लोकसभा अध्यक्ष बोले – एआई में आध्यात्मिक मूल्यों का समावेश जरूरी
सीएम धामी ने कहा – सनातन संस्कृति विज्ञान और अध्यात्म का अद्वितीय संगम
हरिद्वार। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला एवं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देवसंस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार द्वारा आयोजित इण्डियन ए.आई समिट में प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का शुभारम्भ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ चिन्मय पण्ड्या एवं अन्य अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलन कर किया।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि आधुनिक युग में एआई की भूमिका महत्त्वपूर्ण है। आज अनेक क्षेत्र में एआई का उपयोग हो रहा है। एआई का आध्यात्मिक मूल्यों के साथ समावेषन होना चाहिए। एआई के माध्यम पूरी दुनिया तक भारत के ज्ञान, संस्कृति को पहुचाने की दिशा में सार्थक पहल होनी चाहिए। विज्ञान व अध्यात्म का समन्वय को साथ लेकर चलें। लोकसभा अध्यक्ष ने आशा व्यक्त की कि तकनीकी नवाचार के माध्यम से भावी पीढी सुदृढ हो, इस दिशा में देवसंस्कृति विवि कार्य करेगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आध्यात्मिकता और विज्ञान के बीच समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से आयोजित एआई सम्मेलन का आयोजन करने के लिए देव संस्कृति विश्वविद्यालय और डॉक्टर चिन्मय पांडे का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्राचीन भारतीय संस्कृति में ज्ञान विज्ञान और अध्यात्म का एक अद्वितीय संगम देखने को मिलता है। हमारी सनातन संस्कृति केवल आस्था और विश्वास पर आधारित नहीं है, बल्कि एक गहरी वैज्ञानिक दृष्टिकोण चिंतन और शोध का परिणाम है। हमारी सनातन संस्कृति निश्चित रूप से अपना एक वैशिष्ठय लिए हुए है, यही कारण है कि भारतीय संस्कृति ने विश्व को अनगिनत वैज्ञानिक खोजे दी हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के साथ साथ एआई भी व्यापक रूप से हमारे जीवन के हर पहलुओं को प्रभावित कर रहा है। एआई तकनीक हमारे दैनिक जीवन को न केवल आसान बना रही है बल्कि उद्योग में, चिकित्सा, शिक्षा, कृषि और अनेक क्षेत्रों में नवाचार की प्रगति का भी प्रमुख कारण बन गई है। यदि हम इस शक्ति का सही दिशा में सही प्रकार से उपयोग करें तो हम अनेकों क्षेत्र में सुधार ला सकते हैं। यदि हम ए.आई की शक्ति का सही दिशा और उद्देश्य के साथ उपयोग करें, तो ये अनेक क्षेत्रों में सुधार लाकर लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
संयुक्त राष्ट्र द्वारा आस्था एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए स्थापित विशेष आयोग के एशिया क्षेत्र के कमिश्नर डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा कि वर्तमान में एआई केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं है बल्कि यह शिक्षा, चिकित्सा, उद्योग और सुरक्षा सहित अनेक क्षेत्रों में क्रांतिकारी परिवर्तन ला रहा है। हालांकि इसके साथ ही नैतिकता, गोपनीयता, डेटा सुरक्षा तथा रोजगार पर इसके प्रभाव को लेकर कई चिंताएँ भी सामने आ रही हैं।
स्विटजरलैण्ड के इन्टर पार्लियामेंट्री यूनियन के सक्रेटरी जनरल मार्टिल चुंगोंग ने वीडियों संदेश के माध्मय से एआई की वैश्विक भूमिका को सभी के समक्ष रखा।
इस अवसर पर भारत सरकार के एआई मिशन के सीईओ डॉ अभिषेक सिंह, रॉबर्ट ट्रैगर, विलीयम जोन्स, स्वामी रूपेन्द्र प्रकाश, स्टुअर्ट रसेल, जान टैलिन, नालंदा विवि के कुलपति डॉ सचिन चतुर्वेदी आदि अनेक एआई विशेषज्ञों ने भी अपने विचार साझा किये।
इस अवसर पर विधायक मदन कौशिक, पूर्व विधायक स्वामी यतीश्वरानंद, जिला पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी, राज्यमंत्री डॉ जयपाल सिंह चौहान, ओम प्रकाश जमदग्नि सुनील सैनी, जिलाध्यक्ष आशुतोष शर्मा, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र सिंह डोभाल, उपाध्यक्ष एचआरडीए अंशुल सिंह, मुख्य विकास अधिकारी आकांक्षा कोण्डे सहित देव संस्कृति के छात्र छात्राएं मौजूद रहे।
फिट उत्तराखंड का अलग पोर्टल और मोबाइल एप जारी होगा
2 अक्टूबर तक विभिन्न प्रतियोगिताओं के जरिए हजारों लोगों को जोड़ा जाएगा
देहरादून। 18 सितंबर से प्रदेश में फिट उत्तराखंड अभियान का आगाज होने जा रहा है। मंगलवार को खेल विभाग की बैठक में खेल मंत्री रेखा आर्या ने इसके समेत कई अन्य योजनाओं की समीक्षा की। बैठक के बाद खेल मंत्री रेखा आर्या ने बताया कि फिट उत्तराखंड अभियान की तैयारी काफी दिनों से की जा रही थी और 18 सितंबर को मुख्यमंत्री इसके विशेष पोर्टल व मोबाइल ऐप का लोकार्पण करेंगे। इसके बाद 2 अक्टूबर तक विभिन्न प्रतियोगिताओं के जरिए प्रदेश के हर आयु वर्ग के हजारों लाखों लोगों को एप और पोर्टल से जोड़ने के लिए विभिन्न रोचक प्रतियोगिताएं कराई जाएगी। प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार भी दिए जाएंगे।
खेल मंत्री रेखा आर्या ने बताया कि यह अभियान हर आयु वर्ग के लोगों को उनके स्वास्थ्य और फिटनेस के प्रति जागरूकता बढ़ाने के मकसद से चलाया जा रहा है।

खेल मंत्री रेखा आर्या ने बताया कि खेल महाकुंभ नाम से होने वाला खेल आयोजन इस साल से नए फॉर्मेट में कराया जाएगा और इसका नाम सीएम कप होगा। इसकी प्रतिस्पर्धाएं न्याय पंचायत स्तर से शुरू होकर प्रदेश स्तर तक आयोजित की जाएगी। यह आयोजन 1 अक्टूबर से शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके अतिरिक्त बैठक में खेल मंत्री रेखा आर्य ने अधिकारियों को मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन योजना और खिलाड़ी प्रोत्साहन योजना के लिए बजट की व्यवस्था पहले से करने के निर्देश दिए, जिससे कि खिलाड़ियों को समय से पैसा पहुंचाया जा सके। साथ ही खेल विभाग में नियुक्त संविदा प्रशिक्षकों के मानदेय के लिए भी बजट का प्रबंध पहले से करने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी स्थापित करने की दिशा में हुई प्रगति की भी समीक्षा की गई।
बैठक में विशेष प्रमुख खेल सचिव अमित सिन्हा, खेल निदेशक आशीष चौहान, अपर खेल निदेशक अजय अग्रवाल, स्पोर्ट्स कॉलेज के प्राचार्य राजेश मंमगाई, उपनिदेशक शक्ति सिंह व अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
वर्चुअल माध्यम से प्रदेशभर की तहसीलों से जुड़े मुख्यमंत्री धामी
भूमि विवादों के निस्तारण के लिए तहसील स्तर पर समितियां बनेगीं
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास से प्रदेशभर की सभी तहसीलों में आयोजित तहसील दिवस कार्यक्रमों में वर्चुअल प्रतिभाग कर जनता से संवाद किया। उन्होंने लोगों की समस्याओं को सुना और संबंधित अधिकारियों को उनके त्वरित निस्तारण के निर्देश दिए।मुख्यमंत्री ने कहा कि तहसील दिवस आमजन की समस्याओं के समाधान का सशक्त मंच है तथा सरकार का लक्ष्य है कि हर शिकायत का तय समय में निस्तारण हो।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि तहसील दिवस पर आमजन की समस्याओं का समाधान स्थानीय स्तर पर ही हो, ताकि लोगों को अपनी शिकायतों के निस्तारण के लिए जिला मुख्यालय, शासन न जाना पड़े। उन्होंने कहा सभी ने मिलकर तहसील दिवस को शत-प्रतिशत प्रभावी बनाना है। उन्होंने कहा शिकायतों का त्वरित समाधान के साथ ही अन्य शिकायतों का नियमित फॉलो-अप भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि किसी भी स्तर पर समस्या न रहे। उन्होंने कहा सभी अधिकारी तहसील दिवस को गंभीरता से लें। यह दिवस सरकार की जनसेवा की प्रतिबद्धता को दिखाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे अपात्र व्यक्ति जिन्होंने गलत जानकारी के आधार पर आयुष्मान, राशन कार्ड, स्थायी निवास, जाति प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज बनाए हैं। उन्हें भी चिन्हित किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेशवासियों के हक़ और संसाधनों की सुरक्षा करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी भूमि, नदी-नालों की ज़मीनों तथा अन्य सार्वजनिक संपत्तियों पर अतिक्रमण रोकने के लिए कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अतिक्रमण से संबंधित मामलों पर तुरंत प्रभावी कदम उठाए जाएं ताकि भविष्य में इस प्रकार की समस्याएं उत्पन्न न हों।
मुख्यमंत्री ने विभिन्न जनपदों में भूमि विवादों के निस्तारण के लिए तहसील स्तर पर एसडीएम की अध्यक्षता में समिति गठित करने के निर्देश दिए। जिसमें पुलिस विभाग, वन विभाग और सिंचाई विभाग आदि के अधिकारी भी सदस्य होंगे। उन्होंने कहा यह समिति सरकारी भूमि पर अतिक्रमण रोकने के लिए जिम्मेदार होगी। साथ ही निजी भूमि के विवाद का निस्तारण भी इस समिति द्वारा किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर प्रदेश भर में सेवा पखवाड़ा आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे सेवा पखवाड़ा में अधिक से अधिक संख्या में प्रतिभाग करें और जनहित में चलाए जा रहे कार्यक्रमों को सफल बनाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सेवा पखवाड़ा समाज को जोड़ने और सेवा भाव को आगे बढ़ाने का एक सशक्त माध्यम भी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में हमारा राज्य आपदा से जूझ रहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आपदा से हुए नुकसान का त्वरित आकलन किया जाए, ताकि प्रभावित क्षेत्रों में राहत और पुनर्निर्माण कार्यों को गति दी जा सके। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आपदा प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से भी आपदा प्रभावित परिवारों के साथ संवाद करने एवं आपदा प्रभावित क्षेत्रों में जाने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को बीडीसी और जिला पंचायत की बैठकों में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन बैठकों में भागीदारी से अधिकारियों को ग्राम स्तर पर उत्पन्न होने वाली वास्तविक समस्याओं की जानकारी मिलेगी और उनके समाधान की दिशा में ठोस कार्ययोजना बनाई जा सकेगी।
इस अवसर पर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, डीजीपी दीपम सेठ, सचिव शैलेश बगौली, सचिव विनय शंकर पांडे, अपर सचिव बंशीधर तिवारी, एवं वर्चुअल माध्यम से प्रत्येक तहसील से अधिकारी एवं स्थानीय लोग मौजूद रहे।
बारिश से हुई क्षति पर जिलाधिकारी सजग, राहत कार्यों के लिए विभागों को समन्वय के निर्देश
सभी विभाग मिलकर करें कार्य, जिलाधिकारी ने दिए आपदा प्रबंधन को गति देने के निर्देश
पौड़ी। जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने मंगलवार को आपदा प्रबंधन कंट्रोल रूम का निरीक्षण कर कल रात से हो रही बारिश से हुए नुकसान का अवलोकन किया। इसके उपरांत उन्होंने जनपद के समस्त उपजिलाधिकारियों सहित लोनिवि, पीएमजीएसवाई, विद्युत एवं पेयजल विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिये।
जिलाधिकारी ने कहा कि बारिश से प्रभावित मोटर मार्ग, विद्युत आपूर्ति और पेयजल व्यवस्था को तत्काल दुरुस्त किया जाय। उन्होंने उपजिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी राजस्व निरीक्षक अपने-अपने क्षेत्र में उपस्थित रहें और किसी भी समस्या की सूचना तत्काल आपदा कंट्रोल रूम को दें।
जिलाधिकारी द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग, स्टेट हाईवे, पीएमजीएसवाई और ग्रामीण मार्गों की स्थिति की भी समीक्षा की गयी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जहां भी मार्ग अवरुद्ध हैं, उन्हें समय रहते सुचारु किया जाय। साथ ही उन्होंने सभी अधिशासी अभियंताओं को सड़क मार्ग खोलने की सूचना भी तत्काल कंट्रोल रूम को देने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने तैनात जेसीबी मशीनों की जियो टैगिंग के साथ ऑपरेटर की फोटो उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिये, ताकि ऑपरेटर मशीन पर उपस्थित रहे और मार्ग अवरुद्ध होने पर तत्काल कार्रवाई की जा सके। उन्होंने आपदा प्रबंधन अधिकारी को वुड कटर मशीन की उपस्थिति भी सुनिश्चित करने को कहा।
विद्युत एवं पेयजल व्यवस्था की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि जहां मरम्मत में समय लगे, वहां अस्थायी आपूर्ति की व्यवस्था सुनिश्चित की जाय।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि आपदा जैसी परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सभी विभागों के बीच घनिष्ठ समन्वय आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राजस्व, लोनिवि, पीएमजीएसवाई, विद्युत, पेयजल, स्वजल तथा आपदा प्रबंधन विभाग आपस में लगातार संपर्क बनाए रखें और सूचना का आदान-प्रदान शीघ्रता से करें। प्रत्येक विभाग अपनी-अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए सामूहिक प्रयास सुनिश्चित करे, ताकि प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं पुनर्बहाली कार्यों में किसी भी प्रकार की देरी न हो।
इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी अनिल सिंह गर्ब्याल, डीपीआरओ जितेंद्र कुमार, पीडी स्वजल दीपक रावत, आपदा प्रबंधन अधिकारी दीपेश काला सहित सभी उपजिलाधिकारी तथा अन्य अधिकारी वर्चुअल माध्यम से उपस्थित रहे।
पर्वतमाला परियोजना के तहत बनेगा देश का सबसे बड़ा रोपवे, हर साल लाखों श्रद्धालुओं को होगा लाभ
देहरादून। केदारनाथ धाम तक पहुंचने वाली सोनप्रयाग रोपवे परियोजना का जिम्मा अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड को सौंपा गया है। कंपनी को इसके लिए औपचारिक सहमति पत्र भी मिल गया है। इस परियोजना से तीर्थयात्रियों को बेहद बड़ी सुविधा मिलने वाली है।
12.9 किलोमीटर लंबी इस रोपवे लाइन के शुरू होने से सोनप्रयाग से केदारनाथ तक की लगभग 9 घंटे की कठिन पैदल चढ़ाई मात्र 36 मिनट में पूरी हो सकेगी। यह रोपवे हर दिशा में प्रति घंटे करीब 1,800 यात्रियों को ले जाने में सक्षम होगा। इससे हर साल लाखों श्रद्धालु सुरक्षित और सुगम तरीके से केदारनाथ धाम तक पहुंच पाएंगे।
यह महत्वाकांक्षी परियोजना केंद्र सरकार की राष्ट्रीय रोपवे विकास योजना ‘पर्वतमाला परियोजना’ का हिस्सा है और इसे सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर विकसित किया जा रहा है। निर्माण कार्य पूरा होने में करीब छह साल का समय लगेगा और इसके बाद 29 वर्षों तक अदाणी एंटरप्राइजेज इसका संचालन करेगा।
अदाणी समूह के अध्यक्ष गौतम अदाणी ने कहा कि यह परियोजना केवल इंजीनियरिंग उपलब्धि नहीं है, बल्कि आस्था और आधुनिक तकनीक का संगम है। उनके अनुसार, यह रोपवे न सिर्फ यात्रा को सुरक्षित और सुविधाजनक बनाएगा बल्कि उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था और स्थानीय लोगों के लिए नए अवसर भी लेकर आएगा।
सूखते फूलों संग कम हुई रौनक, घाटी का सीजन पहुंचा अंतिम पड़ाव पर
चमोली। उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी इस बार पर्यटकों को अपनी ओर खींचने में नाकाम रही है। सीजन अब अपने अंतिम पड़ाव पर है और पर्यटकों की आवाजाही धीरे-धीरे थमने लगी है। घाटी में इस साल विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ी जरूर है, लेकिन भारतीय पर्यटकों की कमी ने नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क प्रशासन की आय पर बड़ा असर डाला है।
पिछले साल जहां 17,654 भारतीय पर्यटक घाटी पहुंचे थे, वहीं इस बार अब तक केवल 14,528 ही पहुंच पाए हैं। हालांकि विदेशी पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज हुई है। बीते वर्ष 268 पर्यटक पहुंचे थे जबकि इस साल अब तक 384 विदेशी पर्यटक यहां आए हैं।
वनक्षेत्राधिकारी चेतना कांडपाल ने बताया कि भारतीय पर्यटकों में करीब तीन हजार की कमी दर्ज की गई है। राजस्व पर भी इसका सीधा असर पड़ा है। पिछले साल जहां पार्क प्रशासन को 36 लाख 18 हजार रुपये से अधिक की आय हुई थी, वहीं इस बार अब तक केवल 31 लाख 13 हजार रुपये ही प्राप्त हुए हैं।
अब घाटी में फूल मुरझाने लगे हैं और सीजन 31 अक्तूबर तक पूरी तरह बंद हो जाएगा। ऐसे में यहां पर्यटकों की संख्या में और बढ़ोतरी की संभावना कम ही है।
पीड़ित परिवारों से भेंट कर दिलाया हर संभव मदद का भरोसा
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को देहरादून के केसरवाला और मालदेवता क्षेत्र में आपदा प्रभावित इलाकों का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उन्हें हरसंभव मदद और राहत का आश्वासन दिया।

सीएम धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए और जिन मार्गों पर भूस्खलन की आशंका है, वहां पर्यटकों की आवाजाही को तत्काल रोका जाए। उन्होंने कहा कि इस विकट स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों को युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है और सरकार हर पीड़ित परिवार की सुरक्षा व सहायता के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
देहरादून। मौसम विभाग और एनडीएमपी की चेतावनी के बाद देहरादून जिले में आज भारी से बहुत भारी बारिश के साथ गर्जन और बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। देर रात सहस्त्रधारा क्षेत्र में बादल फटने की घटना ने तबाही मचा दी, जिसके चलते जिला प्रशासन ने एहतियातन रेड अलर्ट जारी किया है।
सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने दून जिले के सभी शासकीय, अशासकीय, निजी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों को बंद रखने का निर्णय लिया है। हालांकि यह आदेश केवल छात्रों पर लागू होगा, जबकि शिक्षक और कर्मचारी पूर्ववत स्कूल पहुंचेंगे। साथ ही, जिला प्रशासन ने सभी विभागों को सतर्क मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं।
मसूरी में मजदूरों के घर पर गिरा मलबा, एक की मौत, दूसरा गंभीर घायल
देहरादून। उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश ने हालात बिगाड़ दिए हैं। सोमवार देर रात देहरादून के सहस्रधारा क्षेत्र में बादल फटने से भारी तबाही मच गई। मुख्य बाजार में मलबा आने से कई दुकानें और होटल क्षतिग्रस्त हो गए, वहीं मसूरी में मजदूरों के आवास पर मलबा गिरने से एक मजदूर की मौत हो गई और एक गंभीर रूप से घायल हो गया।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों के अनुसार, सहस्रधारा के कार्डीगाड़ बाजार में रात करीब साढ़े 11 बजे बादल फटने के बाद मलबे ने तबाही मचाई। दो से तीन होटल और करीब 7–8 दुकानें ध्वस्त हो गईं। घटना के बाद सौ से अधिक लोग मलबे में फंस गए थे, जिन्हें ग्रामीणों ने रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया। इस दौरान एक से दो लोगों के लापता होने की भी आशंका जताई गई है, जिनकी तलाश जारी है।
आपदा कंट्रोल रूम के मुताबिक, रात दो बजे एसडीआरएफ और फायर सर्विस की टीमें मौके के लिए रवाना की गईं, लेकिन भारी मलबे के कारण वे घटनास्थल तक नहीं पहुंच पाईं। लोक निर्माण विभाग की जेसीबी रास्ता साफ करने में जुटी है।
इधर देहरादून में तमसा नदी उफान पर है। टपकेश्वर मंदिर परिसर जलमग्न हो गया और शिवलिंग तक डूब गया। पुलिस ने लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है। रायपुर क्षेत्र के आईटी पार्क के पास भी भारी मात्रा में मलबा आने से हालात बिगड़े, हालांकि राहत दलों ने समय रहते स्थिति को नियंत्रण में कर लिया।
वहीं मसूरी के झड़ीपानी क्षेत्र में मजदूरों की झुग्गियों पर देर रात मलबा गिरा। हादसे में एक मजदूर की मौके पर मौत हो गई, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हुआ। स्थानीय पुलिस और लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू कर घायल को अस्पताल पहुंचाया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सहस्रधारा की घटना पर चिंता जताते हुए एक्स पर लिखा कि प्रशासन, पुलिस और एसडीआरएफ राहत व बचाव कार्यों में लगे हुए हैं। उन्होंने प्रभावितों के सकुशल होने की प्रार्थना की और आश्वासन दिया कि वे लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे हैं।
फेस्टिवल को सफल और यादगार बनाने के लिए विभागों को समय पर तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश
तीन दिवसीय महोत्सव में पैराग्लाइडिंग, एंग्लिंग, साइकिलिंग, राफ्टिंग और कयाकिंग होंगे आकर्षण का केंद्र
जिलाधिकारी ने ली तैयारियों की बैठक, कहा – पर्यटन को मिलेगा नया आयाम और बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
पौड़ी। साहसिक खेलों की धरती नयार घाटी एक बार फिर रोमांच से सराबोर होने जा रही है। इस फेस्टिवल में रोमांच, उत्तराखंडी संस्कृति और रोजगार का अनोखा संगम देखने को मिलेगा। सोमवार को जिला कार्यालय स्थित एनआईसी कक्ष में जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया की अध्यक्षता में फेस्टिवल की तैयारियों को लेकर बैठक हुई।
जिलाधिकारी ने कहा कि तीन दिवसीय महोत्सव में पैराग्लाइडिंग, एंग्लिंग, साइकिलिंग, राफ्टिंग, क्याकिंग जैसी रोमांचक गतिविधियां आकर्षण का केंद्र होंगी। उन्होंने निर्देश दिए कि फेस्टिवल में बाहर से आने वाले पर्यटकों, खिलाड़ियों व साहसिक खेल प्रेमियों के लिए ठहरने की व्यवस्था अभी से सुनिश्चित की जाय और होटलों को चिन्हित कर आवश्यक प्रबंध किए जाएं।
जिलाधिकारी ने बताया कि मुख्य कार्यक्रम स्थल बिलखेत में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। वहीं पैराग्लाइडिंग के लिए सुरक्षित स्थान चिन्हित होगा और सतपुली से व्यासघाट के बीच एंग्लिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। इसके अलावा साइकिलिंग, कयाकिंग, राफ्टिंग और अन्य साहसिक गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी।
जिलाधिकारी ने कहा कि नयार फेस्टिवल केवल पर्यटन को नयी ऊँचाई ही नहीं देगा, बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार और आजीविका के अवसर भी प्रदान करेगा। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिये कि सभी तैयारियां समय से पूरी हों और आयोजन को यादगार बनाया जाय।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी गिरीश गुणवंत, एसडीओ वन आयशा बिष्ट, जिला पर्यटन विकास अधिकारी खुशाल सिंह नेगी, कोषाधिकारी अमर्त्य विक्रम सिंह, मत्स्य अधिकारी अभिषेक मिश्रा सहित अधिकारी उपस्थित रहे।
