खेत में घास काटते वक्त हुआ हादसा, घर से 500 मीटर दूर बरामद हुआ शव
कोटद्वार। पौड़ी गढ़वाल के कोटद्वार क्षेत्र में गुलदार का आतंक एक बार फिर देखने को मिला है। गुरुवार दोपहर पोखड़ा ब्लॉक के बगड़ीगाड़ गांव में घास काट रही एक महिला पर गुलदार ने हमला कर उसकी जान ले ली। दिनदहाड़े हुई इस घटना से पूरे इलाके में दहशत फैल गई है।
जानकारी के मुताबिक, 65 वर्षीय रानी देवी, पत्नी रमेश बंदूणी, दोपहर करीब ढाई बजे अपने घर के पास खेतों में घास काट रही थीं। तभी झाड़ियों में छिपे गुलदार ने अचानक उन पर हमला कर दिया। महिला की चीखें सुनकर ग्रामीण मौके की ओर दौड़े, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।
गांववालों ने काफी खोजबीन के बाद महिला का शव उसके घर से लगभग 500 मीटर की दूरी पर बरामद किया। घटना की सूचना वन विभाग और पुलिस को दी गई, जिसके बाद टीम ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया।
ग्रामीणों ने क्षेत्र में गुलदार की बढ़ती सक्रियता पर चिंता जताते हुए वन विभाग से गश्त बढ़ाने और पिंजरा लगाने की मांग की है।
वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल, सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल
ऋषिकेश। शिवपुरी में बंजी जंपिंग के दौरान गुरुवार को एक बड़ा हादसा हो गया। प्रमोशनल वीडियो शूट कर रहा एक युवक जंप के दौरान संतुलन खोकर नीचे टिन की छत पर गिर पड़ा, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के तुरंत बाद युवक को स्थानीय लोगों की मदद से एम्स ऋषिकेश ले जाया गया, जहां उसकी हालत नाजुक बनी हुई है। डॉक्टरों की एक टीम उसका उपचार कर रही है।
बताया जा रहा है कि घायल युवक दिल्ली का रहने वाला ब्लॉगर है, जो एक प्रमोशनल शूट के लिए ऋषिकेश आया था। घटना के समय वह बंजी जंपिंग के दौरान खुद का वीडियो रिकॉर्ड करवा रहा था। पूरा हादसा सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया है और इसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में युवक को प्लेटफॉर्म से छलांग लगाने के बाद असंतुलित होते और नीचे गिरते हुए देखा जा सकता है।
हैरानी की बात यह है कि हादसे के बाद अब तक न तो बंजी जंपिंग कंपनी के प्रबंधन ने और न ही घायल पक्ष ने पुलिस में कोई रिपोर्ट दर्ज कराई है। फिलहाल पुलिस मामले की जानकारी जुटा रही है और वीडियो की सत्यता की भी जांच कर रही है।
“खेल और पर्यावरण संरक्षण, दोनों हैं राष्ट्र निर्माण के आधार”- मुख्यमंत्री धामी
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज, रायपुर (देहरादून) में आयोजित अखिल भारतीय वन खेलकूद प्रतियोगिता 2025 का शुभारंभ किया। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल एवं श्रीमती कल्पना सैनी, तथा विधायक उमेश शर्मा ‘काउ’, खजान दास, श्रीमती सविता कपूर, प्रमुख सचिव आर के सुधांशु, प्रमुख वन संरक्षक उत्तराखंड सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
देवभूमि में खिलाड़ियों और वन अधिकारियों का स्वागत
मुख्यमंत्री ने मंच से देश के विभिन्न राज्यों से पधारे वन अधिकारियों, खिलाड़ियों एवं खेल प्रेमियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह हमारे लिए गर्व की बात है कि 28वीं अखिल भारतीय वन खेलकूद एवं सांस्कृतिक प्रतियोगिता की मेजबानी का सौभाग्य उत्तराखंड को प्राप्त हुआ है। उन्होंने इस आयोजन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव का आभार व्यक्त किया तथा वन विभाग और आयोजकों को इस भव्य आयोजन के लिए बधाई दी।
3390 खिलाड़ी, 42 टीमें, 700 से अधिक महिला प्रतिभागी
मुख्यमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त की कि इस वर्ष प्रतियोगिता में देशभर के 42 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से 3390 खिलाड़ी, जिनमें 700 से अधिक महिला खिलाड़ी, भाग ले रही हैं। उन्होंने सभी खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि “खेल केवल शारीरिक तंदुरुस्ती का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व विकास और राष्ट्र निर्माण का भी आधार हैं।”
खेल संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण के दोहरे संकल्प पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि खेल व्यक्ति में अनुशासन, टीमवर्क और संघर्ष की भावना विकसित करते हैं। उन्होंने कहा कि वन कर्मियों का फिट रहना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि वही वन और पर्यावरण की रक्षा के असली प्रहरी हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के साथ-साथ वन संपदा के संरक्षण और संवर्धन के लिए भी सतत प्रयासरत है।
स्पोर्ट्स लेगेसी प्लान और खिलाड़ियों को सम्मान
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि प्रदेश में 8 शहरों में 23 खेल अकादमियां, एक राज्य खेल विश्वविद्यालय, और महिलाओं के लिए महिला स्पोर्ट्स कॉलेज की स्थापना की जा रही है। उन्होंने कहा कि “राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक लाने वाले खिलाड़ियों को हमारी सरकार ‘आउट ऑफ टर्न’ नियुक्ति दे रही है और उत्कृष्ट खिलाड़ियों को 50 लाख रुपये की सम्मान राशि भी प्रदान कर रही है।”
मुख्यमंत्री ने उल्लेख किया कि हाल ही में वर्ल्ड कप विजेता भारतीय महिला क्रिकेट टीम की सदस्य एवं उत्तराखंड की बेटी स्नेहा राणा को 50 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान करने की घोषणा की गई है।
ग्रीन गेम्स और खेल वन की सराहना
मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल ही में संपन्न 38वें राष्ट्रीय खेलों को उत्तराखंड ने ‘ग्रीन गेम्स’ की थीम पर आयोजित किया, जहाँ सभी सामग्री ई-वेस्ट और रिसाइकल्ड मटेरियल से तैयार की गई। उन्होंने बताया कि 2.77 हेक्टेयर भूमि पर ‘खेल वन’ विकसित किया गया है, जहाँ पदक विजेताओं के नाम पर 1600 से अधिक रुद्राक्ष वृक्ष लगाए गए हैं। “यह स्थल खेल उत्कृष्टता के साथ हरित चेतना का प्रतीक बनेगा।”
वन्यजीव संरक्षण में आधुनिक तकनीक का प्रयोग
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य का लगभग 71% क्षेत्र वनाच्छादित है, जो इसे देश का ‘ऑक्सीजन बैंक’ और ‘वाटर टॉवर’ बनाता है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 6 राष्ट्रीय उद्यान, 7 वन्यजीव विहार और 4 संरक्षण आरक्षित क्षेत्र हैं — जो पूरे देश के औसत से कहीं अधिक है। उन्होंने बताया कि वन्यजीव संरक्षण के लिए राज्य सरकार ने जीपीएस ट्रैकिंग, ड्रोन सर्विलांस, डॉग स्क्वॉड जैसी आधुनिक तकनीकें लागू की हैं। साथ ही, मानव-वन्यजीव संघर्ष में मुआवजा राशि को 6 लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दिया गया है।
सीएम यंग ईको-प्रिन्योर योजना और इको-टूरिज्म
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में “सीएम यंग ईको-प्रिन्योर योजना” के तहत युवाओं को नेचर गाइड, ड्रोन पायलट, वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर, ट्रेकिंग गाइड और इको-टूरिज्म उद्यमी के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है। साथ ही, “कैन्टर राइड” जैसी पहलों से स्थानीय समुदायों को वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन से जोड़कर उनकी आजीविका सशक्त की जा रही है। उन्होंने कहा कि कॉर्बेट में ‘वन्यजीवों का एम्स’ कहे जाने योग्य आधुनिक रेस्क्यू सेंटर स्थापित किया गया है।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से से हल्द्वानी जू सफारी परियोजना और उत्तरकाशी में प्रस्तावित स्नो लेपर्ड कंज़र्वेशन सेंटर की स्वीकृति हेतु सहयोग का अनुरोध किया। उन्होंने कहा “ये दोनों परियोजनाएं राज्य के पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।”
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान का उल्लेख करते हुए खिलाड़ियों से आग्रह किया कि “यदि आप इस स्टेडियम परिसर में अपनी माता जी के नाम एक पौधा लगाएंगे, तो यह माँ के प्रति प्रेम और सम्मान का प्रतीक होगा और इस आयोजन को यादगार बनाएगा।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें पूर्ण विश्वास है कि देशभर से आए वन अधिकारी और खिलाड़ी अपनी अनुशासन, परिश्रम और खेल भावना से न केवल खेलों में उत्कृष्टता प्राप्त करेंगे, बल्कि वन संपदा के संरक्षण और हरित उत्तराखंड निर्माण के संकल्प को भी साकार करेंगे। “आप सभी अपने परिश्रम से न केवल राज्य का गौरव बढ़ा रहे हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक हरित, स्वस्थ और सशक्त उत्तराखंड का निर्माण कर रहे हैं।”
14 सीएमएसडी टैक्नीशियन और 7 प्रोफेसरों को भी मिले नियुक्ति पत्र
राज्य सरकार युवाओं को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा उपलब्ध कराने के लिये प्रतिबद्ध है- डॉ. धन सिंह
देहरादून। चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत राज्य चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से चयनित 28 नर्सिंग अधिकारियों एवं 14 सीएमएसडी टैक्नीशियन को प्रदेश के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने नियुक्ति पत्र वितरित किये। इसके अलावा उन्होंने एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर (नर्सिंग) के सात अभ्यर्थियों को भी नियुक्ति पत्र बांटे। डॉ. रावत ने कार्यक्रम के दौरान राजकीय स्टेट कॉलेज ऑफ नर्सिंग में रूपये 456.15 लाख की लागत से तैयार व्याख्यान कक्षों एवं लैब का भी लोकार्पण किया।
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज में आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा उपलब्ध कराने व प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिये प्रतिबद्ध है। इस अवसर पर उन्होंने राज्य चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से चयनित 28 नर्सिंग अधिकारियों, 14 सीएमएसडी टैक्नीशियन एवं 06 एसोसिएट प्रोफेसर (नर्सिंग) व 01 प्रोफेसर (नर्सिंग) को नियुक्ति पत्र सौंपे। डॉ. रावत ने कहा कि नर्सिंग अधिकारी एवं सीएमएसडी टैक्नीशियन की नियुक्ति से राजकीय मेडिकल कॉलेजों से सम्बद्ध चिकित्सालयों में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेगी, साथ ही मरीजों को उनकी बीमारियों से संबंधित पैथोलॉजी जांचे भी समय पर मिल सकेगी। जबकि राजकीय नर्सिंग कॉलेजों में एसोसिएट प्रोफेसर एवं प्रोफेसर की नियुक्ति होने से जहां सकाय सदस्यों की कमी दूर वहीं वहीं नर्सिंग छात्र-छात्राओं को बेहतर शिक्षण-प्रशिक्षण मिलेगा।
डॉ. रावत ने कहा कि राज्य सरकार की मंशा प्रदेश में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं के साथ-साथ उच्च गुणवत्तायुक्त चिकित्सा शिक्षा उपलब्ध कराना है। इसके लिये सरकार निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि सरकार जहां स्वास्थ्य उपकेन्द्रों से लेकर जिला अस्पतालों में आधुनिक तकनीक युक्त चिकित्सा सुविधाएं व मानव संसाधन जुटा रही है। वहीं राजकीय मेडिकल कॉलेजों व नर्सिंग कॉलेजों में संकाय सदस्यों, नर्सिंग अधिकारियों सहित प्रशिक्षित कार्मिकों की निरंतर नियुक्ति की जा रही है। उन्होंने कहा कि अब तक राजकीय मेडिकल कॉलेजों में 1248 नर्सिंग अधिकारी नियुक्त किये जा चुके हैं जबकि 587 नर्सिंग अधिकारियों के पदों पर नियुक्ति हेतु अधियाचन चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड को भेजा जा चुका है। इसके अलावा 439 असिस्टेंट प्रोफेसरों के पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया प्रगति पर है। इसके अलावा मेडिकल कॉलेजों में 170 टैक्नीशियनों की नियुक्ति की जा चुकी है। जिसमें लैब, ओटी, ईसीजी एवं रेडियोग्राफिक टैक्नीशियन शामिल है।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. रावत ने राजकीय स्टेट कॉलेज ऑफ नर्सिंग देहरादून में रूपये 456.15 लाख की लागत से निर्मितव्याख्यान कक्षों व लैब का भी लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि नर्सिंग शिक्षा की गुणवत्ता में और अधिक सुधार के लिये सरकार आधुनिक संसाधनों की उपलब्धता के साथ-साथ शिक्षकों की भी नियुक्ति कर रही है। डॉ. रावत ने सभी चयनित अभ्यर्थियों को बधाई देते हुये उम्मीद जताई कि सभी नव नियुक्त कार्मिक पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ अपने दायित्वों और कर्तव्यों का पालन कर सरकार का सहयोग करेंगे।
‘उतरांगन 2025’ मेले में महिला सशक्तिकरण मंत्री रेखा आर्या बनीं मुख्य अतिथि
देहरादून। ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी परिसर में ‘उतरांगन 2025’ हस्तशिल्प एवं शिल्पकला मेले का आयोजन उत्साह एवं सांस्कृतिक समृद्धता के साथ किया गया। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे जनजातीय समुदायों के युवा अपने हस्तशिल्प उत्पादों के साथ कला का प्रदर्शन कर रहे हैं।
मुख्य अतिथि, महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने मेले का उद्घाटन करते हुए कहा, कि उत्तराखंड की जनजातियां स्वरचित हस्तशिल्प और कलात्मक उत्पादों की समृद्ध परंपरा का निरंतर विस्तार कर रही हैं। जब यहां आए युवा वापस जाएं, तो वे उत्तराखंड की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और हस्तशिल्प समृद्धता की याद एवं सीख लेकर जाएं।

रेखा आर्या ने कहा कि सरकार वोकल फॉर लोकल, स्थानीय उत्पादों और हस्तशिल्प की वैश्विक ब्रांडिंग के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। इस अनूठे मेले को उन्होंने प्रदेश के हस्तशिल्प विकास की दिशा में ‘मील का पत्थर’ बताया।
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने युवाओं द्वारा लगाए गए सभी स्टालों पर जाकर उत्पादों की जानकारी हासिल की और युवाओं को उत्तराखंड के विभिन्न पर्यटन स्थल व मंदिरों में आने का निमंत्रण भी दिया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर डॉ. अमित आर भट्ट, एचओडी फैशन डिजाइनिंग डॉ. ज्योति छाबड़ा, डायरेक्टर इंफ्रास्ट्रक्चर ग्राफिक एरा ग्रुप डॉ. सुभाष गुप्ता सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।
साइबर क्राइम और साइबर कानूनों को लेकर हुई विस्तृत चर्चा
नई दिल्ली/ देहरादून। उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने बुधवार को नई दिल्ली में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग तथा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद से शिष्टाचार भेंट की।
भेंट के दौरान दोनों नेताओं के बीच साइबर क्राइम और साइबर कानूनों को सशक्त बनाने को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। इस दौरान सतपाल महाराज ने कहा कि डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा समाज की मूल आवश्यकता बन चुकी है। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधों के प्रति जनता में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ कड़े कानूनी प्रावधानों के माध्यम से ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाने की दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
बैठक में दोनों मंत्रियों ने साइबर सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों पर विचार साझा करते हुए राज्य और केंद्र के बीच समन्वय को और मजबूत करने पर सहमति जताई।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री मोदी के प्रेरक संदेशों से उत्तराखंड को मिली नई दिशा
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में बुधवार को सचिवालय में आयोजित मंत्रिमंडल बैठक में राज्य स्थापना रजत जयंती (राज्योत्सव) के विशेष अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा राज्य को दिए गए मार्गदर्शन के लिए कैबिनेट ने आभार व्यक्त किया।
मंत्रिमंडल ने कहा कि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के प्रेरणादायी मार्गदर्शन से उत्तराखंड को सतत विकास, लोककल्याण और नवाचार के पथ पर आगे बढ़ाने का संकल्प और भी सुदृढ़ हुआ है।
कैबिनेट ने विश्वास व्यक्त किया कि रजत जयंती वर्ष में मिले इन प्रेरक संदेशों से राज्य गठन के मूल उद्देश्यों की प्राप्ति और प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए सरकार निरंतर तत्पर रहेगी। साथ ही, मंत्रिमंडल ने समस्त कर्मचारियों व जनता से सहयोग और सहभागिता सुनिश्चित करने का भी आह्वान किया।
ऑटिज्म, बौद्धिक विकलांगता और मानसिक विकारों की स्थिति पर मिला ठोस प्रमाण, “हर बच्चे को देखभाल, सहयोग और अवसर”
देहरादून। उत्तराखंड में पहली बार बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर व्यापक अध्ययन किया गया है। राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, बाल एवं किशोर मनोरोग विभाग तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य, रोग-गणना विज्ञान विभाग, निमहांस (राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान), बेंगलुरु के सहयोग से गवर्नमेंट डून मेडिकल कॉलेज, देहरादून द्वारा यह सर्वेक्षण पूरा किया गया। इस रिपोर्ट का विमोचन 11 नवम्बर 2025 को चिकित्सा स्वास्थ्य निदेशालय, देहरादून में किया गया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में तथा स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के मार्गदर्शन में राज्य सरकार मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में निरंतर प्रयासरत है। सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा डॉ. आर. राजेश कुमार के निर्देशन में राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण, उत्तराखंड द्वारा बच्चों और किशोरों में मानसिक विकारों की वास्तविक स्थिति का सर्वेक्षण करवाया गया। इस अध्ययन का उद्देश्य राज्य में बच्चों की मानसिक स्थिति की सटीक जानकारी प्राप्त कर भविष्य की नीति निर्धारण में सहयोग देना था। विमोचन कार्यक्रम में निमहांस की निदेशक डॉ. प्रतिमा मूर्ति मुख्य अतिथि रहीं। उनके साथ निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य डॉ. शिखा जंगपांगी, निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन डॉ. रश्मि पंत, सलाहकार एसएचएसआरसी डॉ. तृप्ति बहुगुणा, निमहांस के विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप और डॉ. के. जॉन विजय सागर, तथा मुख्य चिकित्सा अधिकारी देहरादून डॉ. मनोज शर्मा, मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण के सदस्य ललित जोशी मौजूद रहे। सभी विशेषज्ञों ने इस अध्ययन को राज्य की मानसिक स्वास्थ्य नीतियों के लिए एक ऐतिहासिक पहल बताया।
देश का पहला सामुदायिक आधारित मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण
यह रिपोर्ट न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे देश में अपनी तरह का पहला सामुदायिक आधारित सर्वेक्षण है। इसमें 0 से 17 वर्ष के आयु वर्ग के 802 बच्चों और किशोरों को शामिल किया गया। अध्ययन देहरादून, पौड़ी, अल्मोड़ा और नैनीताल जिलों में किया गया, जिससे पहाड़ी और मैदानी दोनों भौगोलिक क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व हुआ। रिपोर्ट में पाया गया कि बच्चों और किशोरों में ऑटिज्म, बौद्धिक विकलांगता और सामान्य मानसिक विकारों के मामलों में समय पर पहचान और उपचार की आवश्यकता अत्यंत महत्वपूर्ण है। अध्ययन में यह भी सुझाव दिया गया कि स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न कार्यक्रमों और विद्यालय स्वास्थ्य अभियानों में मानसिक स्वास्थ्य की स्क्रीनिंग को शामिल किया जाए। साथ ही शिक्षकों और स्वास्थ्यकर्मियों को मानसिक स्वास्थ्य की पहचान और सहायता हेतु विशेष प्रशिक्षण देने की भी अनुशंसा की गई है।
मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त करने की दिशा में कदम
निमहांस और उत्तराखंड सरकार पहले से ही “टेली-मानस” और “नमन” जैसी योजनाओं के माध्यम से राज्य में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने का कार्य कर रहे हैं। यह रिपोर्ट भविष्य में बनने वाली राज्य स्तरीय कार्ययोजना के लिए एक ठोस आधार बनेगी, ताकि प्रत्येक बच्चे को समय पर पहचान, परामर्श और उपचार मिल सके। निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन डॉ. रश्मि पंत का मानना है कि यदि इस रिपोर्ट की अनुशंसाओं को नीति स्तर पर लागू किया गया, तो उत्तराखंड बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक आदर्श राज्य बन सकता है। यह पहल राज्य सरकार की उस प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है जिसके तहत “हर बच्चे को देखभाल, सहयोग और अवसर” सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस प्रयास किए जा रहे हैं।
प्रतिनिधिमंडल ने नैनीसैंण-कालूसैंण-सांकरी कच्चे मोटर मार्ग का शीघ्र डामरीकरण करने की मांग की
देहरादून। ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी से आज जनपद चमोली के कर्णप्रयाग क्षेत्र के खत्याड़ी गांव से आए एक प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व क्षेत्र पंचायत सदस्य सेवानिवृत्त सूबेदार लेफ्टीनेंट नन्द किशोर थपलियाल ने किया।
इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री गणेश जोशी को ज्ञापन सौंपते हुए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के अंतर्गत कालूसैंण से सेरापाखुडी होते हुए नैनीसैंण-कालूसैंण-सांकरी कच्चे मोटर मार्ग का शीघ्र डामरीकरण करने की मांग की। मंत्री गणेश जोशी ने प्रतिनिधिमंडल की मांग पर सकारात्मक आश्वासन देते हुए जल्द कार्रवाई करने का भरोसा दिलाया।

इस अवसर पर रि. सूबेदार राजेंद्र सिंह मनराल, विजय प्रसाद जोशी, योगेश्वर थपलियाल, उमा मनराल सहित अन्य ग्रामीण भी उपस्थित रहे।
सीएम ने साहसिक उपलब्धि पर दी बधाई और शुभकामनाएं
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से उनके शासकीय आवास पर माउंट एवरेस्ट फतह करने वाले 16 वर्षीय पर्वतारोही सचिन कुमार ने शिष्टाचार भेंट की। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर सचिन को उनकी अद्भुत और साहसिक उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि इतनी कम उम्र में विश्व की सबसे ऊंची चोटी पर तिरंगा फहराना सचिन के साहस, आत्मविश्वास, दृढ़ संकल्प और कठिन परिश्रम का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सचिन ने यह सिद्ध कर दिया है कि लक्ष्य कितना भी ऊंचा क्यों न हो, हौसला और संकल्प उससे भी ऊंचे हो सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार युवाओं में खेल, साहसिक गतिविधियों और पर्वतारोहण को प्रोत्साहित करने के लिए अनेक योजनाएं चला रही है। इन पहलों के माध्यम से उत्तराखंड के युवा अपने सपनों को साकार कर देश-विदेश में प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं।
