कराटे की खिलाड़ी बनी भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट..
उत्तराखंड: आज देवभूमि उत्तराखंड की बेटियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और ऊंचे-ऊंचे मुकाम हासिल कर अनेकों बार प्रदेश को गौरवान्वित भी कर रही हैं। लोहाघाट की रहने वाली होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने अपनी मेहनत और लगन से शानदार उपलब्धि हासिल की है ज्योति बिष्ट सीडीएस क्वालीफाई कर भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनी है। उनकी इस अभूतपूर्व सफलता से जहां उनके परिवार में हर्षोल्लास का माहौल है वहीं समूचे क्षेत्र में भी खुशी की लहर है।
ज्योति की प्रारंभिक शिक्षा मल्लिकार्जुन स्कूल लोहाघाट तथा केंद्रीय विद्यालय लोहाघाट से हुई होनहार ज्योति ने इंटरमीडिएट परीक्षा में चंपावत जिले को टॉप किया था ज्योति बिष्ट 97.40 प्रतिशत अंक मिले थे। जिसके बाद ज्योति ने डीयू से ग्रेजुएशन कर सीड्स क्वालीफाई किया। कराटे के मैदान में अपने प्रतिद्वंद्वियों को चित कर देने वाली ज्योति अब देश के दुश्मनों को भी चित करेंगी बता दें कि ज्योति कराटे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पदक प्राप्त कर चुकी है।
ज्योति के पिता राम सिंह बिष्ट जहां लोहाघाट के नैनीताल बैंक में कार्यरत हैं वहीं उनकी मां माधवी देवी एक कुशल गृहिणी हैं। ज्योति ने अपनी इस शानदार सफलता का श्रेय अपने माता-पिता व गुरुजनों को दिया वहीं ज्योति की इस शानदार सफलता पर लोहाघाट के लोगों ने खुशी जताते हुए शुभकामनाएं दी है ज्योति ने अपनी इस शानदार सफलता से पूरे लोहाघाट क्षेत्र का नाम गर्व से ऊंचा किया है।
उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड के विरोध के बाद प्रदेश सरकार ने विगत विधानसभा चुनाव से पहले इसे भंग कर श्री बद्रीनाथ – केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) को पुनर्जीवित कर दिया था। प्रदेश सरकार ने बीकेटीसी की कमान निर्विवादित व स्वच्छ छवि वाले वरिष्ठ भाजपा नेता अजेंद्र अजय को सौंपी। पूर्व में केदारनाथ आपदा घोटाला और प्रदेश में लैंड जिहाद जैसे मुद्दों को उठा कर चर्चाओं में रहे अजेंद्र अजय बीकेटीसी के अध्यक्ष नियुक्त होने के बाद से फिर से न केवल खुद चर्चाओं में बने हुए हैं, बल्कि बीकेटीसी भी लगातार चर्चाओं में बनी हुई है। दरअसल, मंदिर समिति में दीमक की तरह लगे हुए कुछ लोगों ने वर्षों से ऐसी परंपरा कायम की हुयी है कि वो नए अध्यक्ष के आने पर उसे अपनी करबट में लेने की कोशिश करते हैं। यदि अध्यक्ष उनके अनुसार नहीं चलता है तो उसे घेरने और दबाब बनाने की कोशिश करते हैं। अपना स्वार्थ सिद्ध करने के लिए बिना वजह के मुद्दों पर विवाद भी खड़ा करा देते हैं। अजेंद्र ने धामों में निजी स्वार्थों के लिए कार्य कर रहे कुछ लोगों के संगठित गिरोह पर भी चोट की और व्यवस्थाओं में परिवर्तन लाने का प्रयास किया है। इस कारण अजेंद्र लगातार स्वार्थी तत्वों के निशाने पर भी हैं और उन्हें घेरने की लगातार कोशिश की जा रही है। मगर अजेंद्र इन सब की परवाह किये बगैर लगातार मंदिर समिति में सुधारों को जारी रखे हुए हैं।
अध्यक्ष का कार्यभार संभालते ही अजेंद्र ने सबसे पहले बीकेटीसी की कार्यप्रणाली में बदलाव के प्रयास किए। वर्ष 1939 में अंग्रेजों के समय गठित हुई बीकेटीसी में कर्मचारियों व अधिकारियों के ट्रांसफर अपवादस्वरूप ही होते रहे हैं। अजेंद्र ने कर्मचारियों व अधिकारियों के स्थानांतरण कर बीकेटीसी में हड़कंप मचा दिया था।। कुछ कार्मिकों ने अध्यक्ष द्वारा किये गए ट्रांसफरों को धता बताने की कोशिश भी की, किन्तु अध्यक्ष के सख्त रूख के चलते ऐसा संभव नहीं हो सका। अध्यक्ष ने कार्मिकों की कार्यक्षमता में वृद्धि के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किया। वर्षों से पदोन्नत्ति की मांग कर रहे कार्मिकों मुराद पूरी की और वेतन विसंगति का सामना कर रहे 130 से अधिक कार्मिकों के वेतन में वृद्धि भी की।
अजेंद्र ने लगभग 11 वर्षों से बीकेटीसी में मुख्य कार्याधिकारी की कुर्सी पर कुंडली जमाये बैठे विवादित अफसर बीडी सिंह को भी चलता किया। भाजपा हो अथवा कांग्रेस हर सरकार में बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी की कुर्सी पर जमे रहने वाले बीडी सिंह ने मंदिर समिति से हटते ही स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति ही ले ली थी। अजेंद्र ने बीकेटीसी में पारदर्शिता व भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए भी कई कदम उठाये। मंदिर समिति में वित्तीय पारदर्शिता कायम करने के लिए वित्त अधिकारी का पद सृजित कर शासन से वित्त अधिकारी की नियुक्ति कराई गयी। केदारनाथ धाम में दान चढ़ावे की गिनती के लिए पारदर्शी ग्लास हॉउस निर्मित कराया गया। अन्य भी कई नयी पहल शुरू की गयीं, जिनसे बीकेटीसी की आय में भी वृद्धि हुई है।

आजादी से पूर्व गठन होने के बावजूद बीकेटीसी में अभी तक कार्मिकों की सेवा नियमावली नहीं है। इस कारण कई विसंगतियां पैदा होती रही हैं। बीकेटीसी बोर्ड ने विगत माह बैठक में कार्मिकों की सेवा नियमावली का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा है, जिस पर शासन स्तर पर तेजी से कार्रवाई चल रही है। अजेंद्र ने सचिवालय की तर्ज पर बीकेटीसी में अलग से सुरक्षा संवर्ग तैयार करने की पहल भी की है। यह प्रस्ताव भी शासन में विचाराधीन है। बीकेटीसी का सुरक्षा संवर्ग गठित होने पर केदारनाथ व बदरीनाथ धाम में मंदिरों की आंतरिक सुरक्षा पूरी तरह से बीकेटीसी के हाथों में रहेगी। अजेंद्र के कार्यकाल में बीकेटीसी में अवैध नियुक्तियों पर भी रोक लगी। अब तक अधिकांश अध्यक्षों के कार्यकाल में बीकेटीसी में बड़ी संख्या में कार्मिकों की अवैध रूप से नियुक्तियां की गयीं। इस कारण बीकेटीसी को सात सौ से भी अधिक कर्मचारियों का बोझ उठाना पड़ रहा है। आधे कार्मिकों के पास कोई काम तक नहीं है। पहली बार अजेंद्र के कार्यकाल में एक भी कर्मचारी की अवैध नियुक्ति नहीं हुयी।
अजेंद्र ने मंदिरों के जीर्णोद्वार, विस्तारीकरण व सौंदर्यीकरण की दिशा में भी ठोस पहल की। उनके कार्यकाल में सबसे चर्चित कार्य केदारनाथ मंदिर के गर्भ गृह को स्वर्ण मंडित किया जाना रहा है। उन्होंने प्रदेश सरकार की अनुमति के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की देख रेख में यह प्रक्रिया पूर्ण कराई। हालांकि, राजनीतिक कारणों से कुछ लोगों ने इस पर विवाद खड़ा करने की कोशिश की। अजेंद्र ने बाबा केदारनाथ व भगवान मद्महेश्वर की शीतकालीन गद्दी स्थल उखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर के विकास व विस्तारीकरण की महत्वाकांक्षी परियोजना पर भी काम शुरू किया। इस कार्य के लिए स्थानीय जनता द्वारा करीब तीन दशकों से मांग उठायी जाती रही है और पूर्व में कई मुख्यमंत्रियों द्वारा इसका शिलान्यास भी किया गया था।
आपदा में ध्वस्त हो चुके केदारनाथ मंदिर के समीप स्थित ईशानेश्वर मंदिर का निर्माण भी अजेंद्र के कार्यकाल की उपलब्धि है। आपदा के इतने वर्षों पश्चात गत वर्ष इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ था। एक वर्ष के भीतर मंदिर का निर्माण कार्य करा कर इसकी प्राण प्रतिष्ठा भी कर दी गयी। केदारनाथ धाम में बीकेटीसी कार्मिकों के आवास व कार्यालय भवन इत्यादि के कार्य भी विगत वर्ष ही शुरू हुए हैं। वर्तमान में बीकेटीसी द्वारा गुप्तकाशी स्थित विश्वनाथ परिसर में स्थित भैरव मंदिर निर्माण के साथ-साथ तुंगनाथ मंदिर व त्रियुगीनारायण मंदिर के विकास व सौंदर्यीकरण की योजना पर भी काम किया जा रहा है। बहरहाल, अजेंद्र ने मंदिर समिति में बदलावों और सुधारों के लिए मुहिम जारी रखी हुयी है। मगर उनके प्रयासों की हवा निकालने के लिए मंदिर समिति के बाहर व भीतर के कुछ लोग लगातार अभियान छेड़े हुए हैं। मंदिर समिति में सुधारों की कवायद कितना परवान चढ़ पाती है, यह भविष्य के गर्भ में है।
विधानसभा मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित..
अनुपूरक बजट में 11 विधेयक पारित..
उत्तराखंड: विधानसभा सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया है। तीन दिवसीय मानसून सत्र के अंतिम दिन विपक्ष के हंगामे के बीच 11321 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पारित किया गया। अनुपूरक बजट में विधेयक समेत 11 विधेयक ध्वनिमत से पारित कराए। बता दें विधानसभा की कार्यवाही शुक्रवार देर रात तक चली।
उत्तराखंड विधानसभा का मानसून सत्र पांच सितंबर को शुरू हुआ था। सत्र में विधानसभा सचिवालय को 626 प्रश्न प्राप्त हुए थे। इस दौरान 10 अल्पसूचित प्रश्नों में से तीन, 182 तारांकित प्रश्नों से 28 और 392 आतारांकित प्रश्नों में से 66 का उत्तर दिया गया। सत्र के दौरान नियम 300 की 42 सूचनाएं प्राप्त हुई। इनमें से सात स्वीकृत की गई और 23 ध्यानाकर्षण के लिए रखी गई।
ये विधेयक हुए पारित..
उत्तराखंड सड़क संरचना सुरक्षा संशोधन विधेयक
वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड प्रौद्योगिकी
विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक
उत्तराखंड संयुक्त प्रांतीय रक्षक दल अधिनियम संशोधन विधेयक
उत्तराखंड उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम संशोधन विधेयक
उत्तराखंड माल एवं सेवा कर संशोधन विधेयक
उत्तराखंड निवेश और आधारित संरचना विकास एवं विनियमन विधेयक
उत्तराखंड निरसन विधेयक
उत्तराखंड शहीद आश्रित अनुग्रह अनुदान संशोधन विधेयक
राज्य विश्वविद्यालय विधेयक
उत्तराखंड उत्तर प्रदेश अधिवक्ता कल्याण निधि अधिनियम संशोधन विधेयक
उत्तराखंड निजी विश्वविद्यालय विधेयक
विंग कमांडर अनुपम गुसाईं का पार्थिव शरीर सेना के विशेष विमान से पहुंचा देहरादून..
उत्तराखंड: देहरादून निवासी विंग कमांडर अनुपम गुसाईं का पार्थिव शरीर सेना के विशेष विमान से देहरादून एयरपोर्ट लाया गया। जहाँ से पार्थिव शरीर को उनके निवास स्थान देहरादून ले जाया गया। विंग कमांडर अनुपम गोसाई (38) पुत्र रविंद्र गुसाईं निवासी गोविंद नगर अजबपुर कला देहरादून 7 विंग अम्बाला में विंग कमांडर के पद पर तैनात थे।
शुक्रवार को हृदय गति रुकने से देहांत हो गया था। उनके पार्थिव शरीर को भारतीय वायु सेवा के विशेष द्वारा लेह से सुबह 9:10 बजे जौलीग्रांट एयरपोर्ट लाया गया। उन्हें लेह में अभ्यास के लिए भेजा गया था। एयरपोर्ट से उनके पार्थिव शरीर को सेना व परिजनों द्वारा साढ़े नौ बजे एंबुलेंस से उनके निवास स्थान देहरादून ले जाया गया।
चुनाव के आखिरी दो दिनों में सीएम धामी ने बागेश्वर में किया था धुंआधार प्रचार..
सीएम धामी की राज्य में विकासपरक नीतियों पर जीत के रूप में लगी मुहर..
उत्तराखंड: बागेश्वर उपचुनाव के नतीजों में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी विरोधियों पर इक्कीस साबित हुए हैं। चुनाव के अंतिम दो दिनों में जिस तरह का धुंआधार प्रचार धामी की अगवाई में हुआ उसने चुनाव की तस्वीर बदलकर रख दी। वहीं, जनता ने उपचुनावों के जरिये स्पष्ट संदेश भी दे दिया है कि मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व पर उन्हें पूर्ण भरोसा है और जिन विकासपरक नीतियों के साथ वे आगे बढ़ रहे हैं, उन्हें जनता हाथों हाथ ले रही है।
बागेश्वर विधानसभा सीट से धामी मंत्रिमंडल के सदस्य रहे श्री चंदन राम दास की बीमारी से हुई मृत्यु के बाद यह सीट रिक्त हो गयी थी। भाजपा ने इस सीट पर उनकी पत्नी पार्वती दास को टिकट दिया था। बागेश्वर चुनाव को लेकर शुरू से ही कांग्रेस की ओर से तमाम बड़े दावे और प्रपंच किये गए लेकिन जनता के दिलोदिमाग पर छाई भाजपा और धामी के तिलिस्म को कांग्रेस नहीं तोड़ पाई।
बागेश्वर सीट पर आई इस जीत के राजनीति के जानकार तमाम मायने बता रहे हैं। जानकारों का मानना है कि जिस तरह से चुनाव के अंतिम दो दिनों तक मुख्यमंत्री धामी ने गरुड़, बागेश्वर आदि स्थानों पर रोड शो किये और जिस तरह वहां महिलाओं की भीड़ उमड़ी, उसने न केवल धामी की लोकप्रियता को इंगित किया बल्कि चुनावी नतीजों पर भी मुहर लगा दी थी। आज आयी इस जीत ने धामी सरकार द्वारा राज्य में चलाये जा रहे विभिन्न विकासपरक योजनाओं और विकासवादी एजेंडे पर भी मुहर लगाई है। दूसरा इस चुनाव ने वर्ष 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव की पटकथा भी अभी से लिखनी शुरू कर दी है। यह जीत जनता का भाजपा के प्रति राज्य में रुझान भी दर्शा रही है।
दाएं-बाएं करने वालों को भी मिला संदेश
भाजपा प्रत्याशी की इस जीत ने उन तमाम लोगों के मुँह भी बंद करने का काम किया है जो गाहे बगाहे नेतृत्व परिवर्तन और न जाने कैसे कैसे हवाई दावे गढ़ने लगते हैं। बागेश्वर सीट पर हुई इस जीत का संदेश आज दूर तक गया है। दूसरी ओर, इस जीत ने आलकमान को भी पूरी तरह से आश्वस्त कर दिया है कि 2024 के रण में धामी से बेहतर और कोई नेतृत्वकर्ता नहीं हो सकता।
श्रीनगर में गुलदार की दहशत, प्रभावित क्षेत्र में शनिवार तक बंद रहेंगे स्कूल..
उत्तराखंड: श्रीनगर के गुलदार प्रभावित क्षेत्र ढिकाल गांव व आसपास के आंगनबाड़ी, स्कूलों में शुक्रवार और शनिवार को अवकाश रहेगा। जिलाधिकारी पौड़ी डाॅ. आशीष चौहान का कहना हैं कि ढिकाल गांव में बीती पांच सितंबर को चार साल बच्ची पर गुलदार ने हमला किया था। जिससे उसकी मौत हो गई थी।
इसे देखते हुए बच्चों की सुरक्षा की दृष्टि से क्षेत्र के स्कूल व आंगनबाड़ी केंद्रों में आठ व नौ सितंबर को अवकाश घोषित किया गया है। जिनमें राजकीय प्राथमिक विद्यालय ढिकाल गांव व खोला, राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय सौडू व खोला शामिल हैं। इसके साथ ही आसपास के गांवों के आंगनबाड़ी केंद्रों में भी अवकाश रहेगा।
उत्तराखंड में 65 बहुउद्देशीय सहकारी समितियों में खुलेंगे जन औषधि केंद्र, मिली अनुमति..
उत्तराखंड: निबंधक सहकारी समितियां आलोक कुमार पांडे ने कहा कि प्रदेश की 65 बहुउद्देशीय सहकारी समितियों में जन औषधि केंद्र खुलेंगे। इसमें से 12 समितियों की केंद्र सरकार से अनुमति मिल चुकी है। इसके साथ ही सहकारी समितियां जनसुविधा केंद्र भी चलाएंगी। उन्होंने यह बात ग्रामीण सहकारी बैंकों के वित्तीय स्वास्थ्य की समीक्षा बैठक में कही। उत्तराखंड क्षेत्रीय कार्यालय, नाबार्ड में आयोजित बैठक में आलोक पांडे ने कहा, राज्य में दो सौ से अधिक समितियों में सीएससी का काम शुरू हो चुका है। 670 समितियों में से पांच सौ समितियों ने सीएससी केंद्र संचालन के लिए आवेदन किया है। इसके साथ ही पेट्रोल पंप और गैस एजेंसी भी खोली जा सकेंगी।
बैठक में राज्य में सहकारी बैंकों के सामने आने वाली विभिन्न चुनौतियों, समिति ने व्यवसाय, संस्थागत विकास, एनपीए आदि पर भी चर्चा की गई। बैठक में सचिव सहकारिता बीवीआरसी पुरुषोत्तम, मुख्य महाप्रबंधक नाबार्ड वीके बिष्ट, लता विश्वनाथ, दान सिंह रावत, इरा उप्रेती, नीरज बेलवाल, अरुण, सुमन कुमार, अनिल कुमार तिवारी आदि मौजूद रहे। संचालन नाबार्ड क्षेत्रीय कार्यालय के महाप्रबंधक डाॅ. वीके बिष्ट ने किया।
सीएम धामी ने हरिपुर घाट का शिलान्यास कर मां यमुना का लिया आशीर्वाद..
उत्तराखंड: सीएम पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को विकासनगर हरिपुर यमुना घाट का शिलान्यास किया। इस दौरान सीएम धामी ने मां यमुना को नमन कर उनका आशीर्वाद लिया। गुरुवार को सीएम धामी नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत जौनसार बावर के प्रवेश द्वार हरिपुर कालसी पहुंचे। इस दौरान सीएम धामी ने मां यमुना हरि स्नान घाट के निर्माण कार्य का शिलान्यास किया। इसी के साथ मां यमुना हरि स्नान घाट का निर्माण कार्य भी शुरू हो गया।
तीर्थ स्थल के रूप में किया जाएगा विकसित..
सीएम ने कहा लंबे समय से हरिपुर में घाट निर्माण की प्रतीक्षा थी। जिसका आज विधिवत शिलान्यास हो गया। कालसी का इतिहास बहुत पुराना है। यमुना के किनारे कभी हरिपुर में आस्था का बड़ा स्थल हुआ करता था। जिसे देखते हुए हमारी सरकार ने हरिपुर को पुनः तीर्थ स्थल के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है ।सीएम धामी ने आगे कहा मुझे मां यमुना ने बुलाया है और उन्हीं के आदेश पर हमने इस संकल्प का शुभारंभ किया है। गंगा जी पर अनेकों घाट हैं। लेकिन यमुनोत्री तक कोई घाट नहीं है। जन्माष्टमी के पर्व पर हमने इस पावन पर्व पर घाट निर्माण का कार्य शुरू किया है।
स्वास्थ्य विभाग ने जारी की नई गाइडलान..
उत्तराखंड: राज्य में डेंगू रोग संक्रमण रोकने लिए सीएम पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई बैठकों के सकारात्मक परिणाम दिखने लगे हैं। इसी कड़ी में राज्य स्वास्थ्य विभाग ने आज माननीय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देष पर डेंगू रोगियों के बेहत्तर इलाज व देखभाल के लिए विस्तृत गाइडलाइन जारी कर दी है। माननीय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आदेश पर राज्य सचिवालय में सचिव स्वास्थ्य डॉ आर राजेश कुमार द्वारा सभी जिलों के साथ डेंगू नियंत्रण हेतु समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया।
वर्चुवल बैठक में जिलाधिकारी देहरादून सोनिका, निदेषक चिकित्सा शिक्षा आषुतोश सयाना सहित सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारी, नगर स्वास्थ्य अधिकारी, मेडिकल कॉलेजों के प्रतिनिधियों ने डेंगू उन्मूलन अपने विचार व्यक्त किये। बैठक में मुख्य रूप से अपर सचिव स्वास्थ्य श्रीमती अमनदीप कौर, स्वास्थ्य महानिदेषक डॉ विनीता शाह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी देहरादून डॉ संजय जैन, निदेषक राज्य संचरण परिशद डॉ अजय नगरकर, कार्यक्रम अधिकारी एनएचएम डॉ पंकज सिंह मौजूद थे।
समीक्षा बैठक में पहुंचे सभी विशेषज्ञों ने डेंगू की रोकथाम के लिए अपने महत्वपूर्ण सुझाव दिये। बैठक में मिले सुझावों के बाद जिला क्षय रोग अधिकारियों को जिला नोडल अधिकारी रक्तकोश नामित किया गया। वहीं इस महत्वपूर्ण बैठक में डेंगू रोग की रोकथाम एवं नियंत्रण हेतु कई महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर लगी।
1. डेंगू रोग के संक्रमण काल के दृश्टिगत जनपदों के समस्त राजकीय एवं निजी चिकित्सालयों में डेंगू रोगियों हेतु 30ः डेंगू आईसोलेशन बेड आरक्षित रखे जायें जिसे आवश्यकता पड़ने पर बढ़ायें जाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाये।
2. रा0 दून मेडिकल कॉलेज के डेंगू विशेषज्ञों के परामर्श के अनुसार 90ः रागियों में डेंगू के सामान्य लक्षण होते हैं जो स्वतः ठीक हो जाते हैं एवं कुछ ही रोगियों को चिकित्सालय में उपचार हेतु भर्ती होने की आवश्यकता पड़ती है। यदि रोगी के लक्षण जैसे लगातार तेज बुखार (38.5 डिग्री सेल्सियस और ऊपर), रक्तस्राव, ऐंठन, सांस लेने में कठिनाई या सांस फूलना, लगातार उल्टी होना हों तो रोगी द्वारा अविलम्ब चिकित्सकिय परामर्श लिया जाये।
3. डेंगू रोग को महामारी का रूप लेने से रोकने के लिए नगर निगम/नगर निकाय द्वारा माइक्रो प्लान बनाकर रोस्टर अनुसार फॉगिंग की जाए ताकि प्रत्येक क्षेत्र में सप्ताह में कम से कम एक बार फॉगिंग एवं स्वच्छता अभियान किया जाये।
4. डेंगू रोग पर नियंत्रण हेतु लार्वा निरोधात्मक कार्यवाहियां (सोर्स रिडक्षन) एक कारगर व उपयुक्त उपाय है, जिन स्थानों पर चेतावनी के पश्चात् भी पानी जमा होने से डेंगू मच्छर पैदा होने की स्थितियां उत्पन्न हो रही हैं, ऐसे संस्थानों व लोगों पर आर्थिक दण्ड का प्रावधान किया जाये ताकि जनहित में डेंगू रोग के खतरे से लोगों को बचाया जा सके व महामारी का रूप लेने से रोका जा सके।
5. शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में डेंगू के हॉट स्पॉट चिन्हित कर निरन्तर स्वच्छता अभियान एवं डेंगू रोकथाम एवं नियंत्रण समबन्धित कार्यवाही की जाये जिससे डेंगू रोग के मच्छरों को पनपने से रोका जा सके।
6. आमजन में डेंगू रोग के प्रति भ्रान्तियों के समाधान हेतु जनपद स्तर पर डेंगू के संक्रमण काल (माह नवम्बर तक) के दौरान कन्ट्रोल रूम स्थापित किया जाना सुनिष्चित करें।
7. आम जन में ब्लड डोनेशन हेतु जागरूकता अभियान चलाया जाये।
ट्रैक्टर में बैठकर विधानसभा पहुंचे निर्दलीय विधायक उमेश कुमार..
उत्तराखंड: विधानसभा के मानसून सत्र का आज दूसरा दिन है। इस बीच गन्ना किसानों को ब्याज मुक्त ऋण देने की मांग को लेकर निर्दलीय विधायक उमेश कुमार ट्रैक्टर लेकर विधानसभा पहुंचे। विधानसभा सत्र के दूसरे दिन खानपुर से निर्दलीय विधायक उमेश कुमार ट्रैक्टर पर सवार होकर सड़ी फसल लेकर विधानसभा पहुंच गए। लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें विधानसभा के मुख्य गेट पर ही रोक लिया। इस बीच निर्दलीय विधायक और सुरक्षाकर्मियों के बीच तीखी नोक-झोंक भी हुई। जन्माष्टमी पर्व के चलते माना जा रहा है कि बजट पारित करने के लिए विधानसभा का सत्र देर तक चल सकता है। हांलाकि कार्यमंत्रणा की बैठक में विधानसभा के मानसून सत्र को आठ सितंबर तक चलाने पर सहमति बनी है।
जानकारी के अनुसार उत्तराखंड विधानसभा सत्र की शुरूआत में डेंगू के बढ़ते मामलों को लेकर चर्चा की जा रही है। डेंगू से अब तक प्रदेश में पांच लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं इससे पहले सत्र के खानपुर से निर्दलीय विधायक उमेश कुमार ट्रैक्टर पर सवार होकर सड़ी फसल लेकर विधानसभा पहुंच गए। वह गन्ना किसानों को ब्याज मुक्त ऋण देने की मांग लेकर ट्रैक्टर और फसल लेकर विधानसभा पहुंचे। लेकिन ट्रैक्टर को विधानसभा के प्रवेश गेट पर ही रोक दिया गया। सुरक्षाकर्मी बड़ी संख्या में गेट और गेट की दूसरी तरफ पहुंच गए। इस बीच निर्दलीय विधायक और अधिकारियों के बीच तीखी बहस भी हुई उमेश कुमार ने सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज पर गंभीर आरोप भी लगाए हैं।
वहीं दूसरी ओर सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले विपक्ष ने सदन के बाहर अपनी तमाम मांगों को लेकर प्रदर्शन कर माहौल बनाने की कोशिश की। विपक्ष के प्रदर्शन में हरिद्वार ग्रामीण से विधायक अनुपमा रावत ने टिहरी विस्थापितों को भूमि पर अधिकार दिलाने की मांग की। वहीं अन्य विधायकों ने प्रदेश में अतिक्रमण हटाने के नाम पर उत्पीड़न करने का आरोप लगाकर प्रदर्शन किया। कांग्रेस विधायक अनुपम रावत वन गुर्जरों को अधिकार देने की मांग कर रही हैं। अपनी इसी मांग को लेकर वह विधानसभा की सीढ़िया पर धरने पर बैठ गई हैं।
बताया जा रहा है कि प्रदेश सरकार की ओर से आज अनुपूरक बजट पेश करने के साथ ही राज्य आंदोलनकारियों को 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण समेत अन्य विधेयक, वित्त विभाग की वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट, लेखा प्रत्यावेदन रिपोर्ट को सदन में पेश किया जाएगा। आज प्रश्न काल भी होगा। जन्माष्टमी पर्व को देखते हुए माना जा रहा है बजट पारित करने के लिए सत्र देर रात तक चल सकता है। हालांकि कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में सत्र को आठ सितंबर चलाने का एजेंडा तय हुआ है। उधर , विपक्ष सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग कर रहा है।
