देहरादून। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने प्राधिकरण क्षेत्र में बढ़ते अवैध निर्माण और अवैध प्लॉटिंग के खिलाफ सख़्त रुख अपनाते हुए व्यापक स्तर पर ध्वस्तीकरण अभियान तेज कर दिया है। उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के तहत एमडीडीए की प्रवर्तन टीमें लगातार फील्ड में उतरकर नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई कर रही हैं। इस अभियान का उद्देश्य न केवल अवैध गतिविधियों पर रोक लगाना है, बल्कि नियोजित विकास को सुनिश्चित करना और आम नागरिकों के हितों की रक्षा करना भी है।
08 से 10 बीघा भूमि पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई
मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण द्वारा प्राधिकरण क्षेत्रान्तर्गत अवैध प्लॉटिंग के विरुद्ध सख़्त कार्रवाई जारी है। इसी क्रम में विभिन्न क्षेत्रों में की जा रही अवैध प्लॉटिंग पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। प्राधिकरण की टीम द्वारा नीरज शर्मा एवं अन्य व्यक्तियों द्वारा सलियावाला, धौलास, देहरादून क्षेत्र में लगभग 08 से 10 बीघा भूमि में की जा रही अवैध प्लॉटिंग पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। जांच में उक्त प्लॉटिंग बिना स्वीकृत लेआउट एवं मानकों के विपरीत पाई गई, जिस पर नियमानुसार कार्रवाई करते हुए अवैध प्लॉटिंग को ध्वस्त किया गया। उक्त कार्रवाई संयुक्त सचिव गौरव चटवाल के आदेशों के अनुपालन में की गई। ध्वस्तीकरण अभियान के दौरान सहायक अभियंता सुर्जीत सिंह रावत, अवर अभियंता हर्षित मौठानी, संबंधित सुपरवाइजर एवं पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा। कार्रवाई शांतिपूर्ण एवं सुरक्षित ढंग से संपन्न कराई गई। एमडीडीए द्वारा स्पष्ट किया गया है कि प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध निर्माण एवं अवैध प्लॉटिंग के विरुद्ध आगे भी सख़्त कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी। आम नागरिकों से अपील की गई है कि किसी भी प्रकार की भूमि खरीद या निर्माण से पूर्व प्राधिकरण से आवश्यक स्वीकृतियां अवश्य प्राप्त करें।
नागरिकों को किया जा रहा जागरूक
एमडीडीए अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी प्रकार की भूमि खरीदने या निर्माण कार्य शुरू करने से पहले प्राधिकरण से संबंधित स्वीकृतियों की पूरी जानकारी अवश्य प्राप्त करें। अवैध कॉलोनियों में निवेश करने से आम लोग अपने जीवन की गाढ़ी कमाई जोखिम में डाल देते हैं, इसलिए जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। प्राधिकरण की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि अवैध निर्माण करने वालों के खिलाफ भविष्य में और भी सख़्त कार्रवाई की जाएगी। बार-बार चेतावनी और नोटिस के बावजूद नियमों की अनदेखी करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी का बयान
उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध निर्माण और अवैध प्लॉटिंग को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह कार्रवाई पूरी तरह नियमों के तहत और जनहित में की जा रही है। हमारा उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि क्षेत्र के सुनियोजित विकास और पर्यावरण संरक्षण को सुनिश्चित करना है। सभी नागरिकों से अपील है कि निर्माण से पहले मानचित्र स्वीकृति और अन्य आवश्यक अनुमतियां अवश्य लें। जो लोग नियमों का उल्लंघन करेंगे, उनके खिलाफ सख़्त से सख़्त कार्रवाई जारी रहेगी। उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि यह अभियान किसी व्यक्ति विशेष या क्षेत्र विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि नियमों का उल्लंघन करने वाले सभी मामलों में समान रूप से कार्रवाई की जा रही है। एमडीडीए का मानना है कि सख़्त प्रवर्तन के साथ-साथ नियोजित विकास की दिशा में सकारात्मक संदेश देना भी आवश्यक है। वैध निर्माण करने वालों और नियमों का पालन करने वाले नागरिकों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसका भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
सचिव एमडीडीए मोहन सिंह बर्निया का बयान
सचिव एमडीडीए मोहन सिंह बर्निया ने कहा एमडीडीए की प्रवर्तन टीमें लगातार प्राधिकरण क्षेत्र में निरीक्षण कर रही हैं। अवैध निर्माण और प्लॉटिंग के मामलों में नियमानुसार ध्वस्तीकरण, सीलिंग और नोटिस की कार्रवाई की जा रही है। पूरी प्रक्रिया पारदर्शी है और कानूनी प्रावधानों का पालन किया जा रहा है। आम जनता से अनुरोध है कि वे अवैध कॉलोनियों में निवेश से बचें और किसी भी निर्माण से पहले प्राधिकरण से जानकारी अवश्य प्राप्त करें।
धामी सरकार की चुप्पी असहनीय, वीआईपी को बचाने का षड्यंत्र उजागर- करन माहरा
अल्मोड़ा। अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर कांग्रेस पार्टी द्वारा आयोजित ‘अंकिता भंडारी न्याय यात्रा’ में कांग्रेस नेताओं, महिला शक्ति, युवाओं और बड़ी संख्या में आम नागरिकों ने सहभागिता की। यात्रा के माध्यम से कांग्रेस ने सरकार पर गंभीर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग को दोहराया।
यात्रा के दौरान कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यह केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उत्तराखंड की अस्मिता, बहन-बेटियों की सुरक्षा और न्याय के लिए उठी जनआवाज़ है। वक्ताओं ने कहा कि प्रदेश की जनता अब साफ संदेश दे चुकी है कि न्याय के मुद्दे पर किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
कांग्रेस ने अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित ‘वीआईपी’ की भूमिका को लेकर सरकार पर सवाल खड़े किए। नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार अब तक यह स्पष्ट नहीं कर पाई है कि आखिर किस प्रभावशाली व्यक्ति को बचाने के लिए मामले की सच्चाई सामने नहीं आने दी जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार निर्दोष है तो उसे सीबीआई जांच से पीछे नहीं हटना चाहिए।
न्याय यात्रा के दौरान भाजपा के एक पूर्व विधायक और मंत्री से जुड़े कथित ऑडियो का भी उल्लेख किया गया। कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि सार्वजनिक हुए इस ऑडियो में जिन नामों का जिक्र है, वे जांच को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त आधार हैं, इसके बावजूद कार्रवाई न होना सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सत्ता के संरक्षण में जांच को प्रभावित किया जा रहा है और पीड़ित परिवार को न्याय से वंचित रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य निर्माण का उद्देश्य कभी भी प्रभावशाली लोगों को बचाना नहीं था, बल्कि समान न्याय व्यवस्था स्थापित करना था।
कांग्रेस पार्टी ने स्पष्ट किया कि जब तक अंकिता भंडारी को पूर्ण न्याय नहीं मिलता, पार्टी का आंदोलन जारी रहेगा। सीबीआई से निष्पक्ष जांच कराए जाने और दोषियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए संघर्ष सड़क से लेकर सदन तक लगातार जारी रखने की बात कही गई।
कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने सेवानिवृत्त राजकीय पेंशनर्स संगठन के छठे प्रान्तीय त्रैवार्षिक महाधिवेशन में किया प्रतिभाग
देहरादून। कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने देहरादून के धर्मपुर स्थित एक निजी होटल में आयोजित सेवानिवृत्त राजकीय पेंशनर्स संगठन के छठे प्रान्तीय त्रैवार्षिक महाधिवेशन में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। इस दौरान कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने वरिष्ठजनों को सम्मानित भी किया।
महाधिवेशन को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि यह अत्यंत हर्ष और गौरव का विषय है कि सेवानिवृत्त राजकीय पेंशनर्स संगठन अपने अस्तित्व के 60 गौरवशाली वर्ष पूर्ण कर रहा है। उन्होंने कहा कि संगठन का षष्ठीपूर्ति (हीरक जयंती वर्ष) इस बात का प्रतीक है कि आयु का पड़ाव संकल्पों को कमजोर नहीं करता, बल्कि अनुभव की यह पूंजी संगठन को और अधिक सशक्त बनाती है। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्त राजकीय पेंशनर्स का राज्य निर्माण में भी अहम भूमिका रही है।
मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि सेवानिवृत्ति केवल सेवा का अंत नहीं, बल्कि समाज के प्रति नई जिम्मेदारियों की शुरुआत होती है। यह महाधिवेशन केवल आपसी संवाद का मंच नहीं, बल्कि एकता और संगठनात्मक मजबूती का उद्घोष है।
इस अवसर पर सेवानिवृत्त राजकीय पेंशनर्स संगठन के पदाधिकारियों ने बढ़ती महंगाई के मद्देनज़र पेंशनरों के हितों और सम्मान की रक्षा की मांग की। उन्होंने कैशलेस चिकित्सा सुविधा से जुड़ी गोल्डन कार्ड एवं आयुष्मान योजना की विसंगतियों को दूर कर उन्हें और अधिक सरल एवं सुगम बनाने, सरकारी कार्यालयों में पेंशनरों के कार्यों को प्राथमिकता देने तथा नीति निर्धारण में उनके दीर्घ प्रशासनिक अनुभव का लाभ उठाने सहित 14 सूत्रीय मांग पत्र कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी को सौंपा।
कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने संगठन के पदाधिकारियों को आश्वस्त किया कि उनकी सभी मांगों को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तक पहुंचाया जाएगा तथा उनके समाधान के लिए राज्य सरकार स्तर पर गंभीरता से प्रयास किए जाएंगे।
इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह कृषाली, प्रदेश संरक्षक आर.एस.परिहार, प्रदेश कोषाध्यक्ष एम. एस.गुसाईं, उपाध्यक्ष कुसुमलता शर्मा, के.डी.शर्मा, गुलशन कुमार, सरदार रोशन सिंह, चंद्र प्रकाश, प्रदेश सचिव जगदीश प्रसाद रतूड़ी, मोहन सिंह रावत, हृदयराम सहित कई लोग उपस्थित रहे।
वन क्षेत्रों में इको टूरिज्म पर फोकस, 10 नए स्थलों का प्लान एक माह में होगा तैयार
देहरादून। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सोमवार को सचिवालय में वन विभाग के अंतर्गत इको टूरिज्म के संबंध में उच्च अधिकार प्राप्त समिति की बैठक संपन्न हुई। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश का अधिकतर भूभाग वनाच्छादित होने से प्रदेश में इको टूरिज्म की अत्यधिक सम्भावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि इको टूरिज्म की सम्भावनाओं को तलाशते हुए ऐसे स्पॉट चिन्हित कर विकसित किए जाएं जो इको टूरिज्म के लिए इको सिस्टम तैयार करें।
मुख्य सचिव ने ट्रैकिंग और माउंटेनियरिंग के लिए पॉलिसी तैयार किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने ट्रैकिंग और माउंटेनियरिंग की एक इंटीग्रेटेड पॉलिसी 15 जनवरी तक फाइनल करते हुए शासन को प्रस्तुत किए जाने की बात कही। कहा कि पॉलिसी तैयार किए जाने से पूर्व प्राईवेट स्टैक होल्डर्स से भी संवाद कर लिया जाए, ताकि पॉलिसी बनने के बाद आने वाली व्यवहारिक समस्याओं से बचा जा सके। मुख्य सचिव ने ट्रैकिंग के लिए नई चोटियां खोले जाने की दिशा में कार्य किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए पर्यावरण ऑडिट सहित अन्य सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण कर ली जाएं। उन्होंने शीघ्र ही इसकी एसओपी भी जारी किए जाने की बात भी कही है।
मुख्य सचिव ने चौरासी कुटिया के जीर्णोद्धार का कार्य शीघ्र पूर्ण किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कार्यदायी संस्था को समय से कार्य पूर्ण करने हेतु सभी कार्यों की टाइम लाइन निर्धारित किए जाने की बात कही। कहा कि कार्य समय से पूर्ण हो सके इसके लिए कार्यदायी संस्था को लक्ष्य दिए जाएं। मुख्य सचिव ने इको टूरिज्म के लिए जबरखेत मॉडल को अन्य चिन्हित इको टूरिज्म स्थलों पर भी लागू किए जाने की बात कही। कहा कि इनको और ससमय पूर्ण किए जाने के लिए संभागीय वन अधिकारियों (डीएफओ) को टास्क प्रदान किए जाएं कि वे किस प्रकार से अपने क्षेत्र में इको टूरिज्म को बढ़ावा दे सकते हैं। उन्होंने 10 चिन्हित साइट्स का प्लान एक माह में तैयार करके शासन को भेजे जाने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने वन क्षेत्र के अंतर्गत पर्यटन गतिविधियों के संचालन के लिए मैकेनिज्म तैयार किए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि इनके संचालन की जिम्मेदारी इको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड को दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि इसका गठन ही इसी उद्देश्य से किया गया है। उन्होंने इसके लिए इको टूरिज्म डेवेलपमेंट बोर्ड को मजबूत करने, मैन पावर बढ़ाने एवं बजट में प्रावधान किए जाने की बात भी कही। उन्होंने अपर सचिव वन को ईटीडीबी के लिए नया हैड खोले जाने के निर्देश भी दिए, ताकि यूटीडीबी की भांति ईटीडीबी को भी ग्रांट दी जा सके। इको टूरिज्म साइट्स के इको टूरिज्म डेवेलपमेंट बोर्ड के माध्यम से संचालन हेतु शीघ्र ही एमओयू भी किया जाए।
मुख्य सचिव ने ईको टूरिज्म से सम्बन्धित हाईपावर समिति की बैठक प्रत्येक माह आयोजित कराए जाने की बात भी कही। उन्होंने प्रदेशभर में पर्यटन के लिए फॉर्मल ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के बाद सर्टिफिकेट भी प्रदान किया जाए। उन्होंने कहा कि सर्टिफिकेशन को एक ही जगह एंकर किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने प्रशिक्षण प्रमाणीकरण के लिए पर्यटन विभाग को जिम्मेदारी दिए जाने की बात कही। कहा कि उच्च शिक्षा विभाग से भी इसके लिए सुझाव लिए जाएं।
इस अवसर पर सचिव दीपेन्द्र कुमार चौधरी, पीसीसीएफ रंजन कुमार मिश्रा, सीसीएफ ईको टूरिज्म पी.के. पात्रो एवं अपर सचिव हिमांशु खुराना सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
जाम की जड़ बना निजी वाहन, सार्वजनिक परिवहन पीछे
देहरादून। देहरादून में निजी और व्यावसायिक वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है, जिससे शहर की यातायात व्यवस्था को संभालना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। वर्ष 2025 में जिले की सड़कों पर कुल 91,782 नए वाहन उतरे, जो बीते एक दशक में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है।
कोरोना काल के बाद लगातार बढ़ रही संख्या
दून आरटीओ के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2016 में करीब 60 हजार वाहनों का पंजीकरण हुआ था। वहीं कोरोना महामारी के दौरान वर्ष 2020 में यह संख्या घटकर 47,383 रह गई। हालांकि इसके बाद वाहनों की संख्या में लगातार इजाफा दर्ज किया गया। वर्ष 2023 में पहली बार पंजीकरण का आंकड़ा 80 हजार के पार पहुंचा और वर्ष 2025 में यह बढ़कर 91 हजार से अधिक हो गया।
दुपहिया और निजी कारों की भरमार
वर्ष 2025 में पंजीकृत वाहनों में सबसे अधिक हिस्सेदारी दुपहिया वाहनों की रही। आंकड़ों के मुताबिक 60,043 दोपहिया वाहन पंजीकृत हुए, जबकि 23,213 निजी कारें सड़कों पर उतरीं। व्यावसायिक श्रेणी में 2,444 थ्री-व्हीलर और 1,638 हल्के मालवाहक वाहन दर्ज किए गए। इसके अलावा बस और ट्रक जैसे भारी वाहनों की संख्या मात्र 331 रही।
जाम की मुख्य वजह बने निजी वाहन
विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक परिवहन की तुलना में निजी वाहनों की बढ़ती संख्या ही देहरादून में लगातार लगने वाले जाम की सबसे बड़ी वजह बनती जा रही है। सीमित सड़क चौड़ाई और बढ़ता ट्रैफिक दबाव शहर की यातायात व्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ डाल रहा है।
टैक्स बढ़ोतरी और जीएसटी में कटौती का असर
आरटीओ अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2025 में वाहन पंजीकरण के आंकड़े रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे। हालांकि सितंबर तक वाहन कर में बढ़ोतरी की गई थी, लेकिन इसके बाद जीएसटी दरों में कमी आने से वाहनों की कीमतें घटीं, जिसका असर राजस्व पर पड़ा और टैक्स संग्रह में नुकसान दर्ज किया गया।
तेजी से बढ़ते वाहनों की संख्या ने एक बार फिर देहरादून में ट्रैफिक प्रबंधन और सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने की जरूरत को रेखांकित कर दिया है।
देहरादून। स्टेट प्रेस क्लब उत्तराखंड देहरादून के वार्षिक चुनाव में विश्वजीत सिंह नेगी पुनः अध्यक्ष निर्वाचित हुए। बीजापुर अतिथि गृह में आयोजित वार्षिक निर्वाचन में पूरे प्रदेश से वरिष्ठ पत्रकारों ने भाग लिया। संपूर्ण प्रदेश के प्रेस क्लब, प्रेस यूनियनों के प्रतिनिधियों ने चुनाव प्रक्रिया में भाग लिया। चुनाव अधिकारी दिनेश शास्त्री ने कहा कि सभी पदाधिकारी निर्विरोध सर्वसम्मति से चुने गए। चुनाव सौहार्द्रपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।
निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि अध्यक्ष विश्वजीत सिंह नेगी के अतिरिक्त उपाध्यक्ष – संजय तलवाड़ (हल्द्वानी- नैनीताल), गोविंद सिंह बिष्ट (टिहरी गढ़वाल) और श्रीमती दीपिका रावत भंडारी (देहरादून) सर्वसम्मति से निर्वाचित हुए जबकि वरिष्ठ पत्रकार चंद्रशेखर जोशी (देहरादून) महामंत्री चुने गए। इसी तरह नैनीताल के साकेत अग्रवाल , उत्तरकाशी के चिरंजीवी सेमवाल, उधम सिंह नगर के हरीश मेहरा और दीपक नौटियाल सचिव चुने गए।

हरिद्वार के ज्ञान प्रकाश पांडेय कोषाध्यक्ष और रामनगर (नैनीताल) के कार्तिक बिष्ट संप्रेक्षक निर्वाचित घोषित किए गए। इसके अतिरिक्त शंकर दत्त घिल्डियाल (उत्तरकाशी), कृष्ण गोविंद कँसवाल (टिहरी), लक्ष्मण राणा (चमोली), हरि नारायण अग्रवाल (उधम सिंह नगर), रमेश चंद पांडे ‘ कृषक’ (बागेश्वर), जगदीश राय (चंपावत), हरीश भंडारी (अल्मोड़ा), राहुल दरम्याल (नैनीताल), बद्री नौटियाल (रुद्रप्रयाग), अनिल बहुगुणा (पौड़ी), निशांत चौधरी (हरिद्वार) चुने गए।
इसके साथ ही विशेष आमंत्रित सदस्य के तौर पर अनुज अग्रवाल (देहरादून), डॉ. सुभाष गुप्ता, डॉ.विजय धस्माना और वरिष्ठ पत्रकार परमिंदर कुमार गोस्वामी को स्टेट प्रेस क्लब का संरक्षक मनोनीत किया गया।
निर्वाचन अधिकारी दिनेश शास्त्री ने शांतिपूर्ण ढंग से निर्वाचन संपन्न कराने में सहयोग के लिए सभी प्रतिनिधियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। नवनिर्वाचित अध्यक्ष विश्वजीत नेगी ने कहा कि संगठन का शपथ ग्रहण समारोह शीघ्र आयोजित होगा जिसमें सम्पूर्ण प्रदेश से पत्रकारगण भाग लेंगे।
पर्यावरण संरक्षण के साथ रोजगार, हिमालयी इलाकों में सीबकथोर्न की नई पहल
देहरादून। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रदेश सरकार औषधीय और पोषक तत्वों से भरपूर सीबकथोर्न फल के उत्पादन को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देने की तैयारी कर रही है। दुर्गम और सीमावर्ती इलाकों में सीमित खेती के विकल्पों के बीच सीबकथोर्न को आजीविका के मजबूत साधन के रूप में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। पिथौरागढ़ जिले की दारमा, व्यास और चौदास घाटियों में इस दिशा में ठोस पहल शुरू हो चुकी है।
पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका
सीबकथोर्न न केवल औषधीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी इसकी बड़ी भूमिका मानी जाती है। इसकी मजबूत जड़ें पहाड़ी क्षेत्रों में भूमि कटाव को रोकने में मददगार हैं। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में रेतीली और ढलानदार जमीन पर यह पौधा प्राकृतिक सुरक्षा कवच का काम करता है। व्यास घाटी के गरव्यांग गांव को सीबकथोर्न उत्पादन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किए जाने की योजना है।
सरकारी सहयोग से बढ़ रहा दायरा
राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड की आर्थिक सहायता से वन विभाग पिथौरागढ़ जिले के धारचूला विकासखंड की दारमा, व्यास और चौदास घाटियों में सीबकथोर्न की खेती को प्रोत्साहित कर रहा है। हालांकि प्रदेश में इसका उत्पादन अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन बढ़ती मांग को देखते हुए इसे व्यवस्थित रूप से विस्तार देने की योजना बनाई जा रही है। वैश्विक स्तर पर चीन सीबकथोर्न का सबसे बड़ा उत्पादक है, जिससे इसके व्यावसायिक महत्व का अंदाजा लगाया जा सकता है।
औषधीय गुणों से भरपूर फल
सीबकथोर्न को पोषक तत्वों का भंडार माना जाता है। इसका उपयोग खांसी, एलर्जी, त्वचा और नेत्र रोगों के उपचार में किया जाता है। इसमें विटामिन सी, ए, ई, के और बी समूह के कई विटामिन, एंटीऑक्सीडेंट, कैरोटिनॉयड, अमीनो एसिड और आवश्यक फैटी एसिड प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इसके फल के साथ-साथ पत्तियों का भी औषधीय और न्यूट्रास्यूटिकल उपयोग किया जाता है।
कई गंभीर बीमारियों में उपयोगी
विशेषज्ञों के अनुसार सीबकथोर्न का उपयोग कैंसर, गुर्दा रोग, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हृदय रोग और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक माना जाता है। यही वजह है कि आयुर्वेदिक और न्यूट्रास्यूटिकल उद्योग में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।
बाजार में ऊंची कीमत, किसानों को मिलेगा लाभ
सीबकथोर्न फल से तैयार जूस की कीमत बाजार में 500 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच चुकी है। सरकार का मानना है कि इसकी व्यावसायिक खेती से सीमावर्ती और उच्च हिमालयी क्षेत्रों के किसानों की आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
रीप योजना के तहत बनेगी विस्तृत कार्ययोजना
ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि (रीप) योजना के तहत पर्वतीय जिलों में सीबकथोर्न की खेती को संगठित रूप से बढ़ावा देने की कार्ययोजना तैयार की जा रही है। पिथौरागढ़, चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और टिहरी के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में संभावनाओं का आकलन कर स्थानीय लोगों को प्रशिक्षण और प्रोत्साहन दिया जाएगा। ग्राम्य विकास विभाग के सचिव धीराज गर्ब्याल के अनुसार, इस पहल से पहाड़ी क्षेत्रों में स्वरोजगार और सतत विकास को नई दिशा मिलेगी।
वन्यजीव हमले में पिछले साल में 68 मौतें और 488 लोग घायल हुए
देहरादून। राज्य में मानव और वन्यजीवों के बीच टकराव की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। बीते वर्ष भालू के हमलों ने चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि राज्य गठन के बाद पहली बार भालू के हमलों में सबसे अधिक लोगों की जान गई। आमतौर पर तेंदुए और बाघ के हमलों की घटनाएं सुर्खियों में रहती हैं, लेकिन वर्ष 2025 में भालू के हमलों में अपेक्षाकृत अधिक लोग घायल और हताहत हुए हैं।
वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में वन्यजीवों के हमलों में कुल 68 लोगों की मौत हुई, जबकि 488 लोग घायल हुए। इनमें भालू के हमलों से आठ लोगों की मृत्यु दर्ज की गई, जो वर्ष 2000 के बाद अब तक का सबसे अधिक आंकड़ा है। इसी अवधि में भालू के हमलों में 108 लोग घायल हुए, जबकि तेंदुओं के हमलों में 102 लोग घायल हुए हैं।
तेंदुआ, बाघ और सर्पदंश से भी गईं कई जानें
तेंदुओं के हमलों का भय भी बना रहा। वर्ष 2025 में तेंदुओं के हमलों में 19 लोगों की असमय मृत्यु हुई। वहीं बाघ के हमलों में 12 लोगों की जान गई और पांच लोग घायल हुए। इसके अलावा सर्पदंश की घटनाओं में 18 लोगों की मौत और 122 लोगों के घायल होने की पुष्टि हुई है।
इस संबंध में प्रमुख वन संरक्षक रंजन मिश्रा का कहना है कि मानव–वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए विभाग निरंतर प्रयास कर रहा है। उन्होंने बताया कि आगामी मानसून के दौरान उन वन प्रभागों में, जहां भालू की मौजूदगी अधिक है, उनके प्राकृतिक भोजन से जुड़ी प्रजातियों का रोपण किया जाएगा, ताकि भालू आबादी वाले क्षेत्रों की ओर कम आएं। इसके साथ ही सुरक्षा और निगरानी से जुड़े अन्य कदम भी उठाए जा रहे हैं।
रेस्क्यू और सुरक्षा के लिए मिलेंगे 11 करोड़ रुपये
मानव–वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण और रेस्क्यू ऑपरेशन को मजबूत करने के लिए वन विभाग को आपदा प्रबंधन विभाग से 11 करोड़ रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी। इस राशि से ट्रैंक्यूलाइज गन, रेस्क्यू उपकरण और अन्य आवश्यक संसाधनों की खरीद की जाएगी।
पिछले पांच वर्षों में वन्यजीव हमलों का आंकड़ा
2020: 67 मौतें, 324 घायल
2021: 71 मौतें, 361 घायल
2022: 82 मौतें, 325 घायल
2023: 66 मौतें, 325 घायल
2024: 84 मौतें, 512 घायल
2025: 68 मौतें, 488 घायल
बढ़ते आंकड़े इस बात की ओर इशारा करते हैं कि मानव–वन्यजीव संघर्ष राज्य के लिए एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है, जिससे निपटने के लिए दीर्घकालिक और ठोस रणनीति की आवश्यकता है।
रायपुर–डालनवाला क्षेत्र में दो पार्कों का ₹90 लाख की लागत से जीर्णोद्धार एवं निर्माण कार्य प्रारंभ
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के हरित विकास, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक सुविधाओं के विस्तार के संकल्प को धरातल पर उतारते हुए मसूरी–देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा राजधानी देहरादून के रायपुर विधानसभा क्षेत्र में दो महत्वपूर्ण पार्कों के निर्माण एवं जीर्णोद्धार की दिशा में ठोस पहल की गई है। लगभग ₹90 लाख की लागत से इन दोनों पार्कों को आधुनिक, पर्यावरण–अनुकूल एवं जनोपयोगी स्वरूप दिया जा रहा है।
इसी क्रम में आज रायपुर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत सामुदायिक भवन के समीप, एमडीडीए कॉलोनी, चंद्र रोड, डालनवाला, देहरादून में प्रस्तावित पार्क का विधिवत शिलान्यास रायपुर विधायक माननीय उमेश शर्मा ‘काऊ’ द्वारा किया गया। शिलान्यास कार्यक्रम में क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, स्थानीय पदाधिकारी, एमडीडीए के अधिकारी, कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। यह पार्क न केवल क्षेत्रवासियों के लिए हरियाली और सुकून का केंद्र बनेगा, बल्कि बच्चों, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए स्वास्थ्य, मनोरंजन एवं सामाजिक गतिविधियों का साझा मंच भी प्रदान करेगा।
एमडीडीए द्वारा बताया गया कि इसके अतिरिक्त नेहरू कॉलोनी क्षेत्र का पार्क पहले ही पूर्ण रूप से तैयार कर लिया गया है। इस पार्क में नागरिक सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए फुटपाथ निर्माण, व्यापक प्लांटेशन, स्टेज का निर्माण, पेंटिंग वर्क, तथा मैदान में उच्च गुणवत्ता की घास लगाई गई है। पार्क के सौंदर्यीकरण के साथ-साथ इसे पर्यावरणीय दृष्टि से भी सुदृढ़ बनाया गया है, ताकि शहरी क्षेत्र में हरित आवरण को बढ़ावा मिल सके।इस पार्क को इस प्रकार डिजाइन किया जा रहा है कि यह हर आयु वर्ग के लोगों की आवश्यकताओं को पूरा कर सके।

रायपुर विधायक माननीय उमेश शर्मा ‘काऊ’ का बयान
रायपुर विधायक उमेश शर्मा ‘काऊ’ ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड में विकास के साथ–साथ पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। रायपुर विधानसभा क्षेत्र में पार्कों का निर्माण और जीर्णोद्धार उसी सोच का परिणाम है। शहरी जीवन में हरियाली, स्वच्छ वातावरण और सार्वजनिक स्थलों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। एमडीडीए द्वारा किए जा रहे ये कार्य न केवल क्षेत्र की सुंदरता बढ़ाएंगे, बल्कि आम नागरिकों के स्वास्थ्य और सामाजिक जीवन को भी बेहतर बनाएंगे। मैं उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी सहित एमडीडीए की पूरी टीम को इस सराहनीय पहल के लिए बधाई देता हूं और आशा करता हूं कि भविष्य में भी ऐसे जनहितकारी कार्य निरंतर होते रहेंगे।
एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी का बयान
एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि प्राधिकरण मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के हरित विकास विजन के अनुरूप शहरी क्षेत्रों में पर्यावरण–अनुकूल अधोसंरचना विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। पार्कों का निर्माण केवल सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि नागरिकों को स्वस्थ जीवनशैली के लिए प्रेरित करने का माध्यम है। रायपुर विधानसभा क्षेत्र में विकसित किए जा रहे ये पार्क आधुनिक सुविधाओं से युक्त होंगे और आने वाले वर्षों में शहरी हरियाली को मजबूत आधार प्रदान करेंगे।
एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया का बयान
एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि पार्कों के निर्माण एवं जीर्णोद्धार कार्यों में गुणवत्ता, समयबद्धता और पारदर्शिता का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। नेहरू कॉलोनी पार्क का कार्य पूर्ण हो चुका है और डालनवाला पार्क का निर्माण भी निर्धारित समय में पूरा किया जाएगा। हमारा लक्ष्य नागरिकों को सुरक्षित, स्वच्छ और सुंदर सार्वजनिक स्थल उपलब्ध कराना है। एमडीडीए द्वारा किए जा रहे ये कार्य स्पष्ट रूप से यह दर्शाते हैं कि राज्य सरकार और विकास प्राधिकरण मिलकर राजधानी देहरादून को हरित, स्वच्छ और नागरिक– अनुकूल शहर बनाने की दिशा में निरंतर प्रयासरत हैं। भविष्य में भी ऐसे अनेक जनहितकारी परियोजनाओं के माध्यम से शहरी विकास को नई दिशा दी जाएगी।
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय से समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत चलाई जा रही विभिन्न पेंशन योजनाओं के लाभार्थियों के बैंक खातों में डी.बी.टी. प्रणाली के माध्यम से दिसंबर माह की पेंशन किश्त का भुगतान किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने 09 लाख 43 हजार 964 लाभार्थियों के खातों में कुल 140 करोड़ 26 लाख 97 हजार रुपये की राशि ऑनलाइन जारी की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार समाज के कमजोर वर्गों, वृद्धजनों, विधवाओं, दिव्यांगजनों एवं निराश्रितों के सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तीकरण के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पारदर्शी शासन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सभी प्रकार के भुगतान अब डी.बी.टी. प्रणाली से सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में किए जा रहे हैं, जिससे समयबद्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है।
मुख्यमंत्री ने समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिये कि वृद्धावस्था पेंशन के लिए 60 साल की आयु होते ही राज्य के जो लोग पात्रता की श्रेणी में आ रहे हों, उनका 59 साल की आयु से ही चिन्हीकरण कर लिया जाय, ताकि पात्रता की श्रेणी में आने पर उन्हें शीघ्र पेंशन का भुगतान किया जा उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि समाज के प्रत्येक पात्र लाभार्थी को किसी भी प्रकार की कठिनाई के बिना योजनाओं का लाभ मिले। उन्होंने निर्देश दिए कि पेंशन योजनाओं के अंतर्गत कोई भी पात्र व्यक्ति वंचित न रहे, इसके लिए नियमित सत्यापन एवं निगरानी की प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जनहित की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है।
इस असवर पर निदेशक समाज कल्याण डॉ. संदीप तिवारी, अपर सचिव प्रकाश चन्द्र एवं समाज कल्याण विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।
