उत्तराखंड

दल-बदल करने वाले नेताओं को टिकट देने पर किया बड़ा एलान,यशपाल आर्य का भी विरोध..

दल-बदल करने वाले नेताओं को टिकट देने पर किया बड़ा एलान,यशपाल आर्य का भी विरोध..

 

उत्तराखंड: किसान, राजनैतिक और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों की बैठक में दल-बदल करने वाले और बाहरी लोगों का विरोध करने का प्रस्ताव पारित किया गया। इस दौरान पूर्व कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य का क्षेत्र में आने पर कड़ा विरोध करने का निर्णय लिया गया। चीनी मिल अतिथि गृह में आयोजित बैठक में पूर्व कैबिनेट मंत्री आर्य पर दल-बदल करने पर कड़ा विरोध करने का निर्णय लिया गया। पूर्व जिला पंचायत सदस्य कुलविंदर सिंह किंदा, जिला पंचायत सदस्य अजीत पाल जाट, जनजाति नेता हीरा सिंह का कहना हैं कि यशपाल आर्य अपने हित के लिए जब चाहे दल-बदल कर लेते हैं। कहा कि जो भी पार्टी किसी बाहरी व्यक्ति को अपना प्रत्याशी बनाएगी, उस पार्टी का विरोध किया जाएगा।

बैठक में सहमति पर बार-बार दल-बदल करने वाले यशपाल आर्य को न वोट देने और न ही कोई सहयोग करने, दल-बदलू नेताओं का बाजपुर में विरोध करने, उन्हें प्रोत्साहित करने वाले स्थानीय नेताओं का बहिष्कार करने, कोई भी पार्टी या दल किसी बाहरी व्यक्ति को बाजपुर विधानसभा में प्रत्याशी बनाता है तो उस दल का विरोध करने, बाजपुर बचाओ संघर्ष समिति बनाने सहित छह प्रस्ताव पारित किए गए।

इधर, कांग्रेस नगराध्यक्ष राजेंद्र बेदी का कहना हैं कि बैठक में जो निर्णय लिए गए हैं उन्हें पार्टी के उच्च पदाधिकारियों के समक्ष रखा जाएगा। भाजपा में रहते आर्य बीस गांव की भूमि प्रकरण और किसान आंदोलन में चुप्पी साधे रहे। इसलिए विरोध स्वाभाविक है।

कांग्रेस गैरसैंण को ही बनाएंगे राजधानी- हरीश रावत

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का कहना हैं कि राजधानी स्थायी या अस्थायी नहीं होती है। राजधानी सिर्फ राजधानी ही होती है। कांग्रेस सत्ता में आयी तो गैरसैंण को ही राजधानी बनाया जाएगा। गौरापड़ाव में सांकेतिक उपवास के बाद पत्रकारों से बातचीत में हरीश रावत ने कहा कि भाजपा सरकार ने गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी तो घोषित किया, लेकिन वहां एक पत्थर तक आज तक नहीं लगा सकी है।

21 साल में उत्तराखंड को स्थायी राजधानी नहीं मिल सकी है। चुनाव की तैयारी और एजेंडे पर पूछे गए सवाल पर हरीश रावत ने कहा कि जनता बेतहाशा महंगाई से परेशान हैं। प्रदेश में बेरोजगारों की फौज खड़ी हो गई है। बिजली, पानी, सड़कों का बुरा हाल है। इन सभी के लिए कांग्रेस शुरू से संघर्ष कर रही है। चुनाव के लिए इससे बड़ा और क्या मुद्दा हो सकता है। कांग्रेस महंगाई और बेरोजगारी को मुद्दा बनाएगी।

 

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