नहाय-खाय के आठ आज से शुरू चार दिवसीय छठ पर्व..
देश-विदेश: लोक आस्था और सूर्य उपासना का महापर्व छठ आज (सोमवार) से शुरू हो गया है। छठ महापर्व के लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं। महापर्व छठ के अनुष्ठान पर ग्रह गोचरों का शुभ संयोग बन रहा है।
शुभ फल प्रदान करने वाले कई योग..
आपको बता दे कि नहाय खाय से लेकर उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने तक कई योग बन रहे हैं। जो शुभ फल प्रदान करने वाले हैं। नहाय खाय के दिन सूर्य से तीसरे भाव में चंद्रमा होने से वरिष्ठ योग एवं सूर्य व बुध साथ होने से बुधादित्य योग का निर्माण हो रहा है। इस योग में व्रती नहाय खाय पर गंगा स्नान करने के बाद अरवा चावल चने की दाल व कद्दू की सब्जी का प्रसाद ग्रहण करते हैं।
इसके साथ ही नौ नवंबर को खरना के दिन रस केसरी योग बना रहा है। 10 नवंबर को गज केसरी योग में व्रती सायंकालीन अर्घ्य देंगे। वहीं उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देने के लिए पराक्रम योग बन रहा है। जिसमें व्रती अपने व्रत का समापन करेंगे।
सादगी व पवित्रता छठ पूजा की पहचान..
छठ पूजा का सर्वाधिक महत्वपूर्ण पक्ष इसकी सादगी, पवित्रता, भक्ति एवं आध्यात्म है। इसकी उपासना पद्धति सरल है। इसमें किसी आचार्य की आवश्यकता नहीं है। यह लौकिक रीति-रिवाज एवं ग्रामीण जीवन पर आधारित है।
महाभारत काल से प्रचलित है व्रत..
हिंदू धर्म के अधिकांश व्रत महिलाएं ही करती हैं, पर छठ पर्व में पूरा परिवार शामिल हो जाता है। छठ पर्व की शुरूआत महाभारत काल से मानी जाती है। पांडव जब वनवास काट रहे थे तो द्रोपदी ने कुल पुरोहित की आज्ञा प्राप्त होने पर युधिष्ठिर के साथ छठ व्रत पूजन किया था। सूर्यदेव ने प्रसन्न होकर युधिष्ठिर को अछूत ताम्रपात्र प्रदान किया। जिससे मुधर स्वादिष्ट भोजन हमेशा उपलब्ध रहता था। आपको बता दे कि द्रोपदी के व्रत पूजन से प्रसन्न होकर भगवान सूर्य (छठ माता) ने युधिष्ठिर को को राजपाट, धन दौलत, वैभव मान सम्मान, यश कीर्ति पुन: प्रदान किया।
छह पूजा कार्यक्रम पर एक नजर..
नहाय-खाय: छठ पर्व का प्रथम दिन नहाए खाय से शुरू होता है। नहाए-खाय आठ नवंबर को है।
खरना : छठ व्रत का दूसरा दिन खरना नौ नवंबर को हैं। इस दिन पंचमी तिथि है। इसके बाद षष्ठी शुरू होगी।
सायंकालीन अर्घ्य : छठ पर्व के तीसरे दिन कार्तिक शुक्ल पष्ठी को पूर्ण उपवास होता है। यह व्रत दस नवंबर को है।
प्रात कालीन अर्घ्य : पष्ठी व्रत की पूर्णाहुति चतुर्थ दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ होती है। 11 नवंबर को प्रातकालीन अर्घ्य दिया जाता है।
पीएम मोदी के सपने के अनुरूप बद्रीनाथ धाम भी सवंरेगा..
उत्तराखंड: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की परिकल्पना के अनुरूप नए कलेवर में निखर रही केदारपुरी के बाद अब बद्रीशपुरी भी संवरेगी। शुक्रवार को प्रधानमंत्री ने द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक केदारनाथ से जिस तरह देवभूमि की ब्रांडिंग की, उससे अब देश के चारधामों में से एक बद्रीनाथ पर राज्य सरकार ध्यान केंद्रित करने जा रही है। प्रधानमंत्री के निर्देश पर ही बद्रीनाथ धाम के लिए चार सौ करोड़ से अधिक लागत की महायोजना तैयार की गई है। केदारनाथ की तरह बद्रीनाथ में भी तीन चरणों में सुविधाओं के लिए बुनियादी ढांचा तैयार किया जाएगा। अब सरकार की मंशा बद्रीनाथ धाम को स्मार्ट स्प्रिचुअल टाउन के रूप में विकसित करने की है।
प्रधानमंत्री के निर्देश पर बद्रीनाथ धाम के लिए चार सौ करोड़ से ज्यादा की लागत की महायोजना तैयार की गई है। शुक्रवार को पीएम नरेंद्र मोदी ने केदारनाथ यात्रा के दौरान देवभूमि की जमकर ब्रांडिंग की। इससे प्रभावित होकर राज्य सरकार अब बद्रीनाथ पर भी ध्यान केंद्रित करने जा रही है। केदारनाथ की तरह यहां भी तीन चरणों में सुविधाओं के लिए बुनियादी ढांचा तैयार किया जाएगा।
बद्रीनाथ धाम को स्मार्ट स्प्रिचुअल टाउन के रूप में विकसित करने की योजना है। केदारनाथ में चल रहे पुनर्निर्माण कार्यों की समीक्षा के दौरान पीएम मोदी ने बद्रीनाथ धाम के लिए भी महायोजना बनाने के निर्देश दिए थे। राज्य सरकार का मास्टर प्लान बनकर तैयार है। पीएम कार्यालय में इसका प्रजेंटेशन हो चुका है। धाम में सुविधाएं विकसित करने के लिए विभिन्न कंपनियों के सीएसआर फंड से दो सौ करोड़ से अधिक की राशि जुटाई जा चुकी है। प्रस्तावित कामों को धरातल पर उतारने के लिए प्रोजेक्ट इंप्लीमेंटेशन यूनिट की तैनाती कर दी गई है।
प्रोजेक्ट के तहत धाम में केदारनाथ की तरह ही मंदिर के चारों तरफ जगह खुली रखी जाएगी। यात्रियों के लिए वन-वे सिस्टम बनेगा। बद्री व शेषनेत्र झील का सौंदर्यीकरण, अस्पताल का विस्तारीकरण, रिवर फ्रंट डेवलपमेंट, मंदिर व घाट का सौंदर्यीकरण, स्ट्रीट स्कैपिंग और पार्किंग जैसे काम मास्टर प्लान का हिस्सा हैं। सचिव पर्यटन दिलीप जावलकर का कहना हैं कि बद्रीनाथ धाम को स्मार्ट स्प्रिचुअल टाउन के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए प्रथम चरण के कार्य निर्धारित कर दिए गए हैं।
राज्य स्थापना दिवस पर निशुल्क होगी गरतांग गली की सैर..
उत्तराखंड: राज्य स्थापना दिवस पर गरतांग गली की सैर निशुल्क होगी। इस संबंध में जिलाधिकारी ने निर्देश जारी किए हैं। जनपद में एक सप्ताह तक स्वच्छता अभियान सहित खेल गतिविधियां व सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। राज्य स्थापना महोत्सव की तैयारियों के संबंध में जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने विभिन्न विभागों केे अधिकारियों की बैठक ली।
बैठक में राज्य स्थापना दिवस पर गरतांग गली में निशुल्क सैर का निर्णय लिया गया। गरतांग गली में सैर के लिए स्वदेशी पर्यटकों से 150 व विदेशी पर्यटकों से 600 रुपये शुल्क वन विभाग की ओर से लिया जाता है, लेकिन राज्य स्थापना दिवस यह शुल्क माफ रहेगा।
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित का कहना हैं कि राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर जनपद मुख्यालय के अलावा तहसील स्तर पर भी कार्यक्रम आयोजित कर राज्य आंदोलनकारियों को सम्मानित किया जाएगा। सभी नगर निकायों में सफाई अभियान चलाए जाएंगे। स्वास्थ्य विभाग को आठ से 10 नवंबर तक कोविड-19 की दूसरी डोज के लिए जनपद के नागरिकों को जागरूक करने के निर्देश दिए।
पर्यटन विभाग करेगा इन प्रतियोगिताओं का आयोजन..
पर्यटन विभाग साइकिल रैली, खेल विभाग क्रिकेट, वालीबाल व क्रॉस कंट्री दौड़ का आयोजन करेगा। बैठक में पुलिस अधीक्षक मणिकांत मिश्रा, मुख्य विकास अधिकारी गौरव कुमार, अपर जिलाधिकारी तीर्थपाल सिंह, सीएमओ डा. केएस चौहान, उप जिलाधिकारी चतर सिंह चौहान, मीनाक्षी पटवाल, मुख्य शिक्षाधिकारी विनोद प्रसाद सेमल्टी, परियोजना अधिकारी संजय सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी मनोज सोनी, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल आदि मौजूद थे।
उत्तराखंड में आज खुलेगा पहला इंटरनेट एक्सचेंज..
उत्तराखंड: प्रदेश में आज पहला इंटरनेट एक्सचेंज खुल जाएगा। केंद्रीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर इसका शुभारंभ करेंगे। इससे राज्यसभा सांसद व भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनिल बलूनी की कोशिशें सोमवार को धरातल पर नजर आएंगी। इसके तहत देहरादून में प्रदेश का पहला इंटरनेट एक्सचेंज खुलने जा रहा है। पिछले दिनों राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी ने केंद्रीय आईटी राज्यमंत्री को उत्तराखंड में इंटरनेट एक्सचेंज खोलने का प्रस्ताव दिया था।
आपको बता दे कि अनिल बलूनी के इस प्रस्ताव पर केंद्रीय राज्यमंत्री ने सहमति दे दी थी। आने वाले दिनों में राज्य के हर जिले में एक इंटरनेट एक्सचेंज स्थापित होगा। बलूनी का कहना हैं कि उनकी यह कोशिश रहेगी कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में ऐसे ही सक्षम इंटरनेट एक्सचेंज की स्थापित हों। इससे पर्वतीय और दूरदराज के गांवों में भी इंटरनेट की सुविधा मिल सकेगी।
यह है इंटरनेट एक्सचेंज..
इंटरनेट एक्सचेंज के माध्यम से इंटरनेट सेवा प्रदाताओं, डाटा केंद्रों और सामग्री वितरण नेटवर्क के बीच इंटरनेट डेटा का आदान-प्रदान होता है। यह इंटरनेट स्पीड को बढ़ाने के साथ-साथ एक मजबूत इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर को स्थापित करता है। बलूनी ने कहा कि इंटरनेट एक्सचेंज से कई लाभ होंगे। इंटरनेट की गति बढ़ जाएगी। दुर्गम क्षेत्रों में भी सहज रूप से नेट की सुविधा प्राप्त होगी। ऑनलाइन पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों, वर्क फ्रॉम होम से जुड़े नौजवानों व सरकारी विभागों, गैर सरकारी संस्थानों को अपने ऑनलाइन कार्यों में सुविधा होगी।
रोजगार के खुलेंगे नए द्वार..
इंटरनेट की गुणवत्ता में सुधार होने से उत्तराखंड में कॉल सेंटर्स और बीपीओ संस्थानों की संभावना बढ़ जाएगी जो कि प्रत्यक्ष रूप से राज्य के नौजवानों के लिए रोजगार के नए द्वार खोलेगी। बकौल बलूनी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तराखंड में अभूतपूर्व विकास हम देख रहे हैं और उत्तराखंड को देश का अग्रणी राज्य बनाने के लिए कृतसंकल्प हैं।
गंगोत्री धाम में आज नहीं होगी पूजा पाठ, बंद रहेगा मंदिर..
उत्तराखंड: चारों धामों के तीर्थ पुरोहित देवस्थानम बोर्ड को भंग करने की पुरजोर मांग कर रहे हैं लेकिन उसके बावजूद भी देवस्थानम बोर्ड को भंग करने की ओर सरकार कोई भी कदम उठाती नजर नहीं आ रही है। प्रदेश सरकार की ओर से देवस्थानम बोर्ड को भंग करने को लेकर कोई भी सकारात्मक कार्यवाही ना करने पर गंगोत्री धाम के तीर्थ पुरोहितों ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की है।
जिसके कारण है कि धाम के कपाट बंद होने से पहले उन्होंने सोमवार यानि की आज संपूर्ण गंगोत्री धाम को बंद रखने के साथ ही वहां पर किसी भी प्रकार का पूजा-पाठ ना करने का निर्णय लिया है। गंगोत्री धाम के सभी व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रखने के साथ ही वहां के तीर्थ पुरोहितों ने किसी भी प्रकार की पूजा पाठ ना करने एवं जन आक्रोश रैली निकालने का निर्णय लिया है।
आपको बता दे कि रविवार को गंगोत्री धाम में श्री पंच मंदिर गंगोत्री समिति, तीर्थ पुरोहितों, हक हकूक धारियों तथा स्थानीय व्यापारियों की एक बैठक हुई जिसमें सभी ने देवस्थानम बोर्ड का पुरजोर विरोध किया और देवस्थानम बोर्ड को भंग ना करने पर सरकार के प्रति अपनी नाराजगी व्यक्त की।
तीर्थ पुरोहितों का कहना हैं कि बीती 11 सितंबर को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ वार्ता हुई थी इसमें उन्होंने 30 अक्टूबर तक देवस्थान बोर्ड को भंग किए जाने को लेकर निर्णय लेने की बात कही थी मगर अभी तक सरकार की ओर से कोई भी सख्त कार्यवाही इस ओर नहीं की गई है जिसके बाद तीर्थ पुरोहितों ने 1 नवंबर यानी कि आज संपूर्ण गंगोत्री धाम बंद रखने का निर्णय लिया है।
उत्तराखंड में मेडिकल छात्रों को बड़ी सौगात, पढ़िए पूरी खबर..
उत्तराखंड: प्रदेश सरकार ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों को बड़ी सौगात दी है। एमबीबीएस के छात्रों की एक साल की निर्धारित चार लाख रुपये की फीस को 1.45 लाख रुपये कर दिया गया है। मेडिकल की पढ़ाई करने के बाद उत्तराखंड में ही सेवाएं देने का बांड भरने वाले छात्रों के लिए 50 हजार रुपये शुल्क तय किया गया है।
आपको बता दे कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में मेडिकल छात्रों की फीस ढाई लाख रुपये सालाना घटाई गई है। शासकीय प्रवक्ता सुबोध उनियाल का कहना हैं कि पूरे देश में उत्तराखंड मेडिकल छात्रों की सबसे कम फीस हो गई है। उन्होंने कहा हैं कि गुरुवार को प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में विभिन्न विभागों के 25 प्रस्तावों पर चर्चा हुई, इनमें से एक प्रकरण पर निर्णय के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत कर दिया गया है।
आपको बता दे कि सरकार ने एक ओर जहां बांड की व्यवस्था सभी मेडिकल कॉलेजों में बहाल कर दी है तो वहीं छात्रों की मांग सुनते हुए दूसरी ओर फीस भी चार लाख रुपये से घटाकर एक लाख 45 हजार रुपये कर दी है। इससे निश्चित तौर पर छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी। इसी के साथ बैठक में और भी कई अन्य फैसलों पर मुहर लगाई गई।
कैबिनेट मंत्री और राज्य सरकार के प्रवक्ता सुबोध उनियाल का कहना हैं कि मुख्यमंत्री महिला पोषण योजना के तहत राज्य में महिलाओं को सप्ताह में दो दिन फल, सूखे मेवे और अंडे जैसे पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराए जाएंगे। महिला कल्याण बाल विकास विभाग उक्त सामग्री आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए गर्भवती और धात्री महिलाओं को उपलब्ध कराएगा। इसका लाभ करीब एक लाख 80 हजार महिलाओं को मिलेगा। सरकार चुनाव से पहले इस योजना को लागू करने की तैयारी कर रही है।
तैयारियों में जुटा देवस्थानम बोर्ड, मुख्य सचिव सहित कई अधिकारी पहुंचे केदारनाथ..
उत्तराखंड: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पांच नवंबर के केदारनाथ दौरे को लेकर उत्तराखंड देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड मंदिर को विशेष रूप से सजाने और पूजा अर्चना की तैयारियों में जुट गया है। गुरुवार को मुख्य सचिव डॉ.एसएस संधू, पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर और बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रविनाथ रमन केदारनाथ जाकर तैयारियों का जायजा ले रहे हैं।
छह नवंबर को बंद हो रहे हैं बाबा केदार के कपाट..
आपको बता दे कि इस साल बाबा केदार के कपाट छह नवंबर को बंद हो रहे हैं। कपाट बंद होने से एक दिन पहले प्रधानमंत्री मोदी केदारपुरी पहुंच कर पूजा अर्चना करेंगे। इसके साथ ही केदारनाथ में चल रहे पुनर्निर्माण कार्यों का उद्घाटन व शिलान्यास करेंगे
साथ ही प्रधानमंत्री शंकराचार्य की प्रतिमा का अनावरण भी करेंगे। देवस्थानम बोर्ड के सीईओ एवं आयुक्त गढ़वाल रविनाथ रमन का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे को लेकर सभी तैयारियां चल रही हैं। केदारनाथ में आदिगुरु शंकराचार्य की मूर्ति स्थापित कर दी गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पांच नवंबर को इसका अनावरण करेंगे। यह मूर्ति 35 टन वजनी है और कर्नाटक में बनाई गई है। सितंबर में इसे चिनूक से केदारनाथ पहुंचाया गया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल केदारनाथ पुनर्निर्माण में आदिगुरु शंकराचार्य के समाधिस्थल का पुनर्निर्माण भी है। 20 अक्तूबर 2017 को केदारनाथ पहुंचकर पीएम मोदी ने पहले चरण के पुनर्निर्माण कार्यों का शिलान्यास किया था। तब, उन्होंने धाम में आदिगुरु शंकराचार्य के समाधिस्थल को भव्य व दिव्य बनाने की बात कही थी।
इसी के तहत नवंबर 2019 से तीन चरणों में समाधि स्थल का कार्य शुरू किया गया। इसके दूसरे चरण का काम लगभग पूरा हो गया है। वहीं, अब समाधिस्थल में आदिगुरु शंकराचार्य की 35 टन वजनी मूर्ति को भी स्थापित कर दी है। इस मूर्ति को अभी कपड़े से ढका गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 नवंबर को मूर्ति का अनावरण करेंगे।
ट्रैकिंग और पर्वतारोहण पर जाने के लिए उत्तराखंड में पंजीकरण होगा अनिवार्य..
उत्तराखंड: ट्रैकिंग और पर्वतारोहण पर जाने वाले पर्यटकों व दलों के लिए जल्द ही उत्तराखंड में पंजीकरण करना अनिवार्य हो जाएगा। इसके लिए पर्यटन विभाग की ओर से नई गाइडलाइन तैयार की जा रही है। कैबिनेट में प्रस्ताव को मंजूरी देकर जल्द ही इसे लागू किया जाएगा। साथ ही ट्रैकिंग के दौरान ट्रैकरों की लोकेशन का पता लगाने के लिए जीपीएस सिस्टम को भी गाइडलाइन में शामिल किया जा सकता है।
आपको बता दे कि साहसिक पर्यटन के शौकीन पर्यटकों समेत विशेष अभियान दल हर साल उत्तराखंड में ट्रैकिंग और पर्वतारोहण के लिए आते हैं। लेकिन अभी तक ट्रैकिंगपर जाने वाले वाले पर्यटकों के पंजीकरण की पुख्ता व्यवस्था नहीं है। न तो ट्रैकिंग दल के सदस्यों के बारे में विभाग के पास कोई जानकारी होती है और न ही लोकेशन का पता लगाने के लिए कोई सिस्टम होता है।
छितकुल में हुई थी सात पर्यटकों की मौत
हाल ही में उत्तरकाशी जिले से छितकुल की ट्रैकिंग पर गए 11 सदस्यीय दल के साथ घटना हुई है, जिसमें सात शव बरामद हो चुके हैं। कुमाऊं में भी ऐसा ही हादसा हुआ था। ट्रैकिंग दलों के साथ हादसों को देखते हुए अब पर्यटन विभाग की ओर सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नई गाइडलाइन बनाई जा रही है। जिसमें ट्रेकरों के पंजीकरण को अनिवार्य किया जाएगा।
जिससे ट्रेकरों के बारे में पूरा डाटा विभाग के पास होगा। प्रदेश में ट्रैकिंग और माउंटेरिंग के लिए नई गाइडलाइन बनाई जा रही है। जिसमें ट्रैकिंग दल की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ट्रेकिंग के लिए पंजीकरण के साथ ट्रेकरों को ट्रैकिंग से संबंधित दिशा-निर्देश भी दिए जाएंगे।
आपदा प्रभावितों की उपेक्षा के खिलाफ कांग्रेस का उपवास आज, कई कांग्रेस नेता होंगे शामिल..
उत्तराखंड: आपदा प्रभावितों की उपेक्षा के खिलाफ कांग्रेस गुरुवार को सचिवालय गेट के सामने एक दिवसीय सांकेतिक धरना-उपवास करेगी। जिसमे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल और पूर्व सीएम हरीश रावत सहित तमाम नेता शामिल होंगे।
उपाध्यक्ष एवं मीडिया सलाहकार सुरेंद्र कुमार का कहना हैं कि 17, 18 एवं 19 अक्तूबर को राज्य के विभिन्न स्थानों पर भीषण दैवीय आपदा आने के कारण कई लोेगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। जानमाल का भारी नुकसान हुआ था।
आपको बता दे कि कांग्रेस के तमाम नेताओं ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। कांग्रेस ने सरकार से पांच दिन में आपदा पीड़ितों को राहत पहुंचाने की मांग की थी, लेकिन राज्य सरकार की ओर से इस संबंध में अब तक जरूरी कदम नहीं उठाए गए हैं। इसलिए पार्टी आज धरना-उपवास के माध्यम से सरकार को जगाने का काम कर रही है।
900 करोड़ रुपये के नुकसान का प्राथमिक आकलन..
आपदा में मरने वाले लोगों का आंकड़ा 77 पहुंच गया है। विभागों की ओर से सौंपी गई रिपोर्ट के आधार पर 900 करोड़ रुपये के नुकसान का प्राथमिक आकलन किया गया है। 232 से अधिक परिसंपत्तियों को नुकसान पहुंचा है। क्षति का आंकड़ा और भी बढ़ने के आसार हैं।
विधानसभा चुनाव से पहले छात्रों को टैबलेट देने में जानें क्या बनी बाधा..
उत्तराखंड: विधानसभा चुनाव से पहले 2.65 लाख छात्रों को टैबलेट उपलब्ध कराने की योजना पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। त्योहारी सीजन के चलते विभाग को एक साथ इतनी मात्रा में टैबलेट नहीं मिल पा रहे हैं। इस कारण चुनाव से पहले सभी चिन्हित युवाओं के हाथों में टैबलेट पहुंचने की उम्मीद अब बहुत कम है। प्रदेश सरकार चुनावी साल में सभी सरकारी डिग्री कॉलेजों के साथ ही सरकारी स्कूलों में 10वीं और 12वीं के छात्रों को टैबलेट देने की घोषणा कर चुकी है।
पहले सरकार ने दिवाली से पहले छात्रों के हाथों में टैबलेट पहुंचाने का निर्णय लिया था। लेकिन योजना का प्रस्ताव कैबिनेट तक पहुंचने में ही समय लग गया। अब दिवाली में एक सप्ताह का ही समय रह गया है, लेकिन सरकार की तरफ से अभी तक इसका ऑर्डर नहीं दिया गया। अभी पिछले सप्ताह ही टेक्नीकल कमेटी ने आठ से दस इंच स्क्रीन वाला टैबलेट देने पर मुहर लगाई है अब टेंडर प्रक्रिया के जरिए सरकार टैबलेट का ऑर्डर देगी।
आपूर्ति में संकट
जानकारी के अनुसार शासन स्तर से इस संबंध में बाजार में सर्वे किया गया था। लेकिन त्योहारी सीजन के चलते मांग में आए उछाल के कारण डीलर इतनी मात्रा में एक साथ टैबलेट आपूर्ति नहीं कर पा रहे हैं। दूसरी तरफ टैबलेट निर्माता कंपनियों ने भी ग्लोबल चिप संकट के चलते टैबलेट आपूर्ति करने में एक से डेढ़ महीने का समय लगने की बात कही है। एकरूपता के चलते सरकार के सामने एक ही कपंनी का टैबलेट लेने की भी मजबूरी है।
