‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ को मिलेगा वैश्विक बाजार- मुख्यमंत्री
प्रदेश में 1.63 लाख से अधिक महिलाएं बनीं ‘लखपति दीदी’
तीन वर्षों में 15 हज़ार उद्यमियों को मिलेगा इन्क्यूबेशन सहयोग – मुख्यमंत्री
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव योजना के अन्तर्गत सराहनीय कार्य करने वाले महिला स्वयं सहायता समूहों को सम्मानित किया और उनसे संवाद भी किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना का शुभंकर एवं लोगो लॉन्च किया तथा हाउस ऑफ हिमालयाज के नये उत्पाद एवं वेबसाइट का लोकार्पण किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मातृशक्ति के कल्याण एवं सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान, उज्ज्वला योजना और लखपति दीदी जैसी योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य हुआ है। जब एक महिला आर्थिक रूप से सशक्त होती है, तो वह पूरे समाज को सशक्त बनाने का कार्य करती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार भी मातृशक्ति के कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। शिक्षा और स्वास्थ्य से लेकर उद्यमिता और नौकरियों तक में प्रदेश की महिलाओं की अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है। ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से प्रदेश की ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का कार्य किया जा रहा है। सशक्त बहना उत्सव योजना और मुख्यमंत्री महिला स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण योजना के माध्यम से मातृशक्ति को नए अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना के अन्तर्गत आगामी तीन वर्षों में 15 हज़ार से अधिक उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों और लखपति दीदियों को इन्क्यूबेशन सुविधा प्रदान की जाएगी। इसके अंतर्गत उन्हें व्यवसायिक कौशल प्रशिक्षण, कानूनी एवं लाइसेंसिंग सहयोग, को-वर्किंग स्पेस, निवेश सहायता और स्थानीय से लेकर वैश्विक स्तर तक विपणन के लिए एक मजबूत नेटवर्क उपलब्ध कराया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में वोकल फॉर लोकल और लोकल टू ग्लोबल की पहल के अंतर्गत, लखपति दीदी के संकल्प को साकार करने तथा स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए राज्य में हाउस ऑफ हिमालयाज अम्ब्रेला ब्रांड बनाया गया है। इसके अंतर्गत अभी 35 उच्च-गुणवत्ता वाले उत्पादों को लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। शीघ्र ही हाउस ऑफ हिमालयाज के उत्पाद विश्व के अन्य देशों में भी निर्यात किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि राज्य में 68 हज़ार स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लगभग 5 लाख महिलाएं संगठित होकर अपना व्यवसाय कर रही हैं। 2023 में शुरू की गई मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव योजना के माध्यम से हमारी बहनों ने विभिन्न आयोजनों में 27 हज़ार से अधिक स्टॉल लगाकर 7 करोड़ रुपये से अधिक के उत्पादों की बिक्री की है। प्रदेश की 1 लाख 63 हज़ार से अधिक बहनें लखपति बन चुकी हैं। महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाए गए उत्पादों की प्रोसेसिंग एवं मार्केटिंग हेतु 49 ग्रोथ सेंटरों की स्थापना की गई है। इन उत्पादों के प्रभावी विपणन के लिए 13 जनपदों में 33 नैनो पैकेजिंग यूनिट्स, 17 सरस सेंटर, 3 राज्य स्तरीय विपणन केंद्र तथा 8 बेकरी यूनिट्स का भी संचालन किया जा रहा है। केंद्र सरकार की वन स्टेशन, वन प्रोडक्ट योजना के अंतर्गत देहरादून और हरिद्वार रेलवे स्टेशनों पर महिला स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों की बिक्री के लिए विशेष केंद्र स्थापित किए गए हैं।
अल्मोड़ा की सीमा कुमारी ने कहा कि राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेकर वे पिछले 5 वर्षों में 18 लाख रुपये की आमदनी कर चुकी हैं। बागेश्वर की दया दानू ने कहा कि उनके साथ 400 महिलाएं स्वरोजगार से जुड़ी हैं और एक वर्ष में सबने मिलकर एक करोड़ रुपये का लाभ अर्जित किया है। चम्पावत की हेमा उपाध्याय ने कहा कि वे एग्रो टूरिज्म पर कार्य कर रही हैं। पॉली हाउस और होमस्टे के माध्यम से उन्हें हर साल 4 लाख रुपये की आय प्राप्त हो रही है। कोरोना के दौरान उन्होंने अपने पति के साथ रिवर्स पलायन किया था। चमोली की रेखा नेगी ने कहा कि स्टॉल के माध्यम से उन्हें स्थानीय उत्पादों पर अच्छी आय प्राप्त हो रही है। देहरादून की किरण राणा ने कहा कि उन्हें मशरूम उत्पादन से काफी फायदा हुआ है और उनके साथ 34 महिलाएं कार्य कर रही हैं। हरिद्वार की छवि ने बताया कि उन्होंने रेस्टोरेंट के लिए 10 लाख रुपये का लोन लिया था, जिस पर उन्हें 6 लाख रुपये की सब्सिडी मिली। नैनीताल की किरण जोशी ने बताया कि उनके द्वारा बनाए गए रेशम उत्पादों से उन्होंने पिछले 9 माह में 8 लाख रुपये का व्यवसाय किया है।
इस अवसर पर विधायक खजानदास, सविता कपूर, सचिव ग्राम्य विकास राधिका झा, आयुक्त ग्राम्य विकास अनुराधा पाल, अपर सचिव झरना कमठान तथा ग्राम्य विकास विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।
प्रदेश में 96 सड़कें बंद, 514 मशीनें राहत कार्य में लगीं
पौड़ी गढ़वाल। प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री एवं चौबट्टाखाल विधायक सतपाल महाराज ने भारी बारिश के कारण पाबौ-झंगबो-गढीगांव-पिनानी सड़क के क्षतिग्रस्त होने पर जिलाधिकारी एवं लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से वार्ता कर शीघ्र कनेक्टिविटी बहाल करने के निर्देश दिये हैं।
लोनिवि मंत्री एवं चौबट्टाखाल विधायक ने बताया कि भारी बरसात से प्रदेश में कई जगहों पर भूस्खलन होने की वजह से सड़कें क्षतिग्रस्त होने से मार्ग अवरुद्ध होने की सूचना मिल रही है। जनपद पौड़ी चौबट्टाखाल के अन्तर्गत पाबौ-झंगबो-गढीगांव-पिनानी सड़क के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी मिलते ही उसे ठीक कर कनेक्टिविटी बहाल करने के लिए जिलाधिकारी एवं लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दे दिये गये हैं। मौके पर सड़कों को खोलने के लिये मशीनें पहुंच चुकी हैं और सड़कों को दुरुस्त करने का काम प्रारंभ कर दिया गया है।
लोक निर्माण मंत्री एवं चौबट्टाखाल विधायक ने जानकारी देते हुये बताया कि प्रदेश में सोमवार को 02 राष्ट्रीय राजमार्ग, 20 राज्य मार्ग, 09 मुख्य जिला मार्ग, 06 अन्य जिला मार्ग और 58 ग्रामीण मार्ग सहित कुल 96 मार्ग अवरुद्ध हैं जिन्हें खोलने के लिये लगातार युद्धस्तर पर काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि 514 मशीनें विभिन्न महत्वपूर्ण एवं मार्ग बन्द होने के सम्भावित स्थानों पर तैनात की गयी हैं और सभी प्रभावित क्षेत्रों में अधिशासी अभियन्ताओं को अवरूद्ध मार्गों को प्राथमिकता से खोलने के निर्देश दिये गये हैं।
एक महीने में दूसरी घटना, ग्रामीणों में दहशत का माहौल
देवप्रयाग। टिहरी के देवप्रयाग ब्लॉक के गढ़ाकोट गांव में जंगली भालू का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार सुबह भालू ने दूसरी बार हमला कर एक महिला को गंभीर रूप से घायल कर दिया। घायल महिला को तत्काल श्रीनगर बेस अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि घटना से गांव में दहशत का माहौल है।
ग्राम प्रधान विजय सिंह असवाल के मुताबिक, सुबह करीब नौ बजे गांव की गुड्डी देवी (45) पत्नी जोत सिंह मवेशियों के लिए चारा लेने जंगल की ओर गई थीं। सड़क के नीचे घनी झाड़ियों में छिपे भालू ने अचानक उन पर हमला बोल दिया। उनके शोर मचाने पर पास में मौजूद अन्य महिलाओं ने साहस दिखाते हुए उन्हें किसी तरह भालू के चंगुल से छुड़ाया।
गुड्डी देवी को गंभीर चोटें आईं और ग्रामीणों ने उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया। इससे पहले, 1 जुलाई को भी गांव की रजनी असवाल (38) पर भालू ने हमला कर घायल कर दिया था। वन क्षेत्राधिकारी एम.एस. रावत के अनुसार, जंगली जानवरों से सुरक्षा के लिए वन विभाग लगातार गश्त कर रहा है और ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
बीकेटीसी ने श्री तुंगनाथ मंदिर संरक्षण संबंधी डीपीआर हेतु सीबीआरआई से किया संपर्क- हेमंत द्विवेदी
रूद्रप्रयाग। समुद्र तल से 12074 फीट की ऊंचाई पर स्थित तृतीय केदार के नाम से विख्यात श्री तुंगनाथ मंदिर के संरक्षण एवं जीर्णोद्धार – रखरखाव हेतु श्री बदरीनाथ – केदारनाथ मंदिर समिति ( बीकेटीसी) ने प्रयास तेज कर दिये है।
बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि बीकेटीसी श्री तुंगनाथ मंदिर के सरंक्षण एवं रखरखाव हेतु प्रतिबद्ध है। वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) दिल्ली तथा केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) रुड़की तृतीय केदार श्री तुंगनाथ मंदिर के निर्माण और विकासात्मक गतिविधियों के लिए बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर रही है और तकनीकी सहायता भी प्रदान करेगी।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई), भारतीय भू वैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) और सीबीआरआई द्वारा पहले भी श्री तुंगनाथ मंदिर क्षेत्र का दौरा किया जा चुका है।
बताया कि सीबीआरआई की तकनीकी सहायता से बीकेटीसी द्वारा श्री तुंगनाथ मंदिर संरक्षण,रखरखाव एवं निर्माण कार्य किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि पिछले माह बीकेटीसी ने सीबीआरआई को श्री तुंगनाथ मंदिर के रखरखाव संरक्षण हेतु निरीक्षण आख्या एवं उपचारात्मक उपायों की रूप रेखा प्रेषित करते हुए डीपीआर बनाने का अनुरोध किया था जिस पर कार्य गतिमान है।
तुंगनाथ के संरक्षण, रखरखाव परियोजना में वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मनोजीत सामंत, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. देबदत्त घोष, निदेशक प्रो. आर. प्रदीप कुमार और सीबीआरआई की विशेषज्ञ टीम शामिल है।
महज तीन दिन में खड़ा हुआ नया पुल
गंगोत्री। गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर लिमच्यागाड में आपदा से क्षतिग्रस्त पुल के स्थान पर वैली ब्रिज का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। युद्धस्तर पर कार्य कर तीन दिनों की अल्प अवधि में पुल बना दिए जाने से गंगोत्री मार्ग पर अब डबरानी पुल तक सड़क मार्ग सुचारू हो गया है और इससे आगे क्षतिग्रस्त सड़क का तेजी से पुनर्निर्माण करने की राह भी प्रशस्त हो गई है।
गत दिनों हुई अतिवृष्टि के कारण गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग अनेक स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गया था और गंगनानी से आगे लिमच्यागाड़ पर बना 30 मीटर लंबाई का पुल आपदा के दौरान बह गया। जिसके फलस्वरूप सीमांत टकनौर क्षेत्र की लाइफलाइन कही जाने वाली इस सड़क पर यातायात पूरी तरह से बाधित हो गया था।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा आपदा के तुरंत बाद मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव तथा पुनर्निर्माण कार्यों को युद्धस्तर पर संचालित करने के निर्देश दिए गए थे। मुख्यमंत्री निरंतर इन कार्यों की प्रगति की समीक्षा कर रहे हैं। मुख्यमंत्री की निगरानी व निर्देशन में राज्य व केंद्र सरकार के अनेक विभागों व एजेंसियों द्वारा रेस्क्यू एवं राहत अभियान बेहतर समन्वय और पूरी तेजी के साथ संचालित किया जा रहा है। इसके साथ ही आपदा प्रभावित क्षेत्र में यथाशीघ्र सामान्य स्थिति बहाल करने हेतु दिन रात काम किया जा रहा है। जिसके परिणामस्वरूप आपदा प्रभावित क्षेत्र में संचार सुविधा, बिजली और पेयजल की आपूर्ति को बहाल किया जा चुका है।
भटवाड़ी सहित अन्य जगहों पर क्षतिग्रस्त सड़क को बहाल करने के बाद सीमा सड़क संगठन ने लोनिवि के सहयोग से दिनरात जुट कर लिमच्यागाड मे वैली ब्रिज बनाने का चुनौतीपूर्ण कार्य को पूरा कर लिया है।
गंगोत्री मार्ग पर अब डबरानी पुल तक सड़क संपर्क बहाल हो जाने के फलस्वरूप इससे आगे के हिस्सों में क्षतिग्रस्त सड़क के पुनर्निर्माण का कार्य तेजी से पूरे हो सकेंगे । इससे राहत एवं पुनर्वास कार्यों को और अधिक प्रभावी एवं तीव्र गति से संचालित किया जा सकेगा।
सीएम धामी ने जताया आभार
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुख्यमंत्री आवास में बैंक ऑफ बड़ौदा के प्रतिनिधि मंडल ने भेंट की। इस दौरान बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा उत्तरकाशी जिले के धराली एवं हर्षिल क्षेत्र में आई आपदा के राहत कार्यों के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष में ₹ 1 करोड़ की धनराशि का योगदान दिया। मुख्यमंत्री ने बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा दिए सहयोग के लिए बैंक प्रबंधन का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर अपर सचिव मनमोहन मेंनाली, ऑफ बड़ौदा के जी.एम प्रतीक अग्निहोत्री, डीजीएम एस.पी.एस तोमर , रीजनल हेड अरविंद जोशी मौजूद रहे।
भूस्खलन से सड़क पर 15 फीट ऊंचा मलबे का टीला बना
रुद्रप्रयाग। ऋषिकेश-बदरीनाथ और रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड हाईवे को जोड़ने वाला रैंतोली-जवाड़ी बाईपास भारी भूस्खलन की चपेट में आ गया। जगतोली से करीब एक किलोमीटर आगे पहाड़ी से गिरे टनों मलबे और पेड़-पौधों ने सड़क को पूरी तरह ढक दिया, जिससे दोतरफा यातायात बंद कर दिया गया।
भूस्खलन इतना विशाल था कि सड़क पर 10 से 15 फीट ऊंचा मलबे का टीला बन गया और आशंका है कि करीब 25 से 30 मीटर सड़क को गंभीर क्षति पहुंची है। राहत की बात यह रही कि समय रहते वाहन चालकों ने दोनों ओर 40-50 मीटर पहले ही गाड़ियां रोक दीं, जिससे किसी प्रकार का जानमाल का नुकसान नहीं हुआ।
राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण खंड लोनिवि रुद्रप्रयाग के अधिशासी अभियंता ओंकार पांडे के अनुसार, मलबा हटाने में चार से पांच दिन का समय लग सकता है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि फिलहाल यातायात पूरी तरह से अवरुद्ध है और बहाली कार्य तेज़ी से चल रहा है।
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को रा.प्र. विद्यालय, भोगपुर में राज्य के 13 जिलों के 13 आदर्श संस्कृत ग्रामों का शुभारंभ किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार भविष्य में इन सभी आदर्श संस्कृत ग्रामों में संस्कृत भवनों के निर्माण के साथ ही राजकीय प्राथमिक संस्कृत विद्यालयों की भी स्थापना करेगी।
मुख्यमंत्री ने देहरादून में भोगपुर गांव, टिहरी गढवाल के मुखेम गांव, उत्तरकाशी के कोटगाँव, रुद्रप्रयाग के बैंजी गांव, चमोली के डिम्मर गांव, पौड़ी गढ़वाल के गोदा गांव, पिथौरागढ के उर्ग गांव, अल्मोड़ा के जैंती पाण्डेकोटा गांव, बागेश्वर के शेरी गांव, चम्पावत के खर्ककार्की गांव, हरिद्वार के नूरपुर पंजनहेडी गांव , नैनीताल के पाण्डे गाँव एवं ऊधमसिंहनगर के नगला तराई गांव को आदर्श संस्कृत ग्रामों के रूप में उनका शुभारंभ किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न संस्कृति ग्रामों के लोगों से वर्चुअल माध्यम से संवाद भी किया।
मुख्यमंत्री ने उत्तरकाशी और पौड़ी में आई आपदा पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार आपदा प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास कार्यों को पूरी संवेदना और तेज गति से करेगी। उन्होंने कहा राज्य सरकार, उत्तराखंड के प्रत्येक जनपद में आदर्श संस्कृत ग्राम की स्थापना कर देववाणी संस्कृत को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य कर रही है। देवभूमि उत्तराखंड सदियों से देववाणी संस्कृत के अध्ययन और शोध का केंद्र रही है।राज्य सरकार का प्रयास है कि देववाणी संस्कृत की पवित्र ज्योति को उत्तराखंड में प्रज्ज्वलित रखा जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा उत्तराखंड पहला राज्य है। जो इस तरह की पहल से देववाणी संस्कृत के संरक्षण एवं संवर्धन पर कार्य कर रहा है। संस्कृत भाषा हमारी संस्कृति, परंपरा, ज्ञान और विज्ञान का मूल आधार है। संस्कृत भाषा के आधार पर ही प्राचीन मानव सभ्यताओं का विकास संभव हो सका है। सनातन संस्कृति में वेदों, ग्रंथों, पुराणों और उपनिषदों की रचना संस्कृत में ही की गई है। संस्कृत भाषा अनादि और अनंत है।
मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए कार्य किया जा रहा है। नई शिक्षा नीति में संस्कृत को आधुनिक और व्यवहारिक भाषा के रूप में स्थापित करने के लिए विशेष प्रयास किए गए हैं। संस्कृत विश्वविद्यालयों को आधुनिक संसाधनों से जोड़ा जा रहा है। संस्कृत साहित्य को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स, ई-संस्कृत शिक्षण प्लेटफॉर्म एवं संस्कृत ऐप्स विकसित किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने लोकसभा की कार्यवाही का अनुवाद संस्कृत भाषा में भी किए जाने की शुरुआत की है।
मुख्यमंत्री ने कहा आदर्श संस्कृत ग्रामों में लोग अपने दैनिक जीवन में संस्कृत का प्रयोग करेंगे जिससे देववाणी पुनः हमारे जीवन में बोलचाल, व्यवहार और संवाद का हिस्सा बन सकेगी। राज्य सरकार प्रदेश के विद्यालयों में संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए विशेष छात्रवृत्ति प्रदान कर रही है। संस्कृत भाषा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को संस्कृत छात्र प्रतिभा सम्मान योजना से सम्मानित किया जा रहा है। संस्कृत के प्रचार – प्रसार के लिए उत्तराखंड संस्कृत अकादमी, हरिद्वार के माध्यम से अखिल भारतीय शोध सम्मेलन, अखिल भारतीय ज्योतिष सम्मेलन, अखिल भारतीय वेद सम्मेलन जैसे विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार ने कई ऐतिहासिक निर्णय भी लिए हैं। देश में सबसे पहले समान नागरिक संहिता को हमारे राज्य में लागू किया गया है। नकल विरोधी कानून लागू होने के बाद लगभग 23 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी मिली है। उत्तराखंड के सांस्कृतिक मूल्यों और डेमोग्राफी को भी संरक्षित रखा जा रहा है। राज्य में ऑपरेशन कालनेमि के माध्यम से सनातन धर्म को बदनाम करने वाले पाखंडियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जा रही है।
कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि संस्कृत भाषा हमारी ऐतिहासिक धरोहर है। उत्तराखंड भारत का पहला राज्य है, जिसने संस्कृत भाषा को अपनी दूसरी आधिकारिक भाषा घोषित किया है। उन्होंने कहा अगले वर्ष से संस्कृत विद्यालयों में एनसीसी, एन.एस.एस का शुभारंभ के साथ ही शिक्षकों की कमी को दूर किया जाएगा। कैबिनेट मंत्री ने संस्कृत विश्वविद्यालय के इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए पूर्व में मुख्यमंत्री द्वारा 75 करोड़ दिए जाने पर भी आभार जताया। उन्होंने कहा कि 13 संस्कृत ग्रामों में संस्कृति भाषा के प्रचार प्रसार के लिए आगे काम किया जाएगा।
इस अवसर पर विधायक बृजभूषण गैरोला, मेयर ऋषिकेश शंभू पासवान, सचिव दीपक कुमार , उत्तराखंड संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दिनेश चंद्र शास्त्री, मधुकेश्वर भट्ट, एवं अन्य लोग मौजूद रहे।
देहरादून – धराली (उत्तरकाशी) आपदा से प्रभावित लोगों की मदद के लिए राहत एवं बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है। रविवार को वायुसेना का एक विमान डोईवाला स्थित जौलीग्रांट एयरपोर्ट से आवश्यक राहत सामग्री लेकर धराली के लिए रवाना हुआ।
विमान में खाने-पीने का सामान, दवाइयाँ, कंबल और अन्य आवश्यक वस्तुएँ भेजी गईं, ताकि प्रभावित ग्रामीणों और फंसे हुए तीर्थयात्रियों को समय पर सहायता पहुंचाई जा सके। प्रशासन के अनुसार, मौसम की चुनौतियों के बावजूद राहत अभियान लगातार जारी है।
वायुसेना और एनडीआरएफ की संयुक्त टीमें दुर्गम इलाकों तक सामग्री पहुंचाने में जुटी हैं। इससे पहले, हेलीकॉप्टर के जरिए कई फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया था। जिला प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि सभी प्रभावित परिवारों को जल्द से जल्द आवश्यक मदद उपलब्ध कराई जाएगी।
डोईवाला। लच्छीवाला टोल प्लाज़ा पर एक बार फिर हाथी के पहुंचने से हड़कंप मच गया। टोल कर्मियों और राहगीरों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। टोल कर्मी राकेश नोटियाल ने बताया कि आए दिन हाथियों के आने से यहां खतरा बना रहता है। हाथी ने पहले टोल बैरियर पर हमला किया और फिर एक गाड़ी को पलटने की कोशिश भी की। गनीमत रही कि इस दौरान कोई भी व्यक्ति हताहत नहीं हुआ। पूरी घटना टोल प्लाज़ा पर लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई है। स्थानीय लोगों ने वन विभाग से क्षेत्र में गश्त बढ़ाने और हाथियों की आवाजाही रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
