चमोली के 50 एनसीसी कैडेट्स को आपदा प्रबंधन का सात दिवसीय प्रशिक्षण शुरू
देहरादून। भारत सरकार की युवा आपदा योजना के तहत सचिव, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग उत्तराखड एवं जिलाधिकारी के निर्देशन में जनपद चमोली के 50 एनसीसी कैडेट्स को 14 से 20 नवंबर तक ओल्ड बुचडी गढ़ी कैंट में आपदा प्रबंधन की जानकारी एवं प्रशिक्षण दिया जा रहा है। शुक्रवार को इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभांरभ किया गया।
प्रशिक्षण के दौरान एनसीसी कैडेट्स को आपदा प्रबंधन के अंतर्गत विभिन्न विषयों जैसे आपदा प्रबंधन, आपदा अधिनियम 2005 आपदाओं से तैयारी, भूकंप से सुरक्षा, भूस्खलन, बाढ़, त्वरित बाढ़, सूखा की जानकारी, फर्स्ट एड की जानकारी, केमिकल, न्यूक्लियर, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल डिजास्टर की जानकारी, रोड सेफ्टी, रस्सी की गांठे तथा रस्सी को लपेटना, गहरी खाइयो में चढ़ना उतरना, नदियों को पार करने के तरीके, स्ट्रेचर बनाना, सैटेलाइट फोन का उपयोग, आग का प्रबंध करना, जंगल की आग का प्रबंध करना, पेशेंट को स्टेचर में शिफ्ट करना, किसी भारी वस्तु को एक स्थान से दूसरे स्थान में हस्तांतरित करना आदि विषयों पर जानकारी प्रदान की जाएगी।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य आपदा के दौरान प्रशिक्षित एनसीसी कैडेट्स को फर्स्ट रिस्पांडर के रूप में अपनी भूमिका निभाना है, जिससे त्वरित गति से राहत एवं बचाव कार्य संचालित किये जा सकेंगे।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रथम दिवस में कार्यक्रम का संचालन ’आपदा प्रबंधन मास्टर ट्रेनर राजू शाही, सुशील सिंह कैन्तुरा एवं किशन राजगुरु, मास्टर ट्रेनर युवा आपदा मित्र तथा एनडीआरएफ से भास्कर मेहंदी एवं अमित कुमार गुप्ता के नेतृत्व में किया गया। आयोजन के दौरान एनसीसी की ओर से कर्नल राजेश रावत, सूबेदार समर सिंह, सूबेदार जगदीश सिंह, हवलदार वीरेंद्र, हवलदार ललित, हवलदार साजिद अली, हवलदार अजय तथा जनपद आपदा प्रबंधन प्राधिकरण देहरादून की ओर से जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी ऋषभ कुमार मौजूद रहे।
यूजीसी द्वारा तय समय सीमा पर सभी रिकॉर्ड दर्ज करने के निर्देश
19 नवम्बर को होगी डाटा अपलोडिंग को लेकर समीक्षा बैठक व कार्यशाला
देहरादून। प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में शैक्षणिक रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण किया जा रहा है। जिसके क्रम में सभी राजकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा निर्धारित समयसीमा के भीतर शैक्षणिक वर्ष 2021 से 2024 तक के समस्त शैक्षणिक दस्तावेज, क्रेडिट रिकॉर्ड और छात्रों की अपार आईडी से संबंधित डेटा डिजीलॉकर/एनएडी-एबीसी प्लेटफॉर्म पर अनिवार्य रूप से अपलोड करने के निर्देश दे दिये गये हैं, ताकि छात्र-छात्राओं को उनके शैक्षणिक दस्तावेज ऑनलाइन माध्यम पर उपलब्ध हो सके।
उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि राज्य सरकार उच्च शिक्षा संस्थानों में डिजिटल परिवर्तन को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ा रही है। इसके तहत प्रदेभभर के राजकीय एवं निजी महाविद्यालयों व विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत सभी छात्रों के शैक्षणिक प्रमाणपत्र, क्रेडिट डेटा और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों को नेशनल एकेडमिक डिपॉजिटरी (एनएडी) एवं अकैडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (एबीसी) पर अपलोड किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस डिजिटल व्यवस्था से छात्र-छात्राओं को किसी भी समय, कहीं पर भी अपने शैक्षणिक दस्तावेज ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सुलभ होंगे, जिससे पारदर्शिता, सुगमता और समय की बचत सुनिश्चित होगी।
डॉ. रावत ने बताया कि यूजीसी ने भी विश्वविद्यालयों को शैक्षणिक रिकॉर्ड डिजीलॉकर पर दर्ज करने के लिए समय सीमा को बढ़ाकर 30 नवम्बर 2025 कर दिया है। प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों को इस समयसीमा का पूर्ण रूप से पालन करने, तथा वर्ष 2021-2024 तक के सभी छात्रों के दस्तावेज, आपार आईडी डेट और क्रेडिट रिकॉर्ड तत्काल एनएडी-एबीसी प्लेटफार्म पर अपलोड करने के निर्देश दिये गये हैं। विभागीय मंत्री ने बताया कि 19 नवम्बर 2025 को दून विश्वविद्यालय में एनएडी-एबीसी प्लेटफॉर्म पर डेटा अपलोडिंग की प्रगति की समीक्षा हेतु कार्यशाला एवं बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें सभी विश्वविद्यालयों के परीक्षा नियंत्रकों, नोडल अधिकारियों एवं संबंधित तकनीकी कर्मियों को अद्यतन स्थिति रिपोर्ट और आवश्यक दस्तावेजों के साथ अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने को कहा गया है।
डॉ. रावत ने कहा कि केन्द्र सरकार की एनएडी-एबीसी प्रणाली न केवल विद्यार्थियों को डिजिटल शैक्षणिक पहचान उपलब्ध करवाती है, बल्कि क्रेडिट ट्रांसफर को भी अत्यंत सरल बनाती है। साथ ही यह नई शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी और सफल क्रियान्वयन में भी महत्वपूर्ण है।
कृषि मंत्री गणेश जोशी ने किया दीप प्रज्वलन
देहरादून। प्रदेश के कृषि मंत्री गणेश जोशी ने आज ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी में आयोजित दो दिवसीय वार्षिक कृषि महोत्सव – एग्रीफेस्ट 2025 का दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया। इस अवसर पर कृषि मंत्री गणेश जोशी ने एग्रीफेस्ट में लगाए गए स्टॉलों का अवलोकन भी किया।
कृषि मंत्री जोशी ने कहा कि इस तरह के आयोजन किसानों, कृषि-स्टार्टअप उद्यमियों, शोधकर्ताओं, छात्रों और कृषि से जुड़े विभागों को एक ही मंच पर लाकर नवाचार, कौशल, उद्यमिता और सतत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने बताया कि महोत्सव में कृषि, ग्रामीण विकास, बागवानी, पशुपालन व अन्य संबद्ध विभागों के 10–15 आधिकारिक स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें विभिन्न योजनाओं, पहलों और सफल समूहों की उपलब्धियों को प्रदर्शित किया गया है। इससे छात्रों, किसानों और युवा उद्यमियों को प्रेरणा मिलेगी। मंत्री जोशी ने कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को नवाचार और आत्मनिर्भरता की ओर प्रोत्साहित करने का बेहतरीन माध्यम हैं और भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे।

मंत्री जोशी ने कहा कि उत्तराखंड में उत्पादित मिलेट्स बेहतरीन गुणवत्ता के हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों की आय दोगुनी करने के लिए अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं लागू की गई हैं। उन्होंने कहा कि तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद पीएम मोदी द्वारा पहली फाइल पीएम किसान निधि पर हस्ताक्षर करना किसानों के प्रति उनकी संवेदनशीलता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कुशल नेतृत्व में उत्तराखंड में भी कृषकों के हित में अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय के कृषि विद्यालय को सफल आयोजन के लिए बधाई और शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम में चेयरमैन कमल घनसाला, वाइस चांसलर अमित कुमार भट्ट, एन.के. नौटियाल सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और किसान उपस्थित रहे।
गांव वासियों के बीच सीएम धामी ने कहा—टुंडी–बारमौ मेरी जड़ें और मेरी पहचान
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपने पैतृक क्षेत्र कनालीछीना के टुंडी–बारमौं गांव पहुंचे, जहां उनका जोरदार स्वागत किया गया। लंबे समय बाद अपने गांव लौटे मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पल उनके लिए बेहद भावुक और यादगार रहा। उन्होंने बताया कि यही वह स्थान है जहां उनका बचपन बीता, जहां उन्होंने पहली बार विद्यालय का रुख किया और जहां की संस्कृति व परंपराओं ने उनके व्यक्तित्व की नींव रखी।

गांव पहुंचने पर बुजुर्गों ने उन्हें आशीर्वाद दिया, जबकि महिलाओं और बच्चों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कई बुजुर्ग अब भी उन्हें उनके बचपन के नाम से पुकारते हैं, जो उनके लिए अत्यंत स्नेह और अपनत्व का अनुभव है। उन्होंने कहा कि बच्चों और युवाओं की मुस्कान देखकर पुरानी यादें फिर से ताजा हो गईं।
मुख्यमंत्री ने भावुक होकर कहा कि टुंडी–बारमौं सिर्फ एक गांव नहीं, बल्कि उनकी जड़ें, उनके संस्कार और उनकी पहचान है। उन्होंने ग्रामीणों के प्रेम और भरोसे को अपनी सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए कहा कि गांववासियों का साथ और समर्थन उन्हें निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहेगा।
सतपाल महाराज ने परिवार को तुरंत मुआवजा देने को कहा
देहरादून। विकासखंड पोखड़ा के बगड़ीगाड़ क्षेत्र में बाघ के हमले में रानी देवी की मौत के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है। घटना की गंभीरता को देखते हुए कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने इसे अत्यंत दुखद बताते हुए उच्च अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
महाराज ने बताया कि उन्होंने जिलाधिकारी से वार्ता कर आदमखोर बाघ के विरुद्ध ‘शूट एट साइट’ की अनुमति लेने को कहा है, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके। इसके अलावा उन्होंने वन विभाग को पीड़ित परिवार को तत्काल मुआवजा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
उन्होंने दिवंगत रानी देवी के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि ईश्वर शोकाकुल परिवार को इस असहनीय दुख को सहने की शक्ति प्रदान करे और मृतक आत्मा को शांति दे।
सुदूर इलाकों में मजबूत होंगी स्वास्थ्य सेवाएं
देहरादून। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को 287 और नये चिकित्सक मिलेंगे। राज्य चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड ने चिकित्सा अधिकारियों की सीधी भर्ती के लिये अभ्यर्थियों से आवेदन मांगे हैं। चयन बोर्ड ने उक्त भर्ती हेतु ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 10 दिसम्बर 2025 निर्धारित की है। उक्त पदों हेतु अभ्यर्थियों के लिये न्यूनतम आयु सीमा 21 वर्ष व अधिकतम 42 वर्ष सुनिश्चित की है।
सूबे के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के निर्देश के उपरांत स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रांतीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा संवर्ग के अंतर्गत साधारण ग्रेड चिकित्सा अधिकारियों के रिक्त 287 पदों सीधी भर्ती हेतु राज्य चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड को अधियाचन भेजा गया था, जिसमें 231 पद सीधी भर्ती और 56 बैकलॉग के पद शामिल हैं। उक्त के क्रम चयन बोर्ड ने आज चिकित्सा अधिकारियों रिक्त पदों को सीधी भर्ती से भरने हेतु भर्ती विज्ञप्ति जारी कर अभ्यर्थियों से आवेदन मांगे हैं। चयन बोर्ड द्वारा जारी भर्ती विज्ञप्ति में चिकित्सा अधिकारियों के इन पदों में अनारक्षित श्रेणी के कुल 141, अनुसूचित जाति 70, अनुसूचित जनजाति 11, अन्य पिछड़ा वर्ग 38, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के तहत 27 पद शामिल हैं। जिस हेतु ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया आगामी 20 नवम्बर 2025 से शुरू हो जायेगी, जबकि आवेदन की अंतिम तिथि 10 दिसम्बर 2025 को निर्धारित की गई है। चयन बोर्ड से चिकित्सकों के चयन के उपरांत उन्हें प्रदेश के दूरस्थ चिकित्सालयों में प्रथम तैनाती दी जायेगी, ताकि सुदूरवर्ती क्षेत्रों में आम लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिले सकेगी।
बयान-
राज्य सरकार का उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक अस्पताल में बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना है, ताकि आम जनता को स्थानीय स्तर पर ही गुणवत्तापूर्ण उपचार मिल सके। इसी दिशा में सरकार लगातार चिकित्सकों व पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती कर रही है। 287 नये चिकित्सकों की नियुक्ति भी इसी प्रयास का हिस्सा है, जिससे सुदूरवर्ती क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूती मिलेगी। – डॉ. धन सिंह रावत, स्वास्थ्य मंत्री, उत्तराखंड।
अवैध निर्माणों पर एमडीडीए की सख्त कार्रवाई, सहस्त्रधारा रोड, विधौली और कंडोली क्षेत्र में कई भवन सील
हमारा लक्ष्य देहरादून को स्वच्छ, सुंदर और नियोजित शहर के रूप में विकसित करना- बंशीधर तिवारी
देहरादून। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने एक बार फिर अवैध निर्माणों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाते हुए राजधानी देहरादून के विभिन्न क्षेत्रों में सीलिंग की कार्रवाई की है। प्राधिकरण की टीम ने सहस्त्रधारा रोड, विधौली और कंडोली क्षेत्र में चल रहे कई अवैध व्यवसायिक और आवासीय निर्माणों पर शिकंजा कसते हुए उन्हें सील कर दिया।
कार्रवाई के विवरण
प्राधिकरण की टीम ने विभिन्न स्थानों पर छापेमारी कर निम्नलिखित अवैध निर्माणों को सील किया। स्वरजीत सिंह द्वारा साईं मंदिर, विधौली रोड के निकट किए जा रहे अवैध व्यवसायिक निर्माण को संयुक्त सचिव गौरव चटवाल के आदेश पर सील किया गया। सिकन्दर द्वारा विधौली रोड साईं मंदिर के पास किए गए अवैध निर्माण पर सीलिंग की कार्रवाई की गई। अली द्वारा कंडोली रोड, लिवेश लिविंग हॉस्टल के समीप किए जा रहे अवैध निर्माण को सील किया गया। तसलीम द्वारा कंडोली अड्डा में किए जा रहे अवैध निर्माण पर कार्रवाई करते हुए भवन सील किया गया। विवेक नोडियाल द्वारा कंडोली मंदिर के निकट किए जा रहे अवैध निर्माण पर भी सीलिंग की कार्रवाई की गई। इन कार्यवाहियों में सहायक अभियंता निशान्त कुकरेती, अवर अभियंता मनवीर पंवार तथा सुपरवाइजर मौके पर मौजूद रहे।
इसके अतिरिक्त, प्राधिकरण की एक अन्य टीम ने सहस्त्रधारा रोड क्षेत्र में बड़े स्तर पर कार्रवाई की, मयंक गुप्ता द्वारा पैसिफिक गोल्फ के निकट किए जा रहे बहुमंजिला अवैध निर्माण को सील किया गया। विक्रांत कुमार द्वारा हेलीपैड, सहस्त्रधारा रोड के पास किए गए बहुमंजिला अवैध निर्माण पर भी कार्रवाई की गई। नितिन मुदगल द्वारा सहस्त्रधारा रोड पर किए जा रहे अवैध व्यवसायिक निर्माण को सील किया गया। इस कार्रवाई में सहायक अभियंता शैलेन्द्र सिंह रावत, अवर अभियंता विदिता कुमारी, उमेश कुमार और सुपरवाइजर मौजूद रहे।
अवैध निर्माण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं- बंशीधर तिवारी
एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि राज्य की राजधानी में अनियमित और अवैध निर्माणों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह अभियान निरंतर जारी रहेगा। प्राधिकरण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शहर का विकास नियोजन के अनुरूप, पारदर्शी और सुरक्षित तरीके से हो। जो भी व्यक्ति बिना स्वीकृति या मानचित्र स्वीकृति के निर्माण करेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एमडीडीए के क्षेत्राधिकार में किसी भी प्रकार की मनमानी निर्माण गतिविधि शहर की सुंदरता, सुरक्षा और नियोजित विकास के लिए गंभीर खतरा है, इसलिए ऐसे मामलों में कोई समझौता नहीं किया जाएगा। एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा हमारा लक्ष्य देहरादून को स्वच्छ, सुंदर और नियोजित शहर के रूप में विकसित करना है। इसके लिए आवश्यक है कि सभी नागरिक नियमों का पालन करें और शहर के विकास में सहयोग दें। प्राधिकरण की इस सख्त कार्रवाई को स्थानीय लोगों ने सराहा है और इसे शहर में बढ़ते अनियमित निर्माणों पर नियंत्रण की दिशा में ठोस कदम बताया है।
स्वीकृत मानचित्र के अनुरूप ही कार्य करे जनता- मोहन सिंह बर्निया
एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने बताया कि प्राधिकरण द्वारा नियमित रूप से निरीक्षण किया जा रहा है और जहां भी बिना अनुमति या स्वीकृति के निर्माण कार्य पाए जा रहे हैं, वहां तत्काल सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि जनता से भी अपेक्षा है कि वे वैध निर्माण की प्रक्रिया पूरी करें और स्वीकृत मानचित्र के अनुरूप ही कार्य करें।
एमडीडीए की चेतावनी
एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने दोहराया है कि नियम के विपरीत निर्माण करने वालों पर अब और कठोर कदम उठाए जाएंगे। जिन निर्माणधारकों ने अवैध रूप से भवन खड़े किए हैं, वे स्वेच्छा से निर्माण रोकें और नियमानुसार मानचित्र स्वीकृत करवाएं, अन्यथा कार्रवाई तय है।
एचआईएचटी संस्थापक डॉ. स्वामी राम का 30वां महासमाधि दिवस श्रद्धा और भव्यता से मनाया गया
डोईवाला। एचआईएचटी संस्थापक डॉ.स्वामी राम जी का 30वां महासमाधि दिवस समारोह भव्यता के साथ मनाया गया। इस दौरान मुख्य अतिथि उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि एचआईएचटी संस्थापक डॉ.स्वामी राम जी विश्व की धरोहर हैं। स्वामी जी मानवता सेवा के संवाहक रहे।
गुरुवार को स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय जौलीग्रांट परिसर में एचआईएचटी संस्थापक डॉ.स्वामीराम के 30वें महासमाधि दिवस पर आयोजित समारोह में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने कहा कि मानवता की सेवा डॉ. स्वामी राम के जीवन का मूल उद्देश्य रहा है। उन्होंने समाज में मानवता और करुणा के प्रसार में डॉ. स्वामी राम के योगदान की प्रशंसा की।
एचआईएचटी के अध्यक्षीय समिति के सदस्य व स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय (एसआरएचयू) जॉलीग्रांट के अध्यक्ष डॉ.विजय धस्माना ने संस्थापक डॉ. स्वामी राम से जुड़े संस्मरणों को साझा किया। इसके साथ ही एचआईएचटी के गौरवमयी इतिहास पर प्रकाश डाला। डॉ.धस्माना ने कहा कि संस्थान स्वामी जी के उद्देश्य के अनुसार ही जन सेवा के पथ पर अग्रसर है।
समारोह में संस्थान से जुड़े 39 कर्मचारियों को ‘उत्कृष्ट कर्मचारी पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। इस दौरान एचआईएचटी के वार्षिक कैलेंडर-2026 का विमोचन भी किया गया। समारोह के आखिर में डॉ.विजेंद्र चौहान ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इसके बाद दोपहर में आयोजित भंडारे में हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
इस दौरान स्वामी राम साधक ग्राम ऋषिकेश के प्रमुख स्वामी ऋतुवान भारती, कुलपति डॉ.राजेंद्र डोभाल, पूर्व कुलाधिपति डॉ.मोहन स्वामी, विक्रम सिंह, डॉ.प्रकाश केशवया, डॉ.रेनू धस्माना आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन गरिमा कपूर ने किया।
स्वामी राम सेंटर में राज्यपाल ने अर्पित की श्रद्धांजलि
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने स्वामी राम सेंटर पहुंचकर ट्रस्ट के संस्थापक ब्रह्मलीन डॉ. स्वामी राम को श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके जीवन एवं योगदान को नमन किया। श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान उन्होंने स्वामी राम सेंटर में आयोजित फोटो प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया और स्वामी राम के जीवन दर्शन एवं सेवा कार्यों से संबंधित जानकारी प्राप्त की।
‘सुमंगली सेवा आश्रम, कर्नाटक को’ को स्वामी राम मानवता पुरस्कार-2025
डोईवाला- वर्ष 2003 से हिमालयन इंस्टिट्यूट हॉस्पिटल ट्रस्ट (एचआईएचटी) देशभर में आर्थिक, पर्यावरण, विज्ञान संबंधी, सामाजिक व आध्यात्मिक क्षेत्र में समाज के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वाली किसी एक प्रतिष्ठित संस्था अथवा व्यक्ति को स्वामी राम मानवता पुरस्कार प्रदान कर रहा है। यह सम्मान स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के संस्थापक अध्यक्ष परम पूज्य स्वामी राम जी की मानव सेवा की भावना को समर्पित है।
स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय (एसआरएचयू) के अध्यक्ष डॉ.विजय धस्माना ने बताया कि इस वर्ष स्वामी राम मानवता पुरस्कार-2025 सामाजिक कार्यों को समर्पित संस्था ‘सुमंगली सेवा आश्रम, कर्नाटक” को प्रदान किया गया। पुरस्कार के रुप में संस्था को 10 लाख रुपए, प्रशस्ति पत्र और गोल्ड मेडल प्रदान किया गया।
सुमंगली सेवा आश्रम की संस्थापक अध्यक्ष डॉ.एस. जी. सुशीलम्मा ने यह पुरस्कार ग्रहण किया।
1975 से मानव सेवा में समर्पित है सुमंगली सेवा आश्रम
सुमंगली सेवा आश्रम, जिसकी स्थापना 1975 में डॉ.एस. जी. सुशीलम्मा (संस्थापक-अध्यक्ष) एवं एम. कंठम्मा (सचिव) ने की थी। पिछले पाँच दशकों से निराश्रित महिलाओं, अनाथ बच्चों, वृद्धजन एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की सेवा में समर्पित है।
संस्था द्वारा संचालित प्रमुख सेवाओं में प्रेमानंद मक्कला कुटीर (बच्चों का आवास गृह), रैगपिकर्स पुनर्वास केंद्र, 174 आंगनबाड़ी केंद्र, सौहार्द शॉर्ट स्टे होम (संकटग्रस्त महिलाओं के लिए आश्रय), पुण्यकोटि वनप्रस्थाश्रम (वृद्धाश्रम), स्व-सहायता समूह, विद्यालय, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं मोबाइल क्लिनिक शामिल हैं।
शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण एवं सामाजिक न्याय को एकीकृत कर सुमंगली सेवा आश्रम ने समाज में करुणा, आत्मनिर्भरता एवं सेवा की मिसाल कायम की है।
ग्राम्य विकास विभाग ने 108 बच्चों को छात्रवृति की प्रदान
ग्राम्य विकास संस्थान में स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय की ओर से 108 बच्चों को छात्रवृति दी। प्रत्येक बच्चे को 9700 रुपए की स्कॉलरशिप प्रदान की गई। जनपद देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी, टिहरी से कक्षा एक से 12वीं तक यह सभी बच्चे थे। डॉ.धस्माना ने बताया कि यह सभी बच्चे विकलांग, अनाथ या एकल अभिभावक के संरक्षण में हैं अथवा आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद शिक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं।
‘शांति की स्वर धारा’ भजन संध्या आयोजित
एचआईएचटी संस्थापक ब्रह्मलीन स्वामी राम जी की महासमाधि दिवस पर भजन संध्या का आयोजन किया गया। शाम को करीब साढ़े छह बजे विश्वविद्यालय सभागार में ‘शांति की स्वर धारा’ भजन संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विश्वप्रसिद्ध संगीतकार एवं शांतिदूत हिरोकी ओकानो ने अपनी बांसुरी वादन की संगीतमय प्रस्तुति से वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
कार्यक्रम में बयान
-गुरूदेव डॉ.स्वामी राम के नाम से यह सम्मान पाना हमारे लिए अत्यंत प्रेरणादायी है। यह केवल सुमंगली सेवा आश्रम के कार्यों की सराहना नहीं, बल्कि उन सभी सहयोगियों और स्वयंसेवकों का सम्मान है जिन्होंने पिछले पाँच दशकों से हमारे साथ मिलकर सेवा का संकल्प निभाया है। स्वामी राम जी के आदर्श हमें आगे भी करुणा, निष्ठा और निस्वार्थ सेवा के मार्ग पर चलते रहने की प्रेरणा देते रहेंगे।” -डॉ.एस. जी. सुशीलम्मा, संस्थापक व अध्यक्ष, सुमंगली सेवा आश्रम
“परम् श्रद्धेय गुरूदेव डॉ.स्वामी राम ने शिक्षा एंव स्वास्थ्य के माध्यम से समाज को जो दिशा दी वह बेमिसाल है। डॉ. स्वामी राम जी न केवल हमारे देश के बल्कि सम्पूर्ण विश्व के लिए एक अनमोल धरोहर हैं। उनका जीवन मानवता और सेवा के प्रति समर्पित रहा। उनके आदर्श हमें यह सिखाते हैं कि असली मानवता दूसरों की भलाई में ही है। आज हम उनके योगदान को याद करते हुए समाज में करुणा और सेवा की भावना को बढ़ावा दे रहे हैं।” – लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह, राज्यपाल (सेवानिवृत्त)
‘गुरुदेव डॉ. स्वामी राम जी की विचारधारा ‘योग: कर्मसु कौशलम्’ के ध्येय के साथ सामाजिक उत्थान में एचआईएचटी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उनके जीवन और शिक्षाओं से प्रेरित होकर ही हम आज समाज में सेवा और मानवता के मूल्य को आगे बढ़ा रहे हैं। यह महासमाधि दिवस हमें उनकी अमर स्मृति के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करने और समाज सेवा के पथ पर अग्रसर रहने की प्रेरणा देता है। -डॉ.विजय धस्माना, अध्यक्ष, एसआरएचयू
एसआरएचयू के ‘उत्कृष्ट कर्मचारी पुरस्कार’-2025
टीचर ऑफ दी ईयर- डॉ. गरिमा मित्तल, डॉ. संजीव कुमार पाण्डे, प्रीति प्रभा
रीसर्चर ऑफ दी ईयर- डॉ. मनीष रतूड़ी
क्लीनिशियन अवॉर्ड- डॉ. राखी खंडूरी
एडमिनिस्ट्रेटीव स्टाफ अवॉर्ड- डॉ. विनीत मेहरोत्रा, चंद्र शेखर पंत, गौरा
नर्सिंग स्टाफ अवॉर्ड- सुनील कुमार गुप्ता, रशेल शालिनी बोधन, अब्दुल कलाम, इंद्रज सैनी, राकेश कुमार सिंह
पैरा क्लीनिकल अवॉर्ड- मुकेश सिलस्वाल, ज्योति राठौर, मुकुल मोहन, सुशील सकलानी,
ऑफिस स्टाफ अवॉर्ड- आशू बहुगुणा, सुरेन्द्र सिंह भंडारी, दीप चंद्र जोशी, अनुज सिंधवाल, बिपिन सिंह, विशाल तोमर
सपोर्टिंग स्टाफ अवॉर्ड- प्रमोद कोठारी, संजीव कुमार, सतीश चंद्र पंत, मनमोहन भट्ट, कमलेश्वर प्रसाद थपलियाल, सोनू नेगी, रोहित जमोली, मुकेश, तौकीर हुसैन, अरविंद कुमार, रमेश कृषाली
आउटरीच सर्विसेस अवार्ड- ज्योति शर्मा
हाउसकीपिंग- मनोज, ललित गुरूंग, देव बहादुर, रोहित
नैनीताल में PGICON 2025 सम्मेलन का भी हुआ आगाज़, आयुर्वेद में शोध और नवाचार को मिलेगा नया आयाम
नैनीताल। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को भुजियाघाट, नैनीताल में काया आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने PGICON 2025 सम्मेलन का भी उद्घाटन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुर्वेद विषय पर आयोजित इस गोष्ठी से निकले निष्कर्ष न केवल आयुर्वेद में नवीन शोध को प्रोत्साहित करेंगे, बल्कि चिकित्सा नवाचार और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को भी नई दिशा प्रदान करेंगे।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में देश में पहली बार आयुष मंत्रालय की स्थापना की गई, जिससे पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिली है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 300 आयुष्मान आरोग्य केंद्र, 111 होम्योपैथिक चिकित्सालय, 5 यूनानी चिकित्सालय, 62 वेलनेस सेंटर स्थापित किए जा चुके हैं। इसके साथ ही हर जनपद में आयुष चिकित्सालय संचालित हैं तथा ई-संजीवनी पोर्टल के माध्यम से जनता को निःशुल्क आयुष परामर्श उपलब्ध कराया जा रहा है।
इस अवसर पर केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री एवं लोकसभा सांसद अजय भट्ट, विधायक बंसीधर भगत, विधायक सरिता आर्य, राम सिंह कैरा, तथा नैनीताल भाजपा जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट सहित कई जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
देहरादून जिले के 10 स्थानों पर 15 नवंबर को एक साथ होगा मॉक अभ्यास
मॉक ड्रिल के दौरान बजेंगे इमरजेंसी सायरन, घबराए नहीं, जिला प्रशासन की नागरिकों से अपील
देहरादून। भूकंप की संभावित आपदा से निपटने की तैयारी के दृष्टिगत देहरादून जिले में 15 नवंबर,2025 को सुबह 9ः30 बजे से 10 अलग-अलग स्थानों पर व्यापक मॉक अभ्यास किया जाएगा। मॉक अभ्यास को लेकर बृहस्पतिवार को सभी एजेंसियों के साथ टेबल टॉप एक्सरसाइज की गई। जिसमें आईआरएस से जुड़े सभी नोडल अधिकारियों को उनके दायित्वों की जानकारी देते हुए पूरी तरह से अपने दायित्वों का निर्वहन करने के निर्देश दिए गए।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा कि मॉक अभ्यास का उद्देश्य आपदा की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया, समन्वय और राहत कार्यो की दक्षता को परखना है। मॉक ड्रिल के दौरान भूकंप आने की काल्पनिक स्थिति तैयार की जाएगी। अभ्यास के दौरान राहत एवं बचाव कार्यो का प्रदर्शन किया जाएगा, ताकि वास्तविक आपदा के दौरान बेहतर समन्वय और कम से कम रिस्पांस टाइम में राहत एवं बचाव कार्यों को अंजाम दिया जा सके। जिलाधिकारी ने बताया कि इस अभ्यास में प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, अग्निशमन दल, पीआरडी, डीडीआरएफ, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ सहित जिले की तमाम एजेंसियां भाग लेंगी।
मॉक अभ्यास के दौरान सिविल डिफेंस सिस्टम को परखने के लिए इमरजेंसी सायरन भी बजाए जाएंगे। जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि 15 नवंबर को इमरजेंसी सायरन की तेज आवाज सुनाई देने पर घबराए नहीं। इस दिन मॉक अभ्यास के लिए सायरन बजाए जाएंगे। जिले में एक साथ 10 स्थानों पर आपदा राहत एवं बचाव को लेकर मॉक अभ्यास होगा। तहसील सदर के अंतर्गत 06 प्रमुख स्थान कोरोनेशन अस्पताल, महाराणा प्रताप स्टेडियम, आईएसबीटी, विद्युत उप केंद्र आराघर, जल संस्थान खंड दिलाराम चौक तथा पैसिफिक मॉल के आसपास मॉक अभ्यास किया जाएगा। जबकि कालसी के अंतर्गत पाटा गांव एवं राइका कस्तूरबा गांधी में मॉक अभ्यास किया जाएगा। वही विकास नगर में औद्योगिक क्षेत्र सेलाकुई तथा ऋषिकेश में टीएचडीसी के पास मॉक अभ्यास किया जाएगा। साथ ही स्थानीय जनता को भूकंप आपदा में सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाएगा।
टेबल टॉप एक्सरसाइज के दौरान एसडीएम सदर हरिगिरी, सिटी मजिस्ट्रेट प्रत्यूष सिंह, सीएमओ डा. एमके शर्मा, परियोजना निदेशक विक्रम सिंह, डीडीओ सुशील कुमार, डीएसओ केके अग्रवाल, डीडीएमओ ऋषभ कुमार सहित सभी एजेंसियों के नोडल अधिकारी मौजूद थे।
