उत्तराखंड ने अपनी युवा शक्ति और संकल्प के दम पर देश में एक अलग पहचान बनाई- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विधानसभा के विशेष सत्र को किया संबोधित
राष्ट्रपति ने यूसीसी समेत विभिन्न उपलब्धियों को गिनाया
देहरादून। उत्तराखंड गठन के 25 साल पूरे होने पर सोमवार से विधानसभा में दो दिन का विशेष सत्र शुरू हुआ। इस मौके पर तीन दिवसीय प्रवास पर आईं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सदन को संबोधित करते हुए राज्य की उपलब्धियों, चुनौतियों और भविष्य की दिशा पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड ने अपनी युवा शक्ति और संकल्प के दम पर देश में एक अलग पहचान बनाई है और आने वाले वर्षों में इस पहचान को और मजबूत करना होगा।
सत्र की शुरुआत पर विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने राष्ट्रपति का स्वागत किया और रम्माण कला आधारित स्मृति चिह्न भेंट किया। राष्ट्रपति ने रम्माण पर आधारित एक पुस्तक भी रिलीज की। इस दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर धामी, राज्यपाल ले. जन. गुरमीत सिंह(सेनि), सभी वर्तमान विधायक, पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व सांसद भी सदन में मौजूद रहे।
राष्ट्रपति ने कहा कि वर्ष 2000 में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में इस राज्य का गठन उत्तराखंडवासियों के सपनों को साकार करने के लिए हुआ था। 25 वर्षों में राज्य ने पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा उत्पादन, पर्यटन विकास, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाए। उन्होंने महिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य और सशक्तीकरण में हुई प्रगति पर विशेष संतोष जताया। द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि उत्तराखंड की महिलाएं सदैव से अग्रणी रही हैं और आने वाले समय में भी राज्य की उन्नति में महिला शक्ति बड़ी भूमिका निभाएगी।
राष्ट्रपति ने गढ़वाल रेजीमेंट और उत्तराखंड के सैनिकों के शौर्य का उल्लेख करते हुए कहा कि इस राज्य की सैन्य परंपरा देश के लिए गर्व का विषय है। साथ ही उन्होंने समान नागरिक संहिता विधेयक पास करने पर विधानसभा के सभी सदस्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि जनता के भरोसे पर खरा उतरना ही विधायकों का सबसे बड़ा दायित्व है।
सदन में स्वागत भाषण में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने उत्तराखंड आंदोलन को याद करते हुए कहा कि जिन लोगों ने राज्य निर्माण के लिए बलिदान दिए, इस सत्र में उन्हें नमन करना हमारा दायित्व है। उन्होंने कहा कि राज्य को तकनीकी शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और पहाड़ी क्षेत्रों में रोजगार जैसे विषयों पर तेज गति से काम करने की जरूरत है।
इसके बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राष्ट्रपति का अभिनंदन करते हुए कहा कि 25 वर्ष उत्तराखंड के लिए गौरव और आत्ममंथन का अवसर है। राज्य जिस उद्देश्य से बना था, उसे साकार करने की दिशा में हम केंद्र सरकार के मार्गदर्शन में आगे बढ़ रहे हैं।
राज्यपाल ले. जन. गुरमीत सिंह ने कहा कि रजत जयंती सत्र राज्य की विकास यात्रा का मूल्यांकन और भविष्य की रणनीति तय करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में हमारा लक्ष्य ऐसा विकास मॉडल स्थापित करना होगा, जिसमें आर्थिक प्रगति और प्रकृति संरक्षण दोनों साथ–साथ चलें।
घुड़सवारी क्षेत्र में 8 चयनित PBG घोड़े होंगे तैनात
देहरादून। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति निकेतन में दो नई आगंतुक- केंद्रित सुविधाओं- फुट ओवर ब्रिज और घुड़सवारी क्षेत्र- का लोकार्पण किया। इन दोनों परियोजनाओं ने राष्ट्रपति निकेतन परिसर को आधुनिक अवसंरचना, सुरक्षा और हिमालयी विरासत के अनूठे संगम के रूप में स्थापित कर दिया है।
राजपुर रोड पर बना 105 फीट लंबा पैदल पार पुल न केवल स्थानीय वास्तुकला का प्रतीक है, बल्कि यह राष्ट्रपति निकेतन और आगामी राष्ट्रपति उद्यान के बीच निर्बाध आवाजाही को भी संभव बनाता है। राज्य लोक निर्माण विभाग द्वारा ₹9 करोड़ की लागत से मात्र छह माह में तैयार की गई इस परियोजना को “हिमालयी डिज़ाइन की आधुनिक मिसाल” कहा जा रहा है। रैंप और रेलिंग सहित इसका डिज़ाइन इसे सभी आयु वर्गों के लिए सुगम और सुरक्षित बनाता है।
इसके बाद राष्ट्रपति ने राष्ट्रपति निकेतन परिसर में विकसित अत्याधुनिक घुड़सवारी क्षेत्र का भी उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने राष्ट्रपति अंगरक्षकों (PBG) के घोड़ों को स्वयं घास खिलाई और उनके रखरखाव की जानकारी ली। 0.7 एकड़ में फैला यह क्षेत्र सीपीडब्ल्यूडी द्वारा विकसित किया गया है, जहाँ राष्ट्रपति के अंगरक्षकों के 8 चयनित घोड़े रखे जाएंगे। यहां आगंतुकों के लिए देखने के गलियारे और निर्देशित भ्रमण (Guided Tours) की विशेष व्यवस्था की गई है। यह सुविधा सोमवार को छोड़कर प्रतिदिन सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक आम जनता के लिए खुली रहेगी।
वहीं राष्ट्रपति ने उत्तराखंड संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित सांस्कृतिक संध्या में भी शिरकत की। कार्यक्रम में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) भी उपस्थित रहे। राष्ट्रपति ने उत्तराखंड की लोकसंगीत और लोकनृत्य की प्रस्तुतियों का आनंद लिया और लोक कलाकारों से मिलकर उनकी हौसला-अफजाई की।
राष्ट्रपति निकेतन में हुआ यह लोकार्पण उत्तराखंड के लिए गौरवपूर्ण क्षण रहा। जहाँ आधुनिकता ने परंपरा का हाथ थामा, और राष्ट्रपति निकेतन ने भविष्य की ओर एक और सुनहरा कदम बढ़ाया।
पुलिस लाइन में हुई संयुक्त ब्रीफिंग, वीवीआईपी रूट और फोर्स डिप्लॉयमेंट प्लान को मिला अंतिम रूप
नैनीताल। नैनीताल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दो दिवसीय दौरे को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने जिले में हाई अलर्ट जारी कर दिया है। तीन और चार नवंबर की वीवीआईपी मूवमेंट को ध्यान में रखते हुए पुलिस, प्रशासन और इंटेलिजेंस विभागों ने संयुक्त ब्रीफिंग कर सुरक्षा प्लान को फाइनल किया। अधिकारियों ने साफ कहा कि राष्ट्रपति के प्रवास के दौरान सुरक्षा मानकों में किसी भी तरह की चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पुलिस लाइन में आयोजित बैठक में राजपत्रित अधिकारियों, जिले के सभी एसपी, आईपीएस अधिकारियों और PAC व ATS यूनिट के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान वीवीआईपी रूट, डिप्लॉयमेंट, एंट्री पास सिस्टम, कम्युनिकेशन सेटअप और फ्रिंज एरियाज़ की निगरानी व्यवस्था का रिव्यू लिया गया। अधिकारियों ने यह भी निर्देश दिए कि बगैर पहचान पत्र किसी को भी किसी रूट या कार्यक्रम स्थल के आस-पास अनुमति नहीं दी जाएगी।
आईजी स्तर के अधिकारियों ने कहा कि हाल के महीनों में देश में कई महत्वपूर्ण सुरक्षा घटनाएं हुई हैं, इसलिए नैनीताल में राष्ट्रपति के प्रवास के दौरान हर पुलिस कर्मी को अलर्ट मोड में रहना होगा। संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल कंट्रोल रूम और वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाई जाए।
डीएम नैनीताल ने कहा कि पुलिस को प्रशासन की सभी टीमों का पूरा सहयोग मिलेगा। साथ ही यह भी निर्देश दिए कि ट्रैफिक डाइवर्जन इस तरीके से लागू हो कि आम जनता का सामान्य आवागमन बाधित न हो और उन्हें अनावश्यक परेशानी न हो।
सुरक्षा तैयारी की मुख्य बातें
सभी थानों में सत्यापन और सघन चेकिंग अभियान शुरू
ड्रोन उड़ान पर पूर्ण रोक, एंटी-ड्रोन सिस्टम ऐक्टिव
ATS, SDRF, BDS, फायर यूनिट पूरी तरह तैनात
सोशल मीडिया मॉनिटरिंग टीम भी एक्टिव मोड में
तैनाती (डिप्लॉयमेंट)
31 राजपत्रित अधिकारी
302 निरीक्षक/सब इंस्पेक्टर
938 हेड कांस्टेबल व कांस्टेबल
PAC की 3 कंपनी और 2 प्लाटून
इसी बीच राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) भी राष्ट्रपति के कार्यक्रमों को देखते हुए 3 और 4 नवंबर को नैनीताल में रहेंगे और तय कार्यक्रम के अनुसार विभिन्न स्थलों पर मौजूद रहेंगे।
हरिद्वार। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने पतंजलि विश्वविद्यालय हरिद्वार के द्वितीय दीक्षांत समारोह में स्वर्ण पदक प्राप्त विद्यार्थियों को सम्मानित किया।
रविवार को आयोजित इस कार्यक्रम में कुल 1454 विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की गई। 62 शोधार्थियों को विद्या वारिधि और 3 शोधार्थियों को विद्या वाचस्पति की उपाधि प्रदान की गई, जबकि 615 विद्यार्थियों को परास्नातक और 774 विद्यार्थियों को स्नातक की उपाधि प्रदान की गई। इस अवसर पर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि.) ने राष्ट्रपति को राष्ट्रपति भवन की विविध वनस्पतियों पर आधारित दो पुस्तकें ‘फ्लोरा ऑफ राष्ट्रपति भवन’ एवं ‘मेडिसिनल प्लांट्स ऑफ राष्ट्रपति भवन’ की प्रतिलिपियाँ भी भेंट कीं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई एवं आशीर्वाद प्रदान किया। उन्होंने पदक प्राप्त विद्यार्थियों की सराहना करते हुए कहा कि विद्यार्थियों के जीवन-निर्माण में योगदान देने वाले अध्यापकों और अभिभावकों का भी विशेष अभिनंदन किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि इस वर्ष उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों में 64 प्रतिशत बेटियाँ हैं तथा पदक प्राप्त करने वाली छात्राओं की संख्या छात्रों की तुलना में चार गुना अधिक है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि विकसित भारत के उस स्वरूप का परिचायक है जिसमें महिलाएँ नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि पतंजलि विश्वविद्यालय महर्षि पतंजलि की तप, साधना और ज्ञान परंपरा को आधुनिक समाज के लिए सुलभ बना रहा है। विश्वविद्यालय योग, आयुर्वेद एवं प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में शिक्षा और अनुसंधान के माध्यम से स्वस्थ भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालय की भारत-केन्द्रित शिक्षा-दृष्टि की सराहना करते हुए कहा कि इसमें विश्व बंधुत्व की भावना, वैदिक ज्ञान एवं आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण का समन्वय और वैश्विक चुनौतियों के समाधान जैसी विशेषताएँ निहित हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से वसुधैव कुटुंबकम् की भावना पर आधारित जीवन-मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया।
राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान-प्राप्ति नहीं है, बल्कि सदाचार, तपस्या, सरलता और कर्तव्यनिष्ठा जैसे जीवन-मूल्यों को आत्मसात करना भी है। उन्होंने विद्यार्थियों को न केवल आत्म-विकास बल्कि राष्ट्र-निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया। गंगा तट पर स्थित हरिद्वार की सांस्कृतिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि ये पवित्र स्थल ज्ञान और अध्यात्म का संगम है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पतंजलि विश्वविद्यालय के विद्यार्थी स्वाध्याय और तपस्या जैसे आदर्शों का पालन करते हुए स्वस्थ, संस्कारित और समरस समाज के निर्माण में योगदान देंगे।
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि.) ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए उनके देवभूमि आगमन को गर्व का क्षण बताया। राज्यपाल ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड केवल एक राज्य नहीं, बल्कि योग, आयुर्वेद और अध्यात्म का प्राण-केंद्र है। इस पवित्र धरती से प्रचलित योग और आयुर्वेद की परंपरा ने न केवल भारत को, बल्कि समूचे विश्व को स्वास्थ्य, संतुलन और सद्भाव का संदेश दिया है। उत्तराखंड की यह ऋषि-परंपरा आज भी हमें यह प्रेरणा देती है कि ज्ञान का सर्वोच्च उद्देश्य केवल आत्म-विकास नहीं, बल्कि विश्व-कल्याण है।
राज्यपाल ने उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को हार्दिक शुभकामनाएँ दीं और आशा व्यक्त की कि वे दीक्षांत समारोह के पश्चात आने वाली चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना करेंगे। उन्होंने कहा कि आज उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थी अपने राष्ट्र, प्रदेश और समाज की उम्मीदों पर खरे उतरेंगे तथा अपनी शिक्षा, प्रतिभा एवं प्रशिक्षण का उपयोग मानव-कल्याण के लिए करेंगे।
राज्यपाल ने कहा कि हमारे ऋषि-मुनियों ने जो ज्ञान अर्जित किया, वह केवल हमारे लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण ब्रह्मांड के कल्याण के लिए था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र संघ में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को स्वीकृति दिलाकर योग के विज्ञान पर किए गए हजारों वर्षों के कार्य को वैश्विक मंच प्रदान किया। विगत कुछ वर्षों में योग और आयुर्वेद के माध्यम से स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति आई है, और आज करोड़ों लोग इनके माध्यम से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का देवभूमि उत्तराखंड की सवा करोड़ देवतुल्य जनता की ओर से स्वागत किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सदैव अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के कल्याण को प्राथमिकता देते हुए समाज के वंचित, शोषित एवं पिछड़े वर्गों के सशक्तिकरण के लिए कार्य किया है। हाल ही में जब उन्होंने लड़ाकू विमान ‘राफेल’ में उड़ान भरी, तो पूरे देश ने उनके अदम्य साहस, राष्ट्रभक्ति और दृढ़ संकल्प का प्रेरक उदाहरण देखा। उनके व्यक्तित्व में मातृत्व की ममता, सेवा का संकल्प और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण का अद्भुत संगम निहित है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह हम सभी उत्तराखंडवासियों का सौभाग्य है कि राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने के इस ऐतिहासिक अवसर पर हमें राष्ट्रपति का सान्निध्य और मार्गदर्शन प्राप्त हुआ है।
मुख्यमंत्री ने दीक्षांत समारोह में उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों से अपेक्षा की कि वे अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग करके अपने बेहतर भविष्य के साथ ही अपने परिवार की सुख-समृद्धि और समाज के कल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे। उन्होंने कहा कि स्वामी रामदेव के मार्गदर्शन में पतंजलि विश्वविद्यालय आधुनिक शिक्षा को भारतीय संस्कारों और परंपराओं से जोड़ने का अतुलनीय कार्य कर रहा है। यहाँ विज्ञान और अध्यात्म का अद्भुत संगम देखने को मिलता है, जहाँ विद्यार्थी केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि भारतीय जीवन-मूल्यों की भी शिक्षा प्राप्त करते हैं। पतंजलि विश्वविद्यालय ने आधुनिक विज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपरा के समन्वय से ऐसी शिक्षा पद्धति विकसित की है, जो योग, आयुर्वेद, विज्ञान और प्रौद्योगिकी को एक सूत्र में पिरोने का कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार अनेक नवाचार कर रही है। राज्य में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू करने के साथ ही प्रदेश के विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और बिग डेटा जैसे कोर्स संचालित करने की पहल की गई है। भारतीय संस्कृति, दर्शन और इतिहास के गहन अध्ययन के लिए दून विश्वविद्यालय में ‘सेंटर फॉर हिंदू स्टडीज’ की स्थापना भी की गई है। देहरादून में साइंस सिटी, हल्द्वानी में एस्ट्रो पार्क और अल्मोड़ा में साइंस सेंटर के निर्माण के माध्यम से राज्य में वैज्ञानिक अनुसंधान को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
कार्यक्रम में पतंजलि विश्वविद्यालय हरिद्वार के कुलाधिपति स्वामी रामदेव, कुलपति आचार्य बालकृष्ण, सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत, डॉ. कल्पना सैनी एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
सात दिवसीय आदिवासी युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम का किया उद्घाटन
पांच राज्यों के आठ जनपदों से 200 से ज्यादा युवा ले रहे हैं हिस्सा
देहरादून। डीआईटी यूनिवर्सिटी में 17 वें आदिवासी युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ । 7 दिन चलने वाले इस कार्यक्रम में देश के पांच राज्यों के कुल 8 नक्सलवादी आतंकवाद प्रभावित रहे जनपदों से 200 से ज्यादा युवा हिस्सा ले रहे हैं।
कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि भारत को विकसित देश बनाने के लिए हर वर्ग को एकजुट करना जरूरी है। इसके लिए सबसे पहली जरूरत है कि हम आदिवासी समाज के युवाओं को मुख्य धारा में शामिल करें।
हम सभी को मिलजुल कर या प्रयास करना होगा । इसके साथ ही हमें भी आदिवासी समाज से प्राकृतिक जीवन पद्धति और प्रकृति के साथ सामंजस्य से बनाने जैसी चीज़े सीखने को मिलेगी।
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि एक जमाने में नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्र की स्थिति बहुत खराब होती थी लेकिन केंद्र सरकार ने लगातार विशेष प्रयास करके अब स्थिति को बहुत हद तक सुधार दिया है।
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि 7 दिन के आयोजन में विभिन्न प्रदेशों से आए युवा उत्तराखंड के खानपान, रहन-सहन, लोक संस्कृति, लोक संगीत, नृत्य आदि से परिचित होंगे और यहां की युवाओं को भी उनसे बहुत सारी चीज़ें सीखने को मिलेंगी।
इस अवसर पर माय युवा भारत के पूर्व निदेशक जेपीएस नेगी, स्टेट डायरेक्टर अनिल कुमार सिंह, पदम श्री समाजसेवी मनोज ध्यानी, अवधेश शर्मा आदि उपस्थित रहे।
एक-एक मेहमान युवा से किया संवाद
कार्यक्रम के समापन के बाद कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या मेहमान बनकर आए आदिवासी युवाओं के बीच पहुंची और उनसे एक-एक करके बातचीत की। उन्होंने युवाओं से पूछा कि नक्सलवादी आतंकवाद का दौर लगभग समाप्त होने के बाद उनके जीवन में किस तरह के बदलाव आए हैं । साथ ही उन्होंने युवाओं को उत्तराखंड की संस्कृति जानने समझने के लिए भी प्रेरित किया। इस दौरान कैबिनेट मंत्री के साथ सेल्फी लेने के लिए युवाओं में काफी उत्साह दिखा।
देहरादून- साइबर अपराधियों ने अब उत्तराखंड के राज्यसभा सांसद नरेश बंसल के नाम का सहारा लेकर नया जाल बिछा दिया। आरोप है कि लिंकडिन पर किसी ने “इंटर्नशिप ऑफर” वाला फर्जी प्रोफाइल बनाकर युवाओं को लुभाया और खुद को सांसद से जुड़ा बताकर सरकारी कार्यक्रमों के पास दिलाने का प्रलोभन दिया।
सूत्रों के मुताबिक, संदिग्ध प्रोफाइल पर 15 अगस्त को संसद परिसर दिखवाने और गणतंत्र दिवस परेड की वीआईपी एंट्री दिलाने जैसी सुविधाएं मिलने का दावा किया गया। इसी बहाने कई लोगों से संपर्क कर रकम ऐंठने की कोशिश की गई।
मामला सामने आते ही पुलिस हरकत में आई। शहर कोतवाली में अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। कोतवाल प्रदीप पंत ने बताया कि लिंकडिन प्रोफाइल से जुड़े की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि इसके पीछे काम कर रहे नेटवर्क की पहचान कर जल्द कार्रवाई की जाएगी।
देहरादून – मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर आदरणीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का देवभूमि उत्तराखण्ड आगमन पर हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन किया।
उन्होंने कहा कि नैसर्गिक सौंदर्य, आध्यात्मिक ऊर्जा, समृद्ध संस्कृति, शौर्य, पराक्रम और गौरवशाली परंपराओं से ओत-प्रोत देवभूमि उत्तराखण्ड राज्य स्थापना के ‘रजत उत्सव’ के ऐतिहासिक अवसर पर आदरणीय राष्ट्रपति महोदया का आगमन समस्त उत्तराखण्डवासियों के लिए गर्व और सम्मान का क्षण है।
हरिद्वार- उत्तराखंड राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर रजत जयंती उत्सव की शुरुआत भव्य रूप में की जा रही है। इसी क्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज तीन दिवसीय दौरे पर उत्तराखंड पहुंचेंगी। राष्ट्रपति अपने प्रवास के दौरान हरिद्वार, देहरादून, नैनीताल और अल्मोड़ा जिलों में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में शिरकत करेंगी।
आज राष्ट्रपति मुर्मू हरिद्वार स्थित पतंजलि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होंगी और विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान करेंगी। उनके स्वागत के लिए राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एयरपोर्ट पर मौजूद रहेंगे। सुरक्षा एजेंसियों ने राष्ट्रपति के आगमन को लेकर व्यापक इंतज़ाम किए हैं।
तीन नवंबर को राष्ट्रपति देहरादून में आयोजित विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित करेंगी। इसके बाद शाम को वे नैनीताल स्थित राजभवन में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लेंगी। चौथे दिन वे कैंचीधाम में नीब करौरी बाबा के दर्शन करेंगी और कुमाऊं विश्वविद्यालय के 20वें दीक्षांत समारोह में हिस्सा लेंगी।
राष्ट्रपति के दौरे को लेकर प्रशासन ने सभी कार्यक्रम स्थलों पर सुरक्षा और यातायात व्यवस्था का गहन निरीक्षण किया है। वहीं, वायुसेना के चार हेलिकॉप्टर राष्ट्रपति के दौरे के लिए पहले से ही तैनात किए गए हैं।
राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर 9 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देहरादून के गुनियाल गांव स्थित भव्य सैन्यधाम का लोकार्पण करेंगे। इस धाम में वीर सैनिकों के पराक्रम को दर्शाने के लिए अत्याधुनिक म्यूजियम, थियेटर और लाइट एंड साउंड शो जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने तैयारियों का जायजा लेते हुए इसे उत्तराखंड के गौरव का प्रतीक बताया।
देहरादून। सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने देहरादून के गुनियालगांव स्थित निर्माणाधीन सैन्यधाम के कार्यों का निरीक्षण किया। मंत्री जोशी ने अंतिम चरण में चल रहे निर्माण कार्यों का स्थलीय जायजा लेते हुए सैन्य धाम के लोकार्पण से पूर्व कि सभी आवश्यक कार्य तथा तैयारियां पूर्ण करने के अधिकारियों को गुणवत्ता के साथ कार्यों को समय से पूर्ण करने के निर्देश दिए।
सैनिक कल्याण मंत्री जोशी ने कहा कि 09 नवम्बर को राज्य स्थापना दिवस की रजत जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संभावित उत्तराखंड दौरे के दौरान सैन्यधाम का लोकार्पण प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि यह धाम सैनिकों के सम्मान का प्रतीक है और शीघ्र ही प्रदेश की जनता को समर्पित किया जाएगा।

सैनिक कल्याण मंत्री ने कहा कि सैन्यधाम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की परिकल्पना और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार के संकल्प का परिणाम है। उन्होंने कहा कि देशभर में विभिन्न सैन्य स्मारकों का अध्ययन करने के बाद इसे सबसे भव्य और अद्वितीय रूप में विकसित किया गया है।
उन्होंने कहा कि भारत की सेना में बाबा हरभजन सिंह और बाबा जसवंत सिंह की पूजा की जाती है, उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सैन्यधाम में म्यूजियम, थियेटर और लाइट एंड साउंड शो जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं, जिनके माध्यम से वीर शहीदों की गाथाएं और पराक्रम प्रदर्शित किए जाएंगे। मंत्री जोशी ने कहा कि लोकार्पण के बाद जिस प्रकार लोग चारधाम यात्रा के लिए आते हैं, उसी प्रकार लोग हमारे वीर सपूतों को श्रद्धांजलि देने और उनकी वीरता जानने के लिए सैन्यधाम अवश्य आएंगे।
इस अवसर पर अपर सचिव श्याम सिंह, उपनिदेशक विंग कमांडर (सेनि) निधि बधानी, परियोजना निदेशक रविंद्र कुमार सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे।
गांवों में मनाकर, महालोकपर्व ईगास की समृद्ध विरासत नई पीढ़ी को सौंपे- भट्ट
देहरादून। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने पारम्परिक महापर्व ईगास की सभी देवभूमिवासियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी है। वहीं पार्टी सांसदों, विधायकों एवं कार्यकर्ताओं के साथ सभी प्रवासी उत्तराखंडवासियों को गांवों में इसे मनाकर , रजत जयंती वर्ष के ईगास को यादगार बनाने का आग्रह किया है।
उन्होंने प्रदेशवासियों के नाम अपने लोक संदेश में कहा, यूं तो ईगास देवभूमि की समृद्ध सांस्कृतिक परम्परा की दिव्यता को प्रदर्शित करती है। हम सबका नैतिक दायित्व है कि पीढ़ियों और सदियों से चली आ रही इस विरासत को अधिक व्यापक और विस्तृत स्वरूप में नई पीढ़ी को सौंपा जाएं। यही कारण है कि सरकार और संगठन के प्रयासों से यह महा लोकपर्व आज राज्य की सीमाओं से निकलते हुए देश के अन्य राज्यों और विदेशों में पहुंच गया है। बहुत खुशी होती है ये देखकर कि पहाड़ के साथ मैदानी क्षेत्रों में भी उत्तराखंडवासी इसे बहुत उत्साह और उमंग के साथ मना रहे हैं।
वहीं उन्होंने कहा, पूर्व के वर्षों की तरह संगठन के सभी सांसद, विधायक, जनप्रतिनिधि, पार्टी पदाधिकारी, कार्यकर्ता अपने अपने गांवों के बूथों में ईगास को जनता के साथ मनाएंगे। वे स्वयं अपने गृह क्षेत्र चमोली के ब्रह्मणथाला गांव में स्थानीय लोगों के इस पारंपरिक त्यौहार का हिस्सा बनेंगे। इसके अतिरिक्त शेष लोग मुख्यमंत्री आवास में होने वाले मुख्य ईगास कार्यक्रम में शामिल होंगे। उन्होंने सभी प्रदेशवासियों से विशेष आग्रह किया कि राज्य अपने स्थापना के रजत जयंती वर्ष को मना रहा है, ऐसे में इस बार का ईगास भी हमे बेहद खास तरीके और अधिक उत्साह से मानना है।
