मुख्यमंत्री ने कहा- गुरु नानक देव जी मानवता, समानता और सद्भावना के आदर्श प्रतीक
देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व पर देहरादून के रेसकोर्स स्थित गुरुद्वारा साहिब में मत्था टेककर प्रदेश की खुशहाली की कामना की। इस दौरान सीएम धामी ने प्रदेशवासियों को प्रकाश पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु नानक देव जी मानवता, समानता और सद्भावना के आदर्श प्रतीक हैं। उन्होंने अपने जीवन सिद्धांतों से समाज को “एक ओंकार सतनाम” के भाव से जोड़ते हुए सत्य, ईमानदारी और सेवा का मार्ग दिखाया। उन्होंने यह भी कहा कि गुरु नानक देव जी की शिक्षाएँ सदैव मानवता को सही दिशा दिखाती रहेंगी और समाज को एकजुट रखेगीं।
इस मौके पर गुरुद्वारा प्रबंधन समिति व श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या मौजूद रही।
मुख्यमंत्री ने 46 करोड़ 24 लाख रुपये की विकास योजनाओं का किया लोकार्पण और शिलान्यास
काशीपुर। उत्तराखंड राज्य स्थापना की रजत जयंती पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मंगलवार को काशीपुर पहुँचे। यहाँ उन्होंने प्रथम राज्य स्तरीय शहरी विकास सम्मेलन का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कुल 46 करोड़ 24 लाख रुपये की विकास योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। साथ ही दिव्यांग सशक्तिकरण कौशल विकास वाहन तथा नगर निगम काशीपुर के कूड़ा एकत्रित करने वाले वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य निर्माण के शुरूआती वर्षों में संसाधन बेहद सीमित थे और भौगोलिक परिस्थितियाँ भी चुनौतीपूर्ण थीं, लेकिन उत्तराखंड ने निरंतर संघर्ष में भी प्रगति और सुशासन की मिसाल कायम की है। उन्होंने बताया कि राज्य निर्माण के समय शहरी विकास विभाग का बजट मात्र 55 करोड़ रुपये था, जो आज बढ़कर 1300 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। पिछले 25 वर्षों में राज्य के शहरों ने अर्थव्यवस्था को गति दी है तथा रोजगार के नए अवसर बनाए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के मार्गदर्शन में उत्तराखंड ने विकास की नई ऊँचाइयाँ प्राप्त की हैं।
इस मौके पर राज्यसभा सांसद व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, विधायक त्रिलोक सिंह चीमा, अनिल कपूर डब्बू, फरजाना बेगम, मुकेश कुमार, प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार, दीप्ति रावत, गुंजन सुखीजा, भाजपा जिलाध्यक्ष मनोज पाल, महापौर दीपक बाली सहित कई जनप्रतिनिधि व अधिकारी उपस्थित रहे।
जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया की उपस्थिति में मेले का हुआ भव्य शुभारंभ
परंपरा और विकास का संगम है श्रीनगर का बैकुंठ चतुर्दशी मेला: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी
पौड़ी। श्रीनगर स्थित आवास विकास मैदान में आयोजित बैकुंठ चतुर्दशी मेला एवं विकास प्रदर्शनी का उद्घाटन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्चुअल माध्यम से किया। इस अवसर पर जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया, नगर निगम श्रीनगर की मेयर आरती भंडारी, जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
मेयर ने मुख्यमंत्री को आभासी रूप में शॉल, पुष्पगुच्छ एवं स्मृतिचिह्न भेंट कर स्वागत किया। पीएम श्री राजकीय बालिका इंटर कॉलेज की छात्राओं ने अतिथियों का पारंपरिक ढंग से स्वागत किया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी को बैकुंठ चतुर्दशी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि श्रीनगर का यह मेला उत्तराखंड की प्राचीन परंपरा, आस्था और लोकसंस्कृति का जीवंत उदाहरण है। यह न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त करने, पारंपरिक कला, संस्कृति और हस्तशिल्प को प्रोत्साहित करने का भी माध्यम बन चुका है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार देवभूमि की सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए सतत प्रयासरत है। श्री बद्रीनाथ एवं केदारनाथ मास्टर प्लान के तहत पुनर्निर्माण कार्य हों या ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेललाइन निर्माण कार्य सभी योजनाएँ तीव्र गति से प्रगति पर हैं।
उन्होंने कहा कि श्रीनगर क्षेत्र में भी व्यापक स्तर पर विकास कार्य किए जा रहे हैं। इसमें रोडवेज बस स्टेशन में पार्किंग का निर्माण, अलकनंदा नदी के तट पर गंगा संस्कृति केंद्र की स्थापना, तथा श्रीनगर पालिका को नगर निगम का दर्जा देकर नगर के पार्कों, पार्किंग स्थलों और सड़कों का सुधार कार्य शामिल है। उन्होंने कहा कि बिलकेदार एवं बेलकंडी क्षेत्र में नयी टाउनशिप विकसित करने का कार्य भी प्रगति पर है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीनगर गढ़वाल शिक्षा, संस्कृति और आध्यात्मिकता का केंद्र रहा है। बैकुंठ चतुर्दशी मेला यहां की ऐतिहासिक पहचान है, जिसे संजोकर रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। इस मेले में हर वर्ग की सहभागिता सामुदायिक एकता और सांस्कृतिक गौरव को दर्शाती है। राज्य सरकार का प्रयास है कि ऐसे पारंपरिक मेलों को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिले।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास प्रदर्शनी के माध्यम से शासन की विभिन्न योजनाओं की जानकारी आमजन तक पहुंच रही है, जिससे जनसहभागिता और पारदर्शिता दोनों को बल मिलेगा। उन्होंने श्रीनगर में हो रहे नगर विकास कार्यों की भी सराहना की और कहा कि स्वच्छता, जल संरक्षण एवं पर्यटन की दिशा में नगर निगम के प्रयास अनुकरणीय हैं।
मेयर आरती भंडारी ने मेले की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में श्रीनगर नगर क्षेत्र में अनेक विकास कार्य हुए हैं, जिनमें डंपिंग जोन को वेस्ट टू वंडर पार्क में परिवर्तित करना, पार्किंग व सामुदायिक भवन का निर्माण तथा स्ट्रीट लाइट एवं पोलों का सुदृढ़ीकरण प्रमुख हैं। उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।
जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने सभी को शुभकामनाएं देते हुए भगवान कमलेश्वर महादेव को नमन किया। उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक मेला समर्पण, आस्था एवं सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि यह मेला केवल सांस्कृतिक आयोजन न रहकर सामाजिक एवं आर्थिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। विभिन्न जनपदों से व्यापारी, शिल्पकार एवं स्वयं सहायता समूह इसमें भाग ले रहे हैं।
जिलाधिकारी ने बताया कि मेले में कई नयी गतिविधियाँ जोड़ी गयी हैं, जिनमें बेबी शो, फन गेम्स, पारंपरिक परिधानों की प्रदर्शनी, महिला स्पोर्ट्स प्रतियोगिताएँ तथा विभिन्न विषयों पर गोष्ठियों का आयोजन शामिल है, जिससे कार्यक्रम और अधिक आकर्षक बना है। विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉल आमजन को शासन की योजनाओं की जानकारी देने और लाभान्वित करने का कार्य कर रहे हैं।
जिलाधिकारी ने नगर निगम, विभिन्न सरकारी विभागों और स्थानीय जनता के सहयोग की सराहना की तथा मेयर एवं नगर आयुक्त के साथ गुब्बारे उड़ाकर मेले का शुभारंभ किया। तत्पश्चात उन्होंने डाक विभाग सहित विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण किया और महिला स्वयं सहायता समूहों से संवाद कर उनके उत्पाद भी खरीदे।
कार्यक्रम के उपरांत जिलाधिकारी तथा मेयर ने कमलेश्वर महादेव मंदिर में दीप प्रज्ज्वलित कर पूजा-अर्चना की एवं भगवान कमलेश्वर से लोककल्याण और समृद्धि की कामना की।
कार्यक्रम का मंच संचालन सरिता उनियाल व बबीता थपलियाल ने किया। इस अवसर पर नगर आयुक्त नूपुर वर्मा, पीडी डीआरडीए विवेक कुमार उपाध्याय, बीडीओ यमकेश्वर दृष्टि आनंद, डीपीओ देवेंद्र थपलियाल, बीईओ खिर्सू अश्विनी रावत, तहसीलदार दीपक भंडारी सहित विभिन्न वार्डों के वार्ड मेंबर व जनसमूह उपस्थित रहा।
नोटिस के बाद भी कब्ज़ा न हटने पर प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की
हरिद्वार। हरिद्वार जनपद में सरकारी भूमि को कब्ज़े से मुक्त कराने की प्रशासनिक कार्यवाही लगातार जारी है। इसी क्रम में रानीपुर कोतवाली क्षेत्र के पथरी रोह पुल के पास करीब दो बीघा सरकारी भूमि पर बने अवैध ढांचे को प्रशासन ने हटवा दिया। सिंचाई विभाग की ओर से पहले ही जिम्मेदारों को नोटिस भेज दिया गया था, लेकिन तय अवधि में अतिक्रमण स्वयं नहीं हटाया गया। जिसके बाद विभागीय आदेश के आधार पर आज बुलडोज़र लगाकर निर्माण को तोड़ा गया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के बाद प्रदेश के विभिन्न इलाकों में सरकारी जमीनों पर बनी अवैध संरचनाओं के खिलाफ अभियान तेज़ कर दिया गया है। अधिकारियों ने साफ कहा कि राज्य की भूमि पर किसी भी प्रकार का कब्ज़ा या अनधिकृत निर्माण स्वीकार नहीं किया जाएगा।
प्रशासनिक टीम के साथ बड़ी संख्या में पुलिस बल भी मौके पर मौजूद रहा ताकि कार्रवाई के दौरान कोई विवाद या बाधा न उत्पन्न हो। प्रशासन का कहना है कि आगे भी ऐसी सभी जगहों की पहचान कर क्रमबद्ध तरीके से कार्रवाई की जाएगी।
राष्ट्रपति ने माता नैना देवी से देश की खुशहाली, शांति और समृद्धि की कामना की
नैनीताल। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार सुबह नैनीताल पहुँचकर मां नैना देवी मंदिर में पूजा-अर्चना की। दो दिवसीय प्रवास पर झील नगरी में मौजूद राष्ट्रपति ने यहां पहुंचकर माता नैना देवी से देश की खुशहाली, शांति और समृद्धि की कामना की। मंदिर परिसर में पहुंचने पर समिति के पदाधिकारियों ने उनका स्वागत किया। इस मौके पर उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (से.नि.) गुरमीत सिंह भी उनके साथ रहे।
मंदिर दर्शन के दौरान पुलिस और प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था बेहद चुस्त रही। राष्ट्रपति के आगमन के समय श्रद्धालुओं की आवाजाही को सीमित किया गया, लेकिन नगर में माहौल पूरे दिन भक्ति और उत्साह से भरा रहा।
51 शक्तिपीठों की सूची में शामिल मां नैना देवी मंदिर नैनीताल का मुख्य धार्मिक स्थल है, जहां स्थानीय लोगों के साथ पर्यटक भी हर सीजन में माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
मां नैना देवी के पुजारी पंडित जगदीश जोशी ने राष्ट्रपति मुर्मू को विधिवत पूजा कराई। राष्ट्रपति ने कुछ समय मंदिर के गर्भगृह में रुककर मां की स्तुति की और फिर अगले कार्यक्रमों के लिए रवाना हो गईं।
सीएम धामी ने की घोषणा — डिजिटल एक्स-रे मशीन भी की जाएगी उपलब्ध
उप जिला चिकित्सालय चौखुटिया के निर्माण कार्यों में आएगी तेजी — कृषक विपणन परिषद को सौंपी जिम्मेदारी
चौखुटिया के अस्पताल का विस्तार — स्वास्थ्य सुविधाओं में होगा बड़ा सुधार- मुख्यमंत्री धामी
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि अल्मोड़ा जनपद के चौखुटिया में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की क्षमता को बढ़ाते हुए इसे 30 बेड से विस्तारित कर 50 बेड का अस्पताल बनाया जाएगा। इसके साथ ही अस्पताल में अत्याधुनिक डिजिटल एक्स-रे मशीन भी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे स्थानीय नागरिकों को बेहतर और त्वरित स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि पहाड़ के लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के लिए बड़े शहरों पर निर्भर न रहना पड़े। इसी उद्देश्य से चौखुटिया में उप जिला चिकित्सालय के निर्माण से संबंधित कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए उत्तराखंड कृषि उत्पादन विपणन परिषद को कार्यदायी संस्था नियुक्त किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और प्रदेश में चिकित्सा सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में लगातार व्यापक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस अस्पताल के विस्तार से चौखुटिया और आसपास के क्षेत्रों के हजारों लोगों को लाभ मिलेगा तथा स्वास्थ्य उपचार में होने वाली देरी को रोका जा सकेगा।
महिलाओं के खिलाफ जघन्य क्रूरता व हिंसा अस्वीकार्य- कुसुम कण्डवाल
देहरादून। देहरादून की एक पीड़िता ने अपने पति पर लंबे समय से शारीरिक, मानसिक और यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं। जिस पर उत्तराखण्ड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष ने जानकारी मिलते ही संज्ञान लिया है, पीड़िता ने देहरादून ने थाना कोतवाली में दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि उसके पति पुश्पांज रोहिला द्वारा लगातार मारपीट, गाली-गलौज और शराब के नशे में हिंसा, उत्पीड़न और अत्याचार किया जा रहा है।
पीड़िता के अनुसार, आरोपी पति शराब के नशे में आए दिन गाली-गलौज, मारपीट और अपमानजनक व्यवहार करता है। हाल ही में हुई एक घटना में उसने अत्यंत अमानवीय और अशोभनीय कृत्य किया, आरोपी द्वारा पीड़िता के गुप्तांगों पर बोतल द्वारा प्रहार किया गया है जिससे पीड़िता गंभीर रूप से घायल हो गई। पीड़िता ने यह भी बताया कि आरोपी ने उसके शैक्षणिक दस्तावेज़ नष्ट किए और जान से मारने की धमकी दी।
इस गंभीर प्रकरण पर उत्तराखण्ड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने तत्काल संज्ञान लेते हुए एसपी सिटी देहरादून को कठोर व त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने कहा कि यह मामला अत्यंत संवेदनशील और भयावह है तथा इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने कहा, “महिलाओं के खिलाफ इस प्रकार की क्रूरता अस्वीकार्य है। उन्होंने पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आरोपी के विरुद्ध कानून की सबसे सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज कर त्वरित कार्रवाई की जाए। पीड़िता को हर संभव सुरक्षा और चिकित्सा सहायता प्रदान की जाए।”
अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने कहा कि “सरकार व महिला आयोग ऐसी घटनाओं पर शून्य टॉलरेंस की नीति पर काम कर रहा है। न्याय में देरी को अन्याय माना जाएगा, इसलिए इस प्रकरण की मॉनिटरिंग आयोग द्वारा की जाएगी।”
एसपी सिटी ने बताया कि वर्तमान में मामला दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है। शीघ्र अतिशीघ्र कार्यवाही से आयोग को अवगत कराया जायेगा।
‘स्पर्श हिमालय महोत्सव 2025’ में मुख्य अतिथि के रूप में पधारे केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू
रिजिजू ने ‘लेखक ग्राम’ पहल की सराहना करते हुए इसे भारत के सांस्कृतिक, साहित्यिक एवं पारिस्थितिक पुनर्जागरण का जीवंत उदाहरण बताया
देहरादून। ‘स्पर्श हिमालय महोत्सव 2025’, जिसका विषय “अंतर्राष्ट्रीय साहित्य, संस्कृति एवं कला महोत्सव” था, देहरादून के लेखक गांव में सोमवार को बड़े उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर भगवान धनवंतरि की प्रतिमा का लोकार्पण भी किया गया। यह महोत्सव उत्तराखंड राज्य के गठन के 25 वर्ष एवं अटल बिहारी वाजपेयी के ‘लेखक ग्राम’ के स्वप्न के 25 वर्ष को समर्पित था।
केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जिनका स्वागत पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने किया। रिजिजू ने ‘लेखक ग्राम’ को रचनात्मकता, ज्ञान और हिमालयी प्रेरणा का केंद्र बनाने के लिए डॉ. निशंक के उल्लेखनीय कार्य की प्रशंसा की।
अपने संबोधन में रिजिजू ने महोत्सव का हिस्सा बनने पर प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि वे स्वयं अरुणाचल प्रदेश से होने के कारण हिमालय से भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि “हिमालय केवल पर्वत नहीं, बल्कि भारत की शक्ति, आध्यात्मिकता और पहचान के प्रतीक हैं।”
हिमालयी राज्यों की अपनी यात्राओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सीमा क्षेत्रों जैसे गुंजी में सड़क संपर्क एवं अवसंरचना के विस्तार हेतु किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा, “भारत की सुंदरता इसकी विविधता में निहित है — हम भले अलग भाषाएँ बोलते हों और अलग परंपराएँ निभाते हों, परंतु हमारे मूल्य और दृष्टि हमें एक सूत्र में बांधते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “हमारा संविधान लोकतंत्र को दिया गया सबसे सुंदर योगदान है — जो हमारी एकता, करुणा और सामूहिक भावना का जीवंत प्रतीक है।”
कार्यक्रम में डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने केंद्रीय मंत्री का स्वागत किया और महोत्सव को उत्तराखंड के 25 वर्ष एवं अटल बिहारी वाजपेयी जी के ‘ग्राम भारत’ के स्वप्न को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि ‘लेखक ग्राम’ पहल का उद्देश्य गाँवों को रचनात्मकता, संस्कृति और शिक्षा के केंद्रों में विकसित करना है।
आचार्य बालकृष्ण, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, पतंजलि ने भारत की प्राचीन ज्ञान परंपराओं, आयुर्वेद और हिमालयी पारिस्थितिकी के संरक्षण में पतंजलि के योगदान का उल्लेख करते हुए रिजिजू का हार्दिक स्वागत किया।
प्रो. अनिल सहस्रबुद्धे ने ‘लेखक ग्राम’ की अवधारणा की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) की उस भावना का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक शिक्षा से जोड़ती है।
इस अवसर पर प्रो. सोमवीर (इंडोनेशिया) ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लोकतांत्रिक और संसदीय संवाद को प्रोत्साहित करने में रिजिजू की भूमिका की सराहना की तथा भारत के ‘स्वच्छता अभियान’ की भी प्रशंसा की।
पद्मश्री डॉ. बी.के. संजय (एम्स गुवाहाटी) ने हिमालयी परंपराओं के समग्र स्वास्थ्य संवर्धन में महत्व को रेखांकित किया। स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज ने उपस्थित जनसमूह को आशीर्वाद दिया और जीवन में अध्यात्म, सेवा एवं नैतिक अनुशासन के महत्व पर बल दिया। प्रो. पृथ्वीराज, उपाध्यक्ष, ने डॉ. निशंक के हिमालयी एवं सांस्कृतिक विकास में योगदान की प्रशंसा की और उन्हें सम्मान स्वरूप स्मृति चिन्ह भेंट किया।
अंत में धन्यवाद ज्ञापन देते हुए डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने किरेन रिजिजू का आभार व्यक्त किया और कहा कि उनके प्रेरणादायी शब्दों ने हिमालय और जनमानस के बीच के गहरे संबंध को पुनः जीवंत कर दिया।
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने प्रदेश से जुड़े मुद्दों पर की चर्चा
आबादी घाटी से मैदान की तरफ खिसक रही, विधानसभा में उठा पलायन का मुद्दा
देहरादून। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के विधानसभा सत्र में संबोधन के अवसर पर नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने प्रदेश से जुड़े मुद्दों की चर्चा की। 25 साल की यात्रा व प्रदेश की विभिन्न खूबियों का उल्लेख भी किया। कहा कि उत्तराखंड सभी मानकों में एक विशिष्ट प्रदेश है। भौगोलिक दृष्टि से यह राज्य दक्षिण एशियाई क्षेत्र में अपनी सीमाएं नेपाल और तिब्बत से जोड़ता है। उत्तर में गिरीराज हिमालय उत्तराखंड और देश की रक्षा में अडिग प्रहरी की तरह खड़ा है।
आर्य ने कहा कि देवताओं की आत्मा वाले इस हिमालयी प्रदेश की विधानसभा में महामहिम का स्वागत करना उनका अहोभाग्य है। प्रकृति ने इस राज्य को हिमालय के साथ ही हिमालय की गोद से निकलने वाली ‘‘सदा नीरा’’ नदियाँ दी हैं, जो सदियों से आधे भारत की धरती की प्यास बुझा रही हैं। इन नदियों के साथ बहती ‘‘गंगा-जमुनी संस्कृति’’ ने इस भूमि को सहिष्णुता का प्रतीक बनाया है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में असंख्य ताल और कुण्ड हैं, जिनमें कई ‘‘पार्वती कुण्ड’’ के नाम से प्रसिद्ध हैं। मध्य हिमालय का नैनीताल, तराई का नानकसागर और 6 राष्ट्रीय उद्यान व 7 वन्यजीव अभयारण्य इस प्रदेश की जैव विविधता के प्रतीक हैं। इसी कारण हिमालय और उत्तराखंड को भारत भूमि का ‘‘ऑक्सीजन टावर’’ कहा जाता है।
नेता प्रतिपक्ष ने महामहिम राष्ट्रपति को ‘‘प्रकृति की बेटी’’ कहते हुए कहा कि जैसे वे ओडिशा के सिमलीपाल राष्ट्रीय उद्यान की गोद में पली-बढ़ी हैं, वैसे ही उत्तराखंड की महिलाएँ भी जंगलों को अपना मायका मानती हैं। जब-जब जल, जंगल और जमीन पर संकट आया, यहाँ की महिलाएँ संघर्ष के लिए घरों से निकल पड़ीं। विश्वविख्यात ‘‘चिपको आंदोलन’’ इसी धरती पर 1974 में गौरा देवी के नेतृत्व में शुरू हुआ था।
आर्य ने कहा कि उत्तराखंड धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता का गुलदस्ता है। यहाँ चारधामों में श्री बदरीनाथ, श्री केदारनाथ, श्री गंगोत्री और श्री यमुनोत्री जैसे पवित्र स्थल हैं। 15200 फीट की ऊंचाई पर स्थित हेमकुंड साहिब और तराई का नानकमत्ता साहिब सिख धर्म के आस्था केंद्र हैं। वहीं रुड़की के पास स्थित पीरान कलियर दरगाह सूफी परंपरा का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि देवभूमि का समाज सदियों से समावेशी रहा है, जिसने सभी को अपनाया और सम्मान दिया है। परंतु, यह राज्य अपनी प्राकृतिक विडंबनाओं से भी जूझ रहा है। हाल की आपदाओं में धराली, थराली, बसुकेदार और देहरादून में जनहानि हुई।
आर्य ने कहा कि उत्तराखंड के जंगल देश-दुनिया के पर्यावरण की रक्षा कर रहे हैं, लेकिन वन्य जीवों के कारण किसानों की खेती नष्ट हो रही है। वन्य जीव-मानव संघर्ष और वन कानून आमजन के लिए बड़ी समस्या हैं। 2006 में देशभर में लागू वनाधिकार कानून के बावजूद उत्तराखंड में आज तक इसके लाभ ग्रामीणों तक नहीं पहुँचे हैं।
उन्होंने कहा कि गरीबी, पलायन, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी समस्याएँ आज भी पहाड़ के विकास में बाधक हैं। कृषि योग्य भूमि की कमी, कठिन जीवन, रोजगार व स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में लोग पलायन को विवश हैं। महिलाओं पर खेती और गृहस्थी का सारा बोझ है।
आर्य ने कहा कि बेरोजगारी, तकनीकी कौशल की कमी, औद्योगीकरण का अभाव और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों की अनुपस्थिति के कारण पहाड़ी अर्थव्यवस्था आत्मनिर्भर नहीं हो पाई है। शिक्षा और स्वास्थ्य की स्थिति भी अब तक संतोषजनक नहीं है।
उन्होंने कहा कि राज्य के विकास के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, कृषि, उद्यमिता, पर्यटन, ऊर्जा और जलापूर्ति जैसे क्षेत्रों में सतत प्रयासों की आवश्यकता है।
अंत में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि महामहिम राष्ट्रपति का विधानसभा में स्वागत उत्तराखंड के लिए गौरव का क्षण है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि महामहिम के मार्गदर्शन से राज्य सरकार प्रदेशहित में ठोस कदम उठाएगी।
मुख्यमंत्री बोले– 25 साल की विकास यात्रा को भव्य तरीके से किया जाएगा सेलिब्रेट
देहरादून। विधानसभा के विशेष सत्र में राष्ट्रपति के सम्बोधन के बाद सीएम धामी ने सीधे एफआरआई का दौरा किया। यहां स्थापना दिवस के मुख्य कार्यक्रम में पीएम मोदी प्रमुख रूप से मौजूद रहेंगे। उत्तराखंड राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में 9 नवम्बर को प्रदेशभर में भव्य रजत जयंती उत्सव का आयोजन किया जाएगा। मुख्य राज्य स्तरीय कार्यक्रम देहरादून स्थित फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (एफआरआई) में आयोजित होगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एफआरआई पहुंचकर कार्यक्रम की तैयारियों का स्थलीय निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने आयोजन स्थल, सुरक्षा व्यवस्था, दर्शक दीर्घा, यातायात प्रबंधन, सांस्कृतिक मंच और स्वागत तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य स्थापना दिवस का यह ऐतिहासिक अवसर गरिमामय और व्यवस्थित तरीके से मनाया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आयोजन उत्तराखंड की 25 वर्ष की विकास यात्रा, संघर्ष और उपलब्धियों का प्रतीक है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सान्निध्य में यह रजत जयंती समारोह प्रदेश के लिए प्रेरणादायक अवसर होगा।
इस अवसर पर सचिव डॉ. पंकज कुमार पांडेय, गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडेय, आईजी गढ़वाल राजीव स्वरुप, अपर सचिव बंशीधर तिवारी एवं शासन – प्रशासन के अन्य अधिकारी मौजूद थे।
