डेब्यू सीरीज से ही भुवन बाम ने ओटीटी पर मचाया गदर..
देश-विदेश: भुवन बाम यूट्यूब की दुनिया के बेताज बादशाह तो हैं हीं, साथ ही उन्होंने अपनी डेब्यू वेब सीरीज ‘ताजा खबर’ से ओटीटी पर भी तहलका मचा दिया है। फैंस एक बार फिर से उनकी परफॉरमेंस के कायल हो गए हैं और सोशल मीडिया पर उनकी जमकर तारीफ कर रहे हैं। अपनी पहली ओटीटी वेब सीरीज ‘ताजा खबर’ को समय से पहले रिलीज करके वैसे ही फैंस को सरप्राइज कर दिया था और इसके बाद उनकी शानदार एक्टिंग ने भी दर्शकों का दिल जीत लिया। तो चलिए जानते हैं कि भुवन बाम की ‘ताजा खबर’ के बारे में क्या है जनता की राय।
पहले हम आपको बता दें कि ‘ताज खबर’ 6 जनवरी यानी आज रिलीज होने वाली थी लेकिन इसे एक दिन पहले रात में ही रिलीज कर दिया गया, जिसकी जानकारी अभिनेता ने खुद सोशल मीडिया के जरिए दी। उनकी इस वेब सीरीज का फैंस को बेसब्री से इंतजार था और भुवन बाम भी दर्शकों की उम्मीदों पर खरे उतरते दिख रहे हैं। तभी तो ट्विटर पर लोग जमकर तारीफ करते नजर आ रहे हैं। एक यूजर ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “भुवन बाम, द एक्टर- ताजा खबर एक दम कड़क, कहानी भुवन बाम के साथ। श्रिया पिलगांवकर ‘गिल्टी माइंड्स’ और मिर्जापुर के बाद इसमें भी स्वीकार हैं।
दर्शकों को ‘ताजा खबर’ की दिलचस्प कहानी तो पसंद आई ही है, इसके साथ ही वसंत गावड़े के किरदार में भुवन बाम ने छक्का जड़ दिया है। खुद के यूट्यूब चैनल पर तो भुवन ने फैंस को अपना कायल बनाया ही है साथ ही इस सीरीज में भी उनकी दमदार एक्टिंग ने फैंस का दिल जीत लिया। एक यूजर ने लिखा, “तीन एपिसोड पूरे कर चुका हूं, क्या स्टोरी और स्क्रीनप्ले है, भुवन बाम भाई आप अगले सुपरस्टार हैं, मेरे शब्दों को मार्क करके रख लें।” इसी तरह से दूसरे यूजर ने भी लिखा, “भुवन बाम आपके द्वारा ऐसी परफॉर्मेंस देखने लायक है, पावर पैक ‘ताजा खबर’ वसंत गावड़े…प्यार…ऐसा अमेजिंग एक्टर..जल्द ही अभिनय और प्रतिभा का बादशाह।
एलटी और प्रवक्ता के 929 रिक्त पदों पर इस दिन शुरू होगी भर्ती प्रक्रिया..
उत्तराखंड: सरकारी माध्यमिक स्कूलों में एलटी और प्रवक्ता के 929 रिक्त पदों पर भर्ती को लेकर बड़ा अपडेट आ रहा है। बताया जा रहा है कि अगले सप्ताह से भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके लिए कवायद शुरू हो गई है। बता दे कि कैबिनेट से विधिवत मंजूरी के बाद इनकी नियुक्ति शुरू की गई थी। वर्तमान में प्रदेश में 4105 अतिथि शिक्षक कार्यरत है। बाकी 13 सौ पदों पर अतिथि शिक्षक की भर्ती की मंजूरी ली जा रही है। सरकार ने माध्यमिक स्कूलों में विज्ञान गणित और अंग्रेजी विषय में रिक्त पदों को देखते हुए शिक्षा विभाग को 929 पदों पर अतिथि शिक्षकों की भर्ती की मंजूरी दी है। शासन ने वर्ष 2018 में तत्कालीन सरकार ने शिक्षकों की कमी को देखते हुए 5434 अतिथि शिक्षक भर्ती का निर्णय लिया था। जिसमें अब 929 पदों पर भर्ती की प्रकिया शुरू की जा रही है।इस भर्ती के लिए शिक्षा निदेशालय ने मेरिट लिस्ट को अंतिम रूप दिया है, इस लिस्ट को सभी जिलों को भेजा जा रहा है और अगले सप्ताह से यह प्रक्रिया शुरू होगी।
इस दिन जारी होंगे उत्तराखंड वन रक्षक भर्ती परीक्षा प्रवेश-पत्र..
उत्तराखंड: लोक सेवा आयोग की वन रक्षक परीक्षा 2022 का आयोजन 22 जनवरी, 2023 को किया जाना है। वन रक्षक परीक्षा 2022 के लिए उत्तराखंड लोक सेवा आयोग ने एडमिट कार्ड जारी करने की तारीख की घोषणा भी कर दी है। बता दे कि उम्मीदवार वेबसाइट psc.uk.gov.in पर उपलब्ध आधिकारिक अधिसूचना देख एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं। उत्तराखंड वन रक्षक भर्ती परीक्षा राज्य भर के 13 जिला केंद्रों पर होनी है। परीक्षा एक ही पारी में सुबह 11 बजे से दोपहर एक बजे तक आयोजित होने वाली है।
आपको बता दे कि यूकेपीएससी की ओर से वन रक्षक भर्ती परीक्षा के लिए प्रवेश पत्र 12 जनवरी, 2023 को जारी किया जाएगा। उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की वन रक्षक भर्ती 2022 अभियान का उद्देश्य उत्तराखंड वन विभाग में वन रक्षकों के लिए कुल 894 रिक्तियों को भरना है। चयनित उम्मीदवारों के लिए लेवल-3 के तहत निर्धारित वेतनमान 21,700 रुपये से 69,100 रुपये प्रति माह तक है। उत्तराखंड वन रक्षक भर्ती परीक्षा की चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा, पीईटी/ पीएसटी शारीरिक परीक्षण और दस्तावेज सत्यापन का दौर आदि शामिल होंगे।
एडमिट कार्ड डाउनलोड करने की प्रक्रिया..
सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट ukpsc.net.in पर जाएं।
वन रक्षक परीक्षा -2022 के लिए एडमिट कार्ड लिंक पर क्लिक करें।
अपने लॉग इन विवरण दर्ज करें और सबमिट करें।
यूकेपीएससी वन रक्षक भर्ती परीक्षा एडमिट कार्ड स्क्रीन पर दिखाई देगा।
डाउनलोड करें और भविष्य के संदर्भ के लिए एक प्रिंट आउट लें।
जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर लैंड नहीं कर पाई जयपुर से आ रही फ्लाइट..
उत्तराखंड: घने कोहरे के कारण जयपुर से आ रही फ्लाइट जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर लैंड नहीं कर पाई। फ्लाइट को डायवर्ट कर दिल्ली भेजा गया। एयरपोर्ट के डिप्टी जनरल मैनेजर नितिन कादियान ने बताया बृहस्पतिवार की शाम करीब 6:30 जौलीग्रांट एयरपोर्ट के आसपास घना कोहरा छा गया था। इस दौरान जयपुर से देहरादून आ रही इंडिगो की फ्लाइट लैंड नहीं कर सकी। जिसे दिल्ली डायवर्ट कर दिया गया बाद में फ्लाइट रद्द हो गई। पर्वतीय क्षेत्रों में हो रही बर्फबारी से मैदानी भागों में भी ठंड बढ़ रही है। सुबह 10 बजे तक कोहरा छाए रहने से लोगों की परेशानियां बढ़ गई। हल्की धूप निकलने के बाद ही लोग घरों से बाहर निकले।
ऋषिकेश में गुरुवार को सरकारी और गैर सरकारी कार्यालय के साथ ही घरों में दिनभर ठंड को दूर भगाने के लिए लोगों ने हीटर का सहारा लिया। गंगा घाट, तट, आंतरिक मार्गों पर लोग अलाव जलाते हुए दिखाई दिए। मुनि की रेती, तपोवन, स्वर्गाश्रम, लक्ष्मणझूला, ऋषिकेश मुख्य बाजार, त्रिवेणी घाट, आस्था पथ आदि स्थानों पर देशी, विदेशी पर्यटकों के अलावा स्थानीय लोग गर्म कपड़ों में पैक रहे। शाम को शीतलहर चलते के कारण लोग अपने घरों के अंदर कैद हो गए। बाजार की सड़कों पर कामकाजी लोग ही नजर आए। पहाड़ों में ऊंचाई वाले इलाकों में हिमपात और मैदान में कोहरा छाने से शीतलहर चल रही है।
एम्स में हो सकेगी कोरोना सैंपल की जीनोम सिक्वेंसिंग, अगले महीने तक हो जाएगा सेटअप तैयार..
उत्तराखंड: अब एम्स में भी कोरोना सैंपल की जीनोम सिक्वेंसिंग की सुविधा मिल पाएगी। जीनोम सिक्वेंसिंग मशीन मिलने के बाद एम्स में अब लैब का सेटअप तैयार किया जा रहा है। फरवरी में सेटअप पूरी तरह से बनकर तैयार हो जाएगा। हालांकि अगर जरूरत पड़ती है तो सेटअप तैयार होने से पहले भी एम्स में कोराना सैंपल की जीनोम सिक्वेंसिंग की जाएगी।
कोरोना की आशंका को देखते हुए एम्स में पिछले डेढ़ साल से जीनोम सिक्वेंसिंग लैब स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन एम्स प्रशासन को प्रयासों में सफलता नहीं मिल पा रही थी। प्रो. मीनू सिंह ने जुलाई 2022 में एम्स निदेशक का कार्यभार संभालने के बाद जीनोम सिक्वेंसिंग मशीन की उपलब्धता के लिए नए सिरे से प्रयास किए। आखिरकार केंद्र से स्वीकृति मिलने के साथ एम्स पिछले साल दिसंबर 1.92 करोड़ रुपये की जीनोम सिक्वेंसिंग मशीन खरीदने में सफल रहा।
एम्स निदशक प्रो. मीनू सिंह ने कहा कि कोरोना के नए नए वैरिएंट सामने आ रहे हैं। ऐसे में जीनोम सिक्वेंसिंग आज सभी बड़े चिकित्सा और शोध संस्थानों की जरूरत बन गई है। उन्होंने बताया कि एम्स में आगामी फरवरी महीने में जीनोम सिक्वेंसिंग लैब का सेटअप बनकर तैयार हो जाएगा। कहा कि कोरोना सैंपल के मामले में जरूरत पड़ने पर सेटअप तैयार होने से पहले भी जांच की जा सकेगी।
क्या है जीनोम सिक्वेंसिंग
जिस तरह इंसान का शरीर डीएनए से मिलकर बनता है, वैसे ही वायरस डीएनए या आरएनए से बनता है। कोरोना वायरस आरएनए से बना है। जीनोम सीक्वेंसिंग वो तकनीक है, जिससे वायरस की अनुवांशिक जानकारी मिलती है। जीनोम सीक्वेंसिंग से वायरस की संरचना, व्यवहार, प्रसार यानी उसके पूरे बायोडाटा की जानकारी मिल जाती है। वहीं वायरस के नए वैरिएंट के बारे में भी इसी तरह की जानकारी मिलती है।
बिग बी ने लोगों को समझाया ‘अवतार 2’ के पीछे छुपा संदेश..
देश-विदेश: बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन का कैमरे के सामने बेहतरीन अदायगी करने के साथ ही किताबों और कलम से भी गहरा नाता है। बिग बी अक्सर अपने दिलों-दिमाग में चल रहे विचारों को पन्नो पर उतारना पसंद करते हैं। हालांकि, अब ऐसा करने का उनका माध्यम डिजिटल ब्लॉग होता है। लेकिन अमिताभ बच्चन को आए दिन अपने ब्लॉग के जरिए किसी न किसी मुद्दे पर अपनी राय रखते देखा जाता है। इसी क्रम में हाल ही में अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग में जेम्स कैमरून की हालिया रिलीज हुई फिल्म ‘अवतार: द वे ऑफ वॉटर’ का जिक्र किया है। इस ब्लॉग में अमिताभ ने ‘अवतार 2’ की जमकर तारीफ की है।
पूरी दुनिया में दर्शकों का भरपूर प्यार पा रही जेम्स कैमरून की ‘अवतार 2’ पर अब बॉलीवुड के महानतम कलाकार माने जाने वाले अमिताभ बच्चन ने भी अपनी राय रखी है। अमिताभ बच्चन ने पानी में गोते खाती नावी की दुनिया की अपने लेटेस्ट ब्लॉग में जमकर तारीफ की है। इसके साथ ही बिग बी ने ब्लॉग में फिल्म के पीछे छुपे जेम्स कैमरून के उद्देश्य को भी लोगों को समझाया है।
अमिताभ बच्चन लिखते हैं, ‘अवतार: द वे ऑफ वॉटर को सभी ने देखा और इसे देखने के बाद लोगों के कई अलग-अलग मत आए.. बहुत से लोगों ने महसूस किया कि यह बहुत लंबी थी और कुछ इसका अंत देखने तक का इंतजार नहीं कर पाए… लेकिन सभी लोग इसके पीछे का उद्देश्य समझने में असफल रहे। मुझे लगता है कि इसकी कहानी के पीछे एक गहरा संदेश है। कुदरत से खिलवाड़ मत करो….. क्योंकि वह कभी न कभी इसका बदला लेगी !!’
बिग बी ने आगे लिखा, ‘शेर हमेशा उस कांटे को याद रखेगा जिसे एंड्रोक्लीज ने दर्द में उसके पंजे से निकाला था .. और संकट में उसके बचाव में आया था .. ऐसे ही जल महासागरों का जंगली.. और यह तथ्य भी कि जल हमारे अस्तित्व का सबसे महत्वपूर्ण तत्व है..हम पानी में पैदा हुए थे और पानी में ही खत्म हो जाएंगे..।’
पीएम मोदी ने जल संरक्षण के लिए दिए कई मंत्र..
मनरेगा के तहत पानी पर अधिक से अधिक हो काम- पीएम मोदी..
देश-विदेश: जल विजन 2047′ विषय पर आज यानी पांच जनवरी से दो दिवसीय प्रथम अखिल भारतीय राज्य मंत्री वार्षिक सम्मेलन का आयोजन मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में किया गया है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सम्मेलन को संबोधित किया। उनका कहना हैं कि आज भारत जल सुरक्षा में अभूतपूर्ण काम कर रहा है और अभूतपूर्ण निवेश भी कर रहा है। जल संरक्षण के लिए राज्यों के प्रयास देश के सामूहिक लक्ष्यों को प्राप्त करने में बहुत सहायक होंगे। पीएम मोदी ने कहा कि मनरेगा के तहत पानी पर अधिक से अधिक काम किया जाना चाहिए।
जन भागीदारी की सोच को जनता के मन में जगाना है: पीएम मोदी..
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कहना है कि जल संरक्षण के लिए जन भागीदारी की सोच को जनता के मन में जगाना है। हम इस दिशा में जितना ज्यादा प्रयास करेंगे उतना ही अधिक प्रभाव पैदा होगा। देश हर जिले में 75 अमृत सरोवर बना रहा है और अब तक 25,000 अमृत सरोवर बन भी चुके हैं। पीएम मोदी ने कहा कि Water vision 2047 अगले 25 वर्षों के अमृत यात्रा का महत्वपूर्ण आयाम है।
जियो मैपिंग और जियो सेंसिंग जल संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही..
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जियो मैपिंग और जियो सेंसिंग जैसी तकनीक जल संरक्षण के कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। कई राज्यों ने इसमें अच्छा काम किया है और कई राज्य इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। जल संरक्षण के लिए केंद्र ने अटल भू-जल संरक्षण योजना की शुरुआत की है। साथ ही सरकार ने इस बजट में सर्कुलर इकोनॉमी पर काफी जोर दिया है। जल संरक्षण के क्षेत्र में भी सर्कुलर इकोनॉमी की बड़ी भूमिका है। जब ट्रीटेड जल को पुन: उपयोग किया जाता है, ताजा जल को संरक्षण किया जाता है तो उससे पूरे इकोसिस्टम को बहुत लाभ होता है।
शहरीकरण की रफ्तार के मद्देनजर जल संरक्षण पर गंभीरता से सोचना होगा..
पीएम मोदी ने कहा कि हमारे देश में शहरीकरण तेजी से बढ़ रहा है और जब शहरीकरण की रफ्तार ऐसी हो तो हमें पानी के विषय में पूरी गंभीरता से सोचना चाहिए। इंडस्ट्री और खेती दो ऐसे सेक्टर्स हैं, जिसमें पानी की आवश्यकता अधिक होती है। इन दोनों सेक्टर्स को मिल कर जल संरक्षण अभियान चलाना चाहिए और लोगों को जागरूक करना चाहिए।
‘स्वच्छ भारत अभियान’ से मिला फायदा..
‘स्वच्छ भारत अभियान’ से जब लोग जुड़े तब जनता में भी चेतना और जागरूकता आई। सरकार ने संसाधान जुटाए,वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और शौचालय जैसे अनेक कार्य किए। लेकिन अभियान की सफलता तब सुनिश्चित हुई जब जनता ने सोचा कि गंदगी नहीं फैलानी है। जनता में यही सोच जल संरक्षण के लिए भी जगानी होगी।
देहरादून में हाईटेक नियो मेट्रो के लिए यहां जमीन मुहैय्या कराएगा एमडीडीए..
उत्तराखंड: राजधानी देहरादून में सफर आसान होने वाला है। दून में अब जल्द ही नियों मेट्रो दौड़ती नजर आएगी। पहले चरण में देहरादून में मेट्रो नियो के लिए कवायद शुरू कर दी है। मेट्रो नियो प्रोजेक्ट की राह से जमीन की अड़चन दूर हो गई है। मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) आईएसबीटी के पास बाजार दर अपनी जमीन देने के लिए तैयार हो गया है। करीब 1600 करोड़ रुपये की लागत से शुरू होने वाली इस योजना के लिए देहरादून में दो कॉरिडोर बनाए जांएगे। देहरादून मेट्रो रेल प्रोजेक्ट केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल है।
एमडीडीए बोर्ड बैठक में जमीन का प्रस्ताव पारित होने के बाद अपर मुख्य सचिव शहरी विकास को सहमति पत्र भेज दिया गया है। बताया जा रहा है कि बोर्ड बैठक में प्रोजेक्ट की उपयोगिता को देखते हुए निर्णय लिया गया कि आईएसबीटी के पास स्थित एमडीडीए की 14645.48 वर्ग मीटर भूमि बाजार दर पर मुहैया कराई जाएगी। इसमें आईएसबीटी से राजपुर और एफआरआई से रायपुर में मेट्रो नियो चलाने की योजना है। अगले पांच साल में धरातल पर ये योजना नजर आएंगी।
दो रूटों पर दौड़ेगी नियो मेट्रो
आपको बता दे कि देहरादून में नियो मेट्रो दो रूटों पर दौड़ेगी। इसमें एफआरआई से रायपुर के बीच एफआरआई, आईएमए ब्लड बैंक, दून स्कूल, कनॉट प्लेस, घंटाघर, गांधी पार्क, सीएमआई, आराघर, नेहरू कॉलोनी, अपर बद्रीश कॉलोनी, अपर नत्थनपुर, ओएफडी, हाथीखाना, रायपुर में स्टेशन बनाएं जाएगें। जबकि आईएसबीटी से गांधी पार्क के बीच आईएसबीटी, सेवलाकला, आईटीआई, लालपुल, चमनपुरी, पथरीबाग, रेलवे स्टेशन, कोर्ट में स्टेशन होंगे। इस योजना के लिए अब केंद्रीय वित्त मंत्रालय समेत अन्य विभागों से अनुमति मिलनी बाकी है। राज्य स्तर पर अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं को पूरा किया जा रहा है।
ऐसे होंगे कोच, जानें खासियत
बताया जा रहा कि ये मेट्रो नियो सिस्टम रेल गाइडेड सिस्टम है। इसके कोच स्टील या एल्युमिनियम के बने होंगे। मेट्रो नियो के कोच दो तरह की लंबाई के होंगे। एक कोच 12 मीटर लंबा। इसमें अधिकतम 90 यात्री सफर कर सकेेंगे। दूसरा कोच 24 से 25 मीटर लंबा होगा। इसमें 225 यात्री सफर कर सकेंगे। कोच की चौड़ाई ढाई मीटर होगी। हर स्टेशन की लंबाई 60 मीटर तक होगी। इसमें इतना पावर बैकअप होगा कि बिजली जाने पर भी ट्रेन 20 किमी चल सकेगी। इसमें ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम होगा। टिकट का सिस्टम क्यू आर कोड या सामान्य मोबिलिटी कार्ड से होगा। इसके ट्रैक की चौड़ाई आठ मीटर होगी। जहां ट्रेन रुकेगी, वहां 1.1 मीटर का साइड प्लेटफॉर्म होगा। आईसलैंड प्लेटफॉर्म चार मीटर चौड़ाई का होगा।
पूरे प्रोजेक्ट को तैयार होने में इतना होगा खर्च..
बताया जा रहा है कि इस पूरे प्रोजेक्ट को तैयार होने में करीब 1600 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया जा रहा है इस प्रोजेक्ट के लिए सरकार लोन लेगी। जबकि एलिवेटेड मेट्रो को बनाने में प्रति किलोमीटर का खर्च 300-350 करोड़ रुपये आता है। अंडरग्राउंड में यही लागत 600-800 करोड़ रुपये तक पहुंच जाती है। जबकि मेट्रो नियो या मेट्रो लाइट के लिए 200 करोड़ तक का ही खर्च आता है। इस मेट्रो की लागत परंपरागत मेट्रो की निर्माण लागत से 40 फीसदी तक कम आती है। साथ ही इसमें स्टेशन के लिए ज्यादा बड़ी जगह की जरूरत भी नहीं पड़ती। यह सड़क के सरफेस या एलिवेटेड कॉरिडोर पर चल सकती है। क्योंकि इसमें लागत कम आएगी, इसलिए यात्रियों के लिए सफर सुविधाजनक होने के साथ ही किफायती भी होगा।
26 जनवरी को पूरा देश देखेगा जागेश्वर धाम की झलक..
उत्तराखंड: गणतंत्र दिवस के अवसर पर दिल्ली के राजपथ पर होने वाली परेड में देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत भी नजर आएगी। बता दे देवभूमि की झांकी को परेड में शामिल किया जा रहा है। जिसमें इस साल ‘मानसखण्ड’ की झांकी का प्रदर्शन किया जाएगा। झांकी के अग्र तथा मध्य भाग में कार्बेट नेशनल पार्क में विचरण करते हुए बारहसिंघा, घुरल, हिरन, मोर तथा उत्तराखंड में पाये जाने वाली विभिन्न पक्षियों व झांकी के पृष्ठ भाग में प्रसिद्ध जागेश्वर मन्दिर समूह तथा देवदार के वृक्षों को दिखाया जायेगा
आपको बता दे कि झांकी के साथ उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति को प्रदर्शित करने के लिए छोलिया नृत्य का दल सम्मिलित होगा। झांकी का थीम सांग उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति पर आधारित होगा। साथ ही उत्तराखंड की प्रसिद्ध लोक कला ‘ऐपण’ का भी झांकी के मॉडल में समावेश किया गया है। झांकी का निर्माण सूचना विभाग के संयुक्त निदेशक/नोडल अधिकारी के.एस. चौहान के दिशानिर्देशन में राष्ट्रीय रंगशाला शिविर, नई दिल्ली में शुरू हो गया है।
बताया जा रहा है कि गणतंत्र दिवस की झांकी के लिए लगभग 27 राज्यों ने अपने प्रस्ताव भारत सरकार को प्रेषित किये थे, जिसमें 16 राज्यों का ही अंतिम चयन हुआ है। झांकी के साथ उत्तराखण्ड की संस्कृति को प्रदर्शित करने के लिए उत्तराखंड का प्रसिद्ध छोलिया नृत्य का ग्रुप 13 जनवरी, 2023 को राष्ट्रीय रंगशाला शिविर, नई दिल्ली के लिए प्रस्थान करेगा। राष्ट्रीय समारोह के नोडल अधिकारी संयुक्त निदेशक, के.एस. चौहान द्वारा झांकी का डिजाइन, थ्री-डी मॉडल तथा संगीत के संदर्भ में रक्षा मंत्रालय के अधीन गठित विशेषज्ञ समिति के सम्मुख नई दिल्ली में 7 बार प्रस्तुतिकरण करने के उपरान्त उत्तराखण्ड राज्य का अंतिम चयन हुआ है। श्री केदारनाथ व बद्रीनाथ की तर्ज पर कुमाऊ के पौराणिक मंदिरों के लिए सीएम पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर मानसखण्ड मंदिर माला मिशन योजना पर काम किया जा रहा है। गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ पर मानसखण्ड पर आधारित झांकी का प्रदर्शन होगा। देश विदेश के लोग मानसखण्ड के साथ ही उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति से भी परिचित होंगे।
उत्तराखंड में बरगद के पेड़ के नीचे डॉ. योगी ने बनाया बंकर..
उत्तराखंड: अमेरिका की लग्जरी लाइफ स्टाइल छोड़कर 40 साल से देहरादून में रहने वाले पद्मश्री डॉक्टर योगी ऐरन ने दुनिया का पहला ऐसा बंकर बनाया है, जो ऑक्सीजन से भरपूर हैं। यहां पहुंचने पर आपको स्वर्ग का एहसास होता हैं। बंकर बनाने की बात सुनकर आपको युद्ध क्षेत्र की याद जरूर आती होगी, मगर शांत वादियों में बंकर बन रहा हो तो यह किसी अचंभे से कम नहीं होगा. राजधानी देहरादून में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित डॉ. योगी बंकर बना रहे हैं. यह ऐसा बंकर है कि अगर कभी एटम बम का हमला हो तो उसके रेडिएशन से बचा जा सकेगा. बंकर के ऊपर ढाई सौ बरगद के पेड़ लगे हैं. इतना ही नहीं बंकर के ऊपर छोटी सी नहर भी बनी है।
मेडिकल सुविधाओं से लैस
राजधानी देहरादून से तकरीबन 15 किलोमीटर की दूरी पर कुठाल गेट के पास डॉक्टर योगी का जंगल मंगल क्षेत्र है. जो तरह-तरह के पेड़ पौधों से भरा है. 250 बरगद के पेड़ के नीचे डॉ. योगी आपातकालीन की स्थिति में रहने के लिए एक बंकर बना रहे हैं. इसमें तीन अलग-अलग बड़े कमरे हैं, जिसमें 10 से 12 लोग आसानी से रह सकते हैं. बंकर की दीवारें 10 फीट है. यहां रहने के लिए बेड है, जो ऑक्सीजन मशीन समेत मेडिकल सुविधाओं से लैस है.
बंकर में अंदर बैठकर देख सकेंगे बाहर का नजारा
खास बात यह है कि बंकर से बाहर का नजारा देखने के लिए सीसीटीवी कैमरे भी लगे हैं. बाहर की रोशनी आए इसके लिए रोशनदान बनाया गया है. बड़े-बड़े पहाड़ों के बोल्डर से बंकर के अंदर दीवारें बनाई गई हैं. डॉ. योगी का कहना है कि इस बंकर को रेडिएशन से बचाया जा सकता है. अगर एटम बम का हमला होगा तो उस पर रेडिएशन से बचा जा सकेगा. बंकर के अलग-अलग प्रवेश द्वार बनाए गए हैं।
पत्थरों के बने हैं बेड
बंकर के अंदर पत्थर के बेड हैं. इन्हीं बेड पर आपातकालीन स्थिति में सोया जा सकेगा. बंकर में सुरंग की तरह एंट्री होती है. इसके साथ ही एक कमरे से दूसरे कमरे में जाने के लिए सुरंग नुमा रास्ता भी बनाया गया है. डॉक्टर योगी का कहना है कि आपातकालीन स्थिति में इसमें आसानी से छिपा जा सकेगा, क्योंकि बंकर के ऊपर हरा-भरा एक बगीचा तैयार किया जा रहा है. इसमें ढाई सौ बरगद के पेड़ लगाए गए हैं और एक नहर भी बह रही है।
पेड़-पौधों से घिरा है बंकर..
डॉक्टर योगी इसे दुनिया का पहला ऐसा बंकर बता दे रहे हैं जो इस तरह से बगीचे नुमा क्षेत्र में बन रहा है. उनका कहना है कि यह देश का पहला ऐसा बंकर है जो इस तरह से बरगद के पेड़ के नीचे बनाया गया है. दूर से देखकर कोई इस बात का एहसास नहीं कर सकता. बंकर के ऊपर सैर करने के लिए रास्ता भी बनाया गया है. नहर में मछलियां पाली गई हैं. साथ ही जंगल में पशु पक्षी सैर करते हैं।
