देहरादून। कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने आज ऋषिकेश स्थित पीएम श्री आई०डी०पी०एल० इंटर कॉलेज, वीरभद्र में भारतीय साहित्य संगम (राष्ट्रीय साहित्यकारों की अखिल भारतीय संस्था) द्वारा आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन एवं साहित्यकार सम्मान समारोह में बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग किया।
कार्यक्रम के दौरान कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने विभिन्न प्रतिष्ठित साहित्यकारों की पुस्तकों का विमोचन किया तथा उत्कृष्ट योगदान देने वाले साहित्यकारों को सम्मानित भी किया। उन्होंने भारतीय साहित्य संगम द्वारा आयोजित ऑनलाइन व्याख्यानमाला एवं अखिल भारतीय कवि सम्मेलन की 330 श्रृंखलाओं के माध्यम से विश्व कीर्तिमान स्थापित करने को अत्यंत सराहनीय उपलब्धि बताया।
मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर लंदन बुक ऑफ रिकॉर्ड्स द्वारा सम्मानित किया जाना भारतीय साहित्य की वैश्विक पहचान और स्वीकार्यता का सशक्त प्रमाण है। उन्होंने संस्था के पदाधिकारियों को इस उपलब्धि के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि इस आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों—मुंबई, दिल्ली सहित अन्य स्थानों से पधारे प्रतिष्ठित साहित्यकार, लेखक एवं कवि अपनी रचनात्मक उपस्थिति से समारोह को गौरवान्वित कर रहे हैं। मंत्री ने कहा कि आज के समय में जब समाज अनेक चुनौतियों से गुजर रहा है, तब साहित्य और आध्यात्मिक चिंतन मानवता को जोड़ने, नैतिक मूल्यों को सहेजने और नई पीढ़ी को सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि एक संवेदनशील और संस्कारित समाज के निर्माण में साहित्यकारों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार साहित्य, कला और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सदैव प्रतिबद्ध रही है और भविष्य में भी ऐसे रचनात्मक प्रयासों को हरसंभव सहयोग देती रहेगी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज में सकारात्मक चेतना के प्रसार में भी सहायक होते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा और साहित्य समाज को शसक्त बनाता है। इस दौरान कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने छात्र छात्राओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित भी किया।
इस अवसर पर संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. धीरेंद्र रांगड़, डॉ. राजेश डोभाल, डॉ. देवी दत्त अविनाशी, शंभु प्रसाद भट्ट, संजीव कुमार चौहान, निरंजन डोभाल सहित अनेक साहित्यप्रेमी एवं गणमान्य लोग छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री चैंपियंस ट्रॉफी का जोशीला आगाज
चार स्तर पर होगी प्रतियोगिता, चैंपियन को मिलेंगे 5 लाख
रोशनाबाद/हरिद्वार। हरिद्वार के योगस्थली खेल परिसर में मुख्यमंत्री चैंपियंस ट्रॉफी का जोशीला आगाज हुआ। न्याय पंचायत से लेकर राज्य स्तर तक चार लेवल पर आयोजित होने वाली इस प्रतियोगिता में लगभग 2 लाख खिलाड़ी शिरकत करेंगे।
योगस्थली खेल परिसर में खेल मंत्री रेखा आर्या ने ट्रॉफी का ध्वजारोहण और मशाल को प्रज्ज्वलित करके प्रतियोगिता का शुभारंभ किया। खेल महाकुंभ को इस साल नए प्रारूप में मुख्यमंत्री चैंपियंस ट्रॉफी 2025-26 के रूप में आयोजित किया जा रहा है। प्रतियोगिता न्याय पंचायत, विधानसभा क्षेत्र, संसदीय क्षेत्र और राज्य स्तरीय चार चरणों में आयोजित की जा रही है।
उद्घाटन अवसर पर खेल मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि इस बार कुल 26 खेल स्पर्धाएं रखी गई हैं, जिनमें आधुनिक खेलों के साथ परंपरागत खेलों को भी शामिल किया गया है।
खेल मंत्री रेखा आर्या ने बताया कि सांसद ट्रॉफी जीतने वाली टीम को 2 लाख और विधानसभा ट्रॉफी जीतने वाली टीम को 1 लाख रुपये की नगद पुरस्कार राशि मिलेगी।
खेल मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि भाजपा सरकार ने खिलाड़ियों के हित के लिए नीतिगत फैसले किए जिनमें बाद राज्य में खेलों को लेकर माहौल बदला और एक खेल संस्कृति विकसित होनी शुरू हुई।
उन्होंने कहा कि इस चैंपियनशिप के विजेता भी सरकारी नौकरियों में चार प्रतिशत आरक्षण के हकदार होंगे।
खेल मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि युवा खेलों को टाइम पास के रूप में नहीं बल्कि करियर के रूप में अपनाएं । अगर वें 100% अनुशासन और समर्पण खेल को देंगे तो उन्हें चैंपियन बनने से कोई रोक नहीं सकता।
इस अवसर पर विधायक आदेश चौहान भाजपा जिला अध्यक्ष आशुतोष शर्मा, महामंत्री हीरा सिंह, विशेष प्रमुख खेल सचिव अमित सिन्हा, खेल निदेशक आशीष चौहान, अपर निदेशक अजय अग्रवाल, शक्ति सिंह, जिला खेल अधिकारी वडाली गुरुंग, लव शर्मा, वीरेंद्र पाल आदि उपस्थित रहे।
नेशनल रिकॉर्ड तोड़ने पर मिलेंगे एक लाख
राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ने वाले खिलाड़ियों के लिए 1 लाख रुपये की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि घोषित की गई है। प्रतियोगिता के दौरान जीते गए पदकों के आधार पर अंकों का योग करके समग्र चैंपियन का चयन किया जाएगा। चैंपियन चुने गए खिलाड़ी को मुख्यमंत्री ट्रॉफी और ₹5 लाख की धनराशि दी जाएगी।
मंत्री संग फोटो के लिए मची होड़
कार्यक्रम समाप्त होने के बाद भी काफी देर तक खेल मंत्री रेखा आर्या आयोजन स्थल पर ही रुकी रही क्योंकि हजारों खिलाड़ी उनके साथ फोटो खिंचवाना चाहते थे। मंत्री ने भी उन्हें निराश नहीं किया और खिलाड़ियों के बीच उन्होंने लगभग 1 घंटे का समय गुजारा। इस दौरान उन्होंने सैकड़ो खिलाड़ियों से अलग-अलग बातचीत करके उनका उत्साह बढ़ाया और खिलाड़ियों को भी मंत्री के साथ सेल्फी लेने का पर्याप्त अवसर मिला।
जनवरी 2026 से शुरू होगा तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम
देहरादून। राज्य में राफ्टिंग पर्यटन को और सुरक्षित व व्यवस्थित बनाने की दिशा में सरकार ने अहम कदम उठाया है। अब गंगा सहित अन्य नदियों में राफ्टिंग कराने वाले गाइडों के लिए प्राथमिक चिकित्सा और सीपीआर का प्रशिक्षण अनिवार्य किया जाएगा, ताकि किसी भी आपात स्थिति में पर्यटकों को तुरंत मदद मिल सके।
सचिवालय में आयोजित बैठक में पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल ने राफ्टिंग एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के साथ राज्य में राफ्टिंग गतिविधियों की समीक्षा की। बैठक में तय किया गया कि प्रदेश के करीब 900 राफ्टिंग गाइडों को तीन दिवसीय फर्स्ट एड और सीपीआर प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण चरणबद्ध तरीके से यूएसए स्थित हैनीफिल सेंटर संस्था के सहयोग से आयोजित किया जाएगा, जिसकी शुरुआत जनवरी 2026 के पहले सप्ताह से होगी।
बैठक में राफ्टिंग गाइडों की अधिकतम आयु सीमा को 50 वर्ष से बढ़ाकर 60 वर्ष करने के प्रस्ताव पर भी सहमति बनी। इसके साथ ही राफ्टिंग एसोसिएशन की ओर से उठाए गए अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हुई। इनमें नदी तटों पर राफ्टिंग कैंपों की स्थापना, गंगा नदी की वहन क्षमता का पुनर्मूल्यांकन, मुख्य मार्ग से राफ्टिंग पिकअप प्वाइंट तक पहुंच व्यवस्था में सुधार और राफ्टिंग पर्यटकों की सुरक्षा के लिए एंबुलेंस सुविधा की व्यवस्था शामिल है।
पर्यटन सचिव ने आश्वासन दिया कि राफ्टिंग से जुड़े इन सभी विषयों पर शीघ्र प्रभावी निर्णय लिए जाएंगे, ताकि प्रदेश में साहसिक पर्यटन को सुरक्षित और आकर्षक बनाया जा सके।
रानीखेत में प्रातःकालीन भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने स्थानीय नागरिकों के साथ किया चाय पर संवाद
रानीखेत (अल्मोड़ा)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनपद अल्मोड़ा के रानीखेत में प्रातःकालीन भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने स्थानीय नागरिकों के साथ चाय पर संवाद कर ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान को लेकर फीडबैक लिया। लोगों ने अभियान की सराहना करते हुए इसे जनसमस्याओं के समाधान की दिशा में प्रभावी पहल बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अभियान के माध्यम से शासन और जनता के बीच विश्वास, संवाद और सहभागिता को मजबूती मिल रही है। सरकार सीधे आमजन से जुड़कर उनकी समस्याओं को समझ रही है और उनके त्वरित निस्तारण के लिए ठोस कदम उठा रही है।
प्रातः भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री की मुलाकात दिल्ली से आए पर्यटकों से भी हुई। उन्होंने पर्यटकों से शीतकालीन यात्रा अनुभव के बारे में जानकारी ली। पर्यटकों ने उत्तराखंड में पर्यटन सुविधाओं और व्यवस्थाओं की प्रशंसा करते हुए सकारात्मक प्रतिक्रिया दी, जिसे मुख्यमंत्री ने जनहित में निरंतर कार्य करने की प्रेरणा बताया।
विभागीय मंत्री डा. धन सिंह रावत ने तैनाती प्रस्ताव को दी मंजूरी
कहा, फैकल्टी की कमी होगी दूर, शिक्षण व प्रशिक्षण कार्यों में होगी गुणात्मक वृद्धि
देहरादून। प्रदेश के राजकीय मेडिकल कॉलेजों में अब फैकल्टी की कमी आड़े नहीं आयेगी। चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत राज्य चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से विभिन्न संकायों में चयनित 140 असिस्टेंट प्रोफेसरों को प्रदेश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में तैनाती दे दी गई है। सूबे के चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने चयनित असिस्टेंट प्रोफेसरों के तैनाती प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इन नियुक्तियों से मेडिकल कॉलेजों में शैक्षणिक वातावरण सुदृढ़ होगा तथा शिक्षण, प्रशिक्षण एवं शोधात्मक कार्यों को नई गति मिलेगी।
राज्य सरकार प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा को उच्च मानकों के अनुरूप विकसित करने में निरंतर प्रयासरत है। सरकार मेडिकल कॉलेजों में जहां आधुनिक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध करा रही है वहीं विशेषज्ञ चिकित्सकों की भी बड़े स्तर पर तैनाती कर रही है। इसी क्रम में सूबे के चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने राज्य चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से विभिन्न संकायों में चयनित 140 असिस्टेंट प्रोफेसरों के तैनाती प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके साथ ही इन चयनित संकाय सदस्यों को प्रदेश के विभिन्न राजकीय मेडिकल कॉलेजों में प्रथम तैनाती दे दी गई है। जिसमें राजकीय दून मेडिकल कॉलेज में विभिन्न संकायों में 41 असिस्टेंट प्रोफेसरों को तैनाती दी गई है। इसी प्रकार राजकीय मेडिकल हरिद्वार में 12, राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर में 33, राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी में 24, राजकीय मेडिकल कॉलेज रूद्रपुर में 02 तथा राजकीय मेडिकल कॉलेज अल्मोड़ा में 28 असिस्टेंट प्रोफेसरों को प्रथम तैनाती दी गई है। मेडिकल कॉलेजों में दो दर्जन से अधिक संकायों में संकाय सदस्यों की नियुक्ति की गई है। जिसमें विशेष तौर पर एनेस्थीसिया संकाय में 15 असिस्टेंट प्रोफेसरों को तैनाती मिली है। इसी प्रकार एनाटॉमी व पीडियाट्रिक्स में 7-7, ब्लड बैंक, रेडियोथेरेपी व डर्मेटोलॉजी में 3-3, कम्युनिटी मेडिसिन व पैथोलॉजी 12-12, डेंटिस्ट्री 2, इमरजेंसी व फॉरेन्सिक मेडिसिन 1-1, जनरल मेडिसिन, जनरल सर्जरी, रेस्पीरेट्री मेडिसिन व फार्माकोलॉजी 5-5, माइक्रोबॉयोलॉजी व आर्थोपीडिक्स 9-9, ऑब्स्टेट्रीक एंड गायनी 8, ऑप्थैल्मोलॉजी 4 तथा ओटो-राइनो-लेरिंगोलॉजी, बॉयोकैमेस्ट्री, साईकाइट्री व फिजियोलॉजी संकाय में 6-6 असिस्टेंट प्रोफेसरों को तैनाती मिली है। मेडिकल कॉलेजों में मानकों के अनुरूप प्रत्येक संकाय में फैकल्टी की तैनाती से न केवल मेडिकल छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी बल्कि प्रशिक्षण व शोध कार्यों को भी गति मिलेगी। इसके साथ ही मेडिकल कॉलेजों से सम्बद्ध चिकित्सालयों में स्वास्थ्य सेवाएं और सुदृढ़ होगी जिससे वहां आने वाले रोगियों को बेहतर उपचार मिल सकेगा।
बयान-
प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा को उच्च मानकों के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। इसके लिये राज्य सरकार द्वारा निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। मेडिकल कॉलेजों में आधुनिक चिकित्सा उपकरणों के साथ ही अनुभवी व प्रशिक्षित फैकल्टी की भी तैनाती की जा रही है। इसी कड़ी में चयन बोर्ड से चयनित 140 असिस्टेंट प्रोफेसरों को विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में प्रथम तैनाती दे दी गई है। असिस्टेंट प्रोफसरों की नई नियुक्ति से कॉलेजों में फैकल्टी की कमी दूर होगी जिससे शिक्षण, प्रशिक्षण एवं शोध कार्यों में गुणात्मक सुधार होगी ही साथ ही सम्बद्ध चिकित्सालयों में स्वास्थ्य सुविधाएं भी और मजबूत होगी।– डॉ. धन सिंह रावत, चिकित्सा शिक्षा मंत्री, उत्तराखंड।
अवैध निर्माण और भू-माफिया के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’, सख्त कार्रवाई जारी
शहर और आसपास के क्षेत्रों का विकास मास्टर प्लान और निर्धारित मानकों के अनुरूप ही होगा- बंशीधर तिवारी
देहरादून। मसूरी–देहरादून विकास प्राधिकरण द्वारा प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध प्लॉटिंग के विरुद्ध सख्त रुख अपनाते हुए ध्वस्तीकरण की कार्यवाही लगातार जारी है। एमडीडीए की टीमों द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में बिना स्वीकृति विकसित की जा रही कॉलोनियों, अवैध प्लॉटिंग, अनधिकृत सड़क कटान और नियमों के विपरीत किए गए निर्माणों को चिन्हित कर त्वरित कार्रवाई की जा रही है। प्राधिकरण का स्पष्ट संदेश है कि शहर और आसपास के क्षेत्रों का विकास केवल निर्धारित मानकों और स्वीकृत मास्टर प्लान के अनुरूप ही होगा। एमडीडीए को लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही थीं कि कुछ भू-माफिया और निजी डेवलपर्स नियमों को दरकिनार कर कृषि भूमि एवं अन्य श्रेणी की भूमि पर अवैध प्लॉटिंग कर रहे हैं। इन गतिविधियों से न केवल शहर की भौगोलिक संरचना और पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि आम नागरिकों को भी भ्रमित कर अवैध रूप से भूखंड बेचे जा रहे हैं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए एमडीडीए ने विशेष प्रवर्तन टीमें गठित की हैं, जो नियमित रूप से क्षेत्रवार निरीक्षण कर रही हैं।
प्राधिकरण की कार्रवाई के दौरान कई स्थानों पर अवैध रूप से विकसित की जा रही कॉलोनियों में बनाई गई आंतरिक सड़कें, बाउंड्री वॉल और प्लॉटिंग के अन्य ढांचे ध्वस्त किए गए। एमडीडीए ने स्पष्ट किया कि भविष्य में भी इस तरह की कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी और किसी भी स्तर पर दबाव या प्रभाव को स्वीकार नहीं किया जाएगा। आम नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे किसी भी भूमि या भूखंड की खरीद से पहले उसकी वैधानिक स्थिति की जांच अवश्य करें और एमडीडीए से स्वीकृति की पुष्टि करें। अवैध प्लॉटिंग न केवल शहरी अव्यवस्था को बढ़ावा देती है, बल्कि जल निकासी, यातायात, हरित क्षेत्र और बुनियादी सुविधाओं पर भी नकारात्मक प्रभाव डालती है। इसी को देखते हुए प्राधिकरण ने अवैध प्लॉटिंग और निर्माण के विरुद्ध ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाई है। प्रवर्तन कार्यवाही के साथ-साथ संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार नोटिस, सीलिंग और विधिक प्रक्रिया भी अमल में लाई जा रही है। एमडीडीए यह भी सुनिश्चित कर रहा है कि भविष्य में ऐसी गतिविधियों की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए नियमित मॉनिटरिंग, ड्रोन सर्वे और स्थानीय स्तर पर सूचना तंत्र को मजबूत किया जाए। प्राधिकरण का उद्देश्य केवल ध्वस्तीकरण नहीं, बल्कि आमजन में नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाना और सुनियोजित, सुरक्षित व पर्यावरण संतुलित विकास को बढ़ावा देना है।
उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी का बयान
मसूरी–देहरादून विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध प्लॉटिंग और अनधिकृत निर्माण के खिलाफ किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी। शहर और आसपास के क्षेत्रों का विकास मास्टर प्लान और निर्धारित मानकों के अनुरूप ही होगा। जो लोग नियमों को ताक पर रखकर अवैध प्लॉटिंग कर रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। आम नागरिकों से अपील है कि वे किसी भी प्रकार की भूमि खरीदने से पहले उसकी वैधानिक स्थिति की पुष्टि एमडीडीए से अवश्य करें, ताकि भविष्य में किसी तरह की परेशानी से बचा जा सके।
सचिव एमडीडीए मोहन सिंह बर्निया का बयान
एमडीडीए के सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि अवैध प्लॉटिंग के खिलाफ चल रही कार्रवाई पूरी तरह नियमों के अनुरूप और पारदर्शी है। प्रवर्तन टीमें नियमित रूप से क्षेत्रीय निरीक्षण कर रही हैं और जहां भी अनियमितता पाई जा रही है, वहां तत्काल कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण का उद्देश्य दंड देना नहीं, बल्कि शहर का सुनियोजित और सुरक्षित विकास सुनिश्चित करना है।
अल्मोड़ा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को अल्मोड़ा में सांसद खेल महोत्सव का शुभारंभ किया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने फुटबॉल और बैडमिंटन प्रतियोगिता का उद्घाटन किया तथा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खिलाड़ी श्रीमती एकता बिष्ट और खेल प्रशिक्षकों को सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर घोषणा की कि जनपद अल्मोड़ा में खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से जी.आई.सी. ग्राउंड में हॉकी एवं फुटबॉल के लिए दिन एवं रात्रि उपयोग हेतु बहुउद्देशीय आर्टिफिशियल टर्फ मैदान का निर्माण किया जाएगा। नगर निगम क्षेत्र में प्रकाश व्यवस्था को सुदृढ़ करने और स्वच्छ व हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने हेतु 200 सोलर लाइटें उपलब्ध कराई जाएंगी। हेमवती नंदन बहुगुणा स्टेडियम, अल्मोड़ा में 50 बिस्तरों की क्षमता वाला छात्रावास बनाया जाएगा। वहीं, हेमवती नंदन बहुगुणा स्टेडियम का बैडमिंटन कोर्ट अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार पुनर्निर्मित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की युवा शक्ति राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी है, जो अपने परिश्रम, प्रतिभा और संकल्प के बल पर सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत के स्वप्न को साकार करने की क्षमता रखती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में युवा शक्ति को राष्ट्र शक्ति मानकर ‘विकसित और आत्मनिर्भर भारत’ के निर्माण की दिशा में कार्य किया जा रहा है। उनकी प्रेरणा से “फिट युवा फॉर विकसित भारत” की थीम पर आयोजित हो रहा यह “सांसद खेल महोत्सव” केवल एक सामान्य खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि देश में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने का एक महाभियान है। यह हमारे गाँव-गाँव में छिपी खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने का सशक्त मंच प्रदान करने के साथ ही युवा शक्ति में अनुशासन, आत्मविश्वास, टीम भावना और संघर्षशीलता जैसे गुणों को विकसित करने का प्रभावी माध्यम बनेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी “खेलो इंडिया” और “फिट इंडिया मूवमेंट” जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से देश में खेल संस्कृति को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में राज्य सरकार प्रदेश में खेल संस्कृति को बढ़ावा दे रही है। 38वें राष्ट्रीय खेलों के भव्य एवं सफल आयोजन से उत्तराखंड “देवभूमि” के साथ-साथ “खेलभूमि” के रूप में भी स्थापित हुआ है। राष्ट्रीय खेलों में हमारे खिलाड़ियों ने 103 पदक जीतकर एक नया इतिहास रचा है। उत्तराखंड अब विश्वस्तरीय “स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर” के मामले में भी देश के प्रमुख राज्यों में गिना जाने लगा है और अब प्रदेश में राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन भी होने लगा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार राज्य में शीघ्र ही एक “स्पोर्ट्स लेगेसी प्लान” लागू करने जा रही है, जिसके अंतर्गत प्रदेश के आठ प्रमुख शहरों में 23 खेल अकादमियों की स्थापना की जाएगी। हल्द्वानी में उत्तराखंड का प्रथम खेल विश्वविद्यालय तथा लोहाघाट में एक महिला स्पोर्ट्स कॉलेज स्थापित करने की दिशा में भी तेज़ी से कार्य किए जा रहे हैं। प्रदेश में खेलों के समग्र विकास और खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से नई खेल नीति भी लागू की गई है, जिसके अंतर्गत राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक विजेता खिलाड़ियों को ‘आउट ऑफ टर्न’ सरकारी नौकरी प्रदान की जा रही है। ‘मुख्यमंत्री खेल विकास निधि’, ‘मुख्यमंत्री खिलाड़ी प्रोत्साहन योजना’, ‘मुख्यमंत्री उदियमान खिलाड़ी योजना’ तथा ‘खेल किट योजना’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से राज्य के उभरते युवा खिलाड़ियों को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अल्मोड़ा के समग्र विकास के लिए पर्यटन, रोजगार और कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने हेतु भी कई महत्वपूर्ण योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अंतर्गत पिछले चार वर्षों में अल्मोड़ा जनपद में ढाई सौ किलोमीटर से अधिक सड़कों का निर्माण किया गया है। साथ ही करोड़ों रुपये की लागत से विभिन्न मोटरमार्गों का निर्माण एवं नवीनीकरण भी किया गया है। लगभग 400 करोड़ रुपये की लागत से अल्मोड़ा- पौड़ी गढ़वाल-रुद्रप्रयाग को जोड़ने वाली सड़क का निर्माण कराया गया है। लगभग 922 करोड़ रुपये की लागत से अल्मोड़ा-बागेश्वर सड़क के चौड़ीकरण को भी मंजूरी दी गई है। ‘उड़ान योजना’ के अंतर्गत अल्मोड़ा में पर्यटन को बढ़ावा देने और आवागमन को सुगम बनाने के उद्देश्य से हेली सेवाएं प्रारंभ की गई हैं। फलसीमा में हेलीपोर्ट का निर्माण किया जा रहा है, जो क्षेत्र को बेहतर हवाई सेवाओं से जोड़ते हुए आवागमन को और अधिक सुलभ बनाएगा। क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति को सशक्त बनाने के लिए गगास नदी पर 31.27 करोड़ रुपये की लागत से जलाशय परियोजना का कार्य किया जा रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए शोभन सिंह जीना मेडिकल इंस्टीट्यूट में 100 नई एमबीबीएस सीटें बढ़ाने के साथ-साथ 36 आईसीयू बेड भी जोड़े गए हैं, जिससे भविष्य में चिकित्सा सुविधाएं और अधिक बेहतर होंगी।
कार्यक्रम के दौरान सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री भारत सरकार अजय टम्टा, मेयर नगर निगम अजय वर्मा, जागेश्वर विधायक मोहन सिंह मेहरा, उपाध्यक्ष महिला उद्यमिता परिषद श्रीमती गंगा बिष्ट, अध्यक्ष जिला पंचायत श्रीमती हेमा गैड़ा, पूर्व विधायक कैलाश शर्मा, पूर्व विधायक रघुनाथ सिंह चौहान, जिलाध्यक्ष भाजपा महेश नयाल सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
रुद्रपुर में नेशनल ट्रैक साइकिलिंग चैंपियनशिप के खिलाड़ियों का बढ़ाया उत्साह
देश भर के 600 से ज्यादा साइकिलिस्ट कर रहे हैं शिरकत
रुद्रपुर। रुद्रपुर स्थित शिवालिक वेलोड्रोम में आयोजित 77वी सीनियर, 54वी जूनियर और 40वी सब जूनियर नेशनल ट्रैक साइकिलिंग चैंपियनशिप में पहुंचकर खेल मंत्री रेखा आर्या ने सोमवार को साइकिलिस्टों का उत्साहवर्धन किया। इस आयोजन में देश भर के लगभग सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आए 600 से ज्यादा खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं।
इस अवसर पर खेल मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि साइकिलिंग वेलोड्रोम के बनने के बाद अब यह उम्मीद की जा सकती है कि उत्तराखंड जल्द ही साइकिलिंग की नर्सरी के रूप में उभरेगा। उन्होंने कहा कि 38वें राष्ट्रीय खेलों के दौरान प्रदेश में जो खेल ढांचा विकसित किया गया है उसमें साइकलिंग वेलोड्रोम सबसे अहम है। खेल मंत्री ने कहा कि आमतौर पर नेशनल गेम्स में ज्यादातर राज्यों को साइकिलिंग का आयोजन दूसरे प्रदेशों में करना पड़ता है क्योंकि यह सुविधा देश के कुछ चुनिंदा राज्यों में ही उपलब्ध है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के खिलाड़ी नियमित रूप से यहां आकर अभ्यास करें, जिससे वें 2030 में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम और 2036 के ओलंपिक में पदक के दावेदार बन सके।
इस अवसर पर साइकिलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष ओंकार सिंह, सचिव मनिंदर पाल सिंह, उत्तरांचल ओलंपिक संघ के महासचिव डीके सिंह, उत्तराखंड साइकलिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष विमल चौधरी, उत्तराखंड साइकलिंग एसोसिएशन के सचिव देवेश पांडे, जिला अध्यक्ष डॉ नागेंद्र शर्मा, विजय पाठक आदि उपस्थित रहे।
2047 के विकसित भारत लक्ष्य को साधेगा वीबी-जी राम जी मिशन- गणेश जोशी
देहरादून। प्रदेश के ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने आज सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में नवीन विधेयक “विकसित भारत – रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण)” अर्थात वीबी-जी राम जी बिल 2025 के संबंध में प्रेस वार्ता की।
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि भारत सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से समय-समय पर योजनाएं लागू की जाती रही हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 1989 में जवाहर रोजगार योजना की शुरुआत की गई थी, जिसे बाद में वर्ष 2001 में सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना में सम्मिलित किया गया। वर्ष 2006 में इसे नरेगा तथा 2009 में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के रूप में लागू किया गया।
ग्राम्य मंत्री जोशी ने कहा कि मनरेगा के तहत ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 100 दिन के रोजगार की गारंटी दी गई, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में अकुशल श्रमिकों को रोजगार मिला। हालांकि, ग्रामीणों को आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाने तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए अब वीबी-जी राम जी योजना प्रारंभ की जा रही है। इस योजना के अंतर्गत ग्राम पंचायतों में स्थायी परिसंपत्ति निर्माण, जल से जुड़े कार्य, ग्रामीण आधारभूत ढांचे का विकास, आजीविका एवं कृषि संबंधी कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि इस नई योजना के तहत एक वित्तीय वर्ष में 125 दिन का गारंटीशुदा रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। पूर्वोत्तर राज्यों, हिमालयी राज्यों एवं संघशासित प्रदेशों (उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश एवं जम्मू-कश्मीर) के लिए केंद्र एवं राज्य के बीच धनराशि का अनुपात 90:10 होगा। साथ ही, उत्तराखंड जैसे विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्य में सुरक्षा दीवार (रिटेनिंग वॉल) को अनुमन्य कार्यों की श्रेणी में शामिल किया गया है।
ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि कृषि कार्यों के व्यस्त समय, जैसे बुवाई और कटाई के दौरान, राज्य सरकार वर्ष में कुल 60 दिन ऐसे निर्धारित कर सकेगी, जिनमें इस योजना के अंतर्गत कोई कार्य नहीं कराया जाएगा, ताकि खेती के लिए पर्याप्त श्रमिक उपलब्ध हो सकें और कृषि को बढ़ावा मिले। उन्होंने कहा कि योजना का लक्ष्य वर्ष 2047 तक एक समृद्ध और मजबूत ग्रामीण भारत के लिए सशक्तिकरण, विकास और पूरी देखरेख के साथ बढ़ाया जायेगा। जल जीवन मिशन के अधीन सृजित कार्यों की रिपेयर एवं रखरखाब किया जायेगा। मंत्री जोशी ने वीबी जी राम जी योजना के अन्तर्गत नियमों का उल्लघन करने वाले व्यक्ति पर रू0 10 हजार का जुर्माना लगाया जायेगा।
मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि विकसित भारत-ग्रामीण रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन के अंतर्गत रजिस्टेड जाब कार्ड धारक परिवार -10.10 लाख। सक्रिय परिवार- 06.71 लाख, जाब कार्ड धारक श्रमिक- 16.15 लाख। सकिय श्रमिक- 09.35 लाख। वर्तमान वित्तीय वर्ष में प्रस्तावित धनराशि 01 लाख 51 हजार 282 करोड उत्तराखण्ड हेतु प्रस्तावित धनराशि-840 करोड रुपए है।
मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि परिवर्तन प्रकृति का नियम है और पूर्व में भी योजनाओं के नाम व स्वरूप में बदलाव होते रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि वीबी-जी राम जी योजना ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, आजीविका संवर्धन और विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
इस अवसर पर सचिव ग्राम्य विकास धीरज सिंह गर्ब्याल, आयुक्त ग्राम्य विकास अनुराधा पाल भी उपस्थित रही।
49 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस
उत्तरकाशी। पुरोला विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक राजेश जुंवाठा का लंबी बीमारी के बाद 49 वर्ष की उम्र में देहरादून में निधन हो गया। वह काफी समय से अस्वस्थ थे और देहरादून के एक निजी अस्पताल में उनका उपचार चल रहा था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली।
राजेश जुंवाठा वर्ष 2007 में पुरोला विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर विधायक निर्वाचित हुए थे। बाद में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की और सक्रिय राजनीति में बने रहे। वे एक राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखते थे। उनके पिता बर्फियालाल जुंवाठा, मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल में एकीकृत उत्तर प्रदेश सरकार में पर्वतीय विकास मंत्री रह चुके हैं, जबकि उनकी माता विकासनगर नगर पालिका की अध्यक्ष के रूप में भी सेवाएं दे चुकी हैं।
पूर्व विधायक के निधन की खबर फैलते ही क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी राजेश जुंवाठा के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त की। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति की कामना करते हुए शोक संतप्त परिवारजनों और समर्थकों को इस दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने के लिए ईश्वर से प्रार्थना की है।
