अपर जिलाधिकारी ने निरीक्षण कर अधिकारियों को आवश्यक सुविधाएँ बहाल करने के निर्देश दिए
उत्तरकाशी। यमुनोत्री हाईवे लगातार बारिश के कारण 13वें दिन भी बंद है, जिससे तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्यानाचट्टी से आगे चार स्थानों पर मार्ग बंद होने के कारण हाईवे खोलने का काम धीमा चल रहा है, जबकि जंगलचट्टी में पहाड़ी से गिरते बोल्डरों ने सड़क खोलने की प्रक्रिया को और जटिल बना दिया है।
सड़क मार्ग बंद होने से यमुनोत्री धाम और गीठ पट्टी के कई गांवों में राशन और अन्य आवश्यक सामग्रियों की आपूर्ति बाधित हो गई है। वहीं पिछले छह दिनों से बिजली और मोबाइल नेटवर्क सुविधा भी ठप पड़ी है, जिससे स्थानीय लोग अंधेरे में रातें गुजार रहे हैं और संचार में कठिनाई का सामना कर रहे हैं।
स्थानीय नेताओं और ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द हाईवे खोलने और बिजली आपूर्ति बहाल करने की मांग की है। इसके साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में रसोई गैस सिलेंडर और अन्य आवश्यक सामग्री पहुँचाने का भी अनुरोध किया गया है।
अपर जिलाधिकारी मुक्ता मिश्र ने स्यानाचट्टी क्षेत्र का निरीक्षण कर अधिकारियों को समन्वय बनाकर आवश्यक सुविधाएँ जल्द बहाल करने के निर्देश दिए हैं।
खोखले हुए मकान और धंसते रास्तों के कारण ग्रामीणों में दहशत
चमोली। भारी बारिश के कारण तहसील जिलासू के पिंडर घाटी में जनजीवन प्रभावित हो गया है। कई गांवों में पैदल रास्ते धंस गए, मकानों में दरारें पड़ीं और पौराणिक जल स्रोत भी भूस्खलन की चपेट में आ गए।
सगवाड़ा गांव में हुई भारी बारिश से एक मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, जबकि 15 अन्य परिवार खतरे में आ गए। इन परिवारों को पंचायत घर और अन्य सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया। बीती 22 अगस्त को भी इसी गांव में भूस्खलन के कारण एक मकान गिर गया था, जिसमें एक युवती की मौत हो गई थी।
राड़ी गांव में घांघली गदेरे के उफान से कई ग्रामीण भयभीत हैं। जगदीश पंत, दिनेश पंत, मदन मोहन और मंजू गोसाई ने बताया कि उनके मकान नीचे से खोखले हो गए हैं और कभी भी गदेरे में बह सकते हैं।
एसडीएम पंकज भट्ट ने बताया कि सगवाड़ा गांव में मलबे में दबे मकान में फिलहाल कोई नहीं था। खतरे को देखते हुए प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया गया है।
बारिश के चलते तहसील के गांवों में तबाही का सिलसिला अभी थमने का नाम नहीं ले रहा है।
सबसे ज्यादा क्षति सड़कों और पुलों को, लोक निर्माण विभाग को अकेले 1164 करोड़ का नुकसान
देहरादून। प्रदेश में इस साल प्राकृतिक आपदाओं ने भारी तबाही मचाई है। आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक अब तक 5700 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान आंका गया है। राज्य सरकार ने विस्तृत रिपोर्ट गृह मंत्रालय को भेजते हुए केंद्र से विशेष आर्थिक पैकेज की मांग की है। आपदा से सबसे ज्यादा असर सड़क और पुलों पर पड़ा है, जिससे लोक निर्माण विभाग को ही 1164 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान उठाना पड़ा।
आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि 5702.15 करोड़ रुपये की विशेष सहायता केंद्र से मांगी गई है। इसमें जहां क्षतिग्रस्त परिसंपत्तियों के पुनर्निर्माण के लिए 1944.15 करोड़ रुपये की आवश्यकता है, वहीं भविष्य में आपदा से होने वाले संभावित नुकसान को रोकने और अवस्थापना संरचनाओं को स्थिर करने के लिए 3758 करोड़ रुपये का अनुरोध किया गया है।
विभागवार नुकसान
प्राकृतिक आपदा से विभिन्न विभागों को सीधा नुकसान पहुंचा है। इनमें लोक निर्माण विभाग को 1163.84 करोड़, सिंचाई विभाग को 266.65 करोड़, ऊर्जा विभाग को 123.17 करोड़, स्वास्थ्य विभाग को 4.57 करोड़, विद्यालयी शिक्षा विभाग को 68.28 करोड़, उच्च शिक्षा विभाग को 9.04 करोड़, मत्स्य विभाग को 2.55 करोड़, ग्राम्य विकास विभाग को 65.50 करोड़, शहरी विकास विभाग को 4 करोड़, पशुपालन विभाग को 23.06 करोड़ और अन्य विभागों को लगभग 213.46 करोड़ का नुकसान हुआ है।
5 महीने में 79 मौतें, 90 लापता
रिपोर्ट के अनुसार, 1 अप्रैल से 31 अगस्त 2025 तक आपदा से 79 लोगों की मौत, 115 लोग घायल और 90 लोग लापता हुए हैं।
हजारों मकान क्षतिग्रस्त
आपदा में 238 पक्के और 2 कच्चे मकान पूरी तरह ध्वस्त हो गए, जबकि 3237 मकानों को आंशिक क्षति पहुंची। इनमें 2835 पक्के और 402 कच्चे मकान शामिल हैं। इसके अलावा 3953 छोटे-बड़े पशुओं की मौत भी दर्ज की गई है।
व्यवसायिक प्रतिष्ठान भी प्रभावित
आपदा का असर आम लोगों के जीवन के साथ-साथ व्यापारिक गतिविधियों पर भी पड़ा। बड़ी संख्या में दुकानें, होटल, होमस्टे, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक भवन बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
प्रदेश के सभी जिलों में बनेगा वृद्धाश्रम, 6 लाख बुजुर्गों को डीबीटी से पेंशन
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सेवक संवाद के तहत वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के साथ संवाद किया। इस अवसर पर उन्होंने दिव्यांग शादी अनुदान एवं राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना का सॉफ्टवेयर लॉच किया एवं समाज कल्याण विभाग द्वारा विभिन्न योजनाओं के तहत दी जा रही पेंशन की इस वित्तीय वर्ष की 5वीं किश्त का ऑनलाइन भुगतान किया।
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान घोषणा की कि दिव्यांग युवक-युवती से विवाह करने पर प्रोत्साहन अनुदान धनराशि 25 हजार रूपये से बढ़ाकर 50 हजार रूपये किया जायेगा। दिव्यांग छात्रवृत्ति योजनान्तर्गत कक्षा 1 से कक्षा 8 तक के दिव्यांग छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति हेतु आय सीमा को समाप्त किया जायेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी जनपदों में एक-एक वृद्धाश्रम की व्यवस्था की जायेगी।
मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित कार्यक्रम मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वरिष्ठ नागरिक एवं दिव्यांगजनों का स्वागत करते हुए कहा कि आप सबके आशीर्वाद से ही उन्हें राज्य के मुख्य सेवक के रूप में कार्य करने की ऊर्जा मिलती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संवाद के पीछे भी उनका यही मंतव्य था कि वो सबकी समस्याओं, आवश्यकताओं को सीधे तौर पर जान सकें, जिससे उनके समाधान के लिए और अधिक ठोस कदम उठाए जा सकें। कहा कि कई बार सरकार के स्तर पर नीतियाँ और योजनाएँ तो बन जाती हैं, परन्तु उन योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी मिल पाता है जब वे जमीनी स्तर तक पूरी पारदर्शिता और ईमानदारी से पहुँचें। साथ ही लाभार्थी भी ये महसूस करें कि सरकार ने उनकी ज़िंदगी को आसान और बेहतर बनाने का कार्य किया है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में दिव्यांगजनों एवं वरिष्ठ नागरिकों के सशक्तिकरण के निरंतर प्रयास किए जा रहें हैं। प्रधानमंत्री ने ही सर्वप्रथम “विकलांग” की जगह “दिव्यांग” शब्द को अपनाकर दिव्यांगजनों में आत्मसम्मान का संचार करने का महत्वपूर्ण कार्य किया।
आज प्रधानमंत्री के नेतृत्व में दिव्यांग सशक्तिकरण अधिनियम 2016, सुगम्य भारत अभियान, ए.डी.आई.पी. योजना, दीनदयाल दिव्यांगजन पुनर्वास योजना, दिव्यांगजन स्वालम्बन योजना तथा दिव्यांगजन छात्रवृत्ति एवं पेंशन योजना जैसी अनेकों योजनाओं के माध्यम से दिव्यांगजनों के कल्याण हेतु ठोस प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की प्रेरणा से प्रदेश सरकार द्वारा राज्य में 96 हज़ार से अधिक दिव्यांगजनों को पेंशन प्रदान की जा रही है। जहां एक ओर 18 वर्ष से अधिक आयु के 86 हज़ार से अधिक दिव्यांगजनों को 1500 रुपए की मासिक पेंशन प्रदान की जा रही है, वहीं 18 वर्ष से कम आयु के 8 हज़ार से अधिक दिव्यांग बच्चों के भरण-पोषण एवं देखभाल हेतु प्रतिमाह 700 रुपए की आर्थिक सहायता भी प्रदान की जा रही है।
इसके साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि कार्य के दौरान दिव्यांग हुए लोगों को तीलू रौतेली पेंशन योजना के अंतर्गत प्रतिमाह 12 सौ रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान करने के साथ ही, 4 फुट से कम ऊँचाई वाले व्यक्तियों को बौना पेंशन के माध्यम से प्रतिमाह 12 सौ रुपए भी प्रदान किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में “दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन योजना” के अंतर्गत दिव्यांग व्यक्ति से विवाह करने पर 25 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जा रही है। आज इस योजना से जुड़े सॉफ्टवेयर के लोकार्पण से योजना का लाभ पारदर्शिता के साथ पात्र लाभार्थियों को मिल सकेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक दिन पहले ही देहरादून में प्रधानमंत्री दिव्याशा केंद्र का शुभारंभ किया गया है। जहां दिव्यांगजनों विशेष रूप से दिव्यांग बच्चों को Early Intervention की सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार आने वाले समय में ऐसे दिव्याशा केंद्र राज्य के समस्त जनपदों में खोलने का प्रयास कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज इस योजना के अंतर्गत राज्य के लगभग 6 लाख वृद्धजनों को डीबीटी के माध्यम से पेंशन की राशि सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की जा रही है। इसके साथ ही सरकार राज्य के सभी जनपदों में वृद्धाश्रमों की व्यवस्था भी सुदृढ़ कर रही है। वर्तमान में बागेश्वर, चमोली और उत्तरकाशी में राजकीय वृद्धाश्रम संचालित हो रहे हैं, जबकि देहरादून, अल्मोड़ा और चम्पावत में नए भवन निर्माणाधीन हैं। इसके अतिरिक्त, हरिद्वार, उधमसिंह नगर और नैनीताल सहित विभिन्न क्षेत्रों में गैर-सरकारी संगठनों द्वारा संचालित वृद्धाश्रम भी कार्यरत हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने बदलते समय के साथ रिश्तों में आई चुनौतियों को देखते हुए वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए राज्य में माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिनियम लागू किया है। इसके माध्यम से हमारे बुजुर्गों को यह कानूनी अधिकार प्राप्त हो जाता है कि वे अपने बच्चों या कानूनी उत्तराधिकारियों से भरण-पोषण की मांग कर सकें। उन्होंने वरिष्ठजनों को विश्वास दिलाते हुए कहा कि आपका ये बेटा कभी आपके सम्मान, सुरक्षा और सुविधाओं में किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं आने देगा।
कार्यक्रम के दौरान कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक खजानदास, सविता कपूर, मेयर सौरभ थपलियाल, उपाध्यक्ष वरिष्ठ नागरिक कल्याण परिषद नवीन वर्मा,शांति मेहरा, सचिव समाज कल्याण श्रीधर बाबू अदह्यांकी, अपर सचिव प्रकाश चन्द्र, निदेशक समाज कल्याण चन्द्र सिंह धर्मशक्तू, निदेशक जनजाति कल्याण संजय टोलिया उपस्थित रहे।
सीएम धामी बोले— नारी शक्ति के बिना अधूरी है उत्तराखंड की प्रगति
देहरादून। सर्वे चौक स्थित आईआरडीटी सभागार में आयोजित राज्य स्त्री शक्ति, तीलू रौतेली एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाली 13 महिलाओं को तीलू रौतेली पुरस्कार और 33 आंगनवाड़ी कार्यकर्तात्रियों को उनके उत्कृष्ट सेवा कार्य के लिए सम्मानित किया।
इस मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वीरांगना तीलू रौतेली को नमन करते हुए कहा कि, तीलू रौतेली ने महज 15 वर्ष की उम्र में अपने रण कौशल से विरोधियों को परास्त किया। जिस उम्र में बच्चे खेलना, कूदना और पढ़ना सीखतें हैं, उसी उम्र में तीलू रौतेली ने अदम्य साहस और वीरता का परिचय दिया। इसलिए वीरांगना तीलू रौतेली को उत्तराखंड की झांसी की रानी कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी “नारी तू नारायणी” के मंत्र के साथ मातृशक्ति के कल्याण एवं सशक्तिकरण के लिए कार्य कर रहे है।
संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने की बात हो या बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान, उज्ज्वला योजना, लखपति दीदी योजना, केंद्र सरकार हर तरह से महिलाओं को सशक्त बना रही है, इसी तरह ट्रिपल तलाक जैसी कुप्रथा को समाप्त करके भी प्रधानमंत्री श्री मोदी ने देश की महिलाओं को सामाजिक तौर पर मजबूत किया है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में राज्य सरकार भी मातृशक्ति के कल्याण के लिए समर्पित होकर कार्य कर रही है। इसी क्रम में राज्य सरकार ने जहां महिलाओं के लिए सरकारी सेवाओं में 30 प्रतिशत आरक्षण लागू किया है। वहीं महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए देश में सर्वप्रथम “समान नागरिक संहिता” को लागू करने का ऐतिहासिक कार्य किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार “मुख्यमंत्री लघु उद्योग प्रोत्साहन योजना” और “उद्यमिता विकास कार्यक्रम” जैसी योजनाओं के माध्यम से भी मातृशक्ति को सशक्त बनाने का प्रयास कर रही है। महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए महिला स्वयं सहायता समूहों को 5 लाख रुपये तक का ब्याज-मुक्त ऋण प्रदान किया जा रहा है। राज्य सरकार ने वर्ष 2023 से तीलू रौतेली पुरस्कार राशि 31 हजार रुपए से बढ़ाकर 51 हजार और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पुरस्कार धनराशि 21 हजार रुपए से बढ़ाकर 51 हजार कर दी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों के शुरुआती चरण के विकास में आंगनवाड़ी केंद्रों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ग्रामीण इलाकों में माता-पिता के बाद बच्चों को संस्कार और प्रारंभिक शिक्षा देने की शुरुआत आंगनवाड़ी केंद्रों से ही होती है। उनके दोनों बच्चों ने भी अपनी प्रारंभिक शिक्षा और संस्कार आंगनवाड़ी से ही प्राप्त किए हैं। इसलिए राज्य सरकार ने आंगनवाड़ी, मिनी आंगनवाड़ी बहनों और सहायिकाओं को सशक्त बनाने के लिए उनके मानदेय में वृद्धि की है। पहले जहां आंगनवाड़ी बहनों को 7500 रुपए का मानदेय मिलता था, उन्हें अब 9300 रुपए कर दिया गया है। इसी तरह अब मिनी आंगनवाड़ी को 4500 के बजाय 6250 और सहायिकाओं को 3550 के बजाय 5250 रुपए का मानदेय मिलता है। इसके साथ ही आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को सुपरवाइज़र के पद पर पदोन्नति दिए जाने का भी प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आगे भी महिलाओं के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए पूरी शक्ति, निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य करते रहेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा राज्य की महिलाओं के पास क्षमता और योग्यता की कमी नहीं है। महिला स्वयं सहायता समूहों के बनाए हाउस ऑफ हिमालयाज के उत्पाद, बहुराष्ट्रीय कंपनियों को भी मात दे रहे हैं। इसलिए वो हमेशा महिला समूहों को प्रोत्साहन देने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाबा केदार की धरती से कहा था कि, 21वीं शताब्दी का तीसरा दशक, उत्तराखंड के नाम होने जा रहे हैं, इस क्रांति में महिला समूहों की अहम भूमिका होने जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वैसे यह कार्यक्रम पहले आठ अगस्त को आयोजित होना था, लेकिन आपदा के कारण तब आयोजन संभव नहीं हो पाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश इस समय आपदाओं से घिरा हुआ है, सरकार आपदा प्रभावितों तक हर संभव तरीके से पहुंचने का प्रयास कर रही है, इस काम में केंद्र सरकार का भी सहयोग मिल रहा है।
इस मौके पर विभागीय मंत्री रेखा आर्य ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने महिलाओं के कल्याण के लिए कई कदम उठाए हैं। आगंनवाड़ी कार्यकत्रियों का मानदेय बढ़ाने का एतिहासिक कार्य भी धामी सरकार ने किया। आयोजन में विधायक खजान दास, सचिव चंद्रेश कुमार, निदेशक बंशीलाल राणा सहित बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं।
इन्हें मिला तीलू रौतेली पुरस्कार
अल्मोडा से मीता उपाध्याय, बागेश्वर से अलिशा मनराल, चमोली से सुरभि, चम्पावत से अनामिका बिष्ट, देहरादून से शिवानी गुप्ता, हरिद्वार से रूमा देवी, नैनीताल से नैना, पौड़ी गढ़वाल से रोशमा देवी, पिथौरागढ से रेखा भट्ट, रूद्रप्रयाग से हेमा नेगी करासी, टिहरी गढवाल से साक्षी चौहान, ऊधमसिंह नगर से रेखा और उत्तरकाशी से विजयलक्ष्मी जोशी।
मुख्यमंत्री और कैबिनेट मंत्री ने वितरित किए तीलू रौतेली पुरस्कार
33 महिलाओं को आंगनबाड़ी कार्यकत्री पुरस्कार मिला
देहरादून। गुरुवार को आईआरडीटी सभागार में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने तीलू रौतेली पुरस्कार और आंगनबाड़ी कार्यकत्री पुरस्कार वितरित किए। प्रदेश भर से कुल 13 महिलाओं को तीलू रौतेली पुरस्कार के लिए चुना गया है जबकि 33 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को उनके प्रदर्शन के आधार पर आंगनबाड़ी कार्यकत्री पुरस्कार दिया गया है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश सरकार ने सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 30% आरक्षण देने का बड़ा कदम उठाया । इसके साथ ही समान नागरिक संहिता लागू करके महिलाओं को बराबरी का अधिकार दिलाया । मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के विकास के सबसे बड़ा योगदान महिलाओं का रहेगा।

महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि 1661 के दौर में तीलू रौतेली ने एक सशक्त महिला और वीरांगना के रूप में जैसी उपलब्धियां हासिल की, वह आज आश्चर्यजनक लगती हैं।
रेखा आर्या ने कहा कि प्रदेश सरकार लगातार महिला सशक्तिकरण की दिशा में काम कर रही है और तीलू रौतेली पुरस्कार की धनराशि को 11 हजार से तीन बार बढ़ाते हुए अब 51 हजार रुपए कर दिया गया है। कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि इसी तरह प्रदेश सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का मानदेय भी बढ़ाया है।
उन्होंने कहा कि महिला सारथी योजना और एकल महिला स्वरोजगार योजना के जरिए प्रदेश की महिलाओं की आर्थिक स्थिति बेहतर होगी ।
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन योजना और खिलाड़ी प्रोत्साहन योजना में भी यह सुनिश्चित किया गया है कि बालिका खिलाड़ियों को भी बराबर संख्या में सहायता राशि मिले।
इस अवसर पर राजपुर विधायक खजान दास, विभागीय सचिव चंद्रेश कुमार, निदेशक बंसीलाल राणा आदि उपस्थित रहे।
रातभर चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद एसडीआरएफ ने गधेरे से निकाला शव
नैनीताल। नैनीताल जिले के बेतालघाट क्षेत्र में बरसाती नाले के तेज बहाव में बहे वन दरोगा का शव रात दो बजे एसडीआरएफ की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद बरामद कर लिया। इस घटना से गांव में मातम पसर गया है और मृतक के परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है।
बेतालघाट ब्लॉक के गैरखाल निवासी 40 वर्षीय देवेंद्र सिंह, पुत्र दिलीप सिंह, वन विभाग की बेतालघाट रेंज में वन दरोगा के पद पर तैनात थे। बुधवार शाम वह खैरना बाजार से अपने साथी युवक के साथ बाइक से घर लौट रहे थे।
रातीघाट-बेतालघाट मोटर मार्ग पर डोलकोट क्षेत्र में बरसाती गधेरे को पार करने की कोशिश में वह बाइक समेत बहाव में बह गए। उनके साथ मौजूद युवक किसी तरह किनारे पर अटक गया और स्थानीय लोगों ने उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
घटना की जानकारी मिलते ही तहसील प्रशासन, बेतालघाट पुलिस और एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची। अंधेरा और तेज बहाव के कारण सर्च ऑपरेशन में काफी दिक्कतें आईं। यहां तक कि पानी डायवर्ट करने के लिए दो लोडर मशीनों की भी मदद ली गई।
आखिरकार रात करीब दो बजे एसडीआरएफ की टीम ने गधेरे के बीच से देवेंद्र सिंह का शव बरामद कर लिया। राजस्व पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए नैनीताल भेज दिया है।
पिछले वर्ष ही मृतक के छोटे भाई की करंट लगने से मौत हो गई थी। अब परिवार पर एक और दुख का पहाड़ टूट पड़ा है।
प्रदेश में 520 सड़कें बंद, 779 मशीनें तैनात, लोक निर्माण विभाग और बीआरओ तेजी से खोलने में जुटे
देहरादून। राज्य में लगातार जारी बारिश ने पहाड़ी जिलों में संकट गहरा दिया है। चमोली, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, टिहरी और पौड़ी गढ़वाल के कई गांवों में भू-धंसाव से घरों में बड़ी दरारें पड़ गई हैं। खतरे के चलते कुछ लोगों ने रातोंरात अपने घर खाली कर दिए, वहीं प्रशासन ने भी कई इलाकों में ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि गंगोत्री और यमुनोत्री हाईवे समेत कई प्रमुख सड़कें भी धंसने लगी है।
इसी बीच प्रदेश सरकार ने सड़कों की स्थिति सुधारने के लिए 15 सितंबर से गड्ढा मुक्त अभियान शुरू करने की घोषणा की है। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता राजेश शर्मा के अनुसार, 31 अक्तूबर तक सभी सड़कों को गड्ढा मुक्त करने का लक्ष्य तय किया गया है। विभाग ने योजना बना ली है, लेकिन लगातार हो रही बारिश बाधा बन रही है।
वर्तमान में प्रदेश की 520 सड़कें बंद पड़ी हैं, जिनमें पांच राष्ट्रीय राजमार्ग, 27 राज्य मार्ग, 17 मुख्य जिला मार्ग और 164 ग्रामीण सड़कें शामिल हैं। अकेले अल्मोड़ा जिले में 86 सड़कें ठप हैं, जबकि पौड़ी, टिहरी, चमोली और उत्तरकाशी जिले भी सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
बंद रास्तों को खोलने के लिए लोक निर्माण विभाग और बीआरओ ने 779 मशीनें तैनात की हैं। इसके बावजूद बारिश के बाद बार-बार सड़कें फिर से बंद हो रही हैं।
सिर्फ सड़कें ही नहीं, बल्कि 29 पुल भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। विभागीय रिपोर्ट के मुताबिक उत्तरकाशी जिले में सबसे ज्यादा 10 पुल प्रभावित हुए हैं। इनमें राष्ट्रीय राजमार्ग और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के पुल भी शामिल हैं।
8 सितंबर को आयोग के समक्ष तलब, राष्ट्रीय महिला आयोग को भी भेजा गया पत्र
देहरादून। महिला सुरक्षा को लेकर देहरादून को असुरक्षित बताने वाली रिपोर्ट पर उत्तराखंड राज्य महिला आयोग ने सख़्त रुख अपनाया है। आयोग ने रिपोर्ट तैयार करने वाली निजी एजेंसी पीवैल्यू एनालिटिक्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक को नोटिस जारी कर 8 सितंबर को देहरादून स्थित महिला आयोग कार्यालय में उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही राष्ट्रीय महिला आयोग को भी इस मामले में कार्रवाई के लिए पत्र लिखा गया है।
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने स्पष्ट किया कि “नेशनल एनुअल रिपोर्ट एंड इंडेक्स ऑन वूमन सेफ्टी” नाम से जारी यह रिपोर्ट पूरी तरह एक निजी कंपनी का आयोजन है। इसका केंद्र सरकार, राज्य सरकार या राष्ट्रीय/राज्य महिला आयोग से कोई संबंध नहीं है। रिपोर्ट में न तो आधिकारिक डेटा का इस्तेमाल हुआ है और न ही यह किसी मान्यताप्राप्त प्रक्रिया पर आधारित है। यह मात्र 31 शहरों में 12,770 महिलाओं पर किए गए सीमित सर्वे के आधार पर तैयार की गई है।
कंडवाल ने कहा कि इस रिपोर्ट को ऐसे प्रसारित किया गया, मानो इसे राष्ट्रीय महिला आयोग ने जारी किया हो, जबकि हकीकत इसके विपरीत है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजय रहाटकर भले ही उस कार्यक्रम में मौजूद थीं, लेकिन रिपोर्ट का संबंध न तो राष्ट्रीय महिला आयोग से है और न ही किसी सरकारी संस्था से।
राज्य महिला आयोग का कहना है कि इस तरह की गैर-प्रमाणिक रिपोर्ट से देहरादून और उत्तराखंड की छवि राष्ट्रीय स्तर पर धूमिल करने का प्रयास हुआ है। जबकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार महिला सुरक्षा को लेकर बेहद संवेदनशील है और लगातार ठोस कदम उठा रही है।
