देहरादून। आम जन की सुरक्षा सुनिश्चित करने और संदिग्ध गतिविधियों पर नियंत्रण को लेकर देहरादून पुलिस ने व्यापक स्तर पर आकस्मिक चेकिंग अभियान चलाया। एसएसपी देहरादून के निर्देश पर जिले के सभी शहरी और ग्रामीण थाना क्षेत्रों में पुलिस टीमों ने अलग-अलग स्थानों पर सघन जांच की।
पुलिस की टीमें तड़के सुबह से ही धार्मिक स्थलों, भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों, महत्वपूर्ण स्थानों, सीमावर्ती चेक पोस्टों और आंतरिक मार्गों पर सक्रिय रहीं। अभियान के दौरान संदिग्ध वाहनों और व्यक्तियों की पहचान के लिए विशेष सतर्कता बरती गई।

अभियान में पुलिस ने 1782 वाहनों की जांच की, जबकि 3374 व्यक्तियों से पूछताछ कर उनका सत्यापन किया। इस दौरान यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले चालकों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई भी की गई।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा, ताकि जिले में सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत की जा सके तथा किसी भी प्रकार की आपराधिक या संदिग्ध गतिविधि को रोकने के लिए प्रभावी निगरानी बनाए रखी जा सके।
राज्य ने राष्ट्रीय खेलों में 103 पदकों के साथ पाया 7वां स्थान
नई टिहरी। टिहरी झील में आयोजित “इंटरनेशनल प्रेसिडेंट कप-2025” एवं “चतुर्थ टिहरी वाटर स्पोर्ट्स कप-2025” के भव्य समापन समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहुँचे। कार्यक्रम स्थल पर पहुँचकर मुख्यमंत्री ने भारत सहित विभिन्न देशों से आए खिलाड़ियों से संवाद किया और उनके उत्साह एवं उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने कहा कि 22 देशों के 300 से अधिक खिलाड़ियों की भागीदारी इस आयोजन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है तथा टिहरी झील को वैश्विक साहसिक खेल मानचित्र पर स्थापित करती है।
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने सभी प्रतिभागियों, आयोजकों और खेल प्रेमियों का स्वागत किया तथा आयोजन को सफल बनाने के लिए टीएचडीसी, एशियन कायकिंग एंड कैनोइंग एसोसिएशन, उत्तराखंड ओलंपिक एसोसिएशन सहित सभी सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि टिहरी झील अब केवल ऊर्जा उत्पादन या जल प्रबंधन का केंद्र नहीं है, बल्कि पर्यटन, साहसिक खेलों और स्थानीय लोगों की आजीविका का मुख्य आधार बन चुकी है।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य है कि ऐसे आयोजन निरंतर होते रहें, जिससे साहसिक खेलों और पर्यटन गतिविधियों को लगातार बढ़ावा मिले।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खेल युवा पीढ़ी के शारीरिक-मानसिक विकास के साथ-साथ अनुशासन, टीमवर्क और संघर्षशीलता जैसे जीवन मूल्यों को भी मजबूत बनाते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘खेलो इंडिया’ और ‘फिट इंडिया’ अभियानों के माध्यम से देश की खेल संस्कृति को मजबूत करने के प्रयासों का उल्लेख किया तथा बताया कि भारत ने हाल के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल की हैं। उन्होंने कहा कि 2023 में चीन में हुए एशियाई खेलों में भारत ने रिकॉर्ड 107 पदक जीतकर नया इतिहास बनाया है और 2030 में अहमदाबाद कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी करेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में आयोजित 38वें राष्ट्रीय खेलों की सफलता ने राज्य को “देवभूमि” के साथ-साथ “खेलभूमि” के रूप में भी स्थापित किया है। उन्होंने गर्व व्यक्त किया कि उत्तराखंड ने पहली बार राष्ट्रीय खेलों में 103 पदक जीतकर 7वाँ स्थान प्राप्त किया। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार विश्वस्तरीय खेल अवसंरचना विकसित कर रही है और देहरादून के स्पोर्ट्स स्टेडियम में तैयार आइस रिंक में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता आयोजित होना इसका प्रमाण है।
उन्होंने बताया कि राज्य में शीघ्र ही “स्पोर्ट्स लेगेसी प्लान” लागू किया जाएगा, जिसके अंतर्गत आठ प्रमुख शहरों में 23 खेल अकादमियाँ स्थापित की जाएँगी। इनमें हर वर्ष 920 अंतरराष्ट्रीय स्तर के एथलीट और 1000 अन्य खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि हल्द्वानी में राज्य का पहला खेल विश्वविद्यालय और लोहाघाट में महिला स्पोर्ट्स कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं।
नई खेल नीति के तहत अंतरराष्ट्रीय-राष्ट्रीय पदक विजेताओं को सरकारी नौकरी, स्पोर्ट्स कॉलेजों में निःशुल्क शिक्षा-प्रशिक्षण, खिलाड़ी प्रोत्साहन योजना, उदीयमान खिलाड़ी योजना, खेल-किट योजना, खेल छात्रवृत्ति, ‘उत्तराखंड खेल रत्न’ एवं ‘हिमालय खेल रत्न’ पुरस्कार जैसी सुविधाएँ प्रदान की जा रही हैं। इसके साथ ही खेल-कोटा को पुनः लागू करते हुए सरकारी सेवाओं में खिलाड़ियों के लिए 4 प्रतिशत आरक्षण बहाल किया गया है।
समापन समारोह में मुख्यमंत्री ने विजयी खिलाड़ियों को सम्मानित किया और कहा कि खेल में हार-जीत से अधिक महत्वपूर्ण खेल-भावना है। उन्होंने कहा कि सभी खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट खेल-भावना का परिचय दिया है तथा राज्य सरकार युवाओं को उनके खेल-सपनों को पूरा करने के लिए हर संभव सहयोग प्रदान करती रहेगी। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि उत्तराखंड और देश के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम और अधिक ऊँचा करेंगे।
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, विधायक किशोर उपाध्याय, जिलाधिकारी समेत जिला प्रशासन के अधिकारी, टीएचडीसी के सीएमडी सीपन गर्ग, देश-विदेश से आए खिलाड़ी और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
जिलाधिकारी सविन बंसल का सख्त एक्शन: देहरादून के सभी स्कूल–कॉलेजों में अनिवार्य ड्रग टेस्टिंग के आदेश
देहरादून। शहर में पिछले तीन दिनों से चल रहा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का राष्ट्रीय सम्मेलन रविवार को समापन की ओर पहुँचा। अंतिम सत्र में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जहाँ परिषद के पदाधिकारियों ने उन्हें प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों और युवा नेतृत्व से जुड़े विषयों पर मंथन हुआ।
सम्मेलन के दौरान प्रतिष्ठित ‘प्रोफेसर यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार’ की घोषणा भी की गई। मुख्यमंत्री धामी ने इस वर्ष का सम्मान गोरखपुर के युवा श्रीकृष्णा पांडेय को प्रदान किया। पुरस्कार वितरण के समय एबीवीपी के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने बताया कि यह सम्मान 1991 से प्रख्यात शिक्षाविद् और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के शिल्पकार माने जाने वाले प्रो. केलकर की स्मृति में दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रो. केलकर ने अभाविप को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार और मजबूत पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। यह पुरस्कार अभाविप और विद्यार्थी निधि न्यास की संयुक्त पहल है, जिसका उद्देश्य शिक्षा और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाले युवाओं को प्रोत्साहित करना है।
पुरस्कार का उद्देश्य और महत्व
इस सम्मान का मुख्य लक्ष्य ऐसे युवा भारतीयों को सामने लाना है, जो सामाजिक उद्यम, शिक्षा, पर्यावरण, विज्ञान और समाजहित से जुड़े क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं।
पुरस्कार के तहत विजेता को 1 लाख रुपये की राशि, प्रमाण-पत्र और स्मृति-चिह्न प्रदान किया जाता है।
सम्मेलन के समापन के साथ ही एबीवीपी ने विभिन्न अकादमिक, सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर आगे की कार्ययोजना की रूपरेखा भी साझा की। संगठन ने कहा कि आने वाले समय में छात्र शक्ति देश के विकास में और अधिक बड़ी भूमिका निभाएगी।
देहरादून। ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी में जारी अंतरराष्ट्रीय आपदा प्रबंधन सम्मेलन के दौरान हिमालयी क्षेत्रों में तेजी से बदल रहे ग्लेशियरों को लेकर वैज्ञानिकों ने गंभीर चेतावनी दी है। विशेषज्ञों के अनुसार जलवायु परिवर्तन ने उत्तराखंड, सिक्किम समेत पूरे हिमालय में आइसटोपी और ग्लेशियर झीलों के आकार में तीव्र बढ़ोतरी दर्ज की है, जो अगले वर्षों में विनाशकारी आपदाओं का कारण बन सकती है।
सम्मेलन में वाडिया इंस्टीट्यूट के ग्लेशियर विशेषज्ञ डॉ. राकेश भांबरी ने अपने नवीन अध्ययन प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि सिक्किम में 23 ग्लेशियरों का करीब 5.4% हिस्सा सिकुड़ चुका है, जबकि ग्लेशियर झीलों का क्षेत्रफल लगभग 48% बढ़ गया है। निरंतर पिघलाव के चलते बड़े पैमाने पर मलबा जमा हो रहा है, जो बरसात के दौरान अचानक बहाव से गंभीर संकट खड़ा कर रहा है।
उत्तराखंड के मेरु बमक पर किए गए अध्ययन में भी तेजी से बर्फ पिघलने और आइसटोपी बनने से उत्पन्न खतरे उजागर हुए। यह वही स्थिति है, जिसने अतीत में केदारनाथ जैसी त्रासदियों को जन्म दिया था।
दूसरी ओर, वाडिया इंस्टीट्यूट की वैज्ञानिक डॉ. स्वप्नमिता विदेश्वरम ने धराली क्षेत्र में हुई आपदा पर अपनी रिपोर्ट रखी। उन्होंने बताया कि क्षेत्र का ऊपरी हिस्सा ‘क्रोनिक लैंडस्लाइड ज़ोन’ में आता है, जहां कई सक्रिय चैनल मौजूद थे। खेरागाड़ क्षेत्र में दो ग्लेशियर कैचमेंट होने से जोखिम और बढ़ गया।
उन्होंने कहा कि ऊंचाई पर मौजूद छोटे–छोटे आइस कोर तब बेहद खतरनाक बन जाते हैं, जब अचानक मोरेन मास का धंसाव होता है। यही कारण था कि 4700 मीटर की ऊंचाई पर मामूली दिखने वाली बर्फ से भी बड़े पैमाने पर मलबा बहकर नीचे आया।
क्या हैं आइसटोपी ग्लेशियर?
विशेषज्ञों के अनुसार यह ऐसे ग्लेशियर होते हैं जिनकी सतह पर मोटी मलबे की परत जमा रहती है और भीतर ठोस बर्फ का कोर छिपा रहता है।
ऊपर जमा मिट्टी-बजरी सूर्य की गर्मी को रोकती है, इसलिए इनका पिघलना सामान्य ग्लेशियरों से अलग होता है।
पिघलने पर सतह असमान दिखाई देती है, छोटे तालाब बन जाते हैं और आइस कोर्ड माउंड्स (आइसटोपी) विकसित हो जाते हैं।
हिमालय में ऐसे ग्लेशियर तेजी से बदल रहे हैं और जलवायु परिवर्तन के संवेदनशील संकेतक माने जाते हैं।
वैज्ञानिकों ने बताए प्रमुख खतरे और सुधार के सुझाव
सटीक भू-मानचित्रण का अभाव: हिमनदियों और अस्थिर ढलानों का अद्यतन मैपिंग नहीं है। 1:10,000 स्केल पर नए जियो-मैप तैयार करने की आवश्यकता है।
ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम डेटा सीमित: तापमान, वर्षा और नदियों के बहाव का वास्तविक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं। ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन और रिवर सेंसर लगाने की जरूरत।
आपदा प्रक्रिया की अधूरी समझ: जलवायु परिवर्तन, ग्लेशियर टूटना, ढलानों का धंसना और मलबे के नदी में जाने तक पूरी श्रृंखला का वैज्ञानिक अध्ययन अभी भी अपूर्ण है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि छोटे ग्लेशियरों और आइसटोपी की निगरानी तुरंत शुरू नहीं की गई, तो आने वाले वर्षों में हिमालयी राज्यों में आपदाओं की तीव्रता और बढ़ सकती है।
देहरादून। कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने आज कैंप कार्यालय पर मसूरी विधानसभा क्षेत्र के बूथ संख्या 82 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 128वें संस्करण को केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा, पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय जनता के साथ सुना।
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने देश में बढ़ती एंड्यूरेंस स्पोर्ट्स की लोकप्रियता, रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन, खेल जगत में भारत की उपलब्धियों और अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने देश में बढ़ते शहद उत्पादन और विंटर टूरिज्म की संभावनाओं का भी उल्लेख किया। विंटर टूरिज्म के संदर्भ में प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से उत्तराखंड का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य में विंटर टूरिज्म तेजी से लोगों को आकर्षित कर रहा है और कई स्थलों की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में आयोजित आदि कैलाश में राज्य की पहली हाई एल्टीट्यूड मैराथन रन की भी सराहना की और इसे उत्तराखंड की सामर्थ्य और संभावनाओं का प्रतीक बताया।
इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा ने कहा कि ‘मन की बात’ कार्यक्रम सदैव ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायी होता है। उन्होंने सभी नागरिकों से इस कार्यक्रम को नियमित रूप से सुनने की अपील भी की।
कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा उत्तराखंड के एंड्यूरेंस स्पोर्ट्स और हाई एल्टीट्यूड मैराथन का उल्लेख राज्य के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि देश में शहद उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है और राज्य सरकार भी किसानों को शहद उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करते हुए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से उन्हें लाभान्वित कर रही है।
मंत्री गणेश जोशी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम को प्रधानमंत्री मोदी का देशवासियों से आत्मीय संवाद बताते हुए कहा कि यह कार्यक्रम समाज के विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे उत्कृष्ट कार्यों को सामने लाने वाला और देश को जोड़ने वाला प्रभावशाली मंच बन चुका है। उन्होंने लोगों से कार्यक्रम को नियमित रूप से सुनने की अपील करते हुए कहा कि इससे समाज हित में कार्य करने की प्रेरणा और ऊर्जा प्राप्त होती है।
इस अवसर पर मंडल अध्यक्ष प्रदीप रावत, पूनम नौटियाल, पार्षद मोहन बहुगुणा, सत्येंद्र नाथ, आनंद गुसाईं, हेमंत गुसाईं, राजेश शर्मा, हेमंत जोशी, कंचन ठाकुर, रमेश प्रधान सहित कई लोग उपस्थित रहे।
देहरादून- भूकंप के खतरे को लेकर उत्तराखंड के लिए बड़ा अपडेट सामने आया है। भारतीय मानक ब्यूरो ने अपनी नई रीति संहिता–2025 के तहत भूकंपीय क्षेत्रीकरण मानचित्र को अपडेट करते हुए राज्य को जोन-6 में शामिल कर दिया है। यह देश का सबसे संवेदनशील भूकंप जोन माना जा रहा है। अब तक राज्य के हिस्सों को जोन-4 और जोन-5 में बांटा गया था, लेकिन नए वर्गीकरण के अनुसार पूरा उत्तराखंड अत्यधिक संवेदनशील श्रेणी में आ गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस बदलाव से राज्य में भविष्य के निर्माण मानकों में बड़ा परिवर्तन होगा। भवनों, सड़कों और बड़े बांधों जैसी संरचनाओं के लिए अधिक मजबूत भूकंपरोधी तकनीक को अनिवार्य करना पड़ेगा।
विशेषज्ञों की राय: सभी पहाड़ी राज्य समान खतरे की श्रेणी में
वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के निदेशक डॉ. विनीत गहलोत ने बताया कि नया भूकंपीय मानचित्र करीब नौ साल बाद जारी किया गया है। वर्ष 2016 में पिछली बार जोनिंग की गई थी।
उन्होंने कहा कि “अब सभी हिमालयी राज्यों को समान संवेदनशीलता वाले जोन-6 में शामिल करने का मतलब है कि जम्मू-कश्मीर से लेकर उत्तराखंड तक भूकंप का खतरा समान स्तर का माना जाएगा।”
गहलोत के अनुसार, पहले जोन-5 में आने वाले रुद्रप्रयाग, चमोली, पिथौरागढ़ और बागेश्वर सबसे अधिक संवेदनशील माने जाते थे, लेकिन अब पूरे राज्य को यह श्रेणी प्राप्त हो गई है। इससे सभी निर्माण परियोजनाओं में एक समान मानक लागू होंगे।
श्रीनगर गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के भूगर्भ विभागाध्यक्ष प्रो. एम.पी.एस. बिष्ट ने कहा कि हिमालय की भू-भौतिक स्थितियां सभी राज्यों में लगभग समान हैं—चट्टानें, प्लेट सीमाएं और भू-आकृतिक संरचनाएं एक जैसी हैं। इसी वजह से जोनिंग को एक श्रेणी में समाहित किया गया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय भूतकाल के भूकंपों, उनकी तीव्रता और वैज्ञानिक डेटा के आधार पर लिया गया है।
राज्य में बढ़ेगी चेतावनी प्रणाली की क्षमता
उत्तराखंड भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के मिलन-बिंदु पर स्थित है, जिसके कारण यहां भूकंप की आशंका हमेशा बनी रहती है।
रिकॉर्ड के अनुसार, 1911 से अब तक प्रदेश में 6 से अधिक तीव्रता के 11 बड़े भूकंप दर्ज किए गए हैं।
अब सरकार भूकंप चेतावनी प्रणाली को और मजबूत करने की तैयारी में है।
आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सचिव विनोद कुमार सुमन के अनुसार—
राज्य में सेंसर और सायरनों की संख्या बढ़ाई जाएगी,
हाल ही में मॉक ड्रिल आयोजित की गई है,
और जन-जागरूकता कार्यक्रमों को और आगे बढ़ाया जाएगा।
ऐतिहासिक भूकंपों का रिकॉर्ड
28 अगस्त 1916 — उत्तराखंड में सबसे बड़ा भूकंप, तीव्रता 6.96
1975 से 2024 तक
3–4 तीव्रता वाले भूकंप: 320
4–5 तीव्रता वाले: 90
5–6 तीव्रता वाले: 34
6–7 तीव्रता वाले: 3
7 से अधिक तीव्रता वाला कोई भूकंप दर्ज नहीं
पहले जोन-4 और जोन-5 में बंटा था राज्य
पुराने मानचित्र में—
जोन-5 (अति संवेदनशील):
रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर, पिथौरागढ़
जोन-4:
उत्तरकाशी, टिहरी, देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी गढ़वाल
अब पूरा प्रदेश जोन-6 में शामिल किया जा चुका है।
इन शहरों को पहले भी सबसे संवेदनशील बताया गया था
लोकसभा में 2021 में दिए गए एक जवाब में सरकार ने 38 अत्यधिक संवेदनशील शहरों की सूची जारी की थी, जिनमें उत्तराखंड के—
अल्मोड़ा, नैनीताल, देहरादून और रुड़की प्रमुख रूप से शामिल थे।
देहरादून- मसूरी–देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने अवैध निर्माण और गैरकानूनी प्लाटिंग के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए प्राधिकरण क्षेत्र में कई स्थानों पर ध्वस्तीकरण और सीलिंग अभियान चलाया। लगातार बढ़ रहे अनधिकृत निर्माणों पर रोक लगाने के उद्देश्य से एमडीडीए की टीम सुबह से ही मैदान में उतरी और बिना स्वीकृत मानचित्र के किए जा रहे निर्माणों को चिन्हित कर कार्रवाई की।
सबसे बड़ी कार्रवाई जस्सोवाल, चकराता रोड क्षेत्र में की गई, जहां रोशन नेगी द्वारा लगभग 22 बिघा भूमि पर अवैध प्लॉटिंग की जा रही थी। एमडीडीए की टीम ने मौके पर पहुंचकर पूरी प्लाटिंग व्यवस्था को ध्वस्त कर दिया। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि अवैध प्लाटिंग, अवैध कॉलोनी विकसित करना और बिना अनुमति संरचनाएँ खड़ी करना किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
कार्रवाई के दौरान अवर अभियंता मनीष नोटियाल, प्रीतम चौहान, सुपरवाइजरों की टीम तथा पुलिस बल मौके पर मौजूद रहे।
उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी ने कहा कि प्राधिकरण की ज़िम्मेदारी है कि शहर का नियोजित विकास सुनिश्चित किया जाए। “प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध निर्माण और अनधिकृत प्लाटिंग करने वालों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। किसी भी व्यक्ति को कानून तोड़कर अव्यवस्थित बसावट बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी,” तिवारी ने कहा।
सचिव एमडीडीए मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि कार्रवाई प्राधिकरण की शून्य-सहिष्णुता नीति का हिस्सा है। “जो भी लोग बिना स्वीकृति प्लाटिंग कर रहे हैं, नियमों को नजरअंदाज कर निर्माण कर रहे हैं, उन्हें चेतावनी है, ऐसी गतिविधियाँ तुरंत बंद करें, नहीं तो कठोर कार्रवाई होगी,” उन्होंने कहा।एमडीडीए का यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।
हरिद्वार कुंभ 2027 के लिए सीएम धामी ने संत समाज को दिया औपचारिक निमंत्रण
देहरादून/कुरुक्षेत्र। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शनिवार को हरियाणा के कुरुक्षेत्र में आयोजित इंटरनेशनल गीता महोत्सव के तहत विराट संत सम्मेलन में शामिल हुए। उन्होंने देशभर से पधारे पूज्य साधु-संतों की गरिमामयी उपस्थिति में आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान सीएम धामी ने वर्ष 2027 में हरिद्वार में आयोजित होने वाले भव्य कुंभ महोत्सव के लिए संत समाज को औपचारिक निमंत्रण भी दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवद्गीता जीवन का सच्चा मार्गदर्शन देने वाली ग्रंथ है, जो सत्य, धर्म और कर्तव्य के पथ पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार सनातन धर्म एवं भारतीय संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन और पुनर्जीवन के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
उन्होंने प्रदेश में मंदिरों के जीर्णोद्धार, धार्मिक स्थलों के विकास, घाटों के सौंदर्यीकरण सहित कई धार्मिक परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सब ‘आस्था और संस्कृति के सम्मान’ के लिए सरकार की प्रतिबद्धता का हिस्सा है। साथ ही उन्होंने बताया कि स्कूलों में गीता श्लोक वाचन की पहल भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल, मध्य प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी, सहित अनेक संत-महात्मा व गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
देहरादून। आमजन की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए एसएसपी देहरादून के निर्देश पर जनपद भर में व्यापक स्तर पर सघन चेकिंग अभियान चलाया गया। सभी थाना क्षेत्रों को संदिग्ध वाहनों और व्यक्तियों की विशेष जांच करने के निर्देश दिए गए थे, जिसके तहत शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में पुलिस की कई टीमों ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की।
अभियान के दौरान दून पुलिस ने धार्मिक स्थलों, भीड़भाड़ वाले इलाकों, बाजारों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा जांच को मजबूत बनाया। सभी संबंधित क्षेत्राधिकारियों के नेतृत्व में सीमावर्ती नाकों और आंतरिक मार्गों पर भी कड़ी निगरानी रखी गई।

पुलिस के मुताबिक, 29 नवंबर को चलाए गए सघन चेकिंग अभियान में 1400 से अधिक वाहनों की जांच की गई, जबकि 2700 से ज्यादा व्यक्तियों से पूछताछ कर आवश्यक सत्यापन किया गया। इस दौरान यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई भी की गई।
एसएसपी देहरादून ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा व्यवस्था मजबूत बनाए रखने के लिए यह अभियान लगातार जारी रहेगा, ताकि किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि को पहले ही चिन्हित कर कार्रवाई की जा सके।
