
आपको बता दे कि मुख्य सचिव डॉ. एसएस संधू ने भी अधिकारियों को इसके मद्देनजर जल्द पॉलिसी तैयार करने और कैबिनेट में रखने के निर्देश दिए हैं।बताया जा रहा कि भांग के रेशे (फाइबर) का उपयोग टेक्सटाइल, कागज, पल्प, फर्नीचर समेत अन्य उद्योगों में होता है। यही नहीं, कैंसर, ग्लूकोमा, मधुमेह जैसी बीमारियों के उपचार में प्रयोग की जाने वाली दवाओं के निर्माण में भी भांग का उपयोग होता है। हालांकि आगामी कैबिनेट में इस पॉलिसी को नहीं लाया जा सकेगा, लेकिन उसके बाद अगली कैबिनेट में इस पॉलिसी को रखने का खाका तैयार किया जा रहा है।
गौरतलब है कि उत्तराखंड वैसे तो भांग की खेती को लीगलाइज करने वाला देश का पहला राज्य है और साल 2018 में भाजपा सरकार में इसको कानूनी मंजूरी दे दी गई थी। लेकिन पर्याप्त होमवर्क ना होने के कारण इस पॉलिसी का लाभ राज्य को अब तक नहीं हो पाया। लिहाजा राज्य सरकार अब इसको लेकर नई पॉलिसी तैयार कर रही है।
डीजीपी ने परखीं केदारनाथ धाम यात्रा व्यवस्थाएं..
उत्तराखंड: केदारनाथ धाम में रुक-रुककर हो रही बारिश और बर्फबारी को देखते हुए रोके गए यात्रियों को प्रशासन ने आज रवाना करना शुरू कर दिया। सुबह आठ बजे तक सोनप्रयाग से 5887 तीर्थयात्रियों को धाम के लिए रवाना किया गया। आपको बता दें कि सोमवार को करीब नौ हजार यात्रियों को जगह-जगह रोक दिया गया था।
केदारनाथ धाम में मौसम के अधिक खराब होने पर तिलवाड़ा से फाटा तक करीब ढाई हजार, सीतापुर से सोनप्रयाग तक करीब छह हजार और गौरीकुंड में लगभग 500 यात्रियों को रोका गया था। वही यमुनोत्री धाम सहित यमुना घाटी में सुबह से ही बारिश हो जारी है। लेकिन मौसम की बेरुखी पर तीर्थयात्रियों की आस्था भारी पड़ रही है। बारिश के बीच पांच किमी की चढ़ाई चढ़ कर यात्री यमुनोत्री धाम पहुंच रहे हैं।
पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने केदारनाथ यात्रा को लेकर फाटा, सोनप्रयाग और गौरीकुंड का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने ऑपरेशन मर्यादा के तहत नशा के कारोबार पर नकेल कसने के निर्देश दिए। उन्होंने यात्रा मार्ग से लगे थाना, चौकी के प्रभारियों को अपने-अपने क्षेत्र में नियमित चेकिंग करने को कहा। पुलिस महानिदेशक ने गौरीकुंड में यात्रियों से बातचीत करते हुए व्यवस्थाओं का फीडबैक भी लिया। उन्होंने पुलिस बल को बाबा केदार के दर्शनों के लिए आने वाले श्रद्धालुओं से सौम्य व्यवहार करने के निर्देश भी दिए।
उत्तराखंड के छोटे से गांव की चांदनी बनी भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट..
उत्तराखंड: प्रदेश में बेटियां अपनी मेहनत और लगन से लगातार प्रदेश का नाम रोशन कर रही है। इसी कड़ी में प्रदेश के सिमांत जिले पिथौरागढ़ की चांदनी कुंवर का नाम भी जुड़ गया है। पिथौरागढ़ के छोटे से गांव की चांदनी भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बन गई है। उनकी इस उपलब्धि से प्रदेश में जहां खुशी की लहर है वहीं उन्हें बधाई देने वालों का तांता लग गया है। बता दे कि पिथौरागढ़ जिले के भड़कटिया गांव निवासी चांदनी कुंवर भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनी है। पिथौरागढ़ के मानस एकेडमी से प्रारंभिक शिक्षा हासिल की। वह बचपन से ही मेधावी छात्रा रहीं थी और इंटर में स्कूल भी टॉप किया था।
बताया जा रहा है कि वह भारतीय सैन्य अकादमी चेन्नई से प्रशिक्षण प्राप्त कर पास आउट हुई। इसके बाद वह भारतीय सेना का हिस्सा बन गई है। विगत साल सीडीएस की प्रवेश परीक्षा में भी चांदनी ने ऑल इंडिया लेवल पर पांचवीं रैंक हासिल कर उत्तराखंड का नाम रोशन किया था। इसके बाद वह प्रशिक्षण लेने के लिए चेन्नई रवाना हो गई थी। बता दें कि पास आउट परेड के बाद चांदनी के पिता ने बेटी के कंधों पर सितारे सजाकर उन्हें उसे सेना को समर्पित किया है। चांदनी ने आर्मी सर्विस कॉपर्स में कमीशन प्राप्त किया है। उनकी पहली पोस्टिंग जम्मू कश्मीर के लेह में हुई है। उनकी सफलता पर उनके परिवार में खुशी का माहौल है। वहीं हर कोई उन्हें बधाई दे रहा है।
केदारनाथ धाम में रात 11 से सुबह पांच बजे तक हो रही पूजाएं..
उत्तराखंड: केदारनाथ में रात 11 से सुबह पांच बजे तक भक्तों की बुकिंग की गई पूजाएं हो रही हैं। कपाट खुलने के बाद अभी भीड़ के चलते सिर्फ षोडषोपचार अभिषेक पूजा हो रही है। साथ ही सुबह पांच बजे से धर्म दर्शन शुरू हो रहे हैं जो अपराह्न तीन बजे तक हो रहे हैं। इसके बाद शाम पांच बजे से सांयकालीन आरती तक श्रृंगार दर्शन कराए जा रहे हैं। बता दे कि बीकेटीसी द्वारा पूजाओं को संपादित करने का समय रात 11 से सुबह पांच बजे तक निर्धारित किया गया है।
मंदिर समिति के अनुसार, कपाट खुलने के बाद प्रतिदिन 20 ऑनलाइन बुकिंग पूजाएं संपादित हो रही है। इसके साथ ही औसतन 102 पूजाएं ऑफलाइन की जा रही हैं। मंदिर समिति के पूजा प्रभारी प्रदीप सेमवाल का कहना हैं कि 25 अप्रैल को ऑफलाइन बुकिंग की 40 व ऑनलाइन बुकिंग की 20 पूजाएं संपादित की गईं जबकि 27 अप्रैल को ऑफलाइन 61 व 29 को 117 पूजाएं संपादित की गई हैं। साथ ही प्रतिदिन 20 ऑनलाइन पूजाएं हो रही हैं।
दान के लिए क्यूआर कोड बोर्ड लगाने पर बीकेटीसी ने पुलिस को दी तहरीर
केदारनाथ और बद्रीनाथ मंदिर में कई स्थानों पर दान के लिए क्यूआर कोड के बोर्ड लगाने के मामले में बीकेटीसी ने पुलिस को तहरीर दी है। समिति का कहना है कि मंदिरों में दान के लिए क्यूआर कोड के बोर्ड बीकेटीसी की ओर से नहीं लगाए गए थे। बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष अजेंद्र अजय का कहना हैं कि दोनों धामों में कपाट खुलने के दिन ये बोर्ड लगाए गए थे।
मामला बीकेटीसी के अधिकारियों के संज्ञान में आने पर उसी दिन बोर्ड उतार दिए गए थे। बीकेटीसी अधिकारियों ने पहले अपने स्तर से इस मामले की छानबीन की। इसके बाद रविवार को केदारनाथ मंदिर अधिकारी ने केदारनाथ पुलिस चौकी और बद्रीनाथ में प्रभारी अधिकारी की ओर से कोतवाली में तहरीर दी गई है। मंदिर समिति के अध्यक्ष अजेंद्र अजय का कहना हैं कि बीकेटीसी की ओर से वर्तमान में अपने कामकाज में पेटीएम का प्रयोग नहीं किया जाता है।
उत्तराखंड में नर्सिंग अधिकारी के 1564 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू..
चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग को शीघ्र मिलेगा नर्सिंग स्टॉफ..
उत्तराखंड: आखिरकार लम्बे इंतजार के बाद सूबे के चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग को बड़ी संख्या में नर्सिंग अधिकारी मिलने जा रहे हैं। प्रदेश के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत की एक और पहल रंग लाई है। डा. रावत के अथक प्रयासों के उपरांत स्वास्थ्य विभाग में वर्षवार मैरिट के आधार पर 1564 नर्सिंग अधिकारियों की नियुक्ति की जायेगी। उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड ने महिला एवं पुरूष संवर्ग के नर्सिंग अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है, शीघ्र ही अभ्यर्थियों के अभिलेखों का सत्यापन किया जायेगा। अभिलेख सत्यापन के उपरांत चयनित अभ्यर्थियों को विभाग में तैनाती दी जायेगी।
सूबे के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के अथक प्रयासों का नतीजा है कि प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग को जल्द 1564 नर्सिंग अधिकारी मिलेंगे। विभाग की कमान सम्भालते ही डा. रावत ने ताबड़तोड़ कई फैसले लिये थे, जिसमें लम्बे समय से रिक्त चल रहे नर्सिंग स्टॉफ के पदों को भरना भी शामिल था लेकिन नर्सिंग अधिकारियों की नियमावली के अनुसार यह भर्ती प्रक्रिया लिखित परीक्षा के आधार पर की जानी थी, जिसमें बेरोजगार नर्सिंग डिग्री एवं डिप्लोमाधारी संगठन ने धांधली की आशंका जताते हुये वर्षवार मेरिट के आधार पर भर्ती की मांग की थी। जिस पर विभागीय मंत्री डा. रावत ने चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को नर्सिंग अधिकारी की भर्ती नियमावली में संशोधन कर वर्षवार मैरिट के आधार पर भर्ती का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिये थे। विभाग द्वारा भर्ती नियमावली का संशोधित प्रस्ताव राज्य कैबिनेट की बैठक में लाया गया।
कैबिनेट की स्वीकृति के उपरांत विभाग ने कुल 1564 पदों पर वर्षवार मेरिट के आधार भर्ती का अधियाचन उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड को सौंपा। चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड द्वारा माह जनवरी 2023 में 1564 पदों के सापेक्ष भर्ती हेतु अभ्यर्थियों से आवेदन पत्र मांगे गये। जिस पर लगभग 10 हजार अभ्यर्थियों आवेदन किया। चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के परीक्षा नियंत्रक प्रो. विजय जुयाल ने बताया कि नर्सिंग अधिकारी के कुल 1564 पदों में से महिला संवर्ग डिप्लोमाधारक के 847 पद, महिला संवर्ग डिग्रीधारक के 405 पद, पुरूष संवर्ग डिप्लोमाधार के 212 पद तथा पुरूष संवर्ग डिग्रीधारक के 100 पद हैं।
जिन पर वर्षवार मैरिट के आधार पर भर्ती हेतु प्रत्येक पद के सापेक्ष दो अभ्यर्थियों को अभिलेख सत्यापन के लिये बुलाया जायेगा। इसके बाद चयनित अभ्यर्थियों की अंतिम सूची जारी कर दी जायेगी। उन्होंने बताया कि चयन प्रक्रिया सम्पन्न होने के उपरांत चयनित अभ्यर्थियों की अंतिम सूची महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य को सौंप दी जायेगी जहां से चयनित अभ्यर्थियों को रिक्त पदों के सापेक्ष तैनाती नियुक्ति प्राधिकारी द्वारा दी जायेगी।
डा. धन सिंह रावत का कहना हैं कि, नर्सिंग अधिकारियों के 1564 रिक्त पदों पर नई तैनाती के उपरांत स्वास्थ्य विभाग में काफी हद तक नर्सिंग स्टॉफ की कमी दूर हो जायेगी, जिससे प्रदेशभर के राजकीय चिकित्सालयों में आने वाले मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।
उत्तराखंड में माध्यमिक स्तर पर 559 विद्यालयों को क्लस्टर विद्यालयों के रूप में विकसित किया जाएगा..
उत्तराखंड: मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने शुक्रवार को सचिवालय में शिक्षा विभाग के साथ क्लस्टर विद्यालय के सम्बन्ध में बैठक ली। मुख्य सचिव ने कहा कि प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा के अंतर्गत संचालित क्लस्टर विद्यालय शिक्षण अधिगम को गुणवत्तापरक एवं रूचिकर बनाने के उद्देश्य से पठन-पाठन से सम्बन्धित मूलभूत सुविधायें विकसित कर उत्कृष्ट शिक्षा केन्द्र के रूप में विकसित किए जाएंगे।
मुख्य सचिव का कहना हैं कि इन क्लस्टर विद्यालयों में समुचित मात्रा में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक स्कूल के लिए आने वाले समय में अधिकतम छात्र संख्या के अनुरूप मास्टर प्लान तैयार किया जाए। क्लस्टर स्कूल में समुचित अध्यापक, कक्षाकक्ष, पुस्तकालय, कम्प्यूटर लैब और अन्य प्रयोगशालाओं आदि की पूर्ण व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने कहा कि क्लस्टर विद्यालयों में छात्रों के लिए आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराए जाने हेतु जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समिति का गठन कर उन्हें छात्रों को आवागमन का किराया किस रूप में देना है इसके लिए भी अधिकृत किया जाए। इस समिति में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में परिवहन विभाग, लोक निर्माण विभाग, जिला शिक्षा अधिकारी, पुलिस अधीक्षक आदि सम्बन्धित सभी विभागों का प्रतिनिधित्व रखा जाए।
ऐसे स्कूल, जो अत्यधिक दूर हैं और बच्चे इतने दूर आना जाना नहीं कर सकते, के लिए आवासीय स्कूलों की व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि आवासीय स्कूलों को पर्वतीय जनपदों के छोटे शहरों में खोला जा सकता है। ऐसे में उन आवासीय विद्यालयों में शिक्षकों को अपने परिवार के साथ रहने में सुविधा होगी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जनपद में एक नहीं बल्कि 5 से 7 आवासीय विद्यालय होने चाहिए। वर्तमान में संचालित आवासीय विद्यालयों में हॉस्टल की सुविधा को और बढ़ाया जाए। मुख्य सचिव ने कहा कि बच्चों को अच्छी गुणवत्तापरक शिक्षा उपलब्ध हो इसके लिए अच्छे सुझावों को लगातार अपनाने की आवश्यकता है।
सचिव रविनाथ रमन ने कहा कि प्रदेशभर में माध्यमिक स्तर पर कुल 559 विद्यालयों को क्लस्टर विद्यालयों के रूप में विकसित किया जाएगा। इसी प्रकार प्राथमिक में 603 और पूर्व माध्यमिक में 76 विद्यालयों को चिन्हित किया गया है। सभी विद्यालयों के लिए डीपीआर तैयार की जा रही है। इस अवसर पर महानिदेशक माध्यमिक एवं प्राथमिक शिक्षा बंशीधर तिवारी, अपर सचिव शिक्षा योगेन्द्र यादव सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
उत्तराखंड में अगले चार दिन भारी, जानें कहां होगी बारिश-बर्फबारी..
उत्तराखंड: प्रदेश में जहां गुरूवार को अचानक बदले मौसम के बाद बिजली गिरने और बारिश-बर्फबारी की खबरे सामने आई है । वहीं मौसम विभाग ने एक बार फिर अलर्ट जारी कर दिया है। प्रदेश के कई जिलों के लिए अगले चार दिन भारी बताए जा रहे है। कई जिलों के लिए यलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
मौसम विभाग ने 28 और 29 अप्रैल को यलो अलर्ट जारी किया है। बताया जा रहा है कि 28 अप्रैल को राज्य के उत्तरकाशी ,रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर तथा पिथौरागढ़ जनपदों में कहीं-कहीं अपरान्ह और शाम के समय गर्जन के साथ आकाशीय बिजली चमकने तथा ओलावृष्टि होने की संभावना है। तो वहीं 29 अप्रैल को राज्य में कहीं-कहीं गर्जन के साथ आकाशीय बिजली चमकने ओलावृष्टि होने तथा झोंकेदार हवाएं 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा चल सकती है।
वहीं ये भी बताया जा रहा है कि प्रदेश में 30 अप्रैल और 1 मई के लिए मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इस दौरान राज्य के जनपदों में कहीं-कहीं गर्जन के साथ आकाशीय बिजली गिरने,ओलावृष्टि होने तथा तेज बौछार के साथ झक्कड़ 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा से बढ़कर 70 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चलने का मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है। इसके अलावा उच्च हिमालई क्षेत्रों में हिमपात की भी संभावना जताई गई है।
सूडान में फंसे भारतीयों की निकासी के लिए ऑपरेशन कावेरी..
देश-विदेश: अफ्रीकी देश सूडान इस वक्त भयंकर विद्रोहों का सामना कर रहा हैं। सूडान में सेना और अर्ध सैनिकों के बीच जारी संघर्ष रुकने का नाम नहीं ले रहा है। हालात दिन-ब-दिन खराब होते जा रहे हैं। सूडान के संघर्ष में 427 लोगों की मौत हो गई है और 3,700 से ज्यादा लोग घायल हो गए हैं। सूडान में हमलावरों ने बायोलॉजिकल लैब पर भी कब्ज़ा कर लिया हैं। ऐसे में भारत ने सूडान से अपने नागरिकों को निकालने के लिए ऑपरेशन कावेरी अभियान लॉन्च कर दिया है। सुडान उत्तर पूर्वी अफ्रीका का सबसे बड़ा देश है, जिसकी कुल आबादी लगभग साढ़े चार करोड़. और सुडान की सीमाएं कुल सात देशों से लगती हैं, जिनमें Egypt, Libya, चाड और साउथ सुडान जैसे देश प्रमुख हैं। 2011 में सुडान के अलग होने के बाद भी वहां की सत्ता पर नियंत्रण के लिए सुडान बार बार जलता रहा, और इस बार भी वहां कुछ नया नहीं हो रहा है।
हालांकि, दोनों बलों ने 72 घटों का एक युद्धविराम घोषित किया है। इस बीच, भारत हिंसाग्रस्त देश से अपने लोगों की निकासी के लिए ऑपरेशन कावेरी चला रहा है। इसके तहत सूडान में फंसे ढाई सौ से अधिक भारतीय सूडान से निकाले जा चुके हैं। इसके लिए वायुसेना और नौसेना की मदद ली जा रही है। विदेश मंत्रालय के अनुसार भारतीय वायुसेना के दो ट्रांसपोर्ट विमान C-130J सऊदी अरब के जेद्दाह में स्टैंडबाय पर हैं
ऑपरेशन कावेरी क्या है?
सूडान में करीब 10 दिन से चल रहे संघर्ष के बीच दोनों पक्ष संघर्ष विराम को सहमत हुए। 72 घंटे का ये संघर्ष विराम 24 अप्रैल की आधी रात से शुरू हुआ। इस बीच, भारत ने अपने लोगों को वहां से सुरक्षित निकालने के लिए ‘ऑपरेशन कावेरी’ शुरू किया है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि ऑपरेशन कावेरी के तहत C-130 की दो फ्लाइट क्रमशः 121 और 135 यात्रियों को लेकर सऊदी अरब में जेद्दाह में लैंड की हैं। ये लोग जल्द ही भारत पहुंचेंगे। इससे पहले, ये लोग पोर्ट सूडान से जेद्दा के लिए आईएनएस सुमेधा से पहुंचाए गए थे।
हिंसाग्रस्त देश से भारतीयों को निकालने के लिए ऑपरेशन का नाम ‘कावेरी’ रखा गया है। कोच्चि में सोमवार को युवम कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, ‘सूडान में गृहयुद्ध की वजह से हमारे कई लोग वहां फंस गए हैं। इसलिए हमने उन्हें सुरक्षित लाने के लिए ‘ऑपरेशन कावेरी’ शुरू किया है। इसकी देखरेख केरल के बेटे और हमारी सरकार के मंत्री मुरलीधरन कर रहे हैं।’
कावेरी दक्षिण भारत की एक प्रमुख नदी है जो मुख्यतः तमिलनाडु और कर्नाटक में बहती है। केंद्र द्वारा इस ऑपरेशन के नामकरण पर एक सूत्र ने कहा, ‘नदियां बाधाओं के बावजूद अपने गंतव्य तक पहुंचती हैं। यह एक मां की तरह है जो यह सुनिश्चित करेगी कि वह अपने बच्चों को सुरक्षित वापस लाएगी।’ इससे पहले, यूक्रेन में भी फंसे लोगों को निकालने के लिए चलाए गए अभियान का नाम पवित्र नदी ‘गंगा’ के नाम पर रखा गया था।
भारत ने कब-कब संकट के बीच अभियान चलाए हैं?
1. ऑपरेशन गंगा (2022): पिछले साल 24 फरवरी को रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद, भारत ने ‘ऑपरेशन गंगा’ शुरू किया था। इसके तहत एक हजार से अधिक भारतीयों को वापस लाया गया था। भारतीय वायु सेना के सी-17 विमानों को भेजकर और दूतावास के कर्मियों को कीव के ट्रेन टर्मिनलों पर भेजकर लोगों को निकाला था।
2. ऑपरेशन देवी शक्ति (2021): भारत ने 2021 में ‘ऑपरेशन देवी शक्ति’ के तहत अफगानिस्तान से सैकड़ों भारतीयों को निकाला था। यह अभियान अफगानिस्तान में 2021 में तालिबान के कब्जे के बाद चलाया गया था, जहां सैकड़ों भारतीय फंसे रह गए थे।
3. ऑपरेशन वंदे भारत (2021): भारत ने ‘वंदे भारत मिशन’ की शुरुआत उन भारतीय नागरिकों की स्वदेश वापसी के लिए की, दुनियाभर में कोरोना महामारी शुरू होने के बाद विदेश में फंसे हुए थे। 30 अप्रैल 2021 तक, ऑपरेशन के विभिन्न चरणों के माध्यम से लगभग 60 लाख भारतीयों को वापस लाया गया।
4. ऑपरेशन समुद्र सेतु (2020): कोरोना महामारी के दौरान विदेश में रह रहे भारतीयों को देश लाने के लिए 5 मई 2020 को एक नौसैनिक अभियान ‘ऑपरेशन समुद्र सेतु’ शुरू किया गया था। 3,992 भारतीय नागरिकों को समुद्र के रास्ते देश वापस लाया गया। 55 दिनों से अधिक समय तक चले मिशन में भारतीय नौसेना के जहाजों ने 23,000 किलोमीटर से अधिक की यात्रा की थी।
5. ऑपरेशन मैत्री (2015): भारत ने 2015 के नेपाल भूकंप के बाद ‘ऑपरेशन मैत्री’ शुरू कर दिया था। सैन्य और निजी विमानों का उपयोग करके सेना-वायु सेना के एक संयुक्त अभियान के तहत 5,000 से अधिक भारतीयों को नेपाल से देश लाया गया था। इस दौरान, भारतीय सेना ने अमेरिका, ब्रिटेन, रूस और जर्मनी से 170 विदेशी नागरिकों को भी सुरक्षित बाहर निकाला था।
6. ऑपरेशन राहत (2015): 2015 में यमन में गृह युद्ध शुरू हो गया था। बाद में सऊदी अरब के नो-फ्लाई जोन घोषणा की वजह से हजारों भारतीय फंस गए और यमन की विमानन यात्रा भी रुक गई। भारत ने शुरू में समुद्र के रास्ते अपने नागरिकों को निकालने का विकल्प चुना। अगले कुछ हफ्तों में, भारत ने यमन में फंसे 4,640 भारतीयों के अलावा 41 से अधिक देशों से 960 विदेशी नागरिकों को बचाया।
7. ऑपरेशन सेफ होमकमिंग (2011): भारत ने युद्धग्रस्त लीबिया में फंसे अपने नागरिकों को बचाने के लिए 2011 में ‘ऑपरेशन होमकमिंग’ शुरू किया था। इसके तहत लीबिया से 15,400 भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी कराई गई थी।
8. ऑपरेशन सुकून (2006): जुलाई 2006 में, इस्राइल और लेबनान के बीच युद्ध छिड़ने के बाद, भारत सरकार ने अपने फंसे हुए नागरिकों को निकालने के लिए ‘ऑपरेशन सुकून’ लॉन्च किया। नौसैनिक बचाव अभियान में जुलाई-अगस्त 2006 के बीच 2,280 व्यक्तियों को निकाला गया था। इनमें कुछ नेपाली और श्रीलंकाई नागरिक भी शामिल थे।
भारी बर्फबारी के बीच खुले बद्रीनाथ धाम के कपाट, जयकारों के बीच नाचने लगे श्रद्धालु..
उत्तराखंड: बर्फबारी और कड़ाके की ठंड के बीच भू-बैकुंठ बद्रीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुल गए हैं। वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ आज गुरुवार सुबह 7 बजकर 10 मिनट पर बद्रीनाथ धाम के कपाट खोल दिए गए हैं। कपाट खुलने के इस पावन मौके पर अखंड ज्योति के दर्शन करने के लिए सैकड़ों श्रद्धालु धाम पहुंचे तो यात्रा पड़ावों पर चहल-पहल भी शुरू हो गई है।
कपाट खुलने के दौरान हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा हुई तो वहीं परिसर में सेना की मधुर धुन पर यात्री भी थिरके। बद्रीनाथ के सिंह द्वार से यात्रियों के दर्शन शुरू हो गए हैं। कपाट खुलने के दौरान धाम में करीब 20 हजार तीर्थयात्री पहुंचे। कपाटोद्घाटन के लिए टिहरी राजा के प्रतिनिधि के रूप में माधव प्रसाद नौटियाल भी धाम में मौजूद रहे।
वहीं बद्रीनाथ यात्रा को लेकर तीर्थयात्रियों में भी उत्साह और उल्लास का माहौल है। यात्रा पड़ावों पर जगह-जगह तीर्थयात्रियों का जमावड़ा लगना शुरू हो गया है। बद्रीनाथ में तीर्थयात्रियों और स्थानीय श्रद्धालुओं के करीब 400 वाहन पहुंच गए हैं। बद्रीनाथ के साथ ही धाम में स्थित प्राचीन मठ-मंदिरों को भी गेंदे के फूलों से सजाया गया है।
चारधाम यात्रा के लिएhttps://www.tripsofindia.com/ यहां बुकिंग करें।
केदारनाथ हेली सेवा के लिए http://heliyatra.irctc.co.inयहां बुकिंग करें।
केदारनाथ यात्रा के लिए https://www.travelingkedarnath.com/यहां बुकिंग करें।
माणा में ग्रामीणों की चहल-पहल शुरू..
इस बार बद्रीनाथ हाईवे पर कंचन गंगा और रड़ांग बैंड में हिमखंड पिघल गए हैं। यहां अलकनंदा के किनारे कुछ जगहों पर ही बर्फ जमी है। बद्रीनाथ धाम के आंतरिक मार्गों पर अभी भी बर्फ है, जिसे नगर पंचायत बद्रीनाथ के पर्यावरण मित्रों की ओर से साफ किया जा रहा है।
वर्ष 2013 की आपदा में बह चुके लामबगड़ बाजार में भी दुकानें खुलने लगी हैं। देश के प्रथम गांव माणा में भी ग्रामीणों की चहल-पहल होने लगी है। बुधवार को बद्रीनाथ धाम पहुंंचे अधिकांश श्रद्धालु माणा गांव पहुंचे। बद्रीनाथ में आर्मी हेलीपैड से मंदिर परिसर तक साफ-सफाई का काम भी पूरा हो गया है।
