ईको टूरिज्म को मिलेगी दिशा, वार्षिक कैलेंडर और नई गतिविधियों की रूपरेखा तय..
उत्तराखंड: सरकार ने राज्य में पर्वतारोहण और ट्रेकिंग जैसी साहसिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब इन गतिविधियों के लिए सभी आवश्यक अनुमतियों की प्रक्रिया को आसान बनाने हेतु सिंगल विंडो सिस्टम विकसित किया जाएगा। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने वन विभाग को इस नई व्यवस्था को शीघ्र लागू करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रणाली इस प्रकार तैयार की जाए कि देश और विदेश से आने वाले पर्यटक केवल एक बार आवेदन करके सभी आवश्यक मंजूरी प्राप्त कर सकें। सरकार का उद्देश्य है कि पर्वतीय पर्यटन को प्रोत्साहन मिले और उत्तराखंड को एक सुरक्षित व व्यवस्थित साहसिक पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित किया जा सके। वह शुक्रवार को सचिवालय में ईको टूरिज्म गतिविधियों को बढ़ावा देने के संबंध में अधिकारियों की बैठक ले रहे थे। मुख्य सचिव ने कहा कि सभी गतिविधियों को निर्धारित समय पर शुरू किया जा सके इसके लिए वार्षिक कैलेंडर तैयार किया जाए और इसे योजनाओं के कैलेंडर के अनुसार संचालित किया जाए।
पर्यटकों की संख्या एवं राजस्व के लक्ष्यों को बड़ा रखने के निर्देश..
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रकृति से बिना छेड़छाड़ किए, फॉरेस्ट वॉकिंग और नेचर ट्रेल्स जैसी गतिविधियों को अधिक से अधिक प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने शुक्रवार को सचिवालय में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में कहा कि छोटे-छोटे प्रयासों से भी ईको टूरिज्म को मजबूती दी जा सकती है। इसके लिए वन विभाग को कैंपिंग साइट्स की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि पर्यटक प्राकृतिक वातावरण में सुरक्षित और रोमांचकारी अनुभव प्राप्त कर सकें।
मुख्य सचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य में ईको टूरिज्म को एक राजस्व सृजन के मजबूत स्रोत के रूप में विकसित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को पर्यटकों की संख्या और राजस्व के लक्ष्यों को बड़ा रखने की बात कही, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके और स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी बढ़ें। राज्य सरकार के इन प्रयासों से उत्तराखंड आने वाले पर्यटकों को न केवल प्राकृतिक सुंदरता का आनंद मिलेगा, बल्कि स्थानीय संस्कृति और जैवविविधता का भी अनुभव होगा।
कहा कि आने वाले समय में योजनाएं लक्ष्यों के अनुरूप बनाई जाएं। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि अलग-अलग प्रभागों में अलग-अलग संचालित हो रही पर्यटन गतिविधियों अथवा योजनाओं के लिए अलग-अलग वेबसाइट्स के बजाय एक एकीकृत वेबसाइट तैयार की जाए ताकि पर्यटकों को एक ही जगह पर सभी सभी पर्यटन गतिविधियों की संपूर्ण जानकारी मिल सके।
2000 ग्रेड-पे वाले कर्मियों को EO की कुर्सी, निकायों में नियमों की अनदेखी पर उठे सवाल..
उत्तराखंड: नगर निकायों को लेकर एक चौंकाने वाला प्रशासनिक फैसला सामने आया है, जहां संवर्ग और ग्रेड-पे के मानकों को दरकिनार करते हुए ऐसे कर्मचारियों को अधिशासी अधिकारी (EO) का जिम्मा सौंपा गया है, जो नियमों के अनुसार कभी इस पद के योग्य नहीं थे। पालिका लेखा सेवा के कर्मचारियों को भी EO का प्रभार ‘रेवड़ी’ की तरह बांट दिया गया है। यह नियुक्ति प्रक्रिया योग्यता और सेवा नियमों की पूरी तरह अनदेखी करती नजर आ रही है।
उत्तराखंड सरकार ने पिछले पांच वर्षों में 15 से अधिक नए नगर निकायों का गठन किया है। इन निकायों को काफी बड़ा बजट भी आवंटित किया गया है, लेकिन इतनी महत्वपूर्ण संस्थाओं की बागडोर प्रभारी अधिशासी अधिकारियों (EO) के हवाले कर दी गई हैं। जिनमें कई नियमित संवर्ग के बाहर से अनुभव और योग्यता से परे नियुक्त किए गए हैं। वर्तमान में 46 नगर निकाय ऐसे हैं, जहां स्थायी अधिशासी अधिकारियों की जगह प्रभारी व्यवस्था चल रही है।करोड़ों के बजट, विकास योजनाओं और संसाधनों की जिम्मेदारी ऐसे अधिकारियों को सौंप दी गई है, जिनकी नियुक्ति प्रक्रियाएं प्रशासनिक नियमों पर सवाल खड़े करती हैं। निकायों में यह प्रभारी व्यवस्था नीतिगत पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन और स्थानीय प्रशासनिक जवाबदेही को प्रभावित कर रही है।
नगर निकायों में प्रभारी अधिशासी अधिकारियों (EO) की नियुक्ति को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि 2000 ग्रेड-पे वाले उन कर्मचारियों को भी EO की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो अपने पूरे सेवा काल में पदोन्नति के बाद भी इस पद तक नहीं पहुंच सकते। EO जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद जिन पर निकायों का बजट, विकास और नीतिगत फैसलों की ज़िम्मेदारी होती है, अब ऐसे कर्मचारियों को सौंपे जा रहे हैं जो संवर्गीय रूप से अयोग्य हैं। इससे न केवल सेवा नियमों की अवहेलना हो रही है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं। प्रभारी व्यवस्था को “रेवड़ी वितरण” की तरह लागू करने पर अब अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच भ्रांतियां और असंतोष भी सामने आ रहा है।
उत्तराखंड को मिला भूमि सुधार का नया कानून, राज्यपाल ने दी विधेयकों को स्वीकृति..
उत्तराखंड: प्रदेश में सशक्त भू कानून विधेयक को आखिरकार राजभवन से मंजूरी मिल गई है। इसके साथ ही 9 अन्य विधेयकों पर भी राज्यपाल ने हस्ताक्षर कर दिए हैं। ये सभी विधेयक फरवरी माह में विधानसभा सत्र के दौरान पारित हुए थे और अब इन पर राज्यपाल की औपचारिक स्वीकृति के बाद ये कानून बनने की प्रक्रिया में प्रवेश कर चुके हैं। यह मंजूरी राज्य सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, खासकर भू कानून के संदर्भ में, जिसे लेकर लंबे समय से जनजागरण और मांगें उठती रही हैं।
ये विधेयक हुए पारित..
उत्तराखंड निरसन विधेयक, 2025
उत्तराखंड नगर एवं ग्राम नियोजन तथा विकास (संशोधन) विधेयक, 2025.
उत्तराखंड लोक सेवा (कुशल खिलाड़ियों के लिये क्षैतिज आरक्षण) (संशोधन) विधेयक, 2025
उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश और भूमि व्यवस्था अधिनियम 1950) (संशोधन) विधेयक, 2025
उत्तराखंड निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2025
उत्तराखंड माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2025
उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1959) (संशोधन) विधेयक, 2024 प्रवर समिति द्वारा मूलरूप में यथासंस्तुत
उत्तराखंड में हज यात्रियों के लिए जिलावार टीकाकरण शिविर शुरू, स्वास्थ्य सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता..
उत्तराखंड: उत्तराखंड से हज यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए राहत भरी खबर है। राज्य हज समिति ने हज यात्रा 2025 के दृष्टिगत यात्रियों की स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए एक विशेष टीकाकरण अभियान शुरू किया है। अभियान के तहत हज यात्रियों को मैनिनजाइटिस, सीजनल इन्फ्लूएंजा और ओरल पोलियो वैक्सीन (OPV) के टीके लगाए जा रहे हैं। समिति का कहना हैं कि यह टीकाकरण सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों और नामित हज कैंप स्थलों पर निशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। राज्य हज समिति के अनुसार इस पहल का उद्देश्य हज यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को संभावित संक्रमणों से सुरक्षित रखना और सामूहिक स्वास्थ्य जोखिम को कम करना है। सभी यात्रियों को टीकाकरण के लिए निर्धारित समय और स्थान की जानकारी एसएमएस, कॉल और जिला स्तर पर सूचना केंद्रों के माध्यम से दी जा रही है।
राज्य हज समिति के अधिशासी अधिकारी ने इस संबंध में महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य को पत्र भेजकर आवश्यक प्रबंध सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। यह टीकाकरण अभियान विगत वर्षों की तरह इस बार भी राज्य के विभिन्न जिलों में आयोजित किया जा रहा है। जिनमें डॉक्टरों की टीम, मेडिकल स्टाफ, वैक्सीन बैच नंबर, एक्सपायरी डेट और हेल्थ कार्ड पर मोहर जैसी हर बारीकी का ध्यान रखा जाएगा।
जानिए कब और कहा लगेंगे वैक्सीनेशन कैंप..
ऊधमसिंहनगर जिले के जसपुर, काशीपुर और बाजपुर क्षेत्र के 202 हज यात्रियों के लिए टीकाकरण 3 मई 2025 को होटल कार्बेट, मुरादाबाद रोड, डिज़ाइन सेंटर के पास, काशीपुर में आयोजित होगा।
रामनगर (नैनीताल) क्षेत्र के 30 हज यात्रियों का टीकाकरण 3 मई 2025 को ईदगाह, वार्ड संख्या 11, मोहल्ला खताड़ी, रामनगर में किया जाएगा।
हल्द्वानी, अल्मोड़ा, बागेश्वर और चंपावत क्षेत्र के 63 यात्रियों का टीकाकरण 4 मई को हल्द्वानी में होगा।
हरिद्वार और पौड़ी गढ़वाल के 325 हज यात्रियों का टीकाकरण 6 मई 2025 को हज हाउस, पिरान कलियर, रुड़की में आयोजित होगा।
देहरादून के 304 हज यात्रियों का टीकाकरण 7 मई 2025 को मदरसा जामिया उल उलूम, प्रीति एन्क्लेव, माजरा, देहरादून में किया जाएगा।
चारधाम यात्रा को लेकर तीर्थयात्रियों में उत्साह, जीएमवीएन की बुकिंग सात करोड़ के पार..
उत्तराखंड: अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर चारधाम यात्रा 2025 का विधिवत शुभारंभ हो गया है। इस अवसर पर पर्यटन, धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने पर देशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। मंत्री सतपाल महाराज का कहना हैं कि चारधाम यात्रा उत्तराखंड की संस्कृति, अध्यात्म और आस्था का प्रतीक है। मैं सभी श्रद्धालुओं के लिए मंगलमय यात्रा की कामना करता हूँ। बता दे कि चारधाम यात्रा के अंतर्गत गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम आते हैं, और इसका शुभारंभ हर वर्ष अक्षय तृतीया से होता है। इस पवित्र यात्रा के साथ ही पूरे उत्तराखंड में धार्मिक उत्सव और आस्था का वातावरण बन गया है।
महाराज का कहना हैं कि चारधाम यात्रा के लिए गढ़वाल मंडल विकास निगम (GMVN) के गेस्ट हाउसों में अब तक 7,85,85,579 ऑनलाइन और ऑफलाइन बुकिंग हो चुकी हैं, जो अब तक की सबसे बड़ी संख्या में से एक मानी जा रही है। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इस वर्ष पंजीकरण प्रक्रिया को और अधिक सरल और बहुविकल्पीय बना दिया हैं। चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए ऑनलाइन, ऑफलाइन पंजीकरण, मोबाइल एप से पंजीकरण के साथ-साथ इस वर्ष आधार नंबर से भी पंजीकरण की सुविधा प्रदान की गई है। ऑफलाइन पंजीकरण 28 अप्रैल 2025 से शुरू कर दिए गए हैं।
यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं में अभी तक ऑनलाइन एवं ऑफलाइन काउंटरों के माध्यम से कुल 22,67,190 यात्रियों ने पंजीकरण कराया है। मंत्री महाराज ने कहा कि चारधाम यात्रा में सुरक्षा और ट्रैफिक पर नजर रखने के लिए 18 ड्रोन सक्रिय हैं। इसके अलावा 2000 सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है। यात्रा मार्ग पर 15 सुपर जोन, 136 पार्किंग और 56 होल्डिंग एरिया बनाए गए हैं। यातायात का ज्यादा प्रेशर देखते हुए होल्डिंग एरिया में श्रद्धालुओं को रोका जाएगा और यहीं पर उन्हें सभी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
चारधाम यात्रा- 39 बसों से 1400 तीर्थयात्री हुए रवाना, तीर्थयात्रियों का माल्यार्पण कर हुआ स्वागत..
उत्तराखंड: चारधाम यात्रा का शुभारंभ आज गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ हो गया। इसी क्रम में चारधाम यात्रा संयुक्त रोटेशन यात्रा व्यवस्था समिति की ओर से 39 बसों में करीब 1400 तीर्थयात्री रवाना हुए। सभी यात्री ऋषिकेश की विभिन्न धर्मशालाओं में ठहरे हुए थे, जहां से उनका यात्रा पंजीकरण भी कराया गया। तीर्थयात्रियों को गंगोत्री और यमुनोत्री के लिए रवाना किया गया, जहां आज विधिवत श्रद्धालुओं के लिए कपाट खुल गए है। यात्रा समिति द्वारा समन्वय के साथ सुरक्षित और व्यवस्थित यात्रा संचालन सुनिश्चित किया गया। श्रद्धालुओं में यात्रा को लेकर उत्साह और श्रद्धा का वातावरण देखा गया। प्रशासन और यात्रा समिति ने यात्रियों से अपील की है कि वे सभी दिशा-निर्देशों का पालन करें और किसी भी सहायता के लिए संबंधित अधिकारियों से संपर्क करें।
चारधाम यात्रा पर रवाना हो रहे तीर्थयात्रियों का ट्रांसपोर्ट यूनियन की ओर से माल्यार्पण कर भव्य स्वागत किया गया। धर्मशालाओं में ठहरे श्रद्धालु भोले बाबा के भजनों से वातावरण को भक्तिमय बना रहे हैं। मंगलवार सुबह ऋषिकेश पहुंचने वाले तीर्थयात्रियों का तुरंत पंजीकरण किया गया, ताकि उनकी यात्रा में कोई विलंब न हो। पंजीकरण के बाद सभी श्रद्धालु नियमानुसार चारधाम यात्रा के लिए रवाना हुए। रोटेशन यात्रा समिति के मीडिया प्रभारी नवीन तिवारी का कहना हैं कि इस बार प्रशासन द्वारा व्यवस्थाएं बेहतर की गई हैं, जिससे यात्रियों में खासा उत्साह और संतोष देखने को मिल रहा है। शहर की धर्मशालाएं भक्ति संगीत और हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठी हैं, जिससे चारधाम यात्रा का आरंभ अत्यंत भावपूर्ण हो गया। प्रशासन और समिति की ओर से यह सुनिश्चित किया गया है कि श्रद्धालुओं को यात्रा के दौरान हर सुविधा उपलब्ध हो और वे सुरक्षित व सुगम यात्रा का अनुभव कर सकें।
चारधाम यात्रा- उत्तरकाशी प्रशासन पूरी तरह अलर्ट, श्रद्धालुओं के स्वागत को हर स्तर पर तैयारी..
उत्तराखंड: गंगोत्री और यमुनोत्री धाम की यात्रा पर आ रहे तीर्थयात्रियों को इस बार, पार्किंग से लेकर साफ सफाई की शानदार व्यवस्था देखने को मिलेगी। इस बार आठ स्थानों पर स्मार्ट टॉयलेट कॉम्प्लेक्स के साथ ही कई जगह पार्किंग सुविधा विकसित की गई है। यात्रा शुरु होने से एक दिन पहले जिलाधिकारी डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट ने श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए कहा कि यात्री सुविधाओं को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते यात्रा मार्ग पर शौचालय, पार्किंग और यातायात प्रबंधन को सुदृढ़ किया गया है। चारधाम यात्रा 2025 के सुगम, सुरक्षित और सफलतापूर्वक संचालन को लेकर जिला प्रशासन द्वारा व्यापक तैयारी की गई है। यात्रियों की बढ़ती संख्या और वाहनों के बढ़ते दबाव को देखते हुए प्रमुख मार्गों को सुगम और सुरक्षित बनाने का प्रयास किया गया है।
यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर खरसाली, जानकीचट्टी, बड़कोट और नौगांव सहित कई प्रमुख स्थानों पर पार्किंग सुविधाओं को सुदृढ़ किया गया है। वहीं गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर हीना में सरफेस पार्किंग, उत्तरकाशी मुख्यालय में मल्टी स्टोरी पार्किंग, गंगोत्री में मल्टी स्टोरी पार्किंग एवं रामलीला मैदान, जोशियाड़ा और बंदरकोट जैसे क्षेत्रों में सरफेस पार्किंग स्थलों का विस्तार किया गया है।
जिलाधिकारी का कहना हैं कि यात्रा मार्गों पर मूलभूत सुविधाएं जैसे बिजली, पानी और शौचालय आदि की व्यवस्थाएं दुरुस्त की गई हैं। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए जानकीचट्टी में आधुनिक शौचालय का निर्माण किया गया है, जिससे स्वच्छता और सुविधा दोनों सुनिश्चित हो सके। यात्रा मार्ग पर आठ स्मार्ट टॉयलेट काम्प्लेक्स संचालित किए जा रहे हैं।
इस बार बद्रीनाथ धाम में दिखेगा बदलाव, श्रद्धालुओं को दिखेगा नया रूप..
उत्तराखंड: इस बार बद्रीनाथ धाम श्रद्धालुओं के लिए पहले से कहीं अधिक खुले और व्यवस्थित रूप में नजर आएगा। बद्रीनाथ मास्टर प्लान के तहत जो पुनर्विकास कार्य किए जा रहे हैं, उनका उद्देश्य धाम को आध्यात्मिक गरिमा के साथ-साथ आधुनिक सुविधाओं से भी युक्त बनाना है। मंदिर क्षेत्र से अव्यवस्थित भवनों और अतिक्रमण को हटाया गया है, जिससे मंदिर अब खुला और भव्य नजर आता है। वही बद्रीनाथ बाजार क्षेत्र में निर्माण और सौंदर्यीकरण कार्य तेजी से चल रहे हैं। तीर्थयात्रियों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए पार्किंग, वॉशरूम, विश्राम गृह, और पैदल मार्गों को बेहतर बनाया जा रहा है। बद्रीनाथ महायोजना मास्टर प्लान के तहत धाम में युद्धस्तर पर निर्माण और भवनों के ध्वस्तीकरण का काम चल रहा है। ताकि चारधाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।
धाम में मास्टर प्लान के दूसरे चरण के कार्य चल रहे हैं। अराइवल प्लाजा का निर्माण अंतिम चरण में पहुंच गया है। इस पर नक्काशीदार पत्थर और लकड़ी लगाकर आकर्षक रूप दिया जा रहा है। बदरीश झील और शेषनेत्र झील के किनारे आकर्षक पत्थर बिछाए गए हैं और आकर्षक लाइट लगा दी गई है। बद्रीनाथ मंदिर के करीब 75 मीटर हिस्से में भवनों का ध्वस्तीकरण कार्य भी तेजी से चल रहा है। दूर से ही मंदिर खाली-खाली नजर आ रहा है। दर्शनों की लाइन के दोनों ओर के सभी भवनों को ध्वस्त कर दिया गया है। बदरीनाथ के शुरुआत देव दर्शनी में तीर्थयात्रियों के लिए व्यू प्वाइंट बनाया जा रहा है।
प्राकृतिक सौंदर्य को निहार सकेंगे..
यहां से यात्री दूर से ही बद्रीनाथ मंदिर और यहां के प्राकृतिक सौंदर्य को निहार सकेंगे। यहां एक विशाल गेट भी बनाया जा रहा है। लोनिवि पीआईयू के अधिशासी अभियंता योगेश मनराल ने कहा कि मास्टर प्लान के कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। बरसात से पहले अधिकांश काम पूर्ण कर लिए जाएंगे। बद्रीनाथ क्षेत्र में अलकनंदा के दोनों ओर से रिवर फ्रंट का काम भी तेजी से चल रहा है। कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग पीआईयू बरसात से पहले यहां अधिक से अधिक कार्यों को पूरा करने पर जोर दे रही है। इसके लिए यहां करीब 400 मजदूर लगाए गए हैं। रिवर फ्रंट के कार्यों से अलकनंद अस्त-व्यस्त नजर आ रही है। नदी में जगह-जगह मलबे के ढेर पड़े हैं। मलबे के कारण नदी का रुख गांधी घाट और ब्रह्मकपाल की ओर ओर हो गया है। यदि मलबे का जल्द निस्तारण नहीं किया गया तो बरसात में नदी का पानी ब्रह्मकपाल से तप्तकुंड तक घुस जाएगा।
चारधाम यात्रा से पहले धामी सरकार की बड़ी सौगात..
प्रदेश के अस्पतालों को मिले 45 विशेषज्ञ डॉक्टर..
उत्तराखंड: चारधाम यात्रा के शुभारंभ से पहले धामी सरकार ने राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में 45 विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति का आदेश जारी कर दिया है। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी आदेश संख्या 293157/2025 के अनुसार, विशेषज्ञ चिकित्सकों को उनके संबंधित विशेषज्ञता के अनुसार जिला चिकित्सालयों, उप जिला चिकित्सालयों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात किया गया है। इनमें सर्जरी, स्त्री एवं प्रसूति रोग (OBS & Gynae), एनेस्थीसिया, बाल रोग (Pediatrics), नेत्र रोग (Ophthalmology), कान-नाक-गला (ENT), फॉरेंसिक मेडिसिन और जनरल मेडिसिन जैसे विभागों के डॉक्टर शामिल हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी मजबूती..
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने जानकारी देते हुए कहा कि सीएम पुष्कर सिंह धामी, स्वास्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत के मार्गदर्शन व निर्देशन में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए विभाग लगातार प्रयासरत है। सीएम धामी व स्वास्थ्य मंत्री के स्पष्ट निर्देश हैं कि सीमांत गाँव के अंतिम छोर पर खड़े ब्यक्ति को भी स्वास्थ्य सेवाओं का पूरा लाभ मिले। स्वास्थ्य सचिव ने बताया सभी डॉक्टर विभाग की तरफ से पीजी करने गए थे। पीजी कोर्स पूर्ण होने के बाद विशेषघ चिकित्सक के रूप में इन सभी की तैनाती विभिन्न जनपदों में कर दी गई है। चारधाम यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के उत्तराखंड आने की संभावना है। ऐसे में स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त रखना सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती से जिलों में आपातकालीन सेवाओं से लेकर सामान्य इलाज तक में उल्लेखनीय सुधार होगा। इससे न केवल यात्रियों को बल्कि स्थानीय जनता को भी त्वरित और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी।
विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती से राज्य के अस्पतालों को मिली बड़ी राहत..
स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने कहा विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को दूर करने का लगातार प्रयास किया जा रहा है। पर्वतीय जिलों के अस्पतालों में पूर्व में भी विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती की गई है। इन चिकित्सकों की तैनाती से राज्य के अस्पतालों को बड़ी राहत मिली है। कई जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों के अभाव के कारण मरीजों को इलाज के लिए बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था। अब सर्जरी, एनेस्थीसिया, स्त्री रोग, बाल रोग और नेत्र रोग जैसे प्रमुख विभागों में विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध होंगी। इससे न केवल आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर होगी, बल्कि सामान्य बीमारियों के इलाज में भी तेजी आएगी। सरकार का यह कदम स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण की दिशा में एक बड़ा परिवर्तन साबित होगा।
किन जिलों को मिले विशेषज्ञ डॉक्टर..
स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने कहा कि इन 45 विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती विशेष रूप से उन जिलों में की गई है, जहां चारधाम यात्रा का सीधा प्रभाव पड़ता है या जहां स्वास्थ्य ढांचे को सुदृढ़ करने की तत्काल आवश्यकता थी। इनमें प्रमुख रूप से पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, चमोली, टिहरी गढ़वाल, अल्मोड़ा, चंपावत, बागेश्वर और हरिद्वार जैसे जिले शामिल हैं। चूंकि चारधाम यात्रा के दौरान उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ जाते हैं, इसलिए सरकार ने हाई-एल्टीट्यूड मेडिसिन, कार्डियक इमरजेंसी और ट्रॉमा केयर के लिए भी अतिरिक्त इंतजाम किए हैं। स्थानांतरण आदेश के तहत कई डॉक्टर ऐसे संवेदनशील जिलों में तैनात किए गए हैं जहां तत्काल विशेषज्ञ सहायता की आवश्यकता होती है।
तेजी से कार्यभार ग्रहण के निर्देश..
स्वास्थ्य विभाग ने संबंधित चिकित्सकों को निर्देश दिए हैं कि वे शीघ्र अपने नवीन तैनाती स्थल पर कार्यभार ग्रहण करें। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई चिकित्सक निर्धारित समय पर कार्यभार नहीं ग्रहण करता है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
भारत सरकार का बड़ा कदम- पाकिस्तान के कई यू-ट्यूब चैनलों पर बैन, सुरक्षा को लेकर उठाया अहम फैसला..
देश-विदेश: पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने कई अहम और निर्णायक फैसले लिए हैं। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने पाकिस्तानी यू-ट्यूब चैनलों पर बैन लगाने का फैसला किया है। अब पाकिस्तान के कई प्रमुख चैनल भारत में दिखाई नहीं देंगे। इस फैसले के तहत आरजु कामजी, पूर्व क्रिकेटर शोएब अख्तर के यू-ट्यूब चैनल और एआरवाई न्यूज जैसे पाकिस्तान के जाने-माने चैनल भारत में उपलब्ध नहीं होंगे। सरकार के इस कदम से साफ है कि राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है और कोई भी ऐसा कंटेंट जो सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है, उसे रोकने की दिशा में यह कदम उठाया गया है।
भड़काऊ और गलत जानकारी दे रहे थे ये चैनल..
गृह मंत्रालय की सिफारिश पर भारत सरकार ने ये फैसला लिया है। सरकार ने पाया कि ये यूट्यूब चैनल भारत, उसकी सेना और सुरक्षा एजेंसियों के खिलाफ भड़काऊ, सांप्रदायिक तनाव फैलाने वाली और झूठी-भ्रामक जानकारियां फैला रहे थे। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान के कई प्रमुख यू-ट्यूब चैनलों पर बैन लगा दिया है। इस कार्रवाई के पीछे इन चैनलों की गतिविधियां संदिग्ध पाई गईं थीं, जो अब राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बन गई थीं। सरकार का कहना है कि इन चैनलों से फेक न्यूज और दुष्प्रचार फैलने का खतरा था, जो देश की सुरक्षा को प्रभावित कर सकते थे। पाकिस्तानी चैनल्स जैसे आरजु कामजी, पूर्व क्रिकेटर शोएब अख्तर के चैनल और एआरवाई न्यूज को अब भारत में देखा नहीं जा सकेगा। केंद्र सरकार ने इस संदर्भ में बिना देरी किए कड़ी कार्रवाई की है, क्योंकि सरकार का मानना है कि ऐसे चैनलों पर तत्काल रोक लगाना जरूरी था ताकि किसी भी प्रकार का गलत प्रचार और अफवाहें फैलने से पहले उन्हें रोका जा सके। इस फैसले से यह संदेश दिया गया है कि भारत राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में कोई भी समझौता नहीं करेगा, और किसी भी प्रकार के विघटनकारी कंटेंट को कड़ा जवाब दिया जाएगा।
पाकिस्तान के इन 16 YouTube चैनलों पर लगा बैन..
डॉन न्यूज (19.6 लाख सब्सक्राइबर)
इरशाद भट्टी (8.27 लाख सब्सक्राइबर)
समा टीवी (1.27 करोड़ सब्सक्राइबर)
एआरवाई न्यूज (1.46 करोड़ सब्सक्राइबर)
बोल न्यूज (78.5 लाख सब्सक्राइबर)
रफ्तार (8.04 लाख सब्सक्राइबर)
द पाकिस्तान रेफरेंस (2.88 लाख सब्सक्राइबर)
जियो न्यूज (1.81 करोड़ सब्सक्राइबर)
समा स्पोर्ट्स (73.5 हजार सब्सक्राइबर)
जीएनएन (35.4 लाख सब्सक्राइबर)
उजैर क्रिकेट (2.88 लाख सब्सक्राइबर)
उमर चीमा एक्सक्लूसिव (1.25 लाख सब्सक्राइबर)
अस्मा शिराजी (1.33 लाख सब्सक्राइबर)
मुनीब फारूक (1.65 लाख सब्सक्राइबर)
सुनो न्यूज एचडी (13.6 लाख सब्सक्राइबर)
राजी नामा (2.70 लाख सब्सक्राइबर)
26 लोगों की हत्या
बता दे कि 22 अप्रैल को कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादियों ने 26 पर्यटकों को मौत के घाट उतार दिया। ये साल 2019 में पुलवामा अटैक के बाद का सबसे घातक हमला बन गया है। इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा आतंकवादी समूह छाया संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली है।
