मुख्यमंत्री धामी ने कहा — सरकार वनकर्मियों के कठिन हालात और सेवाओं को समझती है, अब दूरस्थ चौकियों पर कार्यरत कर्मचारियों को मिलेगी राहत
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार अपने कर्मचारियों के कल्याण के लिए निरंतर संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाए हुए है। इसी क्रम में वन विभाग के अंतर्गत दुर्गम क्षेत्रों में तैनात वन कर्मियों को अब आवासीय भत्ता दिए जाने का निर्णय लिया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि “हमारे वनकर्मी प्रदेश की बहुमूल्य वन संपदा और वन्यजीवों की रक्षा में दिन-रात कठिन परिस्थितियों में कार्य करते हैं। दूरस्थ और दुर्गम चौकियों पर तैनाती के दौरान उन्हें अपने परिवार से दूर रहना पड़ता है। ऐसे में उनके परिवार के लिए अलग से आवास व्यवस्था करना उनके लिए एक बड़ी चुनौती होती है। सरकार ने इस कठिनाई को समझते हुए यह निर्णय लिया है कि दुर्गम क्षेत्रों में जहां स्वास्थ्य एवं शिक्षा जैसी सामान्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, वहां तैनात वन कर्मियों को आवासीय भत्ता अनुमन्य किया जाएगा।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय उन वनकर्मियों के लिए राहत लेकर आएगा जो जंगलों की सुरक्षा में लगातार जुटे रहते हैं। शासन द्वारा वित्त विभाग की सहमति से ऐसे दुर्गम क्षेत्रों की पहचान की जाएगी, जहां यह सुविधा लागू होगी।
वन विभाग के कर्मचारियों ने इस निर्णय पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और वन मंत्री सुबोध उनियाल का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि सरकार के इस निर्णय से उन्हें अपने परिवारों की देखभाल करने में सहूलियत मिलेगी और वे राज्य की वन संपदा की रक्षा में और अधिक मनोयोग से कार्य कर सकेंगे।
हाइब्रिड क्लासरूम, ई-विद्या चैनल और वर्चुअल लर्निंग ऐप के जरिए हर गांव तक पहुँचेगी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को राजीव गांधी नवोदय विद्यालय, ननूरखेड़ा (देहरादून) में आयोजित कार्यक्रम में समग्र शिक्षा उत्तराखंड द्वारा विद्यालयी शिक्षा में आईसीटी योजना के तहत 840 राजकीय विद्यालयों में हाइब्रिड मोड में संचालित वर्चुअल एवं स्मार्ट कक्षाओं के केन्द्रीयकृत स्टूडियो का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से वर्चुअल माध्यम से संवाद भी किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की यह ऐतिहासिक पहल प्रदेश के बच्चों के भविष्य को उज्ज्वल बनाएगी। उन्होंने कहा कि आधुनिक युग में शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं रही, बल्कि डिजिटल तकनीक, वर्चुअल प्लेटफॉर्म और स्मार्ट कक्षाओं के माध्यम से अनेक नई संभावनाएँ खुली हैं। इन नवाचारों से पाठ्यक्रम अधिक रोचक और सरल हुआ है तथा दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थी भी विशेषज्ञ शिक्षकों से सीधा संवाद कर पा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में 226 विद्यालयों को पीएम श्री विद्यालय के रूप में स्थापित किया गया है और 500 विद्यालयों में वर्चुअल कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। अब विद्यार्थी उत्तराखंड वर्चुअल लर्निंग एप्लीकेशन के माध्यम से घर बैठे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे और स्वयं मूल्यांकन भी कर पाएंगे। इसके माध्यम से उन्हें देश व राज्य के श्रेष्ठ शिक्षकों से सीखने का अवसर मिलेगा। साथ ही राज्य सरकार दूरस्थ क्षेत्रों तक शिक्षा पहुँचाने के लिए 5 पीएम ई-विद्या चैनल भी संचालित कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कक्षा 6 से 12 तक के मेधावी छात्र-छात्राओं को मुख्यमंत्री मेधावी छात्र प्रोत्साहन छात्रवृत्ति योजना के तहत लाभ दिया जा रहा है। प्रत्येक विकासखंड के 10वीं और 12वीं के मेधावी छात्रों को भारत भ्रमण पर भेजा जा रहा है। राज्य के माध्यमिक विद्यालयों में 8 ट्रेडों में व्यावसायिक शिक्षा प्रारंभ की गई है, जिससे 42 हजार से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं। पहली बार 12वीं के व्यावसायिक छात्रों के लिए रोजगार मेलों का आयोजन हुआ, जिनसे 146 विद्यार्थियों का चयन प्रतिष्ठित कंपनियों में हुआ है। इस पहल की सराहना केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने भी की है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है, जहाँ राज्य पाठ्यचर्या रूपरेखा (State Curriculum Framework) तैयार की गई है। विद्यालयों में ‘बस्तारहित दिवस’ को शामिल किया गया है तथा स्थानीय भाषा एवं संस्कृति के संरक्षण के लिए गढ़वाली, कुमाऊँनी और जौनसारी भाषाओं में पुस्तकें तैयार की गई हैं। थारू, बोक्सा और रवांल्टी भाषाओं में शब्दकोश भी बनाए जा रहे हैं। ‘हमारी विरासत’ पुस्तक के माध्यम से कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों को भारत की संस्कृति, लोक परंपरा और महान विभूतियों से परिचित कराया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लागू राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 शिक्षा क्षेत्र में परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त कर रही है। इसके तहत आईसीटी योजना के माध्यम से विद्यार्थियों को डिजिटल शिक्षण संसाधनों और वर्चुअल कक्षाओं से जोड़ा गया है। उत्तराखंड ने देश में सर्वप्रथम इस नीति को लागू किया और वर्ष 2022 में ‘बाल वाटिका’ की शुरुआत की। राज्य के सभी सरकारी विद्यालयों में एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकें अनिवार्य की गई हैं और कक्षा 1 से 12 तक के विद्यार्थियों को निःशुल्क पुस्तकें उपलब्ध कराई जा रही हैं।
इस अवसर पर शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत, विधायक उमेश शर्मा ‘काऊ’, अपर सचिव शिक्षा रंजना राजगुरु, महानिदेशक शिक्षा दीप्ति सिंह, शिक्षा विभाग के अधिकारी तथा वर्चुअल माध्यम से राज्यभर के विद्यालयों के विद्यार्थी और अन्य लोग उपस्थित रहे।
जन्म से ही बेटियों का सशक्तिकरण जरूरी- रेखा आर्या
प्रदेश के सभी 13 जनपदों और ब्लॉकों की बोर्ड टॉपर्स सम्मानित
देहरादून। शनिवार को मुख्यमंत्री और महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री ने पूरे प्रदेश के सभी जिलों से आई 2024 और 2025 की बोर्ड परीक्षाओं में अव्वल रही 326 मेधावी बालिकाओं को पुरस्कार स्वरूप मोबाइल फोन भेंट किया। मुख्य सेवक सदन, गढ़ी कैंट में अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर ‘बालिका शिक्षा प्रोत्साहन कार्यक्रम’ का भव्य आयोजन किया गया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि साल 2013 में शुरू किए गए इस कार्यक्रम के तहत अब तक प्रदेश की कुल 2029 मेधावी बालिकाएं तकनीकी रूप से सशक्त बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार बालिकाओं, महिलाओं को आर्थिक व सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयास में जुटी है।

महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने डॉ. भीमराव अंबेडकर के उस विचार का उल्लेख किया, जिसमें समाज की प्रगति को महिलाओं की प्रगति से मापने पर बल दिया गया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार बेटियों के सशक्तिकरण और आर्थिक आजादी के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने प्रदेश की बेटियों को चुनौतियों का सामना करते हुए खुद अपने रास्ते गढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सभी बालिकाओं को रोटी कपड़ा और मकान जैसी आवश्यकताओं के लिए आत्मनिर्भर बनना होगा।
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि प्रदेश में लैंगिक असमानता की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। प्रदेश सरकार ने सरकारी नौकरी में महिलाओं के लिए 30% आरक्षण की व्यवस्था कर उनके लिए अवसर बढ़ाए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जिसने समान नागरिक संहिता लागू करके हर महिला को बराबरी का अधिकार दिलाने का मार्ग प्रशस्त किया है।
इस अवसर पर विधायक सविता कपूर, राज्य मंत्री प्रताप सिंह पवार, उपनिदेशक विक्रम सिंह, परियोजना अधिकारी मोहित चौधरी, नीतू फुलेरा एवं अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।
सतपुली (पौड़ी)। प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और चौबट्टाखाल विधायक सतपाल महाराज ने जिलाधिकारी पौड़ी और वन विभाग के अधिकारियों से बात कर एकेश्वर व पोखड़ा ब्लॉक के गुलदार प्रभावित गांव में गुलदार को पकड़ने के लिए पर्याप्त संख्या में तत्काल पिंजरे लगाने के निर्देश दिए हैं।
प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और चौबट्टाखाल विधायक सतपाल महाराज ने शनिवार को जिलाधिकारी पौड़ी और वन विभाग के अधिकारियों से बात कर पोखड़ा विकासखण्ड के डयूला, देवकुंडई एवं आसपास के इलाकों और ऐकेश्वर ब्लॉक के गांवों में गुलदार को पकड़ने के लिए प्रभावित गांव में पर्याप्त संख्या में तत्काल पिंजरे लगाने के निर्देश दिए हैं।
क्षेत्रीय विधायक महाराज का कहना है कि वन विभाग स्थिति पर पूरी तरह से नजर रखे हुए है और गुलदार को ट्रेंकुलाइज करने के लिए वन विभाग के कार्मिकों को ट्रेंकुलाइजर गन दी गई हैं, गश्त बढ़ा दी गई है और गुलदार की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कैमरे भी लगाये जा रहे हैं। उन्होंने लोगों से सतर्क रहने को कहा है।
राज्यपाल और CDS ने किया वीरों का सम्मान
देहरादून। मुख्यालय उत्तराखंड सब एरिया के तत्वावधान में शनिवार को जसवंत सिंह ग्राउंड, गढ़ी कैंट, देहरादून में “देवभूमि मेगा पूर्व सैनिक रैली” का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान सहित अनेक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। रैली में प्रदेशभर से आए 5000 से अधिक पूर्व सैनिकों ने हिस्सा लिया।
राज्यपाल ने पूर्व सैनिकों को बताया ‘राष्ट्रीय संपत्ति’
अपने संबोधन में राज्यपाल गुरमीत सिंह ने पूर्व सैनिकों को “राष्ट्रीय संपत्ति” बताते हुए उनके योगदान को नमन किया। उन्होंने हाल ही में धराली में आई भीषण आपदा में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति शोक प्रकट किया और शहीद 14 राजपुताना राइफल्स के जवानों को श्रद्धांजलि दी। राज्यपाल ने कहा कि, “भारतीय सेना के वीर जवानों ने कठिन परिस्थितियों में भी अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया है।” उन्होंने सेना और राज्य प्रशासन के संयुक्त प्रयासों की सराहना की, जिनकी बदौलत आपदा प्रभावित क्षेत्रों में शीघ्र सामान्य स्थिति बहाल हुई।
राज्यपाल ने कहा कि केंद्र सरकार के कुशल नेतृत्व में उत्तराखंड आने वाले समय में एक सशक्त व आपदा-प्रबंधन में सक्षम राज्य बनकर उभरेगा। उन्होंने पूर्व सैनिकों, सैनिकों, नौसैनिकों और वायु सैनिकों के समर्पण और देशभक्ति को नमन करते हुए शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
वीर नारियों और विकलांग पूर्व सैनिकों को किया गया सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने “वॉर वूंडेड फाउंडेशन” के अध्यक्ष ले. जनरल असित मिस्त्री (से.) और ब्रिगेडियर हरचरण सिंह (से.) की टीम की सराहना की। इस अवसर पर 14 विकलांग पूर्व सैनिकों को मोटराइज्ड स्कूटर प्रदान किए गए।
इसके साथ ही 20 वीर नारियों को भी सम्मानित किया गया और उनके बलिदान को नमन किया गया। राज्यपाल ने “वेटरन्स अचीवर्स अवार्ड” पाने वाले विजेताओं को बधाई देते हुए उन्हें समाज और पूर्व सैनिक कल्याण के लिए निरंतर कार्य करते रहने का आह्वान किया।
CDS जनरल अनिल चौहान ने की पूर्व सैनिकों की सराहना
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने कहा कि उत्तराखंड “वीरों की भूमि” है, जिसने हर युद्ध और संकट में राष्ट्र का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि भारतीय सशस्त्र सेनाएं तेजी से आधुनिक तकनीक और युद्ध प्रणाली की ओर अग्रसर हैं। CDS ने कहा, “हम एक शांतिप्रिय राष्ट्र हैं, लेकिन अपनी संप्रभुता पर किसी भी प्रकार का खतरा बर्दाश्त नहीं करेंगे।” उन्होंने पूर्व सैनिकों की निःस्वार्थ सेवा, अनुशासन और देशभक्ति की सराहना करते हुए युवाओं से उनसे प्रेरणा लेने की अपील की।
देहरादून में बनेगा ‘इंटीग्रेटेड वेटरन्स वेलनेस एंड सेवा केंद्र’
CDS ने घोषणा की कि देहरादून मिलिट्री स्टेशन में “इंटीग्रेटेड वेटरन्स वेलनेस एंड सेवा केंद्र” स्थापित किया जाएगा। यह केंद्र पूर्णतः तकनीक-आधारित होगा और पूर्व सैनिकों की सुविधा एवं कल्याण के लिए समर्पित रहेगा। उन्होंने भरोसा जताया कि मुख्यालय उत्तराखंड सब एरिया इस परियोजना को समयबद्ध रूप से पूर्ण करेगा।
5000 से अधिक पूर्व सैनिक हुए शामिल, रोजगार और स्वास्थ्य सुविधाएं भी उपलब्ध
इस मेगा रैली में 21 कंपनियों द्वारा जॉब फेयर, बैंकिंग सेवाएं, राज्य सरकार की योजनाओं से संबंधित स्टॉल और निःशुल्क चिकित्सा शिविर भी लगाए गए।
कार्यक्रम में सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी, ले. जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता (जीओसी-इन-सी सेंट्रल कमांड), ले. जनरल डी.जी. मिश्रा (जीओसी उत्तर भारत एरिया), और मेजर जनरल एम.पी.एस. गिल (जीओसी उत्तराखंड सब एरिया) सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
कार्यक्रम का समापन सम्मान और संकल्प के साथ
रैली के अंत में राज्यपाल और CDS ने पूर्व सैनिकों व वीर नारियों से मुलाकात की और केंद्र व राज्य सरकार की ओर से उनके निरंतर समर्थन और सेवा के संकल्प को दोहराया। रैली का माहौल गर्व, देशभक्ति और प्रेरणा से ओतप्रोत रहा, जिसने देवभूमि उत्तराखंड की वीर परंपरा को एक बार फिर जीवंत कर दिया।
पलटन बाजार और प्रमुख मार्गों में वाहनों का प्रवेश रहेगा प्रतिबंधित
देहरादून। आगामी धनतेरस, दीपावली, भैया दूज और गोवर्धन पूजा को ध्यान में रखते हुए, देहरादून पुलिस और प्रशासन ने शहर की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए विशेष तैयारियां शुरू कर दी हैं। जाम से बचाव और त्योहारों के दौरान सुविधाजनक आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए नया ट्रैफिक प्लान जारी किया गया है।
शहर के प्रमुख बाजारों और मार्गों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए जा रहे हैं। पुलिस के अलावा होमगार्ड और पीआरडी की टीम भी निगरानी में सहयोग करेगी। शिमला बाईपास और हरिद्वार बाईपास पर ट्रैफिक पुलिस अधिकारी लगातार पैट्रोलिंग करेंगे और जरूरत पड़ने पर डायवर्जन या प्रतिबंध लागू करेंगे।
बाजारों में प्रवेश और ट्रैफिक नियम
पलटन बाजार सहित अन्य व्यस्त बाजारों में वाहनों का प्रवेश सीमित रहेगा। लोडिंग वाहन सुबह 10 बजे तक माल पहुंचा सकते हैं, इसके बाद केवल राजा रोड से वन-वे व्यवस्था के तहत ही प्रवेश मिलेगा। व्यापारियों के वाहनों को टोकन के आधार पर ही अनुमति दी जाएगी। धामावाला बाजार, मच्छी बाजार और पीपल मंडी में केवल पैदल यात्री ही प्रवेश कर सकेंगे।
विक्रम/मैजिक रूट और सिटी बस व्यवस्था
राजपुर रोड, रायपुर रोड और रिस्पना क्षेत्र में विक्रम/मैजिक वाहनों के लिए अलग-अलग रूट निर्धारित किए गए हैं। सिटी बसों के लिए सवारी चढ़ाने-उतारने के नए प्वाइंट बनाए गए हैं, जैसे ऑरियंट चौक और रेंजर्स ग्राउंड।
डायवर्जन और ट्रैफिक नियंत्रण
भीड़ और ट्रैफिक दबाव के समय कई डायवर्जन पॉइंट बनाए गए हैं। सर्वे चौक, घंटाघर, धर्मपुर और नेहरू कॉलोनी तिराहा पर यातायात को सुचारू बनाए रखने के लिए वैकल्पिक मार्ग तय किए गए हैं।
एसएसपी अजय सिंह ने खुद जाकर घंटाघर, पलटन बाजार और लक्खी बाग क्षेत्रों में तैयारियों की समीक्षा की और सभी विभागों को सुरक्षा और यातायात नियंत्रण के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।
हरिद्वार केंद्र से हुआ था परीक्षा का पेपर लीक, सरकार ने परीक्षा रद्द की घोषणा की
देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने स्नातक स्तरीय परीक्षा रद्द करने का बड़ा फैसला लिया है। यह कदम पेपर लीक प्रकरण के बाद उठाया गया है। जांच के लिए गठित एकल सदस्यीय आयोग ने अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सौंप दी, जिसके आधार पर यह निर्णय लिया गया। 21 सितंबर को प्रदेश में आयोजित इस परीक्षा में करीब 1 लाख 5 हजार अभ्यर्थी शामिल हुए थे। हालांकि, हरिद्वार के एक परीक्षा केंद्र से पेपर के तीन पेज मोबाइल के माध्यम से बाहर निकल गए थे और परीक्षा के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल हो गए थे।
युवाओं का आंदोलन और सरकार की प्रतिक्रिया
पेपर लीक के विरोध में उत्तराखंड बेरोजगार संघ के तहत युवाओं ने धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री धामी खुद आंदोलन स्थल पर पहुंचे और युवाओं को सुनवाई और कार्रवाई का आश्वासन दिया। छात्रों ने सरकार को दस दिन का अल्टीमेटम दिया था, जो आज समाप्त हो रहा था। जांच आयोग ने सभी जनसंवाद और घटनाओं का बारीकी से अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी, जिसके बाद परीक्षा को रद्द करने का निर्णय लिया गया।
छात्रहित में उठाया गया कदम
सीएम धामी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी का गठन किया था और उच्च न्यायालय से सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी को अध्यक्ष बनाकर एकल सदस्यीय जांच आयोग बनाया था। भाजपा विधायक प्रतिनिधिमंडल ने भी परीक्षा को छात्रहित में रद्द कर दोबारा कराने की मांग की थी। इस फैसले के बाद अब प्रदेश में स्नातक स्तरीय परीक्षा की प्रक्रिया नवीन सत्र के अनुसार दोबारा आयोजित की जाएगी।
बिना स्वीकृति चल रहे बहुमंज़िला व्यवसायिक और आवासीय भवनों पर गिरी गाज
ऋषिकेश। देहरादून के सुनियोजित विकास और भवन निर्माण मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एम.डी.डी.ए.) ने नियम विरुद्ध निर्माणों के विरुद्ध अपनी सख़्त नीति पर अमल तेज़ कर दिया है। इसी क्रम में प्राधिकरण द्वारा ऋषिकेश क्षेत्र में बड़े पैमाने पर कार्रवाई की गई, जिसमें विभिन्न स्थानों पर बिना स्वीकृति के किए गए बहुमंज़िला व्यवसायिक एवं आवासीय निर्माणों को नियमानुसार सील किया गया।
यह कार्रवाई उन सभी निर्माणकर्ताओं के विरुद्ध की गई, जिन्होंने बिना एम.डी.डी.ए. की स्वीकृति के बहुमंज़िला निर्माण कार्य प्रारंभ किए थे। प्राधिकरण की यह मुहिम शहर में अवैध निर्माण की बढ़ती प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने तथा नियोजित विकास की दिशा में एक ठोस कदम है।
प्राधिकरण की संयुक्त प्रवर्तन टीम ने पुलिस बल की उपस्थिति में तुलसी देवी (विपरीत पोस्ट ऑफिस, बनखण्डी, ऋषिकेश), हरजीत सिंह (साईं विहार कॉलोनी, निकट सब्ज़ी मंडी), जयराम सेमवाल (आमबाग लेन नं. 01, विस्थापित, विपरीत THDC कार्यालय), लालमणी भट्ट (आमबाग लेन नं. 01, विस्थापित), रवी गुप्ता (आमबाग लेन नं. 02, विस्थापित), विक्रम सिंह बिष्ट (आमबाग लेन नं. 02, विस्थापित), प्रमोद सेमवाल (आमबाग लेन नं. 02, विस्थापित), जय चौहान (निर्मल बाग लेन नं. 10, ब्लॉक-‘बी’, विस्थापित), सगुन शर्मा (निर्मल बाग लेन नं. 11, ब्लॉक-‘बी’, विस्थापित) तथा प्रमोद चौहान (विपरीत गंगा फार्मेसी, निकट इंडियन ऑयल पंप, स्यामपुर, ऋषिकेश) द्वारा किए गए अवैध निर्माणों पर नियमानुसार सीलिंग की कार्रवाई की।
इस कार्यवाही में मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण की संयुक्त प्रवर्तन टीम तथा स्थानीय पुलिस बल की सक्रिय भागीदारी रही।
सचिव, मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण का बयान
सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि प्राधिकरण क्षेत्र में बिना स्वीकृति के किसी भी प्रकार का निर्माण सहन नहीं किया जाएगा। आमजन से अपेक्षा है कि वे भवन निर्माण से पूर्व एम.डी.डी.ए. से नियमानुसार स्वीकृति अवश्य प्राप्त करें। अवैध निर्माण करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही लगातार जारी रहेगी।
उपाध्यक्ष, मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण का बयान
उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि ऋषिकेश सहित पूरे प्राधिकरण क्षेत्र में नियमविरुद्ध निर्माणों की पहचान कर उन्हें हटाने का अभियान जारी है। भविष्य में ऐसे मामलों में सख्त कार्यवाही की जाएगी। प्राधिकरण शहर के सुनियोजित एवं सुरक्षित विकास के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है।
मरीजों से ली सेवाओं की जानकारी, अस्पताल की व्यवस्था सुधारने के दिए निर्देश
डॉ. राजेश कुमार बोले— मरीजों को समयबद्ध और बेहतर इलाज देना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता
श्रीनगर। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर जनपद रुद्रप्रयाग के प्रभारी सचिव एवं स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार जनपद प्रवास पर पहुंचे। जनपद प्रवास के दौरान डॉ. राजेश कुमार ने मार्ग में पड़ने वाले श्रीनगर मेडिकल कॉलेज का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कॉलेज परिसर, चिकित्सालय भवन, वार्डों और विभिन्न विभागों का भ्रमण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने मरीजों से मुलाकात कर अस्पताल में दी जा रही सुविधाओं और उपचार की गुणवत्ता की जानकारी ली।
स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास
निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य सचिव ने सीटी स्कैन, एमआरआई और कैथ लैब की कार्यप्रणाली का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि कैथ लैब का संचालन नियमित रूप से हो, इसके लिए विभाग निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मरीजों को बेहतर और समयबद्ध चिकित्सा सेवाएं मिलें, यह सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं समय-समय पर अस्पतालों की व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हैं और प्रदेशवासियों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए हर आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर रैली को किया फ्लैग ऑफ
अपने श्रीनगर प्रवास के दौरान स्वास्थ्य सचिव ने विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस (World Mental Health Day) के अवसर पर मेडिकल कॉलेज परिसर से आयोजित जागरूकता रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि मानसिक स्वास्थ्य, शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है और समाज के हर वर्ग को इसके प्रति जागरूक होने की आवश्यकता है। डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि तनावमुक्त जीवन, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और सकारात्मक सोच मानसिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक तत्व हैं। उन्होंने मेडिकल कॉलेज प्रशासन से कहा कि मानसिक स्वास्थ्य पर जागरूकता बढ़ाने के लिए निरंतर कैंप और जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
नए पीआरओ सेंटर का उद्घाटन एवं स्वास्थ्य शिविर लगाने के निर्देश
इस दौरान स्वास्थ्य सचिव ने मेडिकल कॉलेज परिसर में एक नए पीआरओ (Public Relations Office) सेंटर का भी उद्घाटन किया। उन्होंने बताया कि यह केंद्र मरीजों और उनके परिजनों की सुविधा के लिए कार्य करेगा, जिससे उन्हें जानकारी प्राप्त करने और समस्याओं के समाधान में मदद मिल सकेगी। उन्होंने कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना को निर्देश दिए कि ओपीडी सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जाए ताकि ज्यादा से ज्यादा मरीजों को लाभ मिल सके। साथ ही उन्होंने मेडिकल कॉलेज टीम को ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में नियमित स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए, ताकि ग्रामीण जनता को भी समय पर स्वास्थ्य जांच और परामर्श मिल सके।
कफ सिरप प्रकरण पर सख्त रुख–कार्रवाई जारी
स्वास्थ्य सचिव डॉ. राजेश कुमार ने हाल ही में चर्चा में आए कफ सिरप प्रकरण पर भी स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार इस मामले को लेकर बेहद गंभीर है। उन्होंने कहा कि ड्रग कंट्रोलर के नेतृत्व में राज्यभर में औषधि विभाग की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं और संदिग्ध दवाओं के सैंपल जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सभी जनपदों में एसओपी (Standard Operating Procedure) का सख्ती से पालन कराया जा रहा है। जो मेडिकल स्टोर नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, उनके लाइसेंस निरस्त किए जा रहे हैं और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा, “हम बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेंगे।”
स्वास्थ्य मंत्री का विशेष फोकस श्रीनगर मेडिकल कॉलेज पर
स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि श्रीनगर मेडिकल कॉलेज स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत का विधानसभा क्षेत्र होने के कारण स्वयं मंत्री का इस संस्थान पर विशेष फोकस रहता है। लगातार इंफ्रास्ट्रक्चर, मशीनरी और मानव संसाधन की गुणवत्ता में सुधार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि श्रीनगर मेडिकल कॉलेज को पहाड़ी क्षेत्र का एक मॉडल मेडिकल संस्थान बनाया जाए।
मुख्यमंत्री का स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष फोकस
डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के व्यापक सुधार का संकल्प लिया है। मुख्यमंत्री के निर्देशन में ई-संजीवनी, टेलीमेडिसिन, मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं, और जन औषधि केंद्रों के माध्यम से चिकित्सा सेवाओं को गांव-गांव तक पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि उत्तराखंड का प्रत्येक नागरिक गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाए। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग निरंतर नीतिगत सुधारों, अवसंरचना विकास और जनजागरूकता पर बल दे रहा है।
जांच अधिकारी नियुक्त, एक माह में शासन को रिपोर्ट सौंपने के निर्देश
देहरादून। हरिद्वार के ग्राम सराय में नगर निगम द्वारा की गई जमीन खरीद में सामने आए घोटाले को लेकर सरकार ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। तत्कालीन डीएम कर्मेन्द्र सिंह, नगर आयुक्त वरुण चौधरी और एसडीएम अजयवीर सिंह के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं। गृह विभाग ने इसे लेकर आधिकारिक अधिसूचना जारी की है।
प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर एसडीएम अजयवीर सिंह के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है। उन्हें पहले ही निलंबित किया जा चुका है और आरोपपत्र जारी करते हुए अपना पक्ष रखने का मौका भी दिया गया था। 16 सितंबर को उन्होंने लिखित रूप में सभी आरोपों से इंकार किया था।
अब शासन ने निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए अपर सचिव डॉ. आनंद श्रीवास्तव (आईएएस) को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। उन्हें एक माह के भीतर जांच रिपोर्ट शासन को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेन्द्र सिंह और नगर आयुक्त वरुण चौधरी की जांच की जिम्मेदारी सचिव सचिन कुर्वे (आईएएस) को सौंपी गई है।
गौरतलब है कि इस जमीन घोटाले में सरकार पहले ही दो आईएएस और एक पीसीएस अधिकारी सहित 12 अधिकारियों-कर्मचारियों को निलंबित कर चुकी है। बताया जा रहा है कि नगर निगम ने ग्राम सराय में अनुपयुक्त 2.3070 हेक्टेयर जमीन 54 करोड़ रुपये में खरीदी थी, जो कूड़े के ढेर के पास स्थित थी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि “राज्य सरकार भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रही है। शासन व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। कोई भी अधिकारी यदि गलत पाया गया, तो उसके खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।”
