मुख्यमंत्री बोले— सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय स्थिरता के लिए उत्तराखंड को बनाया जा रहा है मॉडल स्टेट
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को दून विश्वविद्यालय में इंडियन एसोसिएशन ऑफ सोशल साइंस इंस्टीट्यूशंस (IASSI) के 24वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वार्षिक अधिवेशन के विभिन्न सत्रों में सामाजिक कल्याण, अर्थशास्त्र, रोजगार, उद्योग, कृषि, तकनीकी, पर्यावरण और नगरीकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर देश-विदेश के प्रख्यात विद्वान सार्थक विचार-विमर्श करेंगे। यह चिंतन-मंथन सामाजिक नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन और जन-कल्याण के ठोस उपायों के लिए उपयोगी सिद्ध होगा।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मंत्र के साथ निरंतर प्रगति कर रहा है। जन-धन योजना, उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना और आयुष्मान भारत जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं से करोड़ों नागरिक लाभान्वित हुए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सौर मिशन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन, नमामि गंगे और प्लास्टिक मुक्त भारत जैसे अभियान पर्यावरण संरक्षण में अहम भूमिका निभा रहे हैं। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में राज्य सरकार सामाजिक न्याय और सतत विकास के लिए निरंतर कार्यरत है। वृद्धावस्था पेंशन में वृद्धि, पति-पत्नी दोनों को पेंशन की सुविधा और पेंशन योजनाओं में मासिक भुगतान जैसी पहलें इसी दिशा में हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए राज्य सरकार पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। राज्य में आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय स्थिरता बनाए रखते हुए एक सुरक्षित व न्यायपूर्ण व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। सरकार ने इकोनॉमी और इकोलॉजी के संतुलन के लिए त्रि-स्तंभीय एवं नौ-सूत्रीय नीति लागू की है।
उन्होंने कहा कि गरीबी उन्मूलन, खाद्य सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, शहरी विकास, वित्तीय समावेशन और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में लगातार प्रगति हो रही है। मुख्यमंत्री महिला उद्यमिता प्रोत्साहन योजना, सौर ऊर्जा क्रांति अभियान, स्मार्ट सिटी मिशन और शहरी आजीविका योजना के माध्यम से इन क्षेत्रों को सशक्त बनाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि नीति आयोग द्वारा सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में उत्तराखंड देश में प्रथम स्थान पर है। राज्य सरकार ने सामाजिक विकास को सशक्त बनाने के लिए टाटा ट्रस्ट, नैस्कॉम और वाधवानी फाउंडेशन के साथ महत्वपूर्ण समझौते किए हैं।
टाटा ट्रस्ट के सहयोग से जल प्रबंधन, पोषण, टेलीमेडिसिन, ग्रामीण आजीविका और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में कार्य हो रहा है, वहीं नैस्कॉम और वाधवानी फाउंडेशन के साथ एआई, डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा, पायथन, जनरेटिव एआई और कौशल विकास के क्षेत्र में युवाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन नवाचारों के माध्यम से उत्तराखंड को सस्टेनेबल डेवलपमेंट का मॉडल स्टेट बनाया जाएगा।
इस अवसर पर नीति आयोग के सदस्य प्रो. रमेश चंद, दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल, आईएएसएसआई अध्यक्ष एवं नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी, प्रो. आर.पी. ममगांई, प्रो. आई.सी. अवस्थी, प्रो. अलख शर्मा सहित अनेक विषय विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री धामी ने परिजनों को सौंपे चेक, कहा — कर्मचारियों के सम्मान और सुरक्षा के लिए सरकार प्रतिबद्ध
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को उपनल के माध्यम से सेवारत तीन कार्मिकों की सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु होने के उपरांत उनके आश्रितों को 50-50 लाख रुपये की सहायता राशि के चेक प्रदान किए। उपनल के माध्यम से कार्यरत विद्युत वितरण खंड जसपुर के बृजेश कुमार (जनवरी 2025), ब्रिडकुल देहरादून के तसलीम (नवंबर 2024) तथा विद्युत वितरण खंड हरिद्वार के संजीव कुमार (फरवरी 2025) की सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु हो गई थी।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा उपनल, सरकारी एवं अर्द्धसरकारी कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए बैंकों के साथ कॉर्पोरेट सैलरी पैकेज के तहत कई सुविधाएं और बीमा लाभ उपलब्ध कराए गए हैं। इस पहल के अंतर्गत कार्मिक की दुर्घटना में मृत्यु होने पर उनके परिजनों को सहायता राशि प्रदान की जा रही है। उन्होंने उपनल कर्मचारियों के लिए यह सुविधा उपलब्ध कराने हेतु पंजाब नेशनल बैंक का आभार भी व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी आर्थिक सहायता मानव जीवन की कमी को पूर्ण नहीं कर सकती, किंतु यह कठिन समय में परिवार को संबल अवश्य देती है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि कर्मचारियों को सुरक्षित एवं सम्मानजनक कार्य वातावरण के साथ कठिन परिस्थितियों में उनके परिवारों को हर संभव सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उत्तराखंड सरकार द्वारा अनेक नवाचार किए जा रहे हैं और कर्मचारियों के हितों में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव दीपेन्द्र चौधरी, अपर सचिव मनमोहन मैनाली, मेजर जनरल (से.नि.) शम्मी सबरवाल, उपनल के एमडी जे.एन.एस. बिष्ट, पंजाब नेशनल बैंक के जोनल हेड अनुपम, डिप्टी जनरल मैनेजर अभिनंदन तथा एजीएम अजीत कुमार उपाध्याय उपस्थित रहे।
139 दिन चली हेमकुंड साहिब की यात्रा, दो लाख 72 हजार श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
चमोली। हेमकुंड साहिब के कपाट आज दोपहर एक बजे शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। पिछले दिनों हुई बर्फबारी से क्षेत्र पूरी तरह बर्फ की चादर से ढक गया है।
इस साल हेमकुंड साहिब में अंतिम अरदास शुक्रवार को सम्पन्न हुई। कपाट बंद होने की प्रक्रिया सुबह 10 बजे सुखमणी साहिब के पाठ से शुरू हुई और दोपहर एक बजे गुरुद्वारा ट्रस्ट अध्यक्ष नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा की देखरेख में शीतकाल के लिए समाप्त हुई। कीर्तन और गुरुग्रंथ साहिब के सुशोभित होने के बाद श्रद्धालुओं ने इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनकर आशीर्वाद प्राप्त किया।
लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट भी दोपहर 12:31 बजे बंद कर दिए गए। यह मंदिर और हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा एक ही परिसर में स्थित हैं। इस साल हेमकुंड साहिब में दर्शन करने आए श्रद्धालुओं की संख्या दो लाख 72 हजार तक पहुंची।
इस वर्ष हेमकुंड साहिब की यात्रा 25 मई से शुरू हुई थी और 10 अक्टूबर को समाप्त हुई, यानी कुल 139 दिन चली।
मुख्य सचिव ने उद्योगों को बेहतर माहौल और त्वरित समाधान के लिए अधिकारियों को दिए निर्देश
देहरादून। राज्य सरकार ईएसआईसी अस्पताल खोलने के लिए मानकों में ढील देने की योजना बना रही है। प्रस्ताव जल्द ही क्षेत्रीय परिषद को भेजा जाएगा। मुख्य सचिव आनंदबर्द्धन ने उद्योगों को बेहतर माहौल देने और उनसे जुड़े मामलों के त्वरित निपटान के निर्देश दिए हैं।
मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य में उद्योगों को सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए शासन प्रतिबद्ध है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि उद्योगों और उद्यमियों से जुड़े मामलों पर चर्चा के लिए राज्य एवं जिला स्तरीय उद्योग मित्र समितियों की बैठकें नियमित रूप से आयोजित की जाएँ। तात्कालिक मामलों में तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
बैठक में उद्यमियों और उद्योग संगठनों के प्रतिनिधियों की समस्याओं को सुना गया और कई महत्वपूर्ण प्रकरणों का त्वरित समाधान करने के निर्देश दिए गए। सचिव वित्त दिलीप जावलकर की उपस्थिति में जीएसटी से जुड़ी नई व्यवस्थाओं पर भी चर्चा की गई और समस्याओं का समाधान सुझाया गया।
इसके अलावा, ईएसआईसी अस्पताल खोलने के मानकों में ढील देने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। देहरादून में आवश्यक भूमि की व्यवस्था करने और उद्योगों के लिए बिजली, लॉजिस्टिक व अन्य सुविधाओं को सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए। बैठक में गृह, उद्योग और अन्य संबंधित विभागों के सचिव तथा उद्योग प्रतिनिधि मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने 8,589 करोड़ की जल निकासी योजना और बाह्य सहायतित परियोजनाओं की स्वीकृति की मांग की
देहरादून/नई दिल्ली। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से भेंट कर उत्तराखंड से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की। मुख्यमंत्री ने वित्त मंत्री को जीएसटी सुधारों के सफल क्रियान्वयन के लिए शुभकामनाएँ देते हुए राज्य को मिले सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
उन्होंने बताया कि राज्य के शहरी क्षेत्रों में बढ़ती जनसंख्या के कारण नगरीय जल निकासी प्रणाली के सुधार और अपग्रेडेशन की आवश्यकता है। राज्य के 10 सर्वाधिक वर्षा प्रभावित जिलों के लिए स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम के उन्नयन की डीपीआर तैयार की गई है, जिसकी अनुमानित लागत 8,589.47 करोड़ रुपये है।
मुख्यमंत्री ने बाह्य सहायतित परियोजनाओं (EAPs) की शीघ्र स्वीकृति का भी अनुरोध किया। इनमें उत्तराखंड क्लाइमेट रिज़िलीअन्स डेवलपमेंट प्रोजेक्ट, सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन सुदृढ़ीकरण परियोजना (850 करोड़) और जलापूर्ति सुधार परियोजना (800 करोड़) शामिल हैं।
उन्होंने वर्ष 2023-24 से 2025-26 के लिए 4 अन्य प्रमुख परियोजनाओं—2000 करोड़ की जल एवं स्वच्छता नगरीय अवसंरचना विकास परियोजना, 424 करोड़ की डीआरआईपी-III, 3638 करोड़ की उत्तराखंड क्लाइमेट रेसिलिएंट पॉवर ट्रांसमिशन परियोजना और 1566 करोड़ की पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन सुधार परियोजना—की शीघ्र स्वीकृति देने का अनुरोध किया।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मुख्यमंत्री को हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।
मुख्यमंत्री धामी ननूरखेड़ा से करेंगे राज्यव्यापी वर्चुअल क्लास नेटवर्क का शुभारंभ
देहरादून। सूबे के 840 राजकीय विद्यालय वर्चुअल क्लास नेटवर्क से जुड़ेंगे। जिससे इन विद्यालयों में हाईब्रिड मोड़ के तहत वर्चुअल और स्मार्ट क्लास दोनों का संचालन किया जायेगा। इस अभिनव पहल का शुभारंभ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आगामी 11 अक्टूबर (शनिवार) को राजीव गांधी नवोदय विद्यालय, ननूरखेड़ा स्थित आईसीटी लैब से करेंगे। शुभारम्भ कार्यक्रम की पुख्ता तैयारियों के लिये विभागीय अधिकारियों को जरूरी निर्देश दे दिये गये हैं।
सूबे के विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि राज्य सरकार शिक्षा के सुधार के लिए कई कदम उठा रही है। स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिये जहां शिक्षा का डिजिटलीकरण किया जा रहा है वहीं दूसरी ओर शिक्षकों की कमी दूर की जा रही है। इसके अलावा स्कूलों को साधन सम्पन्न भी बनाया जा रहा है। डॉ. रावत ने बताया कि प्रदेश के नौनिहालों को उच्च स्तरीय व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुहैया करने के लिये सरकार ने डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। जिसके तहत राज्य के 840 राजकीय विद्यालयों को वर्चुअल क्लास नेटवर्क से जोड़ा गया है। जिसका शुभारंभ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आगामी 11 अक्टूबर (शनिवार) को राजीव गांधी नवोदय विद्यालय, ननूरखेड़ा स्थित आईसीटी लैब से करेंगे।
डॉ. रावत ने बताया कि योजना के शुभारम्भ अवसर पर सभी जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति विद्यालयों में सुनिश्चित करने के लिये विभागीय अधिकारियों को जरूरी निर्देश दे दिये गये हैं। उन्होंने बताया कि इस अवसर स्थानीय सांसद, विधायक, जिला पंचायत अध्यक्ष, नगर निगमों के मेयर व निकायों के अध्यक्ष सहित अन्य क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्र के विद्यालयों में अनिवार्य रूप से प्रतिभाग करेंगे। डॉ. रावत ने बताया कि इस अभिनव पहल के तहत इन विद्यालयों में हाइब्रिड मोड में शिक्षण व्यवस्था लागू की गई है, जिसके तहत वर्चुअल और स्मार्ट क्लास दोनों माध्यमों में कक्षाओं का संचालन किया जायेगा। उन्होंने बताया कि विद्यालयों में डिजिटल प्रसारण हेतु भारत सरकार की आईसीटी योजना के तहत राजीव गांधी नवोदय विद्यालय रायपुर में दो केन्द्रीय स्टूडियो का निर्माण किया गया है। जिनके माध्यम से कक्षाओं का सजीव प्रसारण किया जायेगा। इस दौरान छात्र-शिक्षक के मध्य दो तरफा संवाद भी हो सकेगा। डॉ. रावत ने बताया कि विद्यालयों के वर्चुअल क्लास नेटवर्क से जुड़ने से सीमांत एवं अन्य क्षेत्रों के विद्यार्थियों तक भी आधुनिक शिक्षण सुविधाएं पहुंच सकेंगी और उनकी सीखने की क्षमता में सुधार होगा। उन्होंने बताया कि वर्चुअल क्लास नेटवर्क का परीक्षण कर लिया गया है, अब सभी विद्यालयों में कक्षा का सजीव प्रसारण हो सकेगा, साथ ही विभाग द्वारा शुरू किये गये ‘शिक्षा की बात’ कार्यक्रम का प्रसारण भी इसी के माध्यम से विद्यालयों में किया जाएगा।
बॉक्स
विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि प्रत्येक जनपद में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिये विद्यालयों को वर्चुअल क्लास नेटवर्क से जोड़ा गया है। जिसमें अल्मोड़ा जनपद के 71 विद्यालय, बागेश्वर 29, चमोली 68, चम्पावत 54, देहरादून, 55, हरिद्वार 53, नैनीताल 64, पौड़ी 103, पिथौरागढ़ 80, रूद्रप्रयाग 53, टिहरी 120, ऊधमसिंह नगर 51 तथा उत्तरकाशी में 39 विद्यालयों को वर्चुअल क्लास नेटवर्क से जोड़ा गया है।
बयान-
प्रदेशभर के 840 विद्यालयों को वर्चुअल क्लास नेटवर्क से जोड़ दिया गया है। यह पहल न केवल नवाचारपूर्ण है, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को प्रत्येक नौनिहाल तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। शिक्षा की समान पहुंच सुनिश्चित करने की यह पहल निश्चित रूप से प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी। – डॉ. धन सिंह रावत, विद्यालयी शिक्षा मंत्री, उत्तराखंड।
स्वीकृत मानचित्र के विपरीत निर्माण कार्य पर हुई ध्वस्ती करण की कार्रवाई
देहरादून को सुव्यवस्थित और योजनाबद्ध स्वरूप में विकसित करना एमडीडीए की शीर्ष प्राथमिकता-बंशीधर तिवारी
सचिव एमडीडीए मोहन सिंह बर्निया की सख्त चेतावनी, नियम तोड़ने वालों पर होगी तत्काल सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई
देहरादून। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने बिना स्वीकृति किए जा रहे निर्माणों पर एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी के सख्त निर्देशों पर प्राधिकरण की टीम ने कांवली रोड क्षेत्र में चल रहे अवैध व्यवसायिक निर्माण को ध्वस्त कर दिया। जानकारी के अनुसार संयुक्त सचिव गौरच चटवाल के आदेशों पर श्याम सुन्दर वैश्य द्वारा स्वीकृत मानचित्र के विपरीत निर्माण कार्य किया जा रहा था। नियमानुसार कार्रवाई करते हुए एमडीडीए की टीम ने मौके पर पहुंचकर अवैध हिस्से को ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान सहायक अभियंता अभिषेक भारद्वाज, अवर अभियंता अभिजीत थलवाल, सुपरवाइजर सहित पुलिस बल भी मौजूद रहा। एमडीडीए की यह कार्रवाई शहर को योजनाबद्ध और सुव्यवस्थित ढंग से विकसित करने की दिशा में एक सख्त संदेश मानी जा रही है। प्राधिकरण ने साफ कर दिया है कि बिना स्वीकृति या स्वीकृत मानचित्र के विपरीत निर्माण करने वालों पर अब बख्शिश नहीं की जाएगी।
नियम तोड़ने वालों को नहीं मिलेगी राहत– मोहन सिंह बर्निया
सचिव एमडीडीए मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि एमडीडीए का मुख्य उद्देश्य देहरादून को सुंदर, स्वच्छ और योजनाबद्ध स्वरूप में विकसित करना है। इसके लिए हर नागरिक को निर्माण से पहले नियमों का पालन करना आवश्यक है। उन्होंने कहा बिना स्वीकृति निर्माण किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्राधिकरण नियमित निरीक्षण अभियान चला रहा है, और जहां भी नियमों का उल्लंघन पाया जा रहा है, वहां तत्काल सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा रही है।
शहर की सुंदरता और सुव्यवस्था से समझौता नहीं– बंशीधर तिवारी
उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी ने कहा कि प्राधिकरण की प्राथमिकता शहर की सुंदरता, सुव्यवस्था और नियोजन को सुरक्षित रखना है। उन्होंने कहा कोई भी व्यक्ति यदि बिना स्वीकृति निर्माण करता है या भूमि काटकर बेचता है, तो उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि देहरादून को स्मार्ट और सुव्यवस्थित सिटी के रूप में विकसित करने के लिए नियमों का सख्ती से पालन जरूरी है। जनता से अपील है कि किसी भी निर्माण से पहले प्राधिकरण से नक्शा स्वीकृत करवाएं, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की कार्रवाई से बचा जा सके।
एमडीडीए का संदेश स्पष्ट है– अवैध निर्माण पर अब नहीं होगी कोई रियायत, शहर का विकास नियम और व्यवस्था के दायरे में ही होगा।
नवंबर तक काठबंगला प्रोजेक्ट के आवासों का आबंटन पूरा करने के आदेश
देहरादून। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सचिवालय में प्रदेश में झुग्गी बस्तियों के पुनर्विकास से संबंधित बैठक ली। उन्होंने अधिकारियों को झुग्गियों का पुनः सर्वे कराए जाने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने कहा कि वर्ष 2011-12 में किए गए सर्वे में चिन्हित श्रेणी-1 एवं श्रेणी-2 के पात्र लोगों का स्थानीय निकायों और जिलाधिकारियों की सहायता से अभियान चलाकर विनियमन किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि झुग्गियों के पुनर्विकास के लिए गठित जिला स्तरीय समितियों की बैठकें आयोजित की जाएं और इसके उपरांत राज्य स्तरीय बैठक का भी शीघ्र आयोजन किया जाए।
मुख्य सचिव ने काठबंगला प्रोजेक्ट में निर्मित आवासों का आबंटन नवंबर 2025 तक पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने सचिव शहरी विकास को इसकी निरंतर मॉनिटरिंग करने को कहा। साथ ही निर्देश दिए कि भूमि चिन्हीकरण, आबंटन के नियम, आकलन, पात्रता और डीपीआर तैयार करने हेतु सचिव शहरी विकास, सचिव लोक निर्माण विभाग, एमडीडीए और नगर निगम संयुक्त बैठक कर आवश्यक निर्णय लें।
बैठक में सचिव नितेश कुमार झा, उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी, अपर सचिव गौरव कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
पूर्व डीजीपी प्रेमदत्त रतूड़ी द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों और दलीलों को कोर्ट ने किया खारिज
एसजीआरआर इंटर काॅलेज भोगपुर ही करेगा खेल मैदान का संचालन
कुछ असामाजिक तत्व भ्रम फैलाकर अभी भी मामले की गलत जानकारी कर रहे प्रसारित
देहरादून। एसजीआरआर इंटर कॉलेज भोगपुर की खेल भूमि से जुड़े लंबे समय से चल रहे विवाद में न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कॉलेज प्रबंधन के पक्ष में निर्णय दिया है। सिविल जज (जूनियर डिविजन) ऋषिकेश की अदालत ने पूर्व डीजीपी प्रेमदत्त रतूड़ी द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों और दलीलों को अस्वीकार करते हुए स्पष्ट कहा कि उक्त खेल मैदान (भूमि) का स्वामित्व और संचालन श्री गुरु राम राय इंटर कॉलेज भोगपुर के पास ही रहेगा। अदालत के इस निर्णय से विद्यालय के छात्रों, शिक्षकों और स्थानीय जनता में हर्ष का माहौल है।
गौरतलब है कि वर्ष 1950 में श्री गुरु राम राय दरबार साहिब द्वारा ग्रामीण एवं निर्धन छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के उद्देश्य से भोगपुर में यह विद्यालय स्थापित किया गया था। इस विद्यालय के लिए तत्कालीन समय में 11.5 बीघा भूमि प्रेमदत्त रतूड़ी के पूर्वजों ने दान दी थी, जिस पर वर्तमान में विद्यालय का खेल मैदान संचालित है। लगभग 75 वर्षों से यह मैदान छात्रों की खेलकूद एवं शैक्षणिक गतिविधियों का केंद्र रहा है।

विवाद उस समय गहराया जब पूर्व डीजीपी प्रेमदत्त रतूड़ी ने भू-माफियाओं के साथ मिलकर इस भूमि पर कब्जा करने का प्रयास किया। विद्यालय प्रबंधन और श्री दरबार साहिब की संगत ने इस कार्रवाई का कड़ा विरोध किया और मामले को न्यायालय में ले जाया गया। सुनवाई के दौरान एसजीआरआर प्रबंधन ने सभी वैध दस्तावेज अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए, जिनके आधार पर कोर्ट ने पाया कि पूर्व डीजीपी प्रेमदत्त रतूड़ी पक्ष के दावे निराधार हैं और खारिज करने योग्य हैं।
न्यायालय के इस निर्णय से यह स्थापित हो गया कि श्री गुरु राम राय इंटर कॉलेज भोगपुर की खेल भूमि पूर्णतः एसजीआरआर संस्था के अधिकार क्षेत्र में रहेगी। अदालत के फैसले के बाद स्कूल प्रबंधन ने कहा कि कुछ असामाजिक तत्व अब भी गलत सूचनाएं फैलाकर भ्रम उत्पन्न करने की कोशिश कर रहे हैं, इसलिए आमजन को सत्य तथ्यों पर भरोसा करना चाहिए। इस निर्णय ने न केवल शिक्षा संस्थान की प्रतिष्ठा को सुरक्षित रखा है, बल्कि समाज में न्याय और सत्य की विजय का उदाहरण भी प्रस्तुत किया है।
देहरादून- प्रदेश भर में नगर निकायों की तरह अब पंचायतों में भी कूड़ा उठान की व्यवस्था करने के लिए पंचायती विभाग ने अब अपना मॉडल तैयार किया है। इस बात को लेकर उत्तराखंड के पंचायती राज मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि इस मॉडल के अनुसार हमारे कॉम्पैक्टर काम पर लगे हैं जो कूड़े के परिमाण को कम करेंगे और हम जटायु वैक्यूम क्लीनर के जरिए कूड़े को खींचकर उसे अलग करके जैविक और गैर जैविक कूड़े में बांटेंगे।
साथ ही उन्होंने कहा कि हमने लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत प्लास्टिक बोतलों को इकट्ठा कर उन्हें सड़क निर्माण में इस्तेमाल किया जा रहा है।
