अन्तर्विभागीय बैडमिंटन प्रतियोगिता आगे भी निरंतर आयोजित होती रहेगी: मुख्यमंत्री
देवभूमि को ‘खेल भूमि’ बनाने की दिशा में उत्तराखंड तेज़ी से आगे बढ़ रहा है
अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधाओं से राज्य बन रहा खेल महाशक्ति
देहरादून- मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि शासकीय कार्यों की व्यस्तता के बीच कार्मिको द्वारा खेल गतिविधियों को अपनाना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि खेल जीवन में अनुशासन लाने के साथ-साथ तनाव को दूर करता है और शरीर को स्वस्थ रखता है। उन्होंने कहा कि निरोगी रहना मनुष्य की सबसे बड़ी पूंजी है और खेल इस दिशा में सबसे प्रभावी माध्यम है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि अन्तर्विभागीय बैडमिंटन प्रतियोगिता भविष्य में भी अनवरत रूप से आगे बढ़ती रहेगी और कर्मचारियों-अधिकारियों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करेगी।
इन विचारों के साथ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को बहुउद्देशीय क्रीड़ा हॉल, परेड ग्राउंड, देहरादून में उत्तराखण्ड सचिवालय बैडमिंटन क्लब द्वारा आयोजित 10वीं अन्तर्विभागीय बैडमिंटन प्रतियोगिता–2025 का शुभारम्भ किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने स्वयं बैडमिंटन खेलकर खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन भी किया। प्रतियोगिता में राज्य के 42 विभागों के कर्मचारी एवं अधिकारी प्रतिभाग कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तराखंड हर क्षेत्र में देश के सामने एक उदाहरण बनकर उभर रहा है। राज्य परिवर्तन की ओर अग्रसर है और नवाचारों, ऐतिहासिक निर्णयों तथा जनहितकारी नीतियों के माध्यम से विकास के नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। हाल ही में उत्तराखंड में पहली बार राष्ट्रीय खेलों का सफल आयोजन किया गया, जिससे राज्य में खेल अवसंरचना और सुविधाओं का उल्लेखनीय विस्तार हुआ है।
उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में खेलों को प्रोत्साहित कर राज्य को ‘खेल भूमि’ के रूप में विकसित करने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि युवा प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने का अवसर मिल सके।
बैडमिंटन क्लब के अध्यक्ष हीरा सिंह बसेड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधाओं का तेजी से विकास हो रहा है। खिलाड़ियों को निरंतर प्रोत्साहन और बेहतर संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे उत्तराखंड एक उभरती हुई खेल महाशक्ति के रूप में पहचान बना रहा है।
इस अवसर पर विधायक खजान दास, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, बैडमिंटन क्लब के अध्यक्ष हीरा सिंह बसेड़ा, प्रमोद कुमार, भूपेंद्र बसेड़ा, जे.पी. मैखुरी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति एवं खिलाड़ी उपस्थित रहे।
देहरादून- मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से शनिवार को मुख्यमंत्री आवास में देहरादून के महापौर सौरभ थपलियाल ने शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर देहरादून नगर के समग्र विकास से जुड़ी विभिन्न योजनाओं, बुनियादी सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण, शहरी अवसंरचना, स्वच्छता, यातायात व्यवस्था तथा जनहित से संबंधित महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। महापौर ने नगर की वर्तमान आवश्यकताओं और भावी विकास को ध्यान में रखते हुए प्रमुख मांगों से मुख्यमंत्री को अवगत कराया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी बिंदुओं पर गंभीरता से विचार करते हुए एवं देहरादून नगर के विकास को राज्य सरकार की प्राथमिकता बताते हुए प्रस्तुत मांगों को शीघ्र पूरा करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि जनसुविधाओं के विस्तार और शहर के सुव्यवस्थित विकास के लिए राज्य सरकार नगर निगम के साथ समन्वय बनाकर प्रभावी कदम उठाएगी, जिससे आम नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।
देहरादून- जिलाधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी सविन बंसल की अध्यक्षता में जनपद देहरादून में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) कार्यक्रम के अंतर्गत विधानसभावार चल रही मैपिंग कार्यों की प्रगति की समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
बैठक में जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनपद की समस्त विधानसभाओं में चल रहे मैपिंग कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में तीव्र गति से पूर्ण किया जाए। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि 31 दिसंबर 2025 तक प्रत्येक विधानसभा में न्यूनतम 50 प्रतिशत से अधिक मैपिंग लक्ष्य अनिवार्य रूप से पूर्ण किया जाए, जिससे मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य समयबद्ध एवं त्रुटिरहित रूप से संपन्न हो सके।
जिलाधिकारी ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक, पारदर्शी एवं अद्यतन बनाना है। इसके लिए सभी विभागीय अधिकारियों, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ERO/ARO) तथा फील्ड स्टाफ को आपसी समन्वय के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने निर्देश दिए कि कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी तथा प्रगति की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी।
जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में मैपिंग कार्य की दैनिक समीक्षा सुनिश्चित करें तथा किसी भी समस्या या बाधा की जानकारी समय रहते जिला निर्वाचन कार्यालय को उपलब्ध कराएं।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, उप जिलाधिकारी हरिगिरि, निदेशक ग्रामीण विकास अभिकरण विक्रम सिंह, जिला विकास अधिकारी सुनील कुमार, सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी पी.सी. त्रिपाठी, जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डयाल सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त जनपद के सभी सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ARO) ऑनलाइन माध्यम से बैठक में जुड़े रहे।
एमडीडीए के जनहितकारी विकास कार्यों की विधायक सविता कपूर ने खुलकर प्रशंसा की, हरित सार्वजनिक स्थलों के विकास की पहल को बताया सराहनीय
देहरादून- मसूरी–देहरादून विकास प्राधिकरण (मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण) ने शहर विकास की अवधारणा को मजबूत करते हुए देहरादून कैंट विधानसभा क्षेत्र में सार्वजनिक पार्कों के सौंदर्यीकरण और लैंडस्केपिंग कार्यों को पूरा किया है। इस पहल का उद्देश्य शहरी हरित क्षेत्रों का विस्तार, नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण सार्वजनिक स्थान उपलब्ध कराना और पर्यावरण–अनुकूल विकास को बढ़ावा देना है। एमडीडीए द्वारा योजनाबद्ध ढंग से किए गए इन कार्यों से आवासीय कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को स्वच्छ, सुरक्षित और सुंदर वातावरण मिला है, जिससे शहर की जीवन–शैली और सौंदर्य दोनों में सकारात्मक बदलाव आएगा।
कैंट विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत विभिन्न स्थानों पर कराए गए कार्यों का लोकार्पण आज विधायक देहरादून कैंट सविता कपूर द्वारा विधिवत रूप से किया गया। यह कार्यक्रम क्षेत्र में हरित वातावरण को बढ़ावा देने तथा नागरिकों को बेहतर सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। देहरादून कैंट विधानसभा क्षेत्र में साईंलोक कॉलोनी (जीएमएस रोड) में पार्क सौंदर्यीकरण कार्य (लागत ₹20.68 लाख), इन्द्रप्रस्थ कॉलोनी (जीएमएस रोड) में पार्क सौंदर्यीकरण कार्य (लागत ₹28.94 लाख) तथा माया एन्क्लेव में पार्क सौंदर्यीकरण कार्य (लागत ₹20.84 लाख) का लोकार्पण किया गया। परियोजनाओं के अंतर्गत हरियाली का विस्तार, आकर्षक लैंडस्केपिंग, बैठने की व्यवस्था, पैदल पथ, आधुनिक प्रकाश व्यवस्था और बच्चों के लिए सुरक्षित खेल सुविधाएं विकसित की गई हैं।
विधायक सविता कपूर का बयान
विधायक सविता कपूर ने कहा कि शहरी विकास का वास्तविक स्वरूप तभी साकार होता है जब नागरिकों को स्वच्छ, सुरक्षित और हरित सार्वजनिक स्थल उपलब्ध हों। पार्क किसी भी शहर के “ग्रीन लंग्स” होते हैं, जो पर्यावरण संतुलन के साथ–साथ सामाजिक जीवन को भी समृद्ध करते हैं। देहरादून कैंट क्षेत्र में एमडीडीए द्वारा कराए गए सौंदर्यीकरण कार्यों से बच्चों, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों को टहलने, योग, खेल और सामुदायिक गतिविधियों के लिए बेहतर स्थान मिला है। यह पहल स्वास्थ्य, पर्यावरण और सामाजिक जुड़ाव तीनों को मजबूत करती है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी क्षेत्र में नागरिक–केन्द्रित विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी और एमडीडीए के साथ समन्वय कर ऐसे ही कार्य निरंतर आगे बढ़ाए जाएंगे। विधायक सविता कपूर ने एमडीडीए के अधिकारियों को गुणवत्ता के साथ कार्य पूर्ण करने के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि भविष्य में भी कैंट विधानसभा क्षेत्र में इसी प्रकार जनहित से जुड़े विकास कार्य निरंतर किए जाएंगे।
उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी का बयान
उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी ने कहा कि एमडीडीए शहर विकास को समग्र दृष्टि से आगे बढ़ा रहा है, जिसमें बुनियादी ढांचे के साथ–साथ सार्वजनिक स्थानों का उन्नयन भी शामिल है। पार्कों का सौंदर्यीकरण नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सभी कार्य गुणवत्ता मानकों के अनुरूप और समयबद्ध तरीके से पूरे किए गए हैं। आने वाले समय में भी शहर के विभिन्न क्षेत्रों में हरित और सार्वजनिक सुविधाओं को सुदृढ़ किया जाएगा।
सचिव एमडीडीए मोहन सिंह बर्निया का बयान
सचिव एमडीडीए मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि परियोजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। पार्कों में विकसित सुविधाएं स्थानीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की गई हैं। एमडीडीए आगे भी शहरी सौंदर्यीकरण और जन–सुविधाओं के विस्तार के लिए चरणबद्ध योजनाओं पर कार्य करता रहेगा।
कार्यक्रम में एमडीडीए के मुख्य अभियंता हरिचन्द्र सिंह राणा सहित विभागीय अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित रहे। उपस्थित जनसमूह ने एमडीडीए क्षेत्र में किए गए विकास कार्यों के लिए एमडीडीए के प्रयासों की सराहना की।
देहरादून- ’भाजपा राष्ट्रीय सहकोषाध्यक्ष एवं सासंद राज्य सभा डा. नरेश बंसल ने सदन मे अतारांकित प्रश्न के माध्यम से उत्तराखण्ड में राष्ट्रीय राजमार्ग सबंधित प्रश्न दिल्ली-देहरादून, बारहमासी सडक और अन्य राष्ट्रीय राजमार्गों (एनएच) के बारे में एवं देहरादून-पांवटा साहिब, देहरादून- हरिद्वार, देहरादून-मसूरी और देहरादून-सहारनपुर खंडों को जोडने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों/सडकों पर क्षतिग्रस्त पुलों के पुनर्निमाण/पुनस्र्थापन का विवरण पर प्रश्न किया।’’
डा. नरेश बंसल ने सदन मे पूछा कि क्या सडक परिवहन और राजमार्ग मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे कि,
क- उत्तराखण्ड में दिल्ली-देहरादून बारहमासी सडक और अन्य राष्ट्रीय राजमार्गों (एनएच) का कार्य कब तक पूरा हो जाएगा।
ख- क्या निर्माण के दौरा चट्टान काटने और ढलान उपचार से संबंधित सभी मानकों का पालन किया जा रहा है।
ग- देहरादून-पांवटा साहिब, देहरादून-हरिद्वार, देहरादून-मसूरी और देहरादून-सहारनपुर राष्ट्रीय राजमार्गों पर आपदाओं के दौरान क्षतिग्रस्त हुए पुलों का पुनर्निमाण कब तक पूरा हो जाएगा और,
घ- उत्तराखण्ड में प्रधानमंत्री ग्राम सडक योजना (पीएमजीएसवाई) के अंतर्गत कितने गांवों को जोडा चुका है और कितने गांव अभी जोडे जाने शेष हैं?
डा. नरेश बंसल के जवाब मे सडक परिवहन और राजमार्ग मंत्री श्री नितिन जयराम गडकरी ने उत्तर दिया किः-
क से ग दिल्ली-देहरादून पहुंच नियंत्रित राजमार्ग को जोडने वाली परियोजनाओं की पैकेज-वार स्थिति अनुलग्नक में संलग्न है। उत्तराखण्ड राज्य में अन्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर चल रहे कार्य अप्रैल 2028 तक पूरा करने की योजना है।
यह सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रयास किये जाते हैं कि राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुसार किया जाए, जिसमें भारतीय सडक कांग्रेस (आईआरसी) के विनिर्देशों और कोडों में निर्दिष्ट उत्खनन/कटाई और ढलान की मरम्मत आदि के मानक शामिल हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए कि राजमार्ग निर्माण निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पालन करता है, कार्यकारी संस्थाओं द्वारा कार्यस्थल पर कार्यों के दैनिक पर्यवेक्षण के लिए परामर्शदाता (प्राधिकरण के इंजीनियरध्स्वतंत्र इंजीनियर-एइ/आईई) नियुक्त किए जाते हैं। कार्यकारी संस्थाओं के अधिकारी समय-समय पर निरीक्षण करते हैं और यह सुनिश्चित करते है कि रियायतग्राही/संविदाकरों द्वारा किए गए कार्य की गुणवत्ता निर्धारित आवश्यकताओं के अनुरूप हो।
पहाडी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में राष्ट्रीय राजमार्ग सहित आपदा प्रतिरोधी राष्ट्रीय राजमार्गों की अवसंरचना के विकास के लिए विभिनन पहलें की गई हैं, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैंः-
1- विशेषज्ञ समिति की रिपोेर्ट के अनुसार पहाडी क्षेत्रों में भूस्खलन प्रबंधन क्षेत्रों के लिए लागत प्रभावी दीर्घकालिक सुधारात्मक उपयों के कार्यान्वयन हेतु नवंबर, 2024 में निर्णय लिया गया।
2- अब से ढलान काटने और स्थिरीकरण कार्यों के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने का निर्णय लिया गया है, जिसके बाद पहाडी/पर्वतीय क्षेत्रों में राजमार्गों के लिए सडक निर्माण कार्य किए जाये। सड़क निर्माण कार्य तभी प्रारंभ होंगे जब खंडवार सुरक्षा उपाय पूरे हो जायेंगे।
3- पहाडी क्षेत्रों में राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण से संबंधित चिंताओं के समाधान हेतु अतिरिक्त सवंर्धित और व्यवस्थित निदानात्मक उपायों हेतु नवंबर 2025 में एक व्यापक नीति परिपत्र को अंतिम रूप दिया जाएगा।
4- उत्तराखण्ड और अरूणाचल प्रदेश राज्यों के लिए विशेष भूस्खलन प्रबंधन उपायों के लिए टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट काॅरपोरेशन इंडिया लि0 (टीएचडीसीआईएल) के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।
5- राष्ट्रीय राजमार्गों पर भू-खतरे के शमन उपायों के तकनीकी सहयोग के लिए रक्षा भू-सूचना विज्ञान अनुसंधान प्रतिष्ठान (डीजीआरई) के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।
6- सुरंगों की भूवैज्ञानिक जांच और भू संकट संबंधी अध्ययन हेतु डेटा साझा करने पर भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीआईएस) के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।
7- एनएचआईडीसीएल द्वारा राष्ट्रीय शैल यांत्रिकी संस्थान (एनआईआरएम) के साथ सुरंग परियोजनाओं, सडक परियोजनाओं, डीपीआरध्निर्माण चरण के दौरान सुरंग के डिजाइन और रेखाचित्रों की समीक्षा/सबूत जांच, उपकरणों और निगरानी उपकरणों की पर्याप्तता की जांच, सुरंग सुरक्षा लेखा परीक्षा, कार्य पैकेज के लिए शैल यांत्रिकी और शैल इंजीनियरिंग पर आधारित वैज्ञानिक जांच तैयार करने, अधिकारियों को प्रशिक्षण आदि के लिए व्यापक सहयोग हेतु समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।
8- शिलांग-सिलचर ग्रीनफील्ड हाई-स्पीड काॅरिडोर के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट की सहकर्मी समीक्षा हेतु एनआईआरएम के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।
सडक परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन जयराम गडकरी ने देहरादून-पांवटा साहिब, देहरादून- हरिद्वार, देहरादून-मसूरी और देहरादून-सहारनपुर खंडों को जोडने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों/सडकों पर क्षतिग्रस्त पुलों के पुनर्निमाणध्पुनस्र्थापन का विवरण मे बताया किः-
देहरादून-पौंटा साहिबः– क्षतिग्रस्त पुल मौजूदा एनएच-72 के देहरादून-पांवटा साहिब चैनेज 142 पर उत्तरांचल विश्वविद्यालय (प्रेम नगर) देहरादून के पास है, जिसके लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचआई) द्वारा बाईपास का निर्माण किया जा रहा है, और कार्य पर्याप्त रूप तक पूर्ण हो चुका है। राज्य लोक निर्माण विभाग ने एकमुश्त सुधार (ओटीआई) के तहत क्षतिग्रस्त पुल की मरम्मत के लिए लगभग 17.00 करोड रूपये का अनुमान एनएचआई को प्रस्तुत किया है और यह एनएचआई में जांच के अध्याधीन है।
देहरादून- हरिद्वारः- पुराना 2 लेन वाला जाखन पुल 2025 के मानसून में क्षतिग्रस्त हो गया था। यातायात मौजूदा 2 लेन वाले नए जाखन पुल से होकर गुजर रहा है। नए पुल का निर्माण जून, 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
देहरादून-मसूरीः देहरादून-मसूरी मोटर मार्ग राज्य राजमार्ग (एसएच संख्या-1) पर किमी0 18 (शिव मंदिर के पास) पर स्थित आर्य ब्रिज 15.09.2025 को क्षतिग्रस्त हो गया था। उसी स्थान पर एक वैली पुल स्थापित किया गया है। वर्तमान में इस स्थान के निकट 60 मीटर स्पैन 70 आर श्रेणी क लोडिंग पुल प्रस्तावित है। इसके लिए निविदाएं आमंत्रित की गई हैं और इसे जून 2026 तक पूर्ण कर लिया जायेगा।
देहरादून-सहारनपुरः- पुलों को कोई नुकसान नहीं हुआ है।
घ- प्रधानमंत्री ग्राम सडक योजना (पीएमजीएसवाई-1) एकबारगी विशेष उपाय है जिसका उद्देश्य ग्रामीण आबादी की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए कोर नेटवर्क में निर्दिष्ट जनसंख्या आकार मैदानी क्षेत्रों में 500 से अधिक और पूर्वोत्तर राज्यों, हिमालयी राज्यों और हिमालयी केंद्र शासित प्रदेशों में 250 से अधिक वाले पात्र असंबद्ध बस्तियों को एकल बारहमासी सडक के माध्यम से ग्रामीण संपर्कता प्रदान करना है।
इस कार्यक्रम की इकाई एक बस्ती है, कोई राजस्व गांव या पंचायत नहीं है। बस्ती एक ऐसे क्षेत्र में रहने वाली आबादी का समूह है जिसका अवस्थान समय के साथ नहीं बदलता है। उत्तराखण्ड राज्य में, पीएमजीएसवाई-1 के तहत 1864 पात्र बस्तियां स्वीकृत की गयी हैं। जिनमें से 1860 बस्तियों को बारहमासी सडक संपर्कता प्रदान की जा चुकी है।
विभागीय मंत्री डॉ. रावत के निर्देश पर शासन ने की त्वरित कार्यवाही
विश्वविद्यालय स्तर से संचालित होंगी प्रवेश एवं परीक्षा सहित अन्य गतिविधियां
देहरादून- भारत सरकार द्वारा तैयार उच्च शिक्षा के एकीकृत समर्थ पोर्टल के संचालन का अधिकार राज्य विश्वविद्यालयों को पूर्ण रूप से सौंप दिया गया है। इस संबंध में शासन द्वारा आदेश जारी कर दिया गया है। अब राज्य विश्वविद्यालय अपने-अपने स्तर पर छात्र-छात्राओं के प्रवेश, परीक्षा व अन्य शैक्षिक गतिविधियां सम्पादित कर सकेंगे। जिसकी जिम्मेदारी संबंधित विश्वविद्यालय के कुलपति व कुलसचिव को सौंपी गई है।
सूबे के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के निर्देशों के उपंरात समर्थ पोर्टल के संचालन की सम्पूर्ण जिम्मेदारी तत्काल प्रभाव से राज्य विश्वविद्यालयों कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल, श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय, टिहरी तथा सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा को सौंप दी गई है। अब राज्य विश्वविद्यालय सम्बद्ध राजकीय महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालय परिसरों में स्नातक एवं स्नातकोत्तर कक्षाओं में प्रवेश एवं परीक्षा से लेकर विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियां अपने स्तर से संचालित कर सकेंगे। अभी तक समर्थ पोर्टल का संचालन शासन स्तर पर राज्य समर्थ टीम (एनईपी-पीएमयू) के द्वारा किया जा रहा था लेकिन इससे छात्र-छात्राओं को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। शासन स्तर से जारी आदेश के तहत सभी राज्य विश्वविद्यालय के द्वारा समर्थ पोर्टल के सभी मॉडयूल के संचालन को समयबद्ध कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी। पोर्टल संबंधी संचालन की सारी जिम्मेदारी संबंधित विश्वविद्यालय के कुलपति व कुलसचिव की होगी, जो किसी भी प्रकार से अन्य को हस्तगत नहीं की जायेगी। प्रत्येक माह पोर्टल की समीक्षा की जायेगी जिसकी रिपोर्ट शासन को आवश्यक रूप से सौंपी जायेगी। छात्र-छात्राओं के प्रवेश हेतु पोर्टल खोलने से पहले विश्वविद्यालय सात दिन पहले इसकी सूचना अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड करेगा साथ ही सामाचार पत्रों व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया माध्यामों के जरिये इसका प्रचार-प्रसार भी करेगा। इसके अलावा इस संबंध में शासन को भी अवगत कराया जायेगा। उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में समर्थ पोर्टल का ही प्रयोग किया जायेगा। विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में पूर्व से संचालित समस्त ईआरपी/पोर्टल का डाटा 31 मार्च 2026 तक समर्थ पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड किया जायेगा इसके उपरांत समर्थ पोर्टल के अतिरिक्त किसी भी दशा में कोई भी ईआरपी/पोर्टल का संचालन नहीं की जायेगी और न ही इस संबंध में कोई भुगतान किया जायेगा।
शासन स्तर से जारी आदेश के तहत सभी राजकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों को अपना एकेडमिक कैलेण्डर तैयार कर उसे आगामी 31 मई 2026 तक अपनी कार्यपरिषद से अनिवार्य रूप से अनुमोदित कराना होगा तदोपरांत आगामी सत्र के प्रवेश, परीक्षा एवं अन्य प्रक्रियाएं सम्पादित की जायेगी। विश्वविद्यालय द्वारा प्रत्येक सेमेस्टर में प्रवेश के उपरांत छात्र-छात्राओं की कक्षाओं का संचालन 90 दिवस तथा 75 फीसदी उपस्थिति अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जायेगी, जिसका डाटा समर्थ पोर्टल पर अपलोड़ करना अनिवार्य होगा। जबकि निजी विश्वविद्यालयों में समर्थ मॉड्यूल लागू होने तक छात्रों की उपस्थिति संबंधित ईआरपी पर अपलोड़ की जायेगी, जिसकी जानकारी शासन को उपलब्ध कराई जायेगी। छात्रों की उपस्थिति व कक्षाओं के संचालन मानक पूर्ण न होने की दशा में छात्रों को किसी भी दशा में परीक्षा में बैठने की अनुमति कतई भी नहीं दी जायेगी। उक्त आदेशों को सुनिश्चित करने के लिये संबंधित विश्वविद्यालयों के कुलपति, कुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक, संबंधित संस्थान के प्राचार्य/निदेशक एवं उच्च शिक्षा निदेशक जिम्मेदार होंगे।
बयान
समर्थ पोर्टल के संचालन का अधिकार राज्य विश्वविद्यालयों को दे दिया गया है। जिसका लाभ छात्र-छात्राओं को मिलेगा। इसके अलावा उच्च शिक्षण संस्थानों में एकेडमिक कैलेण्डर लागू कर प्रत्येक सेमेस्टर में छात्र-छात्राओं की 75 फीसदी उपस्थिति व 90 दिवस कक्षाओं का संचालन अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जायेगा। जिसका रिकार्ड समर्थ पोर्टल पर अपलोड़ किया जायेगा। – डॉ. धन सिंह रावत, उच्च शिक्षा मंत्री, उत्तराखंड ।
दिल्ली में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति की बैठक
ट्रेनों से हाथियों की मौत पर सांसद त्रिवेन्द्र रावत की चिंता, रेल–वन समन्वय मजबूत करने की मांग
देहरादून/ नई दिल्ली। केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में दिल्ली में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में समिति के सदस्य, हरिद्वार सांसद एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने हिस्सा लिया।
बैठक के दौरान सांसद त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने उत्तराखंड सहित हिमालयी क्षेत्रों में “मानव–पशु संघर्ष” को एक गंभीर एवं ज्वलंत मुद्दा बताते हुए कहा कि जंगली पशुओं का आबादी वाले क्षेत्रों की ओर बढ़ता पलायन चिंता का विषय है। उन्होंने आग्रह किया कि संवेदनशील क्षेत्रों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कर उन मूल कारणों की पहचान की जाए, जिनके चलते मानव–पशु संघर्ष की घटनाएँ बढ़ रही हैं, ताकि स्थायी और व्यवहारिक समाधान सुनिश्चित किए जा सकें।
सांसद रावत ने हरिद्वार क्षेत्र में ट्रेनों से हाथियों की मृत्यु की घटनाओं पर विशेष चिंता व्यक्त करते हुए रेल–वन समन्वय, चेतावनी तंत्र, गति नियंत्रण एवं संरचनात्मक उपायों को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही उन्होंने लच्छीवाला में एलिफैंट कॉरिडोर से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करते हुए वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए प्रभावी संरक्षण उपाय अपनाने का आग्रह किया।
इस दौरान मानव–पशु संघर्ष की चुनौती से निपटने हेतु समन्वित नीति, स्थानीय सहभागिता और तकनीकी हस्तक्षेप पर व्यापक विचार–विमर्श किया गया।
बैठक में समिति के अन्य सदस्यगण एवं संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
ग्रामीण आजीविका बढ़ाने के लिए राज्य सरकार कर रही है ठोस प्रयास
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास में ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग, उत्तराखण्ड की 10वीं बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि पलायन की समस्या राज्य के लिए एक बड़ी चुनौती रही है, लेकिन पिछले चार–पाँच वर्षों में रिवर्स पलायन को प्रोत्साहित करने की दिशा में राज्य सरकार ने कई महत्त्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की आजीविका के साधन बढ़ाने के लिए अनेक योजनाएँ लागू की गई हैं। इन योजनाओं के अंतर्गत ऋण लेने पर पात्र लाभार्थियों को अनुदान (सब्सिडी) भी प्रदान की जा रही है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिल रही है।
प्रवासी पंचायतों और वेडिंग डेस्टिनेशन विकास पर विशेष बल
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्यभर में प्रवासी पंचायतों का आयोजन किया जाए, जिनमें देश एवं विदेश में कार्यरत प्रवासियों को आमंत्रित किया जाए। उन्हें राज्य सरकार की रिवर्स पलायन से जुड़ी पहलों की जानकारी दी जाए और उनके सुझाव भी प्राप्त किए जाएँ।
मुख्यमंत्री ने आयोग के सदस्यों से अन्य राज्यों में जाकर रिवर्स पलायन के लिए राज्य सरकार द्वारा किए गए कार्यों की जानकारी देने के साथ ही पलायन रोकने और रिवर्स पलायन से जुड़े नवाचारों का अध्ययन करने के निर्देश भी दिए।
उन्होंने कहा कि त्रियुगीनारायण की तर्ज पर राज्य के 25 नए स्थलों को वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जाए। इन स्थलों में सभी मूलभूत सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाए। पर्वतीय क्षेत्रों के विकास के लिए लघु उद्योगों के संवर्धन पर भी बल दिया गया।
रिवर्स पलायन की दिशा में उत्साहजनक परिणाम
ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग के उपाध्यक्ष डॉ॰ एस.एस. नेगी ने बताया कि राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में अब रिवर्स पलायन का रुझान देखने को मिल रहा है। अब तक लगभग 6282 व्यक्ति वापस अपने गाँवों में लौटे हैं। इनमें देश के भीतर और विदेशों से लौटे लोग भी शामिल हैं। अधिकतर लोग पर्यटन एवं लघु उद्योग के क्षेत्र में कार्यरत हैं और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
बैठक में आयोग के सदस्यों ने रिवर्स पलायन को और गति देने के लिए कई रचनात्मक सुझाव प्रस्तुत किए।
बैठक में सचिव विनय शंकर पाण्डेय, धीराज गर्ब्याल, डॉ॰ श्रीधर बाबू अद्दांकी, सी. रविशंकर, अपर सचिव श्रीमती अनुराधा पाल, डॉ॰ मेहरबान सिंह बिष्ट, चन्द्र सिंह धर्मशक्तू, संतोष बडोनी, सुरेश जोशी, ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग के सदस्य अनिल सिंह शाही, दिनेश रावत, सुरेश सुयाल, राम प्रकाश पैन्यूली एवं श्रीमती रंजना रावत उपस्थित रहे।
‘सहकारिता से शहरी-ग्रामीण एकता’ की थीम पर आयोजित होगा सहकारिता मेला
देहरादून। देहरादून में 20 से 28 दिसंबर 2025 तक रेंजर्स ग्राउंड में सहकारिता मेले का भव्य आयोजन किया जाएगा। मेला प्रतिदिन प्रातः 11 बजे से रात्रि 09 बजे तक आमजन के लिए खुला रहेगा। इस मेले की थीम “सहकारिता से शहरी ग्रामीण एकता” निर्धारित की गई है। मेले को लेकर रेंजर्स ग्राउंड में तैयारियां पूरी हो गई है।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने मेले के सफल आयोजन के लिए जिला स्तर पर मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय कार्यान्वयन समिति का गठन किया गया है। समिति द्वारा विभिन्न विभागों को उनके दायित्व सौंपे गए हैं, ताकि मेला सुव्यवस्थित एवं प्रभावी ढंग से आयोजित किया जा सके।
मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र महासंघ द्वारा वर्ष 2025 को अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष घोषित किए जाने के उपलक्ष्य में उत्तराखंड सरकार के सहकारिता विभाग द्वारा राज्य के सभी जनपदों में थीम आधारित सहकारिता मेलों के आयोजन का निर्णय लिया गया है। इन मेलों का उद्देश्य सहकारिता की मूल भावना को स्थानीय स्तर पर साकार करना, राज्य की अर्थव्यवस्था में सहकारिता विभाग के योगदान को रेखांकित करना तथा सहकारिता से जुड़े सभी संस्थानों को एक साझा मंच प्रदान करना है।

सहकारिता मेले में विभिन्न विभागों, सहकारी समितियों एवं स्वयं सहायता समूहों द्वारा स्थानीय उत्पादों के आकर्षक एवं विशिष्ट स्टॉल लगाए जाएंगे। मेले में जनपद की सभी स्थानीय सहकारी समितियों, संस्थाओं, स्वयं सहायता समूहों, किसानों एवं काश्तकारों को प्रतिभाग के लिए आमंत्रित किया गया है।
मेले के दौरान प्रत्येक दिवस विषय विशेषज्ञों द्वारा पैनल चर्चाएं, तकनीकी सत्र, निर्यात परामर्श, उत्पाद पैकेजिंग एवं ब्रांडिंग, प्रशिक्षण सत्र, युवा उद्यमिता संवाद, स्टार्टअप एवं तकनीकी समाधान, किसान गोष्ठी, श्वेत क्रांति एवं दुग्ध क्रांति, डिजिटल साक्षरता, फूड स्टॉल, ई-कॉमर्स, वित्तीय समावेशन तथा महिला सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त विभिन्न प्रतियोगिता, मनोरंजन, झूले एवं मेले में उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति को दर्शाते रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए जाएंगे, जो आगंतुकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगे।
सहकारिता मेला न केवल सहकारिता आंदोलन को नई दिशा देगा, बल्कि शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के बीच आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक समन्वय को भी मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
प्रदेश में सब्जी और फूलों के बड़े क्लस्टर विकसित होंगे, किसानों की आय बढ़ाने पर जोर
देहरादून। कृषि मंत्री गणेश जोशी ने देहरादून में प्रदेश के सभी जनपदों के मुख्य विकास अधिकारियों, मुख्य कृषि अधिकारियों और मुख्य उद्यान अधिकारियों के साथ बैठक कर नाबार्ड द्वारा वित्त पोषित प्रदेशव्यापी क्लस्टर आधारित पॉलीहाउस योजना की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और तय समयसीमा में लक्ष्यों को पूरा करने पर विशेष जोर दिया गया।
बैठक के दौरान मंत्री गणेश जोशी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी जिलों में उपयुक्त क्लस्टरों का चयन कर किसानों को चिन्हित किया जाए और सब्जी व फूलों की कम से कम दो फसलों के बड़े क्लस्टर विकसित किए जाएं। उन्होंने कहा कि निर्धारित लक्ष्यों के अनुसार शीघ्र पॉलीहाउस स्थापित किए जाएं और जिला स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
इसके साथ ही मंत्री ने जायका परियोजना, कीवी मिशन, एप्पल मिशन और ड्रैगन फ्रूट मिशन के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार कर योजनाबद्ध तरीके से कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने पीएमएफएमई योजना के अंतर्गत स्टोरेज की स्थापना और अधिक से अधिक फूड प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित कर किसानों को मूल्य संवर्धन से जोड़ने पर भी बल दिया।
गणेश जोशी ने कहा कि राज्य सरकार नीतिगत सुधारों के माध्यम से प्रदेश में कृषि और उद्यानिकी को प्रोत्साहित कर रही है। सरकार का उद्देश्य आधुनिक तकनीकों और योजनाओं के जरिए किसानों की आय में वृद्धि करना है, जिसके लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
