24 घंटे में उत्तराखंड में मिले 505 नए कोरोना संक्रमित..
उत्तराखंड: प्रदेश में पिछले 24 घंटे में 505 नए संक्रमित मिले हैं। वहीं एक भी संक्रमित की मौत नहीं हुई है। प्रदेश में अब तक 346468 लोग संक्रमित हो चुके हैं। आज 119 लोग ठीक हुए हैं। राज्य में अब एक्टिव केस 1000 हो गए हैं। आपको बता दे कि बुधवार को देहरादून जिले में 253 लोग संक्रमण की चपेट में आए हैं। हरिद्वार में 64, नैनीताल में 55, पौड़ी में 60, टिहरी, अल्मोड़ा व चमोली में पांच, बागेश्वर में नौ, चंपावत में तीन, ऊधमसिंह नगर में 37, पिथौरागढ़ में छह, रुद्रप्रयाग में एक, उत्तरकाशी जिले में दो संक्रमित मिले हैं।
बता दे कि राजधानी देहरादून समेत जिले भर में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए जिलाधिकारी ने बिना मास्क के घूमने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के आदेश जारी किए हैं। जिलाधिकारी डॉ. आर राजेश कुमार ने पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने अपने क्षेत्रों में सघन जांच अभियान चलाएं और ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें जो बिना मास्क के सड़कों पर घूम रहे हैं।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों से कहा हैं कि भीड़-भाड़ भरे बाजारों और सार्वजनिक स्थानों में भी सघन जांच की जाए और जो भी लोग बिना मास्क के घूम रहे हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। इसके लिए जिलाधिकारी ने सख्त निर्देश के आदेश दिए है कोरोना गाइडलाइन का कड़ाई से पालन कराया जाए। सोशल डिस्टेंसिंग समेत कोरोना गाइडलाइन के प्रावधानों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई करें। यदि कोई व्यक्ति बिना मास्क के घूमता पाया गया उसके खिलाफ मौके पर ही कार्रवाई की जाएगी और निर्धारित जुर्माना वसूला जाएगा।
उत्तराखंड में पीआरडी जवानों का सचिवालय कूच आज..
उत्तराखंड: विभिन्न मांगों को लेकर बीते लंबे समय से धरने पर बैठे प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) जवान बुधवार यानि आज सचिवालय कूच करेंगे। मंगलवार को पीआरडी जवानों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ कैंडल मार्च निकाल प्रदर्शन किया। जबकि बुधवार को पीआरडी जवानों ने सचिवालय कूच करने का फैसला लिया है। मंगलवार को गांधी पार्क से कैंडल मार्च निकालते हुए पीआरडी जवान घंटाघर पहुंचे और परेड ग्राउंड से होते हुए गांधी पार्क पर कैंडल मार्च संपन्न हुआ।
आपको बता दे कि पीआरडी जवानोंका कहना हैं कि वह अपनी जायज मांगों को लेकर लंबे समय से धरना प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी मांगों को अनदेखा करने का काम कर रही है। पीआरडी जवानों ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पीआरडी जवानों को साल के 300 दिन रोजगार देने की घोषणा की थी।
लेकिन अभी तक उसका भी शासनादेश जारी नहीं किया गया है। जबकि अन्य मांगों के संबंध में भी सरकार की ओर से अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। जिससे पीआरडी जवानों में भारी रोष है और इसी के चलते पीआरडी जवानों ने पांच जनवरी यानि आज सचिवालय कूच करने का फैसला लिया है।
भारत बॉयोटेक की नैसल वैक्सीन बूस्टर डोज के रूप में दी जाएगी..
देश-विदेश: कोरोना महामारी की तीसरी लहर व ओमिक्रॉन के बढ़ते असर के बीच इनसे निपटने के इंतजाम भी तेज हो रहे हैं। ड्रग कंट्रोलर जनरल आफ इंडिया (DCGI) की विशेषज्ञ समिति (SEC) ने भारत बॉयोटेक की इंट्रा नैसल (नाक के जरिए दी जाने वाली) वैक्सीन के तीसरे चरण के परीक्षण को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।
भारत बॉयोटेक अब अपनी इस नई कोरोना रोधी वैक्सीन का तीसरे चरण का अध्ययन व बूस्टर खुराक का परीक्षण करेगी। इससे संबंधित नतीजे पेश करने के बाद वैक्सीन को मंजूरी दी जाएगी। तीसरे चरण के परीक्षण के बाद इस नैसल वैक्सीन को कोरोना के बूस्टर डोज के तौर पर आपात इस्तेमाल की इजाजत मिल सकती है।
उत्तराखंड: प्रदेश के कैबिनेट मंत्री डॉ हरक सिंह रावत के आगामी विधानसभा चुनाव में केदारनाथ विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की चर्चाओं के बीच भाजपा में ही विरोध के स्वर मुखर होने लगे हैं। केदारनाथ विधानसभा क्षेत्र से स्थानीय भाजपा नेताओं को ही टिकट देने की मांग पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उठाई है।
विधानसभा चुनाव में बूथ मैनेजमेंट व चुनाव प्रबंधन को लेकर केदारनाथ विधानसभा की बैठक अगस्त्यमुनि में आयोजित की गई थी। बैठक में मुख्य वक्ता के तौर पर हिमाचल प्रदेश के खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष पुरुषोत्तम गुलेरिया उपस्थित थे। इसके अलावा जिलाध्यक्ष दिनेश उनियाल, पूर्व विधायक आशा नौटियाल, प्रदेश सरकार द्वारा भू – कानून में संशोधन के लिए गठित समिति के सदस्य अजेंद्र अजय, पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष शकुन्तला जंगवान, केदारनाथ विधान सभा प्रभारी वाचस्पति सेमवाल, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष चंडी प्रसाद भट्ट, पूर्व दर्जा धारी अशोक खत्री, महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष कुंवरी बर्तवाल, जिला महामंत्री अनूप सेमवाल, बीर सिंह बुड़ेरा, ममता नौटियाल, जयंती प्रसाद कुर्मंचली समेत अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी इस बैठक में उपस्थित थे।
बैठक में मुख्य वक्ता द्वारा जैसे ही कार्यकर्ताओं का परिचय लिया गया, उसी दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने बाहरी प्रत्याशी के केदारनाथ से चुनाव लड़ने की चर्चाओं पर आपत्ति जताते हुए स्थानीय कार्यकर्ताओं में से ही किसी को टिकेट देने की मांग रखी। इस पर बैठक में मौजूद अधिकांश पार्टी नेताओं ने ताली बजा कर समर्थन किया।
उल्लेखनीय है कि कैबिनेट मंत्री डॉ हरक सिंह रावत की कोटद्वार के अलावा डोईवाला और यमकेश्वर सीट पर दावेदारी की चर्चाएं काफी समय से गर्म हैं। मगर इस बीच अचानक से केदारनाथ विधानसभा क्षेत्र से हरक सिंह के चुनाव लड़ने की चर्चाओं ने जोर पकड़ा है। इन चर्चाओं के जोर पकड़ते ही केदारनाथ सीट से तैयारी कर रहे भाजपा नेताओं में खलबली मच गई है। पार्टी नेताओं में इस मुद्दे पर अब तक अंदर खाने सुगबुगाहट थी और विरोध के स्वर भी सुनाई दे रहे थे।
मगर बूथ प्रबन्धन को लेकर आयोजित बैठक में पार्टी नेताओं का मन का गुबार बाहर निकल ही गया। हालांकि, बैठक में हरक सिंह रावत का नाम नहीं लिया गया। मगर पार्टी नेताओं का इशारा उनकी ओर था।

बैठक में मौजूद भाजपा नेता अजेंद्र अजय से इस संबंध में प्रतिक्रिया पूछने पर उन्होंने कहा कि पार्टी फोरम पर अगर किसी कार्यकर्ता ने अपनी भावनाएं व्यक्त की है, तो इसमें कोई बुराई नहीं है। टिकट जिसको भी मिलेगा सभी कार्यकर्ता पार्टी प्रत्याशी को जिताने के लिए काम करेंगे।
आपको बताते चलें कि वर्तमान में केदारनाथ सीट से कांग्रेस के विधायक मनोज रावत हैं। 2017 के विधान सभा चुनाव में प्रचंड मोदी लहर के बावजूद भाजपा प्रत्याशी शैलारानी रावत चौथे स्थान पर रही थीं। वर्तमान में केदारनाथ सीट से भाजपा के दावेदारों में शैलारानी रावत के अलावा आशा नौटियाल, अजेंद्र अजय, चंडी प्रसाद भट्ट, दिनेश उनियाल, अशोक खत्री आदि प्रमुख हैं।
केदारनाथ सीट भाजपा के लिए ख़ास महत्व रखती है। इसका अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि केदारनाथ धाम का पुनर्निर्माण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल है। मोदी बतौर प्रधानमंत्री अब तक केदारनाथ की पांच बार यात्रा कर चुके हैं। मगर इतना सब कुछ होने के बावजूद यह सीट पिछले दस वर्षों से कांग्रेस के खाते में है। इसके लिए स्थानीय भाजपा नेता पार्टी प्रत्याशी के चयन में गलती को जिम्मेदार मानते हैं। बहरहाल, बाबा केदार की नगरी में आगामी विधानसभा चुनाव में किसको नेतृत्व करने का मौका मिलेगा, यह भविष्य ही बताएगा।
सूर्य नमस्कार का मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने किया विरोध..
देश-विदेश: ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने देश भर के सभी स्कूलों में एक सप्ताह तक चलने वाले योग सूर्य नमस्कार सत्र आयोजित करने के केंद्र सरकार के आदेश का विरोध किया है। मुस्लिम कानून बोर्ड का कहना है कि सूर्य नमस्कार सूर्य पूजा का एक रूप है और इस्लाम इसकी अनुमति नहीं देता है। केंद्र ने आजादी का अमृत महोत्सव के हिस्से के रूप में सूर्य नमस्कार पहल शुरू की है। 75 करोड़ की सूर्यनमस्कार परियोजना भी भारत की आजादी के 75 साल पूरे होने पर एक श्रद्धांजलि है।
आपको बता दे कि सूर्य नमस्कार का योग अभ्यास जिसका शाब्दिक अर्थ है ‘सूर्य नमस्कार’ 21 दिनों के लिए दिन में 13 बार किया जाता है। यह परियोजना 1 जनवरी को शुरू हुई और 20 फरवरी, 2022 तक चलेगी। आयुष मंत्रालय ने 3 जनवरी को सूचित किया कि 30 प्रतिभागी राज्यों, 21,814 भाग लेने वाले संस्थानों, 10,05,429 पंजीकृत छात्रों के साथ, सूर्य नमस्कार की संख्या पहले से ही 97 होने की उम्मीद है। ,25,560 और संख्या बढ़ रही है।
बोर्ड के महासचिव सैफुल्ला रहमानी का कहना हैं कि वर्तमान सरकार संविधान के सिद्धांतों से भटक रही है और बहुसंख्यक समुदाय की सोच और परंपरा को थोपने की कोशिश कर रही है। सचिव, भारत सरकार, शिक्षा मंत्रालय ने 75वें स्वतंत्रता दिवस पर 30 राज्यों में ‘सूर्य नमस्कार’ की एक परियोजना चलाने का निर्णय लिया है, जिसमें 30 हजार स्कूलों को शामिल किया जाएगा। बोर्ड ने सरकारी आदेश के खिलाफ कहा कि ‘सूर्य नमस्कार’ सूर्य की पूजा का एक रूप है, इस्लाम और देश के अन्य अल्पसंख्यक न तो सूर्य को देवता मानते हैं और न ही उसकी पूजा को सही मानते हैं। इसलिए सरकार का यह कर्तव्य है कि वह ऐसे निर्देशों को वापस ले और देश की धर्मनिरपेक्ष भावना का सम्मान करे।
देहरादून में रैली के बाद कोरोना संक्रमित हुए अरविंद केजरीवाल..
उत्तराखंड: दिल्ली के मुख्यमंत्री व आम आदमी पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल के कोरोना संक्रमित पाए जाने पर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। देहरादून स्थित बीजापुर राज्य अतिथि गृह के मुख्य व्यवस्था अधिकारी ने जिला अधिकारी को पत्र लिखा है। उल्लेखनीय है कि अरविंद केजरीवाल सोमवार को परेड ग्राउंड में चुनावी जनसभा को संबोधित करने से पहले बीजापुर गेस्ट हाउस में भी रुके थे।
देहरादून जिले के सीएमओ डॉ. मनोज उप्रेती का कहना हैं कि बीजापुर गेस्ट हाउस में ड्यूटी पर तैनात सभी स्टाफ का कोरोना टेस्ट किया जा रहा है। इसके साथ ही जो भी दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के संपर्क में आए हों उन्हें भी ट्रेस किया जाएगा। ऐसे लोगों को सलाह दी गई है कि वह खुद ही आइसोलेट हो जाएं। ताकि कोरोना के प्रसार को रोका जा सके।
लोगों को किया जा रहा ट्रेस..
जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. राजीव दीक्षित का कहना हैं कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के संपर्क में बीजापुर गेस्ट हाउस, परेड ग्राउंड कार्यक्रम स्थल, वहां मंच पर उनके नजदीक संपर्क में आए और जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर उनकी अगवानी करने के लिए कुछ लोगों के संपर्क में आने का पता लगा है। इन लोगों को ट्रेस किया जा रहा है और उनका कोरोना जांच के लिए सैंपल लिया जाएगा।
क्या बीजेपी देगी उत्तराखंड में कांग्रेस को बड़ा झटका?
उत्तराखंड: प्रदेश में चुनाव से पहले पार्टियों के बीच आने और जाने का सिलसिला लगातार जारी है। आने और जाने के इन सिलसिलों के बीच कुछ वक्त से एक खबर राजनीतिक हलकों में तैर रही थी। जो कि कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्य़ाय को लेकर थी। आपको बता दे कि काफी दिनों से चर्चाएं सामने आ रही थी कि किशोर उपाध्य़ाय बीजेपी का दामन थाम सकते हैं। बता दे कि इन बातों को बल तब मिला जब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष किशोर उपाध्याय बीजेपी के नेताओं के साथ रेसकोर्स स्थित बीजेपी के महामंत्री संगठन अजय कुमार के फ्लैट में दिखाई दिए।
किशोर उपाध्याय काफी देर तक यहां बैठे नजर आए। इस दौरान उनके साथ चुनाव प्रभारी प्रहलाद जोशी भी मौजूद रहे। जिसे देखते हुए चर्चाओं का दौर फिर से शुरू हो गया हैं। अब देखना यहां होगा कि क्या भारतीय जनता पार्टी उत्तराखंड में कांग्रेस को जल्द ही बड़ा झटका देगी ? सूत्रों का कहना हैं कि किशोर उपाध्याय लगातार बीजेपी आलाकमान के संपर्क में है। बताया जा रहा था कि कुछ ही वक्त में किशोर उपाध्याय बीजेपी का दामन थाम सकते हैं।
बीजेपी में जाने की खबरों के बीच किशोर उपाध्याय का बयान भी सामने आया है उनका कहना कि यह सब अफवाह है। वो वनाअधिकार आंदोलन के मुद्दों को लेकर सभी से मिल रहे हैं। किशोर उपाध्याय ने यह भी कहा कि विघ्न संतोषी ही इस मुलाकात को दूसरे रूप में ले रहे हैं। उनका कहना है कि मैंने पहले भी कहा है कि उन मुद्दों पर लड़ने या स्वीकार करने वालों के साथ वार्तालाप में मुझे कोई हर्ज नहीं लगता इसलिए अफवाहों पर ध्यान ना दें।
आज हैं सावित्रीबाई फुले की जयंती..
देश-विदेश: आज देश की पहली महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की जयंती मनाई जा रही हैं। महाराष्ट्र के पुणे में एक दलित परिवार में जन्मीं सावित्रीबाई के पिता का नाम खण्डोजी नेवसे और माता का नाम लक्ष्मीबाई था। उनका जन्म 03 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र के सतारा जिले में स्थित नायगांव नामक छोटे से गांव में हुआ था। वह भारत के पहले बालिका विद्यालय की पहली प्रिंसिपल और पहले किसान स्कूल की संस्थापिका थीं।
आपको बता दे कि 1840 में मात्र 9 साल की उम्र में सावित्रीबाई का विवाह 13 साल के ज्योतिराव फुले के साथ हुआ। उस समय वो पूरी तरह अनपढ़ थीं और पति मात्र तीसरी कक्षा तक ही पढ़े थे। पढ़ाई करने का जो सपना सावित्रीबाई ने देखा था विवाह के बाद भी उन्होंने उस पर रोक नहीं लगने दी। इनका संघर्ष कितना कठिन था, इसे इनके जीवन के एक किस्से से समझा जा सकता है।
एक दिन वो कमरे में अंग्रेजी की किताब के पन्ने पलट रही थीं, इस पर इनके पिता खण्डोजी की नजर पड़ी। यह देखते वो भड़क उठे और हाथों से किताब को छीनकर घर के बाहर फेंक दिया। उनका कहना था कि शिक्षा पर केवल उच्च जाति के पुरुषों का ही हक है। दलित और महिलाओं के लिए शिक्षा ग्रहण करना पाप है। यही वो पल था जब सावित्रीबाई ने प्रण लिया कि वो एक न एक दिन जरूर पढ़ना सीखेंगी। उनकी मेहनत रंग लाई। उन्होंने सिर्फ पढ़ना ही नहीं सीखा बल्कि न जाने कितनी लड़कियों को शिक्षित करके उनका भविष्य संवारा, लेकिन यह सफर भी उनके लिए आसान नहीं रहा।
1848 में की देश का सबसे पहले बालिका स्कूल की स्थापना..
बता दे कि वर्ष 1848 में महाराष्ट्र के पुणे में देश का सबसे पहले बालिका स्कूल की स्थापना सावित्रीबाई फुले ने की थी। सावित्रीबाई फुले इस स्कूल में केवल पढ़ाती ही नहीं थी बल्कि लड़कियां स्कूलों को ना छोड़े इसके लिए वह मदद भी प्रदान करती थी। सावित्रीबाई फुले को प्रथम शिक्षिका होने का श्रेय भी जाता है।
10 मार्च1897 को इस दुनिया को कहा अलविदा.
महाराष्ट्र में प्लेग फैल जाने के उपरांत उन्होंने पुणे में अपने पुत्र के साथ मिलकर 1897 में एक अस्पताल खोला जिससे प्लेग पीड़ितों का इलाज किया जा सके। हालांकि मरीजों की सेवा करते हुए वह स्वयं प्लेग से पीड़ित हो गई और 10 मार्च1897 को इस दुनिया को सदा के लिए अलविदा कह दिया।
एनसीबी से हटाए गए समीर वानखेड़े, डीआरआई विभाग में फिर से मिली जिम्मेदारी..
देश-विदेश: एनसीबी अधिकारी समीर वानखेड़े को एक बहुत बड़ा झटका लगा है। आपको बता दे कि विभाग में बने रहने के लिए उन्हें आगे एक्सटेंशन नहीं मिला है यानी कि अब एनसीबी से उनकी विदाई हो गई है। बता दे कि वानखेड़े का एनसीबी में 4 महीने का एक्सटेंशन 31 दिसंबर 2021 को पूरा हो चुका है।
समीर वानखेड़े आईआरएस अधिकारी हैं जो मुंबई के ड्रग्स केसों की जांच के चलते चर्चा में आए थे। इससे भी अधिक सुर्खियों में वे तब आए थे जब उन्होंने बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को गिरफ्तार किया था। इससे पहले कयास लगाया जा रहा था कि केंद्र सरकार उन्हें फिर से एक्सटेंशन दे सकती है लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
एक बार फिर से उन्हें राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) विभाग में भेज दिया गया है। आपको बता दें कि समीर वानखेड़े इसी विभाग में थे। डीआरआई विभाग से ही उन्हें मुंबई एनसीबी में लाकर जोनल डायरेक्टर बनाया गया था। अब उन्हें फिर से डीआरआई में भेज दिया गया है।
कौन हैं समीर वानखेड़े..
समीर वानखेड़े 2008 बैच के राजस्व सेवा अधिकारी हैं और महाराष्ट्र के रहने वाले हैं। सेवा ज्वाइन करने के बाद उन्हें सबसे पहली मुंबई के छत्रपति शिवाजी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर डिप्टी कस्टम कमिश्नर की जिम्मेदारी दी गई। यहां उन्होंने जबरदस्त काम किया जिसकी वजह से उन्हें बाद में आंध्र प्रदेश और फिर दिल्ली भी भेजा गया। बताया जाता है कि वे ड्रग्स से जुड़े मामलों को पकड़ने में माहिर हैं।
दिल्ली के बाद एक बार फिर उन्हें मुंबई में बड़ी जिम्मेदारी देकर भेजी गई। यहां उन्हें एनसीबी का जोनल डायरेक्टर बनाया गया। कार्यभार संभालते ही उन्होंने सुशांत सिंह राजपूत की मौत मामले में ड्रग्स केस की जांच शुरू की थी। इस दौरान अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती और उनके भाई से कड़ी पूछताछ की गई थी। समीर वानखेड़े के नेतृत्व में ही पिछले दो सालों के भीतर करीब 17 हजार करोड़ रुपये के नशे और ड्रग्स रैकेट का पर्दाफाश किया गया।
उत्तराखंड में शुरू हुआ किशोरों का टीकाकरण ,आधार कार्ड या स्कूल आई कार्ड दिखाना होगा.. Nous vous offrons les frais de livraison à partir https://asgg.fr/ de 49 euros d’achat.
उत्तराखंड: प्रदेश में 15 से 18 साल तक के किशोरों का आज से कोविड टीकाकरण शुरू हो गया है। सीएम धामी ने देहरादून के रेसकोर्स स्थित सनातन धर्म इंटर कॉलेज बन्नू स्कूल से किशोरों के कोरोना टीकाकरण अभियान का शुभारंभ कर दिया हैं। सोमवार यानि आज से प्रदेश के इंटरमीडिएट स्कूलों में किशोरों को कोविड टीके की पहली डोज लगाई जा रही है। इसके अलावा पहले से चल रहे टीकाकरण बूथों पर किशोरों के लिए अलग से बूथ बना कर वैक्सीन लगाई जा रही है।
कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर की संभावना को देखते हुए किशोरों को वैक्सीन लगने से संक्रमण से सुरक्षा कवच मिलेगा। राज्य प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. कुलदीप मर्तोलिया का कहना हैं कि 15 से 18 साल तक के किशोरों का टीकाकरण करने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है। इंटरमीडिएट स्कूलों में किशोरों का टीकाकरण जाएगा। केंद्र सरकार ने 6.28 लाख किशोरों को टीके लगाने का लक्ष्य रखा है।
वही देश के इंटरमीडिएट स्कूलों के अलावा पहले से चल रहे टीकाकरण बूथों पर भी किशोरों को वैक्सीन की डोज लगाई जा रही है। केंद्र सरकार ने उत्तराखंड में 6.28 लाख किशोरों को कोविड वैक्सीन लगाने का लक्ष्य रखा है। किशोरों को कोवैक्सीन ही लगाई जा रही है। प्रदेश के पास वर्तमान में किशोरों की संख्या के हिसाब से पर्याप्त कोवैक्सीन टीके उपलब्ध हैं।
बता दे कि टीका लगवाने के लिए सभी किशोरों को पहचान पत्र के रूप में आधार कार्ड या स्कूल आई कार्ड दिखाना होगा। स्कूल आईकार्ड के साथ मोबाइल साथ में लाना अनिवार्य होगा। टीकाकरण से पूर्व ऑफलाइन और ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा है। टीका लगवाने के लिए cowin.gov.in पर ऑनलाइन पंजीकरण किया जा सकता है। साथ ही टीकाकरण केंद्र पर जाकर ऑफलाइन पंजीकरण भी करवाया जा सकता है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज उप्रेती ने अभिभावकों से अपील की हैं कि अपने 15 से 18 वर्ष आयु के बच्चों का टीकाकरण अवश्य करवाएं। इसके लिए जनपद के विद्यालयों में कोविड टीकाकरण के शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. दिनेश चौहान का कहना हैं कि जिले में सोमवार को किशोर टीकाकरण के लिए 145 सेशन आयोजित किए जा रहे हैं।
