अग्निवीर भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं को मिलेगा सहयोग : धामी
खेल विवि व महिला स्पोर्ट्स कॉलेज की कार्यवाही में तेजी लाएं
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को खेल विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को राज्य में खेल अवसंरचना को सुदृढ़ करने और युवाओं को खेलों के प्रति अधिक प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 38वें राष्ट्रीय खेलों के दौरान तैयार की गई खेल अवसंरचना का नियमित रखरखाव और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए, ताकि राज्य में खेल गतिविधियों को निरंतर गति मिलती रहे।उन्होंने निर्देश दिए कि इन परिसंपत्तियों के अधिकतम उपयोग हेतु राज्यभर में नियमित खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाए।
मुख्यमंत्री ने हल्द्वानी में प्रस्तावित खेल विश्वविद्यालय और लोहाघाट में बनने वाले महिला स्पोर्ट्स कॉलेज की कार्यवाही में तेजी लाने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के शीघ्र क्रियान्वयन से प्रदेश के खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण सुविधाएं मिलेंगी, जिससे राज्य खेल क्षेत्र में नई पहचान बनाएगा।
मुख्यमंत्री ने युवाओं में खेलों के प्रति उत्साह और भागीदारी बढ़ाने के लिए न्याय पंचायत स्तर से लेकर विधायक, सांसद एवं मुख्यमंत्री चैंपियनशिप ट्रॉफी जैसी प्रतियोगिताओं का भव्य आयोजन सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि खेल एवं युवा कल्याण विभाग अग्निवीर भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं को भी आवश्यक सहयोग प्रदान करे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 39वें राष्ट्रीय खेलों के दृष्टिगत प्रदेश के खिलाड़ियों को और बेहतर प्रशिक्षण एवं संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को समयबद्ध रूप से पुरस्कार, छात्रवृत्ति और बीमा सुरक्षा के लाभ दिए जाएं।
उन्होंने कहा कि खेल विभाग को निजी क्षेत्र एवं कॉरपोरेट जगत की भागीदारी से खेल अवसंरचना के विकास पर भी ध्यान देना चाहिए, ताकि खेल सुविधाओं का विस्तार जन-जन तक हो सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुभवी प्रशिक्षकों की नियुक्ति कर खिलाड़ियों को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण प्रदान किया जाए तथा राज्य में विभिन्न खेल अकादमियों की स्थापना से संबंधित कार्यों में तेजी लाई जाए।
उन्होंने कहा कि सरकार का संकल्प प्रदेश में खेल संस्कृति को बढ़ावा देना और युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देना है।
बैठक में खेल मंत्री रेखा आर्या, उत्तराखंड राज्य स्तरीय खेल परिषद के उपाध्यक्ष हेमराज बिष्ट, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, विशेष प्रमुख सचिव खेल अमित सिन्हा, सचिव शैलेश बगोली, निदेशक खेल आशीष चौहान तथा खेल विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
नई दिल्ली/नैनीताल: उत्तराखंड के युवा बेहतर रोजगार की तलाश में अक्सर अपने घर-परिवार और पहाड़ों को छोड़कर बड़े शहरों की ओर जाते हैं। लेकिन कभी-कभी यह संघर्ष उनकी जान तक ले लेता है। ऐसा ही एक दुखद मामला दिल्ली के “टर्निंग पॉइंट” होटल में सामने आया है, जहां नैनीताल जिले के बेतालघाट क्षेत्र के ऊंचाकोट मल्ला गांव निवासी प्रेमचंद पुत्र कुंदन राम की हत्या कर दी गई।
रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रेमचंद दिल्ली में होटल में काम कर रहे थे और अपने परिवार के लिए मेहनत कर रहे थे। रात करीब 1:45 बजे, होटल में उनके और उत्तर प्रदेश के रहने वाले अखिलेश के बीच विवाद हो गया। अचानक गुस्से में आए अखिलेश ने प्रेमचंद के सीने में कई बार चाकू मार दिया। इससे उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गई।
इस घटना ने उनके परिवार पर गहरा शोक छोड़ दिया है। प्रेमचंद की पत्नी और दो छोटे-छोटे बच्चों का जीवन अचानक अंधकार में बदल गया है। परिवार न केवल पिता और पति को खोकर टूट गया है, बल्कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी के लिए संघर्ष करने के लिए मजबूर भी है।
सामाजिक कार्यकर्ता रोशन रतूड़ी ने घटना पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए आरोपी पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा, “उत्तराखंड के एक और होटलियर भाई की दिल्ली में बेरहमी से हत्या की गई। पुलिस प्रशासन द्वारा आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। हमें चाहिए कि ऐसी घटनाओं पर कड़ा कानूनी शिकंजा कसा जाए।”
पुलिस ने बताया कि हत्या का आरोपी गिरफ्तार कर लिया गया है और मामले की जांच जारी है। इस दुखद घटना ने रोजगार की तलाश में जाने वाले युवाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस दौरान पूरे परिवार और समाज से प्रार्थना की जा रही है कि भगवान दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और परिवार को यह अपार दुख सहने की शक्ति दें।
देहरादून। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) ने दीपावली के अवसर पर राज्य के आठ प्रमुख शहरों में हवा और ध्वनि प्रदूषण की निगरानी की तैयारी पूरी कर ली है। यह विशेष अभियान 13 अक्टूबर से शुरू होकर 15 दिन तक चलेगा, जैसा कि हर साल दीपावली के समय किया जाता है।
इस दौरान देहरादून, ऋषिकेश, टिहरी, हरिद्वार, काशीपुर, रुद्रपुर, हल्द्वानी और नैनीताल में हवा की गुणवत्ता और ध्वनि स्तर की जांच की जाएगी।
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देहरादून: घंटाघर और नेहरू कॉलोनी
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ऋषिकेश: नगर निगम परिसर
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टिहरी: डीएम कार्यालय और नगर पालिका परिषद परिसर
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हरिद्वार: ऋषिकुल आयुर्वेदिक कॉलेज
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काशीपुर: एलडी भट्ट उप जिला अस्पताल
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रुद्रपुर: नगर निगम परिसर
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हल्द्वानी: जल संस्थान कार्यालय
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नैनीताल: नगर पालिका परिषद परिसर
पीसीबी अधिकारियों के अनुसार, दीपावली के दौरान पटाखों और अन्य उत्सवों के कारण हवा और ध्वनि प्रदूषण में काफी वृद्धि होती है। इसलिए मानीटरिंग के लिए लगे स्टेशन के माध्यम से जांच होगी।
देहरादून। उत्तराखंड में वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर लगातार प्रयासों के बावजूद हाथियों की अप्राकृतिक मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा है। पिछले 25 वर्षों में प्रदेश में 167 हाथियों की मौत अप्राकृतिक कारणों से दर्ज की गई है, जो चिंताजनक स्थिति को दर्शाती है। हाल ही में हरिद्वार वन प्रभाग में तीन हाथियों की मौत ने एक बार फिर वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। इनमें एक हाथी की मौत करंट लगने से, एक की बीमारी से, जबकि तीसरे की मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका।
वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2001 से अक्टूबर 2025 तक कुल 538 हाथियों की मौत दर्ज की गई। इनमें से 52 की मौत बिजली के करंट, 32 की ट्रेन से टकराने, 71 की दुर्घटनाओं, 2 की सड़क हादसों, 1 की जहर से, जबकि 9 की शिकार से हुई। इसके अलावा 79 हाथियों की मौत का कारण अब तक अज्ञात है। वहीं 102 हाथी आपसी संघर्ष में मारे गए और 227 की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई।
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि मानव बस्तियों के तेजी से विस्तार और जंगलों में घटती सुरक्षित जगहें इन घटनाओं का प्रमुख कारण हैं। राज्य में हाथियों की आबादी बढ़कर 2001 में 1507 से 2020 में 2026 तक पहुंच गई, जिससे मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं भी बढ़ी हैं। तराई केंद्रीय, हरिद्वार, रामनगर और तराई पूर्वी वन प्रभागों से सटे ग्रामीण इलाकों में अक्सर हाथियों का प्रवेश देखा जा रहा है।
वन संरक्षक राजीव धीमान ने बताया कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए विभाग लगातार प्रयासरत है। रेलवे ट्रैक के आसपास पेट्रोलिंग बढ़ाई गई है और ट्रेन की गति सीमित करने के उपाय किए गए हैं। वहीं, हरिद्वार वन प्रभाग के डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध के अनुसार, हाथियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए खेताें में लगी 40 अवैध करंट युक्त तारबाड़ें हटाई गईं, जिनसे हाथियों के लिए खतरा था। इस संबंध में एक मुकदमा भी दर्ज किया गया है।
वन विभाग का कहना है कि जनजागरूकता और ग्रामीणों के सहयोग से ही मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम किया जा सकता है। विभाग आने वाले समय में निगरानी और रोकथाम के लिए सैटेलाइट ट्रैकिंग और इलेक्ट्रिक फेंसिंग जैसे आधुनिक उपायों पर भी विचार कर रहा है।
देहरादून। जिलाधिकारी सविन बंसल के समक्ष खुड़बुड़ा निवासी 70 वर्षीय बुजुर्ग दंपति जसवंत सिंह और उनकी पत्नी ने अपने पुत्र व पुत्रवधु को घर से बेदखल करने की गुहार लगाई थी। बुजुर्ग दंपति ने नाराज होकर जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय में भरणपोषण अधिनियम के तहत वाद भी दर्ज कराया था।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने दो सुनवाई में ही मामले की गहराई को समझते हुए परिजनों के बीच उत्पन्न मनमुटाव को दूर कराया। उन्होंने बुजुर्ग दंपति से आग्रह किया कि वे अपने तीन नौनिहालों वाले बेटे-बहू को बेदखल न करें और परिवार को टूटने से बचाएं। साथ ही बेटे-बहू को भी बुजुर्गों के प्रति अपने कर्तव्य और जिम्मेदारियों का स्मरण कराया।
डीएम ने दोनों पक्षों को आपसी प्रेम, सम्मान और सहयोग के साथ रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि बुजुर्ग माता-पिता और निर्धन बेटे-बहू एक-दूसरे के सहारे हैं, इसलिए परिवारिक सौहार्द बनाए रखना ही सबसे बड़ा समाधान है।
बुजुर्ग दंपति के चार पुत्र हैं, जिनमें दो अपने परिवार के साथ अलग रहते हैं। एक पुत्र दिव्यांग है, जबकि पुत्र बंसी की आर्थिक स्थिति कमजोर है। उसका कपड़ों का छोटा व्यवसाय है और तीन नाबालिग बच्चे हैं। जिलाधिकारी ने बुजुर्गों से कहा कि वे अपने बेटे-बहू और नौनिहालों को घर से न निकालें, वहीं बेटे-बहू को भी समझाया कि वे बुजुर्गों का सम्मान करें और उनकी देखभाल में कोई कमी न आने दें। प्रशासन इस प्रकरण की नियमित मॉनिटरिंग करेगा ताकि परिवार में सौहार्द बना रहे।
कोटद्वार। जम्मू-कश्मीर के बारामूला क्षेत्र में ड्यूटी के दौरान क्रॉस फायरिंग में घायल होकर 25 वर्षीय राइफलमैन सूरज सिंह नेगी देश के लिए शहीद हो गए। गोरखा रेजिमेंट में तैनात सूरज नेगी का पार्थिव शरीर सेना के विशेष वाहन से कोटद्वार के कौड़िया कैंप में पहुंचा।
हर कही सूरज सिंह अमर रहे के नारे
सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार आज लालपुर गांव में किया गया। इस दौरान हजारों लोग नम आंखों और गर्व के भाव के साथ अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई देने के लिए जुटे। लोगों ने भारत माता की जय और “सूरज सिंह अमर रहें” के नारे लगाए।
दो भाइयों में छोटे राइफलमैन सूरज सिंह
सूरज सिंह नेगी, जो दो भाइयों में सबसे छोटे थे, वर्ष 2021 में गोरखा रेजिमेंट में भर्ती हुए थे। परिवार और गांव के लोग उनके बलिदान की खबर पाकर सदमे में हैं। उनके माता-पिता और भाई पंकज नेगी ने वीर जवान को खोने का गहरा शोक व्यक्त किया।
सीएम धामी ने जताया शोक

सोशल मीडिया पर लिखा हुआ सीएम धामी का शोक सन्देश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शहीद की शहादत पर गहरा शोक व्यक्त किया और सोशल मीडिया पर लिखा: “जम्मू-कश्मीर के बारामूला क्षेत्र में मां भारती की सेवा करते हुए कोटद्वार के वीर पुत्र, राइफलमैन सूरज सिंह नेगी के शहीद होने का अत्यंत दुःखद समाचार प्राप्त हुआ। आपकी वीरता और बलिदान को नमन। आपकी शौर्यगाथा सदैव हमारी स्मृतियों में जीवंत रहेगी।
सितंबर में आए थे राइफलमैन अपने घर
सूरज सितंबर माह में छुट्टी पर अपने घर आए थे और कुछ दिन पहले ही ड्यूटी पर लौटे थे। बारामूला के सीमावर्ती क्षेत्र में अचानक क्रॉस फायरिंग के दौरान उन्हें गोली लगी, जिसे तत्काल सैन्य चिकित्सालय ले जाया गया, लेकिन वहां उन्होंने अंतिम सांस ली।
बलिदान को हमेशा रखा जाएगा याद
लालपुर के वार्ड-19 के पार्षद नेत्र मोहन असवाल ने बताया कि सूरज का परिवार और पूरा गांव उनके बलिदान को याद करते हुए शोक में डूब गया। उनके साहस, कर्तव्यनिष्ठा और देशभक्ति ने पूरे गढ़वाल और उत्तराखंड के लोगों में गर्व की भावना पैदा की है।सूरज सिंह नेगी की शहादत न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे राज्य और देश के लिए गौरव का विषय है। उनके बलिदान को हमेशा याद रखा जाएगा
सीएम धामी बोले– शहीदों का पराक्रम हर भारतीय के लिए प्रेरणा
लैंसडाउन। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को लैंसडाउन स्थित गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल वॉर मेमोरियल पहुंचकर शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने वॉर मेमोरियल पर पुष्पचक्र अर्पित कर माँ भारती की सेवा में सर्वस्व न्योछावर करने वाले अमर सपूतों को नमन किया।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह स्मारक वीर सपूतों के शौर्य, त्याग और मातृभूमि के प्रति उनके अडिग प्रेम का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि गढ़वाल राइफल्स के जांबाज सैनिकों ने देश की रक्षा के लिए जो बलिदान दिए हैं, वे सदैव प्रेरणा स्रोत रहेंगे।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी भी मौजूद रहे।
अल्मोड़ा में आयोजित सहकारिता मेले में किया स्टालों का निरीक्षण
ग्राम सभा को माइक्रो एटीएम और ग्रामीणों को 10 लाख रुपए तक के लोन वितरित किए
अल्मोड़ा। अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के मौके पर अल्मोड़ा के सिमकनी ग्राउंड में रविवार को कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या सहकारिता मेले मैं शामिल हुई। उन्होंने विभिन्न सरकारी विभागों, योजनाओं, हस्तशिल्प, हथकरघा एवं स्थानीय उत्पादों के स्टालों का निरीक्षण किया। कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने स्टॉल संचालकों से संवाद कर विभिन्न उत्पादों की जानकारी ली और उनके कार्यों की सराहना की।
इस अवसर पर मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि यह मेला स्थानीय उत्पादों को संरक्षण और प्रोत्साहन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वदेशी अभियान की भावना के अनुरूप है।
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि सहकारिता ने प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों की आर्थिकी को मजबूती दी है और इसके माध्यम से गांव-शहर की महिलाएं तेज़ी से सशक्त हो रही हैं।
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि सहकारिता मेले का उद्देश्य स्थानीय कला, उत्पादों, महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार के प्रयासों को मंच देना है, जिससे प्रदेश के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में नई आर्थिक संभावनाएं सृजित हो सकें।
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को पशुपालन, डेयरी, कुकुट पालन जैसे कार्यों के लिए 10 लाख रुपये तक के ऋण चेक वितरित किए गए। कई ग्राम सभाओं को माइक्रो एटीएम भी सौंपे गए। वहीं, विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में भाजपा जिलाध्यक्ष महेश नयाल, कार्यक्रम अध्यक्ष कैलाश शर्मा, ब्लॉक प्रमुख नीमा आर्या, जिला सहकारी बैंक लिमिटेड के पूर्व अध्यक्ष ललित लटवाल, विधायक प्रतिनिधि भुवन जोशी सहित कई सार्वजनिक प्रतिनिधि, अधिकारी, और गणमान्य लोग मौजूद रहे।
राज्य सरकार ने दाखिल की पुनर्विचार याचिका
देहरादून। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उत्तराखंड में हजारों शिक्षकों की पदोन्नतियां रोक दी गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को पदोन्नति के लिए अनिवार्य कर दिया है, जिससे बेसिक और जूनियर हाईस्कूल के 18 हजार से अधिक शिक्षक इस फैसले से प्रभावित हुए हैं। राज्य सरकार ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने का निर्णय लिया है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राज्य के जिला शिक्षा अधिकारियों ने शिक्षकों की पदोन्नति को लेकर शिक्षा निदेशालय से स्पष्ट दिशा निर्देश मांगे। शिक्षा निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया है कि शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट के फैसले और राज्य सरकार की स्थिति के बारे में अवगत कराया जाए।
प्रारंभिक शिक्षा निदेशक अजय कुमार नौडियाल ने बताया कि चमोली, टिहरी गढ़वाल और चंपावत के जिला शिक्षा अधिकारियों ने पत्रों के माध्यम से पदोन्नति संबंधी दिशा निर्देश मांगे हैं। कुछ जिलों में शिक्षक पदोन्नति के लिए धरना प्रदर्शन भी कर रहे हैं।
नौडियाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर 2025 को टीईटी को सभी शिक्षकों के लिए अनिवार्य करते हुए आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इस फैसले पर राज्य सरकार ने पुनर्विचार याचिका दाखिल करने का निर्णय लिया है और इसकी प्रक्रिया जारी है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, जिन शिक्षकों की सेवा अवधि में पांच साल से अधिक समय बाकी है, उन्हें दो साल के भीतर टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी। इस नियम में पुराने और नए दोनों प्रकार के शिक्षक शामिल हैं। वहीं, 2010-11 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्य नहीं होना चाहिए क्योंकि उस समय टीईटी लागू नहीं था।
जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विनोद थापा ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट से अंतिम फैसला आने तक पुराने शिक्षकों की पदोन्नति रोकी नहीं जानी चाहिए।”

