भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता एवं केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि कांग्रेस और विपक्ष की अन्य पार्टियां कृषि कानून पर भ्रम फैलाने में जुटी हैं लेकिन सितंबर से लेकर दिसंबर के बीच देश के जिस भी हिस्से में चुनाव हुए हैं, वहां भाजपा को बड़ी जीत मिली है। उन्होंने कहा कि जनता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विश्वास करती है।
सोमवार को दिल्ली में पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए स्मृति ने देश के अलग-अलग हिस्सों में हुए निकाय चुनाव और पंचायत चुनावों में भाजपा को मिली शानदार सफलता को प्रधानमंत्री मोदी और उनकी नीतियों में विश्वास बताया।
उन्होंने कहा कि इन सभी चुनावों में पूर्व से लेकर पश्चिम तक और उत्तर से लेकर दक्षिण तक समग्र राष्ट्र की जनता का आशीर्वाद प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा को मिला है। इन चुनावों में भाजपा को मिली ऐतिहासिक विजय यह दर्शाती है कि देश को माननीय प्रधानमंत्री में एवं उनकी नीतियों में अटूट विश्वास है। देश की जनता ने कांग्रेस सहित विपक्ष की नकारात्मक और समाज को बांटने वाली राजनीति को सिरे से खारिज किया है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आज कांग्रेस लगातार सिमटती जा रही है। जबकि भारतीय जनता पार्टी को देश के ग्रामीण इलाकों में व्यापक समर्थन मिल रहा है और वह भी तब, जब किसान आंदोलन के नाम पर विपक्ष लोगों को भ्रमित करने का काम कर रहा है। जब से कृषि सुधार बिल देश की संसद ने पारित किए, तब से विपक्षी दल एक भ्रांति फैलाने का प्रयास कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस का आरोप रहा है कि देश की ग्रामीण जनता भारत सरकार के सामने अपनी पीड़ा व्यक्त कर रही है लेकिन आज हम उन राज्यों में ऐतिहासिक जीत दर्ज कर रहे हैं, जहां कांग्रेस की सत्ता थी तो ये कई मायनों में खास है। उन्होंने कहा कि केरल में भी भारतीय जनता पार्टी की स्थिति मजबूत हुई है जबकि वहां हमारे कार्यकर्ताओं को लगातार मौत के घाट उतारा जा रहा है।
यदि आपके ड्राइविंग लाइसेंस अथवा वाहन की आरसी, परमिट आदि दस्तावेजों की वैधता समाप्त हो चुकी है तो यह खबर राहत देने वाली है। कोविड-19 की परिस्थितियों के मद्देनजर केंद्र सरकार ने डीएल, आरसी, परमिट आदि जैसे वाहन संबंधी दस्तावेजों की वैधता अगले वर्ष 31 मार्च तक बढ़ा दी है। यानी इस बीच किसी के कोई दस्तावेज की वैधता समाप्त हो रही है तो उन्हें अमान्य नहीं माना जाएगा।
केन्द्रीय सड़क परिवहन तथा राजमार्ग मंत्रालय ने रविवार को इस संबंध में राज्य सरकारों को एक परामर्शी जारी की है। मंत्रालय के अनुसार इससे पूर्व मोटर वाहन अधिनियम, 1988 तथा केन्द्रीय मोटर वाहन नियमों, 1989 से संबंधित दस्तावेजों की वैधता के विस्तार के संबंध में 30 मार्च, 2020, 9 जून, 2020 तथा 24 अगस्त, 2020 को परामर्शी जारी की गई थी। इनमें राज्यों को सुझाव दिया गया था कि फिटनेस, परमिट (सभी प्रकारों के), लाइसेंस, पंजीकरण या किसी और संबंधित दस्तावेज की प्रमाणिकता 31 दिसम्बर, 2020 तक वैध समझी जाए।
मंत्रालय द्वारा रविवार को जारी परामर्शी में कहा गया है, ‘‘कोविड-19 के प्रसार को रोकने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए परामर्श दिया जाता है कि उपरोक्त उल्लेखित सभी दस्तावेजों की प्रमाणिकता 31 मार्च, 2021 तक वैध समझी जाए। इसमें वे सभी दस्तावेज शामिल हैं जिनकी वैधता 1 फरवरी, 2020 को समाप्त हो गई है या 31 मार्च, 2021 तक समाप्त हो जाएगी।’’
केन्द्र सरकार ने सभी राज्यों तथा केन्द्र शासित प्रदेशों से इस परामर्शी को मूल भावना के साथ कार्यान्वित करने का आग्रह किया गया है जिससे कि नागरिक, ट्रांसपोर्टर तथा विभिन्न अन्य संगठन, जो कोविड महामारी के दौरान इस कठिन समय में प्रचालन कर रहे हैं, को कोई परेशानी न हो और उन्हें दिक्कतों का सामना न करना पड़े।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा सुशासन दिवस के अवसर पर शुक्रवार को किसान सम्मान निधि का ऑनलाईन ट्रांसफर किया गया। देश के 9 करोड़ किसान परिवारों के बैंक खातों में 18 हजार करोड़ रूपये की धनराशि हस्तांतरित की गई। उत्तराखण्ड के 8 लाख 27 हजार किसान परिवारों के खातों में 165 करोड़ की धनराशि डाली गई।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने विभिन्न राज्यों के किसानों से बातचीत कर पीएम किसान सम्मान निधि, किसान क्रेडिट कार्ड से होने वाले लाभ के बारे में जानकारी ली।

पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी की जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने वर्चुअल माध्यम से जनता को संबोधित किया। पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेई की जयंती को सुशासन दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। अटल जी ने सुशासन को भारत के राजनीतिक एवं सामाजिक विमर्श का हिस्सा बनाया।
उन्होंने कहा कि आज जो नये कृषि सुधारों को सरकार ने जमीन पर उतारा है, उनके सूत्रधार अटल जी भी थे। मोदी ने कहा कि पीएम सम्मान किसान निधि योजना जब से शुरू हुई है तब से 01 लाख 10 हजार करोड़ रूपये से अधिक की धनराशि किसानों के खातों में पहुंच चुकी है। तकनीक के इस्तेमाल से किसानों के खाते में ऑनलाईन माध्यम से धनराशि दी गई है।
मोदी ने कहा कि सरकार ने देश के किसानों की छोटी-छोटी परेशानियों एवं कृषि के आधुनिकीकरण की ओर ध्यान दिया। 60 वर्ष की आयु के बाद 03 हजार रूपये मासिक पेंशन का सुरक्षा कवच भी आज किसान के पास है।
देहरादून से उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की पारदर्शी सोच से किसान तरक्की की ओर बढ़ रहा है। सरकार जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान में विश्वास रखती है। प्रधानमंत्री ने सबका साथ, सबका विकास का मंत्र दिया है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में वर्ष 2019-20 में 02 लाख 12 हजार 621 कृषकों द्वारा फसल बीमा कराया गया। जिसमें 96 हजार 770 किसानों को 103.55 करोड़ की क्षतिपूर्ति का भुगतान किया गया। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना शुरू होने से अब तक राज्य में 3 लाख 15 हजार 67 किसानों को 282.82 करोड़ रूपये की क्षतिपूर्ति प्राप्त हुई है।
इस अवसर पर वर्चुअल माध्यम से केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर, देहरादून के पवेलियन मैदान में आयोजित कार्यक्रम में सांसद एवं उत्तराखण्ड भाजपा की सह प्रभारी रेखा वर्मा, विधानसभा अध्यक्ष प्रेम चन्द अग्रवाल, राज्य सभा सांसद नरेश बंसल, विधायक हरबंस कपूर, गणेश जोशी, खजान दास, मुन्नी देवी शाह, मेयर सुनील उनियाल गामा, मुख्य सचिव ओम प्रकाश एवं कृषक उपस्थित थे।
नए साल में यानी पहली जनवरी से आप सड़क पर गाड़ी चलाएंगे तो आपके वाहन पर फास्टैग (FASTag) लगा होना चाहिए। केन्द्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय (Ministry of Road Transport & Highways) ने सभी वाहनों के लिए 1 जनवरी से फास्टैग अनिवार्य कर दिया है। फास्टैग की शुरुआत 2016 में की गयी थी।
केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इस साल नवंबर में एक अधिसूचना जारी कर केंद्रीय मोटर वाहन नियम (CMVR), 1989 में संशोधन किया था। इस संशोधन में 1 दिसम्बर, 2017 से पहले बेचे गये वाहनों में भी, 1 जनवरी, 2021 से फास्टैग को अनिवार्य बनाया गया है।
CMVR अनुसार, 1 दिसंबर 2017 से, नए चार पहिया वाहनों के पंजीकरण के लिए फास्टैग को अनिवार्य कर दिया गया था और इसकी आपूर्ति वाहन निर्माताओं या उनके डीलरों द्वारा की जा रही है। इसके अलावा, यह भी अनिवार्य किया गया था कि फास्टैग के लिए फिट होने के बाद ही परिवहन वाहनों के फिटनेस प्रमाणपत्र का नवीनीकरण किया जाएगा। राष्ट्रीय परमिट वाले वाहनों के लिए 1 अक्टूबर 2019 से फास्टैग मानकों पर फिट होना अनिवार्य किया गया था।
टोल प्लाज़ा पर केवल इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से शुल्क का भुगतान 100 प्रतिशत होना और वाहनों का शुल्क प्लाज़ा के माध्यम से निर्बाध रूप से गुजरना सुनिश्चित करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम होगा। प्लाज़ा में प्रतीक्षा करते हुए कोई समय जाया नहीं करना होगा और इससे ईंधन की बचत होगी।
राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार विविध चैनलों पर फास्टैग की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा कई कदम उठाए जा रहे हैं ताकि नागरिक अपनी सुविधा के अनुसार अगले दो महीनों के भीतर उन्हें अपने वाहनों पर फास्टैग चिपका सकें।
केन्द्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने गुरूवार को एक समारोह को वर्चुअल संबोधित करते हुए कहा कि फास्टैग को 1 जनवरी से लागू किया जाएगा। इस कदम से मिलने वाले लाभों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि यह यात्रियों के लिए उपयोगी है क्योंकि उन्हें नकद भुगतान के लिए टोल प्लाजा पर रुकने की जरुरत नहीं होगी। इससे समय और ईंधन की भी बचत होगी।
केन्द्र सरकार ने देश में विद्युत उपभोक्ताओं के अधिकारों को लेकर नए प्रावधान तय कर दिए हैं। इन प्रावधानों के बाद उपभोक्ता को विश्वसनीय सेवाएं और गुणवत्ता सम्पन्न बिजली पाने का अधिकार मिल गया है। नए नियमों के लागू होने के बाद उपभोक्ताओं को नए बिजली कनेक्शन, रिफंड तथा अन्य सेवाएं समयबद्ध तरीके से मिलेंगी। जानबूझकर उपभोक्ताओं के अधिकारों की अनदेखी करने पर सेवा प्रदाता को दंड का प्रावधान रखा गया है।
केन्द्रीय विद्युत तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) आर.के. सिंह ने नए नियमों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि देश में वितरण कंपनियों का, चाहे सरकारी या निजी हो, एकाधिकार हो गया है और उपभोक्ताओं के पास कोई विकल्प नहीं है। इसलिए नए नियमों में उपभोक्ताओं के अधिकारों को तय करना और इन अधिकारों को लागू करने के लिए प्रणाली बनाना आवश्यक हो गया था। इन नियमों से लगभग 30 करोड़ वर्तमान तथा संभावित उपभोक्ता लाभान्वित होंगे।
नए प्रावधानों के अनुसार नए कनेक्शन देने और वर्तमान कनेक्शन में संशोधन के लिए मेट्रो शहर में अधिकतम समय-सीमा सात दिन, अन्य पालिका क्षेत्रों में 15 दिन तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 30 दिन होगी। मीटर के बिना कोई कनेक्शन नहीं दिया जाएगा। मीटर स्मार्ट प्री-पेमेंट या प्री-पेमेंट मीटर होंगे। उपभोक्ता को ऑनलाइन या ऑफलाइन भुगतान का विकल्प मिलेगा। उपभोक्ता डिस्कनेक्शन तथा रिकनेक्शन करवा सकता है। वितरक कम्पनी सभी उपभोक्ताओं को 24×7 बिजली सप्लाई करेगी, लेकिन कृषि जैसे कुछ श्रेणियों के उपभोक्ताओं के लिए आपूर्ति के कम घंटे निर्दिष्ट किए जा सकते हैं। निगरानी तथा बिजली बहाल करने के लिए वितरण लाइसेंसी, जहां तक संभव हो, ऑटोमेटेड टूल्स के साथ एक व्यवस्था बनाएंगे।
विद्युत वितरण कंपनियों के प्रदर्शन मानकों के आधार पर उपभोक्ता मुआवजे का भी हकदार होगा। निर्दिष्ट सीमा से अधिक सप्लाई में बाधा संख्या, कनेक्शन, डिस्कनेक्शन, रिकनेक्शन, शिफ्टिंग में लगने वाला समय, उपभोक्ता श्रेणी, लोड परिवर्तन में लगने वाला समय, खराब मीटरों को बदलने में लगने वाला समय, वोल्टेज से संबंधी शिकायतों के समाधान की अवधि तथा बिल संबंधी शिकायतों के आधार पर उपभोक्ता को मुआवजे का अधिकार होगा।
उपभोक्ता सेवा के लिए एक केन्द्रीकृत 24×7 टोल फ्री कॉल सेन्टर स्थापित होगा। उपभोक्ता शिकायत समाधान फोरम में व्यवस्था को बहुस्तरीय बनाकर आसान बनाया गया है और उपभोक्ताओं के प्रतिनिधियों की संख्या एक से बढ़ाकर चार कर दी गई है। शिकायत समाधान के लिए अधिकतम समय-सीमा 45 दिन है।
अपनी वेबसाइट, वेब पोर्टल, मोबाइल ऐप तथा अपने क्षेत्रवार कार्यालयों द्वारा आवेदन प्रस्तुति, आवेदन की स्थिति की निगरानी, बिलों का भुगतान, शिकायतों की स्थिति आदि के लिए उपभोक्ताओं को ऑनलाइन एक्सेस होगा। वितरण लाइसेंसी वरिष्ठ नागरिकों को उनके घर पर आवेदन प्रस्तुतीकरण, बिलों का भुगतान जैसी सभी सेवाएं प्रदान करेंगे। उपभोक्ताओं को बिजली कटौती के समय की विस्तृत जानकारी दी जाएगी। अनियोजित कटौती या खराबी की सूचना उपभोक्ताओं को एसएमएस द्वारा या अन्य इलैक्ट्रॉनिक साधनों द्वारा दी जाएगी और बिजली बहाली का अनुमानित समय बताया जाएगा।
विद्युत (उपभोक्ताओं के अधिकार) नियम, 2020 के लिए यहां क्लिक करें-
वाइस एडमिरल संदीप नैथानी, अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM), विशिष्ट सेवा मेडल (VSM) को युद्धपोत उत्पादन और अधिग्रहण नियंत्रक (Controller Warship Production and Acquisition) के पद पर तैनात किया गया है। नैथानी राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (National Defence Academy), खडकवासला पुणे के स्नातक हैं। उन्हें 01 जनवरी 1985 को भारतीय नौसेना की विद्युत शाखा में कमीशन प्राप्त किया था। एडमिरल नैथानी मूलरूप से उत्तराखंड के पौड़ी (गढ़वाल) के निवासी हैं।

एडमिरल नैथानी भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली से रडार एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में पोस्ट ग्रेजुएट हैं। वे डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज (DSSC) और नेशनल डिफेंस कॉलेज (NDC) के पूर्व छात्र हैं। उन्होंने अपने साढ़े तीन दशक के शानदार नौसैनिक करियर के दौरान विभिन्न चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन किया है।
नैथानी ने विमान वाहक पोत विराट पर विभिन्न सेवाएं दी हैं। उन्होंने मुंबई और विशाखापत्तनम में नौसेना डॉकयार्ड, नौसेना मुख्यालय के स्टाफ, कार्मिक और मैटरियल शाखाओं में महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है। इसके अलावा उन्होंने नौसेना के प्रमुख विद्युत प्रशिक्षण प्रतिष्ठान, आईएनएस वलसुरा की भी कमान संभाली।
एक फ्लैग ऑफिसर के रूप में, एडमिरल नैथानी ने नौसेना मुख्यालय में सहायक चीफ ऑफ मैटरियल (आधुनिकीकरण), चीफ स्टॉफ ऑफिसर (टेक्निकल), नौसेना डॉकयार्ड मुंबई के एडमिरल सुपरिटेंडेंट, मुंबई में डायरेक्टर जनरल नेवल प्रोजेक्ट आदि विभिन्न पदों पर काम किया किया है।
नई दिल्ली। अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित एक कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत के भाषणों का संकलन यशस्वी भारत का लोकार्पण जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरी ने किया। इस अवसर पर संघ के सह-सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि अब भारत पुन: अंगड़ाई ले रहा है और अपनी खोई अस्मिता व प्रतिष्ठा अर्जित करने के पथ पर अग्रसर है।
डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि हमें संपन्न, सामर्थ्यवान, शक्तिशाली तो बनना है, लेकिन इससे आगे भारत को यशस्वी बनना है। उन्होंने कहा कि यश तब आता है, जब कोई परमार्थ करता है। प्राचीन भारत का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हम 18वीं शताब्दी तक दुनिया की आर्थिक महाशक्ति थे, शक्तिशाली भी थे। लेकिन हमारी प्रतिष्ठा सर्वे भवन्तु सुखिनः की हमारी नीति और सभी को ईश्वर का अंश मानने के हमारे भाव के कारण थी।
उन्होंने मिस्र, बेबीलोन, स्पार्टा आदि देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि बर्बर, हिंसक और क्रूर सभ्यताएं सौम्य सभ्यताओं का नाश कर देती हैं। उन्होंने कहा कि हमने कोई हजार वर्षों तक ऐसे आक्रमणों से स्वयं को भी बचाया और धर्म की भी रक्षा की। उन्होंने कहा कि मोहन भागवत के सभी उद्बोधनों का मूल स्वर यही है कि कैसे हम सब भारतीय जाति-धर्म-भाषा के भेद मिटाकर भारत की यशस्विता और सर्वांगीण समेकित विकास में सहभागी बन सकें। हम अपने गौरवशाली अतीत का स्मरण करें जब भारत ‘विश्वगुरु’ था और एक नायक की भांति विश्व का नेतृत्व करता था। अब भारत पुन: अंगड़ाई ले रहा है और अपनी खोई अस्मिता व प्रतिष्ठा अर्जित करने के पथ पर अग्रसर है।

स्वामी अवधेशानंद गिरी ने कहा कि स्थितियां बदल रही हैं। जाति की जकड़, स्त्रियों की स्थिति, समाज के चिंतन में बदलाव आया है। संन्यास परंपरा का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अब तथाकथित छोटी जातियों से भी संन्यासी बन रहे हैं और किसी को कोई आपत्ति भी नहीं है। हिन्दू दूसरों का धर्म परिवर्तन नहीं कराते। कोरोना काल में दुनिया में जितने लोगों ने योग, आयुर्वेद और दूसरी भारतीय पद्धतियां अपनाईं, उससे भारतीय विचार का पूरे विश्व में व्यापक प्रचार-प्रसार हुआ है। मोहन भागवत के चिंतनपरक उद्बोधनों में भारत के स्वर्णिम भविष्य के निर्माण का मार्ग है।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि भारत के पूर्व नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (CAG) राजीव महर्षि ने भी हिन्दू कौन विषय को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि संघ और सरसंघचालक मोहन भागवत के चिंतन में सदैव ‘राष्ट्र’ रहता है और इसीलिए इस वैश्विक संगठन की स्वीकार्यता समाज में निरंतर बढ़ रही है।
पुस्तक में सरसंघचालक मोहन भागवत के अलग-अलग अवसरों पर दिए गए 17 भाषणों का संकलन है। प्रभात प्रकाशन से प्रकाशित 286 पृष्ठों की पुस्तक का संपादन लोकसभा टीवी के संपादक श्याम किशोर ने किया है। पुस्तक की प्रस्तावना संघ के पूर्व अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख, प्रखर चिंतक-विचारक एमजी वैद्य ने लिखी है।प्रभात प्रकाशन के निदेशक पीयूष कुमार व प्रभात कुमार ने उपस्थित अभ्यागतों का स्वागत किया।
वरिष्ठ पत्रकार, हिन्दुत्व के भाष्यकार, चिंतक एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ नेता माधव गोविंद वैद्य (बाबू राव वैद्य) का शनिवार को महाराष्ट्र के नागपुर में निधन हो गया। वे 97 वर्ष के थे। वे पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ थे, और अस्पताल में उनका उपचार चल रहा था।
वैद्य के पुत्र व RSS के सह सरकार्यवाह डॉ मनमोहन वैद्य ने ट्वीट कर उनके निधन की जानकारी दी। उनका अंतिम संस्कार रविवार को होगा। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, RSS के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत, सरकार्यवाह सुरेश (भय्या) जोशी, भाजपा अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा समेत तमाम लोगों ने गहरा शोक व्यक्त किया है।
माधव गोविंद वैद्य का जन्म महाराष्ट्र के वर्धा जिले की तरोड़ा तहसील में 11 मार्च, 1923 को हुआ था। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा तरोडा व माध्यमिक शिक्षा नील सिटी हाई स्कूल, नागपुर से पूर्ण की। नागपुर के मॉरिस कॉलेज से महाविद्यालयी शिक्षा प्रथम श्रेणी में पूरी की और शिक्षण कार्य से जुड़ गए।
संस्कृत के ख्यात शिक्षक जो अनूठी शिक्षण शैली और विषय पर पकड़ के कारण न केवल छात्रों, अपितु विरोधी विचारधारा के लोगों में भी लोकप्रिय रहे। वर्ष 1966 में संघ की योजना के तहत नौकरी छोड़ दैनिक तरुण भारत, नागपुर से जुड़े। समाचार चयन की तीक्ष्ण दृष्टि और गहरी वैचारिक स्पष्टता के कारण पत्रकारिता के क्षेत्र में भी उन्होंने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। कालांतर में इसका प्रकाशन करने वाले नरकेसरी प्रकाशन का नेतृत्व किया।
कुछ वर्षों बाद वैद्य ने पत्रकारिता से राजनीति के क्षेत्र में पदार्पण किया। वर्ष 1978 से 1984 तक वे महाराष्ट्र विधान परिषद् के लिए मनोनीत किये गए। वे RSS में अखिल भारतीय बौद्धिक प्रमुख, अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख, अखिल भारतीय प्रवक्ता, तथा वर्ष 2008 तक अ. भा. कार्यकारी मंडल के निमंत्रित सदस्य रहे। वैद्य संघ शोधकों, सत्यशोधकों और विरोधी विचारधाराओं के जिज्ञासा समाधान के लिए हमेशा तत्पर और उपलब्ध रहे।
उन्होंने वैचारिक अधिष्ठान प्रदान करने वाली अनेक पुस्तकों का लेखन किया। उन्हें महाराष्ट्र सरकार का ‘महाकवि कालिदास संस्कृत साधना पुरस्कार’, राष्ट्रसन्त तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय का ‘राष्ट्रसन्त तुकडोजी जीवन गौरव पुरस्कार’ सहित दर्जन भर पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था।
- रजनीश कुमार
दिल्ली की सीमा पर किसानों का आंदोलन जारी है। सरकार के प्रयासों से किसान संगठनों और सरकार के बीच संवाद भी जारी है। स्वस्थ लोकतंत्र में संवाद की महत्ता हमेशा से रही है, हमारे यहां पुरानी उक्ति है – वादे वादे जायते तत्वबोध: अर्थात् संवाद से तत्व का ज्ञान होता है। हालांकि किसान संगठन बिल वापस लेने पर अड़ गए हैं। वहीं सरकार का कहना है – जहां आपत्ति होगी, संशोधन करेंगे। किसान संगठनों ने तर्क दिया कि नए कानूनों से न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिलेगा, सरकार लिखित आश्वासन देने को तैयार है।
संगठनों ने एपीएमसी यानि मंडियों के समाप्त होने की चिंता प्रकट की, सरकार ने कहा – लिखित में दे देंगे कि मंडियां समाप्त नहीं होंगी। डर जताया कि किसानों की जमीन बिक जाएगी, सरकार ने कहा कि किसानों की फसल की बिक्री होगी, जमीन का कोई एग्रीमेंट नहीं होगा। किसानों ने डर व्यक्त किया कि विवाद की स्थिति में कोर्ट का कोई प्रावधान नहीं किया गया है। सरकार ने उनके डर को दूर करते हुए कहा कि सिविल कोर्ट जाने का अधिकार देंगे, फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाएंगे।
अब इसके बाद किसान प्रदर्शनरत संगठन कह रहे हैं प्रस्ताव मंजूर नहीं, सरकार संवाद को प्राथमिकता देते हुए कह रही है – कोई और समस्या हो तो बताइए। अब किसान संगठन मांग कर रहे हैं कि बिल वापस लो …!
सम्प्रति कहां क्या हो रहा है, कुछ ना उसको ज्ञान है
वायु कैसी चल रही, इसका न कुछ भी ध्यान है
राष्ट्रकवि मैथलीशरण गुप्त ने किसानों के मनोभाव को समझते हुए यह पक्तियां लिखी थीं। ये पंक्तियां आज कुछ ज्यादा ही प्रासंगिक हो गई हैं।
किसान बहुत भोले-भाले होते हैं, दूसरों के प्रति भी उनकी दृष्टि बहुत सरल-सहज होती है। शायद इसी कारण से किसानों के इस आंदोलन में अराजकतावादियों ने घुसपैठ कर दी है। अराजक शक्तियों का उद्देश्य स्पष्ट है – देश में अशांति और अराजकता का माहौल स्थापित करना। दुःखद है – किसानों को इस साजिश का कोई भान नहीं है, अशान्ति के अंदेशे का कोई ध्यान नहीं है।
खुफिया सूत्रों के अनुसार किसान आंदोलन से जुड़ी एक रिपोर्ट सरकार को भेजी गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि अल्ट्रा-लेफ्ट नेताओं और प्रो-लेफ्ट विंग के चरमपंथी तत्वों ने किसानों के आंदोलन को हाईजैक कर लिया है। विश्वसनीय खुफिया इनपुट है कि ये तत्व किसानों को हिंसा, आगजनी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के लिए उकसाने की योजना बना रहे हैं।
अराजक वामपंथी-इस्लामी गठजोड़ के कारण देश में आंतरिक असुरक्षा का माहौल बनने का अंदेशा है। दिल्ली की सीमा पर भारतीय किसान यूनियन (उगराहा) ने दिल्ली दंगे के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम के साथ-साथ अर्बन नक्सल सुधा भारद्वाज, गौतम नवलखा, वर्नोन गोंसाल्वेस, अरुण फरेरा और वरवरा राव को रिहा करने की मांग की है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस आंदोलनकारी किसान संघ ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस समारोह में कम से कम 20 व्यक्तियों को रिहा करने की मांग की, जिन्हें दिल्ली दंगे और भीमा कोरेगांव हिंसा में उनकी कथित भूमिका पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत जेल में डाला गया है।
ये लोग पिछले वर्ष दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगे के आरोपी की रिहाई की मांग कर रहे हैं, उनके मानवाधिकार की बात कर रहे हैं। नक्सल-आतंकी विचारों के पोषक एक किसान संगठन का कहना है कि ये सभी मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं और उनको सलाखों के पीछे से बाहर करवाना उनके संगठन का लक्ष्य है।
यह देश की सज्जन शक्ति के लिए खुली चुनौती के समान है। एक तरफ देश को विभाजित करने की मंशा पालने वाले लोगों के समर्थन में दिल्ली की सड़कों पर तख्तियां लहराई जाती हैं, दूसरी ओर देश को अखंड और अक्षुण्ण बनाए रखने वाली सज्जन शक्तियां अपने धैर्य का परिचय दे रही हैं।
यह विचार करने योग्य है कि आज भारतीय समाज के सामने ठीक वैसी ही परिस्थिति है, जैसी नागरिकता संशोधन कानून के समय थी। यह समझने की जरूरत है कि किसान आंदोलन की आड़ में अराजकता पैदा करने की मंशा रखने वाले ये लोग कौन हैं? आपने नागरिकता संशोधन कानून के वक्त भी देखा था, जब इन विभाजनकारी शक्तियों ने समाज में भय और भ्रम पैदा करने की कोशिश की थी।
ठीक वैसे ही कृषि कानूनों से न्यूनतम समर्थन मूल्य और मंडी की व्यवस्था पर कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन इन कानूनों को उनके विरुद्ध ही बताने की कोशिश की जा रही है। अब किसान संगठनों ने यह घोषणा कर दी है, सरकार से कोई वार्तालाप नहीं होगा, कोई विमर्श- संवाद नहीं होगा। आंदोलनकारियों ने सरकार के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है, आंदोलन को तेज करने का फैसला किया है। संगठनों ने संवाद का अंत कर दिया है, विषय विवाद की तरफ बढ़ रहा है। (विश्व संवाद केंद्र सेवा)
जल संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में विशिष्ट कार्य कर रहे व्यक्तियों और संगठनों को प्रोत्साहन और मान्यता देने के लिए भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के जल संसाधन, नदी विकास तथा गंगा संरक्षण विभाग ने वर्ष 2020 के राष्ट्रीय जल पुरस्कारों के लिए प्रविष्टिया आमंत्रित की हैं।
इन श्रेणियों में मिलेंगे पुरस्कार
जल शक्ति मंत्रालय के अनुसार ग्यारह श्रेणियों में कुल 52 पुरस्कार दिए जाएंगे। ये श्रेणियां हैं – श्रेष्ठ राज्य, श्रेष्ठ जिला, श्रेष्ठ ग्राम पंचायत, श्रेष्ठ शहरी स्थानीय निकाय, श्रेष्ठ मीडिया (प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक), श्रेष्ठ विद्यालय, श्रेष्ठ संस्थान/रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन/परिसर उपयोग के लिए धार्मिक संगठन, श्रेष्ठ उद्योग, श्रेष्ठ एनजीओ, श्रेष्ठ उपयोगकर्ता एसोसिएशन तथा सीएसआर गतिविधियों के लिए श्रेष्ठ उद्योग।
प्रथम पुरस्कार में मिलेंगे 2 लाख रूपये
श्रेष्ठ जिला तथा श्रेष्ठ ग्राम पंचायत श्रेणी में उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम और उत्तर-पूर्व को क्षेत्रवार पुरस्कार दिए जाएंगे। श्रेष्ठ राज्य तथा श्रेष्ठ जिला पुरस्कारों के अतिरिक्त शेष 9 श्रेणियों के लिए प्रथम, द्वितीय तथा तृतीय पुरस्कार विजेताओं को क्रमशः 2 लाख रुपये, 1.5 लाख रुपये तथा 1 लाख रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा।
10 फरवरी तक कर सकते हैं आवेदन
प्रविष्टियां प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 10 फरवरी, 2021 है। आवेदन MyGov प्लेटफॉर्म के माध्यम से https://mygov.in पर या केन्द्रीय भू-जल बोर्ड (Central Ground Water Board, CGWB) को nationalwaterawards@gmail.com पर भेजे जा सकते हैं। केवल ऑनलाइन आवेदनों पर ही विचार किया जाएगा। पुरस्कारों के लिए विस्तृत गाइड लाइन यहां देखी जा सकती हैं।
जल संसाधनों का बेहत्तर प्रबंधन है उद्देश्य
पुरस्कारों का उद्देश्य गैर-सरकारी संगठनों, ग्राम पंचायतों, शहरी स्थानीय निकायों, जल उपयोगकर्ता एसोसिएशनों, संस्थानों, कार्पोरेट, व्यक्तियों सहित सभी हितधारकों को प्रोत्साहित करना है, ताकि वर्षा जल संरक्षण और कृत्रिम रिचार्च द्वारा भू-जल की स्थिति मजबूत बनाने के नवाचारी व्यवहार अपनाए जा सकें। नवाचारी व्यवहारों में जल उपयोग क्षमता, रिसाईक्लिंग तथा जल का दोबारा उपयोग है। इसका उद्देश्य फोकस वाले क्षेत्रों में लोगों की भागीदारी के माध्यम से जागरूकता पैदा करना है जिससे स्थायी जल संसाधन प्रबंधन हो सके।
