उत्तराखंड में अल्पसंख्यकों के शैक्षणिक और आर्थिक सशक्तिकरण पर फोकस, सीएम धामी ने रखी विकास की रूपरेखा
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र, नींबूवाला (देहरादून) में विश्व अल्पसंख्यक अधिकार दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस दौरान उन्होंने अल्पसंख्यक समुदाय के मेधावी छात्रों को सम्मानित किया तथा विभिन्न स्टालों का अवलोकन किया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उपस्थित मुस्लिम महिलाओं ने उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू किए जाने पर मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया। महिलाओं ने कहा कि मुख्यमंत्री एक भाई के रूप में प्रदेश और अल्पसंख्यक समुदाय के हित में कार्य कर रहे हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अल्पसंख्यक समुदाय के कल्याण के लिए निरंतर विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्व अल्पसंख्यक अधिकार दिवस भारत की एकता और अखंडता के संरक्षण हेतु हमारे मौलिक कर्तव्यों को स्मरण करने का अवसर है। भारतीय संस्कृति में सदियों से समानता तथा सभी धर्मों और समुदायों के प्रति सम्मान की परंपरा रही है। विविध संस्कृतियों, भाषाओं और परंपराओं के बावजूद देश में सदैव एकता की भावना बनी रही है। वसुधैव कुटुम्बकम के सिद्धांत को आत्मसात करते हुए भारत ने पूरी दुनिया को एक परिवार के रूप में देखने की परंपरा स्थापित की है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र के साथ सभी समुदायों को आगे बढ़ाया जा रहा है। जन-धन योजना, उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, मुफ्त राशन योजना जैसी अनेक योजनाओं के माध्यम से अल्पसंख्यक समुदाय को मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। साथ ही करतारपुर साहिब कॉरिडोर का निर्माण, लंगर से करों की समाप्ति, जियो पारसी योजना, बौद्ध सर्किट का विकास, जैन अध्ययन केंद्र की स्थापना, हज यात्रा प्रक्रिया को डिजिटल व पारदर्शी बनाना तथा तीन तलाक जैसी कुप्रथा का अंत जैसे ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम के तहत अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में स्कूल, कॉलेज, छात्रावास, आईटीआई, स्वास्थ्य केंद्र और कौशल विकास संस्थान स्थापित किए जा रहे हैं। वक्फ कानूनों में सुधार कर वक्फ संपत्तियों को अधिक पारदर्शी और उत्तरदायी बनाने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए गए हैं, ताकि उनका वास्तविक लाभ समाज के गरीब और जरूरतमंद वर्गों तक पहुंच सके।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु छात्र-छात्राओं को प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। पूर्वदशम एवं दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजनाओं के माध्यम से अल्पसंख्यक विद्यार्थियों को वार्षिक छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है। जनता से किए गए वादे के अनुरूप राज्य में समान नागरिक संहिता लागू कर सामाजिक न्याय और समानता की दिशा में देश को नई दिशा दी गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अल्पसंख्यक क्षेत्रों में आर्थिक एवं शैक्षणिक विकास को गति देने के लिए अल्पसंख्यक विकास निधि की स्थापना की गई है, जिसके अंतर्गत प्रतिवर्ष 4 करोड़ रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई जा रही है। मुख्यमंत्री हुनर योजना के माध्यम से लोगों को रोजगार से जोड़ा जा रहा है। अल्पसंख्यक स्वरोजगार योजना में 25 प्रतिशत सब्सिडी के साथ 10 लाख रुपये तक का ऋण तथा मौलाना आज़ाद एजुकेशन ऋण योजना के तहत 5 लाख रुपये तक का ब्याजमुक्त शिक्षा ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। पिछले चार वर्षों में इस योजना के अंतर्गत 169 लाभार्थियों को 4 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि वितरित की गई है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश में नया अल्पसंख्यक शिक्षा कानून लागू किया गया है। यह कानून सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध, पारसी और मुस्लिम सभी अल्पसंख्यक समुदायों को शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर प्रदान करेगा। इसके अंतर्गत सभी मदरसों सहित अल्पसंख्यक विद्यालयों में धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा बोर्ड का पाठ्यक्रम भी पढ़ाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि राज्य में धर्मांतरण विरोधी कानून लागू कर सभी धर्मों की स्वायत्तता की रक्षा सुनिश्चित की गई है, ताकि किसी भी प्रकार के दबाव, प्रलोभन या छल से होने वाले धर्मांतरण को रोका जा सके और सामाजिक सौहार्द बना रहे। मुख्यमंत्री ने विश्व अल्पसंख्यक अधिकार दिवस के अवसर पर अल्पसंख्यक समुदाय से आह्वान किया कि वे विश्व के अन्य देशों में हो रहे अत्याचार और भेदभाव के खिलाफ सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी आवाज उठाएं।
कार्यक्रम में अल्पसंख्यक आयोग की उपाध्यक्ष फरजाना बेगम, पद्मश्री डॉ. आर.के. जैन, हेमकुंड साहिब ट्रस्ट अध्यक्ष नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा, वक्फ बोर्ड अध्यक्ष शादाब शम्स सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
आयोग व सरकार महिलाओं की सुरक्षा व अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर संवेदनशील व सक्रिय भूमिका में कर रहे कार्य- कुसुम
देहरादून। उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने मुख्यमंत्री आवास पर प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से शिष्टाचार भेंट कर उत्तराखंड राज्य महिला आयोग से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक चर्चा की गई।
आयोग अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने बताया कि इस अवसर पर महिला सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण एवं आयोग के आगामी कार्यक्रमों को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को राज्य महिला आयोग द्वारा प्रस्तावित आगामी कार्यक्रमों की जानकारी दी गई, जिस पर उन्होंने महिलाओं के हित में प्रभावी कार्यों को और अधिक सुदृढ़ करने हेतु उपयोगी मार्गदर्शन प्रदान किया।
अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने बताया कि महिलाओं के अधिकार, सुरक्षा और सशक्तिकरण की दिशा में यह संवाद निश्चित रूप से एक सशक्त कदम है।
भेंट के दौरान अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने मुख्यमंत्री पुष्कर धामी को आयोग द्वारा किए जा रहे कार्यों एवं प्रस्तावित कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए कहा कि “महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना केवल संवैधानिक दायित्व ही नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है। राज्य महिला आयोग व सरकार महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर संवेदनशील व सक्रिय भूमिका निभा रहे है।”
साथ ही उन्होंने जानकारी देते हुए बताया की मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व वाली सरकार के सहयोग से आयोग, महिला उत्पीड़न, घरेलू हिंसा और साइबर अपराध जैसे मामलों में त्वरित एवं प्रभावी हस्तक्षेप सुनिश्चित कर रहा है, जिससे पीड़ित महिलाओं को शीघ्र न्याय मिल रहा है।
साथ ही, अध्यक्ष कण्डवाल ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर धामी से राज्य महिला आयोग के कार्यालय को शहर के मध्य स्थापित किए जाने संबंधी प्रस्ताव भी दिया है, जिस पर मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को शीघ्र कार्यवाही के निर्देश दिए।
मुुख्य सचिव ने एनआईसी, आईटीडीए एवं राजस्व विभाग के उच्चाधिकारियों के साथ की बैठक
देहरादून। मुुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने गुरूवार को सचिवालय में भूमि अभिलेखों के डिजीटलीकरण के सम्बन्ध में एनआईसी, आईटीडीए एवं राजस्व विभाग के उच्चाधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में मुख्य सचिव ने अधिकारियों को भूमि अभिलेखों के सम्बन्ध में विभिन्न सॉफ्टवेयर्स की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि भू अभिलेखों से सम्बन्धित सभी पोर्टल शीघ्र से शीघ्र शुरू किए जाएं।
मुख्य सचिव ने भूलेख पोर्टल को 1 जनवरी से शुरू किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इससे आमजन को बहुत ही राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि दाखिल खारिज का स्टेटस अपडेट होते ही सम्बन्धित को व्हाट्सएप और एसएमएस के माध्यम से तत्काल सूचना प्राप्त हो जाए एवं आरओआर में परिवर्तन होते ही स्वतः ही सजरे में भी स्टेटस परिवर्तन हो जाए। उन्होंने कहा कि यह भी प्राविधान रखा जाए कि अपने भूमि अभिलेखों की प्रति भी आसानी से प्राप्त हो सके।
मुख्य सचिव ने कहा कि आरसीएमएस पोर्टल को भी 26 जनवरी, 2026 तक शुरू किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि राजस्व कोर्ट को पूर्ण रूप से ई-कोर्ट के रूप में स्थापित किया जाए, ताकि मामलों के निस्तारण में तेजी आ सके। उन्होंने राजस्व कोर्ट मामलों में भूमि अभिलेखों के सत्यापन आदि के लिए पटवारी-कानूनगो के स्तर पर समय-सीमा निर्धारित करते हुए सॉफ्टवेयर में समाविष्ट किया जाए ताकि मामलों को शीघ्र से शीघ्र निस्तारित किया जा सके।
मुख्य सचिव ने इसके लिए आईटीडीए को भी अपने सिस्टम को मजबूत किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस सिस्टम के संचालन के लिए आवश्यक ढांचागत एवं तकनीकी व्यवस्थाएं अनिवार्य रूप से सुनिश्चित कर ली जाएं। साथ ही, सभी हितधारकों एवं उपयोगकर्ताओं का आवश्यक प्रशिक्षण उपलब्ध करा लिया जाए।
इस अवसर पर सचिव डॉ. एस.एन. पाण्डेय एवं राजस्व आयुक्त श्रीमती रंजना राजगुरू, जिलाधिकारी देहरादून सविन बंसल सहित एनआईसी एवं आईटीडीए के उच्चाधिकारी एवं जनपदों से जिलाधिकारी उपस्थित थे।
देहरादून/नई दिल्ली। प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने गुरुवार को नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय पहुंच कर पार्टी के नवनियुक्त राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन से शिष्टाचार भेंट कर उन्हें उत्तराखंड की जनता, भाजपा कार्यकर्ताओं और अपने मंत्रिमंडलीय सहयोगियों की ओर से सफल कार्यकाल के लिए शुभकामनाएँ दीं।
महाराज ने कहा कि भाजपा के नवनियुक्त राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन का नेतृत्व और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मार्गदर्शन भारतीय जनता पार्टी के जनसेवा व राष्ट्रनिर्माण की यात्रा को नई दिशा प्रदान करेगा और भाजपा सरकार की लोक-कल्याणकारी नीतियों संगठन के विचारों को दृढ़ता से जन-जन तक पहुँचाएंगे।
राजस्व प्राप्ति की स्थिति की समीक्षा कर कहा समय से तय लक्ष्य पूरा करें
कर चोरी पर प्रभावी नियंत्रण के लिए एआई आधारित तकनीक का किया जाय उपयोग
बाहर के वाहनों से ग्रीन सेस की वसूली जल्द शुरू करने के निर्देश
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में सचिवालय में वित्तीय वर्ष 2025-26 की राजस्व प्राप्ति की स्थिति की समीक्षा बैठक आयोजित हुई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि राजस्व वसूली बढ़ाने पर विशेष ध्यान देते हुए तय लक्ष्य समय पर पूरे किये जाएं। संबंधित विभागों के उच्चाधिकारी एवं जिलाधिकारियों द्वारा जनपदों में इसकी नियमित निगरानी की जाए। कर चोरी पर प्रभावी नियंत्रण के लिए एआई आधारित तकनीक का अधिकतम इस्तेमाल किया जाए। निबंधन एवं रजिस्ट्रेशन से संबंधित सभी कार्यों का डिजिटाइजेशन किया जाए। सब रजिस्ट्रार कार्यालयों का जिलाधिकारियों एवं संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा नियमित रूप से निरीक्षण किया जाए। रजिस्ट्री के दौरान संपति का उचित मूल्य दर्ज हो इसकी जाँच के लिए संपतियों का स्थलीय निरीक्षण भी किया जा जाए।
प्रदेश से बाहर के वाहनों से ग्रीन सेस लेने की कार्यवाही में लेटलतीफी पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने परिवहन विभाग को ग्रीन सेस की वसूली जल्द शुरू करने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि पर्यावरण संरक्षण का ध्यान रखते हुए राज्य के हित में वन संपदा का सही उपयोग किया जाए। तराई क्षेत्रों में कमर्शियल प्लांटेशन तथा जड़ी-बूटियों के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने के लिए ठोस योजना बनाई जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के समग्र विकास के लिए राजस्व में बढोतरी करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “इस दशक को उत्तराखंड का दशक” बनाने के संकल्प को साकार करने के लिए संसाधन वृद्धि को मिशन मोड में लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विशेष श्रेणी के राज्यों में उत्तराखंड को शीर्ष स्थान प्राप्त हुआ है। साथ ही, खनन सुधारों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राज्य को ₹200 करोड़ की केंद्रीय प्रोत्साहन राशि प्राप्त हुई है, जो राज्य के सही दिशा में बढ़ने का परिचायक है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए ₹24,015 करोड़ का कर राजस्व लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें अब तक 62 प्रतिशत से अधिक प्राप्ति हो चुकी है। उन्होंने संबंधित विभागों से आगामी अवधि में लक्ष्य की शत-प्रतिशत पूर्ति के लिए समन्वित और सक्रिय प्रयास किए जाने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार दीर्घकालिक आर्थिक सुदृढ़ता के लिए पूंजीगत निवेश पर विशेष बल दे रही है। पूंजीगत व्यय में 34 प्रतिशत की वृद्धि की गई है, जिससे राज्य में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को नई गति मिलेगी और स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण होगा। उन्होंने कहा कि वित्तीय प्रबंधन को आधुनिक और उत्तरदायी बनाने के लिए नीति सुधार, नवाचार तथा नई तकनीकों पर निरंतर ध्यान दिया जाना जरूरी है। पारदर्शिता, जवाबदेह और जनहित में ठोस परिणाम देने वाला प्रशासन हमारा उद्देश्य है। जिसके लिए सभी अधिकारियों को कड़े वित्तीय अनुशासन, बेहतर प्रबंधन और सामूहिक उत्तरदायित्व के साथ कार्य में जुटे रहना होगा।
बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के.सुधांशु, एल. फैनई, सचिव दिलीप जावलकर, युगल किशोर पंत, सी. रविशंकर, प्रमुख वन संरक्षक डॉ. रंजन कुमार मिश्रा अपर सचिव अहमद इकबाल, श्रीमती सोनिका, हिमांशु खुराना, श्रीमती अनुराधा पाल, डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट, मनमोहन मैनाली, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष एवं वर्चुअल माध्यम से सभी जिलाधिकारियों ने प्रतिभाग किया।
देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी भूषण ने आज दिल्ली स्थित भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में पार्टी के नव नियुक्त राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन से शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर उन्होंने नितिन नवीन को इस महत्वपूर्ण दायित्व के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई प्रेषित कीं।
भेंट के दौरान विधानसभा अध्यक्ष ने उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का परिचय कराते हुए कुमाऊँ अंचल की पारंपरिक लोककला ऐपण से सुसज्जित, स्थानीय महिलाओं द्वारा हस्तनिर्मित शॉल नितिन नवीन को भेंट की। इस माध्यम से उन्होंने प्रदेश की लोककला, परंपराओं तथा महिला स्वावलंबन की भावना को प्रभावी रूप से रेखांकित किया।
उल्लेखनीय है कि इससे एक दिन पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी भूषण ने केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह जी से भेंट के दौरान उत्तराखंड की विश्वविख्यात लोकनाट्य रम्माण पर आधारित पुस्तक भेंट की थी। इस प्रकार वे निरंतर राष्ट्रीय स्तर पर उत्तराखंड की लोककला, संस्कृति और परंपराओं का सशक्त रूप से प्रचार-प्रसार कर रही हैं।
विधानसभा अध्यक्ष श्रीमती ऋतु खण्डूडी भूषण ने नितिन नवीन को उनके नव दायित्व के लिए सफल, प्रभावी एवं प्रेरणादायी कार्यकाल की मंगलकामनाएँ देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व में संगठन और अधिक सशक्त एवं गतिशील बनेगा।
न्याय पंचायत, विधानसभा क्षेत्र, संसदीय क्षेत्र और राज्य स्तरीय, चार चरणों में स्पर्धा
कुल 26 खेल स्पर्धाएं, ट्रॉफी विजेता को मिलेंगे 5 लाख
देहरादून। खेल महाकुंभ इस साल नए प्रारूप में मुख्यमंत्री चैंपियंस ट्रॉफी 2025-26 के नाम से आयोजित किया जाएगा और इसकी शुरुआत 23 दिसंबर से होने जा रही है। गुरुवार को खेल मंत्री रेखा आर्या ने सचिवालय में प्रेसवार्ता के दौरान यह जानकारी दी।
खेल मंत्री रेखा आर्या ने बताया कि यह प्रतियोगिता न्याय पंचायत, विधानसभा, संसदीय क्षेत्र और राज्य स्तरीय चार चरणों में आयोजित की जाएगी।
प्रतियोगिता के दौरान कुल 26 खेल स्पर्धाएं आयोजित होंगी जिनमें इस बार परंपरागत खेलों को भी जगह दी गई है। चैंपियनशिप का समापन 28 जनवरी को किया जाएगा और इस दिन मुख्यमंत्री चैंपियंस ट्रॉफी के साथ विजेता को ₹5 लाख की धनराशि भी दी जाएगी। चैंपियन का निर्णय उनके द्वारा जीते गए मेडल के आधार पर प्रदान किए गए अंकों के योग से किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त सांसद ट्रॉफी जीतने वाली टीम को 2 लाख और विधानसभा ट्रॉफी जीतने वाली टीम को ₹1 लाख की नगद इनाम धनराशि दी जाएगी।
खेल मंत्री रेखा आर्या ने बताया कि नेशनल रिकॉर्ड तोड़ने पर खिलाड़ी को ₹1 लाख की अतिरिक्त इनाम राशि दी जाएगी।
खेल मंत्री ने बताया कि चैंपियनशिप के लिए रजिस्ट्रेशन 14 अक्टूबर से शुरू कर दिए गए थे, अभी तक 1 लाख 10 हजार से ज्यादा खिलाड़ी अपना पंजीकरण करा चुके हैं। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन 22 दिसंबर तक खुले रहेंगे।
दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए अलग प्रतियोगिता
इसके साथ-साथ प्रदेश के दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए एथलेटिक्स, बैडमिंटन और तैराकी की स्पर्धा अलग से आयोजित की जाएगी। खेल मंत्री ने बताया कि इस श्रेणी के लिए भी रजिस्ट्रेशन शुरू कर दिए गए हैं।
बिना जूते, ट्रैकसूट ना हो कोई खिलाड़ी
गुरुवार को खेल मंत्री रेखा आर्या ने सचिवालय स्थित एनआईसी कार्यालय में सभी जनपद के जिलाधिकारी के साथ इस आयोजन को लेकर एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की। उन्होंने सभी जिलाधिकारी को निर्देशित किया कि ट्रायल और खेलों में हिस्सा लेने वाले सभी खिलाड़ी के पास जूते और ट्रैकसूट हो, यह सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने साथ ही सर्दी से खिलाड़ियों का बचाव करने के लिए पर्याप्त व्यवस्था करने, हर खेल स्थल पर स्वास्थ्य विभाग की टीम को तैनात करने, आवश्यकता पड़ने पर खिलाड़ियों को रात में ठहराने और भोजन आदि की व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए।
पांच लोग घायल
नैनीताल। कैंची धाम दर्शन के लिए आ रहे पर्यटकों का सफर दर्दनाक हादसे में बदल गया। पीलीभीत से नैनीताल जिले की ओर जा रही एक कार भवाली-अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग पर निगलाट के समीप अचानक अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी। इस भीषण दुर्घटना में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि कार में सवार अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय ग्रामीण मौके पर पहुंचे और रेस्क्यू अभियान शुरू किया गया। कड़ी मशक्कत के बाद घायलों को खाई से बाहर निकालकर एंबुलेंस के जरिए भवाली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया।
तीन की मौत, पांच गंभीर घायल
कोतवाली भवाली के प्रभारी प्रकाश सिंह मेहरा के अनुसार दुर्घटना में कुल आठ लोग घायल हुए थे, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। अस्पताल पहुंचने से पहले गंगा देवी (56), नैंसी गंगवार (24) और बृजेश कुमारी (26) की मौत हो गई। मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
हायर सेंटर रेफर किए गए घायल
सीएचसी भवाली के चिकित्सक डॉ. रमेश कुमार ने बताया कि दुर्घटना में घायल अन्य पांच लोगों की हालत को देखते हुए उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद हल्द्वानी के उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर किया गया है। सभी घायलों का इलाज जारी है।
पुलिस ने दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है और प्रारंभिक तौर पर वाहन के अनियंत्रित होने को हादसे की वजह माना जा रहा है।
पहाड़ी मार्गों पर सावधानी की अपील
प्रशासन ने पहाड़ी सड़कों पर यात्रा करने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं से सावधानी बरतने, वाहन धीमी गति से चलाने और सुरक्षा नियमों का पालन करने की अपील की है।
उत्तराखण्ड राज्य निगम कर्मचारी महासंघ की बैठक, विनियमितिकरण व वेतनमान को लेकर सरकार से कार्रवाई की मांग
देहरादून। उत्तराखण्ड राज्य निगम कर्मचारी महासंघ की एक अहम बैठक उत्तराखण्ड रोडवेज इम्पलाइज यूनियन के प्रान्तीय कार्यालय, 66 गांधी रोड, देहरादून में सम्पन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष सूर्यप्रकाश राणाकोटी ने की, जबकि संचालन प्रदेश महामंत्री नन्दलाल जोशी द्वारा किया गया। बैठक में महासंघ से जुड़े सभी घटक संगठनों के प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश महामंत्री, कार्यकारिणी पदाधिकारी एवं सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। बैठक में उत्तराखण्ड परिवहन निगम, जल संस्थान, मसूरी–देहरादून विकास प्राधिकरण, स्वजल, वन विकास निगम, गढ़वाल मण्डल विकास निगम, दुग्ध संघ, उत्तराखण्ड जिला पंचायत, बहुउद्देशीय वित्तीय विकास निगम सहित विभिन्न निगमों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सभी पदाधिकारियों ने एक स्वर में अपने-अपने निगमों से जुड़ी गंभीर समस्याओं को महासंघ के समक्ष रखते हुए सरकार की उदासीनता पर रोष व्यक्त किया।
बैठक में यह प्रमुख रूप से सामने आया कि महासंघ द्वारा पूर्व में मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड सरकार को पत्र संख्या 37 दिनांक 09 अक्टूबर 2024 को विस्तृत मांगपत्र प्रेषित किया गया था, लेकिन आज तक उस पर न तो कोई वार्ता हुई और न ही ठोस कार्रवाई। लंबे समय से लंबित मांगों के कारण निगम कर्मचारियों में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी के चलते बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि पुनः मुख्यमंत्री को मांगपत्र प्रेषित कर समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की जाएगी।बैठक में कर्मचारियों के विनियमितिकरण का मुद्दा सबसे प्रमुख रूप से उठाया गया। महासंघ ने राज्य सरकार से मांग की कि संविदा, तदर्थ, अंशकालिक, दैनिक वेतनभोगी, वर्कचार्ज एवं उपनल कर्मचारियों के विनियमितिकरण के लिए तय की गई कटऑफ तिथि 04 दिसंबर 2018 पर पुनर्विचार किया जाए। महासंघ का कहना है कि वन टाइम सेटलमेंट के अंतर्गत इस कटऑफ तिथि को बढ़ाकर 31 दिसंबर 2025 किया जाना चाहिए, ताकि वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों को न्याय मिल सके।
उत्तराखण्ड परिवहन निगम में कार्यरत विशेष श्रेणी के चालक, परिचालक एवं बाह्य स्रोत से कार्यरत तकनीकी कर्मचारियों को विनियमितिकरण नियमावली में शामिल न किए जाने पर भी गहरी नाराजगी जताई गई। पदाधिकारियों ने कहा कि ये कर्मचारी वर्षों से निगम की रीढ़ बनकर कार्य कर रहे हैं, लेकिन उन्हें आज भी नियमितिकरण का लाभ नहीं मिल पाया है।
सहकारी दुग्ध शालाओं में कार्यरत कर्मचारियों की स्थिति पर भी बैठक में गंभीर चिंता व्यक्त की गई। बताया गया कि इन कर्मचारियों को अब तक सातवें वेतनमान का लाभ नहीं दिया गया है, जबकि छठे वेतनमान के अंतर्गत मिलने वाला महंगाई भत्ता भी पिछले तीन वर्षों से लंबित है। महासंघ ने मांग की कि दुग्ध शालाओं में कार्यरत सभी कर्मचारियों को अन्य निगमों की भांति सातवें वेतनमान का लाभ दिया जाए और जब तक यह लागू नहीं होता, तब तक रोके गए सभी महंगाई भत्तों का तत्काल भुगतान किया जाए।
उत्तराखण्ड जल संस्थान में बिना सीजन एवं नीति के विरुद्ध किए गए स्थानांतरणों का मुद्दा भी बैठक में प्रमुखता से उठाया गया। महासंघ ने ऐसे सभी स्थानांतरण आदेशों को तत्काल निरस्त करने की मांग की, ताकि कर्मचारियों को अनावश्यक मानसिक, पारिवारिक और आर्थिक परेशानी से राहत मिल सके। इसके अतिरिक्त प्रदेश में परिवहन से जुड़े अवैध संचालन पर पूर्ण रोक लगाने की मांग भी बैठक में जोरशोर से उठाई गई। परिवहन निगम के पदाधिकारियों ने कहा कि अवैध संचालन के कारण निगम को भारी राजस्व हानि हो रही है और इसका सीधा असर कर्मचारियों के भविष्य पर पड़ रहा है।
प्रदेश अध्यक्ष सूर्यप्रकाश राणाकोटी का बयान
प्रदेश अध्यक्ष सूर्यप्रकाश राणाकोटी ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य के विभिन्न निगमों में कार्यरत कर्मचारी वर्षों से सरकार की अनदेखी का शिकार हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि महासंघ द्वारा बार-बार मांगपत्र भेजे जाने के बावजूद सरकार की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं की गई। यदि अब भी कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो राज्य निगम कर्मचारी महासंघ आंदोलन करने के लिए मजबूर होगा। कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए महासंघ किसी भी स्तर पर संघर्ष से पीछे नहीं हटेगा।
प्रदेश महामंत्री नन्दलाल जोशी का बयान
प्रदेश महामंत्री नन्दलाल जोशी ने कहा कि कर्मचारियों की मांगें पूरी तरह जायज हैं और इन्हें नजरअंदाज करना दुर्भाग्यपूर्ण है। विनियमितिकरण, वेतनमान, महंगाई भत्ता और अवैध संचालन जैसे मुद्दे सीधे कर्मचारियों के जीवन और भविष्य से जुड़े हैं। सरकार को चाहिए कि इन समस्याओं पर गंभीरता से विचार करे और शीघ्र निर्णय ले। यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ तो महासंघ को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
बैठक के अंत में उपस्थित सभी घटक संगठनों के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने एकजुट होकर कर्मचारियों के हितों के लिए संघर्ष को और तेज करने का संकल्प लिया।
दिसंबर में लगातार खराब हवा, बुजुर्गों और बच्चों पर सबसे ज्यादा असर
देहरादून। राजधानी देहरादून में हवा अब बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गई है। दिसंबर के मध्य में ही वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है। मंगलवार को देहरादून का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) इस वर्ष का अब तक का सबसे खराब स्तर दर्ज किया गया, जिससे लोगों की सेहत को लेकर चिंता बढ़ गई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार मंगलवार को देहरादून का एक्यूआई 294 रिकॉर्ड किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी के करीब है। इससे पहले दीपावली के बाद 20 अक्तूबर को अधिकतम 254 एक्यूआई दर्ज हुआ था। लगातार बढ़ते प्रदूषण ने राजधानी को भी दिल्ली-एनसीआर जैसी स्थिति की ओर धकेल दिया है।
शाम होते ही स्मॉग की चादर, हवा में घुला जहर
दिन ढलने के साथ ही शहर के कई इलाकों में धुंध और स्मॉग छा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ठंडी हवाओं के थमने और प्रदूषक कणों के वातावरण में ठहर जाने से हालात और बिगड़ रहे हैं। देहरादून, जो कभी साफ हवा के लिए जाना जाता था, अब दिसंबर में अधिकांश दिनों तक खराब श्रेणी में दर्ज हो रहा है।
उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार सोमवार को देहरादून का एक्यूआई 299 तक पहुंच गया था। इस दौरान पीएम 2.5 का स्तर 119.83 और पीएम 10 का स्तर 134.11 दर्ज किया गया। सीपीसीबी की रिपोर्ट में भी बढ़े हुए पीएम 2.5 और पीएम 10 को प्रदूषण का मुख्य कारण बताया गया है।
आने वाले दिनों में राहत की उम्मीद कम
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक फिलहाल वायु गुणवत्ता में त्वरित सुधार के संकेत नहीं हैं। बारिश या तेज हवाओं से ही प्रदूषक कणों को वातावरण से हटाया जा सकता है, लेकिन अगले कुछ दिनों तक ऐसे हालात बनने की संभावना बेहद कम है। ऐसे में हवा की स्थिति और बिगड़ सकती है।
सांस के मरीजों और बुजुर्गों के लिए बढ़ा खतरा
चिकित्सकों का कहना है कि एक्यूआई 200 के पार जाते ही अस्थमा, सीओपीडी, हृदय रोगियों, बुजुर्गों और बच्चों के लिए जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। लोगों को सुबह-शाम बाहर निकलने से बचने, मास्क का प्रयोग करने और प्रदूषित इलाकों में अनावश्यक आवाजाही से परहेज करने की सलाह दी गई है।
ऋषिकेश की हवा भी प्रभावित
प्रदूषण का असर ऋषिकेश तक भी पहुंच गया है। मंगलवार को ऋषिकेश का एक्यूआई 105 दर्ज किया गया, जो भले ही खराब श्रेणी में नहीं आता, लेकिन आमतौर पर बेहद स्वच्छ हवा वाले इस क्षेत्र के लिए यह चिंताजनक संकेत है।
पीएम 2.5 और पीएम 10 क्यों हैं खतरनाक
पीएम 10 और पीएम 2.5 हवा में मौजूद सूक्ष्म कण होते हैं। इनमें पीएम 2.5 बेहद बारीक होने के कारण फेफड़ों में गहराई तक जाकर रक्त में मिल सकता है, जिससे सांस, हृदय और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
मैदानी जिलों में कोहरे का अलर्ट
मौसम विभाग ने उत्तराखंड के मैदानी जिलों, खासकर हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में घने कोहरे को लेकर यलो अलर्ट जारी किया है। वहीं देहरादून में आंशिक बादल छाए रहने और मौसम शुष्क रहने की संभावना जताई गई है।
