सीएम धामी ने राकेश देवली की सेवाओं को बताया अनुकरणीय
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री सुरक्षा में तैनात मुख्य सुरक्षा अधिकारी राकेश देवली को उनकी अधिवर्षता आयु पूर्ण कर सेवानिवृत्त होने पर हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई दी हैं।
मुख्यमंत्री ने देवली के दीर्घकालीन सेवाकाल की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपने दायित्वों का अत्यंत निष्ठा, दक्षता और समर्पण भाव से निर्वहन किया। देवली ने मुख्यमंत्री सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है।
मुख्यमंत्री ने उनके उज्जवल भविष्य, उत्तम स्वास्थ्य एवं सुखद पारिवारिक जीवन की मंगलकामनाएं व्यक्त की।
जवाब दो—जांच समिति और डॉक्टर को कारण बताओ नोटिस
सिस्टम की चूक पर जताई नाराज़गी, जिलाधिकारी को सौंपी विस्तृत जांच
न लापरवाही बर्दाश्त होगी, न रिपोर्टिंग में लीपापोती– स्वास्थ्य सचिव
देहरादून/बागेश्वर। उत्तराखंड में एक डेढ़ साल के बच्चे की मौत ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तक को झकझोर दिया है। गढ़वाल-कुमाऊं के ग्वालदम, बैजनाथ, बागेश्वर, अल्मोड़ा और हल्द्वानी तक उस बच्चे को लेकर परिवार दौड़ा लेकिन डॉक्टर उसका जीवन नहीं बचा सके।इस मामले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक्स पर पोस्ट किया, “बागेश्वर में एक मासूम बच्चे की चिकित्सा में लापरवाही से मृत्यु का समाचार अत्यंत पीड़ादायक और दुर्भाग्यपूर्ण है। जैसा कि अभी तक सूचना प्राप्त हुई है, उनसे प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि कतिपय स्तर पर अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा अपने कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही बरती गई है।”
इस दुखद मृत्यु पर प्रदेश सरकार ने संज्ञान तो लिया, लेकिन जांच समिति की रिपोर्ट पर खुद स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने असंतोष जताया है। रिपोर्ट में कई अहम बिंदुओं के गायब रहने पर सचिव ने सख्त नाराज़गी जताते हुए इसे “अपूर्ण व असंतोषजनक” करार दिया है। डॉ. आर राजेश कुमार ने जिलाधिकारी बागेश्वर को विस्तृत और निष्पक्ष जांच का जिम्मा सौंपते हुए यह साफ कर दिया है कि अब लापरवाही की परतें जिलास्तर पर खोली जाएंगी और सच सामने लाया जाएगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले को बेहद गंभीर मानते हुए स्वास्थ्य विभाग को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई गई, जिसने अपनी रिपोर्ट सौंपी। लेकिन सचिव डॉ. राजेश कुमार ने रिपोर्ट की समीक्षा के बाद पाया कि—
मरीज की तत्कालिक हालत का उल्लेख नहीं
परिजनों के बयान गायब
रेफरल से पूर्व की गई चिकित्सा प्रक्रिया अधूरी
चिकित्सकीय निर्णयों का कोई ठोस आधार नहीं
सचिव ने इन कमियों को “तथ्यों की अनदेखी और प्रक्रिया की अवहेलना” बताया है।
जवाब दो— जांच समिति और डॉक्टरों को कारण बताओ नोटिस
स्वास्थ्य सचिव ने रिपोर्ट को अधूरी और एकतरफा मानते हुए तीनों जांच अधिकारियों— डॉ. तपन शर्मा, डॉ. अनुपमा हयांकी और डॉ. प्रमोद जंगपांगी— सहित संबंधित बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अकिंत कुमार को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। सभी से सात दिन में संतोषजनक स्पष्टीकरण मांगा गया है।
अब जिलाधिकारी करेंगे नए सिरे से जांच
प्रकरण की संवेदनशीलता को देखते हुए सचिव ने अब जांच की जिम्मेदारी जिलाधिकारी को सौंपी है। उन्हें निर्देशित किया गया है कि दोषियों की पहचान और प्रक्रियागत खामियों की पूरी पड़ताल करें। साथ ही, राज्य स्तर पर स्वतंत्र उच्च स्तरीय समिति के गठन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
“न लापरवाही बर्दाश्त होगी, न रिपोर्टिंग में लीपापोती” – स्वास्थ्य सचिव
डॉ. राजेश कुमार ने दो टूक कहा कि स्वास्थ्य जैसी संवेदनशील सेवाओं में न तो लापरवाही बर्दाश्त की जाएगी, न ही लीपापोती। उन्होंने स्पष्ट किया कि “अब ज़िम्मेदारी तय की जाएगी और भविष्य के लिए व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और उत्तरदायी बनाया जाएगा।”
बागेश्वर की यह घटना सिर्फ एक बालक की मौत नहीं, बल्कि उस सिस्टम पर तमाचा है जो समय पर जांच, इलाज और जवाबदेही देने में बार-बार नाकाम हो रहा है। स्वास्थ्य सचिव की तल्ख़ प्रतिक्रिया एक संकेत है कि शायद अब विभाग को आईना दिखाने का वक्त आ गया है। सवाल यह भी है कि क्या यही रवैया हर मामले में अपनाया जाएगा… या फिर ये भी एक रिपोर्ट फाइल में दफ़्न होकर रह जाएगी?
देहरादून में गोसदनों की व्यवस्था होगी और मजबूत
देहरादून। जनपद में निराश्रित और बेसहारा गोवंश के संरक्षण हेतु जिला प्रशासन ने ठोस कदम उठाए हैं। जिलाधिकारी सविन बंसल की अध्यक्षता में जिला स्तरीय अनुश्रवण समिति की बैठक आयोजित हुई, जिसमें गोवंश के भरण-पोषण, चिकित्सा और निगरानी व्यवस्था को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश दिए गए।
डीएम ने निर्देश दिए कि गोसदनों में सप्ताह में दो बार पशुओं का हेड काउंट अनिवार्य रूप से कराया जाए, जिसकी जिम्मेदारी स्थानीय पशु चिकित्सकों की होगी। पशु कल्याण बोर्ड द्वारा गोसदनों का रैंडम निरीक्षण भी किया जाएगा।
कालसी ब्लॉक के खेरूवा में 150 पशु क्षमता वाले गोसदन के संचालन हेतु 49.98 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है। इसके अलावा छरबा में 22 लाख और प्रेमनगर (आरकेडिया ग्रांट) में 27.03 लाख रुपये के प्रस्तावों को पूर्व में ही मंजूरी मिल चुकी है।
डीएम ने यह भी निर्देश दिए कि गोसदनों में पशुओं की नियमित स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण और उचित उपचार सुनिश्चित किया जाए। साथ ही पशुओं को संतुलित आहार, स्वच्छ पानी और साफ-सुथरी रहने की व्यवस्था भी अनिवार्य रूप से उपलब्ध हो।
नगर निगम देहरादून द्वारा पंजीकृत गौसदनों में गोवंश टैगिंग पूरी न होने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई और निर्देश दिए कि सभी पशुओं की शत-प्रतिशत टैगिंग कर शीघ्र रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. सतीश जोशी ने अवगत कराया कि जनपद में वर्तमान में 10 पंजीकृत गोसदन कार्यरत हैं—सहसपुर में 4, विकासनगर व डोईवाला में 2-2 और चकराता व धर्मपुर में 1-1।
पशु कल्याण बोर्ड की उप निदेशक डॉ. उर्वशी ने जानकारी दी कि गोसदनों की दैनिक मॉनिटरिंग के लिए एक विशेष ऐप तैयार किया गया है, जिसे जल्द ही लॉन्च किया जाएगा।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, उप नगर आयुक्त संतोष कुमार पांडे, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. सतीश जोशी, पशु कल्याण बोर्ड की उप निदेशक डॉ. उर्वशी सहित अनुश्रवण समिति के सभी सदस्य उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने नव-निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों को मॉडर्न गवर्नेंस, वित्तीय प्रबंधन और तकनीकी शिक्षा देने के दिए निर्देश
देहरादून – मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को सचिवालय में पंचायतीराज विभाग की बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए कि नव-निर्वाचित ग्राम प्रधानों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों एवं जिला पंचायत सदस्यों को आधुनिक तकनीकी, वित्तीय प्रबंधन और शासन प्रणाली पर प्रशिक्षण दिया जाए। उन्होंने कहा कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प को पूर्ण करने की दिशा में सबको समेकित प्रयास करने होंगे। गांवों के विकास से ही प्रदेश और देश का विकास संभव है।
मुख्यमंत्री ने राज्य में ‘एकीकृत पंचायत भवनों’ का निर्माण कराने के निर्देश दिए। इन एकीकृत पंचायत भवनों में ग्राम पंचायत विकास अधिकारी, पटवारी, आशा आदि के लिए एक स्थान पर ही व्यवस्था होगी। इनके वहां एक साथ बैठने के लिए रोस्टर भी बनाया जाए। इससे लोगों को सभी सुविधाएं एक ही स्थान पर मिल जाएंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्राम पंचायतों, क्षेत्र पंचायतों एवं जिला पंचायतों में बजट नियोजन को और बेहतर बनाया जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी ग्राम पंचायतों का सुनियोजित विकास हो। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि पंचायतीराज विभाग यह भी आकलन करे कि आगामी 15 वर्षों में कितना ग्रामीण क्षेत्र शहरी क्षेत्र में परिवर्तित होगा। यह आकलन राज्य के समग्र विकास की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्राम सभाओं के स्थापना दिवस उत्सव के रूप में मनाए जाने के लिए ग्रामवासियों से संवाद किया जाए। इसके लिए नियमित कैलेंडर बनाया जाए। ग्राम स्तर पर होने वाले मेले, मिलन कार्यक्रम, प्रबुद्धजनों की जयंती एवं अन्य विशेष दिनों में भी यह स्थापना दिवस मनाया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि क्षेत्र एवं जिला पंचायत में समेकित एवं संतुलित विकास किया जाए। इसका ध्यान रखा जाए कि कोई क्षेत्र या व्यक्ति विकास योजनाओं से वंचित न रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचायत स्तर पर सभी योजनाओं की रीयल टाइम मॉनिटरिंग हो। पंचायतों में ई-गवर्नेंस को बढ़ावा दिया जाए। सभी पंचायतों के कार्यों का ऑडिट हो और सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में आम जनता की राय एवं भागीदारी को प्राथमिकता दी जाए। प्रत्येक पंचायत स्तर पर शिकायत दर्ज करने और समाधान का एक निश्चित समयबद्ध ढांचा तैयार किया जाए।
इस अवसर पर अवस्थापना अनुश्रवण परिषद उपाध्यक्ष विश्वास डाबर, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव चंद्रेश कुमार यादव, अपर सचिव बंशीधर तिवारी, निदेशक पंचायती राज सुश्री निधि यादव उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री धामी ने समीक्षा बैठक के दौरान दिए निर्देश, पात्र लाभार्थियों को ही मिलेगा आवास योजना का लाभ
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को सचिवालय में आवास विभाग की बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ई.डब्ल्यू.एस (शहरी) आवासों का लाभ जिन लोगों को दिया गया है, उनका पुनः सत्यापन किया जाए। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि योजना का लाभ सिर्फ पात्र लोगों को ही मिले। गलत तरीके से योजना का लाभ लेने वाले और देने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आगे जो भी आवास आवंटन किए जाएं, यह सुनिश्चित किया जाए कि केवल पात्र लोगों को ही मिले।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के अंतर्गत विभिन्न शहरों के मास्टर प्लान के कार्यों में तेजी लाई जाए। मास्टर प्लान के साथ शहरों की धारण क्षमता का आकलन भी किया जाए। नगर क्षेत्रों में जल संरक्षण के साथ ही वृक्षारोपण पर भी ध्यान दिया जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि शहरी क्षेत्रों में प्राधिकरणों द्वारा पारित नक्शों के अनुरूप ही निर्माण कार्य हों। बिल्डिंग और सोसाइटी निर्माण कार्यों में वाटर हार्वेस्टिंग और ग्रीनरी का भी विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि अतिक्रमण हटाने के लिए सख्ती से कार्य किए जाएं। आमजन की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए आवासों के नक्शे निर्धारित समयावधि में पास किए जाएं।
मुख्यमंत्री ने राज्य के दोनों मंडलों में एक-एक नए शहर विकसित किए जाने की दिशा में तेजी से कार्य करने के निर्देश दिए। इन शहरों को स्प्रिचुअल जोन के साथ क्लब किया जाए। मुख्यमंत्री ने राज्य में आवासीय आवश्यकता का मूल्यांकन करते हुए सभी वर्गों के लिए आवास की मांग का आकलन करने, भविष्य की आवश्यकताओं का अनुमान लगाने एवं उसके अनुरूप ठोस कार्ययोजना विकसित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने शहरों में भूमि का समुचित उपयोग, भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों का आवश्यकता अनुसार पुनर्विकास करने के भी निर्देश दिए।
प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि आवास विकास विभाग 8 गेम चेंजर योजनाओं पर कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य में बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए 191 स्थानों पर पार्किंग निर्माण कार्य किए जा रहे हैं, जिनमें 109 मल्टीलेवल, 10 टनल, 63 सर्फेस और 9 ऑटोमेटेड पार्किंग हैं। 48 पार्किंग के निर्माण कार्य पूरे हो चुके हैं, जबकि 47 पर कार्य गतिमान है।
बैठक में अवस्थापना अनुश्रवण परिषद उपाध्यक्ष विश्वास डाबर, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी सीपीपीजीजी मनोज पंत एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
सहायक कमांडेंट करमवीर सिंह की निगरानी में चला जोखिमपूर्ण रेस्क्यू अभियान
रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के सोनप्रयाग क्षेत्र में हुए भीषण भूस्खलन के बाद स्थिति गंभीर हो गई। गौरीकुंड शटल पार्किंग और मनकुटिया मंदिर के बीच मलबा गिरने से बड़ी संख्या में तीर्थयात्री फंस गए। घटना की सूचना मिलते ही मौके पर तैनात 15वीं वाहिनी NDRF की टीम ने तत्काल और साहसिक बचाव अभियान शुरू किया।
सहायक कमांडेंट करमवीर सिंह के पर्यवेक्षण में और निरीक्षक अमृत लाल मीणा के नेतृत्व में 29 सदस्यीय NDRF टीम ने जोखिमपूर्ण स्थिति के बावजूद फंसे यात्रियों को निकालने का काम शुरू किया। लगातार गिरते मलबे और दुर्गम भू-भाग के बीच टीम ने रस्सियों और वैकल्पिक मार्गों की मदद से एक-एक कर लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला।
30 जुलाई को करीब 9 घंटे तक चला यह रेस्क्यू ऑपरेशन अंधकार और पुनः भूस्खलन की आशंका के चलते रात्रिकालीन अवधि में स्थगित करना पड़ा। इसके बाद अगली सुबह 31 जुलाई को सुबह 7 बजे से पुनः ऑपरेशन शुरू किया गया।
अब तक कुल 2822 तीर्थयात्रियों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जिनमें 2194 पुरुष, 513 महिलाएं और 115 बच्चे शामिल हैं। इस संपूर्ण अभियान की निगरानी स्वयं कमाण्डेंट सुदेश कुमार कर रहे हैं।
NDRF के इस तत्पर और समर्पित प्रयास ने एक बड़ी जनहानि को टाल दिया है। कई तीर्थयात्रियों ने संकट की घड़ी में NDRF की तत्परता और साहस की सराहना करते हुए टीम का आभार जताया है।
NDRF द्वारा किया गया यह प्रयास उनकी मूल भावना “जीवन रक्षा और उससे आगे” का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया है। फिलहाल बचाव अभियान अब भी जारी है।
मुख्यमंत्री ने डॉक्टरों से ली स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी, परिजनों से भी की मुलाकात
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मैक्स अस्पताल, देहरादून में भर्ती विधायक श्रीमती मुन्नी देवी शाह से मिलने पहुंचे। मुख्यमंत्री धामी ने विधायक से उनका कुशलक्षेम जाना और चिकित्सकों से उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने विधायक के परिजनों से भी बातचीत की और उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
देहरादून। कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने प्रातः न्यू कैंट रोड, हाथीबड़कला क्षेत्र स्थित निकट पोस्ट ऑफिस के पास 10बी आवास पर पहुंचकर पूनम देवी के घर में आग लगने की घटना का निरीक्षण किया। मंत्री ने मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों से घटनास्थल की जानकारी लेते हुए आग लगने के कारणों की जानकारी ली।
स्थानीय लोगों ने बताया गया कि बीती देर रात शॉर्ट सर्किट के कारण पूनम देवी के घर में अचानक आग लग गई, जिससे घर में रखा सामान जलकर नष्ट हो गया। सौभाग्यवश इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई। पूनम देवी अपने बच्चों के साथ राजस्थान स्थित खाटू श्याम मंदिर दर्शन हेतु गई है।
कैबिनेट मंत्री ने प्रभावित परिवार को हरसंभव सहायता का आश्वासन देते हुए राहत प्रक्रिया में तेजी लाने और भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं से बचाव हेतु आवश्यक सतर्कता बरतने का आहवान किया।
इस दौरान स्थानीय पार्षद भूपेंद्र कठैत, मोहन बहुगुणा, रमेश प्रधान सहित कई लोग उपस्थित रहे।
शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने समीक्षा बैठक में अफसरों को दिए निर्देश
देहरादून। प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में शैक्षणिक मानक स्थापित करने के उद्देश्य से राज्य विद्यालय मानक प्राधिकरण (एसएसएसए) का गठन किया जायेगा। इसके लिये विभागीय अधिकारियों को निर्देश दे दिये गये हैं। इसके अलावा न्यूनतम आयु सीमा पूर्ण न होने के कारण कक्षा-1 में प्रवेश से वंचित छात्र-छात्राओं को भविष्य में बालवाटिका-3 में दाखिला दिया जायेगा। साथ ही विभागीय अधिकारियों को एनईपी-2020 के अनुरूप कक्षा-01 से 08वीं तक का पाठ्यक्रम तैयार कर लागू करने के निर्देश दिये गये हैं।
सूबे के विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने विधानसभा स्थित सभाकक्ष में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक ली। जिसमें उन्होंने नई शिक्षा नीति-2020 के प्रावधानों के तहत प्रदेश में राज्य विद्यालय मानक प्राधिकरण के शीघ्र गठन के निर्देश अधिकारियों को दिये।
डॉ. रावत ने बताया कि एसएसएसए के गठन से प्रदेश में शैक्षिक मानकों को स्थापित करने में मदद मिलेगी, साथ ही स्कूलों की मान्यता से लेकर सीखने के लक्ष्य व क्लास रूम मानक तय किये जायेंगे, जिससे निजी एवं राजकीय विद्यालयों की कार्यप्रणाली में सुधार लाया जा सकेगा। इसके अलावा प्रदेशभर के प्राथमिक विद्यालयों में बालवाटिका-1 व 2 की तर्ज पर बालवाटिका-3 का भी संचालन किया जायेगा। जिसमें ऐसे छात्र-छात्राओं को प्रवेश दिया जायेगा जो कि एक शैक्षणिक सत्र में निर्धारित आयु सीमा पूर्ण न करने के कारण कक्षा-1 में प्रवेश से वंचित रह जाते हैं।
डॉ. रावत ने बताया कि प्रदेशभर में ऐसे छात्र-छात्राआों की बड़ी तादाद है जो कक्षा-1 में प्रवेश के समय 6 वर्ष की न्यूनतम आयु सीमा पूरी नहीं कर पाते हैं और आंगनबाड़ी में संचालित केन्द्रों से भी पांच वर्ष की आयु पूर्ण करते ही मध्य सत्र में बाहर हो जाते हैं। विभागीय मंत्री ने एनईपी-2020 के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार न होने पर विभागीय अधिकारियों को जमकर लताड़ लगाई। उन्होंने अधिकारियों को दो माह के भीतर एनईपी गाइडलान में तय 70 व 30 फीसदी कंटेंट के अनुरूप कक्षा-1 से 8 तक का पाठ्यक्रम तैयार करने के निर्देश दिये। इसके अलावा उन्होंने अधिकारियों को प्रदेशभर के करीब 150 क्षतिग्रस्त स्कूलों के शीघ्र मरम्मत के निर्देश भी बैठक में दिये। उन्होंने कहा कि इन विद्यालयों के मरम्मत हेतु आपदा मद से लगभग 30 करोड़ की धनराशि स्वीकृत कर दी गई है। इसके अलावा प्रत्येक जिलाधिकारी भी आपदा न्यूनीकरण मद से दो-दो लाख रूपये प्रति विद्यालय खर्च कर सकते हैं, इसके लिये विभागीय सचिव की अध्यक्षता में एक मॉनिटिरिंग कमेटी का भी गठन करने का निर्देश भी दिये गये हैं।
बैठक में विद्यालयी शिक्षा सचिव रविनाथ रमन, अपर सचिव रंजना राजगुरु, एम.एम. सेमवाल, उप सचिव अनिल पाण्डे, निदेशक माध्यमिक शिक्षा डॉ. मुकुल कुमार सती, निदेशक प्रारंभिक शिक्षा अजय नौटियाल, एपीडी समग्र शिक्षा कुलदीप गैरोला, पदमेन्द्र सकलानी सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री करेंगे लोकसभा क्षेत्र की विधानसभा वार योजनाओं की प्रत्येक तीन माह में समीक्षा
जन समस्याओं का समाधान राज्य सरकार की शीर्ष प्राथमिकता
निर्माणाधीन योजनाओं का किया जाए नियमित अनुश्रवण, समयबद्धता के साथ पूरी हो योजनाएं
टिहरी लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली विधानसभाओं की मुख्यमंत्री घोषणाओं और अन्य कार्यों की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने दिये निर्देश
देहरादून। विधायकगणों द्वारा उठाई गई जन समस्याओं को अधिकारी पूरी गंभीरता से लें। विधानसभा क्षेत्रों की विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए अधिकारी विधायकगणों के साथ निरंतर संवाद करें। राज्य की सभी 70 विधानसभाओं के अंतर्गत की गई घोषणाओं और अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के लिए शासन-प्रशासन और विधानसभा क्षेत्र के बीच सेतु की भूमिका में कार्य करने हेतु अपर सचिव स्तर के अधिकारियों को जिम्मेदारी दी जाए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को सचिवालय में टिहरी लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली विधानसभाओं की मुख्यमंत्री घोषणाओं और अन्य कार्यों की समीक्षा के दौरान ये निर्देश अधिकारियों को दिए।
मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान मुख्य सचिव को निर्देश दिए कि प्रत्येक विधानसभा में गतिमान विभिन्न कार्यों की समीक्षा मुख्य सचिव स्तर पर भी की जाए। उन्होंने कहा कि विभागीय सचिव भी विधानसभा क्षेत्रों की समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए अपने विभागों की नियमित समीक्षा करें। प्रत्येक लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली विधानसभाओं की प्रत्येक तीन माह में समीक्षा मुख्यमंत्री स्वयं करेंगे। बैठक में विधायकगणों द्वारा अपनी विधानसभा से संबंधित जो जन समस्याएं रखी गई हैं, उन पर की गई कार्यवाही की जानकारी एक सप्ताह के भीतर संबंधित विधायकगणों एवं मुख्यमंत्री कार्यालय को उपलब्ध कराई जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जन समस्याओं का समाधान राज्य सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है। यह सुनिश्चित किया जाए कि जनहित से जुड़े कार्यों में अनावश्यक विलंब न हो।
मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए कि मानसून के बाद सभी निर्माण कार्यों में तेजी लाई जाए। उन्होंने सभी विधायकगणों से कहा कि अपनी विधानसभा क्षेत्र में लघु, मध्य और दीर्घ अवधि में पूर्ण होने वाले कार्यों का प्रस्ताव भेजें। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माणाधीन योजनाओं का नियमित अनुश्रवण किया जाए और समयबद्धता के साथ योजनाओं को पूर्ण किया जाए।
बैठक के दौरान विधायकगणों द्वारा सड़क मार्गों के निर्माण और चौड़ीकरण, स्वास्थ्य सुविधाओं, जलभराव की समस्या के समाधान, सौंदर्यीकरण के कार्यों, सिंचाई के लिए पानी, ड्रेनेज व सीवरेज की समस्या, तटबंध निर्माण, नालों के निर्माण कार्य एवं अन्य समस्याएं रखी गईं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सभी समस्याओं के शीघ्र समाधान के निर्देश दिए। बैठक में जानकारी दी गई कि टिहरी लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा की गई 469 घोषणाओं में से 305 घोषणाएं पूर्ण हो चुकी हैं, शेष घोषणाओं पर कार्य गतिमान है।
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सभी सचिवों और जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि विधायकगणों द्वारा अपनी विधानसभा क्षेत्र की जिन समस्याओं से अवगत कराया गया है, उन पर तत्काल कार्यवाही की जाए। घोषणाओं से संबंधित मामलों में कार्यवाही की सूचना संबंधित विधायकगणों और घोषणा प्रकोष्ठ को दी जाए। उन्होंने दोनों मण्डलायुक्तों को निर्देश दिए कि जन समस्याओं के समाधान के लिए विधायकगणों, सचिवों और जिलाधिकारियों के बीच सेतु का कार्य करें।
बैठक में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक खजान दास, विधायक किशोर उपाध्याय, प्रीतम सिंह पंवार, सुरेश सिंह चौहान, शक्ति लाल शाह, सहदेव पुंडीर, श्रीमती सविता कपूर, उमेश शर्मा काऊ, दुर्गेश्वार लाल, अवस्थापन अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष विश्वास डाबर, प्रमुख सचिव आर के सुधांशु, एल.एल फ़ैनई, डॉ.आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिवगण, अपर सचिवगण, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष एवं वर्चुअल माध्यम से संबंधित जिलाधिकारी उपस्थित थे।
