पौड़ी/टिहरी: उत्तराखंड पुलिस का बर्बरतापूर्ण चेहरा एक बार फिर सामने आया है। टिहरी के लमगांव के एक युवक ने आरोप लगाया है कि पुलिस अधिकारियों ने उसे निर्वस्त्र कर बेल्ट और डंडों से पीटा, पेशाब पिलाया और जूते चाटने पर मजबूर किया। युवक की आपबीती सुनकर हर कोई स्तब्ध रह गया।
“थूका हुआ पानी पिलाया, जूते चाटने पर किया मजबूर”
पीड़ित युवक ने मंडल मुख्यालय पौड़ी पहुंचकर बताया कि 9 मई की शाम जब वह मसूरी रोड पर टहल रहा था, तभी लमगांव थानाध्यक्ष और दो एसआई कार से आए और उसे एसएसपी द्वारा बुलाए जाने की बात कहकर गाड़ी में बैठा लिया। लेकिन उसे एसएसपी के पास ले जाने के बजाय नई टिहरी कोटी कॉलोनी चौकी ले जाया गया, जहां उसकी बेरहमी से पिटाई की गई।
युवक ने आरोप लगाया कि पुलिस ने न केवल डंडों और बेल्ट से पीटा बल्कि उसकी चीख-पुकार के बाद गला सूखने पर थूका हुआ पानी पिलाया और जूते चाटने पर मजबूर किया।
जेल भी भेजा, हाथ में थमाया चाकू
पीड़ित का कहना है कि पुलिस बाद में उसे जाख तिराहे पर ले गई और हाथ में चाकू थमा दिया। इसके बाद उसे चार महीने तक जेल में रहना पड़ा।
जांच के आदेश
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए गढ़वाल रेंज के आईजी राजीव स्वरूप ने कहा, “टिहरी के लमगांव के युवक के साथ पुलिस अधिकारियों द्वारा मारपीट का प्रकरण संज्ञान में आया है। एसएसपी टिहरी से रिपोर्ट तलब की गई है। रिपोर्ट मिलने के बाद मामले में कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”
पिथौरागढ़: सीमांत जिले पिथौरागढ़ के मुनस्यारी विकासखंड में शिक्षा विभाग की व्यवस्था सवालों के घेरे में है। यहां के जीआईसी खतेड़ा में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को प्रभारी प्रधानाचार्य की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। यह स्थिति तब बनी जब आंदोलनरत शिक्षकों ने दायित्व संभालने से इंकार कर दिया।
शिक्षकों के आंदोलन से बिगड़ी स्थिति
राजकीय शिक्षक संघ लंबे समय से विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलनरत है। आंदोलन के तहत शिक्षकों ने पठन-पाठन के अलावा किसी भी विभागीय दायित्व को संभालने से मना कर दिया है। इसी क्रम में जीआईसी खतेड़ा में हिंदी प्रवक्ता छोटे सिंह, जिन्हें प्रभारी प्रधानाचार्य बनाया गया था, ने भी लिखित रूप से अपना प्रभार त्याग दिया।
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को सौंपा गया प्रभार
विद्यालय में स्थायी प्रधानाचार्य और पर्याप्त कर्मचारी नहीं होने के कारण अब यहां तैनात एकमात्र चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी राजू गिरी को प्रभारी प्रधानाचार्य बना दिया गया है। अब सरकारी जिम्मेदारियां निभाने से लेकर फैसले लेने तक का दायित्व उनके कंधों पर है। यह शायद पहला मौका है जब शिक्षा विभाग में किसी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को इस तरह का दायित्व सौंपा गया है।
विभाग में हड़कंप
विद्यालय में इस समय हिंदी प्रवक्ता के अलावा एक अन्य स्थायी शिक्षक और पाँच अतिथि शिक्षक तैनात हैं। चूँकि अतिथि शिक्षकों को किसी भी प्रकार का सरकारी दायित्व नहीं सौंपा जा सकता, इसलिए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को प्रभार सौंपने का निर्णय लिया गया।
खंड शिक्षा अधिकारी ने जताई नाराजगी
इस मामले पर खंड शिक्षा अधिकारी मुनस्यारी दिगंबर आर्या ने कहा, “राजकीय शिक्षक छात्र और विभागीय हित में गलत निर्णय ले रहे हैं। यदि प्रभारी प्रधानाचार्य का चार्ज किसी को देना ही था तो मुझसे संपर्क किया जा सकता था। यह निर्णय सही नहीं है और जल्द ही उचित कदम उठाए जाएंगे।”
देहरादून: जनपद के सबसे दुर्गम आपदाग्रस्त क्षेत्र फुलेत तक जिला प्रशासन ने हेली सेवा छोड़ पैदल रास्ता चुना। जिलाधिकारी सविन बंसल प्रशासनिक अमले के साथ लगभग 40 किमी छमरौली तक वाहन से पहुँचे और वहां से करीब 12 किमी दुर्गम पैदल मार्ग तय कर फुलेत पहुंचे।
डीएम ने आपदा से हुई क्षति का स्थलीय निरीक्षण किया और प्रभावित ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को राहत एवं पुनर्वास कार्यों में तेजी लाने और जनजीवन सामान्य करने के निर्देश दिए।

आपदा में पुलिया, पुल, सड़कें और पगडंडियां बह गई हैं, जिससे प्रभावित गाँवों तक पहुँच बेहद कठिन हो गया है। गाड़, गदेरे और ढौंड पार कर डीएम प्रभावित परिवारों के पास पहुँचे और उन्हें आश्वस्त किया कि सरकार और प्रशासन हर हाल में उनके साथ खड़ा है तथा युद्ध स्तर पर सामान्य जीवन बहाल करने के प्रयास जारी हैं।
देहरादून। शुक्रवार को कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री मेजर जनरल भुवनचंद्र खंडूड़ी का हालचाल जानने उनके वसंत विहार स्थित आवास पर पहुंचीं। मुलाकात के दौरान उन्होंने उनके स्वास्थ्य लाभ की जानकारी ली और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
रेखा आर्या ने कहा कि मेजर जनरल खंडूड़ी प्रदेश और देश की राजनीति में सदैव प्रेरणा के स्रोत रहे हैं। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना करते हुए कहा कि खंडूड़ी जी दीर्घायु हों और समाज को अपने अमूल्य अनुभवों से आगे भी मार्गदर्शन देते रहें।
पिथौरागढ़: सीमांत जिले पिथौरागढ़ से एक दर्दनाक घटना सामने आई है। राजकीय प्राथमिक विद्यालय सिलिंग्या में तैनात सहायक अध्यापक उमेश प्रकाश (42 वर्ष) की खाई में गिरने से मौत हो गई। इस हादसे से पूरे गांव, विद्यालय और मृतक के परिजनों में शोक की लहर दौड़ गई है।
छुट्टी के बाद लौटते समय हुआ हादसा
जानकारी के मुताबिक गुरुवार, 18 सितंबर को विद्यालय से छुट्टी के बाद उमेश प्रकाश पैदल घर लौट रहे थे। रास्ते में अचानक संतुलन बिगड़ने से वे गहरी खाई में गिर गए।
खाई के किनारे मिला बैग
साथी शिक्षकों ने जब उन्हें काफी देर तक सड़क पर नहीं देखा तो खोजबीन शुरू की। इस दौरान खाई के किनारे उनका बैग मिला, जिसके बाद घटना की आशंका गहरा गई। तुरंत पुलिस और एसडीआरएफ टीम को सूचना दी गई। टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद शव को खाई से निकालकर सड़क तक पहुंचाया और एंबुलेंस से जिला अस्पताल भेजा। जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
परिजनों पर टूटा दुख का पहाड़
मूल रूप से सितारगंज (उधमसिंहनगर) निवासी उमेश प्रकाश का परिवार इस समय पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय के महादेव जीआईसी क्षेत्र में रहता है। हादसे की सूचना मिलते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
श्रद्धांजलि देने पहुंचे शिक्षक
घटना की जानकारी मिलते ही प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष जीतेंद्र वल्दिया, ब्लॉक अध्यक्ष कवींद्र लाल, मंत्री पुष्कर खड़ायत समेत कई शिक्षक अस्पताल पहुंचे और दिवंगत शिक्षक को श्रद्धांजलि दी। अचानक हुई इस दुर्घटना ने सभी को गहरे सदमे में डाल दिया है।
हल्द्वानी/पिथौरागढ़: छह वर्षीय मासूम लाडली की हत्या और दुष्कर्म मामले में सुप्रीम कोर्ट से मुख्य आरोपी अख्तर अली के बरी होने के बाद कुमाऊं फिर एक बार उबाल पर है। हल्द्वानी के बुद्धपार्क में गुरुवार को हुई जनसभा में हजारों लोग जुटे और बेटी को न्याय दिलाने की मांग उठाई। सभा के दौरान लाडली के ताऊ के शब्दों ने मौजूद लोगों की आंखें नम कर दीं। उन्होंने कहा— “हमारी बच्ची हंसी-खुशी पिथौरागढ़ से हल्द्वानी आई थी, लेकिन हमें उसकी लाश लौटा दी गई। बेटी के शरीर पर सिगरेट से दागे निशान आज भी हमें जलाते हैं। अगर हमें न्याय न मिला तो प्रदेश की हर बेटी का यही हाल होगा।”
सभा में मौजूद लोगों ने एक स्वर में नारे लगाए— “बेटी हम शर्मिंदा हैं, तेरे कातिल जिंदा हैं।”
सरकार और सिस्टम पर सवाल
लाडली के ताऊ ने सरकार से पूछा कि क्या उत्तराखंड में कोई काबिल वकील नहीं हैं, जो मध्यप्रदेश से वकील लाने पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी वकीलों की नियुक्ति पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए, वरना हर केस में आरोपी छूटते रहेंगे। साथ ही आरोप लगाया कि सरकार आंदोलन तोड़ने की कोशिश कर रही है, जबकि जरूरत सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने की है।
पुलिस से झड़प और महिलाओं का धरना
जनसभा के बाद जब भीड़ ने जुलूस निकालने की कोशिश की तो पुलिस ने गेट बंद कर रोकने का प्रयास किया। इससे आक्रोशित लोग भड़क उठे और धक्का-मुक्की हो गई। कई महिलाएं सड़क पर धरने पर बैठ गईं। माहौल बिगड़ता देख पुलिस ने गेट खोलना पड़ा।
कांग्रेस नेताओं का देर से समर्थन
लोगों ने कांग्रेस और भाजपा दोनों को निशाने पर लिया और आरोप लगाया कि कोई भी पार्टी बेटी के परिवार के साथ खड़ी नहीं हुई। हालांकि किरकिरी के बाद कांग्रेस विधायक सुमित हृदयेश और ललित जोशी मौके पर पहुँचे और परिवार को समर्थन देने की बात कही।
आठ साल पुराना दर्दनाक मामला
नवंबर 2014 में पिथौरागढ़ से हल्द्वानी आए एक विवाह समारोह से छह वर्षीय लाडली लापता हो गई थी। छह दिन बाद उसका शव गौला नदी से बरामद हुआ। जांच में पता चला कि टॉफी का लालच देकर उसका अपहरण किया गया, सामूहिक दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई। पुलिस ने आरोपी अख्तर अली समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। 2016 में स्पेशल कोर्ट ने अख्तर अली को फांसी की सजा सुनाई थी। लेकिन हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने उसे बरी कर दिया।
अन्य पीड़िताओं के लिए भी न्याय की मांग
इस जनसभा में लोगों ने केवल लाडली ही नहीं बल्कि अंकिता भंडारी और हल्द्वानी की योगा ट्रेनर को भी न्याय दिलाने की मांग उठाई। “महिला उत्पीड़न बंद करो” और “रिव्यू पिटीशन” जैसे पोस्टर हाथों में लिए लोग देर तक नारेबाजी करते रहे।
देहरादून- मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा आज मालसी-सिनोला-मसूरी रोड पर अवैध रूप से किए जा रहे बहुमंजिले भवन निर्माण पर बड़ी कार्रवाई की गई। जै पात्रा द्वारा किए जा रहे इस अवैध निर्माण को मौके पर सील कर दिया गया है। एमडीडीए की यह कार्रवाई अवैध निर्माण पर अंकुश लगाने और शहर के व्यवस्थित विकास को सुनिश्चित करने की दिशा में एक ठोस कदम है।
कार्यवाही के दौरान सहायक अभियंता शैलेन्द्र सिंह रावत, अवर अभियंता सचिन तोमर एवं उमेश वर्मा तथा सुपरवाइजर मौके पर मौजूद रहे।

एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा शहर के सौंदर्य और संतुलित विकास के लिए अवैध निर्माण को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्राधिकरण लगातार निगरानी कर रहा है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। जनता से भी अपील है कि वे किसी भी प्रकार के निर्माण से पहले अनुमोदन अवश्य प्राप्त करें।एमडीडीए द्वारा यह स्पष्ट किया गया है कि आगे भी इसी प्रकार की कार्रवाइयाँ निरंतर जारी रहेंगी।
देहरादून। उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में फिलहाल बारिश से राहत के आसार नहीं हैं। मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून ने राज्य के कई हिस्सों के लिए भारी से भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। वहीं अन्य जिलों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है।
मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक सीएस तोमर ने बताया कि शुक्रवार को प्रदेश के सभी जिलों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। जबकि देहरादून, पौड़ी, नैनीताल, बागेश्वर, टिहरी और हरिद्वार जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
इसके अलावा उत्तरकाशी, चमोली और रुद्रप्रयाग जिलों के कुछ हिस्सों में तेज बारिश के लिए येलो अलर्ट प्रभावी रहेगा।
मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में भी बरसात का सिलसिला जारी रह सकता है। 24 सितंबर तक पूरे प्रदेश में हल्की बारिश होने की संभावना है।
चमोली। नंदानगर तहसील के घाट इलाके में बुधवार देर रात बादल फटने से आई आपदा ने कई परिवारों को तबाह कर दिया। तेज बारिश और भूस्खलन के चलते कई मकान मलबे में दब गए। दर्जनभर से अधिक घरों को भारी नुकसान पहुँचा। इस बीच रेस्क्यू टीम ने 16 घंटे की अथक मशक्कत के बाद मलबे में दबे एक व्यक्ति को जीवित बाहर निकालने में सफलता पाई, लेकिन उसका पूरा परिवार इस त्रासदी का शिकार हो गया।
गाँव के निवासी कुंवर सिंह, पुत्र बलवंत सिंह, का आधा शरीर मलबे में दबा हुआ था। सौभाग्य से कमरे के रोशनदान से मिल रही सांसों ने उनकी जिंदगी बचा ली। बचाव दल ने गुरुवार शाम करीब छह बजे उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला और तुरंत अस्पताल पहुँचाया।
हालाँकि, कुंवर सिंह की पत्नी कांती देवी और 10 वर्षीय जुड़वा बेटे विकास और विशाल की मलबे में दबकर मौत हो गई। दोनों बच्चे सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालय में कक्षा पाँचवीं के छात्र थे।
स्थानीय लोगों के अनुसार, कुंवर सिंह ने मेहनत मजदूरी कर अपने परिवार के लिए गाँव में छोटा सा घर बनाया था। बुधवार रात जब पूरा परिवार गहरी नींद में था, तभी पहाड़ से आए मलबे ने सबकुछ उजाड़ दिया। शोर सुनते ही ग्रामीणों ने प्रशासन को सूचना दी और सुबह से ही राहत व बचाव कार्य शुरू किया गया।
रेस्क्यू टीम ने मलबा हटाते समय जब एक घर तक पहुँचा तो अंदर से हल्की आवाज सुनाई दी। जाँच में पता चला कि वह आवाज कुंवर सिंह की थी। इसके बाद पूरी टीम ने लगातार प्रयास कर उन्हें जिंदा बाहर निकाला।
इस आपदा में कुंवर सिंह की जान तो बच गई, लेकिन पत्नी और दोनों मासूम बच्चों को खोने का गम उन्हें जिंदगीभर सालता रहेगा।
मुख्यमंत्री ने पुजारियों व स्थानीय लोगों से की बातचीत
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को टपकेश्वर महादेव मंदिर क्षेत्र में अतिवृष्टि से प्रभावित स्थल का निरीक्षण किया। अतिवृष्टि के कारण मंदिर के अंदर जलभराव के साथ ही मलबा आ गया था, मलबा हटाने का कार्य अब पूर्ण हो चुका है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने मंदिर के पुजारियों और स्थानीय लोगों से बातचीत भी की।

निरीक्षण के उपरांत मुख्यमंत्री ने टपकेश्वर महादेव मंदिर में जलाभिषेक कर प्रदेश एवं प्रदेशवासियों की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।
