उत्तराखंड में ओमिक्रॉन पकड़ रहा रफ्तार..
उत्तराखंड : में ओमिक्राॅन वैरिएट से संक्रमित 25 नए मरीज मिले हैं। इसके साथ ही राज्य में इस वैरिएंट से संक्रमित मरीजों की कुल संख्या 118 हो गई है। ओमिक्राॅन से संक्रमित सभी मरीजों की स्थिति सामान्य है। स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ तृप्ति बहुगुणा ने बुधवार को बताया कि दून मेडिकल कॉलेज की लैब से बुधवार को आई रिपोर्ट के अनुसार 25 सैंपल ओमिक्राॅन वैरिएंट से संक्रमित मिले हैं। उन्होंने बताया कि इसके साथ ही राज्य में ओमिक्राॅन से संक्रमितों की संख्या बढ़कर 118 हो गई है और इनमें से कोई भी मरीज गंभीर नहीं है।
उनका कहना हैं कि ओमिक्राॅन से घबराने की जरूरत नहीं है बल्कि सावधान रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि नए वैरिएंट से संक्रमित हो रहे अधिकांश लोगों को अस्पतालों की जरूरत नहीं पड़ रही है। उन्होंने कहा कि अभी तक इस वैरिएंट से संक्रमित लोगों की संख्या 93 थी जिसमें से अधिकांश लोग ठीक हो चुके हैं। उन्होंने लोगों से कोरोना संक्रमण से बचने के लिए ऐहतियात बरतने की अपील की है। साथ ही कोविड एप्रोपिएट विहेवियर अपनाने को भी कहा गया है।
दिल्ली-यूपी सहित पड़ोसी राज्यों के मिले 111 पर्यटक कोविड पॉजिटिव
तीर्थनगरी ऋषिकेश क्षेत्र में कोरोना की रफ्तार नहीं थम रही है। बुधवार को लक्ष्मणझूला, मुनिकीरेती में दिल्ली-यूपी सहित पड़ोसी राज्यों के 111 पर्यटक समेत कोरोना के 194 नए मामले आए हैं। पॉजिटिव आए स्थानीय लोगों को दवा किट देकर होमआइसोलेट कर दिया है। मुनिकीरेती कोविड नोडल अधिकारी डा. जगदीश जोशी ने बताया कि तपोवन चेकपोस्ट में हुए एंटीजन रैपिड टेस्ट में 17 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आयी है।
यमकेश्वर ब्लॉक के कोविड नोडल अधिकारी डा. राजीव कुमार ने बताया कि लक्ष्मणझूला घूमने आए 111 पर्यटकों की रिपोर्ट पॉजिटिव आयी है। सभी दिल्ली,यूपी, हरियाणा के रहने वाले हैं। इसके अलावा 110 स्थानीय लोगों में भी संक्रमण की पुष्टि हुई है। वहीं, ऋषिकेश सरकारी अस्पताल के स्वास्थ्य पर्यवेक्षक एसएस यादव ने बताया कि अस्पताल में 278 लोगों ने कोरोना जांच कराई थी, जिसमें 56 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आयी है। इसमें ऋषिकेश शहर के 20 लोग शामिल हैं। सभी को कोविड किट देकर होमआउसोलेट कर दिया गया है।
क्या फिर लौट रही मंडल बनाम कमंडल की राजनीति..
देश – विदश : उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले नए राजनीतिक समीकरण भी सामने आ रहे हैं। एक दूसरे के समर्थन में सेंध लगाने के लिए राजनीतिक दल तमाम उपाय कर रहे हैं। आखिर जनता के फैसले का आधार क्या होगा?
बुधवार को भारतीय जनता पार्टी ने समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव की बहू अपर्णा बिष्ट यादव को पार्टी में शामिल करके अपने चौदह विधायकों और मंत्रियों के पार्टी छोड़ने के गम को भुलाने और अखिलेश यादव के परिवार में सेंध लगाने की खुशी भले ही मनाई हो लेकिन इतनी बड़ी संख्या में विधायकों और नेताओं के जाने की अभी और कीमत चुकानी पड़ रही है। यूपी बीजेपी में मची इस भगदड़ का फायदा बीजेपी के सहयोगी दल भी उठाने में लगे हैं। यही वजह है कि टिकट बंटवारे पर दिल्ली से लेकर लखनऊ तक लगातार चल रही बैठकों के बावजूद ना तो अभी सहयोगी दलों के साथ सीटों की साझेदारी तय हो सकी है और ना ही उम्मीदवारों के नाम।
बीजेपी बैकफुट पर..
यूपी बीजेपी के एक बड़े नेता नाम नहीं छापने की शर्त पर कहते हैं कि अन्य पिछड़ा वर्ग के एक दर्जन से ज्यादा विधायकों के पार्टी छोड़ने के बाद बीजेपी बैकफुट पर है और नहीं चाहती कि अब कोई और मौजूदा विधायक पार्टी छोड़े या फिर कोई सहयोगी दल उनसे अलग हो। उनके मुताबिक, “पिछले सात-आठ साल में बीजेपी ने जिस तरह से अन्य पिछड़ी जातियों को पार्टी से जोड़ा है, उस अभियान को पहली बार गहरा धक्का लगा है। इन विधायकों के पार्टी छोड़कर जाने से ना सिर्फ विधानसभा चुनाव में पार्टी को नुकसान होगा बल्कि पार्टी के सामाजिक आधार को भी नुकसान पहुंचेगा जिसे बड़ी मुश्किल से तैयार किया गया था।”
सहयोगी दलों को देने लगी भाव..
यूपी में बीजेपी की मुख्य रूप से अब दो सहयोगी पार्टियां रह गई हैं- अपना दल (सोनेलाल) और निषाद पार्टी। अपना दल तो बीजेपी के साथ 2014 के लोकसभा चुनाव के वक्त से ही गठबंधन में है लेकिन निषाद पार्टी के साथ गठबंधन नया है। निषाद पार्टी के अध्यक्ष डॉक्टर संजय निषाद कहते हैं कि बीजेपी ने उन्हें 15 सीटें देने का आश्वासन दिया है लेकिन बीजेपी की ओर से इस बात की अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
बीजेपी निषाद पार्टी को अधिकतम दस सीटें देने पर विचार कर रही है लेकिन इससे पहले पार्टी पांच से ज्यादा सीटें देने को राजी नहीं थी। वहीं अपना दल भी करीब तीस सीटों की मांग कर रही लेकिन बीजेपी उसे पंद्रह से ज्यादा सीटें देने को तैयार नहीं है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि बीजेपी की तरह अपना दल के भी दो विधायक पार्टी छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए हैं।
टिकट बंटवारे में समस्या..
बीजेपी के नेता लगातार कह रहे हैं कि पार्टी के भीतर टिकट बंटवारे और सहयोगी दलों के साथ सीट बंटवारे को लेकर किसी तरह की कोई समस्या नहीं है लेकिन समस्या साफ दिख रही है क्योंकि एक हफ्ते से ज्यादा लंबे समय तक हुए मंथन के बावजूद कोई सहमति नहीं बन पा रही है। जहां तक अपना दल का सवाल है तो बीजेपी ने 2017 के विधानसभा चुनाव में उसे 11 सीटें दी थीं जिनमें से 9 सीटों पर अपना दल के उम्मीदवार जीते थे। अपना दल के एक विधायक को योगी सरकार में राज्य मंत्री भी बनाया गया है लेकिन पार्टी की लगातार शिकायत रही है कि उसे एक सहयोगी की तरह सम्मान नहीं दिया गया और तमाम नियुक्तियों और दूसरी चीजों में नजरअंदाज किया गया। यहां तक कि पार्टी की अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल को 2019 में मोदी मंत्रिमंडल में भी नहीं शामिल नहीं किया गया था। काफी दबाव बनाने के बाद कैबिनेट विस्तार में उन्हें मंत्री बनाया गया लेकिन सिर्फ राज्यमंत्री ही।
अपना दल को भाव देने के मूड में नहीं थी भाजपा..
बीजेपी इस बार विधानसभा चुनाव में अपना दल को 11 से ज्यादा सीटें देने को कतई तैयार नहीं थी लेकिन राज्य की राजनीति में बदले नए समीकरणों ने उसे ऐसा करने पर मजबूर कर दिया है। वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ कलहंस कहते हैं, “स्वामी प्रसाद मौर्य और उनके साथियों के समाजवादी पार्टी में शामिल होने के बाद जिस तरह से नब्बे के दशक वाली मंडल-कमंडल की राजनीति एक बार फिर चर्चा में है, उसे देखते हुए दोनों ही पार्टियां अब बीजेपी पर दबाव बना रही हैं और इस स्थिति में बीजेपी इन्हें नजरअंदाज नहीं कर पाएगी।”
दोनों के ही पास समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में जाने के विकल्प अभी भी खुले हुए हैं, ये बीजेपी को भी पता है। इसलिए बीजेपी पूरी कोशिश करेगी कि इन्हें अपने साथ ही रखा जाए।”
मंडल और कमंडल..
कुछ दिन पहले यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक इंटरव्यू में कहा था कि यूपी में लड़ाई 80 बनाम 20 की है। उन्होंने इस अनुपात को बहुत स्पष्ट तो नहीं किया लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि उनका इशारा ”हिन्दू बनाम मुसलमान” की ओर था। योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य जब बीजेपी छोड़कर समाजवादी पार्टी में गए तो उन्होंने पार्टी दफ्तर में अपने भाषण में इसी तर्ज पर कहा, “लड़ाई 85 बनाम 15 की है।”
मौर्य के बयान से मिले संकेत..
स्वामी प्रसाद मौर्य ने इसे स्पष्ट करते हुए कहा, “सरकार बनवाएं दलित-पिछड़े और मलाई खाएं अगड़े 5 फीसदी लोग। आपने 80 बनाम 20 फीसदी का नारा दिया है, लेकिन मैं कह रहा हूं यह 15 बनाम 85 की लड़ाई है। 85 फीसदी हमारा है और 15 फीसदी में भी बंटवारा है।” स्वामी प्रसाद मौर्य के इस बयान को नब्बे के दशक की उस राजनीति की ओर लौटने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है जब राममंदिर आंदोलन के चरमोत्कर्ष के दौरान भी दलितों और पिछड़ों की एकजुटता यानी सपा और बसपा के गठबंधन ने बीजेपी को सत्ता से बाहर कर दिया। ये दोनों ही पार्टियां मंडल आयोग की सिफारिशों के लागू होने के बाद राजनीतिक पटल पर तेजी से उभरीं और उसके बाद यूपी की राजनीति में सरकारें बनाती रहीं।
सोशल इंजीनियरिंग..
साल 2011 की जनगणना के मुताबिक, यूपी में अनुसूचित जाति की जनसंख्या 21।1 फीसदी और अनुसूचित जनजाति की आबादी 1।1 फीसदी है जबकि पिछड़ी जातियों की आबादी 50 फीसदी से ज्यादा है। बहुजन समाज की चर्चा जब होती है तब इसी तबके में मुस्लिम समुदाय की आबादी को भी जोड़ दिया जाता है और इस आधार पर दलित, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों को 85 फीसदी से ज्यादा बताया जाता है। 85 बनाम 15 की राजनीति का यही आधार है और राजनीति के जानकारों का कहना है कि इस आधार पर यदि वोटों का ध्रुवीकरण होता है तो निश्चित तौर पर धर्म के आधार पर होने वाले ध्रुवीकरण पर वो भारी पड़ेगा।
हालांकि यह भी माना जा रहा है कि तमाम पिछड़ी और अनुसूचित जातियों को अपनी ओर करने की बीजेपी की कोशिशों के बाद अब नब्बे के दशक वाले जातीय ध्रुवीकरण की उम्मीद नहीं है और इस ध्रुवीकरण में दलित समुदाय का एक बड़ा हिस्सा सपा गठबंधन से अलग है और वह या तो बीएसपी के साथ है या फिर बीजेपी के। इसका दूसरा पक्ष यह भी है कि करीब तीन दशक की इस राजनीतिक उठापटक में सिर्फ जातियों के आधार पर ही राजनीतिक रुझान तय नहीं हो रहे हैं बल्कि हर राजनीतिक पार्टी में हर वर्ग के लोग हैं। इस स्थिति में जाति के आधार पर कोई राजनीतिक पार्टी शायद वैसी आक्रामक राजनीति ना कर सके जैसी कि नब्बे के दशक में हो रही थी। सभी को साथ लेकर चलना उसके बाद से ही राजनीतिक दलों की जरूरत बन चुकी है और उसी आधार पर हर पार्टी अपने-अपने तरह से सोशल इंजीनियरिंग में लगी हुई हैं।
आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद नोएडा में जब्त किए गए 1.33 करोड़ रुपये..
देश -विदेश : उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले नोएडा में बड़ी मात्रा में नकदी बरामद हो रही है। अभी तक पुलिस और स्टेटिक टीम सवा करोड़ से अधिक नकदी अलग अलग जगह से बरामद कर चुकी है। यह सिलसिला अभी भी जारी है। इसकी कड़ी में बुधवार को भी 4 लाख रुपये बरामद किए गए।
उत्तर में विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद से पुलिस और स्टेटिक टीमों ने भारी मात्रा में नकदी जब्त की है। इसके तहत गौतमबुद्ध नगर से 1 करोड़ 33 लाख 30 हजार 500 रुपये जब्त किए गए हैं। टीम ने अलग अलग जगह से 25 लाख, 5 लाख, 4 लाख और 99 लाख 30 हजार 500 रुपये बरामद किए हैं। खास बात यह है कि जब्त नकदी के संबंध में अभी तक कोई दस्तावेज पेश नहीं किए गए है। रकम को अलग अलग थानों में रखा गया है। इसके दस्तावेज पेश करने के लिए संबंधित व्यक्ति को बुलाया गया है, लेकिन कोई भी पेश नहीं हुआ है।
इनकम टैक्स भी अपने स्तर पर नकदी की जांच कर रही है। आशंका है कि संबंधित नकदी को चुनाव में प्रयोग किया जाना था। बता दें कि चुनाव आयोग ने 8 जनवरी को उत्तर प्रदेश और चार अन्य राज्यों में चुनावों के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की थी। इसके बाद से ही पुलिस और अन्य टीमें सघन चेकिंग अभियान चलाकर कार्रवाई कर रही है।
इनोवा कार से 4 लाख रुपये बरामद..
नॉलेज पार्क पुलिस व एफएसटी टीम-3 ने बुधवार को चेकिंग के दौरान सेक्टर 151से एक इनोवा कार से 4 लाख रुपये बरामद किए हैं। कार चालक विनीत कुमार मदान नकदी के संबंध में कोई अभिलेख पेश नहीं कर सका। इसके चलते नकदी को सीज कर दिया गया।
कोरोना के नए केसों ने डराया,एक्टिव मामले 18 लाख से ज्यादा..
देश – विदेश : बीते 4 दिनों में कोरोना वायरस के नए केसों में जो कमी देखने को मिल रही थी, वह फिर से खत्म हो गई है। बुधवार को आए बीते एक दिन के आंकड़े में कोरोना के 2 लाख 83 हजार नए केस मिले हैं। इसके साथ ही देश भर में कुल सक्रिय मामलों की संख्या तेजी से बढ़ते हुए 18 लाख 31 हजार हो गई है। हालांकि राहत की बात यह है कि एक तरफ कोरोना के नए केस 2,82,970 मिले हैं तो वहीं इसी दौरान 1 लाख 88 हजार से ज्यादा लोगों ने कोरोना को मात दी है। कोरोना के नए केसों में जिस तेजी से इजाफा हो रहा है, उससे माना जा रहा है कि अगले दो दिनों में आंकड़ा 20 लाख के पार हो सकता है।
देश में अब तक मिले कुल केसों की तुलना में एक्टिव मामले फिलहाल 4.83 फीसदी हैं। इसके अलावा रिकवरी रेट भी लगातार तेजी से घट रहा है और यह अब 93.88 पर्सेंट है। हालांकि एक्सपर्ट्स के मुताबिक राहत की बात यह है कि कोरोना की तीसरी लहर के दौरान नए केसों का आंकड़ा 4 लाख के पार नहीं जाएगा। इससे पहले कुछ अनुमानों में यह संख्या 4 से 8 लाख तक पहुंचने की बात कही गई थी। इस बीच कोरोना के डेली पॉजिटिविटी रेट की बात करें तो यह 15.13 पर्सेंट हो गया है, जबकि वीकली पॉजिटिविटी रेट 15.53 फीसदी है।
ओमिक्रॉन वैरिएंट के केस 9 हजार के करीब..
कोरोना के बढ़ते केसों के बीच थोड़ी सी राहत यह भी है कि इस बार दूसरी लहर की तरह ज्यादातर लोगों को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं पड़ रही है। यही नहीं जिस ओमिक्रॉन वैरिएंट के तेजी से फैलने के दावे किए जा रहे थे, उसके मामले भारत में बहुत ज्यादा नहीं हैं। देश में ओमिक्रॉन वैरिएंट के मामले फिलहाल 8,961 ही हैं। इससे साफ है कि तीसरी लहर में जो नए केस मिल रहे हैं, उसकी वजह ओमिक्रॉन वैरिएंट नहीं है बल्कि डेल्टा वैरिएंट के चलते ऐसा हो रहा है। देश में कोरोना टीकाकरण की बात करें तो अब तक 158 करोड़ से ज्यादा टीके लग चुके हैं। इसके अलावा 4 करोड़ के करीब किशोरों को भी कोरोना का टीका लगाया जा चुका है।
उत्तराखंड में एक बार फिर बदलेगा मौसम,बारिश-बर्फबारी का अलर्ट..
उत्तराखंड : उत्तराखंड के पर्वतीय जिंलों में 19, 20 और 21 जनवरी को बारिश और बर्फबारी की संभावना है। इस दौरान 2500 से 3000 मीटर उससे अधिक ऊंचाई वाले स्थानों में बर्फबारी हो सकती है। मौसम विभाग के अनुसार, 21 के बाद अगले दो दिनों में बारिश में तेजी आ सकती है। मंगलवार की शाम से राज्य में पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के चलते एक बार फिर मौसम बदलता दिख रहा है।
मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक मंगलवार को प्रदेश में मौसम शुष्क रहेगा, मैदानी क्षेत्रों के कुछ भागों विशेषकर हरिद्वार व उधमसिंहनगर जिले में उथला से मध्यम कोहरा छाए रहने की संभावना है। 19 जनवरी से उत्तरकाशी रुद्रप्रयाग चमोली पिथौरागढ़ जिलों में कहीं-कहीं बहुत हल्की हल्की बारिश बर्फबारी हो सकती है।
19 को ही 3000 मीटर व उससे अधिक ऊंचाई वाले स्थानों पर बर्फवारी की अधिक संभावना है, जबकि 20 और 21 को पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश, बर्फवाती का क्रम जारी रह सकता है। 2500 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले स्थानों में बर्फबारी हो सकती है। 22 और 23 को प्रदेश में बारिश में वृद्धि होगी। कोहरे और ठंड को लेकर एक बार फिर मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है।
मौसम विभाग के निदेशक बिक्रम सिंह के मुताबिक मैदानी क्षेत्रों में घना कोहरा लगने से ड्राइविंग की मुश्किल स्थिति बनेगी। हवाई अड्डे में न्यूनतम सीमा से कम दृश्यता विमान लैंडिंग को प्रभावित कर सकती है। मौसम विभाग ने यात्रियों से अपनी यात्रा निर्धारण के लिए एयरलाइन, रेलवे, राज्य परिवहन के संपर्क में रहने का सुझाव दिया है। कोहरे में चलते समय फोग लाइट के इस्तेमाल का सुझाव दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने NDA परीक्षा 2022 के लिए महिला उम्मीदवारों की संख्या सीमित करने पर केन्द्र सरकार से मांगा जवाब..
देश – विदेश : NDA 2022: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मंगलवार को कहा कि वह स्पष्ट करे कि आखिर उसके आदेश के बावजूद वर्ष 2022 के लिए भी पिछले साल के बराबर ही राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) में महिला उम्मीदवारों की सीट 19 ही क्यों सीमित की गई। शीर्ष अदालत ने केंद्र से कहा कि वह राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज (आरआईएमसी) और राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल (आरएमएस) में प्रवेश के लिए आयोजित एनडीए परीक्षा 2021 में महिलाओं सहित कुल उम्मीदवारों की संख्या से जुड़े आंकड़े न्यायालय में पेश किये जाएं। न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति एमएम सुंद्रेश की पीठ ने केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से कहा कि सरकार को बताना होगा कि यूपीएससी की अधिसूचना के मुताबिक आखिर क्यों वर्ष 2022 के लिए महिलाओं की संख्या 19 तय की गई। पीठ ने कहा, ”यह साल 2021 के आंकड़ों के बराबर हैं। पिछले साल आपने कहा था कि अवसंरचना की कमी की वजह से महिलाओं का कम प्रवेश लिया जा रहा है। अब आपने फिर साल 2022 के लिए महिलाओं उम्मीदवारों के लिए उतनी ही संख्या का प्रस्ताव किया है।
आपको यह स्पष्ट करना होगा। 19 सीट हमेशा के लिए नहीं होनी चाहिए। यह केवल एक तदर्थ उपाय है।” शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को मामले में हलफनामा दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया और बाकी पक्षकारों को उसके बाद दो सप्ताह में अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। पीठ ने इसके साथ ही मामले की सुनवाई छह मार्च के लिए सूचीबद्ध कर दी। इससे पहले, याचिकाकर्ता कुश कालरा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता चिन्मॉय प्रदीप शर्मा ने बताया कि उन्होंने अतिरिक्त हलफनामा दाखिल किया है जिसमें उल्लेख है कि 14 नवंबर 2021 को हुई एनडीए की परीक्षा में 8,009 प्रत्याशी ने सेवा चयन बोर्ड परीक्षा और चिकित्सा जांच के लिए उत्तीर्ण हुए जिनमें से 1,002 उम्मीदवार महिलाएं हैं जबकि 7,007 प्रत्याशी पुरुष हैं। उन्होंने कहा कि संघ लोकसेवा आयोग (यूपीएससी) के विज्ञापन और सरकार द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक वर्ष 2021 के एनडीए-ll में एनडीए 400 कैडेट को लेगा। शर्मा ने कहा,”इनमें से 10 महिलाओं सहित 208 उम्मीदवार सेना में लिए जाएंगे। नौसेना तीन महिलाओं के साथ 42 उम्मीदवारों को लेगी।
भारतीय वायुसेना भी छह महिलाओं के साथ 120 उम्मीदवारों को प्रवेश देगी। इस प्रकार जून 2022 में एनडीए में प्रवेश लेने वाली महिलाओं की संख्या 19 होगी।” उन्होंने कहा कि आश्चर्य की बात है कि 22 दिसंबर 2021 को यूपीएससी द्वारा एनडीए-l 2022 परीक्षा के लिए जारी नोटिस में जिसकी परीक्षा 10 अप्रैल 2022 का होनी है कुल 400 प्रवेश लेने हैं, उसमें सेना के लिए 208 (10 महिलाएं सहित), नौसेना के लिए 42 (तीन महिलाएं सहित) और वायुसेना के लिए फ्लाइंग में दो महिला उम्मीदवार सहित 92, ग्रांउड ड्यूटी (तकनीकी) में दो महिला उम्मीदवार सहित 18, ग्राउंड ड्यूटी (गैर तकनीकी) दो महिला उम्मीदवार सहित 10 सीटों पर प्रवेश की जानकारी दी गई है और प्रवेश जनवरी 2023 में दिया जाएगा। शर्मा ने कहा कि 22 दिसंबर 2021 को जारी नोटिस को पढ़कर लगता है कि जनवरी 2023 में भी महिलाओं की सीट 19 से अधिक नहीं होगी। उन्होंने कहा, ”पहली बार उल्लेख किया गया है कि नौसेना अकादमी में केवल 30 पुरुष उम्मीदवारों को ही प्रवेश दिया जाएगा। यह पाबंदी मनमाना है।” उल्लेखनीय है कि पिछले साल 22 सितंबर को शीर्ष अदालत ने महिलाओं को भी नवंबर में होने वाली एनडीए की परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी थी और कहा था कि उनका प्रवेश केंद्र की मांग पर एक साल तक स्थगित नहीं किया जा सकता।
सीएम चरणजीत सिंह चन्नी के भतीजे समेत कई खनन कंपनियों के ठिकानों पर छापेमारी.. Elle permet d’assurer une sécurité optimale lors de asgg.fr/ l’achat et de l’utilisation de médicaments en ligne.
पंजाब में ED का बड़ा ऐक्शन..
देश – विदेश : पंजाब में अवैध रेत खनन से कंपनियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के तहत प्रवर्तन निदेशालय ने छापेमारी की है। एजेंसी की ओर से जिन लोगों पर छापेमारी की गई है, उनमें से एक राज्य के सीएम चरणजीत सिंह चन्नी का भतीजा भूपिंदर सिंह हनी भी है। एजेंसी ने मंगलवार को सुबह ही भूपिंदर सिंह हनी और उसके 10 अन्य ठिकानों पर छापेमारी की कार्रवाई की है। पंजाब में वोटिंग से कुछ सप्ताह पहले इस ऐक्शन के चलते राजनीति तेज हो सकती है। फिलहाल इस मामले में सीएम चन्नी या फिर कांग्रेस के किसी अन्य नेता का बयान सामने नहीं आया है। प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में यह छापेमारी की है।
पंजाब में ड्रग्स माफिया के अलावा रेत माफिया का मुद्दा भी हमेशा से चुनावी मुद्दा रहा है। ऐसे में इस छापेमारी के चलते भाजपा की ओर से कांग्रेस को घेरा जा सकता है। पंजाब की 117 सीटों पर एक ही राउंड में 20 फरवरी को मतदान होना है। इससे पहले राज्य में 14 फरवरी को मतदान होना तय था, लेकिन रविदास जयंती के चलते कांग्रेस सभी दलों ने चुनाव को टालने की मांग की थी। इसके बाद आयोग ने सोमवार को मतदान 20 फरवरी को कराने का फैसला लिया है।
दरअसल 16 फरवरी को रविदास जयंती है और पंजाब सरकार का कहना है कि राज्य से बड़ी संख्या में लोग इस मौके पर वाराणसी जाते हैं और यदि चुनाव होता है तो फिर समस्या होगी। सीएम चन्नी का कहना था कि यदि 14 फरवरी को चुनाव होते हैं तो करीब 20 लाख लोग वोट नहीं डाल सकेंगे। उनकी ओर से चुनाव आयोग को चिट्ठी लिखी गई थी। इसके बाद अन्य दलों ने भी इस मांग का समर्थन किया था।
पाकिस्तान से भेजे गए 24 बमों से एक गाजीपुर में मिला विस्फोटक..
देश-विदेश : दिल्ली पुलिस की जांच में पता चला है कि शुक्रवार को गाजीपुर फूल बाजार से बरामद किए गए IED 24 बमों की खेप का हिस्सा था, जिसे सीमा पार से या तो जमीन के जरिए या समुद्री मार्ग से पाकिस्तानी डीप स्टेट द्वारा स्थानीय आतंकवादियों को भेजा गया था। हाल ही में जम्मू-कश्मीर और पंजाब से बरामद की गईं डिवाइसेज को भी उसी खेप का हिस्सा माना जा रहा है। यह भी माना जा रहा है कि कुछ उपकरणों की तस्करी गुजरात और उत्तर प्रदेश में की गई हो सकती है।
दिल्ली पुलिस के टॉप जांचकर्ताओं के मुताबिक, गाजीपुर डिवाइस एक टिफिन बम था जिसमें तीन किलोग्राम आरडीएक्स कोर चार्ज के रूप में और अमोनियम नाइट्रेट सेकेंडरी चार्ज के तौर पर था। डिवाइस को स्टील के टिफिन में कीलों और बॉल बेयरिंग के साथ पैक किया गया था और इसे दूर से ही उड़ाया जा सकता था।
भारत में मौजूद स्लीपर मॉड्यूल के लिए सीमा पार से तस्करी..
एचटी को पता चला है कि इन आईईडी को भारत में मौजूदा स्लीपर मॉड्यूल के साथ-साथ कुछ आपराधिक गिरोहों के लिए सीमा पार से तस्करी कर लाया गया था। सितंबर 2021 में दिल्ली पुलिस ने मुंबई, लखनऊ, इलाहाबाद और दिल्ली में गिरफ्तारियों के साथ आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया, जिसे इस IED रिकवरी से जोड़ा गया है।
IED खेप पिछले स्वतंत्रता दिवस के आसपास भारत आई..
जांचकर्ताओं का मानना है कि आईईडी की खेप पिछले स्वतंत्रता दिवस के आसपास भारत आई थी। जबकि दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां खेप से अन्य आईईडी बरामद करने की कोशिश कर रही हैं। एचटी को पता चला है कि इनमें से कई आईईडी को समुद्री मार्ग से गुजरात और जमीनी रास्ते से यूपी भेजा गया है।
राष्ट्रव्यापी अलर्ट जारी किया गया..
एक सीनियर सुरक्षा अधिकारी ने बताया, “ऐसा मालूम होता है कि भारत में कट्टरपंथी तत्वों को सीमा पार से पूर्व-निर्धारित लक्ष्यों पर डिवाइस लगाने या काम करने के लिए स्थानीय आपराधिक तत्वों का इस्तेमाल करने का काम सौंपा जा रहा है। इसे देखते हुए एक राष्ट्रव्यापी अलर्ट जारी किया गया है ताकि आतंकी हमला टल जाए।”
उत्तराखंड में कांग्रेस बनाएगी सरकार-हरक सिंह..
उत्तराखंड : भाजपा से निष्कासित होने के बाद भी हरक सिंह रावत के तेवर नरम नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा उत्तराखंड में कांग्रेस ही सरकार बनाएगी। रावत ने कहा कि वह कांग्रेस के लिए अब पूरी तन-मन से काम करेंगे। आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत पक्की है। आपको बता दें कि बीजेपी ने हरक को रविवार देर रात पार्टी से निष्कासित कर अंतिम समय में ही सही सरकार से बर्खास्त कर उनके बगावती तेवरों से हो रहे नुकसान की भरपाई करने का प्रयास किया है।
भाजपा सरकार में हरक सिंह रावत पहले ही दिन से असहज नजर आ रहे थे। लेकिन अंतिम साल में उन्होंने अपने बयानों और मेल मुलाकातों से भाजपा को ही असहज करके रखा हुआ था। अब चुनाव की नामांकन प्रक्रिया शुरु होने से चंद घण्टे पहले उनकी कांग्रेस में वापसी की प्रबल संभावना को देखते हुए आखिरकार भाजपा को आखिरकार उनसे अपने रिश्ते फिर से परिभाषित करने पड़ गए हैं।
इसी क्रम में सीएम पुष्कर सिंह धामी को उन्हें सरकार से बर्खास्त करने के साथ ही पार्टी ने भी उन्हें निलंबित कर दिया है। जबकि अब तक हर बार पार्टी उनकी मनोव्वल करती आ रही थी। हरक के तेवरों के आगे नरम पड़ती पार्टी के रवैये से भाजपा का मूल कैडर भी हैरान था, इस कारण पार्टी ने अब तकरीबन बेअसर हो चुकी इस कार्यवाही से अपने कैडर की भावनाओं पर मरहम लगाने का प्रयास किया है।
1991 पौड़ी से भाजपा के टिकट पर विधायक निर्वाचित
1991 कल्याण सिंह सरकार में सबसे युवा मंत्री बने
1993 में फिर पौडी सीट से निर्वाचित हुए
1995 विवादों के बीच भाजपा का साथ छोड़ा
1997 मायावती के नेतृत्व वाली बसपा में शामिल
1997 यूपी खादी ग्रामोद्योग में उपाध्यक्ष बने
2002 कांग्रेस से लैंसडाउन के विधायक बन
2002 तिवारी सरकार में कैबिनेट मंत्री बने
2003 जेनी प्रकरण में इस्ती़फा देना पड़ा
2007 फिर से लैंसडाउन के विधायक बने
2007 में कांग्रेस से नेता विपक्ष बनाए गए
2012 रुद्रप्रयाग से विधायक निर्वाचित हुए
2016 कांग्रेस से इस्तीफा दिया, भाजपा में वापसी
2017 भाजपा से कोटद्वार से विधायक बने
2017 भाजपा सरकार में फिर मंत्री बनाए गए
2022 भाजपा सरकार से बर्खास्त किए गए
हरक सिंह रावत के निष्कासन की ये हैं प्रमुख वजह:
भाजपा के अनुशासन की बार बार मखौल उड़ा रहे थे हरक
कैबिनेट मंत्री डॉ हरक सिंह रावत पिछले पाँच सालों से बार बार भारतीय जनता पार्टी के अनुशासन की मखौल उड़ा रहे थे। यही कारण रहा कि अब कांग्रेस में जाने की चर्चाओं के बीच भाजपा को उनके खिलाफ सख्त कदम उठाने को मजबूर होना पड़ा। दरअसल डॉ हरक सिंह रावत पिछले पांच सालों में कई बार पार्टी के लिए असहज स्थिति पैदा कर चुके थे। डॉ हरक सिंह रावत को लेकर भाजपा के ग्रास रुट कार्यकर्ताओं में पहले से ही नाराजगी थी। उनके साथ ही कॉंग्रेस से आये नेताओ को पार्टी में ज्यादा ही तवज्जो दिए जाने से पार्टी में अंदरखाने खासी नाराजगी थी।
आम कार्यकार्ता बाहर से आए नेताओं को कभी भी तवज्जो नहीं चाहते थे। इसके बावजूद डॉ हरक सिंह रावत और उनके सहयोगी पार्टी को पांच सालों तक चलाते रहे। भाजपा नेतृत्व ने हर सम्भव कोशिश की की हरक सिंह रावत को पार्टी से जोड़ा रखा जाए लेकिन अब पानी सर से ऊपर होने और उनके कांग्रेस में शामिल होने के निर्णय के बाद पार्टी को उनके खिलाफ कदम उठाना पड़ा।
कैबिनेट छोड़ इस्तीफा देकर निकल गए थे..
डॉ हरक सिंह रावत कुछ दिन पूर्व ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आयोजित हो रही कैबिनेट की बैठक छोड़ निकल गए थे। उनकी नाराजगी का कारण उस समय कोटद्वार मेडिकल कॉलेज का प्रस्ताव न आना था लेकिन जानकारों का कहना है कि हरक उस वक्त भी लैंसडाउन सीट से अपनी बहू के लिए टिकट की मांग कर रहे थे। हरक की नाराजगी की वजह से भाजपा में हडकंप मच गया था और 24 घंटे तक हरक को मानाने के प्रयास किए जाते रहे। मुख्यमंत्री और हरक के बीच वार्ता के बाद उस मामले का अंत हो पाया था।
बहू के लिए टिकट मांग दिखा रहे थे बागी तेवर..
अपने साथ लैंसडोन से बहू अनुकृति गुसाईं के लिए टिकट की मांग को लेकर कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत लगातार बागी तेवर अपनाए हुए थे। भाजपा कोर कमेटी की बैठक में पहुंचने की बजाय दिल्ली के चक्कर काट रहे थे। पार्टी पर लगातार दबाव बनाए हुए थे। हरक सिंह रावत हमेशा दबाव की राजनीति के लिए जाने जाते रहे हैं।वह भाजपा पर लगातार हर बार किसी न किसी चीज के लिए दबाव बनाए हुए थे। पहले उन्होंने कोटद्वार मेडिकल कालेज के नाम पर कैबिनेट मंत्री पद से इस्तीफा देने की धमकी देकी र भाजपा को असहज किया।
हालांकि उस दौरान हरक को मना लिया गया। मेडिकल कालेज को मंजूरी देने के साथ 25 करोड़ की स्वीकृति भी दी गई। इसके बाद भी हरक पार्टी पर दबाव बनाए हुए थे। इस बार दबाव अपने लिए केदारनाथ सीट और बहू अनुकृति गुसाईं के लिए लैंसडोन सीट का बनाया जा रहा था। भाजपा में बात न बनती देख, वो कांग्रेस में बहू के लिए विकल्प तलाशने लगे। उनकी यही तलाश उन पर भारी पड़ी।
भाजपा का कड़ा संदेश..
भाजपा के इस फैसले के अनुशासन के लिहाज से कड़ा संदेश माना जा रहा है। पिछले काफी समय से हरक बगावती तेवर अपनाए हुए थे। पिछले दिनों कैबिनेट बैठक में इस्तीफे की धमकी दे चुके रावत लगातार कांग्रेस नेताओं के संपर्क में भी थे। हरक के आगे हर बार घुटने टेकने से खुद भाजपा के भीतर पसंद नहीं किया जा रहा था। हरक को बर्खास्त कर भाजपा ने साफ कर दिया है कि अब वो किसी दबाव में आने वाली नहीं है।
पूर्व सीएम हरीश रावत खुद चुनाव लड़ेंगे या लड़ाएंगे, बड़ा सवाल..
उत्तराखंड : कांग्रेस विधानसभा चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों को तय करने के अंतिम दौर में आ चुकी है। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही कांग्रेस अपनी पहली लिस्ट जारी कर देगी। प्रत्याशियों के चयन के बीच आज भी सबसे बड़ा सवाल यही है कि कांग्रेस के चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष पूर्व सीएम हरीश रावत खुद भी चुनाव लड़ेंगे या फिर चुनाव लड़वाएंगे..
उत्तराखंड में बीते कई महीने से न केवल कांग्रेस बल्कि भाजपा समेत बाकी दल भी इस सवाल का जवाब जानने को बेकरार हैं। रावत हर बार इस सवाल को बेहद सफाई से टाल जाते हैं। रावत शुरू से कहते आ रहे हैं कि उनका चुनाव लड़ना या न लड़ना हाईकमान और प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ही तय करेंगे। वो जहां से कहेंगे, मैं चुनाव लडने के लिए मैदान में उतर जाऊंगा।
रावत के पत्ते न खोलने के पीछे अहम वजह भी हैं। पहला तर्क यह दिया जा रहा है कि रावत के समर्थक उनके लिए ऐसी सीट तलाश रहे हैं जो अपेक्षाकृत सरल हो और उसके साथ ही उसका प्रभाव आसपास की अन्य सीटों पर भी पड़े। इसमें फोकस मैदान के बजाए पहाड़ की सीट पर ही ज्यादा है।
चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष होने के नाते रावत को प्रदेशभर में पार्टी के लिए प्रचार भी संभालना है। ऐसे में उनकी अपनी सीट पर असर नहीं पड़ना चाहिए। इससे भविष्य में कांग्रेस के सत्ता में आने की स्थिति में आगे रणनीतिक रूप से फायदेमंद होगा। हालांकि दूसरा तर्क यह भी कि फिलहाल रावत चुनाव लड़ाने पर पूरी ताकत लगाएं। बाद में जरूरत पड़ने पर वो अपने सीट भी खाली करा सकते हैं।
रावत जी प्रदेश के सबसे सीनियर नेता है। 10 से ज्यादा सीटों पर पार्टी नेताओं ने उन्हें चुनाव लड़ने के लिए आमंत्रित किया है। रावत चुनाव लड़ेंगे और कहां से लड़ेंगे, यह पार्टी का रणनीतिक फैसला है। समय आने पर तस्वीर साफ हो जाएगी।
