स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा, गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं देना सरकार की प्राथमिकता
देहरादून। राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए स्वास्थ्य विभाग जल्द ही डॉक्टरों के 287 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है। इसके लिए शासन ने प्रस्ताव उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड को भेज दिया है। इनमें 231 पद सीधी भर्ती और 56 पद बैकलॉग के अंतर्गत शामिल किए गए हैं।
सरकार का उद्देश्य राज्य के दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करना है। जहां डॉक्टरों की कमी लंबे समय से महसूस की जा रही थी, वहां अब नई नियुक्तियों से राहत मिलने की उम्मीद है।
सचिव स्वास्थ्य डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य हर नागरिक तक समय पर और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं और यह भर्ती अभियान उसी दिशा में एक बड़ा कदम है।
चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड को निर्देश दिए गए हैं कि वह जल्द से जल्द भर्ती प्रक्रिया शुरू करे, ताकि राज्य के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक चिकित्सक तैनात किए जा सकें और जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
सीएम धामी ने सरदार पटेल की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर दी श्रद्धांजलि
मुख्यमंत्री ने जनता को स्वदेशी अपनाने और नशा मुक्त भारत का संकल्प दिलाया
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को ‘लौह पुरुष’ सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर आयोजित पदयात्रा में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने सरदार पटेल की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने उपस्थित लोगों को स्वदेशी उत्पादों के उपयोग और नशा मुक्त भारत अभियान से जुड़ने का संकल्प भी दिलाया।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल भारत की एकता, अखंडता और संकल्प के प्रतीक हैं। स्वतंत्रता संग्राम में उनके अद्वितीय योगदान और रियासतों के भारत में विलय की उनकी ऐतिहासिक भूमिका के कारण उन्हें सच्चे अर्थों में “लौह पुरुष” कहा जाता है।
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, गणेश जोशी, रेखा आर्या, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक खजान दास, और सविता हरबंस कपूर सहित कई जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री धामी ने जनता से NDA उम्मीदवार को प्रचंड बहुमत से विजयी बनाने की अपील की
मोतिहारी। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को बिहार के कल्याणपुर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी सचिन्द्र प्रसाद सिंह के समर्थन में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। सभा में मुख्यमंत्री धामी ने जनता से NDA उम्मीदवार को प्रचंड बहुमत से विजयी बनाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि जब राजनीति में सिद्धांतों की जगह परिवारवाद और स्वार्थ हावी हो जाते हैं, तो लूट-खसोट और भ्रष्टाचार स्वाभाविक हो जाता है। सीएम धामी ने कहा कि RJD और कांग्रेस की राजनीति इसका स्पष्ट उदाहरण है — जहाँ टिकटों की बिक्री से लेकर सत्ता में आने पर घोटालों की बरसात तक सब कुछ देखा गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा, “बिहार में RJD का परिवार अब भ्रष्टाचार का प्रतीक बन चुका है, इनके अधिकांश सदस्य जमानत पर हैं। वहीं कांग्रेस का परिवार देश का सबसे बड़ा भ्रष्ट राजनीतिक कुनबा है, जहाँ नेता जनता से नहीं बल्कि अदालतों से राहत मांगते फिरते हैं। इनके लिए लोकतंत्र जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सत्ता लूट का जरिया बन चुकी है।”
सीएम धामी ने विश्वास जताया कि बिहार की जागरूक, राष्ट्रवादी और विकासप्रिय जनता एक बार फिर राज्य के समग्र विकास और सुशासन के लिए NDA को चुनने जा रही है।
देहरादून। दून मेडिकल कॉलेज के सभागार में आयोजित ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता शिविर में उत्तराखंड की महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने बतौर मुख्य अतिथि हिस्सा लिया। गुरुवार को इस अवसर पर ब्रेस्ट कैंसर विषय पर आयोजित पेंटिंग और स्लोगन प्रतियोगिता की विजेताओं को सम्मानित किया गया।
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि मातृशक्ति को अपने स्वास्थ्य के प्रति सबसे अधिक जलसजग होना होगा, क्योंकि एक स्वस्थ महिला ही मजबूत परिवार, समाज और राज्य की नींव होती है। उन्होंने कहा कि महिलाओं में अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की कमी आज भी एक बड़ी समस्या है, जिसके कारण छोटी सी समस्या कई बार विकराल रूप ले लेती है।
उन्होंने कहा कि ब्रेस्ट कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाव का सबसे बड़ा उपाय समय पर जांच और जागरूकता है। मंत्री ने कार्यक्रम में मौजूद युवाओं का आह्वान किया कि वे भी समाज में महिला स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि जब युवा इस दिशा में काम करेंगे, तभी समाज में सकारात्मक बदलाव आएगा।
इस अवसर पर अमर उजाला के स्थानीय संपादक अनूप बाजपेई, महाप्रबंधक प्रवीण शर्मा, उत्तराखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष गीता खन्ना, डॉक्टर रेखा खन्ना, डॉक्टर गीता जैन, डॉक्टर मोनिका, डॉक्टर अर्चना डिमरी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
ऑटोमेटेड पार्किंग से यात्रियों को मिलेगा निःशुल्क आने-जाने का साधन, जल्द जुड़ेंगे 6 नए ईवी वाहन
देहरादून। शहर में यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाने और पार्किंग की समस्या से राहत दिलाने के लिए जिला प्रशासन ने एक सराहनीय पहल की है। प्रशासन द्वारा ऑटोमेटेड पार्किंग सुविधा के तहत ‘‘फ्री सखी कैब’’ सेवा की शुरुआत की गई है। इस योजना के तहत जिला ग्राम्य विकास अभिकरण, देहरादून को दो नई ईवी (टाटा पंच) वाहन आवंटित किए गए हैं, जो पार्किंग में वाहन खड़ा करने वाले लोगों को नजदीकी भीड़भाड़ वाले स्थानों तक निःशुल्क लाने और ले जाने की सुविधा प्रदान कर रहे हैं।
जल्द ही इस बेड़े में छह अतिरिक्त ईवी वाहन जोड़े जाएंगे, जिससे नागरिकों को और अधिक सुविधा मिल सकेगी। ये सभी वाहन पीपीपी मॉडल पर संचालित किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री धामी के मार्गदर्शन में शहर को मिलेगी ट्रैफिक से राहत
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में जिलाधिकारी सविन बंसल ने शहर को ट्रैफिक जाम से राहत दिलाने और पार्किंग व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए तीन नई ऑटोमेटेड पार्किंग सुविधाओं का निर्माण करवाया है।
इनमें शामिल हैं:
परेड ग्राउंड पार्किंग – 111 वाहनों की क्षमता
तिब्बती मार्केट पार्किंग – 132 वाहनों की क्षमता
कोरोनेशन पार्किंग – 18 वाहनों की क्षमता
कुल 261 वाहनों की क्षमता वाली ये तीनों पार्किंग सुविधाएं जल्द ही मुख्यमंत्री धामी द्वारा जनता को समर्पित की जाएंगी।
5 किमी दायरे में फ्री शटल कैब सेवा
फ्री ‘सखी कैब’ सेवा के अंतर्गत घंटाघर, गांधी पार्क, सुभाष रोड और परेड ग्राउंड के आसपास 5 किलोमीटर के दायरे में निःशुल्क शटल सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इस सेवा से पार्किंग से अपने गंतव्य तक पहुंचना अब आसान और सुरक्षित हो गया है।
अनधिकृत पार्किंग पर सख्त कार्रवाई
प्रशासन और पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अब शहर की सड़कों पर अवैध रूप से खड़े वाहनों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस दिशा में पिछले एक माह से एक डेडिकेटेड क्रेन भी तैनात की गई है, जो अनधिकृत पार्किंग करने वालों पर तत्काल कार्रवाई करेगी।
एनआरएलएम योजना के तहत संचालन
देहरादून की परेड ग्राउंड पार्किंग का संचालन वर्तमान में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के अंतर्गत गठित कृष्णा स्वयं सहायता समूह, विकासनगर द्वारा किया जा रहा है। इस पहल से न केवल शहरवासियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि महिला स्वयं सहायता समूहों को भी आजीविका के नए अवसर प्राप्त होंगे।
शत प्रतिशत आंगनबाड़ी केन्द्रों को दी गयी पठन-पाठन एवं खेल सामाग्री- कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी
देहरादून। कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने देहरादून के गजियावाला में मसूरी विधानसभा क्षेत्र के अर्न्तगत विकाखण्ड सहसपुर के तहत 15 ग्राम पंचायतों के लिए 28 आंगनवाड़ी केंद्रों को खेल एवं पठन-पाठन सामग्री का वितरण कार्यक्रम किया।
इसके तहत आंगनवाड़ी केन्द्रों में बच्चों के लिए टिफिन बॉक्स, पानी की बोतल, डार्ट र्बोड, पजल गेम, किचन सेट, डॉक्टर सेट, चार्ट 3डी, चार्ट वाईट, चार्ट ब्लैक, रोलर बोर्ड ब्लैक, रोलर बोर्ड वाईट, क्रेजी बॉल, पेन्सिल बॉक्स, पेन्सिल, कटर शार्पनर, रबड़ इरेजर, स्कैच पेन, दरी, कलरिंग बुक, स्लेट, स्लेटी बॉक्स, वेट मशीन, आयरन बॉक्स, एलुमिनियम पतीला, करछी स्टील, प्रेशर कूकर आदि सामाग्री उपलब्ध करायी। उन्होंने मसूरी विधानसभा क्षेत्र के अर्न्तगत सभी आंगनवाड़ी केन्द्रों के लिए फर्नीचर, अल्मारी तथा अन्य आवश्यक सामाग्री उपलब्ध कराये जाने की घोषणा भी की।
वितरण कार्यक्रम के बाद अपने सम्बोधन में काबीना मंत्री ने नोबेल पुरस्कार विजेता नेल्सन मंडेला की बात को रखते हुए कहा कि शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार है, जिसका उपयोग आप दुनिया को बदलने के लिए कर सकते हैं। मंत्री ने कहा कि शिक्षा हमारे समाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और शिक्षा के बिना किसी भी देश व समाज का विकास नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा कि मैंने मसूरी विधानसभा के 100 आंगनवाड़ी केंद्रों व 11 मिनी आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ रहे बच्चों को खेल व पठन पाठ्य सामग्री देने की शुरुआत की। इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए आज 28 आंगनवाड़ी केन्द्रों में पठन-पाठन एवं खेल सामाग्री उपलब्ध करायी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि शत प्रतिशत आंगनवाड़ियों को पठन पाठन एवं खेल सामाग्री उपलब्ध करायी जा चुकी है।
कैबिनेट मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार बाल विकास एवं महिला सशक्तिकरण के लिए सतत प्रयासरत है। आंगनवाड़ी केन्द्र बच्चों के सर्वांगीण विकास की प्रथम कड़ी हैं, जहाँ बालकों में शिक्षा, संस्कार और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की नींव रखी जाती है। उन्होंने बताया कि खेल एवं पठन-पाठन सामग्री उपलब्ध होने से बच्चों में सीखने की रुचि बढ़ेगी तथा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को भी शिक्षण कार्य बेहतर ढंग से संचालित करने में सहायता मिलेगी।
इस अवसर पर भाजपा की मंडल प्रभारी ज्योति कोटिया, मण्डल महामंत्री किरन मन्युड़ी, सीमा पुंडीर, पूर्व प्रधान लीला शर्मा, ग्राम प्रधान सुनील क्षेत्री, मंडल अध्यक्ष राजीव गुरुंग, पूर्व मंडल अध्यक्ष पूनम नौटियाल, जितेंद्र राणा, समुन्द्र रैग्मी, संजय शर्मा, ग्राम प्रधान भारती जवाड़ी, सुरेश जवाडी पूर्व बीडीसी ज्योति ढकाल सहित स्थानीय लोग उपस्थित रहे।
शहरी क्षेत्रों में कुत्तों के भोजन, देखभाल और गोद लेने की प्रक्रिया अब होगी पूरी तरह नियमित
देहरादून। अब शहरों की गलियों और कॉलोनियों में घूमने वाले निराश्रित कुत्तों के लिए बेहतर व्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। शहरी विकास विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में नई नियमावली जारी करते हुए सभी नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों को हर वार्ड में समर्पित ‘डॉग फीडिंग ज़ोन’ (भोजन स्थल) बनाने के आदेश दिए हैं।
इस नियम के तहत अब कोई भी व्यक्ति निर्धारित स्थानों के अलावा कहीं और कुत्तों को भोजन नहीं करा सकेगा। वहीं पशु प्रेमियों के लिए यह सुविधा भी दी गई है कि वे नगर निकाय में आवेदन कर इन कुत्तों को गोद ले सकेंगे। गोद लेने के बाद उस कुत्ते को चिन्हित कर संबंधित व्यक्ति को उसकी जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
शासन ने जारी की विस्तृत गाइडलाइन
अपर सचिव संतोष बडोनी की ओर से जारी निर्देशों में कहा गया है कि प्रत्येक नगर वार्ड में निराश्रित कुत्तों की संख्या और उनकी आवाजाही को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त स्थानों पर भोजन स्थल बनाए जाएं। इन स्थलों के आसपास बच्चों और बुजुर्गों की अधिक आवाजाही न हो, इसका भी ध्यान रखना होगा।
हर भोजन स्थल पर सूचना पट्ट लगाए जाएंगे, जिन पर स्पष्ट रूप से लिखा होगा कि कुत्तों को केवल वहीं भोजन कराया जा सकता है। नियम तोड़ने वालों के खिलाफ नगर निकाय कार्रवाई करेंगे।
स्वच्छता और जनजागरूकता पर भी रहेगा फोकस
नगर निकायों को इन भोजन स्थलों की स्वच्छता, अपशिष्ट निस्तारण और पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी। साथ ही, नागरिकों को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान हेल्पलाइन नंबर भी सार्वजनिक किए जाएंगे। तब तक लोग अपनी शिकायतें सीएम हेल्पलाइन 1905 पर दर्ज करा सकेंगे।
गोद लिए गए कुत्तों का अभिलेख तैयार होगा
गोद लिए गए कुत्तों को चिह्नित किया जाएगा और उनका पूरा रिकॉर्ड नगर निकाय के पास रखा जाएगा। एक बार गोद लेने के बाद उन्हें दोबारा सड़क पर नहीं छोड़ा जा सकेगा। वहीं, हिंसक या रैबीज ग्रस्त कुत्तों को निगरानी में रखने और उनके उपचार की व्यवस्था की जाएगी।
सामान्य प्रवृत्ति वाले कुत्तों का बधियाकरण और एंटी-रैबीज टीकाकरण कर उन्हें उनके क्षेत्र में ही वापस छोड़ा जाएगा।
एनजीओ और शिक्षण संस्थानों से भी लिया जाएगा सहयोग
नियमावली में कहा गया है कि नगर निकाय स्थानीय एनजीओ, पशु प्रेमियों और शिक्षण संस्थानों के सहयोग से इस व्यवस्था को सफल बनाने में भूमिका निभाएंगे।
साथ ही प्रशिक्षित डॉग हैंडलरों की टीम तैयार की जाएगी, जो पकड़ने और रेस्क्यू कार्य को सुरक्षित ढंग से अंजाम देगी।
मुख्यमंत्री धामी के निर्देश पर आपदा प्रबंधन विभाग ने शुरू की राज्यव्यापी मॉक ड्रिल की तैयारी
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर 15 नवंबर को भूकंप तथा भूकंप के प्रभाव से उत्पन्न होने वाली अन्य आपदाओं का प्रभावी तरीके से सामना करने तथा विभिन्न रेखीय विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए सभी 13 जनपदों में मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी। बुधवार को सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन की अध्यक्षता में मॉक ड्रिल की तैयारी को लेकर ओरिएंटेशन तथा कोऑर्डिनेशन कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस दौरान सभी जनपदों को मॉक ड्रिल के आयोजन को लेकर विभिन्न पहलुओं के बारे में विस्तारपूर्वक बताया गया।
सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने बताया कि मुख्यमंत्री ने भूकंप पर राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल कराने तथा विभिन्न रेखीय विभागों तथा केंद्र सरकार की एजेंसियों के बीच समन्वय की कड़ी को मजबूत करने, भूकंप तथा इससे जुड़ी अन्य आपदाओं के दौरान राहत और बचाव कार्यों को प्रभावी तरीके से संचालित करने, संसाधनों को बेहतर से बेहतर उपयोग हो, यह सुनिश्चित करने के लिए राज्य स्तरीय मॉक अभ्यास आयोजित करने के निर्देश दिए थे।
उन्होंने बताया कि यूएसडीएमए ने मॉक ड्रिल को लेकर तैयारियां प्रारंभ कर दी हैं।
12 नवंबर को टेबल टॉप एक्सरसाइज आयोजित की जाएगी तथा 15 नवंबर को राज्य के सभी 13 जनपदों में मॉक ड्रिल का आयोजन होगा।
उन्होंने बताया कि मॉक ड्रिल का आयोजन आईआरएस यानी त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली के अंतर्गत किया जाएगा। उन्होंने बताया कि टेबल टॉप एक्सरसाइज में सभी जनपद अपनी तैयारियों के साथ ही संसाधनों की उपलब्धता, उनकी तैनाती, मॉक ड्रिल के लिए अपनी योजना के बारे में बताएंगे।
बैठक में अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रशासन आनंद स्वरूप, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रशासन क्रियान्वयन डीआईजी राजकुमार नेगी, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मो0 ओबैदुल्लाह अंसारी, यूएलएमएमसी के निदेशक डॉ. शांतनु सरकार, डॉ बिमलेश जोशी तथा यूएसडीएमए, यूएलएमएमसी तथा यू-प्रिपेयर के अधिकारी तथा विशेषज्ञ आदि मौजूद थे। सभी जनपदों के अधिकारी तथा विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञ ऑनलाइन बैठक में शामिल हुए।
भूकंप के लिहाज से संवेदनशील है राज्य-सुमन
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने बताया कि उत्तराखण्ड भूकंप के दृष्टिकोण से संवेदनशील राज्य है। सभी जनपद जोन 04 व 05 में आते हैं। इसलिए भूकंप से निपटने के लिए न सिर्फ सरकार व शासन-प्रशासन के स्तर पर बल्कि समुदाय स्तर पर भी प्रभावी प्रतिक्रिया जरूरी है ताकि भूकंप के प्रभावों को कम किया जा सके। उन्होंने बताया कि यूएसडीएमए भूकंप चेतावनी प्रणाली को सशक्त बनाने की दिशा में लगातार प्रयासरत है। आईआईटी रुड़की के साथ मिलकर सायरन तथा सेंसरों की संख्या बढ़ाई जा रही है। भूदेव एप विकसित किया गया है, जो पांच से अधिक की तीव्रता का भूकंप आने पर मोबाइल फोन में अलर्ट भेज देगा।
इवैकुएशन प्लान पर भी होगी रिहर्सल
भूकंप आने की स्थिति में लोगों को किस प्रकार रेस्क्यू किया जाएगा, निर्धारित रूट्स, ट्रांसपोर्ट संसाधनों और सुरक्षित ठिकानों को चिन्हित किया जाएगा। लोगों की सुविधा के लिए नक्शों/चार्ट्स पर स्पष्ट मार्गदर्शन के अलावा बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों, दिव्यांगों के लिए रेस्क्यू की प्रभावी योजना बनाई जाएगी।
राहत शिविरों की व्यवस्थाओं को परखा जाएगा
मॉक अभ्यास के दौरान राहत शिविरों की स्थापना की जाएगी। वहां बिजली, पानी, भोजन, प्राथमिक चिकित्सा, शिशु आहार के साथ ही गर्भवती महिलाओं के लिए समुचित व्यवस्थाएं सुनिश्चित करते हुए रियल टाइम में उन्हें परखा जाएगा। महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के दृष्टिगत पुलिस तथा होमगार्ड के जवानों की तैनाती भी राहत शिविरों में की जाएगी।
मॉक ड्रिल से परखी जाएंगी जनपदों की तैयारियां-स्वरूप
अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी-प्रशासन आनंद स्वरूप ने भूकंप पर आयोजित होने जा रही मॉक ड्रिल के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि मॉक अभ्यास का उद्देश्य भूकंप से निपटने के लिए जनपदों की तैयारियों का परीक्षण करना, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और प्रतिक्रिया क्षमता को परखना तथा मजबूत करना, राहत एवं बचाव उपकरणों की उपलब्धता और उपयोगिता की जांच करना, राहत शिविर संचालन तथा वहां भोजन, पानी, स्वास्थ्य सुविधा को परखना, चेतावनी तंत्र की प्रभावशीलता का परीक्षण करना, संवेदनशील क्षेत्रों की पूर्व निर्धारित निकासी योजना का अभ्यास करना तथा समुदायों की सहभागिता और उनकी प्रतिक्रिया को मजबूत बनाना है।
जनपदों में अलग-अलग परिदृश्यों पर होगी ड्रिल- नेगी
अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी-क्रियान्वयन डीआईजी राजकुमार नेगी ने बताया कि बहुमंजिला इमारत के ढहने के बाद लोगों का रेस्क्यू, कॉलेज/स्कूल भवन के क्षतिग्रस्त होने से बच्चों तथा शिक्षकों की सुरक्षित निकासी, पुल व फ्लाईओवर का ढहना, बांध की विफलता से उत्पन्न बाढ़ के उपरांत राहत एवं बचाव कार्य, अपार्टमेंट, शॉपिंग मॉल से लोगों की सुरक्षित निकासी, औद्योगिक क्षेत्र में कैमिकल रिसाव के उपरांत राहत एवं बचाव कार्य, ग्लेशियर झील का फटना, रेलवे ट्रेक क्षतिग्रस्त होना, भूस्खलन आदि परिदृश्यों पर मॉक अभ्यास का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि रात्रि के समय भूकंप आने पर किस प्रकार प्रभावी तरीके से राहत एवं बचाव कार्य किए जा सकते हैं, इस पर भी रात्रि के समय मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी।
सहकारिता मेले के शुभारंभ के साथ बोले सीएम — ‘सहकार से समृद्धि’ के मंत्र को साकार कर रहा है उत्तराखंड
पिथौरागढ़। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को पिथौरागढ़ में अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष-2025 के उपलक्ष्य में आयोजित सहकारिता मेले का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ₹85 करोड़ से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों एवं स्वयं सहायता समूहों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण किया और विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को चेक वितरित किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय जनता के आत्मीय स्वागत ने उन्हें अभिभूत किया है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में राज्य सरकार ‘सहकार से समृद्धि’ के मंत्र को साकार करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में सहकारिता ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जो किसानों, कारीगरों, महिला समूहों और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभा रही है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश की सभी 671 सहकारी समितियों का कंप्यूटरीकरण पूरा कर लिया गया है, जिससे पारदर्शिता और कार्यक्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। अब ये समितियां जन औषधि केंद्र और कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) जैसे लोकहितकारी कार्य भी संचालित कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य सहकारिता के माध्यम से हर हाथ को काम और हर घर को सम्मान दिलाने का है।
कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री अजय टम्टा तथा विधायक बिशन सिंह चुफाल भी उपस्थित रहे।
बाहरी वाहनों पर अतिरिक्त टैक्स से बढ़ेगा खर्च, पर्यटन कारोबारियों ने जताई नाराजगी
नैनीताल। पर्यावरण संरक्षण के लिए उत्तराखंड सरकार दिसंबर से ग्रीन टैक्स प्रणाली लागू करने जा रही है। इसका सीधा असर नैनीताल घूमने आने वाले पर्यटकों की जेब पर पड़ेगा। नए नियमों के तहत बाहरी राज्यों से आने वाले चारपहिया वाहनों को अब प्रवेश पर 80 रुपये का ग्रीन टैक्स देना होगा। जबकि दोपहिया वाहनों को फिलहाल छूट दी गई है।
वर्तमान में नैनीताल में प्रवेश के लिए 300 रुपये टोल टैक्स और 500 रुपये पार्किंग शुल्क लिया जाता है। ग्रीन टैक्स लागू होने के बाद यह कुल खर्च बढ़कर 880 रुपये प्रतिदिन हो जाएगा। यानी, नैनीताल में खुली हवा में सांस लेना अब पहले से ज्यादा महंगा साबित होगा।
नगर पालिका ईओ रोहिताश शर्मा ने बताया कि, “सरकार की ओर से जो भी ग्रीन टैक्स की गाइडलाइन जारी होगी, उसका पालन किया जाएगा। छोटे वाहनों के लिए फिलहाल 80 रुपये शुल्क तय किया गया है।”
कारोबारियों ने जताई चिंता
स्थानीय होटल एवं पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों ने इस फैसले पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि पहले से ही टोल और पार्किंग शुल्क के कारण पर्यटक महंगाई महसूस कर रहे हैं। अब नया टैक्स उनकी जेब पर अतिरिक्त भार डाल सकता है।
पर्यटन कारोबारी राजकुमार गुप्ता का कहना है, “ऑफ सीजन में जहां होटल के कमरे 800 रुपये में मिलते हैं, वहीं वाहनों का शुल्क अब कमरे के किराये से ज्यादा हो जाएगा। इससे पर्यटक संख्या प्रभावित हो सकती है।”
वहीं, पंगोट होटल एंड कैंप एसोसिएशन के अध्यक्ष त्रिभुवन फर्त्याल ने कहा, “एक ओर सरकार ‘वन नेशन-वन टैक्स’ की बात करती है, दूसरी ओर पर्यावरण संरक्षण के नाम पर नया टैक्स लगा रही है। इससे पर्यटन कारोबार पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।”
