योजनाओं की ग्राउंड लेवल पर हो मॉनिटरिंग; पात्र महिलाओं को मिले सरकारी लाभ- कुसुम कंडवाल
पौड़ी में महिला आयोग की जनसुनवाई में 18 मामलों पर हुई कार्रवाई; महिला प्रधानाचार्य के जबरन उत्पीड़न पर खंड शिक्षा अधिकारी के ट्रांसफर के आदेश
शराब पीकर अभद्र व्यवहार करने वाले नर्सिंग अधिकारी पर गिरी गाज; अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने स्पष्टीकरण और स्थानांतरण के दिए निर्देश
पौड़ी गढ़वाल। राष्ट्रीय महिला आयोग के अभियान ‘महिला आयोग आपके द्वार’ के दूसरे दिन आज जनपद पौड़ी गढ़वाल के विकास भवन सभागार में राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय जनसुनवाई आयोजित की गई। इस विशेष सत्र के दौरान कुल 18 गंभीर प्रकरणों पर विस्तार से सुनवाई की गई,जिसमें से 13 लिखित प्रार्थना पत्र व 5 टेलीफोनिक शिकायतों को सुना गया।
जिनमें से कई संवेदनशील मामलों का मौके पर ही निस्तारण किया गया, जबकि शेष प्रकरणों को आगामी कार्रवाई हेतु आयोग में समन के माध्यम से सूचीबद्ध किया गया और कुछ मामलों को त्वरित प्रशासनिक समाधान हेतु संबंधित विभागों को प्रेषित किया गया।
जनसुनवाई के दौरान शिक्षा विभाग की एक महिला प्रधानाचार्य द्वारा खंड शिक्षा अधिकारी पर मानसिक उत्पीड़न और वेतन बाधित करने के आरोपों पर कड़ा संज्ञान लेते हुए अध्यक्ष ने जिलाधिकारी स्तर पर जाँच कमेटी गठित करने और आरोपी अधिकारी के तत्काल स्थानांतरण के निर्देश मुख्य शिक्षा अधिकारी को दिए। इसी क्रम में, यमकेश्वर क्षेत्र से प्राप्त फोटो वायरल करने की शिकायत और पुलिस की शिथिलता पर नाराजगी जताते हुए अध्यक्ष ने उपस्थित पुलिस क्षेत्राधिकारी को दोषियों के विरुद्ध अविलंब मुकदमा दर्ज कर कठोर कार्रवाई के आदेश दिए। वहीं, सीएचसी पाबो में तैनात एक नर्सिंग अधिकारी द्वारा सहकर्मी रोहित रावत पर शराब पीकर अभद्र व्यवहार और सोशल मीडिया पर बदतमीजी करने की शिकायत पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी को तत्काल स्पष्टीकरण व स्थानांतरण सुनिश्चित करने को कहा गया। साथ ही, 53 वर्षीय पीड़िता मंजू देवी का ई-श्रम कार्ड न बनने की समस्या का मौके पर ही समाधान कराते हुए अधिकारियों को तत्काल कार्ड जारी करने के निर्देश दिए गए।
जनसुनवाई के दौरान वन स्टॉप सेंटर की समीक्षा में पाया गया कि अप्रैल 2025 से अब तक 540 पंजीकृत मामलों में से 460 का सफल निस्तारण किया जा चुका है।
अंत में अधिकारियों को संबोधित करते हुए कुसुम कंडवाल ने स्पष्ट किया कि सभी विभागों में ICC कमेटी का नियमित गठन अनिवार्य है। उन्होंने संवेदनशील भाव से कहा कि महिलाएं कार्यस्थल और घर की दोहरी जिम्मेदारी निभाती हैं, अतः उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार और सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
जनसुनवाई के इस अवसर पर परियोजना निदेशक ग्राम्य विकास विवेक उपाध्याय, संयुक मजिस्ट्रेट दीक्षिता जोशी, पौड़ी जिला शिक्षाधिकारी माध्यमिक रंजीत नेगी, पुलिस क्षेत्राधिकारी सदर पौड़ी तुषार बोरा, विधि अधिकारी महिला आयोग दयाराम सिंह, कमल किशोर रावत, सुषमा रावत, जिला कार्यक्रम अधिकारी देवेंद्र थपलियाल, प्रोबेशन अधिकारी अरविंद कुमार, निजी सचिव अध्यक्ष, महिला आयोग आधार वर्मा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिवक्ता, सहित विभिन्न विभागों के जनपद स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।
अग्निवीरों के भविष्य की सुरक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी- मुख्यमंत्री
गैरसैंण। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को भराड़ीसैंण में अग्निवीर सैनिकों के रूप में भर्ती होने वाले कैडेट्स के साथ संवाद किया। संवाद के दौरान कैडेट्स ने मुख्यमंत्री से विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे, जिनका मुख्यमंत्री ने सहजता से उत्तर दिया।
संवाद के दौरान शंकर सिंह राणा ने मुख्यमंत्री से पूछा कि सैनिक पुत्र होने के कारण आपने सैनिकों के जीवन और गतिविधियों को नजदीक से देखा है, क्या आपका मन सेना में जाने का नहीं हुआ? इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सेना में जाना अन्य सेवाओं की अपेक्षा अत्यंत सम्माननीय माना जाता है। उन्होंने कहा कि वे अपने जीवन को भी एक सैनिक के जीवन की तरह अनुशासित और समर्पित मानकर कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि अपने पिताजी के साथ रहते हुए उन्होंने सेना के अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा को करीब से देखा है। जिस प्रतिबद्धता और समर्पण के साथ हमारे सैनिक अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं, उसी भावना से वे प्रदेश के मुख्य सेवक के रूप में उत्तराखण्ड की देवतुल्य जनता की सेवा करने का प्रयास करते हैं।
हिमांशु रौतेला ने प्रश्न किया कि प्रदेश के मुखिया होने के नाते आप अपने परिवार को कैसे समय दे पाते हैं? इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जब कोई व्यक्ति राजनीतिक और सामाजिक जीवन में सक्रिय होता है तो उसकी जिम्मेदारियां बहुत बढ़ जाती हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुख्य सेवक के रूप में प्रदेश के सभी लोग उनका परिवार हैं और सभी गांव उनके अपने गांव हैं।
ओ.पी. कण्डारी ने पूछा कि जब हम अग्निवीर के रूप में अपनी सेवा पूरी कर वापस आएंगे, उसके बाद सरकार हमारे रोजगार के लिए क्या व्यवस्था कर रही है? मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने वर्दीधारी पदों पर अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था की है। इसके अतिरिक्त केन्द्र सरकार द्वारा भी अनेक क्षेत्रों में अग्निवीरों को अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हर अग्निवीर के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
रितेश पंवार ने मुख्यमंत्री से पूछा कि आपकी पहचान “धाकड़ धामी” के रूप में क्यों बनी? मुख्यमंत्री ने कहा कि एक जनप्रतिनिधि का व्यवहार जनता के साथ सदैव सौम्य होना चाहिए। हालांकि राज्यहित और जनहित में कई बार कठोर और साहसिक निर्णय लेने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना है। प्रदेश में सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है तथा दंगा रोधी कानून भी लागू किया गया है। पिछले चार वर्षों में राज्य सरकार ने जन अपेक्षाओं और प्रदेशहित में अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं।
अमन सेमवाल ने पूछा कि आपके चेहरे पर हमेशा मुस्कान का क्या राज है? मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें कार्य करने की ऊर्जा और प्रेरणा प्रदेश की जनता के आशीर्वाद से मिलती है। उन्होंने कहा कि सरकार जन अपेक्षाओं के अनुरूप प्रदेश के समग्र विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है और आज अनेक क्षेत्रों में उत्तराखण्ड देश में अग्रणी स्थान पर है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जनभावनाओं के अनुरूप राज्य के विकास को नई गति देने के लिए पूरे संकल्प और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
इस अवसर पर अग्निवीरों और पूर्व सैनिकों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे सैनिक सीमांत और उच्च हिमालयी क्षेत्रों में कठिन परिस्थितियों में देश की सेवा करते हैं। देवभूमि उत्तराखण्ड की विशेषता है कि यहां लगभग हर परिवार से कोई न कोई सदस्य सेना या अर्द्धसैन्य बलों में सेवाएं दे रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय सेना तेजी से आत्मनिर्भर बन रही है। रक्षा क्षेत्र में भारत का निर्यात भी लगातार बढ़ रहा है और भारतीय सेना वैश्विक स्तर पर एक मजबूत और सक्षम सेना के रूप में स्थापित हुई है। सेना में निरंतर आधुनिकीकरण किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा सैनिकों और पूर्व सैनिकों के हित में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। देहरादून में भव्य सैन्यधाम का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें राज्य के वीर बलिदानियों की गौरवगाथाएं और स्मृतियां संजोई जाएंगी। उन्होंने कहा कि वे पूर्व सैनिकों को अपने अभिभावक के रूप में देखते हैं।
इस अवसर पर यूथ फाउंडेशन के संस्थापक कर्नल अजय कोठियाल (सेनि.), पूर्व सैनिकगण तथा अग्निवीर उपस्थित थे।
होटल-ढाबों को फिलहाल नहीं मिलेंगे कमर्शियल गैस सिलेंडर
देहरादून। देहरादून में रसोई गैस की आपूर्ति प्रभावित होने से उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सप्लाई में आई रुकावट के कारण शहर में करीब दो दिन का बैकलॉग बन गया है। हालात को देखते हुए फिलहाल कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सामान्य सप्लाई अस्थायी रूप से रोक दी गई है, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं और आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता दी जा सके।
जानकारी के मुताबिक गैस आपूर्ति में व्यवधान के चलते कई इलाकों में सिलेंडर की डिलीवरी समय पर नहीं हो पा रही है। इससे उपभोक्ताओं को अपने बुक किए गए सिलिंडरों के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं गैस बुकिंग के लिए इस्तेमाल होने वाला नंबर भी सही तरीके से काम नहीं कर रहा है, जिससे लोगों की दिक्कतें और बढ़ गई हैं।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए गैस एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई फिलहाल केवल आवश्यक सेवाओं तक सीमित रखी जाए। इसके तहत अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को ही कमर्शियल सिलिंडर उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि जरूरी व्यवस्थाएं प्रभावित न हों।
इस निर्णय के चलते फिलहाल शहर के होटल, ढाबे और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को कमर्शियल गैस सिलिंडर नहीं मिल पाएंगे। इससे व्यापारियों और होटल कारोबारियों को परेशानी होने की संभावना जताई जा रही है।
गैस एजेंसियों से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि सप्लाई व्यवस्था को सामान्य करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। जैसे ही बैकलॉग खत्म होगा, शहर में गैस की नियमित आपूर्ति फिर से शुरू कर दी जाएगी।
जिला पूर्ति अधिकारी केके अग्रवाल ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और अनावश्यक रूप से गैस सिलिंडर की बुकिंग न करें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगले दो दिनों के भीतर सप्लाई व्यवस्था को सामान्य करने की कोशिश की जा रही है।
प्रदेश में सात हजार किमी से अधिक सड़कें हुईं गड्डा मुक्त
गैरसैंण। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दूसरे कार्यकाल के बीते चार साल में प्रदेश में 819 पंचायत भवनों का निर्माण पुननिर्माण किया गया है। प्रदेश में पंचायत भवनों की संख्या 5867 है। इसमें से 1134 पंचायत भवन लंबे समय से जीर्णशीर्ण चल रहे थे। इसी क्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पंचायतीराज विभाग को अभियान चलाकर जीर्ण- शीर्ण भवनों का पुनर्निमाण करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद गत चार वर्ष में विभाग ने 819 पंचायत भवनों का निर्माण- पुननिर्माण कर लिया है। शेष भवनों पर भी कार्य किया जा रहा है। मंगलवार को विभागीय मंत्री सतपाल महाराज ने विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान यह जानकारी सदन के सामने रखी।
7 हजार किमी से अधिक सड़कें गड्डा मुक्त
प्रदेश में लोकनिर्माण विभाग नवंबर के प्रथम सप्ताह तक सात हजार से अधिक किमी सडकों को गड्डा मुक्त कर चुका है। सदन में विभाग की ओर से प्रस्तुत जानकारी के अनुसार प्रदेश की सड़कों को गड्डा मुक्त करने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सख्त निर्देशों के क्रम में विभाग ने वर्ष 2025-26 में मानसून काल से पूर्व 3134 किमी लंबी सड़कों को गड्डा मुक्त किया। जबकि मानसून के बाद 10 नवंबर 2025 तक 4149.17 किमी लंबी सड़कों को गड्डा मुक्त किया। इस दौरान अकेले हरिद्वार जनपद में 313 किमी से अधिक लंबी सड़कों को गड्डामुक्त किया गया।
रोपवे परियोजनाओं पर काम तेज
प्रदेश में विभिन्न तीर्थ स्थलों को रोपवे से जोड़ने की प्रक्रिया गतिमान है। पर्यटन मंत्री ने मंगलवार को विधानसभा में बताया कि विभाग ने कद्दूखाल से सुरकंडा देवी मंदिर के लिए पीपीपी मोड़ में रोपवे का संचालन शुरु कर दिया है। इसके अलावा जनपद चम्पावत में ठुलीगाड़ से पूर्णागिरी रोपवे भी पीपीपी मोड में निर्माणाधीन है। साथ ही जनपद उत्तरकाशी में जानकी चट्टी से यमुनोत्री मंदिर तक के लिए भी रोपवे पीपीपी मोड में विकसित किया जा रहा है। साथ ही साथ गौरीकुंड से केदारनाथ धाम, गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब के लिए भी रोपवे निर्माण की प्रक्रिया गतिमान है।
ग्रामीणों ने गुलदार को मारने की उठाई मांग
पौड़ी। पौड़ी जिले के जामलाखाल क्षेत्र में गुलदार के हमले से एक व्यक्ति की मौत के बाद इलाके में भय और आक्रोश का माहौल बन गया है। घटना के बाद ग्रामीणों में भारी दहशत फैल गई, वहीं गुस्साए लोगों ने वन विभाग और प्रशासन के कर्मचारियों को पंचायत घर में रोककर गुलदार को मारने की मांग उठाई है।
घर लौटते समय गुलदार ने किया हमला
जानकारी के अनुसार घटना सोमवार शाम की है। पौड़ी वन प्रभाग से सटे घुड़दौड़ी क्षेत्र के जामलाखाल निवासी 47 वर्षीय प्रकाश लाल इंटरलॉकिंग का काम करके शाम को अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान रास्ते में घात लगाए बैठे गुलदार ने उन पर हमला कर दिया और उन्हें अपना शिकार बना लिया।
सुबह खोजबीन में हुआ घटना का खुलासा
रात तक घर नहीं पहुंचने पर परिजनों और ग्रामीणों ने उनकी तलाश शुरू की। मंगलवार सुबह खोजबीन के दौरान पता चला कि गुलदार ने प्रकाश लाल को मार डाला है। इस दर्दनाक घटना की खबर फैलते ही पूरे गांव में दहशत का माहौल बन गया।
गुस्साए ग्रामीणों ने अधिकारियों को बनाया बंधक
घटना से नाराज ग्रामीणों ने तहसीलदार, पटवारी और वन विभाग के करीब 15 कर्मचारियों को पंचायत घर में रोक लिया। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में लगातार गुलदार की गतिविधियां बढ़ रही हैं, जिससे लोगों की जान को खतरा बना हुआ है। उन्होंने गुलदार को मारने या जल्द पकड़ने की मांग की है।
गैरसैंण। उत्तराखंड विधानसभा के भराड़ीसैंण स्थित भवन में चल रहे बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वित्तीय वर्ष 2026–27 का बजट सदन में पेश किया। करीब 1,11,703 करोड़ रुपये के इस बजट को प्रदेश के समग्र और संतुलित विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने बजट का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार ने महिलाओं, बच्चों और समाज के कमजोर वर्गों के कल्याण को प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि बजट में ‘सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण 2.0’ के लिए 598 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, वहीं मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट योजना, आंचल अमृत योजना और वात्सल्य योजना जैसी योजनाओं के लिए भी बजट में व्यवस्था की गई है।
रेखा आर्या ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लिए 1,327 करोड़ रुपये का प्रावधान सरकार की संवेदनशील सोच को दर्शाता है। इसके अलावा ग्रामीण विकास, सड़क निर्माण, स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, तकनीकी विकास और युवाओं के स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए भी महत्वपूर्ण बजट प्रावधान किए गए हैं।
देहरादून। प्रदेश के कृषि एवं ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा गैरसैंण विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए लगभग ₹1,11,703.21 करोड़ का ऐतिहासिक और समावेशी बजट प्रस्तुत करने पर मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह बजट गरीबों, युवाओं, किसानों (अन्नदाताओं) और नारीशक्ति के उत्थान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और प्रदेश के सतत विकास की दिशा में एक मजबूत कदम साबित होगा।
कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि यह बजट केवल एक वित्तीय दस्तावेज नहीं, बल्कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक की आशाओं और आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है। उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों में केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का जो सकारात्मक प्रभाव धरातल पर दिखाई दे रहा है, यह बजट उन प्रयासों को और अधिक विस्तार देने का कार्य करेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि यह बजट ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उन्होंने कहा कि बजट में विकसित भारत रोजगार गारंटी एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) के तहत पारदर्शी और समयबद्ध भुगतान, परिसंपत्तियों के निर्माण तथा आजीविका से जुड़े कार्यों के माध्यम से स्थायी आय बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। इस योजना के अंतर्गत VB-GRAM G के लिए लगभग ₹705.25 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत पूंजीगत मद में लगभग ₹1642.20 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
कृषि मंत्री जोशी ने कहा कि कृषि और उद्यान क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए बजट में कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। महक क्रांति योजना के लिए ₹10 करोड़, फसलों की सुरक्षा के लिए घेरबाड़ हेतु ₹20 करोड़, मिशन एप्पल के लिए ₹42 करोड़, उच्च मूल्य वाले फलों जैसे कीवी और ड्रेगन फ्रूट के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए ₹30.70 करोड़, राज्य में चाय विकास योजना के लिए ₹25.93 करोड़, सगंध पौधा केंद्र को अनुदान एवं सगंध पौधों के क्लस्टर विकास के लिए ₹24.75 करोड़, उद्यान बीमा योजना के लिए ₹40 करोड़ तथा मुख्यमंत्री राज्य कृषि विकास योजना के लिए ₹20 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है।
कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि यह बजट कृषि, ग्रामीण विकास और रोजगार के नए अवसरों को बढ़ावा देने वाला बजट है, जिससे प्रदेश के किसानों, युवाओं और ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास को नई दिशा मिलेगी।
स्वीकृत मानचित्र के अनुरूप नहीं हो रहा था निर्माण, शिकायत के बाद टीम ने मौके पर पहुंचकर रोका काम
देहरादून। मसूरी–देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने अवैध निर्माण के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत ऋषिकेश में एक बहुमंजिला भवन को सील कर दिया। मनीराम मार्ग स्थित गली नंबर-10 में बिना स्वीकृत मानचित्र के किए जा रहे निर्माण पर यह कार्रवाई की गई। प्राधिकरण को निर्माण की शिकायत मिलने के बाद अधिकारियों की टीम ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर तत्काल भवन को सील कर दिया।
जानकारी के अनुसार सरला अग्रवाल और रेनू गोयल द्वारा मनीराम मार्ग क्षेत्र में बहुमंजिला भवन का निर्माण कराया जा रहा था। प्राधिकरण को इस निर्माण के संबंध में शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसके बाद संबंधित अधिकारियों को मौके पर जांच के लिए भेजा गया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि भवन निर्माण न तो स्वीकृत मानचित्र के अनुरूप था और न ही इसके लिए प्राधिकरण से आवश्यक अनुमति ली गई थी। नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने के बाद एमडीडीए की टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए भवन को सील कर दिया और निर्माण कार्य पूरी तरह से रोक दिया गया। सीलिंग की कार्रवाई के दौरान भवन परिसर को बंद कर दिया गया और किसी भी प्रकार की गतिविधि पर रोक लगा दी गई। प्राधिकरण अधिकारियों का कहना है कि शहर में बिना अनुमति के हो रहे निर्माण न केवल शहरी नियोजन को प्रभावित करते हैं, बल्कि इससे यातायात, सुरक्षा और आधारभूत ढांचे पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसलिए ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जा रही है।
प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध निर्माणों की लगातार निगरानी की जा रही है। इसके लिए अलग-अलग टीमों का गठन किया गया है, जो समय-समय पर विभिन्न क्षेत्रों का निरीक्षण कर रही हैं। जहां भी बिना स्वीकृति या मानचित्र से अलग निर्माण की सूचना मिलती है, वहां तत्काल कार्रवाई की जाती है। प्राधिकरण का मानना है कि शहर के संतुलित और नियोजित विकास के लिए निर्माण नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है। इस कार्रवाई के दौरान सहायक अभियंता अभिषेक भारद्वाज, अवर अभियंता पूनम सकलानी, अवर अभियंता अमित भारद्वाज, सुपरवाइजर तथा पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा। टीम ने पूरे क्षेत्र का निरीक्षण करने के बाद निर्माण स्थल को सील किया और संबंधित दस्तावेजी कार्रवाई भी पूरी की। प्राधिकरण का कहना है कि अवैध निर्माण के खिलाफ यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।
उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी का बयान
एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध निर्माण किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि शहर के सुव्यवस्थित विकास और सुरक्षित शहरी ढांचे के लिए निर्माण नियमों का पालन अनिवार्य है। बिना स्वीकृत मानचित्र के बहुमंजिला भवनों का निर्माण गंभीर उल्लंघन है और प्राधिकरण इस पर लगातार निगरानी बनाए हुए है। ऋषिकेश में की गई सीलिंग कार्रवाई इसी दिशा में उठाया गया कदम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमों के विपरीत निर्माण करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई भी की जा सकती है।
सचिव एमडीडीए मोहन सिंह बर्निया का बयान
एमडीडीए के सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध निर्माणों के खिलाफ नियमित अभियान चलाया जा रहा है। ऋषिकेश के मनीराम मार्ग में बिना अनुमति बहुमंजिला भवन का निर्माण किया जा रहा था, जिस पर नियमानुसार सीलिंग की कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि निरीक्षण टीमें लगातार क्षेत्र का भ्रमण कर रही हैं और जहां भी नियमों का उल्लंघन सामने आता है, वहां तुरंत कार्रवाई की जाती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी निर्माण से पहले प्राधिकरण से आवश्यक अनुमति अवश्य लें।
देहरादून। प्रदेश के कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने विगत दिनों दैनिक समाचार पत्रों में प्रकाशित समाचारों का गंभीरता से संज्ञान लिया है, जिनमें कृषि विभाग के अंतर्गत निर्धारित कानूनों का पालन न किए जाने तथा इससे किसानों, आमजन, पर्यावरण और जनस्वास्थ्य को खतरा उत्पन्न होने की बात कही गई है।
कृषि मंत्री गणेश जोशी ने प्रकाशित समाचार के अनुसार विभाग द्वारा नियमों के विरुद्ध अपात्र व्यक्तियों एवं फर्मों को पेस्ट कंट्रोल के लाइसेंस जारी करने तथा कुछ दुकानों पर प्रतिबंधित कीटनाशकों की अवैध बिक्री किए जाने के प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने विभागीय सचिव को पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए हैं।
कृषि मंत्री गणेश जोशी ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की अनियमितता या नियमों के उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर शीघ्र रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए और यदि किसी भी स्तर पर दोषी पाए जाते हैं तो उनके विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण तथा जनस्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और इस दिशा में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
यशपाल आर्य ने कहा, अपने लंबे जीवन में उन्होंने इतना कमजोर और वास्तविकता से कटा हुआ अभिभाषण पहले कभी नहीं सुना
देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर प्रतिक्रिया देते हुए नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने इसे निराशाजनक, दिशाहीन, संकल्पविहीन और विकास विरोधी बताया। उन्होंने कहा कि अपने लंबे सार्वजनिक और संसदीय जीवन में उन्होंने इतना कमजोर और वास्तविकता से कटा हुआ अभिभाषण पहले कभी नहीं सुना।
यशपाल आर्य ने कहा कि यह अभिभाषण “सफेद कागज पर झूठ की काली स्याही से लिखी गई इबारत” जैसा है। इसमें प्रदेश की वास्तविक समस्याओं, जनता की पीड़ा और राज्य के सामने खड़ी चुनौतियों का कहीं भी उल्लेख नहीं दिखाई देता।
उन्होंने कहा कि राज्यपाल का अभिभाषण सरकार की प्राथमिकताओं, नीतियों और लक्ष्यों का दस्तावेज होता है और इसमें पिछले वर्ष की उपलब्धियों का भी उल्लेख होता है। लेकिन इस बार सरकार ने यह बताने की आवश्यकता भी नहीं समझी कि पिछले चार वर्षों में निर्धारित लक्ष्यों में से कितने पूरे हुए और कितने अधूरे रह गए।
आर्य ने कहा कि वर्ष 2022 में भाजपा सरकार बनने के बाद यह राज्यपाल का पाँचवाँ अभिभाषण है, लेकिन इतने लंबे समय के बाद भी सरकार के पास बताने के लिए ठोस उपलब्धियाँ नहीं हैं। सरकार हर वर्ष अपने लक्ष्य बदल देती है या अपने ही घोषित लक्ष्यों से पीछे हट जाती है। यही कारण है कि प्रदेश को उपलब्धियों के नाम पर कुछ भी ठोस नहीं मिल पा रहा है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार इस वर्ष भी अपनी प्रमुख उपलब्धि के रूप में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लागू करने का दावा कर रही है। सरकार के अनुसार इस कानून के अंतर्गत 5 लाख 27 हजार आवेदन प्राप्त हुए हैं, लेकिन आर्य का आरोप है कि इनमें से अधिकांश आवेदन सरकारी कर्मचारियों के हैं, जिन्हें प्रशासनिक दबाव या वेतन रोकने के भय से पुराने विवाहों का पुनः पंजीकरण कराने के लिए बाध्य किया गया है।
उन्होंने कहा कि यूसीसी में लिव-इन रिलेशन से जुड़े प्रावधानों के दुष्प्रभाव भी सामने आने लगे हैं। लिव-इन संबंधों में रह रही युवतियों की हत्या की घटनाएँ तथा बच्चों के जन्म के बाद महिलाओं को परित्यक्त छोड़ देने जैसी घटनाएँ यह दर्शाती हैं कि यह कानून राज्य की सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों के अनुरूप नहीं है। इससे जनसांख्यिकीय परिवर्तन की आशंकाएँ भी पैदा हो रही हैं।
आर्य ने अभिभाषण में किए गए “लखपति दीदी” संबंधी दावे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार का दावा है कि प्रदेश में ढाई लाख महिलाएँ लखपति बन चुकी हैं। यदि यह दावा सही है तो सरकार इन महिलाओं की सूची सार्वजनिक करे। उनका आरोप है कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के बजाय उन्हें कर्ज के बोझ तले दबा दिया गया है।
उन्होंने पर्यटन और चारधाम यात्रा व्यवस्था को लेकर भी सरकार को घेरा। उनका कहना है कि सरकार शीतकालीन यात्रा को बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत कर रही है, जबकि पिछले दो यात्रा सीजन में अव्यवस्था और कुप्रबंधन के कारण होटल व्यवसायी, टैक्सी चालक, घोड़ा-खच्चर संचालक और छोटे व्यापारी प्रभावित हुए हैं।
आर्य ने कहा कि बागवानी और कृषि योजनाओं में भी किसानों को नुकसान उठाना पड़ा है। सब्सिडी और प्रोत्साहन के बड़े-बड़े दावे किए गए, लेकिन कई किसानों को अपनी लागत तक नहीं मिल पाई, जिससे वे आर्थिक संकट में फंसते जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार चार वर्षों की वास्तविक उपलब्धियाँ बताने के बजाय वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र और विकसित प्रदेश बनाने जैसे दूरगामी नारों के माध्यम से जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रही है। वर्तमान समस्याओं का समाधान किए बिना दूर के सपने दिखाना केवल जनता को भ्रमित करना है।
आर्य ने कहा कि इस अभिभाषण को “विजन डॉक्यूमेंट” के बजाय “कन्फ्यूजन डॉक्यूमेंट” कहा जाए तो यह अतिशयोक्ति नहीं होगी। उनका कहना है कि उत्तराखंड की जनता अब सरकार के दावों और वास्तविकता के बीच का अंतर समझ चुकी है और समय आने पर इसका जवाब देगी।
