आपदा के दौरान राहत और बचाव अभियानों में जुटे कर्मियों के साहस को किया सलाम
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राजकीय दून मेडिकल कॉलेज में अर्पित फाउंडेशन द्वारा आयोजित ’’प्राइड मूवमेंट सम्मान समारोह’’ में आपदा के दौरान राहत एवं बचाव अभियान में योगदान देने पर एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस, आईटीबीपी के कर्मियों को सम्मानित किया गया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि ये सम्मान ऐसे कर्मियों के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है, जिन्होंने आपदा के दौरान राहत एवं बचाव अभियान में अपनी जान की परवाह किए बिना योगदान दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब हम उत्तराखंड की बात करते हैं, तो केवल इसके प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिकता की ही नहीं, बल्कि इसकी भौगोलिक कठिनाइयों और प्रत्येक वर्ष होने वाली आपदाओं की चुनौती भी स्वतः ही सामने आ जाती है। उन्होंने कहा कि हिमालय की गोद में बसे हमारे राज्य में भूस्खलन, बाढ़, अतिवृष्टि और अन्य प्राकृतिक आपदाएँ आना आम बात हैं। देवभूमि में रहते हुए हम ये जानते हैं कि प्रकृति का सौंदर्य जितना मनोहारी है, उतनी ही यहां चुनौतियाँ भी अप्रत्याशित हैं।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि हम सबने 2013 की केदारनाथ आपदा की त्रासदी को देखा है, जब जय प्रलय में हजारों लोगों की जानें चले गईं थी। इसी प्रकार 2021 में चमोली की ऋषिगंगा और धौलीगंगा घाटी में आई आपदा ने पूरे देश को झकझोर दिया था। 2023 में जोशीमठ का धंसाव भी एक बड़ी चुनौती के रूप में हमारे सामने आया। इस वर्ष भी उत्तरकाशी, चमोली और देहरादून के विभिन्न क्षेत्रों में भारी बारिश, बादल फटने और भूस्खलन की अनेक घटनाओं का हमने सामना करना पड़ा। इन आपदाओं में कई लोगों की मृत्यु हुई, कई लोग लापता हुए और संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन कठिन परिस्थितियों में हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती मानव जीवन की रक्षा करने की थी, यही समय था जब एसडीआरएफ, एनडीआरएफ सहित पुलिस- प्रशासन के लोगों ने आपदा में घायल और मलबे में फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए ग्राउंड जीरो पर लगातार काम किया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आपदा के समय हमारे राहत कर्मियों ने न केवल प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया, बल्कि पुनर्वास और राहत शिविरों का भी संचालन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सिल्क्यारा टनल में फंसे मजूदरों के लिए चलाए गए अभियान को नहीं भूल सकते। तब दिन-रात चलने वाले बचाव अभियान पर पूरे देश की निगाह थी। परंतु बाबा बोखनाग के आशीर्वाद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन ने हमारे अभियान को सफल बनाया।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि वो जब भी आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करते हैं, तो बचाव और राहत कर्मियों के जज्बे को देखकर उन्हें विश्वास हो जाता है कि हम प्रत्येक चुनौती का सामना करने में सक्षम हैं। मुख्यमंत्री ने आपदा राहत कार्यों में सहयोग प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने स्वयं देहरादून आकर आपदा पीड़ितों से मिलकर उनका दर्द बाँटा, उनकी समस्याएँ सुनीं और समीक्षा बैठक कर त्वरित निर्णय भी लिए। उन्होंने उत्तराखंड की जनता के लिए 1200 करोड़ रुपये की विशेष राहत राशि की घोषणा भी की, जिससे पुनर्वास और पुनर्निर्माण कार्य में हमें बड़ी सहायता मिली।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा केवल इमारतें या सड़कें ही नहीं तोड़ती, आपदा लोगों के आत्मविश्वास और भविष्य को भी चोट पहुंचाती है। इसलिए राज्य सरकार ने ये सुनिश्चित किया है कि आपदा पीड़ितों को केवल मुआवज़ा ही न दिया जाए, बल्कि उनके पुनर्वास और उनकी आजीविका पर भी विशेष ध्यान दिया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने एसडीआरएफ जवानों को ड्रोन, सैटेलाइट आधारित मॉनिटरिंग और अत्याधुनिक रेस्क्यू गियर जैसे अत्याधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए हैं। साथ ही, आपदा मित्र योजना के अंतर्गत गांव-गांव में स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है। इसके साथ ही सड़क और पुल निर्माण में डिजास्टर रेज़िलिएंट तकनीक का उपयोग भी अनिवार्य किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण को स्कूल-कॉलेजों में शामिल करने की प्रक्रिया भी प्रारंभ की है, ताकि हमारी आने वाली पीढ़ी आपदा के खतरों से और बेहतर तरीके से निपट सके। समारोह में नकल विरोधी कानून लागू करने के लिए छात्रों द्वारा मुख्यमंत्री धामी का विशेष तौर पर स्वागत करते हुए आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर विधायक प्रेमचंद अग्रवाल, स्वामी रूपेन्द्र प्रकाश, कृष्ण गिरी महाराज, अपर पुलिस महानिदेशक वी. मुरूगेशन, कार्यक्रम की संयोजक हनी पाठक मौजूद थे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी होंगे कार्यक्रम के मुख्य अतिथि
मंत्री बोले, लैंसडाउन मेरी कर्मभूमि है, यहां आकर होता है गर्व
पौड़ी। 05 अक्टूबर (रविवार) को लैंसडाउन में होने वाले शहीद सम्मान समारोह की तैयारियों का जायज़ा लेने सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी लैंसडाउन पहुंचे। इस भव्य कार्यक्रम में प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे।
लैंसडाउन के परेड मैदान में हेलीकॉप्टर से उतरने के बाद मंत्री जोशी सीधे कार्यक्रम स्थल पहुंचे और समारोह स्थल पर व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिये कि कार्यक्रम की तैयारियां पूरी गरिमा और समयबद्धता के साथ सुनिश्चित की जाएं ताकि किसी भी प्रकार की कमी न रह जाय। मंत्री ने कहा कि लैंसडाउन उनकी कर्मभूमि रही है और यहां आकर उन्हें गर्व की अनुभूति होती है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1976 में उन्होंने यहीं से एक राइफलमैन के रूप में भारतीय सेना में भर्ती होकर राष्ट्रसेवा का संकल्प लिया था।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा लैंसडाउन में शहीद सम्मान समारोह आयोजित करने की सहमति देना, सैनिकों और उनके परिजनों के प्रति राज्य सरकार की गहरी संवेदनशीलता को दर्शाता है।
निरीक्षण के दौरान सैनिक कल्याण विभाग के निदेशक ब्रिगेडियर अमृतलाल, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल वीरेंद्र प्रसाद भट्ट, उप जिलाधिकारी शालिनी मौर्य, भाजपा जिलाध्यक्ष राज गौरव नौटियाल सहित सेना, जिला एवं पुलिस प्रशासन के अधिकारी उपस्थित थे।
हर दिन गायब हो रहे तीन बच्चे, केवल 276 ही परिवारों से मिल पाए, 933 अब भी गुम
देहरादून। उत्तराखंड में बच्चों के लापता होने का मामला लगातार बढ़ रहा है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023-24 में प्रदेश से हर दिन औसतन तीन बच्चे गायब हुए। इस दौरान 18 वर्ष या उससे कम उम्र के 1209 बच्चे लापता हुए, लेकिन केवल 276 बच्चों को परिवारों से मिलाया जा सका। शेष 933 बच्चे अब भी गुम हैं।
रिपोर्ट के अनुसार गायब बच्चों में 408 बालक और 802 बालिकाएं शामिल हैं। पुलिस ने अब तक ढूंढे गए बच्चों में 128 बालक और 148 बालिकाएं हैं। यह स्थिति इस समय और भी चिंताजनक लगती है, जबकि प्रदेश पुलिस हर साल ऑपरेशन स्माइल के तहत बच्चों को खोजने का दावा करती है।
एनसीआरबी की रिपोर्ट पूरे देश और राज्यों में अपराध और लापता व्यक्तियों के आंकड़े प्रस्तुत करती है। इसमें भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और विशेष/स्थानीय कानून (एसएलएल) के तहत दर्ज मामलों, महिलाओं और बच्चों से जुड़े अपराधों के विवरण शामिल हैं।
हिमालयी राज्यों में लापता बच्चों के आंकड़े (2023-24)
हिमाचल प्रदेश: 504 (बरामद 81)
उत्तराखंड: 1209 (बरामद 276)
सिक्किम: 22 (बरामद 13)
अरुणाचल प्रदेश: 40 (बरामद 21)
नागालैंड: 47 (बरामद 0)
मणिपुर: 89 (बरामद 24)
मिजोरम: 1 (बरामद 0)
त्रिपुरा: 268 (बरामद 37)
इसके अलावा, एनसीआरबी रिपोर्ट के अनुसार उत्तराखंड में कुल 6532 लोग लापता हुए, जिनमें 3277 पुरुष और 3255 महिलाएं हैं। इनमें से पुलिस ने 2701 लोगों को बरामद किया है, जिसमें 1688 पुरुष और 1013 महिलाएं शामिल हैं।
यह आंकड़े बच्चों और अन्य नागरिकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाते हैं और प्रदेश में सुरक्षा उपायों को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।
“समन्वय समिति” की बैठक में दिए निर्देश
देहरादून। प्रदेश के लोक निर्माण, पर्यटन व सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज की अध्यक्षता में वन भूमि के कारण विकास कार्यों में आ रही रुकावट को लेकर लोक निर्माण, सिंचाई, पर्यटन, पीएमजीएसवाई एवं वन विभाग की “समन्वय समिति” की बैठक में विभागीय अधिकारियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रदेश के विकास के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए सभी बाधाओं को दूर करने के साथ-साथ वन विभाग के अधिकारियों को वन संरक्षण अधिनियम के कारण होने वाली रुकावटों को भी दूर करने के निर्देश दिए गये।
प्रदेश के लोक निर्माण, पर्यटन, सिंचाई, पंचायतीराज, ग्रामीण निर्माण, जलागम, धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज की अध्यक्षता में आईएचएम गढ़ी कैंट में वन भूमि के कारण विकास कार्यों में आ रही रुकावट को लेकर लोक निर्माण, सिंचाई, पर्यटन, पीएमजीएसवाई एवं वन विभाग की “समन्वय समिति” की बैठक में विभागीय अधिकारियों को प्रदेश के विकास के एजेंडे को आगे बढ़ाने और उसमें वन संरक्षण अधिनियम के कारण होने वाली रुकावटों को भी दूर करने के निर्देश दिए गये। उन्होंने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से कहा कि वह सड़कों का समरेखण करते इस बात का ध्यान रखें की जिन स्थानों पर भूस्खलन की संभावना सबसे कम हो उन्हें स्थान का सड़कों के एलाइनमेंट के लिए चयन करें। उन्होंने वन भूमि के कारण रुके जनपद पौड़ी के कुण्जखाल-कोलाखाल से गौखण्ड-रिकडेरा-पाटल्यूं मोटर मार्ग सहित सभी छह मोटर मार्गो की वन विभाग के अधिकारियों से स्वीकृत देने को कहा।
लोनिवि मंत्री महाराज ने बैठक के दौरान वन विभाग के अधिकारियों से कहा कि देहरादून (पुरुकुल गांव) से मसूरी लाइब्रेरी चौक तक रोपवे परियोजना के लोअर टर्मिनल पॉइंट के ऊपर स्थित आवासीय इकाइयों हेतु वैकल्पिक मार्ग के निर्माण के लिए लोक निर्माण विभाग द्वारा भूमि हस्तांतरण का जो प्रस्ताव भेजा गया है उसकी तत्काल स्वीकृति दी जाए। उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों से कहा कि पर्यटन विभाग द्वारा जागेश्वर धाम का डेस्टिनेशन प्लान तैयार कर विकसित किया जाना प्रस्तावित है इसलिए जागेश्वर धाम डेस्टिनेशन प्लान के अंतर्गत प्रस्तावित आरतोला में अपर लेवल एवं लोअर लेवल पार्किंग के निर्माण, आरतोला में बसेरा, शॉप, चार्जिंग स्टेशन और पार्किंग गेट के निर्माण किया जाना है। उसके लिए चिन्हित सिविल भूमि को वन पंचायत से शीघ्र मुक्त किया जाए।
महाराज ने जनपद उत्तरकाशी के सीमांत ग्राम जादूंग को पर्यटक ग्राम के प्रवेश द्वार एवं चेक पोस्ट के निर्माण के संबंध में भूमि हस्तांतरण की कार्रवाई को तुरंत अमल में लाया जाये। उन्होंने जनपद नैनीताल में निर्माणाधीन जमरानी बांध से पोषित होने वाली हरिपुरा नहर जिसका निर्माण वन अधिनियम 1980 लागू होने से पूर्व वर्ष 1977-78 में जमरानी बांध परियोजना के प्रथम चरण में हुआ था उसके समरेखण में आने वाले वृक्षों के पातन सम्बंधी अनुमति के विषय में वन विभाग के अधिकारियों से जानकारी मांगी गयी ताकि जमरानी बांध निर्माण से उधम सिंह नगर को सिंचाई हेतु उपरोक्त नहर से जल उपलब्ध होना निश्चित हो सके।
पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने पर्यटन विभाग के अधिकारियों को महासू देवता मंदिर, हनोल गंतव्य मास्टर प्लान के अंतर्गत रिवन फ्रंट एवं सुरक्षा दीवार तथा घाट निर्माण हेतु सिंचाई विभाग को तत्काल डीपीआर उपलब्ध करवाने के भी निर्देश दिए। महाराज ने जनपद पौड़ी के ऐकेश्वर ब्लॉक के ग्राम कुंलडीधार में बाघ द्वारा लोगों पर हमले की बढ़ती घटनाओं और क्षेत्र में वन्यजीव के आतंक को देखते हुए वन विभाग के अधिकारियों को अधिक से अधिक पिंजरे लगाने के निर्देश भी दिए।
बैठक में पीसीएफ एवं नोडल, एस.पी. सुबुद्धि, सीसीएफ इको टूरिज्म पी.के. पात्रो, लोनिवि के अपर सचिव विनीत कुमार एवं बी.एल. राणा सहित लोक निर्माण, पर्यटन, सिंचाई एवं वन विभाग के अनेक अधिकारी मौजूद थे।
हरिद्वार के स्वामी हरिहरानंद पब्लिक स्कूल में नेशनल कबड्डी चैंपियनशिप का उद्घाटन किया
देशभर से कुल 35 टीमें ले रही है हिस्सा
हरिद्वार। प्रदेश की खेल मंत्री रेखा आर्या ने हरिद्वार के स्वामी हरिहरानंद पब्लिक स्कूल में सीआईएससीई कबड्डी ब्वाएज चैंपियनशिप 2025 का उद्घाटन किया। 3 से 6 अक्टूबर तक चलने वाली इस प्रतियोगिता में देश भर से कुल 35 टीमें हिस्सा ले रही है। इस अवसर पर खेल मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि उत्तराखंड में हर सप्ताह एक या दो नेशनल चैंपियनशिप आयोजित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि 38वें राष्ट्रीय खेलों के बाद उत्तराखंड खेल भूमि के रूप में पहचान बना रहा है और यह राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं का हब बनता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में खेल संस्कृति विकसित होने से भविष्य में यहां से कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय चैंपियन निकलेंगे। खेल मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार खिलाड़ियों को सुनहरा भविष्य देने के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए आउट ऑफ टर्न जाब व सरकारी नौकरियों में रिजर्वेशन जैसे प्रावधान किए गए हैं।
खेल मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2036 का ओलंपिक भारत में आयोजित करने को लेकर गंभीर प्रयास कर रहे हैं और ऐसे में यह संभव है की कबड्डी जैसे परंपरागत खेल भी ओलंपिक का हिस्सा बन जाए। उन्होंने कहा कि हमारे खिलाड़ियों को अभी से इसकी तैयारी करनी होगी क्योंकि हमने उत्तराखंड से कम से कम 40 एथलीट को 2036 की ओलंपिक में शामिल कराने का लक्ष्य तय किया है।
अवसर पर स्वामी हरिहरानंद पब्लिक स्कूल के अध्यक्ष स्वामी शरद पुरी महाराज,उत्तराखंड ओलंपिक संघ के अध्यक्ष महेश नेगी, मेयर हरिद्वार किरण जैसल, भाजपा जिला अध्यक्ष आशुतोष शर्मा, जिला महामंत्री हीरा सिंह बिष्ट आदि उपस्थित रहे।
एमडीडीए टीम ने धौरण रोड, आईटी पार्क, राजपुर रोड और जमनिवाला क्षेत्र में नियम विरुद्ध निर्माणों को किया सील
शहर की खूबसूरती और विकास की मूलधारा को बनाए रखना हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता- बंशीधर तिवारी
देहरादून। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) और नगर निगम की संयुक्त टीम ने देहरादून में अतिक्रमण के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए सहारनपुर रोड स्थित ट्रांसपोर्ट नगर में व्यवसायियों द्वारा किए गए अतिक्रमण पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। एमडीडीए ने धौरण रोड आईटी पार्क, राजपुर रोड और जमनिवाला क्षेत्र में नियम विरुद्ध हो रहे निर्माणों पर सीलिंग की गई ।
सहारनपुर रोड स्थित ट्रांसपोर्ट नगर क्षेत्र में लंबे समय से अवैध अतिक्रमण और दुकानों के बाहर किए गए कब्जे की शिकायतें प्राधिकरण और नगर निगम को लगातार प्राप्त हो रही थीं। स्थानीय निवासियों और वाहन चालकों का कहना था कि दुकानों के बाहर फैले अतिक्रमण के कारण न केवल यातायात में बाधा उत्पन्न हो रही थी बल्कि आमजन को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। इन लगातार मिल रही शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने सख्त निर्देश जारी किए। उनके निर्देश पर सचिव एमडीडीए मोहन सिंह बर्निया की अगुवाई में प्राधिकरण की टीम का गठन किया गया। इस टीम ने नगर निगम देहरादून की संयुक्त टीम के साथ मिलकर शुक्रवार को सहारनपुर रोड स्थित ट्रांसपोर्ट नगर में अभियान चलाया। अभियान के दौरान करीब 15 से 20 दुकानों पर चल रहे अवैध अतिक्रमण को हटाया गया। दुकानों के बाहर बनाई गई पक्की संरचनाओं और अस्थायी कब्जों को ध्वस्त करते हुए जगह को खाली कराया गया। इस कार्रवाई में बुलडोजर की मदद से कई अवैध निर्माणों को तोड़ा गया। कार्यवाही के समय स्थानीय दुकानदारों ने विरोध भी दर्ज कराया और कई बार प्रशासनिक टीम को रोकने का प्रयास किया, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। पुलिस की मौजूदगी के चलते ध्वस्तीकरण अभियान बिना किसी बड़ी रुकावट के पूरा किया जा सका।
सचिव एमडीडीए मोहन सिंह बर्निया ने स्पष्ट किया कि शहर की सुंदरता और सुगम यातायात व्यवस्था के लिए अवैध अतिक्रमण किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आने वाले दिनों में अन्य क्षेत्रों में भी इस तरह के अभियान चलाकर अतिक्रमण पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
नियम विरुद्ध निर्माण पर सीलिंग की कार्रवाई
धौरण रोड स्थित युग रियल एलएलपी (देवेश वयरानी) द्वारा 6 आवासीय भवनों को मिलाकर नियम विरुद्ध निर्माण पर सीलिंग की गई। इसी प्रकार नितिन माकिन द्वारा राजपुर रोड (आईएएस कॉलोनी निकट) और संजेश कुमार यादव द्वारा जमनिवाला क्षेत्र में किए जा रहे अवैध निर्माणों पर संयुक्त सचिव गौरव चटवाल के आदेश पर सीलिंग की गई। कार्रवाई में सहायक अभियंता शैलेन्द्र सिंह रावत, अवर अभियंता गौरव तोमर, उमेश वर्मा, सुपरवाइजर और पुलिस बल मौजूद रहा।
उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी का बयान
उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी ने कहा, शहर की खूबसूरती और विकास की मूलधारा को बनाए रखना हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता है। नियम विरुद्ध निर्माण और अतिक्रमण किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस प्रकार की कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी और जो भी लोग अवैध निर्माण कर शहर की संरचना के साथ खिलवाड़ करेंगे, उनके खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे। एमडीडीए जनता के सहयोग से देहरादून को सुनियोजित, सुरक्षित और स्वच्छ शहर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
मेयर नगर निगम देहरादून का बयान
मेयर नगर निगम देहरादून सौरभ थपलियाल ने कहा अतिक्रमण और अवैध निर्माण न केवल यातायात और जनजीवन को प्रभावित करते हैं बल्कि शहर की सुंदरता और व्यवस्था को भी बिगाड़ते हैं। नगर निगम-एमडीडीए के साथ मिलकर ऐसे तत्वों पर सख्त कार्रवाई करता रहेगा। जनता का सहयोग ही शहर को स्मार्ट और व्यवस्थित बनाने की कुंजी है।
भविष्य की कार्ययोजना
एमडीडीए और नगर निगम ने संयुक्त रूप से तय किया है कि अतिक्रमण पर साप्ताहिक समीक्षा अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए एक हेल्पलाइन और ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया जाएगा, जहां नागरिक सीधे शिकायत दर्ज कर सकेंगे। शिकायत मिलने पर त्वरित कार्यवाही की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि शहर को अवैध कब्जों से मुक्त करने और व्यवस्थित विकास सुनिश्चित करने के लिए यह अभियान सतत रूप से जारी रहेगा।
लालढांग क्षेत्र के जंगल में मिला हाथी का शव, पेट की बीमारी से मौत की आशंका
हरिद्वार। हरिद्वार वन प्रभाग में हाथियों की लगातार हो रही मौतों ने वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है। एक सप्ताह के भीतर तीसरे हाथी के मृत मिलने से विभाग पर सवाल उठने लगे हैं। लालढांग क्षेत्र के पीली पड़ाव पंचायती फॉरेस्ट में लगभग 30 वर्षीय एक नर (मखना) हाथी मृत अवस्था में मिला।
इससे पहले 26 सितंबर को खानपुर रेंज के बंदरजूड़ क्षेत्र में एक हाथी मृत पाया गया था, जबकि 30 सितंबर को बुग्गावाला-रोशनाबाद मार्ग से करीब 300 मीटर अंदर खेत में एक और हाथी का शव मिला था। उस मामले में हाथी की मौत खेत में लगाए गए करंट से हुई थी। इस घटना में वन विभाग ने दो किसानों पर केस दर्ज कर उन्हें जमानत पर छोड़ दिया था।
बुधवार को हाथी का शव मिलने की सूचना ग्राम प्रधान शशि झंडवाल ने श्यामपुर रेंज के वन क्षेत्राधिकारी महेश शर्मा को दी। मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने पाया कि मृत हाथी का पेट काफी फूला हुआ था। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि उसकी मौत किसी गंभीर पेट की बीमारी से हुई होगी। पोस्टमार्टम के बाद शव को दफना दिया गया।
डीएफओ स्वप्निल, डॉ. अमित ध्यानी, एसडीओ पूनम कैथोला समेत कई अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। डीएफओ ने बताया कि जिन क्षेत्रों में करंट से हाथी की मौत हुई थी, वहां ऊर्जा निगम के साथ मिलकर खेतों में बिछे सारे तार हटवा दिए गए हैं। किसानों को चेतावनी दी गई है कि फसल बचाने के लिए करंट का इस्तेमाल न करें। साथ ही वनकर्मियों की गश्त 24 घंटे के लिए बढ़ा दी गई है ताकि हाथियों और अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
केंद्र सरकार की बैठक में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने रखे 20 से ज्यादा सुझाव
महिला सशक्तिकरण विभाग में आमूल चूल बदलाव की सिफारिश की
केंद्रीय मंत्री के साथ वर्चुअल में शामिल हुए सभी राज्यों के महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री
देहरादून। 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में देश की आधी आबादी किस तरह अपनी सशक्त भूमिका निभा सकती है, इसके लिए उत्तराखंड ने शुक्रवार को केंद्र सरकार के समक्ष एक व्यापक रोड मैप प्रस्तुत किया। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री के साथ वर्चुअल बैठक में प्रदेश की महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने 20 से ज्यादा सुझाव प्रस्तुत किए।
शुक्रवार को सचिवालय की एचआरडीसी बिल्डिंग में वर्चुअल बैठक में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि स्थानीय निकायों को मिलने वाले बजट में से 10 फीसदी हिस्सा महिला और शिशु विकास के लिए आरक्षित किया जाए। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण के लिए तकनीकी कौशल युक्त वर्कफोर्स तैयार की जाए और कार्मिकों की अर्हता में भी तकनीकी स्किल शामिल किए जाने जरूरी हैं।
बैठक में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि विभाग की कार्य प्रणाली में आमूल चूल बदलाव की जरूरत है साथ ही आंगनबाड़ी केन्द्रों की भूमिका को भी पूरी तरह डिजिटलाइज करते हुए और ज्यादा व्यापक व कारगर बनाना जरूरी है। उन्होंने महिला सशक्तिकरण और बाल विकास के कार्य में यूरोप की तरह ही महिला कार्यबल की हिस्सेदारी को 50% तक बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों को डे बोर्डिंग स्कूल के रूप में संचालित किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं की देखभाल और 6 वर्ष की आयु तक शिशुओं के पोषण और शिक्षण के कार्य को हल्के में ना लेते हुए, इस क्षेत्र में नियमित रूप से रिसर्च और सोशल ऑडिट करना समय की जरूरत है। मंत्री रेखा आर्या ने किशोरी बालिका परियोजना का विस्तार सभी जनपदों में करने और इसमें स्किल डेवलपमेंट पर विशेष जोर देने की जरूरत बताई। उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्रों की ग्रेडिंग का सिस्टम डेवलप करने की भी मांग उठाई।
बैठक में केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने उत्तराखंड द्वारा दिए गए सुझावों की जमकर सराहना की और इन्हें लागू करने का भरोसा दिलाया। बैठक में लगभग सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्रियों ने शिरकत की।
उत्तराखंड द्वारा दिए गए अन्य प्रस्ताव
– शिशुओं की पोषण मानक दर को संशोधित करके बढ़ाया जाए
– आंगनबाड़ी केंद्रों की मरम्मत के बजट को ₹3000 से बढ़कर ₹10000 किया जाए
– मनरेगा के तहत आंगनबाड़ी केंद्र निर्माण में बजट का 80 फ़ीसदी हिस्सा मटीरियल के लिए और 20 फ़ीसदी हिस्सा लेबर के लिए सुनिश्चित किया जाए
– टेक होम राशन योजना में फेस रीडिंग सिस्टम के साथ-साथ ओटीपी को भी शामिल किया जाए ताकि लाभार्थी का कोई भी परिजन मोबाइल के जरिए योजना का लाभ ले सके
– मिशन शक्ति के तहत ज्यादातर कार्य डिजिटल रूप में किया जा रहे हैं और इसकी मॉनीटरिंग भी आधुनिक तकनीकी माध्यम से की जाती है, इसलिए इस मिशन में एक आईटी विशेषज्ञ का पद सृजित किया जाए
– प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना के पोर्टल को यूजर फ्रेंडली और सरल बनाया जाए
– बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत बालिकाओं को वोकेशनल ट्रेनिंग और उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए छात्रवृत्ति दी जाए
– वन स्टॉप सेंटर के जरिए महिलाओं को तत्काल सहायता पहुंचाने के लिए कम से कम दो वाहनों का आवंटन किया जाए
– मिशन वात्सल्य की कारा एडॉप्शन योजना के तहत जिस प्रदेश का बच्चा हो उसी प्रदेश के लोगों को उसे गोद लेने में प्राथमिकता दी जाए
– स्पॉन्सरशिप योजना में फिलहाल एक तय संख्या तक ही पात्र अभ्यर्थियों को लाभ देने का प्रावधान है, इस अधिकतम संख्या को हटाया जाए और जितने भी पात्र मिलते हैं सभी को इसका फायदा मिले
– मिशन शक्ति और मिशन वात्सल्य के कार्मिकों के मानदेय में वार्षिक बढ़ोतरी सुनिश्चित की जाए जिससे वह अपने कार्यों में ज्यादा रुचि लें ।
वन हमलों में जनहानि पर मदद राशि बढ़ाकर 10 लाख रुपये की घोषणा
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को देहरादून जू में वन्य जीव प्राणी सप्ताह का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने घोषणा की कि प्रदेश में वन्य जीवों के हमले में होने वाली जनहानि पर दी जाने वाली सहायता राशि को बढ़ाकर 10 लाख रुपये किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वन्यजीव हमारी आस्था, संस्कृति और परंपरा का अभिन्न अंग हैं। सनातन संस्कृति में मां दुर्गा का वाहन शेर, गणेश जी का वाहन मूषक, मां सरस्वती का हंस, भगवान कार्तिकेय का मोर, लक्ष्मी जी का उल्लू और भगवान शिव के साथ नंदी व नागराज मानव और जीव-जगत के बीच एकात्म भाव के प्रतीक हैं। यही कारण है कि आदिकाल से भारत की जीवन पद्धति में वन्यजीव संरक्षण का विशेष महत्व रहा है।
उन्होंने बताया कि राज्य की लगभग 14.77 प्रतिशत भूमि वन्यजीव संरक्षण हेतु संरक्षित है, जबकि पूरे देश में यह अनुपात 5.27 प्रतिशत ही है। यह उत्तराखंड की पर्यावरणीय प्रतिबद्धता का स्पष्ट प्रमाण है। राज्य की हरियाली और वन्यजीव देश-विदेश के लाखों पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से राज्य सरकार इकोनॉमी, इकोलॉजी और टेक्नोलॉजी के संतुलन के साथ विकास व प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने वन विभाग को निर्देश दिया कि हर जिले में एक नया पर्यटन स्थल पहचान कर विकसित किया जाए, लेकिन प्राकृतिक स्वरूप को अक्षुण्ण रखा जाए।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में नए इको-टूरिज्म मॉडल पर काम चल रहा है ताकि लोग जंगलों से जुड़ सकें और साथ ही प्रकृति को नुकसान न पहुंचे। राज्य सरकार के प्रयासों से बाघ, गुलदार, हाथी, हिम तेंदुए जैसे दुर्लभ वन्य प्राणियों की संख्या में वृद्धि हुई है। लेकिन मानव-वन्यजीव संघर्ष भी बढ़ रहा है। इस चुनौती को कम करने के लिए सरकार आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक उपायों का उपयोग कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वन विभाग को ड्रोन और जीपीएस तकनीक उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि वन्यजीवों की निगरानी और सुरक्षा और बेहतर ढंग से हो सके। स्थानीय लोगों के लिए आजीविका के नए अवसर भी विकसित किए जा रहे हैं, जिससे वे वन्यजीव संरक्षण में भागीदार बन सकें।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की “सीएम यंग ईको-प्रिन्योर” योजना रंग ला रही है। इसके अंतर्गत नेचर गाइड, ड्रोन पायलट, वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर, ईको-टूरिज्म और वन्यजीव पर्यटन आधारित कौशल कार्यों को उद्यम के रूप में विकसित किया जा रहा है। साथ ही छात्रों के लिए प्रत्येक जिले में इको क्लबों के माध्यम से शैक्षिक यात्राएं भी कराई जा रही हैं।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी विश्व मंच से “लाइफ स्टाइल फॉर एनवायरनमेंट” का आह्वान किया है, जो धरती मां को बचाने का मंत्र है। उन्होंने पर्यटकों से अपील की कि वे जंगल सफारी या धार्मिक स्थलों पर गंदगी न फैलाएं।
इस मौके पर वन मंत्री सुबोध उनियाल, कृषि मंत्री गणेश जोशी, राज्य सभा सांसद नरेश बसंल, प्रमुख सचिव आरके सुधांशु, प्रमुख मुख्य वन संरक्षक समीर सिन्हा, प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव रंजन कुमार मिश्रा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
हाईस्कूल में 81.38% और इंटरमीडिएट में 76% छात्र-छात्राएं सफल
देहरादून। उत्तराखंड बोर्ड ने 10वीं और 12वीं की अंक सुधार परीक्षा का परिणाम घोषित कर दिया। हाईस्कूल में 81.38% और इंटरमीडिएट में 76% छात्र-छात्राएं इस परीक्षा में पास हुए।
बोर्ड की परीक्षा परिणाम में देरी की वजह कई थी। पहले पंचायत चुनाव, फिर राज्य में आई आपदा और उसके बाद राजकीय शिक्षक संघ के परीक्षा मूल्यांकन बहिष्कार के कारण परिणाम समय पर नहीं आ सका। बाद में अशासकीय विद्यालयों के शिक्षकों से उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कराया गया।
इस परीक्षा में हाईस्कूल के दो और इंटरमीडिएट के एक विषय में अनुत्तीर्ण छात्रों को भी सफलता पाने का मौका दिया गया। परीक्षा के लिए 2 से 21 मई तक आवेदन लिए गए थे। हाईस्कूल के 8,400 और इंटरमीडिएट के 10,706 छात्र-छात्राओं ने इस परीक्षा में भाग लिया।
राज्य भर में 4 से 11 अगस्त तक 97 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। परीक्षा समाप्त होने के बाद परिणाम अगस्त में घोषित होना था, लेकिन विभिन्न कारणों से देरी हुई। आज परिणाम जारी कर दिया गया है।
