पूर्व केंद्रीय मंत्री व भाजपा की वरिष्ठ नेत्री साध्वी उमा भारती कोरोना पॉजिटिव पाई गई हैं। यह जानकारी उन्होंने स्वयं ट्वीट करके दी है।
साध्वी उमा भारती विगत 21 सितम्बर को श्री केदारनाथ धाम के दर्शनों को पहुंची थीं। इसके पश्चात वे श्री बदरीनाथ की यात्रा पर गयी थीं। पहाड़ की यात्रा से लौटने के बाद उन्होंने कोरोना टेस्ट कराया। उन्होंने ट्वीटर पर बताया कि अपनी पहाड़ की यात्रा के समाप्ति के अन्तिम दिन प्रशासन से आग्रह करके कोरोना टेस्ट के लिए टीम को बुलवाया, क्योंकि उन्हें 3 दिन से हल्का बुख़ार था। उन्होंने कहा कि हिमालय की अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने कोविड-19 को लेकर सभी निर्देशों एवं सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया। फिर भी वह कोरोना पॉजिटिव निकली हैं।
साध्वी उमा भारती ने जानकारी दी है कि वे अभी हरिद्वार के निकट दिव्य प्रेम सेवा मिशन द्वारा संचालित ‘वन्देमातरम कुञ्ज’ में क्वॉरंटीन हैं। 4 दिन बाद वह फिर से टेस्ट कराएंगी और डॉक्टरों के परामर्श के अनुसार निर्णय लेंगी। उन्होंने इस दौरान उनके संपर्क में आए सभी लोगों से अपील की है कि वे भी अपना टेस्ट कराएं और पूरी सावधानी बरतें।
अमेरिकी पत्रिका ‘टाइम’ ने बुधवार को विश्व के 100 प्रभावशाली लोगों की सूची जारी की। इस सूची से टाइम पत्रिका फिर विवादों में आ गई है। टाइम की सूची से हिन्दुओं के प्रति उसकी पक्षपाती व विद्वेषपूर्ण भावना एक बार फिर उजागर हुई है। साथ ही पत्रिका ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत के जनमानस ने भले ही नरेंद्र मोदी को प्रचंड बहुमत के साथ दुबारा प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बिठा दिया हो। मगर उसके लिए इन बातों का जरा भी महत्व नहीं है और अपने वह अपने मोदी विरोधी एजेंडें से बाज नहीं आ सकती है।
टाइम ने वर्ष 2020 के 100 प्रभावशाली लोगों की सूची में विश्व भर के लगभग दो दर्जन नेताओं को स्थान दिया है। इनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल जैसे शक्तिशाली नेताओं के नाम शामिल हैं। पत्रिका ने मोदी का नाम प्रभावशाली राजनेताओं वाली श्रेणी में शामिल तो कर दिया। मगर उसके साथ जो टिप्पणी लिखी, वो बेहद ही असयंमित व पूर्वाग्रहों से ग्रसित है। टिप्पणी देख कर यह लगता है कि पत्रिका ने मोदी का नाम इस सूची में केवल और केवल अपनी साख बचाने के उद्देश्य से शामिल किया है।

यह तथ्य तो टाइम भी जानती है कि मोदी वास्तव में विश्व के सर्वाधिक चर्चित व प्रभावी राजनेता हैं। लोकप्रियता के मामलों में वे विश्व के कई शक्तिशाली देशों के राजनेताओं से बहुत आगे दिखते हैं। भारत जैसे विविधताओं वाले देश में आजादी के बाद मोदी पहले ऐसे गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री हैं, जो प्रचंड बहुमत के साथ दूसरी बार सत्ता में आए हैं। मोदी ने अपनी कार्यप्रणाली और व्यक्तित्व के बल पर आम जनमानस में सरकार के प्रति एक विश्वास की भावना कायम की है और भारतीय राजनीति को विकासवादी सोच दी है।
लिहाजा, टाइम पत्रिका इन तथ्यों की अनदेखी नहीं कर सकती थी और अपनी सूची में मोदी का नाम शामिल न कर पाना उसके लिए नामुमकिन था। मगर मजबूरी में सही मोदी का नाम सूची में शामिल करने के बावजूद पत्रिका अपने छद्म एजेंडे अथवा सीधे शब्दों में कहे तो धूर्तता को छिपा नहीं सकी। पत्रिका ने मोदी पर निशाना साधने के साथ-साथ भारतीय लोकतंत्र का भी मजाक उड़ाने का प्रयास किया है।
मोदी के बारे में विवरण देते हुए टाइम मैगजीन के एडिटर कार्ल विक ने लिखा है कि – लोकतंत्र के लिए सबसे जरूरी स्वतंत्र चुनाव नहीं है। इसमें केवल यह पता चलता है कि किसे सबसे अधिक वोट मिला है। इससे ज्यादा महत्वपूर्ण उन लोगों का अधिकार है, जिन्होंने विजेता के लिए वोट नहीं दिया। भारत 7 दशकों से अधिक समय से दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र रहा है। भारत की 130 करोड़ की आबादी में ईसाई, मुस्लिम, सिख, बौद्ध, जैन और अन्य धर्मों के लोग शामिल हैं। भारत में सभी मिल जुलकर रहते हैं, जिसकी तारीफ दलाई लामा ने सद्भाव और स्थिरता के उदाहरण के रूप में की थी।
कार्ल विक ने आगे लिखा है कि – नरेंद्र मोदी ने इन सभी को संदेह में ला दिया है। भारत के ज्यादातर प्रधानमंत्री करीब 80 फीसदी आबादी वाले हिंदू समुदाय से आए हैं। मगर केवल मोदी ही ऐसे हैं, जिन्होंने ऐसे शासन किया जैसे उनके लिए बाकियों की परवाह नहीं। नरेंद्र मोदी सशक्तिकरण के लोकप्रिय वादे के साथ सत्ता में आए। उनकी हिंदू राष्ट्रवादी भारतीय जनता पार्टी ने ना केवल उत्कृष्टता को, बल्कि बहुलतावाद को भी खारिज कर दिया। विशेष तौर पर भारत के मुसलमानों को टारगेट किया गया।
अपने को मानवधिकारों का प्रवक्ता बताने वाली टाइम पत्रिका के इरादे बेनकाब करने के लिए उसके संपादक की यह टिप्पणी पर्याप्त है, जिसमें वह कहते हैं कि – महामारी का संकट अहसमति का गला घोंटने का बहाना बन गया और दुनिया का सबसे जीवंत लोकतंत्र गहरे अंधेरे में घिर गया है। संपादक की इस टिप्पणी का अर्थ समझने में शायद ही किसी को कोई कठिनाई होगी। टाइम पत्रिका का संकेत नागरिकता संशोधन कानून (CAA ) के विरोध में शाहीन बाग में चलने वाले आंदोलन की ओर था, जिसे कोरोना महामारी के चलते जैसे-तैसे समाप्त कराया गया। टाइम पत्रिका के अर्थों में कहा जाए तो कोरोना महामारी के कारण समाप्त कराये गए इस आंदोलन से लोकतंत्र का गला घोंटा गया।
प्रधानमंत्री मोदी को लेकर की गई टिप्पणी के पीछे छिपी टाइम की कुत्सित मानसिकता उसकी इसी सूची ने उजागर करके रख दी। टाइम ने जहां एक ओर राजनेताओं की श्रेणी में मोदी को शामिल किया, तो दूसरी तरफ उसने आइकॉन की श्रेणी में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ दिल्ली के शाहीनबाग में हुए आंदोलन से जुड़ी रहीं 82 साल की बिल्किस बानो को रखा है। शायद टाइम की संपादकीय टीम को यह अनुमान नहीं रहा होगा कि इससे उनकी चालाकी पकड़ी जाएगी और उनकी वास्तविकता उजागर हो जाएगी।

टाइम पत्रिका ने अपने नकारात्मक एजेंडे को आंख मूंद कर आगे बढ़ाया। उसने बिल्किस बानो के बारे में विवरण लिखने की जिम्मेदारी महिला पत्रकार राणा अय्यूब को दी। राणा अय्यूब पत्रकारिता और ट्वीटर पर हिन्दू विरोधी प्रोपेगेंडा चलाने के लिए कुख्यात है। बिल्किस के विवरण में राणा लिखती हैं – वो एक ऐसे देश में प्रतिरोध का प्रतीक बन गईं, जहां मोदी शासन में बहुमत की राजनीति द्वारा महिलाओं और अल्पसंख्यकों की आवाज़ों को व्यवस्थित रूप से बाहर किया जा रहा था। बिल्किस ने उन कार्यकर्ताओं और छात्र नेताओं को आशा और शक्ति दी, जो अलोकप्रिय सत्य के लिए देश भर में शांतिपूर्ण तरीके से विरोध को प्रेरित थे।
अब इससे सहज अनुमान लगाया जा सकता है कि टाइम पत्रिका किस दुर्भावना से ग्रसित है। पत्रिका उस शाहीन बाग की एक आंदोलनकारी को आइकॉन बता रहा है, जिस जगह देश के लोकतंत्र को गिरवी रख दिया गया था। जहां टुकड़े-टुकड़े गैंग के लोग देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे और भारत विरोधी साजिश रच रहे थे। टाइम उन आंदोलनकारियों को प्रतिष्ठा देने का दुष्प्रयास कर रही है, जिन्होंने आंदोलन के नाम पर दिल्ली के एक इलाके पर कई महीनों तक कब्जा किए रखा। पत्रिका उन आंदोलनकारियों के महिमा-मंडन में जुटी हुई है, जिन्होंने सुनियोजित तरीके से दिल्ली को साम्प्रदायिक दंगों की आग में झोंक दिया था और कई निर्दोष लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी।
बहरहाल, इस बात से कोई प्रभाव नहीं पड़ने वाला है कि टाइम ने प्रधानमंत्री मोदी के संबंध में क्या टिप्पणी की है ? टाइम एक बार पहले मोदी के विरुद्ध कवर स्टोरी छाप चुका है, जिसे लन्दन में रहने वाले पाकिस्तानी मूल के एक पत्रकार ने लिखा था। बावजूद इसके मोदी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर और भी प्रभावशाली राजनेता के रूप में उभर कर सामने आए हैं। यही कारण है कि टाइम मैगजीन को मोदी विरोधी एजेंडा चलाने के बाद भी कई बार विश्व के प्रभावशाली लोगों की सूची में उनको शामिल करना पड़ा है।
राज्यसभा में कृषि विधेयकों को पारित करने के दौरान विपक्षी सांसदों के व्यवहार से क्षुब्ध उपसभापति हरिवंश ने राष्ट्रपति व उप राष्ट्रपति को भावुक पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने लिखा है कि ‘राज्यसभा में जो कुछ हुआ, उससे पिछले दो दिनों से गहरी आत्मपीड़ा, तनाव और मानसिक वेदना में हूं। मैं पूरी रात सो नहीं पाया।’ उन्होंने घोषणा की है कि वह इसे लेकर एक दिन के उपवास पर रहेंगे।
उच्च सदन की मर्यादा और व्यवस्था की धज्जियां उड़ाई
उन्होंने लिखा है कि ‘सदन के माननीय सदस्यों द्वारा लोकतंत्र के नाम पर हिंसक व्यवहार हुआ। आसन पर बैठे व्यक्ति को भयभीत करने की कोशिश हुई। उच्च सदन की हर मर्यादा और व्यवस्था की धज्जियां उड़ाई गयी।’ उन्होंने आगे लिखा कि लोग आएंगे- जायेंगे। ‘ समय और काल के सन्दर्भ में न उनकी स्मृति होगी न गणना। पर लोकतंत्र का यह मंदिर ‘ सदन’ हमेशा समाज और देश के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा।’ उन्होंने यह भी कहा कि ‘मैं मानता हूँ कि मेरा निजी कोई महत्व नहीं है। पर इस पद का है।’
हरिवंश ने कहा कि ‘मुझे लगा कि उच्च सदन के मर्यादित पीठ पर मेरे साथ जो अपमानजनक व्यवहार हुआ, उसके लिए मुझे एक दिन का उपवास करना चाहिए। शायद मेरे उपवास से सदन में इस तरह के आचरण करने वाले माननीय सदस्यों के भीतर आत्मशुद्धि का भाव जागृत हो।’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा सभी देशवासी पत्र जरूर पढ़ें
उधर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य सभा के सभापति हरिवंश द्वारा राष्ट्रपति को लिखे पत्र की सराहना करते हुए एक ट्वीट किया है। ट्वीट में मोदी ने कहा है, ‘माननीय राष्ट्रपति जी को माननीय हरिवंश जी ने जो पत्र लिखा, उसे मैंने पढ़ा। पत्र के एक-एक शब्द ने लोकतंत्र के प्रति हमारी आस्था को नया विश्वास दिया है। यह पत्र प्रेरक भी है और प्रशंसनीय भी। इसमें सच्चाई भी है और संवेदनाएं भी। मेरा आग्रह है, सभी देशवासी इसे जरूर पढ़ें।’



अभिनेत्री पायल घोष द्वारा निर्माता-निर्देशक अनुराग कश्यप पर लगाए गए आरोपों की जांच राष्ट्रीय महिला आयोग (NWC) करेगा। आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने ट्वविटर पर जारी एक वीडियो में यह बात कही है। पायल घोष ने शनिवार को अपने ट्विटर हैंडल पर खुलासा किया था कि अनुराग कश्यप ने उनके साथ जबरदस्ती की। अपने ट्वीट को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग करते हुए पायल ने अनुराग के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी और अपनी सुरक्षा की गुहार भी लगाई थी।
पायल के ट्ववीट के कुछ देर बाद महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने उन्हें ट्वीटर पर ही अपनी ईमेल आईडी की जानकारी देते हुए शिकायत दर्ज करने को कहा था। इसके बाद रविवार को आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने ट्वविटर पर जारी वीडियो में कहा कि शनिवार रात को उन्होंने एक ट्वीट देखा, जिसमें पायल घोष ने यौन शोषण का आरोप लगाया है। उन्होंने इसे चौंकाने वाली घटना बताया और पायल को कहा कि वह अपनी विस्तृत शिकायत आयोग को भेज सकती हैं। आयोग उस पर कार्रवाई करेगा और पुलिस को भी निर्देश देंगे। उन्होंने अभिनेत्री को आश्वासन दिया कि आयोग उनके साथ खड़ा रहेगा।
उधर, अपनी बेबाकी के कारण लगातार चर्चाओं में बनी अभिनेत्री कंगना रनौत ने रविवार को भी ट्वीटर पर बमबारी जारी रखी। कंगना खुल कर पायल घोष के समर्थन में उतरीं और उन्होंने पायल के समर्थन में ट्वीट किए। एक ट्वीट में कंगना ने कहा कि बॉलीवुड यौन शिकारियों से भरा पड़ा है।
बहरहाल, पायल घोष इस मामले में शिकायत दर्ज कराती हैं तो अनुराग कश्यप की मुश्किलें बढ़ना तय है। अनुराग कश्यप समय-समय पर विभिन्न मुद्दों पर अपनी टिप्पणियों के कारण विवादों में घिरे रहते हैं। पायल के आरोप के बाद उनके खिलाफ सोशल मीडिया में कार्रवाई की मांग उठ रही है। उनके खिलाफ ट्वीटर पर हैशटैग #ArrestAnuragKashyap चल रहा है।
विदेशी मामलों पर नजर रखने वाली देश की प्रमुख गुप्तचर एजेंसी ‘रॉ’ (Research and Analysis Wing) के प्रमुख रहे अनिल धस्माना को राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन (National Technical Research Organization, NTRO) के प्रमुख के रूप में नियुक्त किया गया है। वह दो साल के लिए NTRO के प्रमुख होंगे। यह एक तरह की गुप्तचर एजेंसी है, जो तकनीकी माध्यमों से जमीन से आसमान तक विभिन चीजों पर नजर रखती है। इसे ‘तीसरी आँख’ भी कहा जाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने धस्माना के नाम पर मुहर लगायी है। मूल रूप से उत्तराखंड के पौड़ी (गढ़वाल) के निवासी धस्माना, 1981 बैच के मध्य प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी रहे हैं।
उन्हें पाकिस्तान मामलों का विशेषज्ञ माना जाता है। उनके पास पाकिस्तान और अफगानिस्तान में काम करने का व्यापक अनुभव है। वे फरवरी 2019 में किये गए बालाकोट एयर स्ट्राइक के प्रमुख रणनीतिकारों में से एक रहे हैं।
धस्माना 23 साल तक रॉ में रहे। दिसंबर 2016 में उनको रॉ का प्रमुख नियुक्त किया गया था। उनकी सेवानिवृति दिसंबर 2018 में थी। मगर केंद्र सरकार ने मई 2019 में लोकसभा चुनाव के मद्देनजर उनको 6 माह का विस्तार दे दिया था।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी व प्रियंका गांधी वाड्रा मोदी सरकार को घेरने के चक्कर में हर बार नौसिखिया साबित हो रहे हैं और हंसी का पात्र बन जा रहे हैं। ठोस तथ्यों के अभाव और होम वर्क किये बगैर मोदी सरकार पर हमला करना अक्सर उनको भारी पड़ जाता है। सर्वाधिक चर्चित उदाहरण राफेल विमान सौदों का है। राफेल विमानों की खरीददारी को लेकर राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर आरोप लगाने में जमीन-आसमान एक कर दिया था। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले राहुल सोते-जागते राफेल में घोटाले का आरोप लगाते रहे। मगर उनके सारे आरोप फुस्स साबित हुए। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को ही बुरी तरह से हार का सामना नहीं करना पड़ा, बल्कि खुद राहुल गांधी अपने परिवार की परम्परागत सीट अमेठी से चुनाव हार गए। सुप्रीम कोर्ट तक से राफेल मामले का निर्णय कांग्रेस के लिए निराशाजनक रहा। वर्तमान में कृषि विधेयकों के विरोध ने कांग्रेस, राहुल व प्रियंका की किरकिरी करा दी है।
क्या हैं ये अध्यादेश
कांग्रेस पार्टी मोदी सरकार द्वारा संसद में पेश किये गए कृषि सम्बन्धी तीन विधेयकों का जोरदार विरोध कर रही है। मोदी कैबिनेट ने इस वर्ष जून में ‘कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अध्यादेश, 2020’, ‘किसानों (सशक्तिकरण और सरंक्षण) का मूल्य आश्वासन अनुबंध एवं कृषि सेवाएं अध्यादेश, 2020’ तथा ‘आवश्यक वस्तु (संशोधन) अध्यादेश,2020’ पारित किये थे। सरकार संसद के वर्तमान सत्र में इन अध्यादेशों को कानूनी रूप देने के लिए जुटी हुई है।
अब तक किसानों पर हैं ये प्रतिबन्ध
इन अध्यादेशों के कानून बन जाने के बाद किसानों को कई तरह की सहूलियतें मिलेंगीं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अभी तक किसान अपने उत्पादों को केवल सरकार द्वारा निर्धारित मंडियों में लाइसेंसधारी व्यापारियों को ही बेच सकते हैं। सरकार द्वारा निर्धारित मंडियों के अलावा कहीं और अपने उत्पादों को बेचना किसानों के लिए प्रतिबंधित है। इस कारण किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पता है। किसानों के बजाय बिचौलिये और दलाल ज्यादा फायदा उठाते हैं।
किसानों को ये मिलेंगी सहूलियत
केंद्र सरकार के इन अध्यादेशों के लागू होने के बाद किसानों को अपने उत्पाद बेचने के लिए एक मुक्त बाजार मिलेगा। वो अपनी सहूलियत और मर्जी से कही भी अपने उत्पाद बेच सकेंगे। बाजार में प्रतिस्पर्धा होने के कारण किसानों को उपज का उचित मूल्य मिलेगा। अध्यादेशों में ऐसे ही तमाम अन्य प्राविधान हैं, जो किसानों की खुशहाली बढ़ाने में कारगर साबित होंगे और किसानों को उनकी मेहनत के अनुरूप उन्हें उनका हक मिलेगा।

राहुल, प्रियंका समेत पूरी कांग्रेस विरोध में
कांग्रेस ने मोदी सरकार को घेरने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। कांग्रेस इन अध्यादेशों को पूरी तरह से किसान विरोधी बता रही है और उसके छोटे से लेकर बड़ा नेता बयानबाजी करने में लगा हुआ है। कांग्रेस के इस अभियान में भाई राहुल के बाद शनिवार को बहन प्रियंका गांधी वाड्रा भी शामिल हो गईं। प्रियंका ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए ट्वीट किया और मोदी सरकार को किसान विरोधी बताया।
कांग्रेस ऐसे फंसी अपने जाल में
मोदी सरकार का विरोध करने से पहले राहुल, प्रियंका और कांग्रेस नेताओं ने वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में जारी घोषणा पत्र पर ध्यान देने की जरुरत भी नहीं समझी। मोदी सरकार ने इन अध्यादेशों में जो प्राविधान किये हैं, उन्हें कांग्रेस ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में शामिल किया था। कांग्रेस के इस विरोध को बेपर्दा करने में पार्टी से निलंबित राष्ट्रीय प्रवक्ता संजय झा ने जरा भी देर नहीं लगाई। झा ने ट्वीट कर कहा कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में खुद इन प्राविधानों की हिमायत की थी।
सोशल मीडिया पर हो रही छीछालेदर
संजय झा के बयान के साथ कांग्रेस के लोकसभा घोषणा पत्र का वह पेज सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें पार्टी ने ये प्राविधान करने की बात कही थी। इसके साथ ही पार्टी के यूट्यूब चैनल पर मौजूद एक वीडियो भी जबरदस्त तरीके से वायरल हो रहा है। यह वीडियो वर्ष 2013 का है। इसमें राहुल गांधी कांग्रेस शासित 11 राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ एक प्रेस कांफ्रेंस में बैठे हुए हैं। कांफ्रेंस को राहुल के साथ कांग्रेस नेता अजय माकन सम्बोधित कर रहे हैं। माकन कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक का हवाला देते हुए राहुल गांधी के सामने इन प्राविधानों को लागू किये जाने की जरुरत पर जोर देते हैं। सोशल मीडिया पर कांग्रेस, राहुल व प्रियंका की इस मामले को लेकर जमकर छीछालेदर हो रही है।
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व व कृतित्व पर आधारित पार्टी के मुखपत्र ‘कमल सन्देश’ के विशेषांक ‘नए भारत के प्रणेता’ का विमोचन किया। इस मौके पर नड्डा ने आरोप लगाया कि कृषि विधेयकों का विरोध कर रहे लोग बिचौलियों की भाषा बोल रहे हैं।
भाजपा के केंद्रीय कार्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की हर योजनाओं में सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास की नीति स्पष्टतः दिखाई देती है। चाहे वह हर गाँव, हर घर में बिजली पहुंचाने की योजना हो, आयुष्मान भारत योजना हो, स्टार्ट-अप व स्टैंड-अप योजना हो, कृषि सम्मान निधि हो, जन-धन योजना हो या फिर उज्ज्वला योजना।
उन्होंने कहा कि गुरुवार को कृषि से जुड़े दो महत्वपूर्ण विधेयक कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक, 2020 तथा कृषक (सशक्तिकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक, 2020 लोक सभा में पारित हुए हैं। एसेंशियल कमोडिटी एक्ट में अमेंडमेंट वाला विधेयक दो दिन पहले ही पारित हुआ है। कृषि से जुड़े ये तीनों विधेयक सही मायने में किसानों को बिचौलियों और तमाम अवरोधों से मुक्त करेंगे। इन विधेयकों के लागू होने के बाद किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए नए-नए अवसर मिलेगे, जिससे उनका मुनाफा बढ़ेगा और किसान सशक्त होंगे।
नड्डा ने जोर देते हुए कहा कि नए कृषि विधेयक में एमएसपी अर्थात न्यूनत समर्थन मूल्य और सरकारी खरीद अर्थात एपीएमसी की व्यवस्था बनी रहेगी। विधेयक किसानों को कई और विकल्प प्रदान कर उन्हें सही मायने में सशक्त करने वाले हैं। इसके तहत एक परिस्थितिकी तंत्र के निर्माण का प्रावधान किया गया है, जिसमें किसान कानूनी बंधनों से आजाद होंगे। किसानों के पास मंडी में जाकर लाइसेंसी व्यापारियों को ही अपनी उपज बेचने की विवशता नहीं होगी।

उन्होंने कहा कि अब किसान अपनी मर्जी का मालिक होगा। किसानों को उपज बेचने का विकल्प देकर उन्हें सशक्त बनाया गया है। इस विधेयक के अनुसार जरूरी नहीं कि किसान राज्य की सीमाओं में रहकर ही फसलों की बिक्री करें। साथ ही बिक्री लाभदायक मूल्यों पर करने से संबंधित चयन की सुविधा का भी लाभ ले सकेंगे। उन्होंने कहा कि कुछ लोग जानबूझ कर किसानों को गुमराह कर रहे हैं ताकि किसान लाभ न उठा सकें।
नड्डा ने कांग्रेस पर कड़ा प्रहार किया और कहा कि कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में यह वादा किया था कि किसानों को एपीएमसी से बाहर निकाल कर लायेंगे और एसेंशियल कमोडिटी एक्ट को बदलेंगे। उन्होंने कहा कि जो लोग इन कृषि विधेयकों का विरोध कर रहे हैं, वे वास्तव में किसान और उनके उत्पाद की बिक्री के बीच में मौजूद बिचौलियों की भाषा बोल रहे हैं।
भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने पहले भी कहा है कि हमें दबाव की राजनीति में नहीं आना है और हमारी सरकार वह काम करती रहेगी जो देश के गाँव, गरीब और किसान के लिए जरूरी हैं। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश में हर क्षेत्र में आज बदली हुई तस्वीर दिख रही है। उन्होंने याद दिलाया कि आयुष्मान भारत योजना को लागू करते समय भी इस योजना का जम कर विरोध किया गया था लेकिन आज वही आयुष्मान भारत योजना देश के गरीबों के लिए सबसे बड़ी वरदान साबित हो रही है।
उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के व्यक्तित्व व कृतित्व पर आधारित विशेषांक के प्रकाशन के लिए लिए डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी न्यास समिति एवं कमल संदेश की पूरी टीम को बधाई दी और इसे एक सराहनीय प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी प्रधानमंत्री मोदी के जन्म दिवस (17 सितंबर) के अवसर पर 14 से 20 सितंबर तक ‘सेवा सप्ताह’ मना रही है। पार्टी के करोड़ों कार्यकर्ता देश भर में सेवा कार्य में लगे हुए हैं। सेवा सप्ताह के दौरान पार्टी कार्यकर्ता ब्लड डोनेशन, प्लाज्मा डोनेशन, दिव्यांगों को जरूरी उपकरणों का वितरण, वृक्षारोपण, गरीब बस्तियों में स्वच्छता कार्यक्रम, बच्चों में फलों और पुस्तकों का वितरण और अस्पतालों में फलों का वितरण जैसे सेवा कार्य कर रहे हैं।
कार्यक्रम में पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह, राष्ट्रीय महामंत्री अनिल जैन, ‘कमल संदेश’ के संपादक डॉ शिवशक्ति, डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी न्यास के सचिव नंद किशोर गर्ग, न्यास के कोषाध्यक्ष गोपाल कृष्ण अग्रवाल और राष्ट्रीय मीडिया सह-प्रमुख डॉ संजय मयूख भी उपस्थित थे।
आयकर विभाग ने जम्मू-कश्मीर के एक होटल व्यवसायी इकबाल शेख के श्रीनगर, गुलमर्ग, सोनमर्ग और पहलगाम स्थित होटलों के अलावा उसके लेह में निर्माणाधीन होटल में छापेमारी और जब्ती की बड़ी कार्रवाई की है। होटल व्यवसायी को जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारुख अब्दुल्ला का रिश्तेदार बताया जा रहा है। इसके अलावा आयकर विभाग ने श्रीनगर के एक ज्वेलर्स के यहाँ भी छापेमारी कर अघोषित संपत्ति के दस्तावेज बरामद किये हैं। सूत्रों के मुताबिक इस कार्रवाई में टेरर फंडिंग की दृष्टि से भी जांच की जा रही है।
गुरुवार को वित्त मंत्रालय द्वारा जारी एक विज्ञप्ति में बताया गया है कि होटल व्यवसायी के यहाँ छापेमारी के दौरान विभाग को जालसाजी के साक्ष्य के तौर पर कई दस्तावेज़ एवं अन्य वस्तुएँ मिली हैं, जिसके आधार पर पिछले छः वित्तीय वर्षों में होटल एवं आवास निर्माण में अवैध निवेश समेत लगभग 25 करोड़ की सम्पत्तियों को ज़ब्त कर लिया है। होटल कारोबारी ने वर्ष 2014-15 से किसी भी तरह के कर का भुगतान नहीं किया है। सभी निवेश नकद या अज्ञात श्रोतों से किए गए हैं।
छापेमारी के दौरान आयकर विभाग को व्यवसायी के यहाँ 25 करोड़ के असुरक्षित लोन से जुड़े कागजात मिलें हैं। व्यवसायी ने पिछले दो वर्षों में ऐसे लोगों से यह ऋण प्राप्त किए गए हैं, जिनके ऋण देने का औचित्य संदिग्ध है। विभाग के मुताबिक प्रथम दृष्ट्या यह सभी लोन अवैध प्रतीत होते हैं, क्योंकि यह ऐसे व्यक्तियों से लिए गए हैं जिनकी वित्तीय साख स्वयं संदिग्ध है।
छापेमारी में यह भी पता चला कि कारोबारी के बच्चे अमरीका में पढ़ रहे हैं, जिन पर प्रति वर्ष लगभग 25 लाख रूपये का खर्च आ रहा है। अमरीका में बच्चों की शिक्षा पर खर्च किए जा रहे इस पैसे के बारे में भी प्रथम दृष्ट्या कोई स्पष्टीकरण नहीं मिला है। यह व्यवसायी अपनी माँ के साथ ट्रस्ट के रूप में एक बी-एड कॉलेज चला रहा है। यह ट्रस्ट पंजीकृत नहीं है और ट्रस्ट का रिटर्न भी नहीं भरा जा रहा है। जबकि इससे होने वाली आय व्यापक कर योग्य आय है। व्यवसायी ने आयकर अधिकारियों के सामने यह भी स्वीकार किया है कि उसने अपने आवासीय भवन की मरम्मत पर 40 लाख रूपये खर्च किए हैं। जांच के दौरान एक बैंक लॉकर का भी पता चला है, जिसे अघोषित रखा गया था।
आयकर विभाग ने एक अन्य मामले में श्रीनगर के एक जौहरी के यहाँ भी छापेमारी की है। जांच में पाया गया कि गहनों के कारोबारी ने अपने व्यापार के बही खाते का हिसाब नहीं रखा है, जिसके पिछले वर्षों में व्यवसाय का आंकलन 2 से 10 करोड़ के बीच लगाया गया है।
जांच के दौरान अधिकारियों को एक अघोषित बैंक खाते का भी पता चला है जिसमें जौहरी ने करोड़ों रुपये जमा किए हैं, लेकिन इससे जुड़े कर का भी भुगतान नहीं किया गया है। उसने वित्तीय वर्ष 2015-16 में श्रीनगर में अपनी एक अचल संपत्ति 1.90 करोड़ में बेची थी। लेकिन इससे जुड़े कैपिटल गेन कर का भी भुगतान नहीं किया था।
जांच के दौरान अधिकारियों को वित्तीय वर्ष 2019-20 में लीज़ पर दी गई दुकान की पगड़ी के रूप में लिए गए 16 लाख रुपए की रसीद भी प्राप्त हुई है। इस नकद लेन-देन की जानकारी छिपाई गयी थी। अधिकारियों को इस दौरान ज्वेलर्स की पत्नी द्वारा दिल्ली में बेचे गए एक फ्लैट के बारे में भी पता चला, जिसका लेनदेन भी छिपाया गया है। जांच के दौरान यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपी की बेटी विदेश में रह कर पढ़ाई कर रही है। लेकिन उस पर आने वाले खर्च का ब्यौरा भी छिपाया गया है। विभाग के मुताबिक मामले में जांच जारी है।
केंद्र सरकार ने जूता व चमड़ा उद्योग के विकास के लिए जूता एवं चमड़ा उद्योग विकास परिषद (Development Council for Footwear and Leather Industry, DCFLI)का गठन किया है। एक्शन शूज के प्रबंध निदेशक राज कुमार गुप्ता को इसका अध्यक्ष बनाया गया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन आने वाले उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) ने इस सम्बन्ध में अधिसूचना जारी की है।
24 सदस्यीय इस परिषद में गुप्ता के अलावा रिलेक्सो फुटवियर के प्रबंध निदेशक रमेश कुमार दुआ, लखानी अरमान ग्रुप के चेयरमैन किशन चंद लखानी, वीकेसी ग्रुप के वी.नौशाद, बाटा इंडिया के सीईओ संदीप कटारिया, टाटा इंटरनेशनल के लेदर प्रोडक्ट हेड वी.मुथुकु मारन, एयरो ग्रुप (वुडलैंड्स) के प्रबंध निदेशक हरकीरत सिंह समेत चमड़ा उद्योग से जुड़े विभिन्न संगठनों को शामिल किया गया है। इनका कार्यकाल 2 वर्ष का होगा।
मंत्रालय द्वारा जारी वक्तव्य में कहा गया है कि फुटवियर एवं चमड़ा उद्योग विकास परिषद की स्थापना भारत में व्यापक श्रम आधारित फुटवियर एवं चमड़ा क्षेत्र के विकास के लिए विभिन्न उपाय करने के लिए की गई है। परिषद घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने और निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए प्रयास करेगी। साथ ही भविष्य की दृष्टि से भारत में उच्च गुणवत्ता वाले विश्वस्तरीय जूते व चमड़े के उत्पादों के विकास, डिजाइनिंग एवं विनिर्माण में काफी सक्रिय भूमिका निभाएगी।
संसद पहुंचा बॉलीवुड का बबाल, सपा सांसद जया बच्चन ने किए तीखे वार तो ‘बेबाक गर्ल’ कंगना का बड़ा पलटवार
अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद बॉलीवुड में मचा बबाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। बॉलीवुड से शुरू होकर राजनीतिक पार्टियों से होता हुआ ये बबाल संसद तक पहुँच गया है। समाजवादी पार्टी (सपा) की सांसद व पूर्व अभिनेत्री जया बच्चन बॉलीवुड को लेकर चल रहे आरोप-प्रत्यारोपों पर मंगलवार को राज्यसभा में आक्रामक तेवरों में दिखीं। उन्होंने सांसद व भोजपुरी कलाकार रवि किशन और अभिनेत्री कंगना रनौत का नाम लिए बिना कहा कि कुछ लोग जिस थाली में खाते हैं, उसमें ही छेद करते हैं। जया बच्चन के आरोपों पर पलटवार करने में कंगना ने देर नहीं लगाई। अपनी बात को बेबाकी से रखने वाली कंगना ने ट्वीट कर पूछा कि मेरी जगह आपकी बेटी श्वेता या बेटा अभिषेक होता तो तब भी क्या आप यही बात कहती ?
मंगलवार को जया ने राज्यसभा में तीखे तेवरों के साथ कहा कि कहा कि बॉलीवुड को बदनाम करने की साजिश चल रही है। जिन लोगों ने फिल्म इंडस्ट्री से नाम कमाया, वे इसे गटर बता रहे हैं। मैं इस तरह की बातों से पूरी तरह से असहमत हूं। मुझे उम्मीद है कि सरकार ऐसे लोगों को इस तरह की भाषा का उपयोग नहीं करने के लिए कहेगी। सिर्फ कुछ लोगों के कारण आप पूरी इंडस्ट्री की छवि को धूमिल नहीं कर सकते। सांसद रवि किशन का नाम लिए बिना उन्होंने कहा, मुझे शर्म आती है कि कल लोकसभा में हमारे एक सदस्य, जो फिल्म उद्योग से हैं, ने इसके खिलाफ बात की। इस दौरान जया ने यह भी कहा की कुछ लोग जिस थाली में खाते हैं, उसी में छेद करते हैं। गलत बात है। जया ने कहा कि मनोरंजन इंडस्ट्री हर दिन 5 लाख लोगों को सीधे तौर पर रोजगार देती है। ऐसे वक्त में जब अर्थव्यवस्था बेहद बुरी हालत में है, लोगों का ध्यान हटाने के लिए बॉलिवुड के लोगों को सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जा रहा है।
दरअसल, कुछ दिन पूर्व कंगना ने एक ट्वीट में कहा था कि अगर नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो बॉलीवुड की जांच करता है तो पहलीं पंक्ति के कई सितारे सलाखों के पीछे होंगे। अगर ब्लड टेस्ट हुए तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आएंगे। उम्मीद है कि प्रधानमंत्री जी स्वच्छ भारत मिशन के तहत बॉलीवुड जैसे गटर को साफ करेंगे। जबकि भाजपा सांसद रवि किशन ने लोकसभा में ड्रग्स ट्रैफिकिंग का मसला उठाया था। उन्होंने कहा था कि इससे देश का युवा बर्बाद हो रहा है और बॉलीवुड में भी इसके बड़े कनेक्शन हैं। उन्होंने इसकी व्यापक जांच की मांग उठाई थी।
कंगना का पलटवार
जया बच्चन के राज्यसभा में भाषण देने के बाद कंगना ने पलटवार करने देर नहीं लगाई। कंगना ने ट्वीट कर पूछा जया जी आप तब भी यही बात कहतीं अगर मेरी जगह पर आपकी बेटी श्वेता को छोटी उम्र में पीटा गया होता, ड्रग्स दिए गए होते और छेड़छाड़ की गयी होती, क्या आप तब भी यही कहतीं अगर अभिषेक लगातार डराने- धमकाने और शोषण की बात करते और एक दिन फांसी से झूलते पाए जाते? थोड़ी दया हमसे भी दिखाइए।
रवि किशन ने भी व्यक्त की प्रतिक्रिया
भाजपा सांसद रवि किशन ने भी जया बच्चन के बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने न्यूज़ एजेंसी एएनआई से कहा कि मुझे उम्मीद थी कि मैंने जो जो कहा, जया जी उसका समर्थन करेंगी। उद्योग में हर कोई ड्रग्स का सेवन नहीं करता है, लेकिन कुछ लोग हैं वे दुनिया की सबसे बड़ी फिल्म उद्योग को खत्म करने की योजना का हिस्सा हैं। जब जया जी और मैं फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े थे, तो स्थिति ऐसी नहीं थी, लेकिन अब हमें इसके सरंक्षण की आवश्यकता है।
