हल्द्वानी/पिथौरागढ़: छह वर्षीय मासूम लाडली की हत्या और दुष्कर्म मामले में सुप्रीम कोर्ट से मुख्य आरोपी अख्तर अली के बरी होने के बाद कुमाऊं फिर एक बार उबाल पर है। हल्द्वानी के बुद्धपार्क में गुरुवार को हुई जनसभा में हजारों लोग जुटे और बेटी को न्याय दिलाने की मांग उठाई। सभा के दौरान लाडली के ताऊ के शब्दों ने मौजूद लोगों की आंखें नम कर दीं। उन्होंने कहा— “हमारी बच्ची हंसी-खुशी पिथौरागढ़ से हल्द्वानी आई थी, लेकिन हमें उसकी लाश लौटा दी गई। बेटी के शरीर पर सिगरेट से दागे निशान आज भी हमें जलाते हैं। अगर हमें न्याय न मिला तो प्रदेश की हर बेटी का यही हाल होगा।”
सभा में मौजूद लोगों ने एक स्वर में नारे लगाए— “बेटी हम शर्मिंदा हैं, तेरे कातिल जिंदा हैं।”
सरकार और सिस्टम पर सवाल
लाडली के ताऊ ने सरकार से पूछा कि क्या उत्तराखंड में कोई काबिल वकील नहीं हैं, जो मध्यप्रदेश से वकील लाने पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी वकीलों की नियुक्ति पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए, वरना हर केस में आरोपी छूटते रहेंगे। साथ ही आरोप लगाया कि सरकार आंदोलन तोड़ने की कोशिश कर रही है, जबकि जरूरत सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने की है।
पुलिस से झड़प और महिलाओं का धरना
जनसभा के बाद जब भीड़ ने जुलूस निकालने की कोशिश की तो पुलिस ने गेट बंद कर रोकने का प्रयास किया। इससे आक्रोशित लोग भड़क उठे और धक्का-मुक्की हो गई। कई महिलाएं सड़क पर धरने पर बैठ गईं। माहौल बिगड़ता देख पुलिस ने गेट खोलना पड़ा।
कांग्रेस नेताओं का देर से समर्थन
लोगों ने कांग्रेस और भाजपा दोनों को निशाने पर लिया और आरोप लगाया कि कोई भी पार्टी बेटी के परिवार के साथ खड़ी नहीं हुई। हालांकि किरकिरी के बाद कांग्रेस विधायक सुमित हृदयेश और ललित जोशी मौके पर पहुँचे और परिवार को समर्थन देने की बात कही।
आठ साल पुराना दर्दनाक मामला
नवंबर 2014 में पिथौरागढ़ से हल्द्वानी आए एक विवाह समारोह से छह वर्षीय लाडली लापता हो गई थी। छह दिन बाद उसका शव गौला नदी से बरामद हुआ। जांच में पता चला कि टॉफी का लालच देकर उसका अपहरण किया गया, सामूहिक दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई। पुलिस ने आरोपी अख्तर अली समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। 2016 में स्पेशल कोर्ट ने अख्तर अली को फांसी की सजा सुनाई थी। लेकिन हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने उसे बरी कर दिया।
अन्य पीड़िताओं के लिए भी न्याय की मांग
इस जनसभा में लोगों ने केवल लाडली ही नहीं बल्कि अंकिता भंडारी और हल्द्वानी की योगा ट्रेनर को भी न्याय दिलाने की मांग उठाई। “महिला उत्पीड़न बंद करो” और “रिव्यू पिटीशन” जैसे पोस्टर हाथों में लिए लोग देर तक नारेबाजी करते रहे।
देहरादून- मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा आज मालसी-सिनोला-मसूरी रोड पर अवैध रूप से किए जा रहे बहुमंजिले भवन निर्माण पर बड़ी कार्रवाई की गई। जै पात्रा द्वारा किए जा रहे इस अवैध निर्माण को मौके पर सील कर दिया गया है। एमडीडीए की यह कार्रवाई अवैध निर्माण पर अंकुश लगाने और शहर के व्यवस्थित विकास को सुनिश्चित करने की दिशा में एक ठोस कदम है।
कार्यवाही के दौरान सहायक अभियंता शैलेन्द्र सिंह रावत, अवर अभियंता सचिन तोमर एवं उमेश वर्मा तथा सुपरवाइजर मौके पर मौजूद रहे।

एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा शहर के सौंदर्य और संतुलित विकास के लिए अवैध निर्माण को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्राधिकरण लगातार निगरानी कर रहा है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। जनता से भी अपील है कि वे किसी भी प्रकार के निर्माण से पहले अनुमोदन अवश्य प्राप्त करें।एमडीडीए द्वारा यह स्पष्ट किया गया है कि आगे भी इसी प्रकार की कार्रवाइयाँ निरंतर जारी रहेंगी।
देहरादून। उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में फिलहाल बारिश से राहत के आसार नहीं हैं। मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून ने राज्य के कई हिस्सों के लिए भारी से भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। वहीं अन्य जिलों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है।
मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक सीएस तोमर ने बताया कि शुक्रवार को प्रदेश के सभी जिलों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। जबकि देहरादून, पौड़ी, नैनीताल, बागेश्वर, टिहरी और हरिद्वार जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
इसके अलावा उत्तरकाशी, चमोली और रुद्रप्रयाग जिलों के कुछ हिस्सों में तेज बारिश के लिए येलो अलर्ट प्रभावी रहेगा।
मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में भी बरसात का सिलसिला जारी रह सकता है। 24 सितंबर तक पूरे प्रदेश में हल्की बारिश होने की संभावना है।
चमोली। नंदानगर तहसील के घाट इलाके में बुधवार देर रात बादल फटने से आई आपदा ने कई परिवारों को तबाह कर दिया। तेज बारिश और भूस्खलन के चलते कई मकान मलबे में दब गए। दर्जनभर से अधिक घरों को भारी नुकसान पहुँचा। इस बीच रेस्क्यू टीम ने 16 घंटे की अथक मशक्कत के बाद मलबे में दबे एक व्यक्ति को जीवित बाहर निकालने में सफलता पाई, लेकिन उसका पूरा परिवार इस त्रासदी का शिकार हो गया।
गाँव के निवासी कुंवर सिंह, पुत्र बलवंत सिंह, का आधा शरीर मलबे में दबा हुआ था। सौभाग्य से कमरे के रोशनदान से मिल रही सांसों ने उनकी जिंदगी बचा ली। बचाव दल ने गुरुवार शाम करीब छह बजे उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला और तुरंत अस्पताल पहुँचाया।
हालाँकि, कुंवर सिंह की पत्नी कांती देवी और 10 वर्षीय जुड़वा बेटे विकास और विशाल की मलबे में दबकर मौत हो गई। दोनों बच्चे सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालय में कक्षा पाँचवीं के छात्र थे।
स्थानीय लोगों के अनुसार, कुंवर सिंह ने मेहनत मजदूरी कर अपने परिवार के लिए गाँव में छोटा सा घर बनाया था। बुधवार रात जब पूरा परिवार गहरी नींद में था, तभी पहाड़ से आए मलबे ने सबकुछ उजाड़ दिया। शोर सुनते ही ग्रामीणों ने प्रशासन को सूचना दी और सुबह से ही राहत व बचाव कार्य शुरू किया गया।
रेस्क्यू टीम ने मलबा हटाते समय जब एक घर तक पहुँचा तो अंदर से हल्की आवाज सुनाई दी। जाँच में पता चला कि वह आवाज कुंवर सिंह की थी। इसके बाद पूरी टीम ने लगातार प्रयास कर उन्हें जिंदा बाहर निकाला।
इस आपदा में कुंवर सिंह की जान तो बच गई, लेकिन पत्नी और दोनों मासूम बच्चों को खोने का गम उन्हें जिंदगीभर सालता रहेगा।
मुख्यमंत्री ने पुजारियों व स्थानीय लोगों से की बातचीत
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को टपकेश्वर महादेव मंदिर क्षेत्र में अतिवृष्टि से प्रभावित स्थल का निरीक्षण किया। अतिवृष्टि के कारण मंदिर के अंदर जलभराव के साथ ही मलबा आ गया था, मलबा हटाने का कार्य अब पूर्ण हो चुका है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने मंदिर के पुजारियों और स्थानीय लोगों से बातचीत भी की।

निरीक्षण के उपरांत मुख्यमंत्री ने टपकेश्वर महादेव मंदिर में जलाभिषेक कर प्रदेश एवं प्रदेशवासियों की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।
सड़कों की तत्काल मरम्मत के दिए निर्देश
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मसूरी रोड और किमाड़ी क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मुख्य सड़कों की तत्काल मरम्मत कर यातायात सामान्य बनाया जाए और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक मार्ग एवं राहत शिविर स्थापित किए जाएं।
सीएम ने कहा कि सभी विभाग युद्धस्तर पर कार्य कर प्रभावित परिवारों को आपदा मानकों के अनुसार आर्थिक सहायता और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराएं। उन्होंने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार संवेदनशीलता के साथ आपदा पीड़ितों के साथ खड़ी है।
निरीक्षण के दौरान कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष विनय रोहिल्ला, गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडेय, डीएम देहरादून सविन बंसल, एसएसपी अजय सिंह और जिला प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे।
क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलों की शीघ्र मरम्मत के निर्देश दिए
देहरादून। मालदेवता क्षेत्र के किसनपुरी बांडावाली में नदी का रुख बदलने और अनधिकृत निर्माण के कारण करीब 150 मीटर सड़क पूरी तरह बह गई। इससे छह करोड़ रुपये से अधिक की सरकारी संपत्ति को नुकसान हुआ। जिलाधिकारी सविन बंसल ने तुरंत उच्चस्तरीय जांच कराने और लोक निर्माण विभाग को नदी को चैनलाइज कर सड़क निर्माण कार्य तेज करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी सविन बंसल और मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने मालदेवता, खैरी धनौला, किसनपुरी बांडावाली और कोठालगेट के पुलों व सड़कों का निरीक्षण किया। उन्होंने लोनिवि को क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलों की मरम्मत कर यातायात शीघ्र सुचारू करने के निर्देश दिए।
कोठालगेट के पास क्षतिग्रस्त मोटर पुल के कारण मसूरी का संपर्क कट गया था, लेकिन प्रशासन की तत्परता से वैली ब्रिज रातों-रात तैयार कर हल्के वाहनों के लिए खोल दिया गया। इससे मसूरी क्षेत्र की जनता को राहत मिली। मालदेवता और केशरवाला में वॉशआउट सड़कों की मरम्मत और नदी चैनलाइजेशन का काम तेजी से जारी है।
चमोली के घायल मरीजों को एम्स ऋषिकेश एयरलिफ्ट करने के निर्देश
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को आईटी पार्क स्थित राज्य आपदा परिचालन केंद्र से प्रदेशभर में अतिवृष्टि प्रभावित क्षेत्रों की समीक्षा की। उन्होंने चमोली जिले के नंदानगर क्षेत्र के आपदा प्रभावित गांवों में राहत और बचाव कार्यों को और गति देने के निर्देश दिए।
सीएम ने चमोली डीएम संदीप तिवारी से स्थिति की जानकारी लेकर गंभीर रूप से घायल व्यक्तियों को एम्स ऋषिकेश एयरलिफ्ट करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में सड़क, पेयजल, बिजली और नेटवर्क कनेक्टिविटी शीघ्र बहाल करने, आश्रय-भोजन-चिकित्सा की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने और हर परिवार तक राहत सामग्री पहुंचाने को कहा।
इस अवसर पर आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष विनय रोहिल्ला, मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन, गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडेय और अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
प्रत्येक होटल में कर्मचारियों की तैनाती, प्रभावितों की समस्याओं का हो रहा समाधान
देहरादून। आपदा प्रभावित क्षेत्रों से सुरक्षित निकाले गए 168 लोगों को प्रशासन ने अस्थायी राहत के रूप में विभिन्न होटलों में ठहराया है। प्रशासन ने आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत पांच होटलों को अधिग्रहित कर इन्हें राहत शिविर का स्वरूप दिया है। यहां प्रभावितों के लिए भोजन, राशन और साफ-सफाई की पूरी व्यवस्था की गई है। साथ ही, समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के लिए होटलवार कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने बताया कि मजाड़ और कालीगाड जैसे गंभीर रूप से प्रभावित क्षेत्रों में सर्च व रेस्क्यू अभियान अब भी जारी है। अब तक खतरनाक इलाकों से 70 लोगों को बचाया गया था, जिसके बाद कार्लीगाड गांव से 60 प्रभावितों को हिमालयन व्यू होटल, सेरा गांव से 32 लोगों को ईरा रिजॉर्ट और कुल्हान से 76 लोगों को हिल व्यू होटल पहुंचाया गया। पहले इन लोगों को अस्थायी रूप से स्कूल भवनों में ठहराया गया था।
प्रत्येक होटल में दो-दो कर्मचारियों की तैनाती की गई है ताकि राहत कार्य सुचारू रूप से चल सके। वहीं, जिला पर्यटन विकास अधिकारी को नोडल अफसर और रायपुर के सहायक खंड विकास अधिकारी को सहायक नोडल अधिकारी बनाया गया है। होटल परिसरों में सफाईकर्मियों की भी तैनाती की गई है ताकि प्रभावित लोगों को स्वच्छ वातावरण मिल सके। प्रशासन लगातार उनके नुकसान और आवश्यकताओं का ब्यौरा एकत्र कर रहा है, जिससे आगे मदद और पुनर्वास की दिशा में योजनाएं बनाई जा सकें।
सहकारिता से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल, किसानों को मिलेगा ब्याजमुक्त ऋण
देहरादून। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) एवं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राजभवन में अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष-2025 के उपलक्ष्य पर आयोजित ‘सहकारिता में सहकार’ कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर राज्यपाल और मुख्यमंत्री की उपस्थिति में भारतीय सहकारी समिति लिमिटेड और उत्तराखण्ड राज्य सहकारी संघ के मध्य समझौता ज्ञापन हुआ। इस समझौते ज्ञापन के माध्यम से न केवल बीज उत्पादन और वितरण के क्षेत्र में नई संभावनाएं खुलेंगी बल्कि राज्य सहकारी समितियों और किसानों के लिए भी एक मील का पत्थर साबित होगा। दूसरा समझौता ज्ञापन राष्ट्रीय सहकारी निर्यात समिति और उत्तराखण्ड राज्य सहकारी संघ के बीच हुआ जो राज्य के कृषि उत्पादकों सहकारी समितियों और किसानों को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।
इस दौरान राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने दो नवीन योजनाओं, उत्तराखण्ड राज्य सहकारी बैंक की ऋण नीति एवं वाणिज्यिक अचल संपत्ति- आवासीय गृण ऋण नीति का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में जसपुर की फीकापार एमपैक्स को उत्कृष्ट कार्य करने के लिए सम्मानित किया गया। राज्य में उत्कृष्ट कार्य करने वाले जिला सहकारी बैंक लि0 मुख्य शाखा देहरादून को भी सम्मानित किया गया। साथ ही दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना के लाभार्थियों को चेक वितरण भी किए गए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि सहकारिता आंदोलन किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि सामूहिक प्रयासों का आंदोलन है। इसमें सभी का लाभ, सभी की भागीदारी और सभी की जिम्मेदारी निहित रहती है। भारतीय संस्कृति की इस धरा पर सहकारिता कोई नई अवधारणा नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन दर्शन का अभिन्न अंग है। सहकारिता एक ऐसी क्रांति है, जो हमें सामाजिक-आर्थिक समृद्धि की दहलीज तक ले आई है और मुझे विश्वास है कि यह क्रांति बहुत शीघ्र साकार होगी।
राज्यपाल ने कहा कि भारतीय संस्कृति में ‘‘वसुधैव कुटुम्बकम्’’ का भाव सहकारिता की आत्मा है। इसका अर्थ है- सम्पूर्ण विश्व को परिवार मानकर सभी के हित में काम करना। आज जब संयुक्त राष्ट्र ने 2025 को अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष घोषित किया है, तब यह हमारे लिए गर्व की बात है कि भारतीय परंपराएँ इस वैश्विक दृष्टिकोण की आधारशिला रही हैं।
राज्यपाल ने कहा कि हमारे ‘महिला स्वयं सहायता समूह’ न केवल परिवार की आर्थिक रीढ़ बने हैं, बल्कि उद्यमिता में भी नई ऊँचाइयाँ छू रहे हैं। युवा भी अब स्टार्टअप, ऑर्गेनिक उत्पाद मार्केटिंग, प्रोसेसिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़कर सहकारिता आंदोलन को आधुनिक स्वरूप दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की सहकारी समितियाँ सेना, आईटीबीपी और अन्य अर्धसैनिक बलों को खाद्यान्न, डेयरी और अन्य आवश्यक वस्तुएँ आपूर्ति कर रही हैं। यह न केवल राज्य की सहकारिता की क्षमता को दर्शाता है, बल्कि राष्ट्रीय सेवा में योगदान का भी उत्कृष्ट उदाहरण है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सहकारिता, मानव समाज का सबसे पुराना और कीमती सिद्धांत है। सहकारिता केवल संगठनात्मक व्यवस्था नहीं, बल्कि समाज के समग्र विकास का सशक्त माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि सहकारिता का मूल उद्देश्य स्पर्धा नहीं अपितु आपसी सहयोग की भावना से आगे बढ़ना है। इसका उद्देश्य एक-दूसरे को स्वावलंबी और सशक्त बनाना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में सहकारिता के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने कहा देश में बहुउद्देश्यीय सहकारी समितियों के कंप्यूटरीकरण के कार्य की शुरुआत उत्तराखण्ड से हुई है। प्रदेश की सभी 671 सहकारी समितियों के कंप्यूटरीकरण का कार्य पूर्ण हो चुका है। उन्होंने बताया 24 समितियां जन औषधि केंद्र के रूप में कार्य कर रही हैं। 640 समितियों को कॉमन सर्विस सेंटर के रूप में विकसित किया गया है। 13 जिलों की कुल 5511 समितियों में से 3838 समितियों का डेटा राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस पर अपलोड कर दिया गया है। जिससे पारदर्शिता आई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने फरवरी 2023 से अब तक 800 पैक्स, 248 नई डेयरी समितियाँ और 116 मत्स्य समितियाँ गठित की हैं। दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना के अंतर्गत किसानों को 5 लाख रुपए तक ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रदेश के सहकारी बैंकों में 16 हजार करोड़ रुपये से अधिक की जमापूंजी है, जो इन संस्थाओं के प्रति जनता के बढ़ते भरोसे का प्रमाण है। उन्होंने कहा प्रदेश की 1 लाख 63 हजार से अधिक बहनों ने ‘लखपति दीदी’ बनकर महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक नया इतिहास रचा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2024 में भारत में वैश्विक सहकारी सम्मेलन का सफल आयोजन हुआ। प्रधानमंत्री ने सहकारिता को भारत के लिए संस्कृति का आधार और जीवन पद्धति बताया था। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री ने सहकार से समृद्धि को साकार करने के लिए अलग सहकारिता मंत्रालय गठन किया। उन्होंने कहा केन्द्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में देश में सहकारिता आंदोलन को और अधिक मजबूत बनाया जा रहा है।
कार्यक्रम में सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य है जिसने महिला स्वयं सहायता समूहों को 5 लाख रुपये तक का ऋण शून्य ब्याज पर प्रदान करने की योजना प्रारंभ की है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रदेश में लगभग 2 लाख लखपति दीदी बनी हैं, जिन्हें वर्ष 2026 तक 4 लाख तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है। डॉ. रावत ने कहा कि यह देश का पहला राज्य है जिसने सहकारिता में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया है।
निदेशक सहकारिता (केंद्र सरकार) कपिल मीणा ने केंद्र सरकार द्वारा सहकारिता के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों के बारे में जानकारी दी। सचिव सहकारिता डॉ. बी.वी.आर सी पुरुषोत्तम ने राज्य सहकारिता विभाग की योजनाओं और कार्यों के बारे में अवगत कराया। इस अवसर पर निबंधक सहकारिता डॉ मेहरबान सिंह बिष्ट, अपर निबंधक आनन्द शुक्ला, ईरा उप्रेती एवं मंगला प्रसाद त्रिपाठी, संयुक्त निबंधक नीरज बेलवाल सहित सहकारिता विभाग एवं सहकारी बैंकों के अन्य अधिकारीगण तथा विभिन्न जिलों से आयी स्वयं सहायता समूह की महिलाएं और अन्य लोग उपस्थित।
