गुरूवार को देश के चर्चित व ताकतवर व्यक्तित्वों में शुमार किए जाने वाले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) का जन्मदिन था। स्वाभाविक है कि उनको जन्मदिन की बधाई देने में कोई पीछे नहीं रहना चाहता था। अमित शाह को जन्मदिन की शुभकामनाएं देने वालों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्र सरकार के मंत्री, राज्यों के मुख्यमंत्री समेत खेल व फिल्म जगत की जानीमानी हस्तियां शामिल रहीं। जन्मदिन के कारण अमित शाह ट्वीटर पर ट्रेंड करते रहे। समर्थक अमित शाह को ‘आधुनिक भारत का चाणक्य’ से लेकर Iron man of New India (नए भारत का लोह पुरुष) आदि जैसी तमाम उपमाओं से नवाज रहे थे। बड़ी संख्या में समर्थकों ने धारा-370 को हटाने को लेकर उनकी चर्चा की और उन्हें दृढ़ निश्चयी राजनेता बताया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा पूरा राष्ट्र देख रहा समपर्ण व उत्कृष्ट योगदान को
अमित शाह को जन्मदिन की बधाई देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लिखा – ‘श्री अमित शाह जी को जन्मदिन की बधाई। हमारा राष्ट्र उस समर्पण और उत्कृष्टता को देख रहा है जिसके साथ आप भारत की प्रगति में योगदान दे रहे हैं। भाजपा को मजबूत बनाने के आपके प्रयास भी उल्लेखनीय हैं। ईश्वर आपको लंबे समय तक देश की सेवा करने और स्वस्थ जीवन का आशीर्वाद दे।’
शाह को बधाई देने वाली प्रमुख हस्तियों में ये रहे शामिल
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा, केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण, रविशंकर प्रसाद, नितिन गडकरी, पीयूष गोयल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार, ज्योतिरादित्य सिंधिया, कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला, अभिनेता अनुपम खेर, कंगना रनौत, रितेश देशमुख, क्रिकेटर सुरेश रैना, बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल, संगीतकार अमजद अली खान आदि ने ट्वीट कर अमित शाह को जन्मदिन की शुभकामनाएं दी हैं।
बूथ के पोलिंग एजेंट से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
‘चाणक्य’ के रुप में चर्चित अमित शाह लीक से हटकर चलने में विश्वास रखते हैं। बायो कैमेस्ट्री में स्नातक शाह छात्र जीवन के दौरान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संपर्क में आए। भाजपा में उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत अहमदाबाद में एक बूथ के पोलिंग एजेंट के रूप में हुई।
एक भी चुनाव नहीं हारे
मात्र 31 वर्ष की आयु में वे गुजरात की सरखेज विधानसभा क्षेत्र विधायक चुने गए। राजनीति में ऐसा दुर्लभ होता है कि कोई व्यक्ति एक क्षेत्र से लगातार चार-पांच बार विजयी हो और हर बार जीत का अंतर व मत प्रतिशत बढ़ता जाए। शाह ने यह रिकॉर्ड कायम किया है। सरखेज विधानसभा से चार बार चुनाव जीतने वाले शाह अपना पिछला रिकार्ड तोड़ते गए।
सोहराबुद्दीन व इशरत जहॉ मुठभेड़ मामले में फंसे
गुजरात में शाह की सबसे बड़ी राजनीतिक उपलब्धि सहकारी आंदोलन में कॉग्रेसी किले को ध्वस्त करना रहा है। राजनीतिक क्षितिज पर धुमकेतु की तरह उभरे शाह के कॅरियर पर कांग्रेस ने सोहराबुद्दीन व इशरत जहॉ मुठभेड़ मामलों को लेकर ग्रहण लगाने का षडयंत्र रचा। मगर झूठ के पॉव नहीं होते, वो जल्दी लड़खड़ा जाता है। कोर्ट ने उन्हें ससम्मान बरी किया।
2014 के लोकसभा चुनाव में देश ने जाना शाह का करिश्माई व्यक्तित्व
राष्ट्रीय राजनीति में उनके करिश्माई व्यक्तित्व से लोग 2014 के लोकसभा चुनावों में रुबरू हुए, जब पार्टी ने उत्तर प्रदेश नें 80 में से 73 लोकसभा सीटों पर विजय प्राप्त की। वो लगातार अपनी सांगठनिक व प्रबंधकीय क्षमता का लोहा मनवाते रहे। जुलाई 2014 में पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने के बाद उन्होंने संगठन में कई नए प्रयोग किए।
गृह मंत्री के रूप में दिखाए मजबूत इरादे
2019 के लोकसभा चुनाव में अमित शाह ने गुजरात की गांधीनगर सीट से चुनाव लड़ा और मोदी सरकार में गृह मंत्री नियुक्त हुए। गृह मंत्री के रूप में भी अमित शाह ने ऐतिहासिक पारी खेली। जम्मू-कश्मीर से धारा-370 हटाने का मामला रहा हो या नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) अमित शाह ने हर मुद्दे पर अपने मजबूत इरादों की छाप छोड़ी है।
देश में कोरोना के सक्रिय मामलों में लगातार आ रही गिरावट का रुख बिना रूके जारी है। पिछले तीन दिनों में सक्रिय मामले कुल मामलों के 10 प्रतिशत से भी कम पर कायम हैं। इससे पता चलता है कि देश भर में कोविड-19 रोगियों के 10 मामलों में से सिर्फ एक ही सक्रिय मामला है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने गुरुवार को एक अधिकृत विज्ञप्ति में यह जानकारी दी है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, वर्तमान में देश के कुल पॉजिटिव मामलों में से सिर्फ 9.29 प्रतिशत मामले सक्रिय हैं जो कि 7,15,812 हैं।

देश ने एक अन्य मील का पत्थर हासिल किया है। पिछले तीन दिनों में पॉजिटिव मामलों की दर 5 प्रतिशत से लगातार नीचे बनी हुई है। इससे यह पता चलता है कि केन्द्र तथा राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों की केन्द्रित रणनीति और कार्रवाई के चलते संक्रमण के प्रसार पर प्रभावी लगाम लगाने में मदद मिली है। प्रतिदिन पॉजिटिव मामलों की संख्या 3.8 प्रतिशत पर आ गई है।

प्रतिदिन पॉजिटिव मामलों की दर में आ रही गिरावट को सक्रिय मामलों में आ रही गिरावट से भी मापा जा सकता है जो कि 7.5 लाख (7,15,812) से नीचे बनी हुई है।
ठीक हुए रोगियों के कुल मामले 69 लाख के आसपास (68,74,518) हैं। सक्रिय मामलों और ठीक हुए मामलों के बीच का अंतर लगातार बढ़ रहा है और यह आज 61,58,706 पर आ गया है।
पिछले 24 घंटों में 79,415 रोगी ठीक हुए हैं और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है, जबकि 55,839 नए पुष्ट मामले सामने आए हैं। राष्ट्रीय रिकवरी रेट (ठीक हुए मामले) बढ़कर 89.20 प्रतिशत हो गया है।

ठीक हुए रोगियों के 81 प्रतिशत नए मामले 10 राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों में हैं। महाराष्ट्र में एक दिन में 23,000 से ज्यादा रोगी ठीक हुए हैं।

पिछले 24 घंटों में कुल नए पुष्ट मामले 55,839 सामने आए हैं। इनमें से 78 प्रतिशत 10 राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों में हैं। महाराष्ट्र और केरल अभी भी बड़ी संख्या में नए मामले दर्ज कर रहे हैं जो कि प्रत्येक में 8,000 से ज्यादा है। इसके बाद, कर्नाटक ने 5,000 से ज्यादा मामले दर्ज किए हैं।

पिछले 24 घंटों में 702 मामलों में मरीजों की मौत हुई है। इनमें से करीब 82 प्रतिशत इन 10 राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों में हैं। महाराष्ट्र से 25 प्रतिशत से ज्यादा मामलों में रोगी की मौत दर्ज की गईं हैं (180 मौतें)।
बिहार विधानसभा चुनाव के लिए गुरुवार को कांग्रेस ने अपने 49 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। इस सूची में सबसे चौंकाने वाला नाम मोतिहारी के गोविंदगंज सीट से घोषित प्रत्यासी ब्रजेश पांडेय का है। ब्रजेश पांडेय एनडीटीवी के चर्चित पत्रकार रवीश कुमार के सगे बड़े भाई हैं। ब्रजेश का परिचय केवल इतना ही नहीं है। वो बिहार कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष रह चुके हैं। वर्ष 2015 में भी वो विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं और हार गए थे। ब्रजेश पांडेय तब चर्चाओं में आये थे, जब एक दलित नाबालिक लड़की ने उन पर यौन शोषण और सेक्स रेकैट चलने का आरोप लगाया था।
वर्ष 2017 में बिहार कांग्रेस के एक अनुसूचित जाती के नेता की नाबालिग बेटी ने ब्रजेश पांडेय व एक पूर्व आइएएस अधिकारी के बेटे निखिल प्रियदर्शी पर यौन शोषण व सेक्स रैकेट संचालित करने का आरोप लगाया था। इन आरोपों के बाद बिहार की राजनीती में भूचाल आ गया था। ब्रजेश पर लगे आरोपों के बाद कांग्रेस ने उनसे दूरी बना ली थी। ब्रजेश ने पार्टी से त्याग-पत्र दे दिया था। सोशल मीडिया में इस मामले को लेकर जबरदस्त हलचल रही। सोशल मीडिया में लोगों ने इस मुद्दे पर ब्रजेश के छोटे भाई व पत्रकार रवीश कुमार पर भी जम कर निशाना साधा और सवालों की बौछार कर दी। लोगों ने रविश कुमार से मामले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करने को कहा। प्राइम टाइम में डिबेट करने की मांग उठाई।
सोशल मीडिया में तब यह भी आरोप लगते रहे कि रवीश कुमार के प्रभाव के चलते मुख्यधारा के मीडिया ने इस समाचार को छिपा दिया। कोर्ट में ब्रजेश पांडेय के बचाव में कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल जैसे वकीलों की टीम उतरी थी। बहरहाल, गुरुवार को बिहार कांग्रेस के प्रत्याशियों की सूची जारी होने के बाद एक बार फिर यह प्रकरण सोशल मीडिया पर चर्चाओं में है। यूजर्स हाथरस प्रकरण को लेकर हो-हल्ला मचाने वाली कांग्रेस के साथ-साथ रवीश कुमार को भी इस मुद्दे पर निशाने पर ले रहे हैं।
नवम्बर में उत्तर प्रदेश की 10 और उत्तराखंड की खाली होने वाली 1 राज्यसभा सीटों के लिए मंगलवार को केंद्रीय चुनाव आयोग ने कार्यक्रम घोषित कर दिया है। राज्य सभा के द्विवार्षिक चुनावों के लिए 20 अक्टूबर को अधिसूचना होगी। नामांकन पत्र भरने की अंतिम तिथि 27 अक्टूबर, मतदान की तिथि 9 नवंबर और 11 नवंबर तक चुनाव प्रक्रिया सम्पन्न हो जाएगी।
उल्लेखनीय है कि 25 नवम्बर को उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड से राज्य सभा के 11 सदस्य सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इनमें केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, कांग्रेस नेता पी.एल. पुनिया, अरुण सिंह, राम रामगोपाल यादव जैसे दिग्गज नेता उत्तर प्रदेश से हैं। उत्तराखंड से फिल्म अभिनेता व कांग्रेस नेता राज बब्बर सेवानिवृत हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश से सेवानिवृत होने वाले अन्य सदस्यों में डॉ चंद्रपाल सिंह यादव, जावेद अली खान, नीरज शेखर, रवि प्रकाश वर्मा, राजा राम व वीर सिंह शामिल हैं।
भारत निर्वाचन आयोग के अवर सचिव प्रफुल्ल अवस्थी द्वारा जारी बयान में जानकारी दी गई है कि इन द्विवार्षिक चुनावों के लिए 20 अक्टूबर को अधिसूचना जारी की जाएगी। नामांकन पत्र भरने की अंतिम तिथि 27 अक्टूबर होगी। 28 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच और 2 नवम्बर नाम वापसी की अंतिम तिथि रहेगी। यदि आवश्यक होगा तो मतदान 9 नवम्बर को प्रातः 9 बजे से 4 बजे तक होगा और मतपत्रों की गिनती भी उसी दिन होगी। 11 नवम्बर तक चुनाव प्रक्रिया सम्पन्न हो जाएगी।
चुनाव आयोग के अनुसार मतदान के समय बैलेट पेपर पर वरीयता (अंक) को चिह्नित करने के लिए रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा दिए गए एकीकृत वायलेट कलर स्केच पेन का ही उपयोग किया जाएगा। किसी भी परिस्थिति में मतदाता दूसरे किसी पेन का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे।
चुनाव आयोग ने राज्यों के मुख्य सचिवों को निर्देश दिए हैं कि वे चुनाव के दौरान कोविड-19 से बचाव व रोकथाम के निर्देशों का पालन कराने के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी की तैनाती सुनिश्चित करें। आयोग ने इसके लिए विस्तृत निर्देश पूर्व में भी जारी किये हैं। आयोग ने संबंधित राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को इन चुनावों के लिए पर्यवेक्षक के रूप में तैनात किया है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से स्वामित्व योजना के तहत संपत्ति कार्ड के वितरण का शुभारंभ किया। मोदी ने छः राज्यों हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के 763 गांवो 1 लाख ग्रामीणों को प्रोपर्टी कार्ड वितरित किए। इनमें उत्तराखण्ड के 50 गांवों के 6800 लोग शामिल हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कार्यक्रम में कुछ लाभार्थियों से बात भी की।
गोदा गांव के सुरेश ने कही अपनी बात
उत्तराखण्ड के पौड़ी गढ़वाल के विकास खण्ड खिर्सू के ग्राम गोदा के सुरेश चंद्र को भी प्रधानमंत्री के सम्मुख अपनी बात रखने का अवसर मिला। सुरेश ने प्रधानमंत्री का धन्यवाद देते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया पूर्ण पारदर्शिता से सम्पन्न हुई है। इसमें किसी तरह का कोई विवाद नहीं हुआ। प्रापर्टी के कागज मिलने से अब बैंक से ऋण भी मिल सकेगा। सुरेश ने बताया कि उनके गांव से चौखम्भा आदि हिमालयी पर्वत शिखरों के दर्शन होते हैं और निकट ही प्रसिद्ध धार्मिक स्थल भी हैं। गांव के लोग प्रापर्टी कार्ड मिलने के बाद अपने घरों में होम स्टे बनाना चाहते हैं।
प्रधानमंत्री ने उच्च शिक्षा मंत्री को दिए यह निर्देश
प्रधानमंत्री ने सुरेश को बधाई देते हुए कहा कि वे स्वयं उत्तराखण्ड के हिमालय क्षेत्र में काफी रहे हैं। उन्होंने सुरेश से कहा कि उनका गांव प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है। सुरेश भाग्यशाली हैं कि वे ऐसे स्थान पर रहते हैं जहां से पवित्र पर्वतों के दर्शन होते हैं। उन्होंने कहा कि उनका गांव लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा। प्रधानमंत्री ने सुरेश के साथ में कार्यक्रम में उपस्थित प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ.धन सिंह रावत से कहा कि कहा कि होम स्टे के फोटोग्राफ, कान्टेक्ट नम्बर सहित सारा विवरण वेबसाइट पर उपलब्ध हो, ताकि पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को जानकारी मिल सके। इससे होम स्टे का काम बढ़िया तरीके से आगे बढ़ सकता है।

गांवों में होगा ऐतिहासिक बदलाव
इस अवसर पर अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने स्वामित्व योजना के लाभार्थियों को शुभकामनाएं दीं और कहा कि अब लाभार्थियों के पास अपने घरों के मालिक होने का एक कानूनी दस्तावेज होगा। यह योजना देश के गांवों में ऐतिहासिक बदलाव लाने जा रही है। उन्होंने कहा कि देश ने एक अति महत्वाकांक्षी भारत की ओर एक और बड़ा कदम उठाया है, क्योंकि इस योजना से ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी।
अगले 3-4 वर्षों में सबको मिलेगा संपत्ति कार्ड
उन्होंने कहा कि हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के एक लाख लाभार्थियों को आज उनके घरों के कानूनी कागजात सौंप दिए गए हैं और अगले तीन-चार वर्षों में देश के प्रत्येक गांव में हर परिवार को ऐसे संपत्ति कार्ड देने का वादा किया।
विपक्ष की आलोचना
विपक्ष की आलोचना करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि जो लोग नहीं चाहते हैं कि हमारे किसान आत्मनिर्भर बनें, उन्हें कृषि क्षेत्र में सुधारों से समस्याएं हैं। छोटे किसानों, गौपालकों और मछुआरों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड शुरू करने से दलालों और बिचौलियों को परेशानी हो रही है, क्योंकि उनकी अवैध आय रुक गई है।
गांव तथा गरीबों की आत्मनिर्भरता के लिए अभियान जारी
उन्होंने यूरिया की नीम कोटिंग, किसानों के बैंक खाते में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण इत्यादि पहलों के बारे में भी बताया, जो भ्रष्टाचार को रोकते हैं। उन्होंने कहा कि इससे प्रभावित लोग आज कृषि सुधारों के विरोध में हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के कारण देश में विकास रुकने वाला नहीं है और गांव तथा गरीबों को आत्मनिर्भर बनाना जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि इस संकल्प की सिद्धि के लिए स्वामित्व योजना की भूमिका भी अत्यधिक महत्वपूर्ण है।
केंद्रीय पंचायतराज मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर, उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्री अलग-अलग स्थानों से कार्यक्रम से जुड़े हुए थे।
केंद्र सरकार ने मंगलवार को सिनेमा हाॅल के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी कर दी है। यह एसओपी स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के साथ परामर्श करके तैयार की गई है।
एसओपी जारी करते हुए केंद्रीय सूचना व प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कहा कि गृह मंत्रालय के निर्णय के अनुसार 15 अक्टूबर से सिनेमा हॉल फिर से खुलेंगे। इसके लिए सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने यह एसओपी तैयार की है। SOP में सभी दर्शकों व कर्मचारियों की थर्मल स्क्रिनिंग, पर्याप्त शारीरिक दूरी, मास्क का प्रयोग, बार-बार हाथ धोना, हैंड सैनिटाइजर का प्रावधान आदि किया गया है।
मंत्रालय ने शारीरिक दूरी, नामित क्यूमार्कर्स के साथ प्रवेश और निकास, सैनिटाइजेशन, कर्मचारियों की सुरक्षा, न्यूनतम संपर्क सहित इस क्षेत्र में अधिसूचित अंतर्राष्ट्रीय प्रक्रियाओं को ध्यान में रखते हुए यह सामान्य एसओपी तैयार की है।
बैठने की व्यवस्था कुल क्षमता की 50 प्रतिशत तक सीमित रहेगी। मल्टीप्लेक्स शो की टाइमिंग इस प्रकार विभाजित की जाएगी, ताकि उनके शो शुरू होने और समाप्त होने के समय अलग-अलग रहें। तापमान सेटिंग 24 डिग्री से 30 डिग्री सेंटीग्रेड की सीमा में रहेगी।
जावड़ेकर के अनुसार फिल्म प्रदर्शन एक प्रमुख आर्थिक गतिविधि है और इसने देश के सकल घरेलू उत्पाद में काफी योगदान दिया है। मौजूदा कोविड-19 महामारी को देखते हुए यह महत्वपूर्ण है कि फिल्म प्रदर्शन गतिविधियों से जुड़े लोग अपने संचालन और गतिविधियां पुन: शुरू करते समय महामारी के प्रसार को रोकने के लिए उचित उपाय करें।
गृह मंत्रालय ने अपने 30 सितम्बर के आदेश द्वारा 15 अक्टूबर से कंटेनमेंट जोन से बाहर के क्षेत्रों में 50 प्रतिशत बैठने की क्षमता के साथ सिनेमा घरों, थियेटरों और मल्टीप्लेक्स को फिर से खोलने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कृषि विधेयकों को लेकर कांग्रेस के आरोपों पर प्रहार करते हुये उसे किसान विरोधी करार दिया। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में आमूल-चूल परिवर्तन लाने वाले इन कानूनों का विरोध करने से कांग्रेस का किसान विरोधी चेहरा उजागर हुआ है। उन्होंने कांग्रेस शासनकाल के कृषि उपज के आंकड़ों की तुलनात्मक समीक्षा करते हुये दावा किया कि मोदी सरकार की नीतियों से कृषि क्षेत्र में व्यापक सुधार हुए हैं।
डॉ.निशंक शनिवार को देहरादून में सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में एक संवाददाता सम्मलेन को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि नए कानूनों के लागू होने के बाद किसान कई तरह के बंधनों से मुक्त होंगे और अपनी मर्जी के मालिक होंगे। किसान अपनी मर्जी से अपने उत्पाद कहीं भी और किसी को भी बेच सकेंगे। इससे किसानों को उनकी उपज के ज्यादा दाम मिलेंगे। किसानों को राज्य की सीमाओं के बंधन से मुक्ति मिलेगी और कोई भी विवाद होने पर 30 दिनें के भीतर रिज़ॉल्यूशन बोर्ड निर्णय लेगा। साथ ही अनुबंधित किसानों को समय पर भुगतान किया जाएगा
नए कानूनों के लागू होने के बाद किसान कई तरह के बंधनों से मुक्त होंगे और अपनी मर्जी के मालिक होंगे। किसान अपनी मर्जी से अपने उत्पाद कहीं भी और किसी को भी बेच सकेंगे।
उन्होंने कहा कि नया कृषि अधिनियम किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए फायदेमंद होगा। किसानों से उनकी उपज की बिक्री के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा और उन्हें परिवहन लागत वहन नहीं करनी होगी, जिससे उनका मुनाफा बढ़ेगा। MSP के बारे में गलत धारणाओं को स्पष्ट करते हुए, उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार राज्य सरकारों और केंद्रीय मंत्रालयों से विचार करने के बाद CACP की सिफारिशों के आधार पर 22 कृषि फ़सलों के लिए MSP को निर्धारित करती है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस व अन्य विपक्षी दल किसानों को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कृषि मंडियों को समाप्त नहीं किया जा रहा है। मंडियां यथावत रहेंगी। बस किसान को आजादी दी गई है कि वह जहां उचित मूल्य मिले, वहां अपने उत्पाद बेचे। उन्होंने कहा कि किसान हमारा अन्नदाता है और सरकार उसके साथ मजबूती के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के लिये संकल्पबद्ध है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को हिमाचल प्रदेश के रोहतांग में सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण अटल टनल का उदघाटन किया। इस सुरंग के कारण मनाली और लेह के बीच की दूरी 46 किलोमीटर कम हो जाएगी और यात्रा का समय भी चार से पांच घंटे कम हो जाएगा। अटल टनल दुनिया की सबसे लंबी राजमार्ग टनल है। यह टनल 9.02 किलोमीटर लंबी है। यह पूरे साल मनाली को लाहौल-स्पीति घाटी से जोड़कर रखेगी। अभी तक यह घाटी भारी बर्फबारी के कारण लगभग 6 महीने तक अलग-थलग रहती थी।
अटल जी का सपना पूरा
इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज सिर्फ अटल जी का ही सपना नहीं पूरा हुआ है, अपितु आज हिमाचल प्रदेश के करोड़ों लोगों का भी दशकों पुराना इंतजार खत्म हुआ है। वर्ष 2002 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इस टनल के लिए अप्रोच रोड का शिलान्यास किया था। वाजपेयी सरकार जाने के बाद, जैसे इस काम को भी भुला दिया गया। हालात ये थी कि साल 2013-14 तक टनल के लिए सिर्फ 1300 मीटर का काम हो पाया था। जिस रफ्तार में अटल टनल का काम हो रहा था, अगर उसी रफ्तार से काम चला होता तो ये सुरंग साल 2040 में जाकर पूरा हो पाती। आपकी आज जो उम्र है, उसमें 20 वर्ष और जोड़ लीजिए, तब जाकर लोगों के जीवन में ये दिन आता, उनका सपना पूरा होता।
20 साल का काम 6 साल में
मोदी ने कहा कि जब विकास के पथ पर तेजी से आगे बढ़ना हो, देश के लोगों के विकास की प्रबल इच्छा हो, तो रफ्तार बढ़ानी ही पड़ती है। केंद्र में वर्ष 2014 में उनकी सरकार आने के बाद अटल टनल के काम में भी अभूतपूर्व तेजी लाई गई। नतीजा ये हुआ कि जहां हर साल पहले 300 मीटर सुरंग बन रही थी, उसकी गति बढ़कर 1400 मीटर प्रति वर्ष हो गई। सिर्फ 6 साल में हमने 26 साल का काम पूरा कर लिया।
देरी के कारण तीन गुना बड़ी लागत
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि साल 2005 में ये आंकलन किया गया था कि ये टनल लगभग 950 करोड़ रुपये में पूरी हो जाएगी। मगर लगातार होने वाली देरी के कारण ये तीन गुना से भी ज्यादा, यानी करीब 3200 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद पूरी हुई है। कल्पना कीजिए कि 20 साल और लग जाते तो क्या स्थिति होती ?
एक नजर अटल टनल की विशेषताओं पर
यह टनल हिमालय की पीर पंजाल पर्वत श्रृंखला में औसत समुद्र तल से 3000 मीटर अर्थात 10,000 फीट की ऊंचाई पर अति-आधुनिक विनिर्देशों के साथ बनाई गई है। यह टनल मनाली और लेह के बीच सड़क की दूरी 46 किलोमीटर कम करती है और दोनों स्थानों के बीच लगने वाले समय में भी लगभग 4 से 5 घंटे की बचत करती है।
घोड़े की नाल के आकार और डबल लेन टनल
अटल टनल का दक्षिण पोर्टल (एसपी) मनाली से 25 किलोमीटर दूर 3060 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, जबकि इसका उत्तर पोर्टल (एनपी) लाहौल घाटी में तेलिंग सिस्सु गांव के पास 3071 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह घोड़े की नाल के आकार में 8 मीटर सड़क मार्ग के साथ सिंगल ट्यूब और डबल लेन वाली टनल है। इसकी ओवर हेड निकासी 5.525 मीटर है।
80 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से दौड़ सकते वाहन
यह 10.5 मीटर चौड़ी है और इसमें 3.6x 2.25 मीटर फायर प्रूफ आपातकालीन निकास टनल भी है, जिसे मुख्य टनल में ही बनाया गया है। अटल टनल को अधिकतम 80 किलोमीटर प्रति घंटे की गति के साथ प्रतिदिन 3000 कारों और 1500 ट्रकों के यातायात घनत्व के लिए डिजाइन किया गया है।
कुछ अन्य प्रमुख विशेषताएं
यह टनल सेमी ट्रांसवर्स वेंटिलेशन सिस्टम, एससीएडी एनियंत्रित अग्निशमन, रोशनी और निगरानी प्रणाली सहित अति-आधुनिक इलेक्ट्रो-मैकेनिकल प्रणाली से युक्त है। टनल के दोनों प्रवेश द्वार अर्थात पोर्टल पर प्रवेश बैरियर, आपातकालीन संचार के लिए प्रत्येक 150 मीटर दूरी पर टेलीफोन कनेक्शन, प्रत्येक 60 मीटर दूरी पर फायर हाइड्रेंट तंत्र, प्रत्येक 250 मीटर दूरी पर सीसीटीवी कैमरों से युक्त स्वत: किसी घटना का पता लगाने वाली प्रणाली, प्रत्येक किलोमीटर दूरी पर वायु गुणवत्ता निगरानी, पूरी टनल में प्रसारण प्रणाली, प्रत्येक 50 मीटर दूरी पर फायर रेटिड डैम्पर्स, प्रत्येक 60 मीटर दूरी पर कैमरे लगे हैं।
वाजपेयी सरकार ने लिया था टनल निर्माण का निर्णय
03 जून, 2000 तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने रोहतांग दर्रे के नीचे एक रणनीतिक टनल का निर्माण करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया था। टनल के दक्षिण पोर्टल की पहुंच रोड़ की आधारशिला 26 मई, 2002 रखी गई थी। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने प्रमुख भू-वैज्ञानिक, भूभाग और मौसम की चुनौतियों पर काबू पाने के लिए अथक परिश्रम किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक 24 दिसम्बर 2019 को आयोजितबैठक में इस टनल का नाम अटल टनल रखने का निर्णय लिया गया था।
बात-बेबात के मुद्दों को लेकर हो-हल्ला मचाने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता व स्वराज पार्टी के नेता प्रशांत भूषण गैंग को गुरुवार को एक बार फिर मुंह की खानी पड़ी। उच्चतम न्यायालय ने कुछ पूर्व अधिकारियों की तरफ से प्रशांत भूषण के माध्यम से दाखिल एक याचिका को खारिज कर दिया। याचिका में केंद्र सरकार पर समय रहते लॉकडाउन लागू नहीं किए जाने और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नमस्ते ट्रंप कार्यक्रम के आयोजन के दौरान कोविड-19 के मानकों का ध्यान नहीं रखे जाने के आरोप लगाए गए थे और इसकी जांच के लिए एक आयोग गठित करने की मांग की गई थी।
न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि यह याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। यह मुद्दे सार्वजनिक बहस के हो सकते हैं। मगर अदालत की बहस के नहीं। 6 पूर्व अधिकारियों की ओर से दायर की गई इस याचिका में कहा गया था कि केंद्र सरकार कोविड-19 के प्रबन्धन में पूरी तरह असफल रही। सरकार के पास लॉकडाउन को लेकर कोई योजना नहीं थी। सरकार कोरोना महामारी को रोकने में नाकाम साबित हुई है। अर्थ व्यवस्था चरमरा गई है।
याचिका में कहा गया कि नमस्ते ट्रंप कार्यक्रम के दौरान लाखों लोग एक साथ एकत्र हुए थे। जबकि उससे पहले गृह मंत्रालय एडवाइजरी जारी कर चुका था कि बड़ी संख्या में लोग एक जगह एकत्र ना हों। याचिका में मांग की गई कि इन मुद्दों की जांच के लिए एक स्वतंत्र जांच आयोग गठित किया जाए। मगर न्यायालय प्रशांत भूषण के तर्कों से सहमत नहीं हुआ और याचिका को खारिज कर दिया।
भारत सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय मानवधिकार संगठन ‘एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया’ के रुख और बयान को दुर्भाग्यपूर्ण, अतिश्योक्तिपूर्ण और सच्चाई से परे बताया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आरोप लगाया है कि संगठन द्वारा मानवीय कार्य और सत्य की ताकत को लेकर की जा रही बयानबाजी सिर्फ अपनी गतिविधियों से ध्यान हटाने की चाल है। मंत्रालय ने कहा कि संगठन स्पष्ट रूप से भारतीय कानूनों की अवहेलना में लिप्त रहा है। एमनेस्टी इंटरनेशनल द्वारा पिछले कुछ वर्षों में बरती गईं अनियमितताओं और अवैध कार्यों की कई एजेंसियां जांच कर रही हैं। ऐसे बयान देकर वह जांच को प्रभावित करने के प्रयास भी कर रहा है।
घरेलू मामलों में हस्तक्षेप की अनुमति नहीं
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मंगलवार शाम को बयान जारी कर कहा कि संगठन भारत में मानवीय कार्य जारी रखने के लिए स्वतंत्र है, जिस तरह से अन्य संगठन कर रहे हैं। भारत के कानून विदेशी चंदे से वित्त पोषित संस्थाओं को घरेलू राजनीतिक बहस में हस्तक्षेप की अनुमति नहीं देते हैं। यह कानून सभी पर समान रूप से लागू होता है और इसी तरह एमनेस्टी इंटरनेशनल पर भी लागू होगा।
कई बार आवेदन के बावजूद FCRA की अनुमति नहीं
गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि एमनेस्टी इंटरनेशनल को विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (Foreign Contribution (Regulation) Act, FCRA) के अंतर्गत सिर्फ एक बार और वह भी 20 साल पहले दिसंबर, 2000 में स्वीकृति दी गई थी। तब से अभी तक एमनेस्टी इंटरनेशनल के कई बार आवेदन करने के बावजूद पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा FCRA स्वीकृति से इनकार किया जाता रहा है, क्योंकि कानून के तहत वह इस स्वीकृति को हासिल करने के लिए पात्र नहीं है। एमनेस्टी के प्रति अलग-अलग सरकारों का यह कानूनी दृष्टिकोण स्पष्ट करता है कि अपने कामकाज के लिए पैंसा हासिल करने की उसकी प्रक्रिया संदिग्ध है।
गैर कानूनी तरीके से हासिल किया विदेशी फंड
केंद्र सरकार के अनुसार FCRA नियमों को दरकिनार करते हुए एमनेस्टी यूके ने भारत में पंजीकृत चार संस्थाओं को बड़ी मात्रा में धनराशि भेजी और इसे प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के रूप में दिखाया गया। इसके अलावा एमनेस्टी इंडिया को FCRA के तहत गृह मंत्रालय की मंजूरी के बिना बड़ी मात्रा में विदेशी धन प्रेषित किया गया। गलत रास्ते से धन भेज कर कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन किया गया।
केंद्र सरकार के प्रति अभूतपूर्व भरोसा
गृह मंत्रालय ने यह भी कहा कि भारत मुक्त प्रेस, स्वतंत्र न्यायपालिका और जीवंत घरेलू बहस के साथ संपन्न और बहुलतावादी लोकतांत्रिक संस्कृति वाला देश है। भारत के लोगों ने वर्तमान सरकार में अभूतपूर्व भरोसा दिखाया है। गृह मंत्रालय ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि कानूनों के पालन करने में विफल रहने के बाद एमनेस्टी को भारत के लोकतांत्रिक और बहुलतावादी स्वभाव पर टिप्पणियां करने का अधिकार नहीं मिल जाता है।
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भारत में बंद किया कामकाज
इससे पहले, एमनेस्टी इंटरनेशनल की भारत स्थित इकाई ने मंगलवार सुबह अपनी वेबसाइट पर एक बयान जारी कर बताया कि उसने देश में अपना कामकाज रोक दिया है। एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के कार्यकारी निदेशक अविनाश कुमार ने कहा कि भारत सरकार द्वारा एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के बैंक खातों को पूरी तरह से फ्रीज कर दिया गया है, जिसकी जानकारी 10 सितंबर 2020 को हुई। इससे संगठन द्वारा किए जा रहे सभी काम पूरी तरह से ठप हो गए हैं। एमनेस्टी ने इसे सरकार की ओर बदले की कार्रवाई बताया और कहा कि सरकार उसके पीछे पड़ गई है। उसने दावा किया कि उसके द्वारा सरकार के काम-काज में पारदर्शिता के लिए आवाज उठाई गई। लिहाजा, सरकार उसे प्रताड़ित कर रही है।
क्या है एमनेस्टी इंटरनेशनल
एमनेस्टी इंटरनेशनल लंदन स्थित एक गैर-सरकारी संगठन है। यह विश्व भर में मानवधिकारों के लिए काम करता है। संगठन के घोषित उद्देश्यों में इसे मानवधिकारों पर अनुसंधान करने और उन लोगों के लिए न्याय की मांग करने वाला बताया गया है, जिनके अधिकारों का हनन किया जा रहा हो। भारत में एमनेस्टी इंटरनेशनल का पंजीकृत कार्यालय बंगलुरु में स्थित है।
विवादों से नाता
एमनेस्टी इंटरनेशनल भारत में कई बार विवादों के घेरे में रहा है। जैसा कि गृह मंत्रालय के बयान में भी संगठन पर अवैध गतिविधियों में संलिप्त रहने की बात कही गई है। एमनेस्टी इंटरनेशनल तब काफी चर्चाओं में रहा था, जब वर्ष 2019 में उसने अमरीका की विदेश मामलों की एक समिति के सामने दक्षिण एशिया ख़ास कर जम्मू-कश्मीर पर केंद्रित अपनी एक रिपोर्ट को रखा था। तब उस पर देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने का आरोप लगा था। कश्मीर में धारा-370 की समाप्ति के बाद संगठन ने वहां मानवधिकारों के हनन की बात कही। यही नहीं इस वर्ष फरवरी में CAA के विरोध में दिल्ली में हुए साम्प्रदायिक दंगों को लेकर भी एमनेस्टी की रिपोर्ट विवादों में रही।
डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में भी हुई कार्रवाई
विदेशी फंडिंग हासिल करने के मामले में इस संगठन के विरुद्ध केंद्र सरकार की कई एजेंसियां जांच कर रही हैं। वर्ष 2009 में डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में भी संगठन पर कार्रवाई हुई थी। तब भी उसने अपना कामकाज बंद कर दिया था। एमनेस्टी पर जब भी सरकार कोई कार्रवाई करती है तो वह सरकार पर आरोप लगाती है। उसका आरोप होता है कि सरकार मानवधिकारों की आवाज को कुचलना चाहती है।
