खेल मंत्री रेखा आर्या ने राज्य स्तरीय जूनियर एवं सीनियर चैंपियनशिप का किया शुभारंभ
अल्मोड़ा। खेल मंत्री रेखा आर्या ने बुधवार को अल्मोड़ा में हेमवती नंदन बहुगुणा स्पोर्ट्स स्टेडियम के मल्टीपरपज हॉल में 24 वीं उत्तराखंड स्टेट जूनियर एवं सीनियर बैडमिंटन चैंपियनशिप 2025 का शुभारंभ किया। इस प्रतियोगिता में प्रदेश के सभी जनपदों से आए लगभग 350 खिलाड़ी शामिल हो रहे हैं। प्रतियोगिता का उद्घाटन करते हुए कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि खेलों को लेकर सामाजिक सोच में अब बड़ा बदलाव आ चुका है।
उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों के करियर के लिए नौकरियों में आरक्षण, आउट ऑफ टर्न सरकारी नौकरी, नगद इनाम राशि और युवा खिलाड़ियों के लिए प्रोत्साहन योजनाओं से यह बदलाव हुआ है।
खेल मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि सरकार ने अपना काम बड़ी हद तक कर दिया है अब खिलाड़ियों के युवा कंधों पर यह जिम्मेदारी है कि वह ओलंपिक स्तर की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में प्रदेश और देश का नाम रोशन करें। प्रतिभागी खिलाड़ी को उत्साहित करते हुए खेल मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि अगर वे खेल के क्षेत्र में नाम कमाते हैं तो उसके यश की कोई सीमा रेखा नहीं होगी। खेल में चैंपियन बनने पर खिलाड़ी की पहचान ग्लोबल हो जाती है।
इस अवसर पर अल्मोड़ा विधायक मनोज तिवारी, भाजपा जिला अध्यक्ष महेश नयाल, मेयर अजय वर्मा, जिलाधिकारी आलोक पाण्डेय, पूर्व जिला अध्यक्ष रवि रौतेला, विनीत बिष्ट, पूर्व चेयरमैन डीसीबी ललित लटवाल, द्रोणाचार्य अवार्डी कोच डीके सेन, बैडमिंटन एसोसिएशन प्रदेश सचिव बीएस मनकोटी, द्रोणाचार्य अवार्डी कोच लियाकत अली खान, गोपाल खोलिया, भाजपा नगर महामंत्री देवेन्द्र भट्ट, नगर कांग्रेस अध्यक्ष ताराचंद जोशी आदि मौजूद रहे।
देहरादून। प्रदेश के कृषि मंत्री गणेश जोशी से उनके कैंप कार्यालय में कुमाऊं गढ़वाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष पवन अग्रवाल के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने राज्य में कार्यरत कृषि आधारित उद्योगों पर लागू मण्डी शुल्क एवं विकास उपकर को उत्तर प्रदेश की तर्ज पर युक्तिसंगत बनाए जाने की मांग रखी।
प्रतिनिधिमंडल ने कृषि मंत्री को अवगत कराया कि उत्तराखण्ड में वर्तमान मण्डी शुल्क एवं विकास उपकर की दरें उत्तर प्रदेश की तुलना में अधिक हैं, जिससे कृषि आधारित उद्योगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य के अधिकांश राइस मिल, फ्लोर मिल, फ्रोजन फूड, मसाला प्रसंस्करण एवं प्लाईवुड उद्योगों को स्थानीय स्तर पर पर्याप्त कच्चा माल नहीं मिल पाता, जिसके चलते उन्हें बाहरी राज्यों से आयात करना पड़ता है।
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि जहां उत्तर प्रदेश सरकार ने मण्डी शुल्क एवं विकास उपकर की दरें घटाकर 1.5 प्रतिशत कर दी हैं, वहीं उत्तराखंड में यह दरें 2.5 प्रतिशत हैं। उन्होंने मांग की कि उत्तराखण्ड में मण्डी शुल्क को घटाकर 1 प्रतिशत एवं विकास उपकर को 5 प्रतिशत किए जाने पर विचार किया जाए, ताकि उद्योगों को राहत मिल सके और राज्य में निवेश को बढ़ावा मिले।
कृषि मंत्री गणेश जोशी ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार उद्यमियों, किसानों एवं औद्योगिक विकास के हित में कार्य कर रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य में औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन एवं निवेश संवर्धन को दृष्टिगत रखते हुए मण्डी शुल्क एवं विकास उपकर से संबंधित मांग पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में पर्यटन विभाग बनाएगा मास्टर प्लान
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के क्रम में प्रमुख सचिव आरके सुधांशु ने सचिव पर्यटन को सभी धार्मिक स्थलों पर भीड़ नियंत्रण, प्रवेश- निकास व्यवस्था सहित अन्य जरूरी सुविधाएं जुटाने के लिए मास्टर प्लान तैयार करने के आदेश जारी कर दिए हैं।
गत 27 जुलाई को हरिद्वार स्थित मनसा देवी मंदिर में हुई दुखद दुर्घटना के तत्काल बाद सीएम पुष्कर सिंह धामी ने मौका मुआयना कर, स्थिति का जायजा लिया था। इसके बाद मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को उत्तराखंड के प्रमुख तीर्थस्थलों पर आने वाले यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए विस्तृत मास्टर प्लान बनाने के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री आरके सुधांशु ने सचिव पर्यटन को आदेश जारी करते हुए, जल्द से जल्द इस दिशा में कार्रवाई शुरु करने के निर्देश दिए हैँ। इसमें खासकर ऐसे तीर्थ स्थलों को शामिल किया जाएगा, जहां ज्यादा तीर्थ यात्री आते हैं। मास्टर प्लान के निर्माण और इसके क्रियान्वयन में दोनों मंडलों के मंडलायुक्तों का विशेष तौर पर सहयोग लेने के लिए कहा गया है। साथ ही स्पष्ट आदेश दिए गए हैं कि यदि तीर्थ स्थलों के मार्गों पर अवैध अतिक्रमण हुआ है तो उन्हें प्राथमिकता के आधार पर हटाया जाए।
मास्टर प्लान में शामिल होगा
भीड़ नियंत्रण व्यवस्था
धारण क्षमता का विकास
पृथक प्रवेश एवं निकास मार्ग
प्रतीक्षा के लिए अतिरिक्त स्थान
आपातकालीन निकासी व्यवस्था
स्वच्छ पेयजल, शौचालय, प्राथमिक उपचार
सुगठित सूचना एवं मार्गदर्शन प्रणाली
पार्किंग व्यवस्था
पर्याप्त सुरक्षा बलों की तैनानी
उत्तराखंड में प्रति वर्ष करोड़ों तीर्थ यात्री आते हैं। इसलिए तीर्थ यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए सभी तीर्थ स्थलों का मास्टर प्लान बनाया जाएगा। तीर्थ स्थलों के आस पास जनसुविधाएं विकसित करते हुए, यात्रा को ज्यादा सुव्यवस्थित किया जाएगा।
पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड
मुख्यमंत्री धामी से नंदा देवी राजजात समिति के प्रतिनिधिमंडल ने की भेंट
देहरादून| मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुख्यमंत्री आवास में श्री नंदादेवी राजजात समिति के अध्यक्ष डॉ राकेश कुंवर के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने भेंट की | मुख्यमंत्री धामी एवं प्रतिनिधिमंडल के मध्य वर्ष 2026 में आयोजित होने वाली मां नंदा देवी राजजात यात्रा की तैयारियों एवं कुशल प्रबंधन से संबंधित विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा हुई |
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वर्ष 2026 में आयोजित होने वाली मां नंदा देवी राजजात यात्रा के सकुशल व सफल संचालन तथा इसे भव्य बनाने को लेकर शासन स्तर पर वरिष्ठ अधिकारियों को विभिन्न निर्देश दिए गए हैं | अधिकारियो को प्रभावी समेकित कार्ययोजना तैयार कर वर्ष 2025 के अंत तक सभी तैयारियां पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं |
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह यात्रा उत्तराखण्ड की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा का प्रतीक है। इसके गरिमामय आयोजन हेतु सभी विभागों को परस्पर समन्वय से कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। यात्रा से अधिकाधिक स्थानीय लोक कलाकारों, ग्राम पंचायतों एवं स्वयंसेवी संस्थाओं को जोड़ने का प्रयास किया जाएगा |
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा की गई घोषणा के अनुपालन में समाज कल्याण विभागान्तर्गत संचालित वृद्धावस्था पेंशन योजना की भांति दिव्यांग पेंशन योजना को भी सरलीकृत किया गया है, प्रदेश में दिव्यांग पेंशन धारकों के हित में मुख्यमंत्री द्वारा घोषणा की गई थी कि वृद्धावस्था पेंशन योजना की तरह ही दिव्यांग पेंशन योजना को सरलीकृत करते हुए ऐसे समस्त दिव्यांग भी पेंशन हेतु पात्र होंगे जिनके पुत्र/पौत्र 20 वर्ष से अधिक आयु के होंगे, का क्रियानयन सुनिश्चित किया जाय।
मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुपालन में सचिव समाज कल्याण डॉ0 श्रीधर बाबू अद्दांकी द्वारा निदेशक समाज कल्याण को संबोधित पत्र में निर्देश दिये गये है कि राज्य में दिव्यांग पेंशन योजनान्तर्गत ऐसे लाभार्थी, जो निर्धारित मासिक आय सीमा रू0 4000/- की पात्रता पूर्ण करते हों, के पुत्र / पौत्र 20 वर्ष से अधिक आयु के होने पर भी पेंशन हेतु पात्र होंगे। इसके अतिरिक्त बी०पी०एल० श्रेणी के लाभार्थी, जिनके पुत्र/पौत्र 20 वर्ष या उससे अधिक आयु के हैं, भी पेंशन हेतु पात्र होंगे। उन्होंने इस व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से लागू किये जाने की भी अपेक्षा की है।
राज्यपाल ने एनएसएस स्वयंसेवकों को दी बधाई, कहा- ‘सेवा और अनुशासन की मिसाल हैं आप’
देहरादून। गणतंत्र दिवस परेड 2025 में प्रतिभाग करने वाले राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) उत्तराखण्ड इकाई के पांच स्वयंसेवकों ने मंगलवार को राजभवन में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) से भेंट की। इन स्वयंसेवकों में राहुल कान्तिपाल, अनुराग सिंह पंवार, तनुजा रावत, अंजली रावत और मेघा शर्मा शामिल रहे, जिन्होंने कर्तव्य पथ, नई दिल्ली पर आयोजित परेड में उत्तराखण्ड का गौरवपूर्ण प्रतिनिधित्व किया।
राज्य एनएसएस अधिकारी डॉ. सुनैना रावत ने जानकारी दी कि गणतंत्र दिवस शिविर के लिए उत्तराखण्ड से 16 स्वयंसेवकों का चयन हुआ था, जिनमें से 5 श्रेष्ठ स्वयंसेवकों ने 1 से 31 जनवरी 2025 तक दिल्ली शिविर में सहभागिता की और 26 जनवरी को आयोजित परेड में भाग लिया।
राज्यपाल ने स्वयंसेवकों को बधाई देते हुए कहा कि एनएसएस सेवा, अनुशासन और राष्ट्रीय चेतना की मिसाल है। गणतंत्र दिवस विशेष शिविर केवल सम्मान का अवसर नहीं, बल्कि विविधता में एकता के अनुभव, संवाद और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का भी माध्यम है।
राज्यपाल ने कहा कि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और अन्य गणमान्य व्यक्तियों से भेंट का अनुभव युवाओं के जीवन में प्रेरणा का स्रोत बनेगा। यह गौरवपूर्ण अवसर उनके कंधों पर सामाजिक जिम्मेदारी का भी आह्वान है।
उन्होंने ‘‘एक पेड़ माँ के नाम’’ अभियान के तहत 28,000 से अधिक वृक्षारोपण, स्वच्छता ही सेवा अभियान, रक्तदान शिविर जैसे सामाजिक कार्यों में एनएसएस की भागीदारी की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह प्रयास केवल सराहनीय नहीं, प्रेरणादायक भी हैं। स्वयंसेवकों द्वारा उन्हें भेंटस्वरूप दिया गया पौधा उनकी भावनात्मक सहभागिता का प्रतीक है।
राज्यपाल ने कहा कि ‘‘स्वयं से पहले आप’’ की भावना को जीना ही एनएसएस की आत्मा है। जब युवा सोचते हैं कि ‘‘मैं समाज के लिए क्या कर सकता हूं’’, तभी सशक्त और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में ठोस कदम बढ़ते हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में कोई न कोई विशेष लक्ष्य अवश्य निर्धारित करें।
इस अवसर पर विशेष प्रमुख सचिव अमित कुमार सिन्हा, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के क्षेत्रीय निदेशक राजेश तिवारी और डीआईटी विश्वविद्यालय के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. नवीन सिंघल उपस्थित रहे।
मनसा देवी सहित 5 प्रमुख मंदिरों का विश्लेषण कर तैयार होगा विशेष SOP
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अहम बैठक
देहरादून। राज्य के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को लेकर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने मंगलवार को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने कहा कि हाल ही में मनसा देवी मंदिर में भगदड़ जैसी घटनाएं चिंताजनक हैं। ऐसी किसी भी पुनरावृत्ति को रोकने के लिए प्रदेश के उन सभी धार्मिक स्थलों को चिन्हित किया जाए, जहां महत्त्वपूर्ण अवसरों पर अत्यधिक भीड़ जुटती है। इन स्थलों पर अल्पकालिक और दीर्घकालिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि धार्मिक स्थलों की ओर जाने वाले मार्गों से अतिक्रमण हटाकर चौड़ीकरण कराया जाए। इसके लिए नियमित अभियान चलाए जाएं। भीड़ नियंत्रण के लिए तकनीक का अधिकतम उपयोग किया जाए और मार्गों में श्रद्धालुओं को अस्थायी रूप से रोके जाने हेतु उपयुक्त स्थल तैयार किए जाएं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक धार्मिक स्थल के लिए रूट और सर्कुलेशन प्लान तैयार किया जाए, जिससे अचानक भीड़ को व्यवस्थित किया जा सके। भीड़ के आकलन और नियंत्रण के लिए तकनीकी समाधान अपनाए जाएं।
मुख्य सचिव ने निर्देशित किया कि पहले चरण में मनसा देवी, चंडी देवी, नीलकंठ, कैंचीधाम और पूर्णागिरि मंदिर का विशेषज्ञ टीम द्वारा विश्लेषण कराया जाए। यह टीम मंदिर परिसरों का अध्ययन कर भीड़ प्रबंधन, निकासी योजनाओं और बॉटल नेक क्षेत्रों की पहचान करेगी तथा एक प्रभावी SOP (मानक संचालन प्रक्रिया) तैयार करेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मंडलायुक्त स्तर के अधिकारी संबंधित जिलों में इस कार्य के नोडल अधिकारी होंगे और स्थानीय प्रशासन व मंदिर समिति से समन्वय सुनिश्चित करेंगे।
बैठक में पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव शैलेश बगौली, धीराज सिंह गरब्याल, आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। कुमायूं मंडल के आयुक्त दीपक रावत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुए।
2019 से खटीमा में संचालित केंद्रीय विद्यालय को मिला अपना भवन
खटीमा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को खटीमा में अखिल भारतीय शिक्षा समागम के अन्तर्गत आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग करते हुए ₹ 26.23 करोड़ की लागत से निर्मित केंद्रीय विद्यालय, खटीमा का लोकार्पण किया। इस दौरान उन्होंने विद्यालय परिसर में पौधरोपण भी किया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह सभी के लिए हर्ष और गौरव के क्षण हैं। देश में शिक्षा के क्षेत्र में आई नई क्रांति के 5 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर पर खटीमा में भी ज्ञान और विज्ञान के नए युग का आरंभ हो रहा है। मुख्यमंत्री ने खटीमा को केंद्रीय विद्यालय की सौगात देने के सभी खटीमा वासियों की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा केंद्रीय विद्यालय की शिक्षा हमारी सेना, अर्धसैनिक बलों तथा उन तमाम कार्मिकों के बच्चों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा यदि मेरे छात्र जीवन के दौरान खटीमा में केंद्रीय विद्यालय होता, तो वो स्वयं भी केन्द्रीय विद्यालय के छात्र होते। उन्होंने कहा खटीमा के छात्र-छात्राओं को शिक्षा के लिए यहां से पलायन न करना पड़े, इसके लिए उन्होंने विधायक रहते हुए खटीमा में केंद्रीय विद्यालय की स्थापना के लिए हर संभव प्रयास किए और आज उसी विद्यालय को अपना भवन भी मिल गया है। उन्होंने कहा खटीमा क्षेत्र में केंद्रीय विद्यालय की स्थापना से यहाँ के बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलने और उनके समग्र विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में वर्ष 2020 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से बच्चों को रोजगार परख शिक्षा के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करने में भी सहायता मिल रही है। इसमें शोध और अनुसंधान को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे बच्चों और युवाओं में वैज्ञानिक सोच का विकास भी हो रहा है। उन्होंने कहा राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य है। जिसके अंतर्गत हमने प्रदेश के 5600 से अधिक आंगनवाड़ी केन्द्रों में बालवाटिका कक्षाओं की शुरुआत कर एक महत्वपूर्ण और दूरगामी शैक्षणिक पहल की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खटीमा उनका घर है और वहां के निवासी उनके परिवार के सदस्य। उन्होंने कहा खटीमा से ही उन्होंने जनसेवा की यात्रा प्रारंभ की थी। खटीमा की माटी और लोगों से उन्हें हमेशा ऊर्जा और प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा राज्य सरकार ने खटीमा में स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल से लेकर बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। खटीमा में हाईटेक बस स्टैंड, आधुनिक आईटीआई और पॉलीटेक्निक कॉलेज तथा 100 बेड के नए अस्पताल परिसर, राष्ट्रीय स्तर के अत्याधुनिक खेल स्टेडियम का निर्माण कर बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया है। क्षेत्र में कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने हेतु गदरपुर और खटीमा बाईपास का निर्माण, नौसर में पुल निर्माण के साथ ही पूरे क्षेत्र में सड़कों का व्यापक नेटवर्क विकसित किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने राजकीय महाविद्यालय खटीमा में एमकॉम और एमएससी की कक्षाएं शुरू करवाई हैं। जनजाति बाहुल्य क्षेत्र में एकलव्य विद्यालय का संचालन भी प्रारंभ किया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के प्रत्येक वर्ग के कल्याण के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ निरंतर कार्य कर रही है। जिसके परिणाम स्वरूप एसडीजी इंडेक्स रिपोर्ट में सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने में पूरे देश में हमारा राज्य प्रथम स्थान पर पहुंचा है। उन्होंने कहा कि बीते वर्ष में बेरोजगारी दर में रिकॉर्ड 4.4 प्रतिशत की कमी लाने में सफलता प्राप्त की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में घृणित मानसिकताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है। राज्य में सख्त दंगारोधी और धर्मांतरण विरोधी कानून को लागू किया गया है। राज्य में साढ़े छह हजार एकड़ से अधिक की सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है। 200 से अधिक अवैध मदरसों को सील करने के साथ 500 से अधिक अवैध संरचनाओ को भी हटाया है। प्रदेश में ऑपरेशन कालनेमि भी प्रारंभ किया है जिसके माध्यम से हम राज्य में सनातन धर्म को बदनाम करने वाले पाखंडियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रहे हैं। राज्य में समान नागरिक संहिता कानून लागू किया गया है। इसके साथ राज्य के 23 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी देने का कार्य किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य से भ्रष्टाचार रूपी दीमक को जड़ से समाप्त करने के लिए ज़ीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्य किया जा रहा है। इसी का परिणाम है कि पिछले तीन वर्षों में हमने भ्रष्टाचार में लिप्त आईएएस, पीसीएस सहित करीब 200 से अधिक लोगों को जेल की सलाखों के पीछे पहुँचाया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार देवभूमि उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के अपने विकल्प रहित संकल्प को पूर्ण करने हेतु निरंतर प्रयास कर रही है।
इस दौरान कार्यक्रम में मेयर विकास शर्मा, दर्जा मंत्री अनिल कपूर डब्बू, शंकर कोरंगा, नगर पालिका अध्यक्ष रमेश चंद जोशी, जिलाध्यक्ष भाजपा कमल जिंदल, पूर्व विधायक डॉ प्रेम सिंह राणा, राजेश शुक्ला, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मणिकांत मिश्रा, एवं शिक्षक व छात्र-छात्राएं आदि मौजूद रहे।
जनता दर्शन में मिली शिकायत के बाद डीएम ने दी तुरंत कार्रवाई की हिदायत
देहरादून। जिलाधिकारी सविन बंसल ने आदेशों की अवहेलना और शासकीय कार्यों में लापरवाही बरतने पर बड़ी कार्रवाई करते हुए माजरा क्षेत्र के राजस्व कानूनगो राहुल देव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। डीएम की इस कार्रवाई से सरकारी महकमे में हड़कंप मच गया है और लापरवाह कर्मचारियों में डर का माहौल बन गया है।
दरअसल, गांधी रोड निवासी रविंद्र सिंह ने जनता दर्शन कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी के समक्ष अपनी समस्या रखी। उन्होंने बताया कि उनकी भूमि के संबंध में धारा 28 अंतर्गत 16 मई 2018 को तत्कालीन कलेक्टर द्वारा आदेश पारित किए गए थे। आदेश के अनुसार, भूमि का परवाना तैयार कर आर-6 में 2023 में दर्ज किया गया तथा दिसंबर 2023 में संबंधित कानूनगो को इसे क्रियान्वित करने के लिए सौंपा गया।
हालांकि, रविंद्र सिंह के अनुसार, कई बार तहसील कार्यालय के चक्कर लगाने के बावजूद अभी तक नक्शा दुरुस्त नहीं किया गया है। इस पर डीएम ने गंभीरता दिखाते हुए तहसीलदार सदर को तत्काल कार्रवाई कर निलंबन की पत्रावली प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
जांच के बाद संबंधित राजस्व कानूनगो राहुल देव को आदेशों की अनदेखी और लंबित पत्रावलियों के आधार पर निलंबित कर दिया गया। जिलाधिकारी की इस सख्त कार्रवाई को अन्य कर्मचारियों के लिए चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
देहरादून। कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने आज पीएम श्री केन्द्रीय विद्यालय बीरपुर, देहरादून में आयोजित नई शिक्षा नीति 2020 की पाँचवीं वर्षगांठ कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मंत्री गणेश जोशी ने छात्र-छात्राओं द्वारा विभिन्न कलाओं में तैयार किए गए रचनात्मक कार्यों का अवलोकन तथा उत्कृष्ट पीएम श्री विद्यालय बीरपुर के पट्टिका का अनावरण भी किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 ने 34 वर्ष पुरानी राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 को प्रतिस्थापित कर भारत की शिक्षा प्रणाली में एक परिवर्तनकारी बदलाव की शुरुआत की है। मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि इससे पूर्व भारत में केवल दो शिक्षा नीतियां वर्ष 1968 और 1986 में लागू की गई थीं। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति का उद्देश्य छात्रों को 21वीं सदी की वैश्विक चुनौतियों के लिए तैयार करना है। इस नीति के तहत कक्षा 6 से ही व्यावसायिक शिक्षा की शुरुआत की जाएगी, जिससे छात्र विभिन्न ट्रेडों, कौशलों और उद्यमिता के लिए तैयार होंगे। उन्होंने कहा कि नीति में डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने और शिक्षण में तकनीकी समावेशन हेतु राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी मंच की स्थापना का भी प्रावधान किया गया है। यह नीति छात्रों के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास पर ज़ोर देती है और उनमें आलोचनात्मक सोच और रचनात्मकता को बढ़ावा देती है।
कैबिनेट मंत्री जोशी ने कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित यह नीति अगर पूर्ण रूप से लागू होती है, तो भारत जल्द ही वैश्विक ज्ञान केंद्र के रूप में उभरेगा और अग्रणी देशों की श्रेणी में शामिल होगा। इस दौरान कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने बच्चों को जीवन में सफल होने के 05-डी के मूल मंत्र भी दिए और बच्चों को जीवन में आगे बढ़ने के लिए भी प्रेरित किया। कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि पढ़ाई के साथ-साथ खेलों का होना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ साथ नैतिक शिक्षा और चरित्र शिक्षा का होना भी बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आधुनिक बनना है तो विचारों में आधुनिक बने। उन्होंने विश्वास जताते हुए कहा कि यह नीति भारत की शिक्षा प्रणाली में व्यापक बदलाव लाएगी।
इस अवसर पर अध्यक्ष वीएमसी कर्नल अतीत हेसन, प्रधानाचार्य बसंती खम्पा, उप प्रधानाचार्य अल्का थंड़ियाल, आरती उनियाल, डी. एस लखेड़ा, एनसीसी अधिकारी अनुज कुमार सहित छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।
